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                <title>अब कोटा के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के बच्चों का रिकॉर्ड खंगालेगा प्रशासन, जिला कलक्टर के आदेश से निजी स्कूल संचालकों में मचा हड़कम्प</title>
                                    <description><![CDATA[22 अप्रैल तक स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर जांच करनी होगी पूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/administration-to-scrutinize-records-of-rte-students-in-kota-s-private-schools--district-collector-s-order-sparks-panic-among-private-school-operators/article-149995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत हुए मुफ्त प्रवेश की सच्चाई अब सबके सामने आएगी। जिला कलक्टर ने 25% आरक्षित सीटों पर पढ़ रहे बच्चों का भौतिक सत्यापन कराने के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। साथ ही सख्त चेतावनी भी दी है कि निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी नहीं होने व कार्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें, आरटीई के तहत कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश और शिक्षा दी जाती है। इधर, जिला कलक्टर कार्यालय से शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों पर पढ़ रहे बच्चों का भौतिक सत्यापन कराने के आदेश जारी होते ही निजी स्कूल संचालकों में हड़कम्प मच गया।</p>
<p><strong>नए व प्रमोटी सभी बच्चों का होगा सत्यापन</strong><br />जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में आरक्षित 25% सीटों पर पढ़ रहे नए और प्रमोट किए गए सभी बच्चों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। एक वीर कालीबाई भील, मुख्यमन्त्री पुनर्भरण योजना में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं का वेरीफिकेशन किया जाना है, जिसके लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न टीमों का गठन कर आॅर्ब्जवर नियुक्त कर दिए हैं।</p>
<p><strong>कलक्टर के सामने पेश करनी होगी रिपोर्ट</strong><br />सत्यापन के लिए गठित टीमों को अपने-अपने क्षेत्र के आवंटित स्कूलों में जाकर 22 अप्रैल तक भौतिक जांच पूरी करनी होगी। इसकी रिपोर्ट मुख्य जिला शिक्षाधिकारी (सीडीईओ) कोटा को जमा करानी होगी। इसके बाद मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को 25 अप्रैल तक सभी रिपोर्टों की जांच कर अंतिम रिपोर्ट जिला कलक्टर को प्रस्तुत करनी होगी।</p>
<p><strong>लापरवाही पर अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई</strong><br />प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेशों की अनदेखी करने व कार्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश की पालना सुनिश्चित कर समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करवाएं।</p>
<p><strong>कोटा के 976 प्राइवेट स्कूलों की होगी जांच</strong><br />कोटा जिले में 976 प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें आरटीई के तहत बच्चे नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का सत्यापन करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक विद्यालय पर संबंधित इलाके के राजकीय स्कूल के प्राचार्य को निरीक्षणकर्ता और एक-एक प्रशासनिक अधिकारियों को आॅर्ब्जवर नियुक्त किया है।</p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जताया विरोध</strong><br />जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत हुए मुफ्त प्रवेश की जांच करवाने का आदेश जारी होते ही प्राइवेट स्कूल संचालकों में खलबली मच गई। निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी खुलकर आदेश के विरोध में आ गए।</p>
<p><strong>स्कूल बंद कर देंगे, अधिकारियों को घुसने नहीं देंगे</strong><br />कोटा में 900 से ज्यादा स्कूलों की जांच के लिए जिला कलक्टर ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की ड्यूटी लगा रखी है। उनके इस निर्णय की प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को कोई जानकारी नहीं है। इस तरह की जांच का औचित्य क्या है और कोटा जिले में ही क्यों करवाई जा रही है। ऐसा क्या कारण हो गया कि जिलाधिकारी को यह जांच करवानी पड़ रही है। जबकि, शिक्षा विभाग पहले ही इसकी जांच कर चुका है। यदि, प्रशासन को कोई बात करनी है तो हमारे प्रतिनिधिमंडल को बुलाएं, बात करें तभी समाधान निकलेगा। इसके बिना हम किसी भी अधिकारी को जांच के लिए स्कूलों में घुसने नहीं देंगे, भले ही हमें स्कूल बंद करना ही क्यों न पड़े।<br /><strong>-संजय शर्मा, अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल वेलफेयर सोसायटी</strong></p>
<p>राजस्थान में केवल कोटा में ही यह आरटीई निरीक्षण का आदेश जारी किया है। जबकि, आरटीई दिशा निर्देश 2025-26 में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि जिला कलक्टर निजी विद्यालयों का आरटीई से संबंधित भौतिक सत्यापन करवाएंगे। इसके बावजूद इस तरह का आदेश जारी होना निजी स्कूल संचालकों के साथ अन्याय है। हम इसका विरोध करते हैं।<br /><strong>-जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 15:01:17 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीई : तीन लाख बच्चों को मिलेगा मुफ्त दाखिला, निजी विद्यालयों में नि:शुल्क एडमिशन के लिए शिक्षामंत्री ने निकाली लॉटरी</title>
                                    <description><![CDATA[चयनित अभ्यर्थी 9 से 15 अप्रैल तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर सकते हैं। निजी विद्यालय 21 अप्रैल तक आवेदन पत्रों की जांच करेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rte-three-lakh-children-will-get-free-admission-for-free/article-110268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2547rtrer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 2025 के लिए निजी विद्यालयों में एडमिशन के लिए लॉटरी निकाली गई। आरटीई के तहत करीब तीन लाख बच्चों को मुफ्त दाखिला मिलेगा। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा संकुल में लॉटरी निकाली। जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। इस बार पीपी 3 प्लस (3 से 4 वर्ष) और कक्षा 1 (6 से 7 वर्ष) के लिए करीब 3 लाख 8 हजार 64 बच्चों ने आवेदन किया था। पिछले वर्ष यह संख्या 3.08 लाख थी। आवेदनकताओं में 1.46 लाख बालिकाएं और 1.61 लाख बालक शामिल हैं। चयनित बच्चों को राज्य के 31 हजार 860 निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि निजी स्कूलों में महंगे ड्रेस, महंगी किताबों को लेकर लगातार शिकायत मिलती रहती है। इसके निस्तारण के लिए हम जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेंगे। यह पोर्टल प्रणाली में पारदर्शिता और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करेगा।  </p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूल 21 अप्रैल तक करेंगे दस्तावेजों की जांच</strong><br />चयनित अभ्यर्थी 9 से 15 अप्रैल तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर सकते हैं। निजी विद्यालय 21 अप्रैल तक आवेदन पत्रों की जांच करेंगे। जिन बच्चों के आवेदन पत्र की जांच स्कूल द्वारा नहीं की जाएगी, 22 अप्रैल को ऑटोमैटिक सिस्टम द्वारा आवेदन की जांच पूरी कर दी जाएगी। दस्तावेजों में संशोधन का अवसर 9 से 24 अप्रैल तक मिलेगा। 28 अप्रैल तक संशोधित आवेदन की दोबारा जांच होगी। अंतिम चरण तक प्रवेश प्रक्रिया 31 अगस्त 2025 को पूरी होगी। अभिभावक अधिकतम 5 विद्यालयों का चयन कर सकते हैं। सभी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड कर आवेदन को फाइनल लॉक करना अनिवार्य है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 11:39:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्राइवेट स्कूलों को महंगी पड़ सकती है अब एडमिशन में आनाकानी </title>
                                    <description><![CDATA[अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद विभाग ने दी सख्त हिदायत  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-now-private-schools-may-have-to-pay-a-heavy-price-for-their-reluctance-in-admission/article-87637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(1)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा आरटीई में चयनित विद्यार्थियों को एडमिशन देने में आनाकानी की जा रही है। अभिभाावकों की लागतार शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग अब एक्शन मोड में आ गया। विभाग की ओर से सभी प्राइवेट स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है कि सत्र 2024-25 में नर्सरी कक्षाओं में दाखिला देने में आनाकानी की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सरकार के आदेशों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। शिक्षा के अधिकार को लेकर सरकार गंभीर है। </p>
<p><strong>मान्यता समाप्ती तक की हो सकती है कार्रवाई</strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी की नर्सरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एसआर नम्बर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद कुछ प्राइवेट स्कूलों द्वारा एडमिशन नहीं दिए जाने को विभाग ने गंभीरता से लिया है। संबंधित विद्यालयों को विभाग द्वारा नोटिस देकर व फोन पर भी सख्त हिदायत दी जा रही है। इसके बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी जारी रहती है तो उनके खिलाफ आरटीई एक्ट के अर्न्तगत सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगालेंगे। जिनमें खामियां मिलने पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। </p>
<p><strong>आरटीई में पंजीकृत हैं 1104 स्कूल </strong><br />कोटा जिले में करीब 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर निजी स्कूल चयनित बच्चों को एडमिशन दे रहे हैं लेकिन कुछ स्कूल मनमानी कर रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, प्री-प्राइमरी कक्षाओं का पुनर्भरण राशि को लेकर निजी स्कूल संघ सरकार के आदेश के खिलाफ कोर्ट की शरण में जा चुका है। वर्तमान में हाईकोर्ट की डबल बैंच में मामला विचाराधीन है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रही 30 से ज्यादा शिकायतें  </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने सहित अन्य संबंधित 30 से ज्यादा शिकायतें प्रतिदिन मिल रही हैं। जिस पर तुरंत संबंधित स्कूलों को फोन कर समाधान करवाया जा रहा है। हालांकि, अधिकतर स्कूल एडमिशन दे रहे हैं लेकिन कुछ आनाकानी कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />केस 1 - मानपुरा स्थित निजी स्कूल में मेरी पुत्री का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। लेकिन, स्कूल वाले दाखिला नहीं दे रहे। जबकि, पोर्टल पर प्रवेशित लिखा आ रहा है। मामले की शिक्षा विभाग में शिकायत भी दी है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- ताराचंद मेहरा, मानपुरा </strong></p>
<p>केस 2 - तलवंडी स्थित कॉन्वेंट स्कूल में मेरे बालक का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वरियता सूची में क्रमांक 41 है। स्कूल वाले एडमिशन नहीं होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं। पहले भी शिक्षा विभाग को लिखित में शिकायत दे चुके हैं। लेकिन, समाधान नहीं हुआ।  <br /><strong>- पारसमल, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरी पुत्री कर्तिका (परिवर्तित नाम) का नर्सरी में नम्बर आया है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्कूल गया तो वहां 11 हजार रुपए फीस जमा करवाने को कहा गया। फीस के अभाव में एडमिशन नहीं देने की बात कही। विभाग को शिकायत की है, अब देखते हैं क्या होता है। <br /><strong>- अजय नागर, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में बदलाव करके अभिभावकों एवं निजी विद्यालयों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। न सरकार पैसा देना चाहती है और न ही अभिभावक। इस कारण से बच्चा निशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए की प्री-पाइमरी कक्षाओं का भुगतान करें ताकि आरटीई का लाभ बच्चों को मिल सके। हमने तो तीन साल बच्चे को पढ़ा दिया अब सरकार पैसे देने से मुकर रही है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ  </strong></p>
<p>प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन को लेकर निजी स्कूलों द्वारा आनाकानी  किए जाने के मामले आते हैं, जिस पर तुरंत संबंधित स्कूल को फोन कर सख्त हिदायत देकर समाधान करवाया जा रहा है। इसके बावजूद शिकायत मिलती है तो उन स्कूलों को नोटिस जारी किए जाएंगे। वहीं, किसी स्कूल की बड़े लेवल पर अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ मान्यता समाप्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक शिक्षा विभाग  </strong></p>
<p>इस तरह की शिकायतें आ रही हैं, जिनका कार्यालय द्वारा तुरंत प्रभाव से समाधान करवाया जा रहा है। आरटीई नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों को नोटिस देकर पाबंद किया जाएगा। इसके बावजूद चयनित विद्यार्थियों को दाखिला नहीं देते हैं तो निदेशालय के मार्गदर्शन में संबंधित स्कूलों के खिलाफ मान्यता संबंधी कार्रवाई के प्रस्ताव भिजवाए जा सकेंगे। <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक, शिक्षा विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 17:35:14 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार और प्राइवेट स्कूल के बीच पिस रहा अभिभावक</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा विभाग के चक्कर काट अभिभावक हो रहे परेशान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>कोटा। आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की फीस को लेकर सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच विवाद में अभिभावक पिस रहा है। सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सत्र 2024-25 में निजी स्कूलों में नर्सरी से विद्यार्थियों को एडमिशन तो दिलवा दिए लेकिन पुनर्भरण राशि कक्षा-एक से दे रही है। जबकि, निजी स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों का पुनर्भरण किए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार के हाथ खड़े कर देने से प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर फीस का दबाव बना रहे हैं।  कहीं, नर्सरी में एडमिशन न देने तो कहीं पिछले साल नर्सरी से एलकेजी व एचकेजी में प्रमोट हुए बच्चों की फीस मांगी जा रही है। इस तरह की शिकायतें लेकर अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। प्राइवेट स्कूल और सरकार के बीच विवाद में अभिभावक चक्कर घन्नी हो रहे हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन आ रहे 40 से 50 मामले </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरटीई में चयनित बच्चों को नर्सरी में एडमिशन न देने व प्रमोटी एलकेजी-एचकेजी के विद्यार्थियों से फीस मांगे जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। प्रतिदिन इस तरह के 40 से 50 मामले आ रहे हैं।  अभिभावकों द्वारा लिखित में शिकायत देने पर विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों को पाबंद भी किया जा रहा है। वहीं,  अभिभावकों का कहना है, विभाग द्वारा सख्ती किए जाने पर थोड़े दिन तो मामला शांत रहता है लेकिन, कुछ दिनों बाद फिर से फीस फीस मांगना शुरू कर देते हैं।   </p>
<p><strong>क्या है विवाद</strong><br />शिक्षा विभाग ने सत्र 2023-24 में आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी से प्रथम कक्षा तक में प्रवेश लिए थे। लेकिन, आरटीई का भुगतान प्रथम कक्षा से ही देने का फैसला लिया। जिसका निजी स्कूलों ने विरोध किया। इस पर शिक्षा विभाग की मान्यता को लेकर चेतावनी दिए जाने के बाद प्राइवेट स्कूलों ने प्रवेश दे दिया। वहीं, नए सत्र 2024-25 में शिक्षा विभाग ने नर्सरी और पहली कक्षा में ही प्रवेश देने के लिए बच्चों का चयन किया। कक्षा-एक में तो सरकार पुनर्भरण राशि का भुगतान कर रही लेकिन नर्सरी का नहीं कर रही है। जिसका विरोध करते हुए निजी स्कूल भुगतान की मांग कर रहे हैं।   </p>
<p><strong>एक हजार स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में करीब एक हजार निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। कुछ निजी स्कूलों द्वारा सरकार के आदेशानुसार चयनित बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन अधिकतर स्कूल फीस मांग रहे हैं। जिसकी वजह से अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>अधिकारी बोले- कर रहे पाबंद</strong><br />इस तरह के मामले आ रहे हैं। अभिभावक मौखिक व सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर रहे हैं लेकिन लिखित में शिकायत नहीं दे रहे। हालांकि, प्राइवेट स्कूलों को सरकार के दिशा-निर्देशानुसार पढ़ाने के लिए पाबंद किया जा रहा है।  <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, शिक्षा विभाग प्रारंभिक </strong></p>
<p>चयनित विद्यार्थियों को एडमिशन देने के लिए प्राइवेट स्कूल सरकार से बाध्य हैं। कार्यालय में जो भी शिकायतें आ रहीं हैं, इस पर संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर समाधान करवा रहे हैं। यदि, इस तरह की और भी कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी शिक्षा विभाग माध्यमिक</strong></p>
<p><strong>अभिभावकों का छलका दर्द: निजी स्कूल मांग रहे पैसा </strong><br />तलवंडी स्थित कॉन्वेंट स्कूल में मेरे बालक का नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश हुआ है। वरियता सूची में क्रमांक 41 है। स्कूल वाले एडमिशन नहीं होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं। जबकि, आरटीई पोर्टल पर प्रवेशित लिखा हुआ आ रहा है। स्कूल प्रशासन बच्चे को एडमिशन नहीं दे रहे। शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- पारसमल डाबी, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरी पुत्री रूचिका का नर्सरी में नम्बर आया है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्कूल गया तो वहां की प्राचार्य ने 15 हजार फीस जमा करवाने को कहा। फीस के अभाव में एडमिशन नहीं देने की बात कही। शिक्षा विभाग को 2 अगस्त को लिखित शिकायत दी है। फिर भी समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- पुरुषोत्तम नागर, अभिभावक</strong></p>
<p>मेरे पुत्र भावेश महावर का नर्सरी कक्षा में आरटीई के तहत दाखिला हुआ है। लेकिन, स्कूल वाले एडमिशन नहीं दे रहे। प्राचार्य ने फीस जमा करवाने की बात कहते हुए कहा कि सरकार हमें नर्सरी से एचकेजी तक पैसा नहीं देती है। यदि, फीस दोगे तो ही बच्चे का एडमिशन हो सकेगा। <br /><strong>- नरेंद्र महावर, अभिभावक</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं निजी स्कूल संचालक </strong><br />आरटीई एक्ट में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि प्राइवेट स्कूल फ्री में पढ़ाएगा। जबकि, सरकार द्वारा चयनित बच्चों का अलॉटमेंट करने पर उनकी फीस वह स्वयं देगी। सरकार ने दो साल पहले नर्सरी, एचकेजी, एचकेजी और फर्स्ट कक्षा में एडमिशन दे दिए लेकिन पेमेंट पहली कक्षा का ही दिया जा रहा। हमने तो तीन साल बच्चे को पढ़ा दिया अब सरकार पैसे देने से मुकर रही है। प्रत्येक स्कूल में प्री-प्राइमरी के तीन साल में करीब 30 बच्चे होते है और न्यूनतम 10 हजार रुपए फीस के हिसाब से इन बच्चों का सालाना बिल 3 लाख रुपए होता है। ऐसे में प्राइवेट स्कूल तीन लाख रुपए का नुकसान कैसे भुगतेगा। हम हाईकोर्ट से केस जीत चुके हैं। कोर्ट ने सरकार को फीस पुनर्भरण करने के आदेश भी दिए हैं लेकिन सरकार ने मामले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में लगाकर लटका दिया है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में बदलाव करके अभिभावकों एवं निजी विद्यालयों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। न सरकार पैसा देना चाहती है और न ही अभिभावक। इस कारण से बच्चा निशुल्क शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए की प्री-पाइमरी कक्षाओं का भुगतान करें ताकि आरटीई का लाभ बच्चों को मिल सके। <br /><strong>- रमेशचंद सांमरिया, जिला उपाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1) के अंतर्गत गैर सरकारी विद्यालयों को पुनर्भरण के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन सरकार के उच्च अधिकारियों ने इस कानून में रुकावट उत्पन्न करके निजी स्कूल एवं अभिभावकों के बीच खाई बना दी। सरकार द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान आदेश प्रक्रिया जारी करें, ताकि गरीब -असहाय व दुर्बल वर्ग के बच्चों को शिक्षा का लाभ मिल सके।   <br /><strong>- नफीस खान, जिला उपाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parents-are-getting-crushed-between-the-government-and-private-schools/article-86859</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 15:07:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार ने अटका दिए प्राइवेट स्कूलों के 22.50 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[ईसीएस के फेर में भुगतान अटकने के साथ लेप्स हुआ पिछले वित्तीय वर्ष का बजट ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-stuck-rs-22-50-crore-of-private-schools/article-76087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/sarkar-ne-atka-diye-private-schoolo-k-22.50-crore...kota-news-27-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-आरटीई के दायरे में आने वाले कोटा जिले के 1 हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पिछले तीन साल से अपने हक के पैसों के लिए तरस रहे हैं। सरकार ने ईसीएस के चक्कर में 22.50 करोड़ का भुगतान अटका दिया। जबकि,  भुगतान के बिल ट्रैजरी से पास भी हो गए थे। मगर, वित्त विभाग जयपुर से ईसीएस नहीं होने से पैसा स्कूलों के खातों में ट्रांसफर नहीं हो पाया। ऐसे में सरकार ने ट्रैजरी से सभी बिल वापस रिवर्ट भी करवा लिए। गत वित्तीय वर्ष की समाप्ती के साथ स्कूलों को भुगतान के लिए मिला बजट भी लेप्स हो गया। अब नए वित्तीय वर्ष का बजट मिलने के बाद ही प्राइवेट स्कूलों को भुगतान हो सकेगा। सरकार की लापरवाही से निजी स्कूलों का संस्था चलाना मुश्किल हो गया। जिसका खामियाजा आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी अप्रत्यक्ष रूप से भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह है मामला </strong><br />जिले में डीओ सैकंडरी व डीओ एलीमेंट्री को मिलाकर कुल 1207 प्राइवेट स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका सत्र 2021-22 की प्रथम व द्वितीय, 2022-23 की प्रथम व द्वितीय तथा 2023-24 की प्रथम किस्त को मिलाकर कुल तीन सत्र की 22.50 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ। जबकि, शिक्षा विभाग ने गत 26 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही आरटीई पुनर्भरण राशि का बिल बनाकर ट्रैजरी पहुंचा दिए थे। ट्रेजरी से बिल पास होकर वित्त विभाग जयपुर पहुंच भी गए। जहां से ईसीएस नहीं होने से बिल अटक गए। इसके कुछ दिनों बाद ही सरकार ने पुर्नभरण राशि के सभी बिल वापस रिवर्ट करवा कर रोके रखा। इधर, 1 अप्रेल की शुरुआत के साथ के साथ पिछला वित्तीय वर्ष भी समाप्त हो गया। जिससे शिक्षा विभाग को पुर्नभरण राशि का जो बजट मिला था वो भी लैप्स हो गया। ऐसे में जिले के प्राइवेट स्कूल फिर से अधरझूल में लटक गए। अब नए वित्तीय वर्ष का बजट मिलने के बाद ही निजी स्कूलों को अपने हक का पैसा मिल पाएगा। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले बजट मिलने की संभावना न के बराबर प्रतित होती है। </p>
<p><strong>सरकार ने जानबूझकर रोका पैसा</strong><br />प्राइवेट स्कूल संचालकों का कहना है, सरकार ने जानबूझकर प्राइवेट स्कूलों के तीन साल के आरटीई की पुनर्भरण राशि अटका दी है। मार्च क्लोजिंग से पहले शिक्षा विभाग ने निदेशालय से बजट मंगवाया। जब वित्तीय वर्ष समाप्ती के पायदान पर था तो बिल बनाकर ट्रैजरी में भिजवा दिए। इसके बाद बिल पास भी हो जाते हैं और वित्त विभाग ईसीएस न करके अटका देता है। फिर, 31 मार्च के आसपास सभी बिल रिवर्ट करवा कर बिल रोके गए। इसी बीच पिछले साल का वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ हमारा बजट भी लैप्स  हो गया। अब शिक्षा विभाग बजट न होने का रोना रो रहा है। सरकार ने चालबाजी कर निजी स्कूल संचालकों के साथ कुठाराघात किया है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा गत मार्च माह में पूरी तैयारी कर शिक्षा निदेशालय से बजट मंगवाकर सभी पैंडिंग बिल बनाकर समय पर ट्रैजरी भिजवा दिए थे। जहां से सभी बिल पास भी हो गए। लेकिन, ईसीएस न होने के कारण उनका भुगतान नहीं हो सका। अब निदेशालय से जैसे ही नए वित्तीय वर्ष का बजट प्राप्त होगा वैसे ही सभी रिवर्ट बिलों को फिर से ट्रैजरी भिजवा दिए जाएंगे। <br /><strong>- केके शर्मा, जिलाध्यक्ष, शिक्षा विभाग माध्यमिक</strong></p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूल संचालकों की पीड़ा</strong><br />ईसीएस तो बहाना है, सरकार ने जानबूझकर हमारा हक का पैसा अटकाया है। वित्त विभाग के अधिकारियों की लेट लतीफी के कारण निजी विद्यालयों को आरटीई  का भुगतान नहीं हो पाया। 28 मार्च तक जो बिल बन गए थे और शिक्षा विभाग द्वारा ट्रेजरी में भिजवा दिए गए थे, उनका भी भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया। हमारे लिए स्कूल चलाना मुश्किल हो गया है। शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों का मानदेय, बिजली का बिल, बिल्डिंग किराया व स्टेशनरी सहित स्कूल संचालन की कई व्यवस्थाएं चरमरा गई। हालात यह हैं, उधार मांगकर स्कूल चलाना पड़ रहा है।<br /><strong>- जमनाशंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ </strong></p>
<p>निजी स्कूल संचालक अब आरटीई में एडमिशन देने से परेशान होने लगे हैं ,क्योंकि शिक्षा विभाग खुद टाइम फ्रेम की पालन नहीं करता। भुगतान नहीं होने से कर्मचारी और विद्यालय से जुड़े स्टाफ को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार निजी स्कूल संचालकों के साथ कुठाराघात कर रही है। <br /><strong>- अरुण श्रीवास्तव, अध्यक्ष, निजी स्कूल सेवा संगठन </strong></p>
<p>सरकार तीन सालों से पैसा नहीं दे रही। स्कूल चलना मुश्किल हो रहा है। शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे। कभी अधिकारी मिलते नहीं तो कभी बजट नहीं होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में निजी स्कूल संचालक करे तो क्या करें। कोई सुनने वाला नहीं है।  सरकार एक तरफ आरटीई के तहत बच्चों मुफ्त शिक्षा देने की बात करती है और दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों का भुगतान अटका कर व्यवस्थाएं प्रभावित कर रही है।<br /><strong>- हेमलता चंद्रावत, जिला उपाध्यक्ष,निजी स्कूल सेवा संघ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2024 17:04:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Bright Spot Report 2023: RTE से अब तक 60 लाख बच्चों को लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई अधिनियम) के क्रियान्वयन से अब तक 60 लाख बच्चों को लाभ होने का पता चला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/60-lakh-children-have-benefited-from-rte-so-far/article-70778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/school.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कमजोर नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन इंडस एक्शन ने अपनी वार्षिक ब्राइट स्पॉट रिपोर्ट (बीएसआर) 2023 जारी की है, जिसमें भारत में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई अधिनियम) के क्रियान्वयन से अब तक 60 लाख बच्चों को लाभ होने का पता चला है।</p>
<p>2009 में लागू आरटीई अधिनियम के अंतर्गत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया गया है। आरटीई अधिनियम सभी के लिए शिक्षा अभियान और सस्टेनेबल डेवलपमेंट लक्ष्यों जैसे वैश्विक अभियानों के अनुरूप सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। </p>
<p>बीएसआर राज्यों में आरटीई धारा 12(1)(सी) को लागू करने में ब्राइट स्पॉट्स और चुनौतियों की पहचान करती है। मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों में निजी स्कूलों की उच्च भागीदारी है, जबकि बिहार में 100 प्रतिशत निजी स्कूलों की भागीदारी है। हालाँकि, देश में प्रतिपूर्ति प्रक्रियाएँ एक समस्या बनी हुई हैं। रिपोर्ट में सामने आया कि किसी भी राज्य ने अपनी प्रतिपूर्ति प्रक्रिया को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) से नहीं जोड़ा है, जिससे वित्तीय प्रक्रियाएं बेअसर हो रही हैं। </p>
<p>रिपोर्ट में इस प्रावधान का लाभ पाने वाले बच्चों की संख्या में मामूली गिरावट सामने आई है, जिसके बढ़ने का कारण संभवत: महामारी के दौरान कम बजट वाले स्कूलों का बंद होना है। एक दशक पहले क़ानून बन जाने के बाद भी फरवरी 2023 तक केवल 18 राज्यों द्वारा ही आरटीई 12(1)(सी) लागू किया गया है। इस क़ानून को लागू ना करने वाले राज्यों को उच्चतम न्यायालय ने नोटिस जारी करके इसका क्रियान्वयन करने का आग्रह किया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता और ऑनलाइन सिस्टम के महत्व पर जोर दिया जाना चाहिए। ऑनलाइन सबमिशन और निगरानी प्रक्रियाओं का उपयोग करने वाले राज्यों में केंद्र सरकार से प्रतिपूर्ति अनुमोदन की दर •ा्यादा है। 17 राज्यों ने प्रति बच्चा लागत निर्धारित की है, जो चंडीगढ़ में सर्वाधिक 28,176 रुपये और मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में सबसे कम 5,500 और 5,400 रुपये है।</p>
<p>रिपोर्ट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में भी प्रवेश लिए गए विद्यार्थियों की संख्या, निजी स्कूलों में सीटों की संख्या और प्रतिपूर्ति-संबंधी विवरणों पर 12(1)(सी) के क्रियान्वयन के सार्वजनिक डेटा की कमी उजागर हुई है। आरटीई धारा 12(1)(सी) द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी होने की क्षमता के बावजूद आरक्षित सीटों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भरा जाना बाकी है। </p>
<p>इंडस एक्शन के सीईओ, तरुण चेरुकुरी ने कहा कि आरटीई अधिनियम का क्रियान्वयन राज्य स्तर पर बदलता है, जिससे विभिन्न राज्यों में धारा 12(1)(सी) के अंतर्गत प्रवेश की अनिवार्यताएं प्रभावित होती हैं। इन अंतरों में आयु सीमा, आय के मानदंड, दस्तावेजों की जरूरत, और आवेदन प्रक्रियाएँ शामिल हैं। सफल होने वाली विधियों को पहचानना आवश्यक होता है, ताकि शिक्षा अधिकारी संदर्भ के अनुरूप प्रभावी रणनीतियां सीखने, उन्हें अनुकूलित करने और लागू करने में समर्थ बनें। बीएसआर के डेटा से विश्वास के साथ नीतिगत निर्णय लेने, जैसे शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने, प्रति-बच्चा-लागत की गणना करने या ईडब्ल्यूएस मानदंड को संशोधित करने में मदद मिलती है। राज्य सर्वोत्तम विधियाँ अपनाकर आरटीई 12(1)(सी) के क्रियान्वयन का विस्तार कर सकते हैं, शिक्षा की पहुँच बढ़ा सकते हैं और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम कर सकते हैं। अभी तक इससे 60 लाख विद्यार्थी लाभ प्राप्त कर चुके हैं, और 2030 से पहले 60 लाख नए प्रवेश की संभावना है।</p>
<p>इस संगठन ने, विभिन्न राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में, आरटीई अधिनियम के अंतर्गत 608,612 प्रवेश करवाए हैं, और 172,446 माताओं को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत मातृत्व लाभ उपलब्ध कराए हैं, तथा 2013 से 121,996 श्रमिकों को राज्य-विशिष्ट श्रम कल्याण प्रावधानों के अंतर्गत मिलने वाले लाभ प्राप्त करने में सहयोग दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/60-lakh-children-have-benefited-from-rte-so-far/article-70778</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 19:31:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>जयपुर के 24 स्कूलों की मान्यता होगी रद्द!</title>
                                    <description><![CDATA[ डीईओ राजेंद्र कुमार ने कहा कि सरकारी नियमों के तहत प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दे रहे। 25% सीटों पर जरूरतमंद बच्चों को आरटीई में एडमिशन दिया जाना प्रस्तावित था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/recognition-of-24-schools-of-jaipur-will-be-cancelled-hindi-news/article-55912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/jaipur-school.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने पर अब शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों की मान्यता (एनओसी) रद्द करने की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को जयपुर के जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय (डीईओ माध्यमिक) राजेंद्र कुमार शर्मा हंस ने 24 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय के निदेशक कानाराम को भेजा है। इस पर अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही जयपुर के 24 बड़े प्राइवेट स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है। </p>
<p><strong>नहीं दिया आरटीई में दाखिला </strong><br />डीईओ राजेंद्र कुमार ने कहा कि सरकारी नियमों के तहत प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दे रहे। 25% सीटों पर जरूरतमंद बच्चों को आरटीई में एडमिशन दिया जाना प्रस्तावित था। जयपुर के 24 प्राइवेट स्कूल इन नियमों की अवहेलना कर रहे थे। शिक्षा विभाग कई बार इन्हें रिमाइंडर लेटर भी भेज चुका था। लेकिन इनमें से किसी भी स्कूल ने शिक्षा विभाग के आदेश को नहीं माना। न ही वार्निंग लेटर का जवाब दिया। अब शिक्षा विभाग द्वारा इन पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। फिलहाल जयपुर जिले के 24 प्राइवेट स्कूलों की लिस्ट तैयार कर शिक्षा विभाग के निदेशक को भेजी है। </p>
<p><strong>इन स्कूलोें पर लटकी तलवार</strong><br />भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम स्कूल (जेएलएन मार्ग के पास), जयपुर स्कूल, रूकमणि बिरला मॉडर्न हाई स्कूल, सेंट्रल एकेडमी, वॉरेन एकेडमी स्कूल, संस्कार स्कूल, मॉडर्न पब्लिक स्कूल, वर्धमान श्री कल्याण इंटरनेशनल स्कूल, वर्धमान इंटरनेशनल स्कूल, ब्राइटलैंड गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सीडलिंग मॉडर्न हाई स्कूल, टैगोर इंटरनेशनल स्कूल, श्री माहेश्वरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नीरजा मोदी स्कूल, सीडलिंग पब्लिक स्कूल, कपिल ज्ञानपीठ, महाराजा सवाई भवानी सिंह स्कूल, महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय, सेंट एडमांस कान्वेंट स्कूल, कैंब्रिज कोर्ट वर्ल्ड स्कूल, ज्ञान विहार स्कूल, द पैलेस स्कूल, डिफेंस पब्लिक स्कूल और भारतीय विद्या भवन विद्या आश्रम स्कूल (प्रतापनगर)।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Aug 2023 09:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> शहर के कई निजी स्कूल नहीं दे रहे आरटीई में बच्चों को एडमिशन </title>
                                    <description><![CDATA[मामले में मुख्य जिला शिक्षाधिकारी ने शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/many-private-schools-of-the-city-are-not-giving-admission-to-children-in-rte/article-51678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/sheher-k-kayi-niji-school-nhi-de-rhe-rte-me-bachho-ko-admission...kota-news-13-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आरटीई के तहत सत्र 2023-24 के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन नहीं देने पर कई निजी स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। अभिभावकों की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस के जरिए चेताया है। इसके बावजूद मनमानी जारी रहती है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता समाप्त का प्रस्ताव बनाकर निदेशालय बीकानेर भिजवा दिए जाएंगे। मामले में मुख्य जिला शिक्षाधिकारी ने शहर के कुछ प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। </p>
<p><strong>नहीं तो रद्द हो सकती है मान्यता </strong><br />विभाग ने संबंधित स्कूलों को गत 10 जुलाई को ई-मेल के जरिए चेतावनी नोटिस जारी किया है। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को निर्धारित अवधि में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ आरटीई एक्ट के अर्न्तगत सख्त कार्रवाई अमल में आई जाएगी। विभाग द्वारा संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आरटीई मान्यता, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगालेंगे। जिनमें खामियां मिलने पर रिपोर्ट तैयार कर 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रद्द की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बीकानेर निदेशालय को भेजी जाएगी। </p>
<p><strong>प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी</strong><br />कोटा जिले में करीब 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। अधिकतर प्राइवेट स्कूलों ने चयनित बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं(नर्सरी से एचकेजी) में एडमिशन दे रखे हैं लेकिन शहर के कुछ प्राइवेट स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे। हाईकोर्ट में मामला चलने व अन्य बहाने बनाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। जबकि, सरकार ने चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने के आदेश दिए हैं, इसके बावजूद प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की जारी है।  </p>
<p><strong>स्कूल यह बना रहे बहाना</strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने, कागजों में कमियां निकालकर बहाने लगाने, शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाने सहित कई शिकायतें शामिल हैं। विभाग में प्रतिदिन 100 से ज्यादा अभिभावक शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि, कुछ स्कूलों ने तो एडमिशन दे दिए हैं लेकिन कुछ स्कूल कोई न कोई बहाना लगाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। इधर, अभिभावकों का कहना है कि जैसे-तैसे बच्चे का नंबर आया तो स्कूल कोर्ट में मामला होने का हवाला देकर प्रवेश देने से मना कर रहे हैं। जबकि, 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं।  </p>
<p><strong>इन स्कूलों को दिए नोटिस</strong><br />- बंसल पब्लिक स्कूल श्रीनाथपुरम<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सैकंडरी स्कूल  दादाबाड़ी मेन रोड<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सीनियर सैकंडरी स्कूल तलवंड़ी<br />- सेन्ड्रल एकेडमी सी. सै. स्कूल विज्ञान नगर<br />- सेन्ट्रल चिल्ड्रन एकेडमी सैकंडरी स्कूल स्टेशन रोड<br />- सेन्ट्रल पब्लिक सी. सै. स्कूल माला रोड स्टेशन<br />- सेन्ट्रल पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल विज्ञान नगर<br />- ग्लोबल पब्लिक स्कूल इंदिरा विहार<br /><strong>- सेंट जॉन्स सीनियर सैकंडरी स्कूल बूंदी रोेड</strong></p>
<p><strong>स्कूल संचालकों के बयानों में अंतर </strong><br />शिक्षा विभाग कोर्ट में केस हार चुका है, सत्र 2022-23 के आरटीई के जितने एडमिशन हुए वो सब खारिज हो चुके हैं। हमने कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। जब सरकार इलेक्शन मोड में आई तो स्कूलों को नर्सरी से एडमिशन देने को बाउंड किया। जबकि, पुर्नभरण राशि (फीस) बच्चे का पहली कक्षा में आने के बाद किया जाएगा। यानी, तीन साल तक सरकार की ओर से कोई फीस नहीं दी जाएगी। ऐसे में नर्सरी से एचकेजी तक बिना फीस के कैसे पढ़ाएं। हम नियमानुसार पहली कक्षा से बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश दे रहे हैं। सरकार नर्सरी से एचकेजी तक का पैसा दे तो हम प्रवेश देंगे। हाईकोर्ट में केस लगा हुआ है। जिसमें कोटा के करीब 10 स्कूल शामिल हैं।  <br /><strong>- प्रतीक अग्रवाल, डायरेक्टर सेंट्रल अकेडमिक स्कूल ग्रुप</strong></p>
<p>इस संबंध  में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, प्राचार्य से बात करें। मैं कुछ नहीं कहना चाहता<br /><strong>- ओम माहेश्वरी, डायरेक्टर, ग्लोबल पब्लिक स्कूल इंद्राविहार</strong></p>
<p>सत्र 2023-24 के आरटीई बच्चों को नियमानुसार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन दे रहे हैं। हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। वहीं, शिक्षा विभाग से मिले नोटिस का भी जवाब दे चुके हैं। <br /><strong>- राकेश शर्मा, डायरेक्टर, सेंटजॉन सीनियर सैकंडरी स्कूल बूंदी रोड</strong></p>
<p>चयनित बच्चे को एसआर नम्बर अलॉट हो जाता है और दस्तावेज सही है तो विद्यालय को एडमिशन देना ही होगा। विद्यालय द्वारा प्रवेश देने में आनाकानी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थी। जिसे शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया और संबंधित प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी कर चेताया है। <br /><strong>- ध्वज शर्मा, आरटीई प्रकोष्ठ प्रभारी, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय कोटा</strong></p>
<p>आरटीई के तहत हम सभी बच्चों को एडमिशन दे रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक हमें कोई नोटिस नहीं मिला है। हमारी किसी से कोई डिमांड नहीं है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आॅफिस में सम्पर्क कर सकते हैं। <br /><strong>- अनुराग, डायरेक्टर, बंसल पब्लिक स्कूल श्रीनाथपुरम </strong></p>
<p><strong>जिला शिक्षाधिकारी ने नहीं उठाया फोन</strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने जिला शिक्षाधिकारी प्रदीप चौधरी को कई बार फोन किए लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। इसके बाद मैसेज व वाट्सएप के जरिए भी सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने रिप्लाई नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 15:36:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षा मंत्री डॉ. कल्ला ने निकाली प्रदेश के  निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने शुक्रवार को शिक्षा संकुल में प्रदेश के 32 हजार 722 गैर सरकारी विद्यालयों में आरटीई के तहत निःशुल्क प्रवेश के लिए वरीयता का निर्धारण करने के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-minister-dr-kalla-conducts-online-lottery-for-free-admission/article-46002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/bd.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने शुक्रवार को शिक्षा संकुल में प्रदेश के 32 हजार 722 गैर सरकारी विद्यालयों में आरटीई के तहत निःशुल्क प्रवेश के लिए वरीयता का निर्धारण करने के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली। इसके माध्यम से इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी एवं कक्षा-1 की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब, कमजोर एवं वंचित वर्ग के बालक-बालिकाओं को निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा दी जाएगी, इन विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। लॉटरी द्वारा जारी विद्यालय वार वरीयता सूची अभिभावक प्राइवेट स्कूल पोर्टल https://rajpsp.nic.in के होम पेज पर ‘वरीयता सूची‘ के लिंक को क्लिक करके देख सकते हैं। इसके साथ ही आवेदन की आईडी (नम्बर) एवं मोबाईल नम्बर से लॉगिन करके बालक-बालिकाओं के वरीयता क्रमांक को सभी आवेदित विद्यालयों में एक साथ देखा जा सकता है।</p>
<p>शिक्षा मंत्री डॉ. कल्ला ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया था, जो देश और प्रदेश में कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ है। प्रदेश में वर्ष 2012-2013 से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत निःशुल्क सीटों पर प्रवेश दिया जा रहा है, तब से लेकर अब तक करीब राज्य के करीब 9 लाख बालक-बालिकाओं को इसका सीधा फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा पारदर्शिता के साथ समस्त प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है, और भारत सरकार के नॉर्म्स के अनुसार निजी विद्यालयों को इन विशेष वर्गों के विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए राशि का पुनर्भरण किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आरटीई  के तहत जो निजी विद्यालय सही तरीके से कार्य कर रहे हैं, उनको प्राथमिकता और तत्परता से समय पर फीस का पुनर्भरण सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए।</p>
<p><strong>इफेक्टिव सुपरविजन‘ और प्रबंधकीय कौशल से लाए निखार</strong></p>
<p>डॉ. कल्ला ने कहा कि स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार की सतत पहल, प्रयास और शैक्षिक नवाचारों से प्रदेश में सरकारी विद्यालयों के स्तर में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है। सरकार ने प्रदेश में करीब 2700 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोले है, आने वाले दिनों में ऐसे दो हजार विद्यालय और खोले जाएंगे। इन विद्यालयों में प्रवेश के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित टीचर्स और तमाम तरह के संसाधन उपलब्ध है, ऐसे में सभी प्रधानाध्यापक, प्राचार्य और अधिकारी शिक्षकों के साथ मिलकर सरकारी विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को नए स्तर ले जाने के संकल्प के साथ कार्य करे। उन्होंने निजी स्कूलों से ‘हैल्दी कॉम्पीटिशन‘ के लिए ‘इफेक्टिव सुपरविजन‘ और ‘प्रबंधकीय कौशल‘ के मूलमंत्र के साथ कार्य करने पर बल दिया।  </p>
<p><strong>स्कूली शिक्षा में और बेहतर कार्यों पर रहेगा फोकस</strong></p>
<p>स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव श्री नवीन जैन ने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेश में स्कूली शिक्षा में नई पहल तथा और अच्छा कार्य करने पर विभाग का पूरा फोकस रहेगा। उन्होंने लॉटरी प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ समय पर सम्पादित करने के लिए विभागीय टीम को बधाई दी। शिक्षा निदेशक श्री गौरव अग्रवाल ने इसे शिक्षा विभागीय गतिविधियों में सबसे बड़ा अभियान बताते हुए आगामी दिनों में विद्यार्थी, अभिभावक, निजी स्कूल एवं शिक्षा विभागीय अधिकारियों के स्तर से सम्पादित की जाने वाली प्रक्रिया और टाइमलान के बारे में विस्तृत जानकारी दीं। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग की विशिष्ट सचिव श्रीमती चित्रा गुप्ता, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक श्री राकेश गुप्ता एवं राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री जेके वर्मा के अलावा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अधिकारी, कार्मिक, शिक्षाविद और गणमान्य लोग मौजूद रहे।</p>
<p><strong>पोर्टल पर 5 लाख 38 हजार बालक-बालिकाओं के 18 लाख 15 हजार आवेदन</strong></p>
<p>प्रदेश के 37 हजार 345 निजी स्कूलों में से 32 हजार 722 विद्यालयों में आरटीई के तहत निःशुल्क सीटों पर प्रवेश के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर 5 लाख 38 हजार 579 बालक-बालिकाओं (बालक- 2 लाख 85 हजार 799, बालिकाएं- 2 लाख 52 हजार 765, थर्ड जेन्डर- 15) के 18 लाख 15 हजार 489 (बालक- 9 लाख 58 हजार 129, बालिकाएं- 8 लाख 57 हजार 319, थर्ड जेन्डर- 41) आवेदन लॉटरी के लिए प्राप्त हुए। वहीं अन्य 4 हजार 623 निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। आनलाइन लॉटरी जारी होने के बाद आगामी दिनों में समयबद्ध कार्यक्रम के तहत निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश के लिए प्रक्रिया सम्पादित होगी।<br /> <br /><strong>ये रहेगी महत्वपूर्ण टाइमलाइन</strong></p>
<p>लॉटरी जारी होने के बाद अब अभिभावकों को आगामी 2 जून तक ऑनलाइन रिर्पोटिंग करनी होगी, इसमें विद्यालय का चयन किया जाएगा। लॉटरी में प्रथम चयनित निजी विद्यालय, 19 मई से 6 जून की अवधि में आवेदन पत्रों की जांच करेंगे। अभिभावकों की ओर से 12 जून तक दस्तावेजों में संशोधन किया जा सकता है। वहीं 19 मई से 23 जून 2023 के दौरान सीबीईओ द्वारा सम्बंधित निजी विद्यालयों की ‘रिक्वेस्ट‘, बालक-बालिकाओं के दस्तावेज रि-अपलोड नहीं करने या अभिभावकों द्वारा संशोधन दर्ज किए जाने के सम्बंध में जांच की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद राज्य स्तर पर एनआईसी की ओर से 26 जून को शेष समस्त आवेदनों को ऑटो वैरीफाई और फिर 27 जून को पोर्टल पर उपलब्ध आरटीई सीटों पर चयन किया जाएगा। राज्य स्तर पर एनआईसी द्वारा ही पोर्टल पर उपलब्ध आरटीई सीटों पर चयन (सशुल्क बालकों के प्रवेश एवं वरीयता क्रम के आधार पर) 28 जून से 30 सितम्बर 2023 तक किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 15:59:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीई :  निजी स्कूल निरस्त नहीं कर सकेंगे आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने व्यवस्थाओं में बदलाव कर पोर्टल पर रिजेक्शन का आॅप्शन ही हटा दिया है। ऐसे में अब निजी स्कूल किसी भी आवेदन को निरस्त नहीं कर सकेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rte--private-schools-will-not-be-able-to-cancel-the-application/article-41585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/rte--niji-school-nirast-nahi-kar-sakege-avedan..kota-news.3.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम में शिक्षा विभाग ने बड़ा बदलाव करते हुए अभिभावकों को राहत दी है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसते हुए उनसे आवेदन फॉर्म रिजेक्ट करने का अधिकार छीन लिया है। इससे निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा। दरअसल, निजी स्कूल अब आरटीई में मिले आवेदन को सीधे रिजेक्ट नहीं कर पाएंगे, सिर्फ आवेदन को लेकर आॅब्जेक्शन लगा सकते हैं। उस आपत्ति की जांच शिक्षा विभाग कार्यालय द्वारा की जाएगी। आवेदन फॉर्म में जो भी खामियां व कमियां होगी, वो कार्यालय द्वारा पूरी की जाएगी। हालांकि, फॉर्म में आवश्यक दस्तावेज पूरे मापदंड पर नही हैं तो आवेदन अस्विकार करने का अधिकार भी कार्यालय को होगा। </p>
<p><strong>इसलिए छीना फॉर्म रिजेक्ट करने का अधिकार</strong><br />प्राइवेट स्कूलों द्वारा अब तक पोर्टल नहीं चलने, सर्वर डाउन होने, दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने सहित कई बहाने लगाकर आरटीई आवेदनों को निरस्त कर देते थे। पिछली बार भी शिक्षा विभाग को अभिभावकों द्वारा इस तरह की कई शिकायते मिली थी। इस पर सरकार ने व्यवस्थाओं में बदलाव कर पोर्टल पर रिजेक्शन का आॅप्शन ही हटा दिया है। ऐसे में अब निजी स्कूल किसी भी आवेदन को निरस्त नहीं कर सकेंगे। </p>
<p><strong>10 अप्रेल तक कर सकते हैं आवेदन </strong><br />आरटीई के तहत पहली बार प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से कक्षा एक तक एडमिशन दिए जाएंगे। शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए आवेदन प्रक्रिया 29 मार्च से शुरू हो चुकी है। अभिभावक अंतिम तिथि 10 अप्रेल तक बच्चों के एडमिशन के लिए आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभिभावकों की परेशानियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्री-प्राइमरी के आवेदन भी प्रथम कक्षा के साथ ही कराने का फैसला लिया है। सरकार द्वारा 12 अप्रेल को प्राथमिकता क्रम यानी लॉटरी जारी कर स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। इसी दिन अभिभावकों को संबंधित स्कूलों में रिपोर्टिंग करनी होगी। </p>
<p><strong>आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी </strong><br />आरटीई के तहत नर्सरी से कक्षा एक तक 3 से 7 वर्ष तक के बच्चे आवेदन के पात्र होंगे। अभ्यर्थियों की आयु की गणना 31 मार्च 2023 से होगी। अभिभावकों को आवेदन के दौरान तीन तरह के दस्तावेज आॅनलाइन अपलोड करने होंगे। </p>
<p><strong>इस बार नर्सरी से पहली कक्षा तक एडमिशन </strong><br />शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पहले बच्चों को कक्षा एक से ही प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन मिलता था लेकिन इस बार सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए नर्सरी से ही प्रवेश की व्यवस्था लागू की है। वहीं, अभिभावक अब आवेदन के दौरान एक साथ पांच स्कूलों का चयन कर सकते हैं। पहले अभिभावक मनपसंद स्कूल का विकल्प भरते थे। लेकिन इस बार उन स्कूलों का वरीयता क्रम तय करना होगा। साथ ही वार्ड सत्यापन का दस्तावेज भी आॅनलाइन अपलोड करना होगा।</p>
<p><strong>1104 स्कूल हैं आरटीई में पंजीकृत</strong><br />कोटा जिले में 1104 निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। जहां प्री-प्राइमरी से कक्षा एक तक एडमिशन प्रक्रिया जारी है। 12 अप्रेल को आॅनलाइन लॉटरी के द्वारा स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद इसी दिन से 20 अप्रेल तक संबंधित विद्यालयों में अभिभावकों को रिपोटिंग करनी होगी। प्रवेश से संबंधित किसी भी तरह की कोई समस्या होने पर अभिभावक शिक्षा विभाग में सम्पर्क कर सकते हैं। </p>
<p><strong>एडमिशन नहीं दिया तो होगी कार्रवाई </strong><br />प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चयनित बच्चों को एडमिशन नहीं दिए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बच्चों को एसआर अलोट होने और दस्तावेज सही होने के बावजूद प्रवेश से वंचित रखे जाने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। जिसमें आरोप सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जिसका जवाब स्कूल प्रबंधन को सात दिन में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रदद की कार्रवाई की जा सकती है।  </p>
<p><strong>दस्तावेजों के साथ परिष्ठ-5 फॉर्म जरूर अपलोड करें</strong><br />आरटीई में सत्र 2023-24 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अभिभावक अंतिम तिथि 10 अप्रेल तक आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अभिभावकों से आग्रह है कि आवेदन के दौरान एड्रेस पूफ्र के लिए जो भी आवेदन लगाएं उसके साथ परिष्ठ-5 फॉर्म भरकर जरूर अपलोड करें। इस फॉर्म में वार्ड पार्षद और राजपत्रिक अधिकारी के हस्ताक्षर करवाकर वेरिफाई करवाना जरूरी है। नहीं, तो स्कूल आवंटन के बाद प्राइवेट स्कूलों द्वारा आवेदन में आक्षेप की समस्या आ सकती है। इसके अलावा, लॉटरी निकलने के बाद अभिभावक अपने आवेदन के स्टेटस पर बराबर निगरानी रखें। किसी तरह की दिक्कत आने पर शिक्षा विभाग पर सम्पर्क करें।  <br /><strong>- ध्वज शर्मा, आरटीई प्रकोष्ठ प्रभारी, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>सख्त कार्रवाई की जाएगी</strong><br />राज्य सरकार द्वारा जारी टाइम फ्रेम की पालना सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिए हैं। इसमें लापरवाही बरतने पर संबंधित स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। <br /><strong>- प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी कोटा </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक </strong><br />आरटीई के तहत एडमिशन के दौरान निजी स्कूल संचालक मनमानी करते हैं। दस्तावेजों में कोई न कोई खामियां निकालकर आवेदन कर देते थे। सरकार ने स्कूल संचालकों की मनमानी पर नकेल कसते हुए आवेदन निरस्त करने का अधिकार छीनकर शिक्षा विभाग को दे दिए जाने से अभिभावकों को राहत मिली है। अब विभाग की निगरानी से व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार होगा। <br /><strong>-राम गुर्जर, केशवपुरा निवासी</strong></p>
<p>पिछली बार निजी स्कूलों द्वारा दस्तावेजों में कोई न कोई कमी निकाल बहाना लगाकर अभिभावकों को टरका देते थे। अब स्कूलों के पोर्टल पर आवेदन निरस्त करने का आॅप्शन हटा दिए जाने से सरकार ने अभिभावकों के हित में बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा अधिकारियों द्वारा समस्याओं का तुरंत समाधान  करवाया जा रहा है। <br /><strong>- मुरली लाल, बोरखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Apr 2023 14:56:37 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे अभिभावक, स्कूल नहीं दे रहे प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया भले ही पूरी हो गई है। सरकार ने लॉटरी निकालकर बच्चों को स्कूल भी आवंटित कर दिए हैं। इसके बावजूद बच्चों को एडमिशन दिलाना अभिभावकों के लिए चुनौती बनी हुई है। अभिभावक जैसे ही रिपोटिंग के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं तो उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर टाला जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parents-are-circling-the-education-department--schools-are-not-giving-admission/article-38872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/shiksha-vibhag-k-chakker-kaat-rahe-abhibhawak,-school-nahi-de-rahe-pravesh...kota-news..3.3.2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2022-23 के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश को लेकर सरकार और निजी स्कूलों के बीच विवाद में अभिभावक फंस कर रह गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली गई लेकिन निजी स्कूलों को आरटीई पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। जिसके कारण प्राइवेट स्कूल वरियता होने के बावजूद बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे। वहीं, निजी स्कूल संघ सरकार के आदेश के खिलाफ कोर्ट की शरण में पहुंच गया। जिससे आरटीई बच्चों का प्रवेश अटक गया और अभिभावकों को परेशानी भी बढ़ गई। हालात यह हो गए कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा एडमिशन नहीं देने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हलांकि विभाग द्वारा समाधान के हर संभव प्रयास किए जा रहे लेकिन अधिकारी मामले में स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं।  </p>
<p><strong>शपथ पत्र पर हस्ताक्षर मांग रहे निजी स्कूल</strong><br />शिक्षा विभाग में शिकायत लेकर पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि शहर के कुछ निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से शपथ पत्र पर हस्ताक्षर ले रहे हैं। जिनमें लिखा है कि सरकार अगर पुनर्भरण की राशि का भुगतान नहीं करती है तो अभिभावकों से स्कूल फीस वसूलने का हकदार होगा। इधर, निजी स्कूलों का तर्क है कि अगर सरकार आरटीई का भुगतान नहीं करेगी तो प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसे लेकर कुछ निजी स्कूल कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं।</p>
<p><strong>150 से अधिक शिकायतें आ रही प्रतिदिन </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें आ रही है। जिनमें स्कूलों द्वारा अभिभभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला नहीं देने, कागजों में कमियां निकालकर बहाने लगाने, शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाने सहित कई शिकायतें शामिल हैं। विभाग में प्रतिदिन 150 से अधिक अभिभावक निजी स्कूलों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि हमारे स्तर पर स्कूल संचालकों से समझाइश कर प्रवेशित बच्चों को दाखिला दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। शहर में कुछ स्कूलों ने तो एडमिशन भी दे दिए हैं लेकिन अधिकतर स्कूल संचालक कोई न कोई बहाना लगाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। </p>
<p><strong>परेशान हो रहे अभिभावक</strong><br />आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया भले ही पूरी हो गई है। सरकार ने लॉटरी निकालकर बच्चों को स्कूल भी आवंटित कर दिए हैं। इसके बावजूद बच्चों को एडमिशन दिलाना अभिभावकों के लिए चुनौती बनी हुई है। अभिभावक जैसे ही रिपोटिंग के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं तो उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर टाला जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि पहले आवेदन के लिए मशक्कत करनी पड़ी। जैसे-तैसे बच्चे का नंबर आया तो स्कूल प्रवेश देने से मुकर रहे हैं। जबकि, आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके बावजूद शहर के कई निजी स्कूल आरटीई छात्रों को एडमिशन नहीं दे रहे।  </p>
<p><strong>यह है मामला, यूं हो रहा विवाद</strong><br />आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से राइट टू एज्युकेशन की शुरूआत की गई थी। जिसके तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में शुरुआत कक्षा की 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। सत्र 2022-23 में निजी स्कूलों में नर्सरी से एचकेजी तक बच्चों को एडमिशन देने की मांग को लेकर अभिभावकों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को आदेश जारी किया कि सत्र 2022-23 में सभी प्रवेशित बच्चों को आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन दिया जाए। इस पर सरकार की सहमति से शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को बीच सत्र से ही आरटीई के तहत एडमिशन देने के निर्देश जारी कर दिए। लेकिन, सरकार द्वारा फीस की पुनर्भरण राशि बच्चे के कक्षा एक में आने के बाद से ही देने की बात कहीं गई। इस पर प्राइवेट स्कूल संचालकों ने सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। वर्तमान में यह मामला कोर्ट में चल रहा है। जिसके कारण बच्चों के एडमिशन अटक गए।  </p>
<p><strong>यूं चली एडमिशन की प्रक्रिया</strong><br />-कोटा जिले के पांच ब्लॉक में 1100 स्कूल आते हैं आरटीई के दायरे में।<br />-6 फरवरी को शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत एडमिशन को लेकर विज्ञापन जारी किया था। <br />-13 फरवरी तक एडमिशन के लिए आॅनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई। <br />-15 फरवरी को जयपुर से लॉटरी निकाल बच्चों को एडमिशन के लिए स्कूल आवंटित किए गए थे। <br />-17 फरवरी तक अभिभावकों ने आॅनलाइन रिपोर्टिंग की। <br />-20 फरवरी तक आवेदन पत्रों की जांच की गई। <br />-27 फरवरी तक आवेदन में गलतियां होने पर संशोधन करने का  समय दिया गया। <br />-28 फरवरी तक विभाग द्वारा पोर्टल पर आरटीई सीट पर बच्चों के चयन प्रक्रिया पूरी करनी थी, जो संभवत: पूरी नहीं हो पाई।</p>
<p><strong>अभिभावकों ने बयां की पीढ़ा</strong><br />-प्रेम नगर निवासी हरदेव ने बताया कि उनकी बेटी का आरटीई की लाटरी में नाम आ चुका है। लेकिन, स्कूल प्रशासन बार-बार कागजों में कमियां निकालकर टाल रहा है। बच्चे का दाखिला नहीं हो रहा है। जबकि, स्कूलों में परीक्षा की तैयारियां शुरू हो चुकी है। </p>
<p>-बोरखेड़ा थाना क्षेत्र के देवली अरब निवासी राजेंद्र कुमार नायक  ने बताया कि 6 से 13 फरवरी के बीच आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षा में एडमिशन के लिए आॅन लाइन फॉर्म भरा था। पोर्टल पर वार्ड के दायरे में आने वाले स्कूलों का चयन किया था।  जिसमें से एक स्कूल में बच्चे का नम्बर आ गया। ऐसे में रिपोर्टिंग के लिए वहां गए तो उन्होंने बताया कि आपने स्कूल का मीडियम हिन्दी भरा है जबकि, हमारा स्कूल इंग्लिश मीडियम है। ऐसे में स्कूल का मीडियम में संशोधन करवाने के लिए शिक्षा विभाग भेजा है, यहां प्रार्थना प्रत्र दिया है लेकिन अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। </p>
<p>-नयापुरा निवासी पवन मिश्रा ने बताया कि बेटी का निजी स्कूल की नर्सरी में आरटीई के तहत प्रवेश होना है। दो बार विद्यालय जा चुके हैं, लेकिन बेटी को प्रवेश नहीं मिला। हर बार स्कूल द्वारा कोई न कोई बहाना बनाकर टाल रहे हैं। इसकी शिकायत को लेकर शिक्षा विभाग कार्यालय आए हैं लेकिन यहां प्रार्थना पत्र लिखकर देने की बात कही जा रही है। वहीं, प्राइवेट स्कूलों का मामला कोर्ट में चलने की जानकारी मिली है। दो सप्ताह से स्कूल  और शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, बेटी को कब एडमिशन मिलेगा कोई बताने वाला भी नहीं है।</p>
<p>आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी में सत्र 2022-23 में प्रवेश के लिए हाईकोर्ट के आदेश से अधिसूचना जारी की गई थी। शिक्षा निदेशालय ने आनन-फानन में सत्र समाप्ति के समय विज्ञप्ति निकली थी। कक्षा फर्स्ट से पहले नर्सरी एलकेजी, एचकेजी कक्षाओं की फीस का पुनर्भरण सरकार नहीं देना चाहती। सरकार खुद ही नियमों में उलझा कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रख रही है। प्रवेश 75 प्रतिशत सशुल्क छात्रों के आधार पर होते हैं। निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल क्रांति संघ के द्वारा हाईकोर्ट में पुन: विचार याचिका दायर की है। जिसकी सुनवाई 17 मार्च को होगी। <br /><strong>-जमनाशंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष निजी स्कूल संचालक संघ कोटा शहर</strong></p>
<p>शिक्षा विभाग कार्यालय में प्राइवेट स्कूलों द्वारा बच्चों को दाखिला नहीं देने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। हमारी ओर से निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। नियमानुसार बच्चों को आरटीई के तहत एडमिशन मिले, इस दिशा में प्रयास जारी है।  <br /><strong>- राजेश कुमार मीणा, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Mar 2023 14:53:18 +0530</pubDate>
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                <title>आय प्रमाण पत्र पर नोटरी जरूरी नहीं , अभिभावक का स्व:घोषणा पत्र ही मान्य</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निशुल्क प्रवेश वाले बच्चों के अभिभावकों को हर साल आय का प्रमाण पत्र देना जरूरी है। शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, अगर उनकी आय ढाई लाख रुपए से अधिक होती है, तो विद्यार्थी निशुल्क प्रवेश के दायरे में नहीं रहेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notary-is-not-necessary-on-income-certificate--only-self-declaration-form-of-guardian-is-valid/article-21404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/aay-praman-patr-par-notery-....kota-news-2.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निशुल्क प्रवेश वाले बच्चों के अभिभावकों को हर साल आय का प्रमाण पत्र देना जरूरी है। शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, अगर उनकी आय ढाई लाख रुपए से अधिक होती है, तो विद्यार्थी निशुल्क प्रवेश के दायरे में नहीं रहेगा। इसलिए निजी स्कूलों में अभिभावकों से आय का प्रमाण पत्र मांगा जाता है। लेकिन शहर के अधिकतर निजी स्कूल संचालक अभिभावकों पर आय प्रमाण पत्र पर नोटेरी करवाने का दबाव बना रहे हैं। जबकि, इस प्रमाण पत्र के लिए अभिभावक का स्वघोषणा पत्र ही मान्य होता है। इस पत्र को अभिभावकों द्वारा भरने के बाद दो उत्तरदायी व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षर कराकर सत्यापित करवाना होता है। यह उत्तरदायी व्यक्ति सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद का सदस्य, सरपंच, वार्ड पंच, महापौर, पार्षद, नगरपालिका अध्यक्ष व सदस्य, राजपत्रिक अधिकारी इनमें से कोई भी हो सकते हैं। फिर इसे नोटरी से प्रमाणित कराने की जरूरत नहीं होती। इसके बावजूद सैंकड़ों अभिभावकों को परेशान किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>25 प्रतिशत सीटों पर होता है नि:शुल्क प्रवेश</strong><br />आरटीई के तहत असुविधाग्रस्त व कमजोर वर्ग यानी ओबीसी, एसबीसी व सामान्य वर्ग के उन बच्चों का निजी स्कूल की एंट्री लेवल की कक्षा में कुल सीटों के 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क प्रवेश होता है, जिनके पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए से कम है। प्रवेश के समय अभिभावक को प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है। निशुल्क शिक्षा का प्रावधान आठवीं कक्षा तक है। आठवीं से पहले जिस साल अभिभावक की आय ढाई लाख से अधिक हो जाती है, उसी साल से विद्यार्थी निशुल्क प्रवेश के दायरे से बाहर हो जाएगा। ऐसे में सरकार उसकी पुनर्भरण राशि बंद कर देती है।  </p>
<p>आय प्रमाण पत्र पर नोटरी करवाने की जरूरत नहीं होती है। अभिभावक का स्वघोषणा पत्र ही मान्य होता है। इस पत्र पर दो उत्तरदायी व्यक्ति राजपत्रिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षर कराकर सत्यापित करवाना होता है। इसके बाद प्रमाण पत्र को नोटरी करवाकर प्रमाणित करवाने की आवश्यकता नही होती। यह 6 महीने तक वेलिड रहता है। यदि कोई निजी स्कूल संचालक नोटरी का दबाव बनाता है तो अभिभावक इसकी शिकायत शिक्षा विभाग को कर सकता है।                 <strong>- निर्मला मेहरा, डीओ एलीमेंट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 16:30:27 +0530</pubDate>
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