<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/%C2%A0artists/tag-90228" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title> Artists - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/90228/rss</link>
                <description> Artists RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गुम होती विरासत को कैमरे में कैद करने निकलेगी टोली, जयपुर से होगा &quot;राजस्थान अध्याय&quot; का आगाज़</title>
                                    <description><![CDATA[लुप्त होती लोक कला और शिल्प परंपराओं को सहेजने के लिए ‘भारतीय शहरों की गाथा’ अभियान के राजस्थान अध्याय की शुरुआत जयपुर से। 20 दिवसीय यात्रा के पहले दिन टोली सामोद, नवलगढ़, मुकुंदगढ़, डूंडलोड और मांडावा जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/skills-camera-jaipur-artists/article-164566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की लुप्त होती लोक कला और शिल्प परंपराओं को सहेजने की एक अनूठी पहल कल से शुरू होने जा रही है। "भारतीय शहरों की गाथा" अभियान के "राजस्थान अध्याय" की शुरुआत जयपुर से होगी और बीस दिन तक चलने वाली इस यात्रा का पहला दिन पूरी तरह शेखावाटी क्षेत्र की कला और शिल्प को समर्पित रहेगा। नवज्योति को कलाकार हिमांशु ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा की टोली कल सुबह जयपुर से रवाना होकर सबसे पहले सामोद गांव पहुंचेगी, जहां राजस्थान की पारंपरिक नगाड़ा बनाने की कारीगरी को नजदीक से देखा और दर्ज किया जाएगा।</p>
<p>सामोद के बाद टोली नवलगढ़ का रुख करेगी, जहां शीशे और मिट्टी से बनने वाली पारंपरिक भित्ति सजावट की कला को समझा जाएगा। यह कला अब सीमित परिवारों तक ही बची रह गई है। इसके बाद टोली मुकुंदगढ़ पहुंचेगी, जहां हाथ से कैंची बनाने की दुर्लभ होती जा रही पुरानी प्रक्रिया को करीब से देखा जाएगा। रास्ते में डूंडलोड भी शामिल रहेगा, जहां शेखावाटी की मशहूर हवेलियों, भित्ति चित्रकारी और पुरानी दीवार चित्रकला को भी नजदीक से जाना जाएगा। पहले दिन की यात्रा मांडावा में समाप्त होगी, जहां टोली स्थानीय स्थापत्य कला और चित्रकारी की समृद्ध परंपरा को समझकर इससे जुड़ी कहानियां दर्ज करेगी। इस पहले पड़ाव से ही यह साफ हो जाएगा कि शेखावाटी में आज भी कई ऐसी कलाएं और कारीगर मौजूद हैं, जिनकी कहानियां अब तक सामने नहीं आ सकी हैं। आने वाले दिनों में टोली राजस्थान के अन्य शहरों की परंपराओं को भी इसी तरह दर्ज करेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/skills-camera-jaipur-artists/article-164566</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/skills-camera-jaipur-artists/article-164566</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:03:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/111200-x-600-px%2910.png"                         length="1020737"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        