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                <title>budget - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महंगाई ने बिगाड़ा आम आदमी का बजट : सरकारी दावे जमीनी हकीकत से दूर, सैलजा ने कहा- लोग जरूरी खर्चों में कटौती करने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि महंगाई पर सरकार के दावे जमीनी हकीकत से दूर हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% रही, जबकि प्याज 48%, लहसुन 44% और चीनी 29% महंगी हुई। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों से गरीब-मध्यम वर्ग का बजट बिगड़ गया है। सरकार जमाखोरी रोककर खाद्य वस्तुएं सस्ती करे और प्रमाणपत्र सुधार शुल्क घटाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/inflation-has-spoiled-the-budget-of-the-common-man-governments/article-165679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/kumari-selja-03.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण न होने से गरीब और मध्यम वर्ग का घरेलू बजट बिगड़ गया है। सरकार महंगाई नियंत्रित होने के दावे कर रही है, जबकि आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि अगस्त में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई। हरियाणा में यह 3.92 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 4.46 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.38 प्रतिशत दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गांवों, किसानों, मजदूरों और सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में प्याज के दाम करीब 48 प्रतिशत, लहसुन 44 प्रतिशत, चीनी 29 प्रतिशत और अरहर दाल 6.5 प्रतिशत महंगी हुई है। दूध, बिजली, कपड़े, चप्पल, गेहूं पिसाई और मकान का किराया भी बढ़ा है। आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से परिवार भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी खर्चों में कटौती करने को मजबूर हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सांसद सैलजा ने सरकार से जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली मजबूत करने तथा दाल, चीनी और खाद्य तेल उचित दरों पर उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने बिजली, रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों पर राहत देने की भी मांग की। कुमारी सैलजा ने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में गलती सुधारने के लिए वसूले जा रहे शुल्क को भी अनुचित बताया। उन्होंने सरकार से बढ़ा शुल्क वापस लेकर सुधार प्रक्रिया सरल और न्यूनतम शुल्क वाली बनाने की मांग की।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 18:11:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>असर खबर का : 4.08 करोड़ की लागत से बनी जीएनएम हॉस्टल की नई बिल्डिंग शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ बजट आने तक 25 बेड से शुरू होगा संचालन, दूर-दराज व गरीब छात्राओं को मिलेगी प्राथमिकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news-report--new-gnm-hostel-building--cost--%E2%82%B94-08-crore--becomes-operational/article-164571"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर स्थित जीएनएम हॉस्टल की नई बिल्डिंग को आखिरकार शुरू करने की कवायद पूरी हो गई है। लंबे समय से बंद पड़ी इस बिल्डिंग को चालू करने के आदेश जारी होने के बाद सफाई कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया गया है। बजट स्वीकृति की प्रक्रिया जारी रहने तक पुराने हॉस्टल से मंगाए गए 25 बेडों के सहारे फिलहाल फर्स्ट फ्लोर के 10 कमरों का आज से  संचालन शुरू किया जा रहा है। नई बिल्डिंग में छात्राओं के लिए लाइट, पंखे और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चालू कर दी गई हैं।</p>
<p><strong>साल भर पहले हैंडओवर अब शुरू</strong><br />दैनिक नवत्योति ने 25 अगस्त काे प्रकाशित ''बजट और नियमों के पेंच में उलझी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की सुविधाएं'' शीर्षक से प्रकाशित खबर में 4.08 करोड़ की लागत से नर्सिंग कॉलेज के लिए नए बनाएं गये हॉस्टल के पुरा होने के बाद एनआरएचएम ने करीब1 साल पहले तत्कालीन प्रिन्सीपल काे बिल्डिंग सौप दी थी। लेकिन संचालन के लिए जरूरी बैड़ व किचन की सुविधा के न होने के कारण इसे शुरू नही किया जा सका था। जिसके बाद एमबीएस असपताल के अधीक्षक ने उक्त मामले पर कमेटी बना कर इसे शुरू करने के लिए कवायद शुरू की थी।</p>
<p><strong>दूर-दराज की गरीब छात्राओं को मिलेगी प्राथमिकता</strong><br />जीएनएम संस्थान के तीनों सेमेस्टर में लगभग 180 सीटे है। जिनमें से ज्यादातर छात्राएं बाहर की अध्ययनरत हैं,जबकि इस नए हॉस्टल की कुल क्षमता 50 छात्राओं की है। हॉस्टल आवंटन में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली और आर्थिक रूप से कमजोर (गरीब) छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जर्जर व असुरक्षित हो चुके पुराने हॉस्टल में रह रही 3 जीएनएम छात्राओं को सबसे पहले इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा।</p>
<p><strong>सुरक्षा दीवार के लिए एनएचएम को लिखा पत्र</strong><br />नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि हॉस्टल की पीछे की बाउंड्री वॉल छोटी होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। आउटर हिस्से से चोरी की वारदातों को देखते हुए प्रशासन ने 27 तारीख को एनएचएम को पत्र भेजकर बाउंड्री वॉल को 2-2 फीट ऊंची कराने की मांग की है। </p>
<p><strong>वार्डन व महिला गार्ड संभालेंगी व्यवस्था</strong><br />हॉस्टल का जिम्मा लंबे समय से कार्यरत वार्डन नीलम रावत संभाल रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से 4 गार्ड तैनात रहेंगे। इसके अलावा पुराने हॉस्टल में छात्राओं के साथ रह रही अनुभवी महिला गार्ड को भी नई बिल्डिंग में ही शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा चाक-चौबंद रहे।</p>
<p>बजट आने तक हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। हमने अन्य लोगों से भी सहयोग की अपील की है जिससें की अधिक से अधिक छात्राओं को नए हॉस्टल में रहने की सुविधा मिल सके।<br /><strong>- हरिप्रसाद अग्रवाल, प्रिंसिपल जीएनएम नर्सिंग कॉलेज एमबीएस</strong></p>
<p> प्रशिक्षण संस्थान के प्रिंसीपल ने हॉस्टल के संचालन में आ रही कमियाें को उपलब्ध संसाधनों से हॉस्टल चलाने के लिए निर्देश मांगे थे नया बजट आने तक व छात्राओं को सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए हॉस्टल शुरू करने के लिए अनुमति दी गई है।<br /><strong>-डॉ. राकेश सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:20:23 +0530</pubDate>
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                <title>बजट और नियमों के पेंच में उलझी एमबीएस नर्सिंग कॉलेज छात्राओं की सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ हैंडओवर के एक साल बाद भी शुरू नहीं हुआ नया हॉस्टल, एएनएमटीसी भवन में रहने को मजबूर छात्राएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/facilities-for-mbs-nursing-college-students-stalled-by-budget-and-procedural-hurdles/article-163833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)89.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र के नए हॉस्टल का निर्माण और हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इसका संचालन अधर में लटका हुआ है। चार मंजिला भवन बनकर तैयार होने के बाद हैण्डओवर की प्रक्रिया पुरी कियें भी पुरा 1 वर्ष से हो जाने के बाद भी वर्तमान में जीएनएम छात्राएं एएनएमटीसी भवन में रहने को मजबूर हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और पूर्व में अस्वच्छ वातावरण के कारण छात्राओं में बीमारियां फैलने जैसी गंभीर घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद नए भवन में शिफ्टिंग की प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पा रही है। वहीं तैयार बिल्डिंग में चोरों द्वारा यहा लगे सेनेटरी फिटिंग व बाहर लगे एसी के आउटडोर युनिट भी चुराकर ले जाने की घटनाएं हो चुकी है।</p>
<p>प्रशासनिक सूत्रों से पता लगा है कि नए हॉस्टल को पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) से करीब 55 लाख के अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। 1.91 लाख प्रति माह के एस्टिमेट में सिक्योरिटी, कुक हैल्पर, सफाई कर्मी सहित अन्य मदों की डिमाण्ड़ रखी गई है। इसके अलावा, हॉस्टल परिसर में गैस आपूर्ति के लिए एलपीजी कनेक्शन की फाइल प्रक्रियाधीन है,जबकि अन्य मूलभूत आवश्यकताओं और फर्नीचर इत्यादि की व्यवस्था के लिए भी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता जताई जा रही है।</p>
<p><strong>पूरी सुविधा नहीं फीस कैसे तय होगी</strong><br />प्रिंसीपल हरिप्रसाद अग्रवाल का कहना है कि यहां करीब 22 कमरें है जिनमें 44 छात्राओं के रहने के लिए बनाया गया है। हमारे पास बैड की व्यवस्था नहीं है ऐसे मे यहां पर छात्राओं को रहने के लिए नही दिया जा सकता। इसके अलावा खाना पकाने के लिए गैस कनेक्शन नहीं होने से यहां पर बच्चियों को बिना मैस के रखने में परेशानी होगीं सबसे बडी परेशानी तो यह है कि हॉस्टल फीस का निर्धारण कैसे करें यह अभी तक स्पष्ट ही नहीं है।</p>
<p><strong>बिना गाइडलाइन संचालन कैसे करें</strong><br />प्रशासन की ओर से पूर्व में छात्राओं से 1500 प्रति माह शुल्क लेकर हॉस्टल शुरू करने का विचार किया गया था। हालांकि, नियमानुसार सरकारी दिशा-निर्देशों (गाइडलाइंस) में छात्राओं से इस प्रकार का शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं होने के कारण इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना स्पष्ट नीति के बच्चों से शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसी कारण हॉस्टल को भी ओपन नही किया गया है।</p>
<p><strong>वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार</strong><br />हॉस्टल में सुरक्षा गार्ड और वार्डन जैसी प्राथमिक सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध है। हालांकि एमबीएस प्रशासन अब सीमित संसाधनों में हॉस्टल शुरू करने की संभावना तलाश रहा है। इसके लिए नर्सिंग प्राचार्य से लिखित रिपोर्ट मांगी गई है कि क्या मौजूदा स्थितियों में हॉस्टल संचालित किया जा सकता है।</p>
<p> इस बिषय पर हमारा ध्यान है, तैयार भवन छात्राओं के लिए शुरू होने से उन्हें आरामदायक आवास मिल सकेगा। जल्द ही एनएचएम और लेखा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। जिसमें हॉस्टल शुरू करने की समयसीमा और बजट आवंटन के प्रयासों पर निर्णय लिया जा सके।<br /><strong>- डॉ. राकेश सिंह अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:49:43 +0530</pubDate>
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                <title> बजट स्वीकृत हुआ फिर भी नहीं मिले 14.55 करोड़, बजट को तरसा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, थमा विकास</title>
                                    <description><![CDATA[5 साल बीते, न वेटनरी हॉस्पिटल बना न कैफेटेरिया, वन्यजीव विभाग को वित्त विभाग से बजट मिलने का इंतजार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-budget-approval--the-allocated-%E2%82%B914-55-crore-has-not-been-received--abheda-biological-park-starved-of-funds--stalling-development/article-163731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)80.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क प्रदेश का सबसे बड़ा होने के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है। पार्क बने 5 साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद पर्यटकों को न कैफेटेरिया मिला और न ही इंटरप्रिटेक्शन सेंटर की सौगात। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर में बंद एक दर्जन से अधिक वन्यजीवों को पार्क में शिफ्ट करने के लिए 22 एनक्लोजर भी नहीं बन पाए।<br />हालात यह हैं, मुख्यमंत्री बजट घोषणा वर्ष 2025-26 में मास्टर प्लान के तहत सैकंड फेस के निर्माण के लिए करोड़ों का बजट दिए जाने की घोषणा हुई थी। इसके बाद जून 2026 में वित्त विभाग ने 14.55 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किए जाने की हरी झंडी दे दी। इसके बाद वन्यजीव विभाग द्वारा 10 जून 2026 को बायोलॉजिकल पार्क में मास्टर प्लान के अनुरूप क्या-क्या विकास कार्य करवाए जाने हैं, इसका प्रस्ताव भी भेज दिया। इसके बावजूद अब तक वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट को बजट नहीं मिला।</p>
<p><strong>4 करोड़ से बनने हैं 22 एनक्लोजर</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मास्टर प्लान के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 35 प्रजातियों के एनिमल्स के लिए एनक्लोजर प्रस्तावित हैं। इनमें से शेष 22 एनक्लोजर का निर्माण 4 करोड़ रुपए की लागत से किया जाना है। एनक्लोजर बनने से चिड़ियाघर में बंद एक दर्जन से अधिक वन्यजीवों की बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग हो सकेगी।</p>
<p><strong>5 साल बाद भी नहीं बन सका पशु चिकित्साल</strong><br />पार्क में वेटनरी हॉस्पिटल प्रस्तावित है। जिसका निर्माण 1 करोड़ की लागत से किया जाना है। लेकिन, बजट के अभाव में 5 साल बाद भी पशु चिकित्सालय नहीं पाया। वर्तमान में जानवरों का इलाज उनके एनक्लोजर या नाइट शेल्टर में किया जाता है। वहीं, आवश्यक दवाइयां व उपकरणों की कमी से चिकित्सकों व कर्मचारियों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>80 लाख मिले तो बने कैफेटेरिया</strong><br />विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में कैफेटेरिया के निर्माण में 80 लाख रुपए की लागत बताई गई है। पार्क के प्रथम फेज के निर्माण के दौरान ही यहां कैफेटेरिया बनाया जाना था, जो बजट के अभाव में अब तक नहीं बन पाया। पर्यटकों को अल्पहार के लिए भटकना पड़ता है।</p>
<p><strong>1 करोड़ का आर्टिफिशल जंगल का इंजतार</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के पास करीब 1400 स्क्वायर मीटर में 1 करोड़ की लागत से इंटरप्रिटेक्शन सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है। जिसमें टाइगर, लॉयन, पैंथर, भालू, सियार, भेड़िए, मगरमच्छ व घड़ियाल की सजीव डमी बनवाई जाएगी। जिनके नीचे प्रत्येक वन्यजीवों का वैज्ञानिक नाम, जीवनकाल, दिनचर्या, प्रजनन, खानपान आवास व जीवनचक्र की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।</p>
<p><strong>7 एकड़ में बनना है स्टाफ क्वार्टर व प्रशासनिक भवन</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में स्टाफ क्वार्ट्स व प्रशासनिक ब्लॉक सहित अन्य विकास कार्यों पर 240 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। प्रशासनिक भवन, पार्क के सामने स्थित 7 एकड़ वनभूमि पर बनाया जाएगा। जिसमें रेंज, एसीएफ व वन्यजीव चिकित्सक आॅफिस, बैरक सहित अन्य निर्माण कार्य किए जाने है। इसके अलावा इसी भूमि पर स्टाफ क्वार्ट्स बनाई जाएगी।</p>
<p><strong>यह सुविधाएं भी होंगी विकसित</strong><br />केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के मानकों के अनुरूप लेपर्ड फ्रूफ पार्क, विद्युत कार्य, सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर और वायरलेस सिस्टम, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, पर्यटकों के लिए सुविधाएं, ग्रीन बेल्ट और लैंडस्केपिंग जैसे कई कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं। बजट के अभाव में सभी कार्य रुके हैं।</p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत विकास कार्य करवाए जाने हैं। वित्त विभाग से अभी तक 14.55 करोड़ रुपए का बजट नहीं मिला है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए हैं। बजट मिलने पर मास्टर प्लान के तहत शेष बचे 22 नए एनक्लोजर सहित कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।<br /><strong>-परमानंद गोचर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:19:04 +0530</pubDate>
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                <title>बजट की कमी से जूझ रहा कोटा का शाला क्रीड़ा संगम, खिलाड़ियों से शुल्क वसूली पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[बैडमिंटन हॉल में 800 रुपये शुल्क को लेकर पारदर्शिता पर सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota%E2%80%99s-shala-krida-sangam--school-sports-centre--grapples-with-budget-crunch--fee-collection-from-players-sparks-debate/article-162178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/budget-ki.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेल प्रतिभाओं के लिए पहचाने जाने वाले शहर का शाला क्रीड़ा संगम महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (मल्टीपरपज), गुमानपुरा इन दिनों संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। शिक्षा विभाग के अधीन संचालित इस खेल केंद्र में दस खेलों के लिए 18 प्रशिक्षक कार्यरत हैं और सुबह-शाम करीब 330 खिलाड़ी नियमित अभ्यास करने पहुंचते हैं। मैदान हैं, कोच हैं और खिलाड़ियों का जुनून भी है, लेकिन पर्याप्त बजट के अभाव में खेल व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।</p>
<p><strong>बिजली, रखरखाव और सुरक्षा... दो लाख में आखिर कैसे चलेगा काम</strong><br />शाला क्रीड़ा संगम के प्रभारी एवं विद्यालय के उपप्रधानाचार्य का कहना है कि पूरे वर्ष के लिए मात्र दो लाख रुपये का बजट मिलता है। इसी राशि से बिजली बिल, मैदानों का रखरखाव, भवनों की मरम्मत, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य खर्च पूरे करने पड़ते हैं। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद कठिन है। कई बार बजट समय पर नहीं मिलने से आवश्यक कार्य भी अटक जाते हैं। उनका कहना है कि खेल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट वर्षों से लगभग नाममात्र का ही है। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है।</p>
<p><strong>बैडमिंटन हॉल पर विरोधाभासी दावे, शुल्क वसूली पर उठ रहे सवाल</strong><br />विद्यालय के प्राचार्य आशुतोष मथुरिया का कहना है कि खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। फुटबॉल मैदान का विकास किया जा रहा है, एथलेटिक्स ट्रैक बनाया जा रहा है तथा हॉकी और बैडमिंटन के लिए इंडोर हॉल भी तैयार किए गए हैं। दूसरी ओर प्रभारी का कहना है कि बैडमिंटन के लिए प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण हॉल बंद है।</p>
<p>हालांकि स्थानीय निवासियों का दावा इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि बैडमिंटन हॉल नियमित रूप से संचालित हो रहा है और इसकी व्यवस्था प्रभारी सुनील गुप्ता संभालते हैं। खिलाड़ियों से प्रति सदस्य 800 रुपये शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो वह राशि किस मद में खर्च हो रही है। जब बजट की कमी का हवाला दिया जा रहा है तो खिलाड़ियों से मिलने वाली इस आय का उपयोग कहां हो रहा है, इसे लेकर पारदर्शिता की मांग उठने लगी है।</p>
<p><strong>800 रुपये देकर खेलते हैं', खिलाड़ियों ने सुनाई अपनी बात</strong><br />बैडमिंटन खिलाड़ी रुद्रांश और निश्चित ने बताया कि वे नियमित रूप से यहां अभ्यास करने आते हैं। उनके अनुसार प्रत्येक सदस्य से 800 रुपये लिए जाते हैं और प्रतिदिन करीब एक घंटे का समय खेलने के लिए दिया जाता है। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसके अनुरूप सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। वहीं कई खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि विद्यालय प्रशासन यदि खेल परिसरों की देखरेख पर थोड़ा और ध्यान दे तो सीमित संसाधनों में भी काफी सुधार संभव है। उनका मानना है कि सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि खिलाड़ी बिना किसी डर और असुविधा के अभ्यास कर सकें।</p>
<p><strong>तीन साल से जंगल बना कबड्डी मैदान, खिलाड़ी बोले—ऐसे कैसे बनेंगे चैंपियन</strong><br />कबड्डी खिलाड़ियों की पीड़ा भी कम नहीं है। एक खिलाड़ी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से कबड्डी का मैदान उपेक्षा का शिकार है। मैदान में झाड़ियां और घास उग चुकी हैं, जिससे वहां नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षक मैदान ठीक कराने की बात कहते हैं, जबकि प्रभारी बजट की कमी का हवाला देते हैं। इस खींचतान का सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि शहर से अच्छे खिलाड़ी निकलें, यह हर किसी की इच्छा है। लेकिन इसके लिए केवल बड़े दावे पर्याप्त नहीं हैं। खेल मैदानों का रखरखाव, पर्याप्त बजट, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो खेल प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ती रहेंगी। वहीं यदि प्रशासन गंभीरता से पहल करे तो यही शाला क्रीड़ा संगम भविष्य में हाड़ौती के खेल मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:57:55 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : कोटा-बूंदी को मिलेंगे 18 करोड़ के दो मंजिला 4 नए कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में डी-रेगुलेशन और राजनिवेश सिंगल विंडो पोर्टल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। जून में ₹1.03 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अप्रैल-जून के दौरान 30,017 आवेदन आए, जिनमें 17 हजार से अधिक का निस्तारण हुआ। सरकार का दावा है कि सरल मंजूरी प्रक्रिया से निवेश, उद्योग और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--kota-bundi-to-get-four-new-two-story-college-buildings-worth-%E2%82%B918-crore/article-161054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्षों से स्कूलों और अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे कोटा-बूंदी के चार नए राजकीय महाविद्यालय अब जल्द ही अपने स्थायी और आधुनिक भवनों में नजर आएंगे। सरकार ने इन चारों कॉलेजों के लिए कुल 18 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। प्रत्येक महाविद्यालय पर 4.50 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं और सभी भवन दो मंजिला बनाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यदि, काम तय समय पर पूरा हुआ तो अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नए भवनों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा।</p>
<p>दरअसल, इन महाविद्यालयों के स्थायी भवन नहीं होने से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को लंबे समय से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कॉलेज कहीं स्कूलों के कमरों में तो कहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जलदाय विभाग की इमारतों में संचालित हो रहे थे। दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सरकार ने चारों कॉलेजों के लिए बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराया।</p>
<p><strong>कैथून में 2.4 एकड़ में बन रहा कन्या महाविद्यालय</strong><br />कैथून में राजकीय कला कन्या महाविद्यालय का निर्माण 2.4 एकड़ भूमि पर 4.50 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। फिलहाल फाउंडेशन का कार्य चल रहा है। दो मंजिला भवन बनने के बाद छात्राओं को आधुनिक सुविधाओं वाला परिसर मिलेगा। वर्तमान में यह कॉलेज कस्बे में पीएम-श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के कुछ कमरों में संचालित हो रहा है।</p>
<p><strong>दीगोद कॉलेज का 45 प्रतिशत निर्माण पूरा</strong><br />कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित दीगोद महाविद्यालय की नई बिल्डिंग का करीब 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। पहली मंजिल तैयार हो गई है, जबकि दूसरी मंजिल के लिए पिलर खड़े कर दिए गए हैं। वर्ष 2025 में शुरू हुए इस निर्माण कार्य में पिछले साल भारी बारिश के कारण करीब चार माह तक काम प्रभावित रहा। अब निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले शैक्षणिक सत्र तक भवन तैयार होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>चेचट कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण की ओर</strong><br />अलोद रोड स्थित राजकीय महाविद्यालय चेचट का निर्माण तेजी से चल रहा है। करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। 14 बीघा भूमि पर बन रहे इस कॉलेज का दो मंजिला ढांचा तैयार हो चुका है और फिलहाल फिनिशिंग का काम चल रहा है। नोडल प्राचार्य संजय गुर्जर के अनुसार, अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नए भवन में पढ़ाई कराने का लक्ष्य है।</p>
<p><strong>डाबी गर्ल्स कॉलेज को मिलेगा आधुनिक परिसर</strong><br />डाबी के राजकीय कन्या महाविद्यालय के लिए सरकार ने 2.9300 हैक्टेयर भूमि आवंटित की है। यहां भवन निर्माण का फाउंडेशन कार्य शुरू हो चुका है। कॉलेज में आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान सहित छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।</p>
<p><strong>स्थायी भवन से बदलेगी उच्च शिक्षा की तस्वीर</strong><br />नए भवन बनने के बाद विद्यार्थियों को पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी। इससे न केवल पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का लाभ भी मिलेगा।</p>
<p>कस्बाई क्षेत्रों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। कैथून, दीगोद, चेचट और डाबी में दो मंजिला नए महाविद्यालयों के निर्माण के लिए जमीन और बजट उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक कॉलेज का निर्माण 4.50 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।<br /><strong>- प्रो. नवीन मित्तल, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:26:00 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: डीए में 20% की बढ़ोतरी, अक्टूबर से मिलेगा 38% महंगाई भत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने बजट में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 20% अतिरिक्त डीए/डीआर की घोषणा की है। इसके साथ ही कुल डीए बढ़कर 38% हो जाएगा, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-gift-to-west-bengal-employees-da-increased-by-20/article-157736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/west-bengal-budget-2026.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने सोमवार को वर्ष 2026 के राज्य बजट में राज्य सरकार के कर्मचारियों, अर्ध-सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक बड़े राहत पैकेज की घोषणा की। बजट की घोषणा के अनुसार, मौजूदा 18 प्रतिशत महंगाई भत्ते के अलावा अतिरिक्त 20 प्रतिशत डीए दिया जाएगा, जिससे कुल डीए 38 प्रतिशत हो जाएगा। पेंशनभोगियों को भी इसी दर पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) मिलेगी। बढ़ी हुई डीए और डीआर दरें एक अक्टूबर, 2026 से लागू होंगी। सरकार ने इस घोषणा को सरकारी नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को लागू करने में कर्मचारियों के योगदान की मान्यता के तौर पर पेश किया है। भाजपा सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि अपने पहले राज्य बजट में डीए में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है।</p>
<p>विधानसभा चुनावों से पहले, पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में वादा किया गया था कि अगर वे सत्ता में आए, तो राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार की दरों पर डीए दिया जाएगा। सोमवार को बजट में की गई घोषणा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाती है। बढ़ोतरी के बावजूद, राज्य और केंद्र सरकार की डीए दरों के बीच अंतर बना हुआ है। इस नई बढ़ोतरी के साथ, पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों का डीए बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाएगा जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अभी 58 प्रतिशत डीए मिलता है, जिससे 20 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए में की गई यह बढ़ोतरी अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारी संगठनों को पहले ही बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिल गए थे और उन्हें ऐसी घोषणा की उम्मीद थी। कर्मचारियों के संयुक्त मंच के नेताओं ने बजट पेश होने से पहले बकाया डीए का भुगतान करने, स्थायी पद सृजित करने और अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर वेतन संरचना लागू करने की मांगें भी उठाई थीं। इस ताज़ा घोषणा से पूरे पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों को बहुत राहत मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:11:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल: वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता सोमवार को पेश करेंगे &quot;डबल इंजन सरकार&quot; में पहला बजट, नई सरकार के भविष्य का रोडमैप तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता आज विधानसभा में नई सरकार का पहला बजट पेश करेंगे। यह बजट वित्तीय संकट और ₹7.8 लाख करोड़ के कर्ज के बीच 'मार्शल प्लान' के तहत बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और केंद्रीय सहयोग पर केंद्रित होगा। कर्मचारियों के डीए और लक्ष्मी भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर भी बड़ी घोषणाएं संभावित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-finance-minister-swapan-dasgupta-will-present-the-first/article-157694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/015.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता सोमवार दोपहर 12 बजे विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार राज्य में अपना पहला बजट पेश करेंगे। इस बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसमें नयी सरकार के भविष्य का रोडमैप तैयार होगा। इस बजट से नयी 'डबल-इंजन' सरकार के विकास का खाका सामने आने और यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में राज्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी सरकार के पहले बजट को "काफी महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य" करार देते हुए कहा था कि इसमें राज्य के हर क्षेत्र के विकास के लिए विशेष योजनाएं शामिल होंगी। वित्त मंत्री दासगुप्ता के सामने एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उनके अनुसार, पिछली सरकार के गैर-जिम्मेदाराना खर्चों और कम राजस्व संग्रह के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था के कई पैमाने लड़खड़ायी हुई है। पिछले प्रशासन की आलोचना करते हुए दासगुप्ता ने पहले टिप्पणी की थी कि सरकार 'ट्रेडमिल पर खड़े होकर' बजट तैयार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि बजट बनाने की प्रक्रिया बड़ी जिम्मेदारी है।</p>
<p>नयी सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसे भारी वित्तीय दबाव विरासत में मिला है और पिछला प्रशासन राज्य पर 7.8 लाख करोड़ रुपये का ऋण छोड़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य को कर्ज चुकाने के लिए 82,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा था, जिसमें अकेले ब्याज के रूप में दिया गया 49,000 करोड़ रुपया शामिल है। पिछले बजट में राज्य का प्रस्तावित खुद का राजस्व 1,12,543 करोड़ रुपये था, जिसका लगभग 75 फीसदी हिस्सा कथित तौर पर कर्ज चुकाने में ही खर्च हो गया था। केंद्रीय करों और अनुदानों में राज्य की हिस्सेदारी को मिलाकर कुल अनुमानित आय 2.6 लाख करोड़ रुपये थी। ऐसी उम्मीदें काफी ज्यादा हैं कि नया बजट उच्च राजस्व वृद्धि का अनुमान लगायेगा, क्योंकि राज्य की आय बढ़ाना वित्त मंत्री की घोषित प्राथमिकताओं में से एक है।</p>
<p>बजट से पहले दासगुप्ता ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी के साथ बैठकें की थीं। उम्मीद है कि इन चर्चाओं का असर सरकार की वित्तीय योजना और आर्थिक रणनीति पर दिखेगा। दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल के लिए एक 'मार्शल प्लान' की आवश्यकता के बारे में भी बात की है, जिसका तात्पर्य दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप की तरह बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और आर्थिक पुनर्गठन के प्रयासों से है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सरकार का मुख्य ध्यान बड़े पैमाने पर केंद्रीय निवेश के सहयोग से बुनियादी ढांचे के विकास पर हो सकता है।</p>
<p>बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते को लेकर भी घोषणाएं होने की उम्मीद है। उद्योग और व्यापारिक समूहों को एक नयी भूमि नीति, औद्योगिक निवेश के लिए प्रोत्साहन और स्टांप व पंजीकरण शुल्क में राहत जैसे उपायों की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार के सामने कर्ज का बोझ बढ़ाये बिना कल्याणकारी खर्चों और आर्थिक पुनर्निर्माण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। भाजपा सरकार पहले ही लक्ष्मी भंडार के तहत मिलने वाले लाभों को दोगुना कर चुकी है और अन्नपूर्णा योजना शुरू कर चुकी है, जबकि उसने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछली सरकारों की शुरू की गयी सामाजिक कल्याण योजनाएं जारी रहेंगी। श्री दासगुप्ता ने साफ किया है कि यह बजट चालू वित्तीय वर्ष के केवल बचे आठ महीनों के लिए ही है और शायद इसमें सरकार का दीर्घकालिक खाका पूरी तरह सामने न आये। उम्मीद है कि आज का यह बजट बंगाल की नयी सरकार की प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा का पहला स्पष्ट संकेत देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:52:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिचून में बनेगा माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, माटी कलाकारों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार के श्रीयादे माटी कला बोर्ड ने जयपुर के बिचून में "माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" स्थापित करने का निर्णय लिया है। बजट 2026-27 के तहत कलाकारों को 5,000 इलेक्ट्रिक चाक और मशीनें वितरित की जाएंगी। साथ ही, 45 उत्कृष्ट कलाकारों को "माटी के लाल" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/clay-art-center-of-excellence-will-be-built-in-bichon/article-154606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार के श्रीयादे माटी कला बोर्ड ने माटी कला को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जयपुर के बिचून में “माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने का निर्णय लिया है। बोर्ड की 12 मई 2026 को आयोजित षष्ठम गवर्निंग बोर्ड बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। इससे प्रदेश के माटी कलाकारों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे। बोर्ड ने बताया कि पिछले दो वर्षों में माटी कला क्षेत्र को पिछले 10 वर्षों की तुलना में अधिक बजट मिला है।</p>
<p>इसी दौरान बोर्ड की उपलब्धियों और सरकारी योजनाओं को समाहित करते हुए “माटी राजस्थान री” पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री के करकमलों से किया गया। साथ ही प्रदेश की विभिन्न माटी कला विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 45 कलाकारों को “माटी के लाल” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 5000 इलेक्ट्रिक चाक और मशीनें होंगी वितरित बोर्ड ने बजट वर्ष 2026-27 के तहत 5000 विद्युत चालित चाक एवं मिट्टी गूंथने की मशीनें वितरित करने का निर्णय लिया है। इससे उत्पादन, गुणवत्ता और कलाकारों की आय में वृद्धि होगी। इसके अलावा माटी कलाकारों और कामगारों के लिए आर्टिजन कार्ड बनाए जाएंगे तथा जागरूकता शिविर भी लगाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री से मिले विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू समाज के प्रतिनिधि, जताया आभार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से रविवार को विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर बजट घोषणाओं के लिए आभार जताया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्या बाई होल्कर की 301वीं जयंती के प्रदेश स्तरीय समारोह के पोस्टर का विमोचन किया और सभी वर्गों के उत्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/representatives-of-liberated-nomadic-and-semi-nomadic-communities-met-the-chief/article-154164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhajanlal1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भजनलाल शर्मा से रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर गडरिया, गायरी, धनगर, पाल बघेल सहित विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य बजट में समाज हित में की गई घोषणाओं और विभिन्न कल्याणकारी प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्या बाई होल्कर की 301वीं जयंती पर आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय समारोह के पोस्टर का विमोचन भी किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के उत्थान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू समाज के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। कार्यक्रम में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दुष्यंत कुमार बघेल सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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                <title>डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने की विकास कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर में विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और विद्याधर नगर क्षेत्र की बजट घोषणाओं को प्राथमिकता से लागू करने पर जोर दिया ताकि आमजन का जीवन सुगम हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/deputy-cm-diya-kumari-reviewed-the-development-works-and-gave/article-153986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/diya-kumari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आधारभूत ढांचे को मजबूत और सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिये हैं। दिया कुमारी ने शुक्रवार को सचिवालय में जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रीको, सार्वजनिक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मेट्रो, जलदाय विभाग, वन विभाग, शिक्षा विभाग, समेकित बाल विकास विभाग तथा पुलिस एवं यातायात विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए।</p>
<p>बैठक में विद्याधर विधानसभा क्षेत्र की बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन, क्षेत्र में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों, जनसमस्याओं तथा आवश्यक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उपमुख्यमंत्री ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य क्षेत्रवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और आमजन का जीवन अधिक सुगम बनाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/deputy-cm-diya-kumari-reviewed-the-development-works-and-gave/article-153986</link>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:01:47 +0530</pubDate>
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                <title>एक जुलाई से देशभर में लागू होगा विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, क्या महात्मा गांधी नरेगा हो जाएगा निरस्त?</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 अधिसूचित किया है, जो 1 जुलाई से मनरेगा का स्थान लेगा। अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। ₹95,692 करोड़ के रिकॉर्ड बजट के साथ, यह मिशन डीबीटी के जरिए समयबद्ध भुगतान और ग्रामीण आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/developed-india-ji-ram-ji-act-will-be-implemented-across-the/article-153436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ramm.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम को सोमवार को अधिसूचित कर दिया है और इसे एक जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आज बताया कि ग्रामीण विकास और रोजगार को नयी दिशा देते हुए सरकार ने आज विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा), 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नयी व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे। यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। </p>
<p>मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे। सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।</p>
<p>सरकार के अनुसार विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:29:17 +0530</pubDate>
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