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                <title> Artists - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राष्ट्रीय गायन प्रतिभा प्रतियोगिता-2026, सुरों के राष्ट्रीय मंच पर जुटेंगी 10 राज्यों की 70 से अधिक चयनित युवा प्रतिभाएं</title>
                                    <description><![CDATA[सुर संगम का 37वां राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह एवं गायन प्रतिभा प्रतियोगिता 1-2 अक्टूबर को टोंक रोड स्थित होटल बीलवा पैलेस में। आयोजन में 10 राज्यों की 70 से अधिक युवा प्रतिभाएं शास्त्रीय, सुगम और लोक संगीत में प्रस्तुति देंगी। समारोह स्व. के.सी. मालू को समर्पित। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-singing-talent-competition-2026-more-than-70-selected-young-talents/article-166720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)71.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देशभर की उभरती युवा संगीत प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने वाला सुर संगम का 37वां राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह एवं राष्ट्रीय गायन प्रतिभा प्रतियोगिता-2026 आगामी 1 एवं 2 अक्टूबर को जयपुर के टोंक रोड स्थित होटल बीलवा पैलेस में आयोजित होगा। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के 10 राज्यों की 70 से अधिक चयनित युवा प्रतिभाएं अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। इस वर्ष यह आयोजन सुर संगम संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष स्व. के.सी. मालू को समर्पित रहेगा।</p>
<p>राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े 2 अक्टूबर को विजेता प्रतिभागियों को अवार्ड प्रदान करेंगे। सुर संगम के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश अग्रवाल ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित प्रतिभागी शास्त्रीय, सुगम एवं लोक संगीत की विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। समारोह में देश के प्रतिष्ठित संगीतज्ञों एवं कलाकारों की उपस्थिति युवा प्रतिभाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट होंगे मुख्य निर्णायक उन्होंने बताया कि देश भर से जयपुर पहुँचने वाली प्रतिभाओं के मूल्यांकन के लिए संगीत जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों का एक निर्णायक मंडल गठित किया गया है।पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट समारोह के मुख्य निर्णायक होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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                <title>क्षेत्रीय सिनेमा में बसती है भारत की आत्मा! सितारों ने खोले दिल के राज, बोले- कहानियां वर्ल्ड क्लास तो मंच भी वैसा चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[एक टॉक शो में कलाकारों ने क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत और चुनौतियों पर विचार साझा। शरमन जोशी ने क्षेत्रीय कहानियों को मंच और सुविधाएं देने तथा सिंगल स्क्रीन थिएटर बचाने की जरूरत बताई। ईशा कोपिकर ने डिजिटल दौर में दर्शकों के बदलते व्यवहार को चुनौती बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-soul-of-india-resides-in-regional-cinema-stars-revealed/article-166728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक खास टॉक शो में जब देश के जाने-माने कलाकार क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत पर बोलने के लिए मंच पर आए, तो उनकी बातों ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। अभिनेता शरमन जोशी ने कहा कि भारत की जहां आत्मा बसती है, वहां की कहानी कहना सबसे बड़ा कर्म है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय फिल्में देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले दर्शकों को अपनी कहानियों से जोड़ रही हैं, और यही इनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को उच्च स्तरीय मंच और सुविधाएं देने की। उन्होंने सिंगल स्क्रीन थिएटरों को बचाने की जरूरत पर भी बल दिया, यह कहते हुए कि इन्हीं थिएटरों ने क्षेत्रीय फिल्मों को बड़ा बनाया है। वहीं, अभिनेत्री ईशा कोपिकर ने कहा कि आज के दौर में दर्शक ही सबसे बड़ी ताकत बन गया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण और सोशल मीडिया ने लोगों के देखने के तरीके और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि दर्शक को अब दो घंटे तक सीट पर बैठाए रखना लेखकों और फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने राजस्थान से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक दक्षिण भारतीय फिल्म से की थी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं में काम करना भारत की असली ताकत है, और क्षेत्रीय सिनेमा का प्रभाव देश में हमेशा बना रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:40:47 +0530</pubDate>
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                <title>‘ऑक्टेव 2026’ में आठ राज्यों के लोक और शास्त्रीय नृत्य : पारंपरिक परिधान, संगीत, शिल्प और व्यंजनों से रूबरू होंगे जयपुरवासी</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वोत्तर भारत की लोक संस्कृति, नृत्य, संगीत, वेशभूषा, शिल्प और खानपान की विविधता जयपुर में 1 से 4 अक्टूबर तक ‘ऑक्टेव 2026’ में देखने को मिलेगी। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में आठ पूर्वोत्तर राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम 7 बजे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-octave-2026-jaipur-people-will-be-exposed-to-folk/article-166717"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)85.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध लोक संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य, संगीत, पारंपरिक वेशभूषा, शिल्प और खानपान की विविधता 1 से 4 अक्टूबर तक जयपुर में एक साथ साकार होगी। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर के सहयोग से चार दिवसीय ‘ऑक्टेव 2026’ का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में किया जाएगा।</p>
<p>सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम 7 बजे से होंगी। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. आश्विन एम. दलवी ने बताया कि ‘ऑक्टेव’ संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना और वहां की विविध परंपराओं से लोगों को रूबरू कराना है। इस बार जयपुर में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की लोक एवं शास्त्रीय नृत्य परंपराओं, संगीत, पारंपरिक परिधानों, शिल्प, चित्रकला और खानपान की बहुरंगी छवियां देखने को मिलेंगी। राज्यपाल बागडे होंगे मुख्य अतिथि, शेखावत करेंगे अध्यक्षता डॉ. दलवी ने बताया कि समारोह का उद्घाटन 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे होगा। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 16:01:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कैनवास पर दिखे अध्यात्म से मानव मन के द्वंद्व तक के रंग, जेसीसीए में 12 कलाकारों की 22 पेंटिंग्स बनीं आकर्षण का केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[निर्माण नगर स्थित जयपुर सेंटर ऑफ कल्चर एंड आर्ट्स की आर्ट गैलरी में 12 कलाकारों की 22 पेंटिंग्स से सजी नेशनल पेंटिंग एग्जीबिशन आकर्षण का केंद्र बनी। कलाकृतियों में अध्यात्म, मानव जीवन और मन के अंतर्द्वंद्व को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/colors-from-spirituality-to-conflict-of-human-mind-seen-on/article-165321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निर्माण नगर स्थित जयपुर सेंटर ऑफ कल्चर एंड आर्ट्स (जेसीसीए) की आर्ट गैलरी में इन दिनों कला के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। यहां देश के 12 कलाकारों की 22 पेंटिंग्स से सजी नेशनल पेंटिंग एग्जीबिशन कलाप्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। किसी चित्र में अध्यात्म की गहराइयों को उकेरा गया है, तो किसी में मानव जीवन और मन के अंतर्द्वंद्व को रंगों के जरिए अभिव्यक्त किया गया है। जेसीसीए की निदेशक मोनिका शारदा ने बताया कि प्रदर्शनी 10 अक्टूबर तक चलेगी। दर्शक सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक पेंटिंग्स का अवलोकन कर सकेंगे। प्रदर्शित सभी कलाकृतियां राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित नेशनल आर्टिस्ट क्रिएटिव कैंप में तैयार की गई थीं।</p>
<p>कलाकारों ने कैनवास पर ऑयल और एक्रेलिक रंगों के माध्यम से अपनी कल्पनाओं और भावनाओं को आकार दिया है। इन कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शनी में धर्मेंद्र राठौर, गौरी शंकर, जगदीश प्रसाद मीणा, डॉ. क्षमा द्विवेदी, मदन लाल, मनीष शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, रंजीत सरकार, सागर कांबले, सुनील के. विश्वकर्मा, डॉ. विजय एम. धोरे और डॉ. अमिता राज गोयल की पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 17:19:52 +0530</pubDate>
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                <title>आरआईसी में सजी कला-प्रदर्शनी में कला-प्रेमियों के बीच दुर्लभ कृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, 35 कलाकारों की 50 कलाकृतियां एक मंच पर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रही कला प्रदर्शनी के छठे दिन दर्शकों का उत्साह। प्रदर्शनी में 35 कलाकारों की करीब 50 कलाकृतियां प्रदर्शित, 17 राजस्थान के। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rare-works-of-art-became-the-center-of-attraction-among/article-165204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)30.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रही कला-प्रदर्शनी के छठे दिन भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। यहां देश के जाने-माने कलाकारों की लगभग पचास कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें साठ, सत्तर और अस्सी के दशक की दुर्लभ रचनाएं भी शामिल हैं। कुल पैंतीस कलाकारों में से सत्रह राजस्थान के हैं। प्रदर्शनी में पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत और उनके शिष्य समन्दर सिंह खंगारोत ‘सागर’ की कृतियां विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। शेखावत की चर्चित कृति ‘रागिनी विभास’ में राधा-कृष्ण को प्रकृति के बीच बेहद बारीकी से चित्रित किया गया है। छठे दिन भी दर्शक इस रचना के सामने रुककर उसकी सूक्ष्मता को निहारते नजर आए। प्रदर्शनी में एक और बड़ा आकर्षण रहा प्रसिद्ध संगीतकार डॉ. अश्विन एम. दलवी का इंस्टॉलेशन, जिसमें पचपन पारंपरिक वेणु बांसुरियों से स्वस्थ हृदय की धड़कन का आकार गढ़ा गया है। यह अनूठी कृति बीस सितंबर तक देखी जा सकेगी। युवा कलाकार डॉ. चन्द्रशेखर सेन की टेराकोटा में बनी रिलीफ शिल्प कृतियां भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं, जिनमें मानवीय भावों को मिट्टी की सतह पर उकेरा गया है।</p>
<p>क्यूरेटर निखत अंसारी के अनुसार, यह प्रदर्शनी दर्शकों को कला देखने के साथ-साथ समझने और अनुभव करने का अवसर देती है। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से भी कला-प्रेमी और संग्रहकर्ता यहां पहुंच रहे हैं। ऐसी दुर्लभ कृतियां भविष्य में मिलना आसान नहीं, इसलिए यह अवसर खास माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 14:48:49 +0530</pubDate>
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                <title>गुम होती विरासत को कैमरे में कैद करने निकलेगी टोली, जयपुर से होगा &quot;राजस्थान अध्याय&quot; का आगाज़</title>
                                    <description><![CDATA[लुप्त होती लोक कला और शिल्प परंपराओं को सहेजने के लिए ‘भारतीय शहरों की गाथा’ अभियान के राजस्थान अध्याय की शुरुआत जयपुर से। 20 दिवसीय यात्रा के पहले दिन टोली सामोद, नवलगढ़, मुकुंदगढ़, डूंडलोड और मांडावा जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/skills-camera-jaipur-artists/article-164566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की लुप्त होती लोक कला और शिल्प परंपराओं को सहेजने की एक अनूठी पहल कल से शुरू होने जा रही है। "भारतीय शहरों की गाथा" अभियान के "राजस्थान अध्याय" की शुरुआत जयपुर से होगी और बीस दिन तक चलने वाली इस यात्रा का पहला दिन पूरी तरह शेखावाटी क्षेत्र की कला और शिल्प को समर्पित रहेगा। नवज्योति को कलाकार हिमांशु ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा की टोली कल सुबह जयपुर से रवाना होकर सबसे पहले सामोद गांव पहुंचेगी, जहां राजस्थान की पारंपरिक नगाड़ा बनाने की कारीगरी को नजदीक से देखा और दर्ज किया जाएगा।</p>
<p>सामोद के बाद टोली नवलगढ़ का रुख करेगी, जहां शीशे और मिट्टी से बनने वाली पारंपरिक भित्ति सजावट की कला को समझा जाएगा। यह कला अब सीमित परिवारों तक ही बची रह गई है। इसके बाद टोली मुकुंदगढ़ पहुंचेगी, जहां हाथ से कैंची बनाने की दुर्लभ होती जा रही पुरानी प्रक्रिया को करीब से देखा जाएगा। रास्ते में डूंडलोड भी शामिल रहेगा, जहां शेखावाटी की मशहूर हवेलियों, भित्ति चित्रकारी और पुरानी दीवार चित्रकला को भी नजदीक से जाना जाएगा। पहले दिन की यात्रा मांडावा में समाप्त होगी, जहां टोली स्थानीय स्थापत्य कला और चित्रकारी की समृद्ध परंपरा को समझकर इससे जुड़ी कहानियां दर्ज करेगी। इस पहले पड़ाव से ही यह साफ हो जाएगा कि शेखावाटी में आज भी कई ऐसी कलाएं और कारीगर मौजूद हैं, जिनकी कहानियां अब तक सामने नहीं आ सकी हैं। आने वाले दिनों में टोली राजस्थान के अन्य शहरों की परंपराओं को भी इसी तरह दर्ज करेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:03:48 +0530</pubDate>
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