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                <title>परिवहन विभाग के पांच दिन हुए पूरे नहीं लगी हाई सिक्योरिटी प्लेट</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की ओर से पोर्टल शुरू नहीं करने और बुकिंग वाले आवेदकों के वाहनों पर प्लेट नहीं लगाने के बाद क्या होगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-five-days-of-the-transport-department-have-passed-but-the-high-security-plates-have-not-been-installed/article-90138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । परिवहन विभाग की ओर से हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद नया पोर्टल शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही जिन वाहनों की बुकिंग हो चुकी है उन पर पांच दिन में प्लेट लगाने और शेष आवेदकों को प्लेट का शुल्क रिफंड करने के भी निर्देश दिए गए थे। लेकिन पांच दिन पूरे हो जाने के बाद न तो आवेदन के लिए नए पोर्टल की शुरूआत हुई है और न ही आवेदकों की फीस रिफंड करने की कवायद शुरू हुई है। ऐसे में वाहन मालिकों के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी हो चुकी है। विभाग की ओर से पोर्टल शुरू नहीं करने और बुकिंग वाले आवेदकों के वाहनों पर प्लेट नहीं लगाने के बाद क्या होगा।</p>
<p><strong>कोटा में हो चुके 20 हजार आवेदन</strong><br />कोटा शहर में 1 लाख 85 हजार से ज्यादा वाहनों पर एचएसआरपी लगनी थी। जिनमें अब तक 37 हजार से ज्यादा वाहनों पर एचएसआरपी लग चुकी हैं। वहीं 20 हजार से ज्यादा वाहनों ने एचएसआरपी लगाने के लिए आवेदन किया हुआ है। कई वाहन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने दिसंबर तक के स्लॉट बुक किए हुए हैं। ऐसे में इन सभी वाहनों पर पांच दिन के अंदर प्लेट लगानी थी जो संभव नहीं था। जिसके चलते जिन वाहन मालिकों ने प्लेट के लिए स्लॉट बुक करा लिए हैं उनके बीच प्लेट के लगने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं विभाग की ओर से डीलरों और सियाम पोर्टल को प्लेट लगाने के लिए दिया गया पांच दिन के समय भी पूरा हो गया है। </p>
<p><strong>पोर्टल की कोई अपडेट नहीं, रिफंड का स्पष्ट नहीं</strong><br />विभाग की ओर से सियाम पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया को बंद कर प्रदेश स्तर पर नया पोर्टल शुरू करने को कहा गया था। जिसके पांच दिन के अंदर चालू करना था लेकिन विभाग की ओर से अभी तक पोर्टल पर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही विभाग की ओर से सियाम के डायरेक्टर को सभी आवेदकों के रिफंड के लिए कहा गया था। लेकिन पांच दिन बाद भी रिफंड को लेकर कोई अग्रिम सूचना नहीं है। लोगों को रिफंड किस प्रकार से किया जाएगा इसके लिए कोई रूपरेखा तैयार नहीं की गई है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />एचएसआरपी लगाने के लिए 16 अक्टूबर का स्लॉट बुक किया हुआ है, सूचना मिली थी कि सभी को पांच दिन के अंदर प्लेट लगेंगी लेकिन अभी तक कोई सूचना नहीं है ना ही प्लेट लगने की और ना ही रिफंड की।<br /><strong>- नरेन्द्र कुमार, प्रेम नगर</strong></p>
<p>विभाग को प्लेट लगाने, नए आवेदन और रिफंड को लेकर स्थिति स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि रिफंड नहीं होने की स्थिति में लोगों दोबारा शुल्क जमा करना पड़ेगा।<br /><strong>- सैफ मोहम्मद, विज्ञान नगर</strong></p>
<p>वाहन मालिकों में आवेदन के बाद अब प्लेट लगने और रिफंड को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पहले आवेदन के लिए हजारों लोग आते थे, अब एक भी नहीं आ रहा। विभाग की ओर से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।<br /><strong>- विजय प्रजापति, यातायात सलाहकार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />उच्च स्तर की ओर से प्लेट लगाने, नए पोर्टल और रिफंड को लेकर अभी कोई जवाब नहीं आया है। डीलरों को प्लेट लगाने के लिए बोला हुआ है। आगे नए आदेश आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे।<br /><strong>- दिनेश सिंह सागर, आरटीओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 17:47:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उत्तर पश्चिम रेलवे की सभी ट्रेनों के डिब्बों में लगाए गए 11000 बायो टॉयलेट</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रेलवे की ओर से ट्रेनों और आसपास के वातावरण को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए डिफेन्स रिसर्च एवम् डेवलपमेंट संस्थान के तकनीकी सहयोग से सभी ट्रेनों के सवारी डिब्बो में बायो टॉयलेट लगाने का कार्य किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/11000-bio-toilets-installed-in-all-the-train-coaches-of/article-85266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(9)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय रेलवे की ओर से ट्रेनों और आसपास के वातावरण को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए डिफेन्स रिसर्च एवम् डेवलपमेंट संस्थान के तकनीकी सहयोग से सभी ट्रेनों के सवारी डिब्बो में बायो टॉयलेट लगाने का कार्य किया गया है।उत्तर पश्चिम रेलवे की सभी सवारी गाड़ियों के डिब्बों में लगभग 11000 बायो टॉयलेट लगा दिए गए हैं।</p>
<p>उत्तर पश्चिम रेलवेके मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार परंपरागत टॉयलेट से स्टेशनों एवं रेलवे ट्रैक पर अत्यधिक गंदगी को देखते हुए वर्ष 2013 से डिफेन्स रिसर्च एवम् डेवलपमेंट संस्थान के तकनीकी सहयोग से सभी ट्रेनों के सवारी डिब्बो में बायो टॉयलेट लगाने  का कार्य प्रारंभ किया गया था। बायो-टॉयलेट एक संपूर्ण अपशिष्ट प्रबंधन समाधान है जो बैक्टीरिया इनोकुलम की मदद से ठोस मानव अपशिष्ट को बायो-गैस और पानी में बदल देता है। समय समय पर आवश्यकतानुसार मात्रा कम होने पर इन बैक्टीरिया को बायो टैंक मे डाला जाता है। बायो-टॉयलेट का बचा हुआ पानी रंगहीन, गंधहीन और किसी भी ठोस कण से रहित होता है। इसके लिए किसी और उपचार, अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे वातावरण  पर्यावरण अनुकूल रहता है। बायो-टॉयलेटके प्रयोग से रेल लाइन पर अपशिष्ट  पदार्थ एवं पानी नहीं गिरता है, जिससे  जंग आदि की समस्या नहीं होने से रेलवे ट्रैक की गुणवत्ता एवं उम्र में बढ़ती है। बायो-टॉयलेटके प्रयोग सेकोच मेंटेनेंस स्टाफ को भी डिब्बे के नीचे अंडर फ्रेम में कार्य करते समय गंदगी और बदबू से राहत मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 18:46:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरानी बसों में लगाई सीएनजी किट, ट्रायल में ही फेल हुई</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान रोडवेज की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत बारां डिपो की एक बस में कंपनी ने सीएनजी किट लगाकर ट्रायल किया था, जो सफल नहीं हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cng-kit-installed-in-old-buses-failed-in-the-trial/article-75607"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/bus.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। बढ़ती तेल की कीमतों को देखते हुए दिल्ली की तर्ज पर राजस्थान रोडवेज ने भी प्रदेश में सीएनजी किट लगी बस संचालित करने की योजना बनाई थी, जो ट्रायल में ही फेल हो गई। राजस्थान रोडवेज की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत बारां डिपो की एक बस में कंपनी ने सीएनजी किट लगाकर ट्रायल किया था, जो सफल नहीं हुआ। इसके बाद दुबारा से ट्रायल के लिए जयपुर डिपो से बस संचालित की गई, जिसका भी परिणाम अपेक्षित नहीं रहा। बारां डिपो की एक पुरानी बस में इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड कंपनी (आईजीएल) ने अपने खर्चे पर सीएनजी किट लगाकर 8 जुलाई 2021 से ट्रायल के लिए संचालित किया था, जो सफल नहीं हुआ। इसके बाद इसी कंपनी ने जयपुर डिपो की एक बस में किट लगाकर दुबारा ट्रायल किया। इस बस को जयपुर-दिल्ली मार्ग पर संचालित किया गया था, जिसे अब बंद कर दिया गया। अब इस बस को वापस डीजल इंजन में कनवर्ट करवा दिया गया। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीएनजी बस से यह फायदा</strong><br />सीएनजी बस चलने से पॉल्युशन कम हो सकेगा। सीएनजी 84.92 रुपए प्रति किलो है, जबकि डीजल 90.36 रुपए प्रति लीटर है। डीजल से बस का एवरेज 4-5 किलोमीटर प्रतिलीटर का है। वहीं सीएनजी का एवरेज 6 किमी प्रति किलो का आएगा। इस कंपनी का जयपुर में कोई पंप नहीं होने के चलते रोडवेज की सीएनजी बस बावल (हरियाणा) में ही गैस भरवाती थी। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इसलिए सफल नहीं</strong><br />देश के कई राज्यों में सीएनजी बस चल रही है। यह सीएनजी बसें सिटी-सिटी में ही संचालित हो सकती है। जबकि रोडवेज ने इसे इंटरसिटी संचालित किया था। इसके लिए पुरानी बस में इंजन बदलकर सीएनजी किट लगाया गया था। इसलिए भी इसका परिणाम आशानुरूप नहीं रहा। रोडवेज की ओर से बोर्ड बैठक में 50 सीएनजी व 50 इलेक्ट्रिक बस खरीदने के प्रस्ताव को पास किया था, जिस पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो रही।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इनका कहना है</strong><br />कंपनी की ओर से ट्रायल के लिए एक बस में डीजल इंजन को बदलकर सीएनजी किट लगाकर उसे दिल्ली रूट पर चलाया गया था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। अब इस बस को पुन: डीजल इंजन में कनवर्ट कर दिया गया।<br /><strong>- प्रतीक शर्मा, मुख्य प्रबंधक, जयपुर डिपो</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 10:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की लागत वाली ई-मित्र प्लस मशीनें खा रही धूल</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले में लगाई करीब 8 करोड़ लागत की 398 ई-मित्र प्लस मशीनों में से कई धूल फांक रही हैं तो कुछ पीक थूकने का एक कॉर्नर बनकर रह गई है। करीब 5 साल पहले जिले में 398 ई-मित्र प्लस मशीनें लगाई गई थी। इनमें से कई स्थानों पर इन मशीनों से एक दिन भी काम नहीं लिया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-costing-crores-are-gathering-dust/article-36748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/karoro-ki-lagat-wali-e-mitra-plus-machines-kha-rahi-dhool...kota-news..7.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आधुनिक तकनीक के माध्यम लोगों को एक ही छत के नीचे कई तरह की सरकारी और निजी सेवा मिले, इसी उद्देश्य से पूर्व सरकार की ओर से शुरू की गई ई-मित्र प्लस मशीनें कई विभागों में शो-पीस बन कर रह गई है। इसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। आमजन में जागरुकता व जानकारी के अभाव में सालों बीत जाने के बाद भी संबंधित विभागों की बेपरवाही के कारण आमजन इसका उपयोग नहीं कर पा रहा है। नतीजा ये है कि कोटा जिले में लगाई करीब 8 करोड़ लागत की 398 ई-मित्र प्लस मशीनों में से कई धूल फांक रही हैं तो कुछ पीक थूकने का एक कॉर्नर बनकर रह गई है। करीब 5 साल पहले जिले में 398 ई-मित्र प्लस मशीनें लगाई गई थी। इनमें से कई स्थानों पर इन मशीनों से एक दिन भी काम नहीं लिया गया। इसका एक उदाहरण एमबीएस में पूछताछ काउंटर, फिजियोथैरेपी विभाग और पुरानी ओपीडी में 5 साल पहले 3 मशीनें भी हैं जिनका संचालन आज तक नहीं हुआ है। इन मशीनों पर धूल जमी हुई है। इसके अलावा नगर निगम, नगर विकास न्यास मेडिकल कॉलेज और रामपरा सेटेलाइट हॉस्टिपल के अलावा भी शहर में कई विभागों में लगाई हुई मशीनें उपयोग में नहीं ली जा रही है। </p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन मशीनों के रख रखाव का जिम्मा एक निजी कम्पनी को दिया हुआ है और वो कम्पनी विभाग से पैसा उठा रही है। गौरतलब है कि 2018 में तत्कालीन राजस्थान सरकार की ओर से राज्य के 33 जिलों की 328 तहसील और 171 उप तहसील मुख्यालयों सहित विभिन्न स्थानों व सरकारी कार्यालयों में 14891 ई-मित्र मशीनें लगाई गई थी। करीब 3.72 अरब रूपए की लागत से राज्यभर में लगाई गई मशीनों में से कई मशीनों का संचालन नहीं हो पाया है। तत्कालीन राज्य सरकार ने यह सोचकर मशीनें लगाई थी कि सरकारी कार्यालयों में इन मशीनों के शुरू होने के बाद लोगों को दफ्तर के चक् कर नहीं काटने पड़ेंगे लेकिन विभागीय लापरवाही से मशीनें उपयोग में नहीे आ रही है। </p>
<p>मशीन के जरिए यह मिलती हैं सेवाएं<br />लोगों को विभागीय कार्यों के लिए भटकना ना पड़े इसलिए इस मशीन से गिरादावरी, जमाबंदी की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र का प्रिन्ट, बिजली-पानी का बिल जमा करने सहित अन्य कई प्रकार की सुविधाएं। </p>
<p><strong>ऐसी होती है ई-मित्र प्लस मशीन</strong><br />ई-मित्र मशीनें एटीएम जैसी दिखाई देती है। इसमें 32 इंच एलईडी के साथ मॉनिटर डिवाइस, वेब कैमरा, केश असेप्टर, कार्ड रीडर, मैटलिक कीबोर्ड, रसीद के लिए नॉर्मल प्रिंटर तथा लेजर प्रिंटर आदि मौजूद है। मशीन में मौजूद वैब कैमरे से आम नागरिक उच्चाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बातचीत भी कर सकते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong></p>
<p>कोटा जिले में लगी 398 में से ब्लॉक में लगी 4 मशीनें बारिश के दौरान खराब हो गई थी जो चार्जेबल है। शहरी क्षेत्र की सभी मशीनें चालू हैं। संस्थान उपयोग में नहीं ले रहे वो अलग बात है। जिन-जिन विभागों में लगाई गई हैं उन विभागाध्यक्षों को एक-एक नोडल कार्मिक इन मशीनों के लिए नियुक्त करने के निर्देश दिए हुए है। एमबीएस अस्पताल में भी इसके बारे में पत्र लिखे गए है। सभी संस्थानों में कहा गया है कि इन मशीनों का प्रचार-प्रसार करें और ऐसे स्थानों पर लगाए जहां ये आसानी और  सुगमता से आॅपरेट हो सकें। <br /><strong>-मुकेश विजय, अतिरिक्त निदेशक, सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग</strong></p>
<p>करीब 4-5 साल पहले लगाई गई थी। इनको चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है। शुरू से ही नॉन आॅपरेटिव है। कभी काम में ही नहीं ली। मेडिकल कॉलेज में भी लगाई गई थी, वहां भी बंद पड़ी है। <br /><strong>-डॉ. दिनेश वर्मा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Feb 2023 14:48:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>  गुमानपुरा फ्लाईओवर पर लगाई टेंपरेरी हैलोजन लाइट </title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास की ओर से 57 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से बनाए गए गुमानपुरा फ्लाईओवर पर बीच में फिलहाल टेंपरेरी हैलोजन लाइट लगाई गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/temporary-halogen-light-installed-on-gumanpura-flyover/article-7913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/eee1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास की ओर से 57 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से बनाए गए गुमानपुरा फ्लाईओवर पर बीच में फिलहाल टेंपरेरी हैलोजन लाइट लगाई गई है। नगर विकास न्यास द्वारा हाल ही में ज्वाला तोप सब्जी मंडी से इंदिरा गांधी सर्किल होते हुए वल्लभनगर चौराहे तक फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया है । फ्लाईओवर तैयार होने के बाद उस पर लोड टेस्टिंग कर फ्लाईओवर पर ट्रैफिक तो शुरू कर दिया लेकिन उस पर रोड लाइट नहीं लगाई गई।  जिससे अभी तक फ्लाईओवर पर दिन के समय ही ट्रैफिक चल रहा था।  अंधेरा होते ही रात 8:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक फ्लाईओवर पर ट्रैफिक बंद कर रखा था।  <br /><br /> नगर विकास न्यास द्वारा फ्लाईओवर पर स्थाई बिजली के खंभे लगाकर लाइट शुरू करने में समय लग रहा है। इस कारण से न्यास द्वारा फ्लाईओवर के बीच में मोड पर अस्थाई  रूप से हैलोजन लाइट लगाई गई है । न्यास अधिकारियों के अनुसार करीब डेढ़ दर्जन हैलोजन लाइट फ्लाईओवर के दोनों तरफ  लगाई गई है। जिससे रात के समय मोड पर वाहन चालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े । उन्होंने बताया कि बिजली के खंभे लगाकर रोड लाइटें चालू की जाएंगी लेकिन उसे इस महीने तक लगाया जा सकेगा । उस समय तक अस्थाई  रूप से व्यवस्था करते हुए फ्लाईओवर पर बीच में मोड़ के पास करीब डेढ़ दर्जन हैलोजन लाइट लगाई गई है। जिससे रात के समय भी ट्रैफिक को फ्लाईओवर से निकलने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो। <br /><br /> गौरतलब है कि कोटडी चौराहे पर ग्रेड सेपरेटर का निर्माण कार्य चलने से वहां पर ट्रैफिक डायवर्ट किया हुआ है । ऐसे में सब्जी मंडी से कोटडी चौराहा होकर छावनी जाने वाले वाहन और सीएडी दादाबाड़ी की तरफ  से कोटडी होकर नयापुरा जाने वाले वाहन गुमानपुरा स्थित फ्लाईओवर से ही होकर निकल रहे हैं । जिससे फिलहाल इस फ्लाईओवर पर ट्रैफिक का दबाव अधिक है । ऐसे में जहां रात के समय इस फ्लाईओवर को लाइटों के अभाव में बंद किया गया जा रहा था वह अब शुरू कर दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Apr 2022 16:45:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेज में इको मशीन स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक और इको मशीन स्थापित कर दी है। इसका  ट्रायल भी कर लिया है। पहले दिन दो लोगों पर ट्रायल कर चेक किया।  मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से सेवाएं प्रारंभ हो जाएगी।     ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/eco-machine-installed-in-medical-college/article-6954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/013.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक और इको मशीन स्थापित कर दी है। इसका  ट्रायल भी कर लिया है। पहले दिन दो लोगों पर ट्रायल कर चेक किया। इसमें थोड़ा सा तकनीकी फॉल्ट था, जिसके चलते इसको शुरू नही किया गया। हालांकि, ये छोटा सा इशू था। इसको बुधवार को दूर कर लिया है। ऐसे में इसी दिन से इसकी शुरूआत कर दी जाएगी। सर्विस इंजीनियर शुभम शर्मा ने बताया कि मशीन पर ट्रायल किया है। रिजल्ट अच्छे मिले है। थोड़ी सी सेटअप में प्रॉब्लम थी। इसको भी दूर कर दिया जाएगा। इसके बाद विधि विधान से मशीन की शुरूआत कर दी जाएगी। हालांकि, इससे पूर्व इसका एक बार और ट्रायल होना है। ये ट्रायल मरीजों पर किया जाना है। फिर भी लगभग तय है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार से सेवाएं प्रारंभ हो जाएगी। <br /><br /><strong>अभी कार्डियोलॉजी में सेवाएं</strong><br />अस्पताल में एक मशीन पहले से संचालित है, लेकिन कार्डियोलॉजी  विभाग के अधीन है। इसमें हार्ट के मरीजों के लिए उपयोग में ली जा रही है। जबकि, ये मशीन मेडिसिन में स्थापित हुई है। इसका संचालन मेडिसिन विभाग द्वारा किया जाएगा। खास बात ये है कि मेडिसिन में पहली बार मशीन स्थापित की गई है। इस तरह से अस्पताल में दो मशीनें हो चुकी है। दोनों विभागों की अपनी मशीनें हो चुकी है।<br /><br /><strong>14 लाख रुपये हुए थे खर्च</strong><br />इस मशीन में 14 लाख रुपये खर्च हुए है। इससे पूर्व मेडिसिन विभाग में टीएमटी मशीन भी स्थापित की जा चुकी है। इनके स्थापित होने से मरीजों को काफी सुविधाएं मिलेगी। हालांकि, मेडिसिन विभाग ने इससे पूर्व भी कार्डियोलॉजी की मशीन का काफी कम यूज किया है। जबकि, मरीज उनके पास भी काफी आये थे। इसके बावजूद भी उपयोग न के बराबर रहा है। हालांकि, ये खुद की मशीन होने से अधिक उपयोग हो सकेगा।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में इको मशीन स्थापित कर दी है। इस पर ट्रायल भी किया है। बुधवार से सेवाएं प्रारम्भ कर दी जाएगी।<br /><strong>- डॉ गिरीश वर्मा, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन, मेडिकल कॉलेज, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 17:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज ही चलेंगे, बिजली सबमीटरों का कोई कुछ नहीं कर सकता,  करीब 40 लाख उपभोक्ता झेल रहे हैं इस अनदेखे 'करंट' को</title>
                                    <description><![CDATA[बिना एक्यूरेसी गारंटी के प्रदेश में करोड़ों बिजली सबमीटर्स लगे हुए हैं। करीब एक दर्जन प्राइवेट कम्पनियों के ये सबमीटर कम-ज्यादा चलने या खराबी पर किराएदारों उपभोक्ताओं की जेब ढीली करते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/electricity-submeters--will-run-fast--no-one-can-do-anything-with-electricity-submeters--about-40-lakh-consumers-are-facing-this-unseen--current/article-6602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sub-meter-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बिना एक्यूरेसी गारंटी के प्रदेश में करोड़ों बिजली सबमीटर्स लगे हुए हैं। करीब एक दर्जन प्राइवेट कम्पनियों के ये सबमीटर कम-ज्यादा चलने या खराबी पर किराएदारों उपभोक्ताओं की जेब ढीली करते हैं। औसतन बड़े शहरों सहित सभी जिलों में करीब 40 लाख उपभोक्ता बिजली के इस अनेदेखे करंट को झेल रहे हैं। बिजली कम्पनियों ने सबमीटर्स लगाने की छूट तो दे रखी है, लेकिन इनको लगाने, मरम्मत या गुणवत्ता जांच के कोई नियम और प्रावधान नहीं है। छोटे उपभोक्ताओं की इन मीटर्स को तेज या धीमे चलने की शिकायतें बनी रहती हैं। अधिकांश मीटर्स खराब होने के बाद डिस्पोज ही करने पड़ते हैं और दूसरा मीटर लगवाने से भार उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।</p>
<p><strong>मेन मीटर और सबमीटर्स की रीडिंग में अंतर</strong><br />मीटर तेज चलने पर प्राइवेट कम्पनी का सर्विसमैन ग्राहक को यही कहता है कि ये तो तेज ही चलेंगे, कोई इसमें कुछ भी नहीं कर सकता। किराएदारों के लिए मुख्य मीटर से कनेक्टेड एक और उससे अधिक सबमीटर्स लगते हैं। मेन मीटर और सबमीटर्स की रीडिंग में मिलान पर अधिक यूनिट का अंतर समझ में आता है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:707px;" colspan="2"><strong>बिजली उपभोक्ताओं की फैक्ट फाइल</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41.5px;">
<td style="height:41.5px;width:365.867px;">कुल बिजली उपभोक्ता       </td>
<td style="height:41.5px;width:341.133px;">1.52 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:365.867px;">घरेलू उपभोक्ता                 </td>
<td style="height:41px;width:341.133px;">1.18 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:365.867px;">कृषि उपभोक्ता                    </td>
<td style="height:41px;width:341.133px;">14 लाख</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:365.867px;">अघरेलू उपभोक्ता                 <strong><br /></strong></td>
<td style="height:41px;width:341.133px;">20 लाख<strong><br /></strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:706px;" colspan="2"><strong>बिजली खपत</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:353.45px;">कृषि क्षेत्र में                       </td>
<td style="width:352.55px;">42%</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:353.45px;">उद्योग क्षेत्र में                    </td>
<td style="width:352.55px;">28%</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:353.45px;">घरेलू क्षेत्र में                      </td>
<td style="width:352.55px;">22%</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:353.45px;">कॉमर्शियल क्षेत्र में               </td>
<td style="width:352.55px;">8%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><strong>इन कम्पनियों के सबमीटर्स की खपत</strong><br />बाजार में एलमर, लेन, फाइन, इंडोटेक, ल्यूमिनस, एवन, जयपुर मैटल्स, जीनस जैसी एक दर्जन कम्पनियों के सबमीटर्स उपलब्ध हैं। हर जिले में ये हजारों लाखों की संख्या में लगे हैं। बाजार की प्रचलित दरों में ये 650 रुपए से 2500 रुपए में उपलब्ध हैं। राजस्थान में 900 से 1500 रुपए मूल्य के सबमीटर्स ज्यादा बिकते हैं।</p>
<p>सम्पत्ति मालिक को किराएदार के लिए सबमीटर्स लगाने की छूट है, लेकिन इनको लगाने या मरम्मत करने के प्रावधान हमारे पास नहीं होते। यह सम्पत्ति मालिक और किराएदार के बीच आपसी समझौते का मामला है। किसी भी तरह की खराबी होने या विवाद में वे ही जिम्मेदार होंगे।<br /><strong>- अजीत सक्सेना, एमडी, जयपुर डिस्कॉम</strong></p>
<p>हमने कई बार बिजली सबमीटर्स के तेज चलने की शिकायतें की। बिजली कम्पनियां जिम्मेदारी नहीं लेती और मालिक दूसरा मीटर लगवाने की बात कहते हैं। बाजार में दूसरे मीटर्स की भी कोई गांरटी नहीं होती। मीटर तेज चलने पर मजबूरी में हम ज्यादा बिल चुकाते रहते हैं।<br /><strong>-विक्रम सिंह, किराएदार, निवासी हसनपुरा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 10:07:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर की हवा में घुले परागकण, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की बढ़ी मुसीबतें</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर की हवा में इन दिनों परागकण की मौजूदगी हो चुकी है और यह अस्थमा-एलर्जी के मरीजों के लिए मुसीबत बन गए हैं। होलोप्लेलिया इंटीग्रिफोलिया ट्री या चिलबिल ट्री जिसे आम भाषा में बंदर की रोटी भी कहा जाता है, यह शहर का सबसे एलर्जेनिक पौधा परागकण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pollen-particles-dissolved-in-the-air-of-the-city--increased-problems-of-asthma-and-allergy-patients--detected-from-burcard-machine-installed-in-asthma-bhawan/article-5233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/asthma-&amp;-allergy.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। शहर की हवा में इन दिनों परागकण की मौजूदगी हो चुकी है और यह अस्थमा-एलर्जी के मरीजों के लिए मुसीबत बन गए हैं। होलोप्लेलिया इंटीग्रिफोलिया ट्री या चिलबिल ट्री जिसे आम भाषा में बंदर की रोटी भी कहा जाता है, यह शहर का सबसे एलर्जेनिक पौधा परागकण है। यह परागकण एक से दो महीने की अवधि के लिए हवा में बहुत अधिक मात्रा में रहता है। यह प्लांट परागकण जयपुर शहर की हवा में इस साल पहली बार 28 फरवरी को देखा गया। इस परागकण का हवा में बुर्कार्ड परागकण काउंटर नामक एक उपकरण की मदद से पता चला है। यह एक परागकण प्रवेश मशीन है, जिसे 12 वर्ष पहले अस्थमा भवन विद्याधर नगर जयपुर स्थित श्वसन केंद्र और अस्पताल में स्थापित किया था। अस्थमा भवन की निदेशक डॉ. निष्ठा सिंह ने बताया कि दमा परागण की वेबसाइट पर दैनिक परागकण गणना रिकॉर्ड की जाती है। इस डेटा को हर कोई देख सकता है। अस्थमा और एलर्जी के रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।<br /><br /><strong>सुबह-शाम आमजन रहें सतर्क</strong><br />डॉ. सिंह ने बताया कि यह परागकण सुबह और शाम के समय हवा में उच्च सांद्रता में मौजूद होता है। जिन रोगियों को इस पौधे से एलर्जी है, उन्हें अपने घरों से बाहर जाना कम करना चाहिए और सुबह और शाम के समय ट्रिपल लेयर्ड मास्क से नाक और मुंह को अच्छी तरह से ढकना चाहिए। लोगों को इस परागकण के मौसम में अपनी बाहरी गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी जाती है। यह एलर्जी के मौसम की शुरुआत को दर्शाता है, क्योंकि अस्थमा एलर्जी के रोगियों की संख्या में इन दिनों काफी बढ़ोतरी हो रही है। यह परागकण मौसम अप्रैल के अंत तक रहेगा और मरीज नाक से पानी बहना, सांस लेने में समस्या, आंखों में जलन और चकत्ते सहित विभिन्न लक्षणों के साथ अस्पताल में आ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pollen-particles-dissolved-in-the-air-of-the-city--increased-problems-of-asthma-and-allergy-patients--detected-from-burcard-machine-installed-in-asthma-bhawan/article-5233</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 14:25:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>500 वर्गमीटर से बड़े भूखण्डों पर लगाना होगा रूफ टॉप सोलर पैनल</title>
                                    <description><![CDATA[मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन का जोड़ा प्रावधान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/500-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AB-%E0%A4%9F%E0%A5%89%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%B2/article-3947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/udh-busilding1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरी क्षेत्रों में अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, रिसोर्ट, धर्मशाला, छात्रावास और 500 वर्गमीटर से बड़े भूखण्ड पर अब रूफ टॉप सोलर पैनल लगाना अनिवार्य होगा। नगरीय विकास विभाग ने मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन करते हुए इसका सख्ती से प्रावधान किया है। प्रावधानों के अनुसार आवासीय भूखण्डों पर रूफ टॉप सोलर लगाने की बाध्यता की गई है। यह गलियारा, कॉरिडोर, सीढ़ियां व अन्य कॉमन एरिया में इनके जरिए रोशनी की अनिवार्यता भी की गई है। वर्तमान में बायलॉज में सोलर लाइटिंग का ही प्रावधान था, जिसे अब रूफ टॉप सोलर पैनल लगाना अनिवार्य किया गया है।</p>
<p><strong><br /> सिरोही पालिका अध्यक्ष निलंबित</strong><br /> स्वायत्त शासन विभाग ने नवगठित नगर पालिका जावाल सिरोही के अध्यक्ष विक्रम राणा को निलंबित कर दिया है। राणा के खिलाफ एसीबी में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी। इसके बाद कार्यवाहक चेयरमैन की जिम्मेदारी कानाराम भील को दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jan 2022 11:54:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने एसएमएस अस्पताल के IDH में लगवाई प्रिकॉशन डोज</title>
                                    <description><![CDATA[मीणा ने कहा कि वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना जैसी महामारी को मात दी जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-idh-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9C/article-3933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/whatsapp-image-2022-01-11-at-10.49.53---copy.jpeg.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने मंगलवार सुबह एसएमएस अस्पताल के IDH सेंटर में कोरोना की प्रिकॉशन डोज़ लगवाई। इस अवसर पर मीणा ने कहा कि वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना जैसी महामारी को मात दी जा सकती है।<br />  मीणा ने कहा कि वैक्सीनेशन के प्रति आम लोगों में है जबरदस्त उत्साह है। राज्य में अब तक 93 प्रतिशत से अधिक आबादी को कोविड की प्रथम डोज़ लग चुकी है। 76 प्रतिशत लोगों को लग चुकी है द्वितीय डोज। प्रदेश के 40% से अधिक 15 से 18 आयु वर्ग के किशोर किशोरियों को भी लग चुकी है प्रथम डोज। प्रिकॉशन डोज के प्रति भी समूह में  उत्साह है और अब तक लगभग एक लाख लोगों ने वैक्सीन की तीसरी डोज लगवाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jan 2022 10:57:26 +0530</pubDate>
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                <title>मॉन्यूमेंट्स के साथ ही जयपुर ने वाइल्ड लाइफ पर्यटन के क्षेत्र में बनाई पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[283 साल बाद स्मारक में लगा था जयपुर के निर्माता सवाई जयसिंह द्वितीय का स्टेच्यू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%AB-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2502"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/das.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दर्शनीय पर्यटन स्थल एवं अपनी मेहमान नवाजी के लिए जाने जाना वाला जयपुर गुरुवार को 294वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस दौरान जैसे-जैसे गुलाबी नगरी की उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे इसका स्वरूप और निखरता गया। <br /> जयपुर के निर्माता महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने शहर बनाने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध जंतर-मंतर (1728-1734) स्मारक भी बनवाया था। इसे बनाने के करीब 283 साल बाद स्मारक के इंटर प्रिटेशन सेंटर में सवाई जयसिंह (द्वितीय) का स्टेच्यु लगाया था। स्मारक से मिली जानकारी के अनुसार गुड़गांव से इसे बनवाकर सन 2016-17 में यहां प्रदर्शित किया था। प्रदेश में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले मॉन्यूमेंट्स में जंतर-मंतर पहला स्मारक है, जहां इसके निर्माता का स्टेच्यु प्रदर्शित किया गया। <br /> <br /> <strong>शहर के दो मॉन्यूमेंट्स यूनेस्को की लिस्ट में शामिल</strong><br /> पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अनुसार जयपुर शहर के जंतर-मंतर स्मारक और आमेर महल दो ऐसे मॉन्यूमेंट्स है, जो यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल हैं। जयपुर ऐसी पहली सिटी है, जहां के दो मॉन्यूमेंट्स यूनेस्को की इस लिस्ट में जगह बनाई है। जयपुर शहर के इन दोनों मॉन्यूमेंट्स पर पर्यटकों की अधिक आवाजाही देखने को मिलती है। <br /> <br /> <strong>उज्जैन के जंतर-मंतर में भी स्टेच्यू</strong><br /> महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने जयपुर बसाने के साथ ही देश में पांच जंतर-मंतर का निर्माण कराया था। उज्जैन स्थित जंतर-मंतर में जयपुर से उनका स्टेच्यु बनवाया गया था। जिसे सन 2016 में प्रदर्शित किया था। <br /> <strong><br /> बढ़ते गए पर्यटन के अवसर</strong><br /> पिंकसिटी में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिन्होंने देसी और विदेशी पर्यटकों के बीच अपनी एक खास पहचान बनाई है। पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक का कहना है कि जैसे-जैसे गुलाबी नगरी की उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे यहां पर्यटन के अवसर भी बढ़ते गए। पहले पर्यटक जयपुर आकर किले-महल देखा करते थे। अब इन्हें देखने के साथ ही जयपुर में संचालित लॉयन, लेपर्ड और हाथी सवारी का भी लुत्फ उठा रहे हैं। पर्यटन के क्षेत्र में जयपुर अपना एक अहम स्थान रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 14:00:47 +0530</pubDate>
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