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                <title>crude - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रूपए में जारी गिरावट से घरेलू शेयर बाजार में हाहाकार : सेंसेक्स 985 अंक टूटा, इन कंपनियों में दिखेगा एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में 2% की तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड गिरावट से सोमवार को घरेलू शेयर बाजार औंधे मुंह गिर गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 927 अंक टूटकर 74,310 पर और निफ्टी 288 अंक नीचे आ गया। आईटी को छोड़कर टाटा स्टील और एसबीआई सहित लगभग सभी सेक्टर्स के शेयर लाल निशान पर आ गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/domestic-stock-market-sensex-falls-by-985-points-due-to/article-154189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market9.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। डॉलर की तुलना में रुपये में जारी गिरावट और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में उछाल से घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट रही। बीएसई का सेंसेक्स 430.02 अंक टूटकर 74,807.97 अंक पर खुला और 985 अंक की गिरावट में 74,252.78 अंक तक उतर गया। खबर लिखे जाते समय यह 927.99 अंक (1.23 प्रतिशत) नीचे 74,310 अंक पर था। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया फिलहाल 39 पैसे की गिरावट में 96.20 रुपये प्रति डॉलर पर है। पिछले कारोबारी दिवस पर यह 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था जो अब तक का ऐतिहासिक निचला बंद स्तर है। रुपये की गिरावट से शेयर बाजारों पर दबाव रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में आज दो प्रतिशत से ज्यादा तेजी है। इससे भी घरेलू बाजारों में निवेश धारणा कमजोर बनी हुई है।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 161.30 अंक नीचे 23,482.20 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 288.95 अंक यानी 1.22 प्रतिशत नीचे था।वृहत बाजार में बिकवाली हावी है। आईटी को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में गिरावट रही। रियलटी, मीडिया, ऑटो, एफएमसीजी, तेल एवं गैस, रसायन, बैंकिंग और धातु सेक्टरों से सूचकांक लाल निशान में रहे। सेंसेक्स की कंपनियों में टाटा स्टील का शेयर चार प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया। पावर ग्रिड में पौने चार प्रतिशत की गिरावट रही। अडानी पोर्ट्स, भारतीय स्टेट बैंक, ट्रेंट और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर दो प्रतिशत से ज्यादा नीचे चल रहे हैं। इंफोसिस, भारती एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयर ऊपर रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:16:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईंधन की कीमतें</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की बढ़ती कीमतें अब सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%88%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82/article-2496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/petrol-disal1.jpg" alt=""></a><br /><p>अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से देश में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की बढ़ती कीमतें अब सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।  ऐसे में सरकार ईंधन के नए-नए विकल्पों पर विचार कर रही है। सबसे पहले सरकार ने जफरोटा से ईंधन बनाने का विकल्प रखा था। इसके लिए किसानों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया गया, कई जगह इसके संयंत्र भी लगाए गए, मगर अपेक्षित नतीजे नहीं निकले। अब एथेनोल को कारगर विकल्प के बतौर देखा जा रहा है और सरकार इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को प्रोत्साहित कर रही है। एथेनोल का उत्पादन गन्ने से होता है। चीनी फैक्ट्रियों में चीनी उत्पादन के बाद जो कचरा बच जाता है जिसे शीरा भी कहा जाता है। इस शीरा से एथेनोल बनता है। चीनी फैक्ट्रियां अभी एथेनोल की जगह शराब का उत्पादन कर लेती है। लेकिन सरकार ने अब एथेनोल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इसकी कीमतों में एक रुपए की वृद्धि कर दी है ताकि एथेनोल के उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकें। एथेनोल की विशेषता यह है कि इसका उपयोग पेट्रोल में मिलाकर किया जा सकता है और स्वतंत्र रूप से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल तेल कंपनियां इसे पेट्रोल में मिलाकर बेचती है जिससे पेट्रोल की कीमत कुछ कम बैठती है। एथेनोल पेट्रोल से सस्ता पड़ता है। सरकार ने अगले तीन-चार साल में एथेनोल की मिलावट को बीस फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। एथेनोल के उपयोग को देखते हुए परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तो यहां तक कह चुके हैं कि वे अब वाहन निर्माता कंपनियों को कारों में पेट्रोल और एथेनोल दोनों से चलने वाले इंजन लगाने के निर्देश जारी करेंगे। उनका मानना है कि इससे पेट्रोल का दबाव कम होगा। एथेनोल का विकल्प अच्छा है, लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया है कि एथेनोल का उत्पादन कितना हो सकेगा। इसके उत्पादन का मुख्य स्रोत गन्ना है और गन्ना बारहमासी फसल नहीं है। चीनी फैक्ट्रियां छह माह तक तो बंद रहती हैं। फिर घाटे की वजह कई चीनी मिले तो बंद पड़ी है और कई में पूरा उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सरकार को एथेनोल का उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले तो गन्ने की खेती करने वालों को प्रोत्साहित करना होगा, साथ ही चीनी मिलों को भी खड़ा करना होगा। यह भी एक चुनौती ही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 12:40:51 +0530</pubDate>
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