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                <title>parents - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सरकार और प्राइवेट स्कूल के बीच पिस रहा अभिभावक</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग के चक्कर काट अभिभावक हो रहे परेशान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कोटा। आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की फीस को लेकर सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच विवाद में अभिभावक पिस रहा है। सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सत्र 2024-25 में निजी स्कूलों में नर्सरी से विद्यार्थियों को एडमिशन तो दिलवा दिए लेकिन पुनर्भरण राशि कक्षा-एक से दे रही है। जबकि, निजी स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों का पुनर्भरण किए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार के हाथ खड़े कर देने से प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर फीस का दबाव बना रहे हैं।  कहीं, नर्सरी में एडमिशन न देने तो कहीं पिछले साल नर्सरी से एलकेजी व एचकेजी में प्रमोट हुए बच्चों की फीस मांगी जा रही है। इस तरह की शिकायतें लेकर अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। प्राइवेट स्कूल और सरकार के बीच विवाद में अभिभावक चक्कर घन्नी हो रहे हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रहे 40 से 50 मामले </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीई में चयनित बच्चों को नर्सरी में एडमिशन न देने व प्रमोटी एलकेजी-एचकेजी के विद्यार्थियों से फीस मांगे जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। प्रतिदिन इस तरह के 40 से 50 मामले आ रहे हैं।  अभिभावकों द्वारा लिखित में शिकायत देने पर विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों को पाबंद भी किया जा रहा है। वहीं,  अभिभावकों का कहना है, विभाग द्वारा सख्ती किए जाने पर थोड़े दिन तो मामला शांत रहता है लेकिन, कुछ दिनों बाद फिर से फीस फीस मांगना शुरू कर देते हैं।   </p>
<p><strong>क्या है विवाद</strong><br />शिक्षा विभाग ने सत्र 2023-24 में आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी से प्रथम कक्षा तक में प्रवेश लिए थे। लेकिन, आरटीई का भुगतान प्रथम कक्षा से ही देने का फैसला लिया। जिसका निजी स्कूलों ने विरोध किया। इस पर शिक्षा विभाग की मान्यता को लेकर चेतावनी दिए जाने के बाद प्राइवेट स्कूलों ने प्रवेश दे दिया। वहीं, नए सत्र 2024-25 में शिक्षा विभाग ने नर्सरी और पहली कक्षा में ही प्रवेश देने के लिए बच्चों का चयन किया। कक्षा-एक में तो सरकार पुनर्भरण राशि का भुगतान कर रही लेकिन नर्सरी का नहीं कर रही है। जिसका विरोध करते हुए निजी स्कूल भुगतान की मांग कर रहे हैं।   </p>
<p><strong>एक हजार स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में करीब एक हजार निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। कुछ निजी स्कूलों द्वारा सरकार के आदेशानुसार चयनित बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन अधिकतर स्कूल फीस मांग रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>अधिकारी बोले- कर रहे पाबंद</strong><br />इस तरह के मामले आ रहे हैं। अभिभावक मौखिक व सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर रहे हैं लेकिन लिखित में शिकायत नहीं दे रहे। हालांकि, प्राइवेट स्कूलों को सरकार के दिशा-निर्देशानुसार पढ़ाने के लिए पाबंद किया जा रहा है।  <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, शिक्षा विभाग प्रारंभिक </strong></p>
<p>चयनित विद्यार्थियों को एडमिशन देने के लिए प्राइवेट स्कूल सरकार से बाध्य हैं। कार्यालय में जो भी शिकायतें आ रहीं हैं, इस पर संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर समाधान करवा रहे हैं। यदि, इस तरह की और भी कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी शिक्षा विभाग माध्यमिक</strong></p>
<p><strong>अभिभावकों का छलका दर्द: निजी स्कूल मांग रहे पैसा </strong><br />तलवंडी स्थित कॉन्वेंट स्कूल में मेरे बालक का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वरियता सूची में क्रमांक 41 है। स्कूल वाले एडमिशन नहीं होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं। जबकि, आरटीई पोर्टल पर प्रवेशित लिखा हुआ आ रहा है। स्कूल प्रशासन बच्चे को एडमिशन नहीं दे रहे। शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- पारसमल डाबी, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरी पुत्री रूचिका का नर्सरी में नम्बर आया है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्कूल गया तो वहां की प्राचार्य ने 15 हजार फीस जमा करवाने को कहा। फीस के अभाव में एडमिशन नहीं देने की बात कही। शिक्षा विभाग को 2 अगस्त को लिखित शिकायत दी है। फिर भी समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- पुरुषोत्तम नागर, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरे पुत्र भावेश महावर का नर्सरी कक्षा में आरटीई के तहत दाखिला हुआ है। लेकिन, स्कूल वाले एडमिशन नहीं दे रहे। प्राचार्य ने फीस जमा करवाने की बात कहते हुए कहा कि सरकार हमें नर्सरी से एचकेजी तक पैसा नहीं देती है। यदि, फीस दोगे तो ही बच्चे का एडमिशन हो सकेगा। <br /><strong>- नरेंद्र महावर, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं निजी स्कूल संचालक </strong><br />आरटीई एक्ट में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि प्राइवेट स्कूल फ्री में पढ़ाएगा। जबकि, सरकार द्वारा चयनित बच्चों का अलॉटमेंट करने पर उनकी फीस वह स्वयं देगी। सरकार ने दो साल पहले नर्सरी, एचकेजी, एचकेजी और फर्स्ट कक्षा में एडमिशन दे दिए लेकिन पेमेंट पहली कक्षा का ही दिया जा रहा। हमने तो तीन साल बच्चे को पढ़ा दिया अब सरकार पैसे देने से मुकर रही है। प्रत्येक स्कूल में प्री-प्राइमरी के तीन साल में करीब 30 बच्चे होते है और न्यूनतम 10 हजार रुपए फीस के हिसाब से इन बच्चों का सालाना बिल 3 लाख रुपए होता है। ऐसे में प्राइवेट स्कूल तीन लाख रुपए का नुकसान कैसे भुगतेगा। हम हाईकोर्ट से केस जीत चुके हैं। कोर्ट ने सरकार को फीस पुनर्भरण करने के आदेश भी दिए हैं लेकिन सरकार ने मामले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में लगाकर लटका दिया है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में बदलाव करके अभिभावकों एवं निजी विद्यालयों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। न सरकार पैसा देना चाहती है और न ही अभिभावक। इस कारण से बच्चा निशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए की प्री-पाइमरी कक्षाओं का भुगतान करें ताकि आरटीई का लाभ बच्चों को मिल सके। <br /><strong>- रमेशचंद सांमरिया, जिला उपाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1) के अंतर्गत गैर सरकारी विद्यालयों को पुनर्भरण के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन सरकार के उच्च अधिकारियों ने इस कानून में रुकावट उत्पन्न करके निजी स्कूल एवं अभिभावकों के बीच खाई बना दी। सरकार द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान आदेश प्रक्रिया जारी करें, ताकि गरीब -असहाय व दुर्बल वर्ग के बच्चों को शिक्षा का लाभ मिल सके।   <br /><strong>- नफीस खान, जिला उपाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parents-are-getting-crushed-between-the-government-and-private-schools/article-86859</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 15:07:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मां-बाप को पहचानने से इंकार किया, तो छपवा दी शोक पत्रिका और कर दिया मृत्युभोज</title>
                                    <description><![CDATA[ मृत्यु भोज का कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  22 मई को अपनी जिंदा बेटी का मृत्यु भोज करवा दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/when-they-refused-to-recognize-their-parents-a-condolence-magazine/article-79152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(16)3.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर।  जिस बेटी को नाजों से पाला, तमन्ना थी कि जब वह बड़ी हो जाएगी तो उसकी धूमधाम से शादी करेंगे। उसी ने बेटी ने जब प्रेम विवाह कर अपने मां-बाप को ही पहचानने से इंकार दिया तो पिता ने शोक पत्रिका छपवाकर मृत्युभोज कर दिया।</p>
<p>वैसे तो किसी के गुजर जाने के बाद उसके लिए शोक सभा रखी जाती है, जिसके लिए परिवार वाले शोक संदेश भी बांटते हैं। मगर उदयपुर जिले के गोगुंदा उपखंड क्षेत्र के सायरा पंचायत समिति के सुआवतों का गुड़ा गांव की एक लड़की ने गैर समाज के प्रेमी के साथ भाग कर शादी कर ली, जब पुलिस ने उसे पकड़ा और मां बाप के सामने हाजिर हुई तो उसने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। बेटी के इस व्यवहार से पिता इस कदर टूट गया कि उसने अपनी बेटी के नाम का शोक संदेश का कार्ड छपवाकर परिजनों को मृत्यु भोज का निमंत्रण भेज दिया। मृत्यु भोज का कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  22 मई को अपनी जिंदा बेटी का मृत्यु भोज करवा दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 12:40:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पैरेन्ट्स की छोटी सी लापरवाही बच्चे पर पड़ सकती है भारी</title>
                                    <description><![CDATA[ बच्चों को अजनबियों से सावधान रखने की बचपन से दें ट्रेनिंग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-little-carelessness-on-the-part-of-parents-can-cost-the-child-dearly/article-78204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/parents-ki-choti-si-laparwahi-bachhe-pr-pd-skti-h-bhari...kota-news-16-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इटावा में बुधवार को ही  माता पिता की थोड़ी सी लापरवाही से एक मासूम बच्ची कार में दम घुटने से मर गई। वह कब कार में जा बैठी माता पिता को पता ही नहीं चला। इस बीच पीछे से कार लॉक हो गई और दम घुटने से बच्ची की जान चली गई। इसी तरह कोटा रेलवे स्टेशन से अपहरण हुए बच्चे के साथ भी पिता की छोटी सी गलती ने उस नन्ही जान को जोखिम में डाल दिया।  ऐसी अनगितन घटनाएं प्रतिदिन होती जिससे बचपन असुरक्षित हो रहा है।  हर साल, 2 लाख से अधिक बच्चों का परिवार के किसी सदस्य द्वारा अपहरण कर लिया जाता है, जो अजनबियों द्वारा अपहरण किए गए बच्चों से कहीं अधिक है। अच्छी खबर यह है कि पारिवारिक अपहरण को  रोका जा सकता है। कई संरक्षक  या माता-पिता को पता नहीं है कि बच्चों अपहरण हो सकता है। जरा सी सावधानी  बच्चों को सुरक्षित रखने में  मदद कर सकती है। दैनिक नवज्योति ने बच्चों को ऐसी घटनाओं से बचाने के लिए शहर के कुछ एक्सपर्ट से बात की। प्रस्तुत हैं उसके अंश...</p>
<p><strong>किसी अजनबी से कभी भी कैंडी या उपहार स्वीकार न करें</strong><br />बच्चों की देखभाल करने वालों और आयाओं को सावधानीपूर्वक चुनें और उनके बारे में पूरी जांच करें। यदि आपने अपने बच्चों को स्कूल या डेकेयर से लेने के लिए किसी की व्यवस्था की है, तो पहले से ही अपने बच्चों और स्कूल या चाइल्ड केयर केंद्र के साथ व्यवस्था पर चर्चा करें। अपने बच्चों को उनके नाम वाले कपड़े पहनाने से बचें - बच्चे उन वयस्कों पर भरोसा करते हैं जो उनके नाम जानते हैं। माता-पिता होने की चुनौतियों में से एक है ,अपने बच्चों को डर या चिंता से भरे बिना सतर्क रहना सिखाना। अपने बच्चों से अक्सर सुरक्षा के बारे में बात करें और उन्हें संभावित खतरनाक स्थितियों से बचने और बचने के बारे में बुनियादी बातें बताएं। उन्हें यह सिखाएं किसी अजनबी से कभी भी कैंडी या उपहार स्वीकार न करें। कभी भी किसी अजनबी के साथ कहीं न जाएं भले ही यह मजेदार लगे। <br /><strong>- हरप्रीत कौर राणा, पूर्व न्यायपीठ सदस्य किशोर न्याय बोर्ड व न्यायपीठ सदस्य बाल कल्याण समिति कोटा</strong></p>
<p><strong>बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट करने से बचेंं</strong><br />अपने बच्चों की पहचान संबंधी जानकारी या तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट करने से बचें । आपके बच्चे जिन स्थानों पर जाते हैं, उनके बारे में सीमाएं निर्धारित करें। मॉल, मूवी थिएटर, पार्क, सार्वजनिक बाथरूम जैसी जगहों परउनकी निगरानी करें। बच्चों को कार या घुमक्कड़ी में एक मिनट के लिए भी अकेला न छोड़ें। प्रत्येक बच्चे के लिए पूर्ण बाल आईडी दस्तावेज रखने चाहिए। हर छह माह में रंगीन फोटो अपडेट करें। आपका पूरा नाम, पता और फोन नंबर मदद के लिए कॉल करने के लिए सेल, होम और पे फोन का उपयोग कैसे करें। उन्हें इन कॉलों का अभ्यास कराएं। हर दिन, अपने बच्चों को आश्वस्त करें। आप उनसे हमेशा प्यार करते रहेंगे। यदि वे घर नहीं आते हैं तो आप हमेशा उनकी तलाश करेंगे। बच्चों को सिखाएं  अगर कोई आपका पीछा करता है या उन्हें जबरदस्ती कार में बिठाने की कोशिश करता है तो भाग जाएं और चिल्लाएं।   <br /><strong> - विमल जैन, पूर्व सदस्य बाल कल्याण समिति कोटा</strong></p>
<p><strong>अपने बच्चों को सिखाएं उनका पूरा नाम पता</strong><br />वैदिक दृष्टि से संतान, माता-पिता की जीवंत संपदा है, परमात्मा का रूप होते है। खासकर बच्चे जब छोटे हों और नासमझ हों, तो अभिभावकों को उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा सजग रहना बहुत जरूरी है।  जरा सी लापरवाही बच्चे को बड़े संकट में डाल सकती है । बालक जिज्ञासु होते हैं, एक स्थान पर चुपचाप नहीं बैठ सकते, इसलिए माता पिता प्रेमपूर्वक बालक में सही और गलत को पहचानने की समझदारी भी विकसित करते रहे। । सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे जानते हैं कि वे किसकी कार में बैठ सकते हैं और किसकी नहीं। उन्हें ऐसी किसी भी कार से दूर जाना सिखाएं जो उनके बगल में आती हो और जिसे कोई अजनबी चला रहा हो, भले ही वह व्यक्ति खोया हुआ या भ्रमित दिखे। मां या पिता के अलावा देखभाल करने वालों के लिए कोड शब्द विकसित करें, और अपने बच्चों को याद दिलाएं कि कभी भी किसी को कोड शब्द न बताएं। यदि आपके बच्चे इतने बड़े हो गए हैं कि घर पर अकेले रह सकते हैं , तो सुनिश्चित करें कि वे दरवाजा बंद रखें और किसी को भी न बताएं  कि वे घर पर अकेले हैं।     <br /><strong>- प्रतिभा दीक्षित एडवोकेट व सदस्य स्थाई लोक अदालत</strong></p>
<p><strong>ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता बनाएं</strong><br />कई बार माता पिता रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सावर्जनिक स्थानों, शादी समारोह में मोबाइल पर व्यस्त हो जाते  और बच्चा कहीं निकल जाता है। इस बात का लोग फायदा उठाकर उसे किडनेप कर लेते है। आज इंटरनेट एक बेहतरीन उपकरण है, लेकिन यह शिकारियों के लिए बच्चों का पीछा करने की जगह भी है। अपने बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों और चैट रूम के दोस्तों से सावधान रहें और उन्हें याद दिलाएं कि वे कभी भी व्यक्तिगत जानकारी न दें। अपने बच्चों की पहचान संबंधी जानकारी या तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट करने से बचें। आपके बच्चे जिन स्थानों पर जाते हैं, उनके बारे में सीमाएं निर्धारित करें। हर 6 महीने में अपने बच्चों की आईडी जैसी तस्वीरें लें और उन पर फिंगरप्रिंट लें। कई स्थानीय पुलिस विभाग फिंगर प्रिंटिंग कार्यक्रम प्रायोजित करते हैं। उसमें अपने बच्चों फिंगर प्रिंट ले। अपने बच्चों के मेडिकल और डेंटल रिकॉर्ड को अपडेट रखें। ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता से  अपनाएं। <br /><strong>- सुमन भंडारी, ममता भवन संयोजिका </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:07:42 +0530</pubDate>
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                <title>प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस बने माता- पिता, सरोगेसी के जरिए बच्चे का स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[सरोगेसी के जरिए मां बनीं प्रियंका चोपड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%B8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%A4/article-4109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/priynka-chopra_nik-jons.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। हर व्यक्ति का शादी के बाद सपना होता है कि वो माता-पितान बनें। यह सपना मॉस्ट पॉपलर दंपति प्रियंका और निक का पूरा हुआ है। दरअसल बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस माता- पिता बन गए हैं।  प्रियंका चोपड़ा और उनके पति निक जोनस ने सरोगेसी के जरिए एक बच्चे का स्वागत किया है। प्रियंका और निक जोनास ने इस खुशखबरी को सोशल मीडिया के जरिए शेयर किया है।</p>
<p><strong><br /> प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस ने वर्ष 2018 में की थी शादी </strong> <br /> प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि हमें इसकी पुष्टि करते हुए काफी खुशी हो रही है कि हम सरोगेसी से पैरेंट्स बने हैं। हम इस विशेष समय में सम्मानपूर्वक आपसे प्राइवेसी की अपील करते हैं क्योंकि हम अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद। गौरतलब है कि प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस ने वर्ष 2018 में शादी की थी।</p>
<p><strong>सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया </strong></p>
<p>सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला और कोई दूसरे कपल या सिंगल पैरेंट के बीच होता है। आसान शब्दों में कहें तो सरोगेसी का मतलब है किराये की कोख। जब कोई पति-पत्नी बच्चे को जन्म नहीं दे पा रहे हैं (या देना नहीं चाहते), तो किसी अन्य महिला की कोख को किराये पर लेकर उसके जरिए बच्चे को जन्म देना सरोगेसी कहलाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 13:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बेटे को नशा मुक्ति केंद्र भेजा, वापस आया तो कर दी माता-पिता की हत्या, कुल्हाड़ी से छोटे भाई को भी किया घायल, डर था वापस नशा मुक्ति केंद्र भेज देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[नोहर थाना क्षेत्र के फेफाना की घटना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/hanumangarh/%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BE--%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2--%E0%A4%A1%E0%A4%B0-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87/article-3284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/murder.jpg" alt=""></a><br /><p>रावतसर। नोहर थाना क्षेत्र के एक फेफाना में एक बेटे ने अपने मां-बाप की हत्या कर दी जबकि छोटे भाई को भी कुल्हाड़ी से काटकर बुरी तरह घायल कर दिया। छोटे भाई को इलाज के लिए सिरसा के निजी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने इस मामले में दंपती के 15 साल के बड़े बेटे को दस्तयाब किया है। गुरुवार सुबह शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार परिवार का बड़ा बेटा छोटी उम्र में ही नशे का आदी हो गया। परेशान माता-पिता ने इलाज के लिए उसे नशा मुक्ति केंद्र भेज दिया। दो-तीन दिन पहले ही वह घर वापस आया था। घर आने पर उसे यह लगने लगा कि कुछ दिन बाद वापस  नशा मुक्ति केंद्र भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि इसी मानसिक स्थिति में बुधवार रात को उसने कुल्हाड़ी से अपने माता-पिता की हत्या कर दी। 14 साल के छोटे भाई को कुल्हाड़ी से बुरी तरह काट दिया। हत्या का जुनून सर से उतरने के बाद खुद ही पास की ढाणी में गया और पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और शवों को नोहर स्थित सरकारी हॉस्पिटल पहुंचाया गया। <br /> <strong><br /> खेती करके परिवार पाल रहा था मृतक </strong><br /> थाना प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि हत्या के इस मामले में दंपती के बड़े बेटे को दस्तयाब किया गया है। वह नशामुक्ति केंद्र जाने की बात को लेकर परेशान था। सीआई रविंद्र सिंह ने बताया कि मृतक खेती करता था और ढाणी में ही रहता था। परिवार के पास करीब 10-12 बीघा जमीन थी।<br /> <br /> नोट: हम आरोपी की पहचान इसलिए उजागर नहीं कर रहे क्योंकि किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत कानून का उल्लंघन करने वाले बालक का नाम और पहचान सार्वजनिक करने पर रोक है। इस धारा के तहत ऐसे बच्चे की पहचान प्रकट करने वाले व्यक्ति को छह माह की सजा अथवा दो लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>हनुमानगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 11:59:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोरोना का असर : प्राइवेट के बजाय सरकारी विद्यालयों के प्रति बढ़ा बच्चों का रुझान</title>
                                    <description><![CDATA[असर रिपोर्ट-2021 का सर्वे : अभिभावकों का निजी स्कूलों से मोहभंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%B0---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/aser.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोना के कारण अभिभावकों का निजी स्कूलों के प्रति मोहभंग हो गया है और अब अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए सरकारी स्कूलों की तरह भाग रहे है। निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी, जो 2021 में 8.1 घटकर 24.4 प्रतिशत तो सरकारी विद्यालयों में  नामांकन 2018 में 59.1% से 9.3 प्रतिशत बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया है। इसका मुख्य कारण कोरोना के चलते लोगों के पास जॉब न होना है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हो रहे है। पिछले तीन साल में छात्रों का रुझान देश के निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर-2021) में यह जानकारी सामने आई। यह रिपोर्ट 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। कुल 76,706 घरों और पांच से 16 साल के 75,234 बच्चों के साथा-साथ प्राथमिक शिक्षा देने वाले 7,299 सरकारी स्कूलों के शिक्षकों या प्रधान शिक्षकों तक यह सर्वेक्षण किया गया। बुधवार को जारी की गई एएसईआर की 16वीं रिपोर्ट में कहा गया, अखिल भारतीय स्तर पर, निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर स्पष्ट रूप से झुकाव देखा गया है। छह से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी जो 2021 में घटकर 24.4 प्रतिशत रह गई।</p>
<p><br /> <strong>-यह भी चौकानें वाली बात </strong><br /> रिपोर्ट में कहा गया, यह सभी कक्षाओं और लड़कों तथा लड़कियों के बीच देखा गया। हालांकि निजी स्कूलों में लड़कों का दाखिला कराने की संभावना लड़कियों की तुलना में अब भी अधिक है।</p>
<p><br /> सरकारी स्कूलों में 2018 में औसतन 64.3 प्रतिशत दाखिला हुआ जो पिछले साल बढ़कर 65.8 प्रतिशत हो गया और इस साल यह 70.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। वर्ष 2006 से 2014 तक निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई।निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी, जो 2021 में 8.1 घटकर 24.4 प्रतिशत तो सरकारी विद्यालयों में नामांकन 2018 में 59.1% से 9.3 प्रतिशत बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया।</p>
<p><br /> रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सालों तक 30 प्रतिशत पर टिके रहने के बाद, महामारी के सालों में इसमें उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। कोविड के पहले भी सरकारी स्कूलों में लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह समय के साथ जारी है।</p>
<p><strong><br /> -राजस्थान में भी पहुंचा</strong><br /> असर सर्वेक्षण राजस्थान के 33 जिलों के 4691 घरों में 5-16 आयु वर्ग के 5380 बच्चों तक पहुंचा है।</p>
<p>हम आज भी महामारी के बदलते माहोल से नए सामान्य परिस्थितियों की और बढ़ रहे हैं। जहां हमें सरकारी स्कूलों में बढ़ते नामांकन के साथ ही सीखनें के नुकसान में सुधार के लिए पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए हाइब्रिड शिक्षण गतिविधियों के मिश्रण के साथ वर्तमान में घर पर मिल रहे शिक्षण सहयोग को समायोजित व मजबूत करने के नए तरीके तलाशने की आवश्यकता है। वर्तमान डिजिटल उपकरण एक गंभीर चुनौती है, डिजिटल उपकरणों व इन्टरनेट कनेक्टिविटी की गुणवक्ता व सार्वभौमिक उपलब्धता के लिए हमें सभी बच्चों के लिए अतिरिक्त समाधान तलाशने होंगे। - <strong>के.बी. कोठारी, मैनेजिंग ट्रस्टी, असर प्रथम राजस्थान</strong><br /> <br /> <strong>पिछले तीन सालों में सबसे अधिक बढ़ा नामांकन, हो रहे बंपर एडमिशन</strong><br /> 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 76,706 घरों और पांच से 16 साल के 75,234 बच्चों के बीच हुआ सर्वेक्षण<br /> <br /> <strong>यह है मुख्य तथ्य</strong><br />     नामांकन की स्थिति  : 6 -14 आयु वर्ग के बच्चों का सरकारी विद्यालयों में नामांकन 2018 में 59.1% से बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया है। <br /> राजस्थान में 6-14 आयु वर्ग केअनामांकित बच्चों के अनुपात में बदलाव: 2018 में अनामांकितबच्चों का अनुपात 3.4% था, जो कि 2020 में बढ़कर 6.6% हो गया था। लेकिन अभी अनामांकित बच्चों के प्रतिशत में थोडा सुधार देखने को मिला है और  2021 मेंयह अनुपात 4.5% पर आ गया है। <br />     ट्यूशन लेने वाले बच्चों में वृद्धि : राष्ट्रीय स्तर पर, 2018 में, 30% से कम बच्चे निजी ट्यूशन कक्षाएं लेते थे। 2021 में यह अनुपात बढ़कर लगभग 40% हो गया है। यह अनुपात दोनों लड़के और लड़कियों, सभी कक्षाओं और दोनों सरकारी और निजी स्कूलों में जाने वाले बच्चों के लिए बढ़ा है।<br /> -राजस्थान के लिए यह आंकड़ा 2018 में 5.1% था जो 2021 में बढ़कर 15.3% हो गया है यह10.2% बढ़ा है। ट्यूशन लेने वाले बच्चों की संख्या में बड़ा बदलवा देखने को मिला है। <br /> -ट्यूशन में सबसे अधिक वृद्धि आर्थिक रूप से वंचित वर्ग में<br /> आर्थिक स्थिति के लिए माता-पिता की शिक्षा के स्तर को प्रॉक्सी मानते हुए, कम पढ़े-लिखे(प्राथमिक शिक्षा या कम) माता-पिता के बच्चों में ट्यूशन लेने के अनुपात में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अधिक पढ़े-लिखे (कक्षा 9 या अधिक) माता-पिता के बच्चों में यह वृद्धि 7.2 प्रतिशत की है। <br /> -राष्ट्रीय स्तर पर 2018 की तुलना में लगभग दुगने घरों में स्मार्टफोन उपलब्ध<br /> स्मार्टफोन की उपलब्धि 2018 में 36.5% से बढ़कर 2021 में 67.6% हो गई है, लेकिन सरकारी विद्यालय जाने वाले बच्चों की अपेक्षा (63.7%) निजी विद्यालय के ज्यादा बच्चों के पास स्मार्टफोन उबलब्ध हैं (79%)।</p>
<p><br /> <strong>-राजस्थान में स्मार्टफोन उपलब्ध</strong><br /> स्मार्टफोन की उपलब्धि 2018 में 39.7% से बढ़कर 2021 में 66.6% हो गई है।<br /> -राजस्थान में स्मार्टफोन होने के बाद भी बच्चों के उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। <br /> -पिछले एक वर्ष में घर पर बच्चों को पढ़ाई में मिलने वाला सहयोग कम हुआ है:घर पर पढ़नेमें सहयोग मिलने वाले नामांकित बच्चों का अनुपात2020 में तीन चौथाई से घटकर 2021 में दो तिहाई हो गया है।सहयोग में सबसे ज्यादा गिरावट उच्च कक्षा (कक्षा 9 या अधिक) के बच्चों के लिए आई है। <br /> -राजस्थान में भीबच्चों को पढाई में घर पर मिलने वाले सहयोगमें कमी आई है 2020 में 62.4% बच्चों को घर पर पढाई में सहयोग मिल रहा था, लेकिन 2021 में 52.4% बच्चों को ही घर पर पढ़ाई में सहयोग मिल रहा है। <br /> -दोनों सरकारी और निजी विद्यालय जाने वाले बच्चों में, जिन बच्चों के विद्यालय खुल गए है, उनको घर से कम सहयोग मिल रहा है। उदाहरण के लिए, जो निजी विद्यालय नहीं खुले है, उनमें जाने वाले 75.6% बच्चों को पढ़ने में सहयोग मिलता है। इसकी तुलना में खुले हुए निजी विद्यालयों में जाने वाले 70.4% बच्चों को यह मदद मिलती है।</p>
<p><br /> <strong>-राष्ट्रीय स्तर पर लगभग सभी बच्चों के पास पाठ्यपुस्तकें है</strong><br /> लगभग सभी नामांकित बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें हैं (91.9%)। दोनों सरकारी और निजी विद्यालयों के बच्चों के लिए यह अनुपात पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ गया है। <br /> राजस्थान में भी लगभग 90% बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें है 2021 में निजी विद्यालयों के 82.6% व सरकारी स्कूलों के 91.9% बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें हैे। यहां निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर दिखाई दे रहा है।</p>
<p><strong><br /> अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री की प्राप्ति में थोड़ी बढ़ोतरी</strong><br /> जिन नामांकित बच्चों के विद्यालय नहीं खुले हैं, उनमें से 39.8% बच्चों को सर्वेक्षण के पिछले सप्ताह में अपने शिक्षक द्वारा किसी प्रकार की शैक्षिक सामग्री या गतिविधियां (पाठ्यपुस्तकों के अलावा) प्राप्त हुई। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जब यह अनुपात 35.6% था।</p>
<p><br /> <strong>-राजस्थान में 2021 सर्वेक्षण के दौरान बच्चे द्वारा घर पर की जा रही लर्निंग गतिविधियां</strong><br /> 61% बच्चे घर पर अपनी पाठ्यपुस्तक व वर्कशीट से पढ़ाई कर रहे है, 8.4% बच्चे टी.वी. या रेडियो पर और 16.8% बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई द्वारा प्राप्त गतिविधियों को करते पाए गए।<br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 12:02:37 +0530</pubDate>
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