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                <title>एक एमआरआई मशीन पर पूरी हाड़ौती का भार</title>
                                    <description><![CDATA[ संभाग के सबसे बड़े व पुराने एमबीएस अस्पताल में अभी तक भी एमआरआई की सुविधा नहीं है।  न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे हाड़ौती का भार पड़ रहा है। वहां भी मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-of-hadoti-depend-on-one-mri-machine/article-11914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/mri.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । संभाग के सबसे बड़े व पुराने एमबीएस अस्पताल में अभी तक भी एमआरआई की सुविधा नहीं है।  न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे हाड़ौती का भार पड़ रहा है। वहां भी मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल के क्षेत्र में कोटा शहर में कई तरह की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एमबीएस व जे.के. लोन अस्पताल में नए ओपीडी ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। नए एनआईसीयू बनाए जा रहे हैं। लेकिन हालत यह है कि एमबीएस जैसे अस्पताल में जो सबसे पुराना व बड़ा है। वहां एमआरआई  जैसी सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>13.50 करोड़ का बजट स्वीकृत लेकिन समय लगेगा</strong><br />एबीएस अस्पताल में एमआरआई के लिए हो रही मरीजों की परेशानी को देखते हुए गत दिनों कोटा आए चिकित्सा मंत्री ने 13.50 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। जिससे यहां पहली बार नई एमआरआई मशीन लगेगी। लेकिन उसमें समय अधिक लगेगा। तब तक मरीजों को परेशान होना पड़ेगा। <br /><br /><strong>रोजाना 55 से 60 एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना 55 से 60 मरीजों की एमआरआई की जा रही है। पहले जहां दोपहर 2 बजे तक और रोजाना 30 मरीजों की ही एमआरआई की जा रही थी। लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने से इसका समय व संख्या दोनों बढ़ा दिए हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में रात 8 बजे तक और 55 से 60 एमआरआई की जा रही है। <br /><br /><strong>एमबीएस के मरीज भी मेडिकल कॉलेज जा रहे</strong><br />हालत यह है कि पूरे संभाग में सिर्फ न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही मात्र एक एमआरआई मशीन है। जिस पर संभाग के सभी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की एमआरआई की जा रही है। एमबीएस अस्पताल से भी मरीज मेडिकल कॉलेज ही भेजे जा रहे हैं।  यहां मरीज अधिक है और मशीन एक है। ऐसे में एमआरआई के लिए मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>यह है व्यवस्था</strong><br />हालत यह है कि एमबीएस में भर्ती मरीज की एमआरआई करवानी हो तो उसके लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। एक मई से सरकार द्वारा की गई सभी जांचें नि:शुल्क होने से अस्पताल प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सम्पर्क किया जाता है। वहां से एमआरआई के लिए समय लिया जाता है। उसके बाद सीटी स्कैन के काउंटर पर जानकारी दी जाती है। वहां मरीज की 0 की रसीद काटकर बस से उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। लेकिन इसमें समय और परेशानी मरीज व उनके परिजनों को भुगतनी पड़ रही है। <br /><br />एमबीएस में अभी तक एमआरआई मशीन नहीं है। अब उसके लिए 13.50 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है। नई मशीन लगने तक फिलहाल मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। लेकिन अब निजी संस्थानों से एमआरआई करवाने के लिए 7 दिन का शॉर्ट टर्म टेंडर किया जा रहा है। वह सोमवार को अपलोड हो जाएगा। उसके बाद मरीज को अस्पताल से ले जाने व छोड़ने और रिपोर्ट देने तक की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी। उसमें मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। <strong>-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong><br /><br />हाड़ौती में सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही एक एमआरआई मशीन है। यहां पूरे संभाग से मरीज आ रहे हैं। पहले दोपहर 2 बजे तक 30 मरीजों की एमआरआई हो रही थी। मरीजों की संख्या को देखते हुए उसका समय रात 8 बजे तक और 55 से 60 एमआरआई रोजाना की जा रही है। उसके बाद भी 20 से 25 दिन की वेटिंग चल रही है। <strong>-डॉ. चंद्र शेखर सुशील, अधीक्षक, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 15:30:18 +0530</pubDate>
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                <title> एक टंकी के भरोसे है कस्बे की पेयजल व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर में 40 वर्ष पूर्व 5 हजार की आबादी के तहत टंकी का निर्माण हुआ था। लेकिन लगातार बढ़ती आबादी के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota--the-drinking-water-system-of-the-town-is-based-on-a-tank/article-7007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/water-tank.jpg" alt=""></a><br /><p>इटावा। इटावा नगर में अभी तक भी 40 वर्ष पुरानी पेयजल व्यवस्था ही चली आ रही है। जिसके चलते इटावा नगर के कई वार्डों में लोगों को गर्मी के साथ ही पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार नगर में 40 वर्ष पूर्व 5 हजार की आबादी के तहत टंकी का निर्माण हुआ था। उसके बाद नगर की आबादी बढ़ती गई। नगर में हालांकि एक टंकी के साथ 17 ट्यूबवेल से पेयजल की आपूर्ति हो रही  है। लेकिन लगातार बढ़ती आबादी के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है।  <br /><br /><strong>कई वार्डो में रहती है पेयजल की समस्या</strong> <br />इटावा नगर में पुराने बाजार सहित कई क्षेत्रों में गर्मी के साथ ही पेयजल समस्याओं का लोगों को सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही कोटा रोड़, सरोवर नगर के कुछ क्षेत्रों में भी पानी की समस्या का लोगों को सामना करना पड़ता है। पुराने बाजार क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इन दिनों एक तो बिजली की अघोषित कटौती होती है, वहीं टंकी में पानी का भराव नहीं होने से 20-25 मिनिट ही पानी की आपूर्ति हो पाती है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><br /><strong>जर्जर टंकी से कभी भी हो सकता है हादसा</strong><br />इटावा नगर में 1980 में करीब 40 वर्ष पूर्व पेयजल योजना को लेकर टंकी का निर्माण हुआ था। लेकिन इन 40 वर्षों में टंकी की समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह से जर्जर हो गई है। कई बार टंकी का मलबा गिरने से लोग चोटिल हो चुके हैं। टंकी के आसपास रहने वाले लोग हमेशा हादसे को लेकर भयभीत रहते हैं। टंकी का हिस्सा कई जगह से क्षतिग्रस्त होने के साथ ही सीढ़ियां तक टूटी हुई हैं। जिसके कारण लंबे समय से सफाई तक नहीं हुई। जिससे पेयजल आपूर्ति को लेकर भी लोग हमेशा परेशान रहते है। <br /><br /><strong>2024 में नोनेरा-ऐबरा बांध से मिलेगा पानी</strong> <br />इटावा क्षेत्र में तीन नदियों का अथाह पानी होने के बाद भी लोगों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब कालीसिंध नदी पर बन रहे नोनेरा-ऐबरा डेम से इटावा क्षेत्र के 167 गांवों व इटावा नगर को पेयजलापूर्ति होगी। इसको लेकर स्वच्छ पेयजल जल जीवन मिशन के तहत प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है...</strong><br />टंकी कई जगह से जर्जर हो चुकी है। हमेशा हादसे का अंदेशा बना रहता है। आए दिन मलबा गिरने से कई बार दुर्घटना हो चुकी है। विभाग को भी अवगत करा दिया है। लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता। <br />-नियाजुद्दीन अंसारी, क्षेत्रवासी<br /><br />विभाग द्वारा पेयजल योजना के प्रस्ताव भिजवा दिए गए हंै। इस योजना से इटावा सहित 167 गांवों को इस योजना के तहत पानी मिल सकेगा। इटावा नगर में पुरानी टंकी को हटाने के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजे हैं। स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्यवाही होगी। नगर की पेयजल आपूर्ति को लेकर 5 टंकियों और पंप हाउस के भी प्रस्ताव भिजवाए हैं।<br />-अंकित सारस्वत, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, इटावा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 16:17:16 +0530</pubDate>
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                <title>तीसरी लहर की संभावना कम, आएगी भी तो ज्यादा घातक नहीं होगी : सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[वायरस के वेरिएंट पर भी काफी कुछ करेगा निर्भर, कोरोना के किसी भी वेरिएंट से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार अभी भी मास्क, करनी होगी कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर की पालना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%AE--%E0%A4%86%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80---%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9/article-2504"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/corona_puniya.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में जिस तेजी से फिर से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि कोरोना एक बार फिर से अपने रंग में आ गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के मामले बढ़ने का बड़ा कारण आमजन की ओर से त्योहारी सीजन में बरती गई लापरवाही है। साथ ही सब कुछ अनलॉक होने के बाद कोरोना के मामलों में कुछ उछाल आना स्वभाविक है। मुख्यमंत्री कोविड सलाहकार समिति के सदस्य और वरिष्ठ अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद काफी संख्या में लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है और लोगों में अब एंटीबॉडी भी डवलप हो गई है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना काफी कम हैउऔर इसका नतीजा है कि दोनों डोज लगवाने वाले लोगों में भी कोरोना ज्यादा गंभीर नहीं है और लोग घर में ही ठीक हो रहे हैं। साथ ही आने वाले समय में वैक्सीनेशन का आंकड़ा और बढ़ेगा और ऐसे में लोगों में हर्ड इम्यूनिटी भी डवलप होगी जिससे कोरोना का असर कम हो जाएगा।<br /> <strong><br /> बच्चों में भी एंटीबॉडी होने लगी डवलप</strong><br /> डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बच्चों में कोरोना के मामलों को लेकर कहा कि दिल्ली में जो सीरो सर्वे हुआ है उसके नतीजों में यह बात सामने आई है कि व्यस्कों के साथ ही बच्चों में भी एंटीबॉडी डवलप हो गई है। इसका कारण है कि कोरोना काल में बिना लक्षणों वाले मरीज भी देखे गए जिनमें बच्चे भी शामिल थे। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर आती भी है तो बच्चों पर भी प्रभाव काफी कम रहेगा। यही बात राजस्थान और जयपुर के मामले में भी देखी गई है कि यहां भी व्यस्कों के साथ ही बच्चों में भी एंटीबॉडी डवलप होने लगी है और ज्यादातर बच्चे लक्षण और बिना लक्षणों के कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। ऐसे में कोरोना अब ज्यादा गंभीर असर नहीं दिखाएगा।<br /> <strong><br /> वेरिएंट का लगाया जा रहा है पता</strong><br /> डॉ. सिंह ने बताया कि अभी एसएमएस मेडिकल कॉलेज में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के सैंपल की जिनोम सिक्वेंसिंग की जा रही है और कोरोना के वेरिएंट का पता लगाया जा रहा है। जब वेरिएंट का पता चलेगा तो यह बात भी साफ हो जाएगी कि वेरिएंट नया है या पुराना और कितना असरकारक है। हालांकि इसमें अभी समय लगेगा। <br /> <strong><br /> फिर मिले पांच पॉजिटिव</strong><br /> जयपुर में बुधवार को भी कोरोना मरीजों की संख्या में उतार चढ़ाव जारी रहा। एक दिन में पांच नए पॉजिटिव मिले और महज एक मरीज रिकवर होकर डिस्चार्ज हुआ। शहर के चांदपोल से 1, सिविल लाइंस से 1, गोविंदगढ़ से 1, मानसरोवर से 1 और वैशाली नगर से 1 केस पॉजिटिव मिला है। इसके साथ ही जयपुर में कोरोना के मामले बढ़कर एक लाख 87 हजार 877 हो गए हैं। एक्टिव केस फिर बढ़कर 55 पर पहुंच गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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