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                <title>जनगणना-2027 में स्व-गणना के लिए सरकारी कर्मचारियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कर्मचारियों को 15 मई तक स्व-गणना (Self-Enumeration) पूरी करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की पहल के बाद अब प्रशासन की बारी है। वेब पोर्टल के माध्यम से सटीक आंकड़े जुटाना इस राष्ट्रीय मिशन की प्राथमिकता है, जिससे विकास की नई राह खुलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-ensure-100-participation-of-government-employees-for-self-enumeration/article-153068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/v.-srinivass.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत राज्य के समस्त राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की स्व-गणना में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को 15 मई 2026 से पूर्व स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें और आवश्यक निर्देश जारी करें। जारी निर्देशों के अनुसार जनगणना-2027 का प्रथम चरण राजस्थान में 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।</p>
<p>इससे पहले 1 मई से 15 मई 2026 तक निर्धारित वेब पोर्टल सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल⁠ पर स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि 1 मई को महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं स्व-गणना कर प्रदेशवासियों के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में शत-प्रतिशत एवं सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:27:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पहली डिजिटल जनगणना आज से शुरू: ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुली, प्रगणक को घर पर दिखानी होगी एसई आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। वाराणसी के नागरिक 21 मई तक पोर्टल पर जाकर अपनी 'स्व-गणना' कर सकते हैं। 33 सवालों के बाद प्राप्त 11 अंकों की SE ID भविष्य के सर्वे को आसान बनाएगी। यह प्रक्रिया विकास का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/first-digital-census-starts-from-today-self-enumeration-window-opened-enumerator/article-152984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jan-ga.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना-2027 गुरुवार से शुरु हो गयी। इसके पहले चरण के तहत ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुल गई है, जो 21 मई तक चलेगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जनपदवासियों से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। नागपाल ने बताया कि केंद्र सरकार की इस पहल के तहत नागरिकों को पहली बार आधिकारिक पोर्टल (https:e.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना और अपने परिवार का विवरण दर्ज करने की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि नागरिक अपने मोबाइल नंबर और नाम के माध्यम से पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। ओटीपी सत्यापन के बाद उन्हें 33 सवालों की प्रश्नावली भरनी होगी। विवरण सफलतापूर्वक जमा होने पर एक 11 अंकों की ‘एसई आईडी’ प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है।</p>
<p>नगर आयुक्त ने कहा कि ‘स्व-गणना’ करने वाले परिवारों को 22 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे के दौरान काफी सुविधा मिलेगी। जब प्रगणक घर पहुंचेंगे, तो उन्हें केवल अपनी एसई आईडी दिखानी होगी। यदि डेटा रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी। नगर आयुक्त ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और डेटा एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान आपसे किसी भी प्रकार की बैंक जानकारी या आधार संख्या जैसे दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। प्रगणक के आने पर उनका आधिकारिक पहचान पत्र अवश्य देख लें। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विकास योजनाओं की नींव तैयार करने का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।</p>
<p>(हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग) मई-जून 2026 में चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या, साक्षरता, रोजगार और जातिगत डेटा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। नगर निगम प्रशासन ने इस डिजिटल जनगणना को सफल बनाने के लिए प्रगणकों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और आम जनता से इस ‘जन अभियान’ में जुड़ने की अपील की है। नगर आयुक्त ने कहा, “वाराणसी को एक स्मार्ट और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए सटीक डेटा अनिवार्य है। मेरा शहरवासियों से अनुरोध है कि सात से 21 मई के बीच पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करें और डिजिटल इंडिया के इस महाकुंभ में सहभागी बनें।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:09:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विधानसभा चुनाव 2026: आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग की रिकॉर्ड कार्रवाई, 1440 करोड़ की नकदी, नशीले द्रव्य, उपहार जब्त  </title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के दौरान ₹1444 करोड़ से अधिक की अवैध नकदी, शराब और ड्रग्स जब्त कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह 2021 की तुलना में 40% अधिक है। डिजिटल ईएसएमएस (ESMS) प्रणाली और कड़ी निगरानी के कारण तमिलनाडु और बंगाल में सबसे बड़ी कार्रवाई हुई, जिससे चुनाव प्रलोभन मुक्त और निष्पक्ष रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/record-action-of-election-commission-during-assembly-elections-2026-code/article-153070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ec.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने गुरुवार को बताया कि हाल के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को धारा 144 और प्रलोभन से मुक्त रखने की उसकी सतर्कता और कार्रवाई में कुल 1444 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब, नशीले द्रव्य, कीमती सामान और उपहार की स्तुएं जब्त की गयी। आयोग के अनुसार इस बार जब्त धन और अन्य संदिग्ध सामान इन राज्यों में 2021 चुनावों के दौरान की गयी जब्ती की तुलना में 40.14 प्रतिशत अधिक है। पिछले चुनावों में 1029.93 करोड़ रुपये की जब्ती की गयी थी। पश्चिम बंगाल में ज़ब्ती में सबसे ज़्यादा 68.92 प्रतिशतकी बढ़ोतरी देखी गई और तमिलनाडु में 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान की तुलना में जब्त नकद और सामान 48.40 प्रतिशत अधिक है।</p>
<p>आयोग की गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार तमिलनाडु में इस बार कुल 662.28 करोड़ रुपये की जब्ती की गयी है इनमें 105.22 करोड़ नकद, 4.94 करोड़ रुपये की 137248.53 लीटर शराब, 78.61 करोड़ रुपये नशीले द्रव्य, 165.86 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं और 307.65 रुपये के उपहार के सामान हैैं। पश्चिम बंगाल में कुल जब्ती 573.41 करोड़ रुपये की है जिसमें 31.14 करोड़ रुपये की नकदी , 151.86 करोड़ रुपये मूल्य की 5858648.98 लीटर शराब, 130.28 करोड़ रुपये के नशीले द्रव्य, 69.36 करोड़ रुपये की महंगी घातुएं और 190.77 करोड़ रुपये मूल्य के उपहार के सामान हैं।</p>
<p>असम में कुल जब्ती 117.24 करोड़ रुपये की है। इसमें 6.07 करोड़ रुपये की नकदी, 22.71 करोड़ रुपये की 8.28 लाख लीटर शराब, 70.08 करोड़ रुपये के नशीले द्रव्य, 3.68 करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और 14.7 करोड़ रुपये के उपहार के सामान हैं। केरल में कुल जब्ती 80.67 करोड़ रुपये की रही जिसमें 12.12 करोड़ रुपये नकद, 2.51 करोड़ रुपये मूल्य की 78.22 हजार लीटर शराब, 58.47 करोड़ रुपये के नशीले दव्य, 2.25 करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और 5.33 करोड़ रुपये के उपहार के सामान शामिल हैं।</p>
<p>पुड्डुचेरी में कुल 9.72 कोड़ रुपये की जब्ती में 33 लाख रुपये नकद, 39 लाख रुपये की शराब, करीब नौ करोड़ रुपये की महंगी धातुएं और दो लाख रुपये के उपहार के सामान शामिल हैं। आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों और 5 राज्यों के 7 रिक्त विधानसभा क्षेत्रों में 15 मार्च को चुनाव कराने की घोषणा करते हुए आदर्श आचार संहिता लागू कर दी थीं। आदर्श चुनाव संहिता परिणामों की घोषणा के बाद आज से हटा ली गयी है।</p>
<p>आयोग ने चुनाव को शांतिपूर्वक और निष्पक्ष तरीके से कराने के ठोस प्रबंध किये थे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और उनके सीमावर्ती प्रदेशों के मुख्य सचिवों और अन्य अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें कीं गयी थी।आयाेग ने 376 व्यय पर्यवेक्षकों, 7,470 फ्लाइंग स्क्वाड टीमों ) और 7,470 स्टैटिक सर्विलांस टीमों को भी तैनात किया गया था। आयोग ने कहा है कि ये ज़ब्तियां डिजिटल प्लेटफॉर्म - चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ईएसएमएस) - की मदद से संभव हो पाईं है जिनके माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान आसान हुआ है। गत 26 फरवरी को इस प्रणाली के चालू किये जाने के बाद से 06 मई तक ज़ब्त की गई कुल सामानों का मूल्य 1444 करोड़ रुपये से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <title>साल भर की पढ़ाई ही दिलाएगी सफलता, घबराएं नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एग्जाम टिप्स: टीचर बोले पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीक एआई का भी लिया जाता सहारा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की पदचाप के बीच विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने सफलता के मूल मंत्र साझा किए हैं।वहीं दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट में पढ़िए शिक्षकों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है; इसमें वहीं सवाल पूछे जाते हैं। जो छात्रों ने वर्षभर अपनी कक्षाओं में शिक्षकों से पढ़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई अध्ययन सामग्री के पीछे भागने के बजाय छात्र अपने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ्यक्रम और विषयवस्तु पर ही पूरा भरोसा रखें और उसी का गहन अभ्यास करें। समय प्रबंधन और छोटे लक्ष्यों से हासिल होगी जीत परीक्षा के दौरान समय का सही नियोजन ही सफलता की कुंजी है। वहीं टीचरों ने बताया कि समय-समय पर डिजिटल क्लास रूम में बच्चों को बैठकर आधुनिक तकनीकी से रूबरू करवाया जाता व पढ़ाई करवाई जाती।</p>
<p><strong>लिखकर याद करने का फॉमूर्ला </strong><br />अक्सर छात्र कठिन विषयों को देखकर तनाव में आ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कठिन विषय वस्तुओं का बार-बार दोहरान करना आवश्यक है। जो हिस्से याद करने में कठिन लगें, उन्हें छोटे-छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखकर याद करें। हाथ से लिखे नोट्स मस्तिष्क में लंबे समय तक स्थायी रहते हैं।</p>
<p><strong>संवाद और आत्मविश्वास है जरूरी </strong><br />पढ़ाई के पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और कठिन विषयों को पहले निपटाएं। पढ़ाई के बीच 5-10 मिनट का ब्रेक लें। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त पानी पीएं। परीक्षा की रात अच्छी नींद लें, क्योंकि यह एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाती है। खुद पर विश्वास रखें और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। परिणाम के बारे में चिंता न करें। यदि तनाव हावी हो रहा है,तो दोस्तों,परिवार या शिक्षकों से बात करें। वहीं पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाता हैं।<br /><strong>-सुनीता मेहरा, प्रिंसिपल महा. गांधी गवर्नमेंट स्कूल, महावीर नगर फर्स्ट कोटा </strong></p>
<p><strong> वर्षभर जो पढ़ा उसमें से ही प्रश्न पूछे जाते</strong><br />बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के दौरान ये याद रखें कि जो आपने वर्षभर पढ़ा उस में से ही प्रश्न आते। अत: जो शिक्षकों ने पढ़ाया है उन्ही विषयवस्तुओं को आप अच्छे से पढ़ें। परीक्षा में कोई भी प्रश्न अनुत्तरित ना छोड़े। परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अतिमहत्वपूर्ण है। प्रतिदिन विषयवार छोटे-छोटे उद्देश्य बनायें, उनको प्राप्त करें। जिससे आपका विषय पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।कठिन विषयवस्तुओं का दोहरान करें। जो याद नहीं हो पा रहा उसे छोटे छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखें। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।वहीं समय-समय पर आधुनिक तकनीक जिसमे एआई समेत अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता।<br /><strong>- रूपेश गुप्ता, विज्ञान विषय, महा. गांधी राज. विद्या.,मल्टीपर्पज, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong> संस्कृत व्याकरण का जुलाई से ही शुरू हो जाता है अभ्यास </strong><br />बोर्ड परीक्षा के नाम से छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हो जाता है। हम छात्रों को सत्र के प्रारंभ से ही बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन और प्रश्नोत्तर की तैयारी करवाते हैं। तीनों परख व प्री बोर्ड के प्रश्नों की संभावित बोर्ड प्रश्नों को आधार बनाकर प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। संस्कृत विषय में व्याकरण महत्वपूर्ण है।जुलाई माह से ही पिछली कक्षाओं के व्याकरण को दोहराते हुए बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक बार पाठ्यक्रम को दोहराने का प्रयास करवाया जाता हैं। जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास से पूर्ण, विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा देते हैं।<br /><strong>- नरेन्द्र कन्सूरिया, व्याख्याता संस्कृत, राउमावि, शिवपुरा</strong></p>
<p><strong>चार्ट और क्लास टेस्ट से होती है तैयारी </strong><br />कृषि विज्ञान में बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विषयों का विस्तृत अध्ययन करे। उसके बाद घर में पुन: पढ़कर नोट्स बनाने को कहा जाता हैं। साथ ही समय-समय पर बच्चों के क्लास टेस्ट लिए जाते हैं। कृषि विज्ञान में विभिन्न फसलों जैसे खाद्यान्न फसलों दलहनी फसलों तिलहनी फसलों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दी जाती हैं। ताकि विद्यार्थी आसानी से याद कर सकें। वैसे विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान विषय दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़कर पढ़ाया व समझाया जाता हैं। समय-समय पर विद्यार्थियों को चार्टस बनाकर विभिन्न जानकारी दी जाती हैं।<br /><strong>- तृप्ति पालीवाल व्याख्याता, कृषि विज्ञान रा.उ.मा.बि, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्व-चिंतन' से सुधारें अपनी गलतियां</strong><br />विज्ञान वर्ग की में अध्यापिका होने के चलते में ये ही कहूंगी की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे मार्क्स स्कोर करने के लिये आत्मविश्वास सर्वोपरि है। पूर्व बोर्ड परीक्षा के सॉल्व प्रश्नों को हल करके स्व-चिंतन करते हुए गलतियों को सुधार करने का प्रयास करें। मुख्य विषय वस्तु के शॉर्ट नोट्स का दोहरान मन मे करते रहे। तनाव रहित रहे, पर्याप्त नींद लें। रात को पढ़े गए का सुबह उठ कर दोहरान करे।<br /><strong>-नेहा गुप्ता विज्ञान अध्यापक, कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>पूर्व परीक्षा के प्रश्नों को हल करे</strong><br /> स्टूडेंट को ्रपूरे साल ही सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने की सलाह देते है। परीक्षा नजदीक आने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करे। दिमाग को शांत रखे एवं आसपास का माहौल व्यवस्थित रखने की कोशिश करे। पढ़ाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।<br />पूर्व वर्ष के परीक्षा प्रश्न पत्र हल करे जिससे परीक्षा से पहले स्वयं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।<br /><strong>- दीपिका चाँदसिन्हा,वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी,राजकीय उच्च मा.वि. सकतपुरा</strong></p>
<p><strong>एकाग्रता और स्वयं के नोट्स से मिलेगी सफलता </strong><br />परीक्षा माध्यम से ही विद्यार्थी वर्षभर की मेहनत का फल प्राप्त करना है। सतर्क रहते हुए विषयवस्तु का अध्ययन करना इस समय विद्यार्थियों को सिर्फ अपने अध्ययन पर ही ध्यान केन्द्रित करना है। नियमित निंद्रा लें, और समय का ध्यान रखें।इस समय एकान्त में एवं एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें। स्वयं के बनाये नोट्स पढ़ें। बड़े उत्तरों को याद करने के लिए मुख्य-मुख्य बिन्दु याद रखें। साथ ही परीक्षा के हॉल में समय का भी ध्यान रखें।<br /><strong>- महेश सुमन,वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:55:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट 2026 में आमंत्रित कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वैश्विक निवेशकों से मुलाकात कर राजस्थान को आईटी हब बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्टार्टअप और एआई क्षेत्र में निवेश हेतु हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajan-lal-sharma-met-the-delegation-of-companies/article-138314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर राजस्थान डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट–2026 में आमंत्रित देश-विदेश की कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजस्थान को सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का प्रमुख हब बनाने का आह्वान किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आईटी और डिजिटल सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण, आधुनिक अधोसंरचना और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि राज्य में निवेश करने वाली कंपनियों को हर संभव सहयोग, सुविधा और त्वरित स्वीकृतियां प्रदान की जाएंगी।</p>
<p>भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट–2026 राज्य में तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने का सशक्त मंच बनेगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से राज्य में आईटी, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को तलाशने का आह्वान किया।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राजस्थान में निवेश के अवसरों, सरकार की नीतियों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना करते हुए समिट के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने की बात कही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:05:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फाइलों में दबा टैलेंट, 5 माह बाद भी 30 हजार विद्यार्थियों को नहीं मिला टैबलेट</title>
                                    <description><![CDATA[तकनीकी से जोड़ने की जगह दूरी बना रही सरकार, कृषि संकाय के विद्यार्थियों के साथ दोगला व्यवहार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/talent-buried-in-files--30-000-students-still-haven-t-received-tablets-after-5-months/article-131415"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा की वर्ष 2025 की बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित हुए 5 माह से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके बावजूद राज्य व जिला स्तर पर टॉप करने वाले 30 हजार मेधावी विद्यार्थियों को अब तक टेबलेट नहीं मिल सके। प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति अटकी होने से टेबलेट वितरण योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही।  हालांकि, शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव सरकार को भेजा था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों पर पानी फिर गया। इधर, शिक्षाविदें का मानना है कि अनुमति के अभाव में विद्यार्थियों को टैबलेट के लिए काफी इंतजार करना पड़ेगा। इस बार 2400 विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी: शिक्षाविदें का तर्क है कि वित्तीय स्वीकृति अटकने का प्रमुख कारण जिलों की संख्या बढ़ने के बाद अब इस योजना में 2400 विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होगा। इसलिए यह मामला अभी अटका हुआ है। अब कुल टैबलेट की संख्या 27900 से बढ़कर 30 हजार 300 तक पहुंचेगी। शिक्षा विभाग ने टैबलेट वितरण के लिए प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए सरकार और वित्त विभाग को भेजा था। लेकिन अभी तक ना तो प्रशासनिक स्वीकृति मिली है।</p>
<p><strong>यह है टैबलेट वितरण योजना </strong><br />राज्य सरकार की ओर से बोर्ड परीक्षाओं में टॉप करने वाले विद्यार्थियों प्रोत्साहन करने के लिए टेबलेट दिए जाते हैं।  योजना के तहत हर साल 27900 विद्यार्थियों को टैबलेट बांटे जाते हैं। इसमें सरकारी स्कूल के 8 वीं, 10 वीं एवं 12 वीं कक्षा के राज्य स्तर पर टॉप रहने वाले प्रत्येक कक्षा के 6 हजार विद्यार्थियों को वितरण किया जाता है। यानी, तीनों कक्षाओं के कुल 18 हजार टैबलेट होते हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर इन तीनों कक्षाओं में टॉप रहने वाले 100 विद्यार्थियों को टैबलेट दिया जाता है। योजना बनाते समय राज्य में 33 जिले थे। ऐसे में प्रत्येक कक्षा से 3300 विद्यार्थियों को टैबलेट दिया जाता है। तीनों कक्षाओं के कुल मिलाकर 9900 टैबलेट होते हैं। अगर राज्य व जिला स्तर के टैबलेट जोड़े जाए तो यह संख्या कुल 27900 होती है।</p>
<p><strong>इस बार 33 के बजाए 41 जिलों के विद्यार्थियों को मिलेंगे टैबलेट </strong><br />सिंह ने बताया कि प्रदेश में नए 8 जिलों की संख्या बढ़ी है।  ऐसे में अब 33 से बढ़कर 41 जिले हो गए हैं। इससे राज्य स्तर पर दिए जाने वाले 18 हजार टैबलेट में तो कोई अंतर नहीं आएगा। लेकिन, जिला स्तर पर मेधावी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी। क्योंकि, 8 नए जिले बनने से प्रत्येक कक्षा में 800 विद्यार्थियों की संख्या का इजाफा होगा, जो तीनों कक्षाओं में कुल 2400 संख्या होती है। इसलिए अब यह योजना 27900 से बढ़कर 30300 टैबलेट तक पहुंच गई है। वर्तमान में करीब 28 करोड़ का बजट है, जो टैबलेट की संख्या बढ़ने से 30 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।</p>
<p><strong>कृषि संकाय के मेधावी विद्यार्थियों के साथ दोगला व्यवहार</strong><br />राज्य में 398 स्कूलों में कृषि संकाय संचालित हैं। पहले यह विज्ञान संकाय के साथ ही माना जाता था। लेकिन, पूर्व की अशोक गहलोत सरकार ने कृषि को महत्व देने की योजना को लागू करते हुए इसे अलग से कृषि संकाय 2020 में घोषित कर दिया। ताकि, प्रदेश के बच्चों में कृषि के प्रति रुचि उत्पन्न हो। प्रति वर्ष कृषि संकाय में सैकड़ों विद्यार्थी जिला व राज्य स्तर पर टॉप करते हैं, इसके बावजूद इन्हें टेबलेट नहीं दिया जाता। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />शिक्षकों से टेबलेट मिलने के बारे पूछते हैं तो जल्द ही मिलने की बात कही जाती है। सरकार की इस योजना से तीन साल तक फ्री इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। जिससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए मेटेरियल मिल सकेगा और वीडियो के माध्यम से विज्ञान के कई डायग्राम समझने में आसानी होगी।<br /><strong>-हिमांशु धाकड़, छात्र बोरखेड़ा</strong></p>
<p>पिछले 5 माह से टेबलेट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। दसवीं में 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। ऐसे में टेबलेट मिलने की उम्मीद है लेकिन टेबलेट कब मिलेंगे, इसका जवाब तो शिक्षक भी नहीं दे पा रहे। सरकार को जल्द ही इंटरनेट सुविधा के साथ टेबलेट वितरित करना चाहिए। ताकि, समय रहते उपयोग किया जा सके। <br /><strong> -यादराम गुर्जर, राजेंद्र खंडेलवाल, छात्र स्टेशन </strong></p>
<p>हमारे साथ सरकार भेदभाव कर रही है। हम कृषि संकाय में अध्ययनरत हैं। इस साल 12वीं बोर्ड देंगे। लेकिन, सरकार हमें योजना के तहत टैबलेट नहीं दे रही। जबकि, आर्ट्स-साइंस वाले विद्यार्थियों को देती है। हमें भी नि:शुल्क टैबलेट वितरण योजना में जोड़ा जाना चाहिए। <br /><strong>-उपेंद्र कुमार, रितेश सिंह, छात्र बजरंग नगर </strong></p>
<p><strong>कृषि संकाय के विद्यार्थियों को भी योजना में करें शामिल </strong><br />सत्र 2024-25 में बोर्ड परीक्षाओं में टॉपर्स रहने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 5 माह से टैबलेट मिलने का इंतजार है। सरकार को छात्रहित में जल्द ही प्रशासनिक व वित्तिय स्वीकृति देनी चाहिए। साथ ही कृषि संकाय के विद्यार्थियों को भी इस योजना में शामिल करना चाहिए।  <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा </strong></p>
<p> कृषि संकाय के विद्यार्थियों को टेबलेट न मिलने की जानकारी नहीं है। इसके बारे में अधिकारियों से बात कर उचित समाधान निकालेंगे। वहीं, पिछले सत्र के टैबलेट वितरण में कोई बजट का ईश्यू होगा तो समाधान करवाएंगे। <br /><strong>-सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री </strong></p>
<p>सरकार की ओर से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को टैबलेट दिए जाते हैं। इसकी तैयारियां जारी है। बीकानेर निदेशालय स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर्स की मेरिट सूची तय होती है। इसके बाद सरकार वितरण की तिथि घोषित होती है। वहीं, इस बार कोटा से कितने बच्चों को टैबलेट मिलेंगे, यह निदेशालय से कटआॅफ जारी होने के बाद ही पता लग सकेगा। <br /><strong>-रामचरण मीणा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 15:45:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>डेटा की दलाली और ऋण की रेलमपेल</title>
                                    <description><![CDATA[कभी दोपहर की झपकी के बीच, कभी सभा के समय, कभी मंदिर के बाहर, तो कभी वाहन चलाते समय यह स्वर अब हमारे जीवन की अनिवार्य पृष्ठभूमि बन चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/data-brokerage-and-loan-railroad/article-121290"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(9)5.png" alt=""></a><br /><p>नमस्ते महोदय! क्या आप व्यक्तिगत ऋण लेना चाहेंगे। कभी दोपहर की झपकी के बीच, कभी सभा के समय, कभी मंदिर के बाहर, तो कभी वाहन चलाते समय यह स्वर अब हमारे जीवन की अनिवार्य पृष्ठभूमि बन चुका है। यह मात्र एक स्वर नहीं, बल्कि एक कृत्रिम उत्पीड़न है,जो यह उद्घोष करता है कि हमारे नाम, दूरभाष अंक और आवश्यकताएं अब बाजार की संपत्ति बन चुकी हैं। जब सरकारें डिजिटल भारत के नारे लगाती हैं, उसी समय निजी बैंक हमारे जीवन की शांति को किस्तों में बेचने आ जाते हैं। हमारा दूरभाष अंक इन्हें कौन देता है, यह प्रश्न आज हर जागरूक नागरिक के मन में उठता है। निजी बैंक या ऋण देने वाली एजेंसियों को हमारा मोबाइल नंबर, नाम और अन्य निजी जानकारी कहां से प्राप्त होती है। उत्तर सीधा है,यह जानकारी हम स्वयं ही, अनजाने में, बाजार को सौंप देते हैं। जब हम किसी मोबाइल अनुप्रयोग को डाउनलोड करते समय बिना पढ़े मैं सहमत हूं,पर चिह्न लगाते हैं, किसी ऑनलाइन खरीदारी की वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं,तब हम अपनी निजता को बाजार के हवाले कर देते हैं।</p>
<p><strong>डेटा दलाली है :</strong></p>
<p>ऐसे अनेक मोबाइल अनुप्रयोग होते हैं, जो हमारे संपर्क,संदेशों, स्थान और यहां तक कि हमारे फोटो तक की पहुंच मांगते हैं। और हम, सुविधा के नाम पर, इन्हें सहमति दे देते हैं। बाद में यही जानकारी अलग-अलग बिचौलियों द्वारा निजी बैंकों और विक्रय अभिकर्ताओं को बेच दी जाती है। यह एक प्रकार की डेटा दलाली है,जिसमें व्यक्ति की निजता को मूल्यवान वस्तु मानकर नीलाम किया जाता है। सरकारी बैंक क्यों नहीं करते ऐसा, जहां निजी बैंक दिन-रात मोबाइल पर ऋण प्रस्ताव भेजते हैं, वहीं सरकारी बैंक अपेक्षाकृत शांत और पारंपरिक तरीके से कार्य करते हैं। सरकारी बैंकों में आज भी ऋण प्राप्त करने के लिए भारी कागजी कार्यवाही, दस्तावेजों की सत्यता, जमानतदार और कई प्रकार की प्रमाणिकताएं मांगी जाती हैं। ये बैंक सेवा को प्राथमिकता देते हैं, न कि बिक्री को। उनके पास निजी बैंकों की तरह भारी मार्केटिंग बजट नहीं होता, और न ही एजेंटों को कमिशन देने की उतनी होड़ होती है। इसलिए वे बिना मांगे किसी को कॉल नहीं करते।</p>
<p><strong>लाभदायक अवसर :</strong></p>
<p>यही कारण है कि आपको कभी किसी सरकारी बैंक से तत्काल ऋण की सुविधा का फोन नहीं आता, जबकि निजी बैंक आपको ग्राहक से अधिक लाभदायक अवसर के रूप में देखते हैं। जो लोग वास्तव में आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, जिन्हें ऋण की आवश्यकता सबसे अधिक है, उन्हें न तो कॉल आता है, न कोई बैंक प्रतिनिधि उनके द्वार पहुंचता है। ऐसे लोगों के पास क्रेडिट स्कोर नहीं होता, उनकी आय अनियमित होती है, और उनके पास न संपत्ति होती है, न बैंकिंग इतिहास। इसलिए बैंक उन्हें जोखिम मानते हैं, संभावना नहीं। वहीं, जिन लोगों ने पहले से किसी ऋण का भुगतान समय पर किया है, जो व्यक्ति ऑनलाइन खरीदारी करते हैं या जिनकी आय अधिक है, वही निजी बैंकों के लिए लक्ष्य होते हैं।</p>
<p><strong>अनचाही कॉल्स से परेशान :</strong></p>
<p>यह प्रश्न अब केवल विचार का विषय नहीं रहा,यह वास्तविक अनुभव बन चुका है। अधिकांश लोग दिन में चार-पांच बार अनचाही कॉल्स से परेशान रहते हैं। इन कॉल्स को ठुकराने पर भी चैन नहीं मिलता। एक नंबर बंद किया तो दूसरा फोन आने लगता है। यह एक प्रकार की वित्तीय मानसिक हिंसा है,जिसमें व्यक्ति को यह अहसास दिलाया जाता है कि यदि उसने ऋण नहीं लिया, तो वह कोई अवसर खो रहा है, या आर्थिक दृष्टि से पिछड़ रहा है। निजता की यह चोरी केवल बैंकों द्वारा नहीं होती। इसके पीछे एक बड़ा और संगठित तंत्र है, जिसमें मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां, विभिन्न मोबाइल अनुप्रयोग, नौकरी खोजने वाले पोर्टल, बीमा विक्रेता, ई-कॉमर्स कंपनियां और यहां तक कि कुछ सरकारी वेबसाइटें भी शामिल हो सकती हैं।</p>
<p><strong>डेटा संरक्षण विधेयक :</strong></p>
<p>यह संस्थाएं विभिन्न माध्यमों से हमारे निजी विवरण एकत्र करती हैं और फिर इन्हें कई बार खुले बाजार में विक्रय कर देती हैं। कई बार बैंक प्रतिनिधि आपको कॉल करके आपके पिताजी का नाम, आपकी जन्मतिथि, नौकरी, यहां तक कि आपकी मासिक आय तक बता देते हैं। इससे स्पष्ट है कि हमारा निजी जीवन अब सार्वजनिक मंच पर बिकने वाली वस्तु बन चुका है। सरकार ने वर्ष 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पारित किया था। इसके अनुसार, किसी भी संस्था को आपकी अनुमति के बिना आपका व्यक्तिगत डेटा उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। किन्तु व्यवहार में यह विधेयक आज भी कागजों तक ही सीमित है। ना तो कॉल्स रुके हैं, न ही डेटा की दलाली थमी है। जब तक इन नियमों का पालन कराने के लिए कठोर दंड और स्पष्ट नियंत्रण नहीं होंगे, तब तक नागरिकों की निजता मात्र एक हास्यास्पद अवधारणा बनी रहेगी।</p>
<p><strong>-प्रियंका सौरभ</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 12:52:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई लिट्रेसी को स्कूली कोर्स में शामिल करना जरूरी, लेकिन मानवीय मूल्य बने रहें </title>
                                    <description><![CDATA[रचनात्मकता बनी रहे, एआई का एथीकल यूज हो, नेशनल एआई लिट्रेसी स्ट्रेटेजी तैयार होनी चाहिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-is-necessary-to-include-ai-literacy-in-school-curriculum--but-human-values-should-remain/article-118062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति की ओर से प्रतिमाह आयोजित परिचर्चा की श्रंखला के तहत शुक्रवार को जब चीन छोटी क्लास से ही बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेस(एआई) की शिक्षा दे रहा है वहां कोटा जिले में डिजीटल लिट्रेसी की क्या स्थिति है इस मुद्दे पर वक्ताओं ने विचार विमर्श किया। परिचर्चा का विषय था ( वाट इज द पॉ्जिशन आॅफ डिजिटल लिट्रेसी इन कोटा व्हेन चाइना हेज मूव टू एआई लिट्रेसी) परिचर्चा में  शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक, कोटा यूनिवर्सिटी की डीन, रोबोटिक इंजीनियर, इनोवेटर,  एआई टीचर, शिक्षाविद, प्राइवेट व सरकारी स्कूल के संचालक ,  प्रिंसिपल, कम्प्यूटर एक्सपर्ट,   पैरेन्ट्स और बच्चोंं ने भाग लिया। परिचर्चा में सभी वक्ताओं ने स्कूलों में छोटी क्लासेज से ही एआई को सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाने पर जोर दिया लेकिन इसके साथ उनहोंने ऐसा केरिकुलम तैयार करने की भी जरूरत बताई जो मानवीय मूल्यों को बनाए रखे। वक्ताओं ने कहा कि सीबीएसई ने बड़ी क्लास में इसे एैच्छिक रूप से शुरू कर दिया है।  इसे कम्पलसरी करना चाहिए। साथ ही पैरेन्ट्स को भी एजुकेट करने की आवश्यकता बताई। वक्ताओं का कहना था कि एआई की सबसे बड़ी थ्रेट यह है कि यह लोगों को कुन्द कर सकती है। उनकी मौलिकता और रचनात्मकता  को खत्म कर सकती है। ऐसी स्थिति में हमें स्पेशल कोर्स डिजाइन कर इसे लागू करना चाहिए। सरकारी स्कूलों में लैब हब्स और टिंकरिंग लैब्स की पर्याप्त सुविधा भी विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए। </p>
<p><strong>शिक्षा में डिजिटल साक्षरता की उपयोगिता बढ़ रही</strong><br />वर्तमान शिक्षा नीति में डिजिटल साक्षरता पर पूरा फोकस किया जा रहा है। स्मार्ट क्लॉस में बच्चों को डिजिटल शिक्षा के साथ एआई के उपयोग के बारे में भी पढाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में टेलेंट की कमी नहीं है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा में लगातार नवाचार किए जा रहे है। बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता भी दी जा रही है। एआई का प्रयोग करना भी बताया जा रहा है। सरकारी स्कूल निजी स्कूलों के मुकाबले अब बेहतर प्रदर्शन कर रहे है। निजी स्कूलों में बच्चों रटाया जाता है। लेकिन सरकारी स्कूलों बच्चों स्मार्ट बनाया जाता है। उन्हें मौलिकता के साथ डिजिटल एजुकेशन के प्रयोग भी बताए जा रहे है। अभी समिति संसाधान है लेकिन सरकार की ओर से डिजिटिल शिक्षा को लेकर काफी बदलाव किए है। 80 प्रतिशत स्कूलों में डिजिटल साक्षरता का उपयोग हो रहा है। इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं मिलने वाले क्षेत्रों में कुछ परेशानी है बाकी स्कूलों में आधुनिक कम्प्यूटर लेब स्मार्ट क्लॉस में बच्चों सारी समस्याओं का समाधान हो रहा है।  हालांकि कुछ विषय के अध्यापकों की कमी है लेकिन सरकार उनके रिक्त पदों को भी भर रही है। सरकारी स्कूल के बूनियादी ढांचे में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आया है। <br /><strong>-तेजकंवर संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>डिजिटल साक्षरता से युवा सोच का दायरा बढ रहा</strong><br />जहां एक ओर डिजिटल साक्षरता युवाओं की सोच के दायरे को बढ़ा रही है और हर काम आसान कर रहा है। वहीं दूसरी ओर बच्चे इस पर आश्रित भी हो रहे है। वो छोटी छोटी चीजों के लिए भी एआई का सहारा ले रहे जिससे उनके अंदर नवाचार करने की प्रवृति खत्म हो रही है। डिजिटल साक्षरता जरूरी है लेकिन इस पर निर्भर नहीं होना है। इसका उपयोग अपनी सोच के दायरे को व्यापक करने तक ही सीमित रखना चाहिए। एआई के प्रयोग के साथ हमें अपने नैतिक मूल्यों के संरक्षण की भी आवश्यकता है। हर स्कूल में एआई ट्रेंड टीचर होना चाहिए जो एआई के प्रयोग को ठीक से समझा सकें। बच्चों को डिजिटल साक्षरता के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है। हमें यह देखना होगा बच्चों की किस विषय में रूचि है। कोटा के कई स्कूलों में 9 से 12 में एआई शिक्षा शुरू हो चुकी है। डिजिटल साक्षरता से पहले हमें अभिभावकों की सोच में बदलाव लाना होगा। अभिभावकों के साथ लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर बच्चों की क्या जरूरत है उसी के अनुसार उसे तैयार करना चाहिए। इस क्षेत्र में अभी काफी काम करने की आवश्यकता है। <br /><strong>-जसपिंदर साहनी,  प्रिंसीपल एमबी इंटरनेशनल स्कूल</strong></p>
<p><strong> डीएमआई टेस्ट से जान सकेंगे हैं बच्चे की रूचि</strong><br />कोटा में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता है। बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या केरियर चुनने की आती है। ऐसे में डीएमआईडमेर्टोग्राफिक मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (डीएमआईटी) एक ऐसा टेस्ट है जो फिंगरप्रिंट पैटर्न का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की जन्मजात प्रतिभा, व्यक्तित्व और बुद्धि के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित मूल्यांकन है जो व्यक्ति की अद्वितीय क्षमताओं और संभावित सीखने की शैली को समझने में मदद करता है।  डीएमआईटी का मतलब है डमेर्टोग्लिफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट। डमेर्टोग्लिफिक्स उंगलियों और हथेलियों पर पाए जाने वाले अनूठे पैटर्न का अध्ययन है। यह टेस्ट फिंगरप्रिंट के पैटर्न का विश्लेषण करके मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों से उनके संबंध को समझने का प्रयास करता है, जिससे व्यक्ति की जन्मजात क्षमताओं और सीखने की शैली के बारे में जानकारी मिलती है। टेस्ट रिपोर्ट व्यक्ति की ताकत, कमजोरियों, सीखने की शैली और संभावित करियर विकल्पों के बारे में जानकारी मिल जाती है।  यह टेस्ट छात्रों को उनकी ताकत और कमजोरियों के आधार पर सही शैक्षणिक मार्ग चुनने में मदद करता है।<br /><strong>-जितेंद्र वर्मा, एआई शिक्षक आई स्टार्ट नेस्ट</strong></p>
<p><strong>कोरोना काल में अपनाई एआई तकनीक</strong><br />किसान परिवार से होने के कारण किसानों की समस्याओं को नजदीकी से देखा। किसानों को  खेती के हर काम के लिए अलग मशीन का उपयोग करना पड़ता है। कक्षा 10 वीं तक  पेंटिग का शौक रहा। उसी समय कोरोना काल आया। जिसमें डिजिटल तकनीक का अधिक उपयोग हुआ। ऐसे में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए स्टार्टअप किया और ऐसी तकनीक इजात की। जिससे एक ही मशीने  किसानों की हर जरूरत को पूरा कर रही है। उनके इस काम को प्रधानमंत्री ने भी सराहा तो आगे काम करने का अवसर मिला। <br /><strong>-आर्यन सिंह, फाउंडर मेरा साथी प्रा. लि.  </strong></p>
<p><strong>प्रतिस्पर्धा के लिए तकनीक का ज्ञान जरूरी</strong><br />दुनिया के साथ चलना है और विश्व के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करनी है तो तकनीक का ज्ञान जरूरी है। लेकिन उसके साथ ही भारतीय संस्कृति को भी जीवित रखना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों मेंं बच्चों में छिपा टेलेंट अधिक है। उसे सही दिशा में ले जाने की जरूरत है। एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना अच्छा है लेकिन उसके दुरुपयोग को भी रोकने की जरूरत है। वहीं बच्चों को उनकी रूचि के हिसाब से आगे बढ़ाना होगा तभी वे अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।  <br /><strong>-अशोक कुमार गुप्ता, फ्रोफेसर रिटा. प्रिंसिपल जेडीबी</strong></p>
<p><strong>एआई का सही दिशा में हो उपयोग</strong><br />एआई पर कोटा में हर स्तर पर काम हो रहा है। यूनिवर्सिटी में भी अच्छा काम हो रहा है। डिजिटल लिट्रेसी बढ़ रही है। वर्तमान समय में डिजिटल व एआई तकनीक का ज्ञान जरूरी है। लेकिन उसके साथ ही संस्कृति का ह्रास न हो इसका भी ध्यान रखना होगा। तकनीक का उपयोग करने के साथ ही बच्चों की सोच में वैज्ञानिक दृुष्टिकोण विकसित करने की जरूरत है। एआई का जितना लाभ है उससे अधिक नुकसान भी है। एआई को सोशल मीडिया अधिक प्रभावित कर रहा है। ऐसे में बच्चों के साथ ही परिजनों में भी जागरूकता की जरूरत है। इसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। <br /><strong>- रीना दाधीच, प्रोफेसर कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>बच्चों में टेलेंट, सही दिशा देने की जरूरत</strong><br />आज के बच्चों में टेलेंट काफी है। जरूरत उन्हें सही दिशा देने की है। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे डिजिटल तकनीक का अधिक उपयोग कर रहे हैंं वह भी सकारात्मक रूप में। स्किल के साथ डिजिटल तकनीक का उपयोग पिछले 5 साल में अधिक बढ़ा है। इस दिशा में सहरिया बच्चे भी काफी आगे हैं। जरूरत है कि एआई के नकारात्मक पहलुओं को रोका जाए। जिससे उसके दुष्परिणाम नहीं हो। <br /><strong>-विभा शर्मा, डायरेक्टरसीएसटी कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट </strong></p>
<p><strong>एआई से रीयल टेलेट हो रहा खत्म</strong><br />वर्तमान में हर क्षेत्र में एआई का अधिक उपयोग होने लगा है। संगीत में भी इसका उपयोग तेजी से होने  लगा है। एआई के आने से रीयल टेलेंट खत्म हो रहा है।  समय के साथ चलना है तो डिजिटल तकनीक का उपयोग भी जरूरी है। लेकिन उसके नकारात्मक पहलुओं को रोकने की भी जरूरत है। क्रियटिविटी बनी रहे। हालांकि आज की यह जरूरत है लेकिन इसके नकारात्मक पहलुओं पर भी हमें सोचना होगा।  <br /><strong>-शिल्पी सक्सेना, डायरेक्टर संगीत वाटिका</strong></p>
<p><strong> शिक्षा में अपग्रेट हमेशा होना चाहिए</strong><br /> डिजिटल साक्षरता और शिक्षा में अंतर समझना होगा। वर्तमान में शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता वर्तमान की जरुरत है लेकिन इसका उपयोग किस प्रकार से किया जा रहा है विचारणीय प्रश्न है। स्कूलों में मौलिक शिक्षा के साथ डिजिटल शिक्षा जरूरी है। चायना में प्राइमेरी स्तर पर ही लोगों को व्यवसायी शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है। वहां एआई कक्षा छह से शुरू कर रहे हमारे यहां डिजिटल और एआई को शिक्षा में समावेश किया है लेकिन अभी उसका व्यापक उपयोग नहीं हो रहा है।  शिक्षा में एआई  व डिजिटल शिक्षा को सोच समझकर लागू करने की आश्यकता है। शिक्षा में अपग्रेट हमेशा होना चाहिए लेकिन उसका उपयोग कैसा होगा इस पर भी ध्यान देने की आवश्कता है। हमें विदेशी संस्कृति के पीछे दौडना रोकना चाहिए लेकिन समय के साथ चलना भी आज की जरूरत है। <br /><strong>-देव शर्मा, चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर क्रेडीजी कोटा</strong></p>
<p><strong>आधी अधूरी लर्निंग से खत्म हो रही क्रियटिविटी</strong><br />वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा यूथ के लिए जरूरी हो गई है। कारण की भारत डिजिटल क्षेत्र में काफी आगे ग्रोथ कर रहा है। स्कूल कॉलेज में युवाओं को थ्यौरी तो पढाई जाती है। लेकिन प्रेक्टिकल ज्ञान नहीं दिया जाता है। टेक्नोलॉजी में कोडिग नहीं सिखाई जा रही है। युवा एआई से मदद लेकन अपने प्रोजेक्ट पूरा कर रहा है लेकिन वो प्रोजेक्ट कैसे तैयार हुआ उसको बेसिक नॉलेज नहीं मिल रहा है। डिजिटल साक्षरता से युवाओं की क्रिएटिविटी खत्म हो रही है। एआई युवाओं के सीधा मस्तिष्क पर अटैक कर रहा वो स्वयं कोई इनोवेशन नहीं करना चाहता सारा ज्ञान वो एआई से ही लेकर अपने प्रोजेक्ट तैयार कर रहा जो ठीक नहीं प्रेक्टिकल की जगह युवा आएई पर अधीन होता जा रहा है। <br /><strong>-साक्षी गुप्ता, स्टूडेंट</strong></p>
<p><strong> डिग्री की नहीं स्किल बेस शिक्षा की जरूरत</strong><br />एआई तकनीक का उपयोग तो बहुत अधिक होने लगा है। लेकिन उसके बारे में सही जानकारी का भी होना आवश्यक है। इसके लिए स्कूल से ही बच्चों को इस बारे में सही दिशा में जानकारी देनी की आवश्कता है। जिससे शिक्षा पूरी करने तक बच्चे में विशेषज्ञता आएगी। वर्तमान में डिग्री की नहीं स्किल बेस शिक्षा की जरूरत है। आगे बढ़ने के लिए डिजिटल व तकनीकी शिक्षा बहुत जरूरी है। वर्तमान में जिस तरह से एआई का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे में 2030 तक इससे संबंधित लाखों नौकरियां आने वाली है। <br /><strong>-अरविंद गुप्ता, शिक्षाविद </strong></p>
<p><strong>बच्चे तकनीक का उपयोग करें, पंगु नहीं बनाएं</strong><br />भारत विकासशील और चीन विकसित देश है। भारत में टेलेंट की कमी नहीं है। दुनिया में सबसे अधिक टेलेंट भारत का ही काम कर रहा है। एआई जो काम अब कर रहा है। वह काम भारत में शंकराचार्य बहुत पहले से कर रहे हैं। बच्चों को एआई और डिजिटल तकनीक का उपयोग करना आना चाहिए लेकिन उसके कारण बच्चों को पंगु नहीं बनाएं। हर माता पिता को चाहिए कि बच्चों को तकनीक का सही उपयोग करना बताएं। मानवीय मूल्यि बने रहने चाहिए। <br /><strong>-नीलम विजय, सोशल एक्टिविस्ट</strong></p>
<p><strong>एआई लोगों की सोच को अपग्रेड करने का एक टूल</strong><br />कोटा में अभी डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में काम तो हो रहा है लेकिन जिस प्रकार से विकसित देशों में खासतौर से चाइना में इसका उपयोग हो रहा है उस स्तर का अभी भारत में नहीं हो रहा है। लोगों को लगता है एआई आने से लोगों की नौकरियां खत्म होगी यह गलत धारणा है। एआई के प्रयोग से जॉब खत्म नहीं होगा उसका नैचर बदलेगा लोगों को उसके अनुरूप ही अपने को अपग्रेट करना होगा। एआई लोगों को सोच को अपग्रेट करने का एक टूल है। अपनी सोच को व्यापक बनाने के साधन के रूप में देखना चाहिए। वर्तमान शिक्षा नीति में डिजिटल साक्षरता और एआई अपना स्थान बनाने लगी है। लेकिन इसका उपयोग सोच समझकर करने की आवश्यकता है। हर बच्चे में योग्यता की कोई कमी नहीं है उसे सही दिशा देने की आवश्यकता है। वर्तमान शिक्षा थ्यौरी पर ज्यादा जोर दिया जाता है। प्रेक्टिकल पर कम । वर्तमान में डिजिटल साक्षरता लोगों के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। कोटा बेगलूरू से दस साल पीछे चल रहा है। लोगों को नवाचार को अपनाना होगा। कोटा के यूथ को ब्रेन अन्य देशों में काम आ रहा है। <br /><strong>-ओमप्रकाश सोनी, रोबोटिक इंजीनियर एटीएल इंचार्ज</strong></p>
<p><strong>एआई के प्रयोग से शिक्षा अब सार्वभौमिक हो गई है</strong><br />भारत में नई राष्टÑीय शिक्षा नीति 2020 में आर्टिफिशियल इंटीलीजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते ही इसको एजुकेशन सिस्टम में शामिल करने की सिफारिश की गई है। शिक्षा में एआई की सार्वभौमिकता पहुंच एवं वैश्विक कक्षाएं सर्वसुलभ होने लिए स्कूली शिक्षा में एआई व टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सीबीएसई ने एआई तथ इंटरनेट आॅफ थिंग्स को कक्षा 6 से 10 तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।  चीन की बात करें तो वहां नेक्स्ट जनरेशन एआई डवलमेंट प्लान 2017 को अधिक गहनता से शिक्षा में सम्मलित किया गया है। हमारे देश राष्टÑीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य स्थानीय भाषाओं को बढावा देते हुए डिजिटल शिक्षा को बढावा देना है। तथा हॉलिस्टिक एजुकेशन की ओर लेकर जाना है। वहीं चीन का लक्ष्य 2023 तक एआई में वैश्विक नैतृत्व पाना है।  देश में सीबीएसई ने  कक्षा 9 से 11 तक में एआई को इलेक्टिव पेपर के रूप में रक्षा है वहीं चीन में इसे प्राथमिक कक्षाओं से ही पढ़ाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अब भविष्य का वादा नहीं रह गया है। बल्कि आज शिक्षा में सक्रिय रूप से आगे बढाया जा रहा है। इसके द्वारा ड्रीम बॉक्स, स्मार्ट स्पैरो जैसे प्लेटफार्म द्वारा उन्नत वैयक्तिक शिक्षण हो रहो रहा है। ग्रेड स्कोप जैसे उपकरणों में  एएआई द्वारा ग्रेडिंग शेड्यूलिंग, रिपोर्ट निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हंै।<br /><strong>-डॉ. मीनू माहेश्वरी, कोटा विश्व विद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 11:28:23 +0530</pubDate>
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                <title>अनेकता में एकता के संदेश के साथ डिजिटल होगा प्रयागराज महाकुंभ, ना बटे समाज का देश को देगा संदेश : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बार प्रयागराज महाकुंभ न केवल विशाल और भव्य होगा बल्कि अनेकता में एकता का संदेश देते हुए पूरे कुंभ क्षेत्र में पहली बार डिजिटल व्यवस्था का प्रदर्शन होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prayagraj-mahakumbh-will-be-digital-with-the-message-of-unity/article-99007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/modi-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बार प्रयागराज महाकुंभ न केवल विशाल और भव्य होगा बल्कि अनेकता में एकता का संदेश देते हुए पूरे कुंभ क्षेत्र में पहली बार डिजिटल व्यवस्था का प्रदर्शन होगा। मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 117वीं कड़ी में रविवार को देश को संबोधित करते हुए कहा कि अगले माह प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा है जो देश की विविधता और भव्यता को प्रदर्शित कर'महाकुंभ का संदेश एक हो पूरा देश और गंगा की अविरल धारा न बँटे समाज हमारा का पूरा देश को संदेश देगा।</p>
<p>उन्होंने कहा''अगले महीने 13 तारीख से प्रयागराज में महाकुंभ होने जा रहा है। इस समय वहां संगम तट पर जबरदस्त तैयारियाँ चल रही हैं। मुझे याद है अभी कुछ दिन पहले जब मैं प्रयागराज गया था तो हेलिकॉप्टर से पूरा कुंभ क्षेत्र देखकर दिल प्रसन्न हो गया था। इतना विशाल, इतना सुंदर, इतनी भव्यता। महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में ही नहीं है, कुंभ की विशेषता इसकी विविधता में भी है। इस आयोजन में करोड़ों लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। लाखों संत, हजारों परम्पराएँ, सैकड़ों संप्रदाय, अनेकों अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है। कहीं भेदभाव नहीं दिखता, कोई बड़ा नहीं होता, कोई छोटा नहीं होता। अनेकता में एकता का ऐसा दृश्य विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए हमारा कुंभ एकता का महाकुंभ भी होता है। इस बार का महाकुंभ भी एकता के महाकुंभ के मंत्र को सशक्त करेगा। मैं आप सबसे कहूँगा जब हम कुंभ में शामिल हों तो एकता के इस संकल्प को अपने साथ लेकर वापस आयें। हम समाज में विभाजन और विद्वेष के भाव को नष्ट करने का संकल्प भी लें। कम शब्दों में कहूँ-महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश। और अगर दूसरे तरीके से कहना है तो मैं कहूँगा...गंगा की अविरल धारा, न बँटे समाज हमारा।'</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा- इस बार प्रयागराज में देश और दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे। डिजिटल नेविगेशन की मदद से आपको अलग-अलग घाट, मंदिर, साधुओं के अखाड़ों तक पहुँचने का रास्ता मिलेगा। यही नेविगेशन सिस्टम आपको पार्किंग तक पहुँचने में भी मदद करेगा। पहली बार कुंभ आयोजन में ''एआई चैटबोट' का प्रयोग होगा। इसके माध्यम से 11 भारतीय भाषाओं में कुंभ से जुड़ी हर तरह की जानकारी हासिल की जा सकेगी। इस चैटबोट से कोई भी टेक्स्ट टाइप करके या बोलकर किसी भी तरह की मदद मांग सकता है।''</p>
<p>उन्होंने कहा- ''पूरा मेला क्षेत्र को आई पावरड कैमरों से कवर किया जा रहा है। कुंभ में अगर कोई अपने परिचित से बिछड़ जाएगा तो इन कैमरों से उन्हें खोजने में भी मदद मिलेगी। श्रद्धालुओं को डिजिटल आधारित खोया पाया केंद्र की सुविधा भी मिलेगी। श्रद्धालुओं को मोबाईल पर सरकार से मान्यता प्राप्त टूर पैकेज, ठहरने की जगह और होमस्टे के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। आप भी महाकुंभ में जाएँ तो इन सुविधाओं का लाभ उठाएँ और हाँ एकता के महाकुंभ के साथ अपनी सेल्फी जरूर उपलोड करिएगा।''</p>
<p><br /><strong>देश में बदलाव का प्रतीक है बस्तर ओलंपिक-मोदी</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जिस नक्सली क्षेत्र में डर का माहौल रहता था वहां अब''बस्तर ओलंपिक' जैसे खेल कुंभ का आयोजन हो रहा है जो खेल प्रतिभाओं को सामने लाकर देश मे बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम''मन की बात' की 117वीं कड़ी में रविवार को कहा कि देश में ऐसे अनोखे खेल कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं जो हमारे देश में बदलाव और युवा साथियों के जोश एवं जज्बे के प्रतीक हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा- ''हमारे बस्तर में एक अनूठा ओलंपिक शुरू हुआ है। जी हाँ, पहली बार हुए बस्तर ओलंपिक से बस्तर में एक नई क्रांति जन्म ले रही है। मेरे लिए ये बहुत ही खुशी की बात है कि बस्तर ओलंपिक का सपना साकार हुआ है। आपको भी ये जानकार अच्छा लगेगा कि यह उस क्षेत्र में हो रहा है जो कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है। बस्तर ओलंपिक का शुभंकर है -''वन भैंसा' और''पहाड़ी मैना''। इसमें बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखती है। इस बस्तर खेल महाकुंभ का मूल मंत्र है-''करसाय ता बस्तर बरसाए ता बस्तर' यानि''खेलेगा बस्तर-जीतेगा बस्तर''। पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में सात जिलों के एक लाख 65 हजार खिलाडिय़ों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं- हमारे युवाओं के संकल्प की गौरव-गाथा है। एथलेटिक, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिङ्क्षफ्टग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और वालीबाल -हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।''</p>
<p>मोदी ने प्रतिभाओं की कहानी सुनाई और कहा कारी कश्यप जी की कहानी मुझे बहुत प्रेरित करती है। एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। वे कहती हैं-बस्तर ओलंपिक ने हमें सिर्फ खेल का मैदान ही नहीं, जीवन में आगे बढऩे का अवसर दिया है। सुकमा की पायल कवासी जी की बात भी कम प्रेरणादायक नहीं है। भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं-अनुशासन और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सुकमा के दोरनापाल के पुनेम सन्ना जी की कहानी तो नए भारत की प्रेरक कथा है। एक समय नक्सली प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं। उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को''बस्तर यूथ आईकॉन' चुना गया है। उनका मानना है-बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा''बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है। यह एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है। जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने क्षेत्र में ऐसे खेल आयोजनों को प्रोत्साहित करें। खेलेगा भारत-जीतेगा भारत के साथ अपने क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की कहानियां साझा करें। स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढऩे का अवसर दें। याद रखिए, खेल से न केवल शारीरिक विकास होता है बल्कि ये खिलाड़ी की स्प्रिट से समाज को जोडऩे का भी एक सशक्त माध्यम है। तो खूब खेलिए-खूब खिलिए।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2024 13:29:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>विज्ञापनदाताओं ने टीवी छोड़ डिजिटल की ओर किया रूख</title>
                                    <description><![CDATA[टीवी एड रेवेन्यू के बड़े हिस्से पर डिजिटल ने कब्जा कर लिया है। 125 से अधिक विज्ञापनदाताओं ने टीवी की अनेदखी कर, डिजिटल एडवरटाइजिंग के लिए वायकॉम-18 से समझौते किए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/advertisers-left-tv-and-turned-to-digital/article-42246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/ads.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के सीजन में इस बार नये ट्रेंड के तहत विज्ञापनदाताओं ने टेलीविजन (टीवी) को छोड़ डिजिटल की ओर रुख कर रहे हैं। आज जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार बार्क इंडिया की टीवी रेटिंग में जहां पिछले वर्ष पहले मैच में करीब 52 एडवरटाइजर्स ने टीवी पर विज्ञापन दिये थे। वहीं इस साल केवल 31 विज्ञापनदाता ही नजर आए। यानी 40 फीसदी विज्ञापनदाताओं ने टीवी ब्रॉडकास्टिंग से मुंह मोड़ लिया है। </p>
<p>पिछले आईपीएल सीजन में टीवी पर विज्ञापन देने वालों की संख्या करीब 100 थी। इस बार टीवी पर 100 एडवरटाइजर्स का आंकड़ा छू पाएगा यह बेहद मुश्किल लग रहा है। टीवी पर प्रायोजकों की संख्या में भी कमी आई है, पिछले वर्ष 16 प्रायोजक थे जो इस बार घटकर 12 रह गए। इनमें से एक प्रायोजक तीसरे मैच से जुड़ा है। रिलायंस से जुड़ी कंपनियां विज्ञापनदाताओं की लिस्ट से पूरी तरह गायब हैं। वजह है रिलायंस समूह की कंपनी वायकॉम-18, जिसे आईपीएल के डिजिटल ब्राडकॉङ्क्षस्टग राइट््स मिले हैं। टीवी का साथ छोडऩे वाले अन्य बड़े विज्ञापनदाताओं में बायजूस, क्रेड, मुथूट, नेटमेड्स, स्विगी, फ्लिपकार्ट, फोन पे, मीशो, सैमसंग, वनप्लस, वेदांतु, स्पॉटिफाई और हैवेल्स शामिल हैं। स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क भारत में टीवी पर आईपीएल के मैचों का सीधा प्रसारण कर रहा है। </p>
<p>टीवी एड रेवेन्यू के बड़े हिस्से पर डिजिटल ने कब्जा कर लिया है। 125 से अधिक विज्ञापनदाताओं ने टीवी की अनेदखी कर, डिजिटल एडवरटाइजिंग के लिए वायकॉम-18 से समझौते किए हैं। उनमें में अमेजन, फोनपे, सैमसंग, जियोमार्ट, यूबी, टीवीएस, कैस्ट्रोल, ईटी मनी, प्यूमा, आजियो जैसी कंपनियां शामिल हैं। टीवी पर एडवरटाइजर कम हो रही हैं, जाहिर है इसका सीधा असर टीवी ब्रॉडकास्टर के रेवेन्यू पर भी पड़ेगा। आईपीएल के रेवेन्यू के पूरे आंकड़े आने में अभी वक्त है, आईपीएल जैसे जैसे आगे बढ़ेगा तस्वीर और साफ होती जाएगी।</p>
<p>भारत में वायकॉम-18 आईपीएल 2023 के मैचों को जियो सिनेमा ऐप पर लाइव स्ट्रीम कर रहा है। वायकॉम-18 ने भारत में मैचों के डिजिटल लाइव स्ट्रीम के अधिकार हासिल किए थे। जियो सब्सक्राइबर के साथ सभी टेलीकॉम प्रोवाइडर्स के यूजर्स मुफ्त में जियो सिनेमा ऐप में लॉग इन कर आईपीएल मैचों का लुत्फ उठा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Apr 2023 15:21:52 +0530</pubDate>
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                <title>आरबीआई ने डिजिटल रुपए का परीक्षण किया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ डिजिटल-करेंसी एक तरह से रिजर्व बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में जारी की जाने वाली नकदी है। इससे लोगों को धन का अधिक सुरक्षित तरीके से प्रयोग करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rbi-start-testing-of-the-digital/article-31287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/45465465.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में केंद्रीय बैंक की डिजिटल-मुद्रा (सीबीडीसी) के नाम से डिजिटल रुपए का बाजार में खुदरा लेन-देन के लिए प्रयोग की सुविधा का व्यावहरिक परीक्षण शुरू किया। भारत के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी की थी। डिजिटल-करेंसी एक तरह से रिजर्व बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में जारी की जाने वाली नकदी है। इससे लोगों को धन का अधिक सुरक्षित तरीके से प्रयोग करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है। आरबीआई द्वारा जारी इस मुद्रा के माध्यम से लेन-देन इस समय प्रचलन में शामिल विभिन्न मूल्य के करेंसी नोट की तरह ही सुरक्षित और विधि मान्य है।</p>
<p><strong>देशव्यापी किया जाएगा</strong><br />रिजर्व बैंक के अनुसार पायलट परियोजना के तहत अभी केंद्रीय बैंक डिजिटल-रुपए इसका उपयोग 8 बैंकों के माध्यम से देश के 4 महानगरों में किया जा रहा है। आने वाले समय में इसका प्रचलन देशव्यापी किया जाएगा। </p>
<p><strong>सीयूजी में लेन देन कर सकेंगे</strong><br />शुरू में यह विनिर्दिष्ट शहरों में एक निश्चित उपयोगकर्ता समूह (सीयूजी) में शामिल व्यावसायिक प्रतिष्ठान और ग्राहक डिजिटल रुपये में लेन-देन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>अधिकृत किया है</strong><br />अभी इस परियोजना में आरबीआई ने शुरू में  भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, येस बैंक, आईडीएफसी बैंक , बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक,एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक को डिजिटल रुपये के वितरण और वॉलेट से भुगतान जैसी सेवाएं देने के लिए अधिकृत किया है।   </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2022 11:11:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>डिजिटल क्रांति के साथ ई-कचरा गंभीर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद ई-कचरे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस कचरे का 95 प्रतिशत से अधिक अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/e-garbage-threat-with-digital-revolution/article-8421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546546534.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद ई-कचरे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस कचरे का 95 प्रतिशत से अधिक अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ई-कचरे की अभूतपूर्व पीढ़ी डिजिटल क्रांति के लिए चिंता का विषय है। ई-कचरा इलेक्ट्रॉनिक-अपशिष्ट छोड़े गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसमें उनके उपभोग्य वस्तुएं, पुर्जे शामिल हैं। इसे दो व्यापक श्रेणियों के अंतर्गत 21 प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है जैसे सूचना प्रौद्योगिकी और संचार उपकरण एवं उपभोक्ता इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स। ई-कचरे के प्रबंधन के लिए कानून 2011 से भारत में लागू हैं। ई-कचरा प्रबंधन नियम में अधिनियमित किया गया था। घरेलू और व्यावसायिक इकाइयों से कचरे को अलग करने, प्रसंस्करण और निपटान के लिए भारत का पहला ई-कचरा क्लिनिक भोपाल, मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया है। ई-कचरे की धारा में विविध पदार्थ होते हैं जिनमें सबसे प्रमुख रूप से खतरनाक पदार्थ जैसे सीसा, पीसीबी, पीबीबी पारा, पीबीडीई, ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स (बीएफआर) शामिल हैं। ई-कचरा जलने पर हानिकारक रसायन छोड़ता है, जो मानव रक्त, गुर्दे और परिधीय तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जब इसे लैंडफिल में फेंका जाता है, तो रसायन भूजल में रीस जाते हैं, जो भूमि और समुद्री जानवरों दोनों को प्रभावित करते हैं। ई-कचरे के प्रबंधन के लिए कानून 2011 से भारत में लागू हैं। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम 2016 -2017 में अधिनियमित किया गया था।</p>
<p>उत्पादकों को ई-कचरे के संग्रह और उसके विनिमय के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। भारत में 95 प्रतिशत ई-कचरे को अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा पुनर्नवीनीकरण किया जाता है और स्क्रेप डीलर इसे अवैज्ञानिक रूप से एसिड में जलाकर या घोलकर इसका निपटान करते हैं। ई-कचरे में लेड, मरकरी, कैडमियम, क्रोमियम, पॉलीब्रोमिनेटेड बाइफिनाइल और पॉलीब्रोमिनेटेड डिपेनिल जैसे जहरीले तत्व होते हैं। मनुष्यों पर स्वास्थ्य प्रभावों में गंभीर बीमारियां जैसे फेफड़े का कैंसर, श्वसन संबंधी समस्याएं, ब्रोंकाइटिस,मस्तिष्क की क्षति आदि शामिल हैं, जो जहरीले धुएं के सांस लेने के कारण भारी धातुओं के संपर्क में आने और समान रूप से होती हैं। ई-कचरा एक पर्यावरणीय खतरा है, जिससे भूजल प्रदूषण और भूजल का प्रदूषण और प्लास्टिक और अन्य अवशेषों के जलने से वायु प्रदूषण होता है। भारत में ई.कचरे का संरचित प्रबंधन ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत अनिवार्य है। नियमों की कुछ मुख्य विशेषताओं में ई-अपशिष्ट वर्गीकरण और खतरनाक सामग्री वाले ई-कचरे के आयात पर प्रतिबंध शामिल हैं। भारत में ई-कचरे के 312 अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता हैं, जिनकी सालाना क्षमता लगभग 800 किलो टन है। हालांकि, औपचारिक पुनर्चक्रण क्षमता का कम उपयोग किया जाता है, क्योंकि 90 प्रतिशत से अधिक ई-कचरा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारत में लगभग दस लाख से अधिक लोग हस्तचालित पुनर्चक्रण कार्यों में शामिल हैं।</p>
<p>श्रमिक पंजीकृत नहीं हैं इसलिए श्रमिकों के अधिकार, पारिश्रमिक, सुरक्षा उपायों जैसे रोजगार के मुद्दों को ट्रैक करना कठिन है। मजदूर समाज के कमजोर वर्गों से हैं और उनके पास किसी भी प्रकार की सौदेबाजी की शक्ति नहीं है और वे अपने अधिकारों से अवगत नहीं हैं। इसका पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है क्योंकि श्रमिकों या स्थानीय डीलरों द्वारा किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है। स्थानीय स्तर पर पर्यावरण को होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए निरंतर सतर्कता से हॉटस्पॉट क्षेत्र की पहचान करने और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करने की आवश्यकता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन को कचरे की चुनौतियों से निपटने और कमियों को दूर करने के लिए जोड़ा जाना चाहिए। अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के साथ जुड़ने की रणनीति के साथ आने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसा करने से न केवल बेहतर ई-कचरा प्रबंधन प्रथाओं में एक लंबा रास्ता तय होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी, मजदूरों के स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति में सुधार होगा और बेहतर प्रदान होगा। यह प्रबंधन को पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और निगरानी में आसान बना देगा। समय की मांग है कि रोजगार के साथ-साथ सहकारी समितियों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने और इन सहकारी समितियों या अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए इ-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 के दायरे का विस्तार किया जाए। नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन ई-कचरे के प्रबंधन के लिए आगे का रास्ता है जिसे कम से कम 115 देशों में विनियमित किया जाना अभी बाकी है। प्रभावी जागरूकता सभी हितधारकों के लिए सही कदम होगा। पर्यावरण के अनुकूल ई-अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता है। जब तक हम इस नियम का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं करते हैं, तब तक देश कई अनौपचारिक प्रसंस्करण केंद्रों का निर्माण करेगा।                       </p>
<p><strong>- सत्यवान सौरभ</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 11:38:30 +0530</pubDate>
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