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                <title>स्टेरॉयड का सेवन शरीर को कर रहा डैमेज</title>
                                    <description><![CDATA[रोजाना स्टेरॉयड के सेवन के कारण 12 से 15 नए मरीज इस बीमारी का उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/steroid-consumption-is-damaging-the-body/article-96972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शरीर को सुडौल बनाने की चाहत में अंधाधुंध स्टेरॉयड के प्रयोग ने युवाओं में हिप ज्वाइंट की समस्या को बढ़ा दिया है। इसके कारण कई बार तो हिप को प्रत्यारोपित करना पड़ जाता है। चिकित्सकों के अनुसार हिप ज्वाइंट डैमेज के नाम से जानी जाने वाली इस समस्या के चलते कुछ सालों पहले तक एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना महज एक या दो केस आते थे, लेकिन अब रोजाना स्टेरॉयड के सेवन के कारण 12 से 15 नए मरीज इस बीमारी का उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में अस्पतालों में पचास फीसदी हिप रिप्लेसमेंट स्टेरॉयड सेवन के कारण हो रहे हैं।</p>
<p><strong>केल्शियम को अवशोषित नहीं कर पाता शरीर </strong><br />चिकित्सकों के अनुसार कूल्हे का जोड़ शरीर का वजन सहने वाले प्रमुख जोड़ों में से एक है। यह जांघ की हड्डी (फीमर) व कूल्हे की हड्डी (पेल्विस) से जुड़ा रहता है। यह पैरों या टांगों को मोड़ऩे, घुटनों के बल बैठने या घुमाने में सहायता करता है। आमतौर पर किसी भी कारण से 10 फीसदी भी वजन बढ़ने पर कूल्हे और पर दबाव पड़ने लगता है। चिकित्सकों के अनुसार स्टेरॉइड व ध्रूमपान के कारण शरीर केल्शियम अवशोषित नहीं कर पाता है। कूल्हों में खराबी आर्थराइटिस से भी हो सकती है। रूमेटाइड आर्थराइटिस होने पर जोड़ों में सूजन होती है। इसके बाद से धीरे-धीरे जोड़ खराब हो जाते हैं। कई बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है।</p>
<p><strong>बीमारी बढ़ी तो हिप रिप्लेसमेंट ही विकल्प</strong><br />चिकित्सकों के अनुसार हिप रिप्लेसमेंट या आॅर्थोप्लास्टी सर्जरी में डैमेज हुए कूल्हे के जोड़ों को हटा दिया जाता है और उसकी जगह आर्टिफिशियल आॅर्गन लगा दिए जाते हैं। इस तरह मरीज का दर्द भी दूर हो जाता है और वह फिर से एक सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे लोग जिनके कूल्हे के जोड़ किसी कारण से डैमेज हो गए हैं और इलाज के बावजूद उनका दर्द कम नहीं हो रहा है, उन्हें रोजमर्रा के कार्य करने में अत्यंत परेशानी होती है। ऐसे में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी इन व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।</p>
<p><strong>इतना घातक है स्टेरॉयड</strong><br />स्टेरॉयड के सेवन के कारण हड्डियों में रक्त संचरण प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण हड्डियों को काफी नुकसान होने लगता है। इसके बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से हड्डियों में गलने की समस्या होने लगती है। इसके अलावा स्टेरायड के कारण शरीर केल्शियम अवशोषित नहीं कर पाता है। जिससे स्टेरायड लेने वाले के हिप कमजोर होने लगते हैं। इसके लगातार सेवन के कारण स्थिति बिगड़ने लगती है। समस्या की जानकारी नहीं मिलने के कारण उपचार संभव नहीं हो पाता है। इसके बाद हिप रिप्लेसेमेंट ही अंतिम उपाय रह जाता है।  <br /><strong>- डॉ. महेंद्र मीणा, आर्थोपेडिक सर्जन</strong></p>
<p> स्टेरॉयड का चलन बढ़ने के कारण युवाओं में हिप ज्वाइंट की समस्या होने लगी है। इसके सेवन से कूल्हे की हड्डी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। कूल्हे के जोड़ में थोड़ी खराबी है तो दवा और फिजियोथैरेपी से आराम मिलता है, लेकिन परेशानी बढऩे पर कूल्हे का जोड़ बदलना पड़ता है। यही कारण है कि ओपीडी में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने वालों में अब युवा वर्ग की संख्या ज्यादा हो रही है।<br /><strong>- डॉ. अजय जौहरी, अस्थि रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 15:08:48 +0530</pubDate>
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                <title>रोजाना 50 हजार नारियल पानी पी रहे कोटावासी</title>
                                    <description><![CDATA[मौसमी बीमारियों का प्रकोप होने से बढ़ी खपत। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-residents-are-drinking-50-thousand-coconut-water-daily/article-91525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(14)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डेंगू सहित अन्य मौसमी बीमारियों का प्रकोप फैलने से कोटा में नारियल पानी की खपत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में कोटा की थोक फलसब्जी मंडी में प्रतिदिन 50 हजार नारियल पानी पीस की बिक्री होने लगी है। मांग बढ़ने के कारण नारियल पानी के भावों में काफी उछाल आ गया है। थोक मंडी में नारियल पानी की थोक रेट 56 रुपए प्रति पीस चल रही है वहीं खुदरा में इसकी कीमत 70 रुपए प्रति पीस हो गई है। डेंगू के रोगियों के लिए नारियल पानी काफी लाभदायक माना जाता है। इस समय कोटा में डेंगू का कहर बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण नारियल पानी की मांग में तेजी बनी हुई है। </p>
<p><strong>ऐसे करें पता नारियल में कितना पानी</strong><br />रंग से पहचानें: जिस नारियल का रंग भूरा होता है उसमें पानी की मात्रा कम होती है। वहीं जो नारियल हरा और ताजा नजर आता है उसमें उतना ही ज्यादा पानी पाया जाता है। इसलिए नारियल खरीदते वक्त इस बात का ख्याल जरूर रखें क्योंकि जैसे-जैसे यह पकने लगता है तो इसमें पानी की मात्रा कम होती जाती है।<br />मीडियम साइज का चुनें: अगर आप सोचते हैं कि नारियल जितना बढ़ा होगा उसमें पानी भी उतना ही ज्यादा होगा तो बता दें कि ऐसा नहीं है। असल में बड़ा नारियल पानी से नहीं बल्कि मलाई से भरा होता है। ऐसे में अगर मलाई की तुलना में पानी ज्यादा चाहिए तो हमेशा मीडियम साइज का नारियल ही चुने। <br />आवाज बताएगी पानी की मात्रा: कम ही लोग जानते हैं कि पानी से भरे नारियल को हिलाने से कोई आवाज नहीं आती है, जबकि जिस नारियल में पानी कम होता है उसमें पानी की यह आवाज ज्यादा आती है। साथ ही फ्रेश नारियल की पहचान का भी तरीका है क्योकि धीरे-धीरे इसका पानी सूखने लगता है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- थोक मंडी में रोजाना की खपत                       50000<br />- मंडी में दो माह पहले थी खपत                       30000<br />- एक ट्रक में इतना आता है माल                       18000<br />- नारियल का थोक भाव रुपए प्रति किलो में        56<br />- नारियल का खुदरा भाव रुपए प्रति किलो में       70</p>
<p><strong>कर्नाटक और गुजरात से आ रहा माल </strong><br />नारियल के व्यापारी गौरव भारद्वाज, मनीष नांबियार व तरूण जैन ने बताया कि इस समय कर्नाटक और गुजरात से नारियाल आ रहे हैं। नारियल पानी का सीजन मार्च से नवंबर तक रहता है। पूर्व में प्रतिदिन 30 हजार पीस नारियल पानी की खपत हो रही थी। अब मौसमी बीमारियों के दौर में नारियल पानी की खपत ज्यादा हो गई है। इस समय थोक मंडी में नारियल पानी की खपत रोजाना 50 हजार पीस पर पहुंच गई है। इन दिनों कर्नाटक और गुजरात से तीन ट्रकों में माल आ रहा है। एक ट्रक में 18 से 20 हजार नारियल पानी आता है। एक कट्टे में 25 पीस आते हैं। फुटकर दुकानदार यहां से माल खरीदकर खुदरा भाव से शहर के बाजारों में नारियल पानी की बिक्री करते हैं।</p>
<p><strong>जगह-जगह हो रही बिक्री</strong><br />कभी आस्था के विषय तक सीमित रहा नारियल अब स्वास्थ्य का कारक भी बन गया है। एनर्जी व एंटीआॅक्सीडेंट से भरपूर नारियल पानी का व्यापार जिले में दिनोंदिन बढ़ रहा है। आलम ये है कि शहर के मुख्य बाजार, सार्वजनिक स्थानों, मंदिरों व गलियों तक में इनकी बिक्री होने लगी है।  नारियल पानी की बिक्री यूं तो जिले में करीब एक दशक से हो रही है, लेकिन कोरोना काल के बाद इसके व्यापार में उछाल आया है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरुकता की वजह से सुबह की सैर करने वालों से लेकर जिम में एक्सरसाइज व योगा करने वाले लोगों तक की पहली पसंद यही ड्रिंक बन गया है। कोटा में पानी व मलाई के दो तरह के नारियल आते हैं। जिसमें ज्यादा मांग पानी वाले नारियल की है।</p>
<p>कोटा में रोजाना 50 हजार पीस नारियल पानी की खपत हो रही है। आमतौर पर खुदरा में 50 रुपए में बिकने वाला नारियल पानी इन दिनों 70 रुपए में बिक रहा है। वहीं मंडी में इसकी थोक रेट 56 रुपए बनी हुई है। मौसमी बीमारियों के प्रकोप के कारण पूरे देश में नारियल पानी की खपत बढ़ी है।  इस कारण भाव में तेजी हो रही है। आगामी दिनों में नारियल पानी के दाम में और तेजी आ सकती है। <br /><strong>- गौरव भारद्वाज, नारियल पानी के थोक व्यापारी</strong></p>
<p>नारियल में मैंगनीज, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन होता है, जो हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। इसका दूध व तेल त्वचा को निखारता हैं। आयरन और सेलेनियम लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण एंटीआॅक्सीडेंट है। नारियल से कोलेस्ट्रॉल स्तर सुधरता है। इसका विटामिन-सी, मैग्नीशियम और पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।<br /><strong>- डॉ. अजय कुमार, अस्थि रोग विशेषज्ञ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 15:30:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>जापान में स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का सेवन पड़ा भारी, 5 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनी के अधिकारियों ने बताया किबेनीकोजी कोलेस्टे हेल्प समेत कई उत्पादों का सेवन करने के बाद 114 लोगों का अस्पतालों में उपचार हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/5-peoples-killed-due-to-consumption-of-healthy-products-in-japan/article-74041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान में एक के बाद एक स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों को वापस लिए जाने के सप्ताह में 5 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ओसाका स्थित कोबायाशी फार्मास्युटिकल कंपनी पर आरोप है कि उसे इन उत्पादों से समस्याओं के बारे में जनवरी की शुरूआत में ही पता चल गया था। लेकिन इस संबंध में सार्वजनिक रूप से पहली घोषणा 22 मार्च को की गई। कंपनी के अधिकारियों ने बताया किबेनीकोजी कोलेस्टे हेल्प समेत कई उत्पादों का सेवन करने के बाद 114 लोगों का अस्पतालों में उपचार हो रहा है।</p>
<p>बेनीकोजी कोलेस्टे हेल्प में बेनीकोजी नामक सामग्री मिली है जो फफूंद की लाल प्रजाति है। इस सप्ताह की शुरूआत में मृतकों की संख्या दो थी। उत्पाद निमार्ता के अनुसार, कुछ लोगों को इन उत्पादों के सेवन के बाद किडनी में समस्या पेश आने लगी लेकिन सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर असल वजह का अभी पता लगाया जा रहा है। कंपनी के अध्यक्ष अकीहिरो कोबायाशी ने लोगों की मौत होने और बीमार पड़ने को लेकर शुक्रवार को माफी मांगी। कंपनी ने बेनीकोजी सामग्री वाले कई अन्य उत्पादों को बाजार से वापस ले लिया है।</p>
<p>जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन उत्पादों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की है। इन उत्पादों में वे उत्पाद भी शामिल है जिनमें फूड कलर के लिए बेनीकोजी का इस्तेमाल किया गया है। मंत्रालय ने आगाह किया है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। कोबायाशी फार्मास्युटिकल वर्षों से बेनीकोजी उत्पाद बेच रही है लेकिन समस्याएं 2023 में बने उत्पादों के साथ शुरू हुई। कंपनी ने बताया कि उसने पिछले साल 18.5 टन बेनीकोजी का उत्पादन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2024 14:32:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हर हफ्ते 40 टन पिंड खजूर खा रहा कोटा जिला</title>
                                    <description><![CDATA[पिंड खजूर के व्यापारियों ने बताया कि सर्दियों के सीजन में इनकी खपत ज्यादा होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-district-is-eating-40-tons-of-dates-every-week/article-63922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/hr-din-40-ton-pind-khajoor-kha-rha-kota-jila...kota-news-11-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के मौसम में स्वाद बढ़ाने वाले विभिन्न तरह के फल बाजार में खूब बिक रहे हैं, लेकिन बात जब पिंड खजूर की होती तो मुंह में मिठास-सी घुल जाती है। पिंड खजूर खाने में जितने स्वादिष्ट होते हैं उतने ही लाभकारी भी हैं। यही वजह है कि खजूर एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है। वर्तमान में कोटा में खाड़ी देशों के पिंड खजूर की बिक्री जोरों पर है। सर्दियों में खजूर की खपत बहुत ज्यादा होती है। तापमान में गिरावट और शादी के सीजन में कोटा में इराक, ईरान और सऊदी अरब से आने वाले पिंड खजूर की मांग बढ़ गई है। फल विक्रेताओं के अनुसार कोटा में खाड़ी देशों से आने वाले पिंड खजूर की एक हफ्ते में खपत लगभग 40 टन हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिंड खजूर का स्वाद घर-घर पहुंच रहा है। वर्तमान में थोक मंडी में खजूर की कीमत 90 से 100 रुपए किलो के बीच चल रही है। वहीं कोटा के अन्य इलाकों में यही सौ से सवा सौ रुपए किलो बेचा जा रहा है।</p>
<p><strong>इन देशों से आ रहा पिंड खजूर</strong><br />विश्व में सबसे अधिक पिंड खजूर का उत्पादन खाड़ी देशों में होता है। खाड़ी देशों में पिंड खजूर तैयार करने के लिए भूमि काफी उपयुक्त मानी जाती है। ऐसे में वहां पर उत्पादित पिंड खजूर का निर्यात पूरे विश्व में किया जाता है। भारत में भी काफी मात्रा में वहां से पिंड खजूर आता है। कोटा में इस समय   ईरान, इराक, सउदी अरब, फिलीस्तीन, अल्जीरिया देशों से खजूर आ रहा है। वर्तमान में मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों से इराक, ईरान और सऊदी अरब से खजूर कोटा के बाजारों में आती हैं।</p>
<p><strong>विश्व  में खजूर की 200 से अधिक किस्म</strong><br />स्थानीय व्यापारियों के अनुसार दुनियाभर में दो सौ से अधिक किस्म के खजूर पाए जाते हैं। अजवा खजूर लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है। अरब के मदीना से आने वाला यह खजूर स्वाद के साथ ही काफी सेहतमंद और मुलायम होता है। अजवा खजूर अन्य खजूरों के मुकाबले छोटा होता है। इस खजूर को खाने के बाद मुंह से गुलाब की खुशबू आने लगती है। खजूर की खेती सबसे पहले इराक में शुरू हुई थी। उसके बाद यह अरब और अन्य देशों में उगाया जाने लगा है। भारत में सिर्फ गुजरात में खजूर उगाया जाता है।  </p>
<p><strong>दो दिन में 20 से 25 टन की आवक</strong><br />थोक फल सब्जी मंडी के प्रमुख व्यापारी शब्बीर अंसारी ने बताया कि कोटा में देशभर के लाखों बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में पिंड खजूर की खपत यहां ज्यादा है। खाड़ी देशों से आने वाले इन खजूरों को कोटा के व्यापारी गुजरात के बंदरगाह से 20 से 25 टन हर दो दिन में गाड़ी से मंगवाते हैं। कोटा के छोटे और बड़े दुकानदार यहां से लेकर जाते हैं। पिंड खजूर के व्यापारियों ने बताया कि सर्दियों के सीजन में इनकी खपत ज्यादा होती है। बच्चे इसे खरीदते हैं और दूध में उबालकर खाते हैं।</p>
<p>पिंड खजूर खाने में जितने ही स्वादिष्ट होते हैं, उतने ही सेहत के लिए भी लाभकारी होते हैं। यह फाइबर से भरपूर होते हैं। यह कब्ज की समस्या को रोकता है और दिल की सेहत में सुधार करता है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में यह काफी काम आता है। यह दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद है।<br /><strong>- डॉ. गिरिश स्वामी, आयुर्वेदिक चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Dec 2023 19:14:16 +0530</pubDate>
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                <title>मार्च से जून तक पिछली बार से आठ प्रतिशत बढ़ जाएगी बिजली खपत</title>
                                    <description><![CDATA[ डिमांड और लोड़ को बढ़ने का आंकलन करते हुए ऊर्जा विकास निगम बिजली खरीद और उत्पादन बढ़ाने के इंतजाम की प्लानिंग करने में जुटा हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/electricity-consumption-will-increase-by-eight-percent-from-last-time/article-38233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/s-6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में मौसम बदलाव के चलते इस बार राजस्थान में तेज गर्मी पढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। बिजली कम्पनियों ने मार्च से जून तक गर्मी के हालातों का आंकलन कर पिछली साल से आठ प्रतिशत ज्यादा बिजली खर्च होने का अनुमान लगाया है। इस अनुमान के साथ ही गर्मियों में बिजली मैनेजमेंट के लिए ऊर्जा विभाग के अफसरों ने अभी से कवायद शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>गर्मियों में इतनी बढ़ सकती है बिजली की जरूरत</strong><br />प्रदेश में बिजली की खपत इस बार मार्च से जून तक करीब 3,72,097 लाख यूनिट (3720 करोड़ लाख यूनिट) बिजली की अनुमानित डिमांड रह सकती है। जो पिछले वर्ष के इन महीनों के अनुपात में करीब आठ प्रतिशत ज्यादा होगी। डिमांड के हिसाब से अभी 10,300 लाख यूनिट की कमी है। ऊर्जा विकास निगम को बिजली खरीद पर 17300 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। इसमें से 500 करोड़ से ज्यादा की अतिरिक्त बिजली खरीद करनी पड़ेगी। भीषण गर्मी में विद्युत उत्पादन निगम राज्य में डिमांड की तुलना में उत्पादन नहीं कर पाता है, क्योंकि उसके लिए उत्पादन निगम की सभी 23 इकाइयों से बिजली उत्पादन होना जरूरी है। पिछले एक-दो साल से 5 से 7 यूनिट तकनीकी कारणों से बंद रहती हैं, लिहाजा बिजली संकट और फिर कटौती के हालात से सबक लेते हुए ऊर्जा विभाग और ऊर्जा विकास निगम दोनों ने पहले ही होमवर्क शुरू कर दिया है।<br />सोलर, विंड एनर्जी के अलावा <br />पावर परचेज भी रहेगा माध्यम<br />प्लानिंग के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम से 5200 मेगावाट के अलावा सोलर और विंड एनर्जी एग्रीमेंट से पांच हजार मेगावाट बिजली ली जाएगी। शॉर्टटर्म टेंडर के जरिए 500 से 700 मेगावाट और एक्सचेंज से 500 मेगावाट बिजली लेने की व्यवस्था की जाएगी। बाकी बिजली खरीद पावर परचेज एग्रीमेंट से जुड़ी उत्पादन कंपनियों से होगी। ऊर्जा विभाग ने यूपी से बैंकिंग के जरिए 1500 मेगावाट बिजली ली थी। अब यूपी को अप्रेल से सितम्बर तक इतनी ही बिजली वापस देनी है। जबकि, इसी दौरान राजस्थान में बिजली की डिमांड रहती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Feb 2023 10:20:13 +0530</pubDate>
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                <title> तंबाकू निषेध दिवस  आज : तंबाकू का सेवन मानव शरीर के लिए ही नही, पर्यावरण के लिए भी है कैंसर</title>
                                    <description><![CDATA[तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-health-no-tobacco-day-today--tobacco-consumption-is-not-only-for-the-human-body--it-is-also-for-the-environment--cancer/article-10857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/world-no-tobacco-day.jpg" alt=""></a><br /><p>अक्सर हम सब सोचते हैं कि बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखा सहित धूम्रपान उत्पादों के सेवन से कैंसर हो सकता है, लेकिन ये उत्पाद हमारे पर्यावरण के लिए भी कैंसर बन रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उपभोग के बाद इनके रैपर को खुले में फैक दिया जाता है। कुछ ही समय बाद ये सब नालियों में जमा हो जाते हैं। इससे नालियां भी अवरुद्ध होती है और इसके विषैले पदार्थ मिट्टी में या उसके माध्यम से भूमिगत पानी में भी चले जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तंबाकू उत्पादों में 7 हजार से अधिक विषैले रसायन होते हैं, जो ना केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण पर भी बड़े खतरे के रूप में उभर रहे हैं ।</p>
<p>सवाई मानसिंह अस्पताल के कान-नाक और गला विभाग के आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सिगरेट, बिड़ी के टुकड़े, लोगों द्वारा पान सुपारी, गुटखे की पीक जमीन पर थूकने से जमीन का पानी विषैला हो रहा है। सिगरेट के बट में प्लास्टिक होता है जो कभी गलता नहीं है। सिगरेट बट को बनाने वाले पदार्थ सेल्यूलोज एसीटेट, पेपर और रेयॉन के साथ मिलकर पानी और जमीन को भी प्रदूषित और विषेला बना रहे हैं। </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>तंबाकू कैंसर का बड़ा कारण</strong></span></p>
<p>तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। <span style="background-color:#ffff99;"><strong>ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं। इसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में सेवन करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें से 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू का प्रयोग करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं है।</strong></span></p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>हैड-नेक कैंसर के 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन से</strong></span></p>
<p>नारायणा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट ईएनटी, हैड एंड नेक सर्जरी डॉ. दीपांशु गुरनानी ने बताया कि हर साल करीब 2 लाख हेड एवं नेक कैंसर से जुड़े मामले आते हैं, जिसमें से करीब 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन के हैं। युवाओं में तंबाकू सेवन को बढ़ावा देने का मुख्य कारण सोशल मीडिया और प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा किए विज्ञापन हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी का कहना है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोकिंग भी धूम्रपान करने जितना ही खतरनाक है, क्यूंकि ये सीधा फेफड़ों पर असर डालता है, जिससे कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए धूम्रपान और निष्क्रिय धूम्रपान से बचें। आजकल तंबाकू छोड़ने के लिए दवाइयां और निकोटिन थेरेपी भी उपलब्ध हैं।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>कैंसर का उपचार संभव</strong></span></p>
<p>मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर की रेडिएशन ओन्कोलोजिस्ट डॉ. पूनम गोयल ने बताया कि तम्बाकू को किसी भी रूप व मात्रा में लेना घातक है। आज के युग में समय रहते पता लगने पर कैंसर का उपचार संभव है। कैंसर के मुख्य लक्षणों की बात करे तो सांस फूलना, भूख नहीं लगना, मूंह से खून आना, वजन कम होना, छाती में दर्द होना आदि है। इन सबको महसूस होते ही अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर तुरंत उपचार करवाना चाहिए। निम्स के मनोचिकित्सक डॉ. तुषार जग्गावत ने बताया कि धूम्रपान के मनोवैज्ञानिक पहलू भी हैं। कुछ लोगों के लिए धूम्रपान एक मजा है और यह उन्हें मनोवैज्ञानिक आनंद देता है साथ ही यह आत्म अभिव्यक्ति की एक कला है। कई लोगों के लिए, यह काम के दौरान आराम करने के लिए और खुशी के क्षण को जीने का एक बहाना है। बिहेवियरल थेरेपी और फार्माकोलॉजिकल थैरेपी दोनों उपचारों को मिलाकर उपचार करने पर तम्बाके छोड़ने की सफलता दर अधिक होती है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 12:10:26 +0530</pubDate>
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                <title>सरप्लस उत्पादन का दावा था खोखला : राठौड़ </title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने प्रदेश में गहराए बिजली संकट को लेकर कहा कि सीएम ने विधानसभा में 23309 मेगावाट बिजली उत्पादन होने और सरप्लस बिजली का दावा किया था, लेकिन यह झूठ निकला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-electricity-consumption-13600-megawaat-in-state/article-8864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/65465464655.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने प्रदेश में गहराए बिजली संकट को लेकर कहा कि सीएम ने विधानसभा में 23309 मेगावाट बिजली उत्पादन होने और सरप्लस बिजली का दावा किया था, लेकिन यह झूठ निकला। पिछले तीन माह में प्रदेश में बिजली की खपत केवल 13600 मेगावाट रही। इसमें 20 फीसदी टीएंडडी लॉस भी शामिल कर ले, तो 18647 मेगावाट की खपत रही। फिर भी बिजली संकट कैसे उत्पन्न हो गया। सरप्लस उत्पादन का दावा खोखला था। तापीय विघुतगृहों से 8597.35 मेगावाट बिजली उतपन्न होती है, लेकिन सरकार ने गत तीन माह में 4 हजार मेगावाट के 6-10 संयंत्रों को रखरखाव के नाम पर बंद किया और कोयला का प्रबन्धन भी नहीं किया। कोयला उत्पादन कंपनियों के 116000 करोड़ रुपए बकाया नहीं चुकाए तो उन्होंने कोयला सप्लाई बंद कर दी। जो बिजली 3.40 रुपए प्रतियूनिट उत्पादन राशि से खुद बनाने की जगह 17 रुपए प्रति यूनिट तक महंगी खरीद कर प्राइवेट कंपनियों से जमकर चांदीकूटी जा रही है। 2019-20 तक 12470 और 2020-21 में 13791 करोड़ की खरीद हुई। कंपनियों को 90 हजार करोड़ का कर्ज हो चुका है। जल्द कोयले का प्रबन्धन नहीं किया तो थर्मल पावर भी बंद हो जाएंगे। प्रदेश में गांवों में 4-5 घंटे ही बिजली आ रही है। राजस्थान को अंधेरे में डूबा दिया गया है।</p>
<p><strong>सोलर का 16 हजार मेगावाट दूसरे राज्यों को भेज रहे</strong><br />आरोप लगाया कि प्रदेश में सोलर से 11499, विंड से 4326, रूफटॉप से 748 मेगावाट यानी 16 हजार मेगावाट से ज्यादा उत्पादन हो रहा है, लेकिन सरकार इस बिजली को उपयोग में लेने की जगह 70 फीसदी बिजली दूसरे राज्यों को दे रही है। इसे काम में लेते तो संकट नहीं आता। राजस्थान विद्युत नियामक आयोग ने 500 किलोवाट तक रूफटॉप प्लांट की अनुमति दी है, लेकिन डिस्कॉम चलाकर इसे लागू नहीं कर रहा।   </p>
<p><strong>एसीएस को छोटे अधिकारी ही नोटिस दे रहे</strong><br />प्रदेश में प्रशासन की भी बुरी स्थिति है। बाड़मेर लिग्नाइट माइंस कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी स्टेट माइंस एंड मिनरल्स की है। 49 फीसदी राजवेस्ट की है। कंपनी के चेयरमैन एसीएस सुबोध अग्रवाल हैं। एक उपशासन सचिव स्तर के अधिकारी 2436.8 करोड़ वसूली के नोटिस दे रहे हैं। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 12:03:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गर्मी में रोजाना 10 लाख यूनिट बिजली की बढ़ी खपत </title>
                                    <description><![CDATA[अप्रैल का महीना शुरू होने के साथ ही गर्मी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कोटा शहर में मार्च की तुलना में अप्रैल से रोजाना करीब 10 लाख  यूनिट अधिक बिजली की खपत होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increased-consumption-of-10-lakh-units-of-electricity-per-day-in-summer/article-8568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/summer-bijli-khapat-kota-.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । अप्रैल का महीना शुरू होने के साथ ही गर्मी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। उस गर्मी से राहत पाने के लिए लोग एसी, कूलर व पंखों का अधिक से अधिक उपयोग करने लगे हैं। जिससे बिजली की खपत भी बढ़ी है। कोटा शहर में मार्च की तुलना में अप्रैल से रोजाना करीब 10 लाख  यूनिट अधिक बिजली की खपत होगी।</p>
<p><br />मार्च के दूसरे सप्ताह तक जहां मौसम अधिक गर्म नहीं था। वहीं दूसरे सप्ताह के बाद मौसम गर्म होने लगा था। जबकि अप्रैल से तो मौसम ने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया। हालत यह है कि तापमान 40 डिग्री से कम नहीं हुआ और अधिकतम 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पहली बार अप्रैल में तापमान गुरुवार को 38 डिग्री रहा और मौसम ने करवट ली तो ठंडक हुई है। इससे पहले तापमान अधिक होने से गर्मी  से लोग परेशान हो रहे थे। <br />गर्मी से बचने के जतन में सबसे अधिक उपयोग पंखे, कूलर व एसी का होता है। जिनके पास पंखे हैं, वे उससे काम चला रहे हैं। बाकी लोग कूलर से और आर्थिक रूप से सक्षम लोग एसी का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि अधिकतर एसी व कूलर दिन के समय गर्मी अधिक होने पर ही चलाए जा रहे है। जबकि कई घरों में रात के समय भी एसी कूलर का उपयोग हो रहा है। सिर्फ घरों में ही नहीं सरकारी व निजी कार्यालयों संस्थानों, कोचिंग व हॉस्टल में भी कूलर एसी का अधिक उपयोग हो रहा है। ऐसे में गर्मी के तीन से चार महीने में बिजली की खपत बढ़ना स्वाभाविक है। <br /><br /><strong>इस माह से 42 लाख यूनिट रोजाना खपत</strong><br />कोटा शहर में करीब 2.50 लाख उपभोक्ता हैं, जो रोजाना बिजली का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में कोटा में मार्च तक जहां करीब 32 लाख यूनिट बिजली की खपत रोजाना हो रही थी, वह अप्रैल से बढ़कर 42 लाख यूनिट रोजाना हो गई है। इस तरह से रोजाना करीब 10 लाख यूनिट बिजली की खपत अधिक होने लगी है। बिजली की यह खपत अगले तीन से चार महीने तक रहने वाली है। बिजली कम्पनी के अनुसार मार्च तक जहां 32 लाख यूनिट बिजली की रोजाना खपत हो रही थी, वहीं अप्रैल से 42 लाख यूनिट हो जाएगी। इस तरह से हर महीने करीब 12 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होगी। <br /><br /><strong>4500 ट्रांसफार्मर पर लोड</strong><br />कोटा में वर्तमान में लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने का काम कर रही है निजी बिजली कम्पनी केईडीएल। गर्मी में बिजली की अधिक खपत होने को देखते हुए हालांकि कम्पनी से अपनी पूरी तैयारी की है। कोटा में कम्पनी द्वारा 4500  ट्रांसफार्मर के जरिये बिजली को लोगों के घर, हॉस्टल, कार्यालयों व फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है। <br /><br /><strong>70 नए ट्रांसफार्मर का बैकअप</strong><br />निजी बिजली कम्पनी द्वारा गर्मी की शुरुआत से पहले ही अपने बिजली तंत्र में सुधार कर लिया है। उसके बाद भी 70 नए ट्रांसफार्मर का बैकअप रखा है। जबकि पुराने 60 ट्रांसफामर की सार संभाल भी की है। कम्पनी के अनुसार गर्मी में उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। <br /><br /><strong>खर्चा अधिक फिर भी उपयोग</strong><br />बिजली की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के बावजूद भी लोग गर्मी से बचने के लिए बिजली का अधिक उपयोग कर  रहे हैं। हालांकि सरकार ने 50 यूनिट तक की बिजली को फ्री कर दिया है। इतनी यूनिट तक की बिजली के बिल शून्य राशि के दिए जा रहे हैं। जबकि इससे अधिक के बिल से उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार बढ़ा है। लेकिन फिर भी लोग बिजली का उपयोग कर रहे हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मार्च की तुलना में अप्रैल से गर्मी बढ़ने पर बिजली की खपत भी बढ़ेगी। हर महीने करीब 12 करोड़ यूनिट बिजली की खपत अगले तीन से चार महीने तक होगी। दो साल पहले कोरोना काल  में हॉसटल व कोचिंच और फैक्ट्रीे बंद होने से गर्मी में भी बिजली की खपत कम हुई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। गर्मी में उपभोक्ताओं को बिजली की समस्या से परेशानी नहीं होगी इसके लिए 5 टीमें तैयार की हैं, जो 24 घंटे फील्ड में काम कर रहेी हैं। कम्पनी ने शहर में करीब 90 से अधिक फीसदी मेंटेनेंस का काम भी पूरा कर लिया है। <br />-अनोमित्रो डोली, तकनीकी हैड, केईडीएल<br /><br /><strong>फैक्ट फाइल:</strong><br />कोटा में उपभोक्ता-2.50 लाख<br />-कोटा मेेंं मार्च तक बिजली की खपत-32 लाख यूनिट रोजाना<br />-अप्रैल से बिजली की खपत -42 लाख यूनिट रोजाना<br />-रोजाना बढ़ी बिजली की खपत-10 लाख यूनिट <br />-कोटा में बिजली कम्पनी के ट्रांसफार्मर-4500<br />-नए ट्रांसफार्मर क्रय किए-70 <br />-बिजली व्यवस्था के लिए बनाई टीम-5</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 15:47:34 +0530</pubDate>
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                <title>डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dabar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आयुर्वेद कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने प्रीमियम आयुर्वेदिक प्रोडक्ट- डाबर च्यवनप्राश पर एक वैज्ञानिक अध्ययन किया है। इस अध्ययन के द्वारा यह जानने की कोशिश की गई कि पार्टीकुलेट मैटर के कारण होने वाली श्वास संबंधी  की बीमारियों पर डाबर च्यवनप्राश किस तरह से असरदार है। अध्ययन से पता चला है कि डाबर च्यवनप्राश वायु प्रदूषकों जैसे पीएम 2.5 के कारण होने वाली फेफड़ों संबंधी बीमारियों से सुरक्षित रखने में काफ़ी कारगर है।<br /><br />अध्ययन के परिणामों से पता चला हे कि डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन करने से इन्फेक्शन और पार्टीकुलेट मैटर के कारण फेफड़ों की बीमारियों की संभावना कम हो सकती  है। च्यवनप्राश सेहत के लिए, खासतौर पर रेस्पीरेटरी सिस्टम के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यह शरीर की इम्यूनिटी  बढ़ाकर क्रोनिक रेस्पीरेटरी रोगों जैसे क्षय (ट्युबरकुलोसिस)  म॓ समर्थन देता है।च्यवनप्राश में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं और प्राचीनकाल से ही इम्यूनिटी बढ़ाने एवं लम्बी उम्र के लिए इनका उपयोग किया जाता रहा है।</p>
<p><br />इन परिणामों के बारे में बात करते हुए राजीव जॉन, वाईस प्रेज़ीडेन्ट- मार्केटिंग, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा, ‘‘बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और इसकी वजह से लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आज इम्युनिटी बढ़ाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुका है। 40  से अधिक जड़ी-बूटियों जैसे आंवला, अश्वगंधा और गिलोय के गुणों से भरपूर डाबर च्यवनप्राश हमेशा से एलर्जी और इन्फेक्शन से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाता रहा है। सीपीसीएसईए के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किए गए इस अध्ययन के बाद हमें विश्वास है कि डाबर च्यवनप्राश खासतौर पर शहरी भारत के लोगों को वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रखने में मददगार है।’ <br /><br />वायू प्रदूषण में पार्टीकुलेट मैटर मुख्य रूप से पाया जाता है, इसमें प्राकृतिक एवं मानवजनित स्रोतों से उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थ होते हैं। पार्टीकुलेट मैटर के कणों का आकार 2.5 स॓10 मिलीमीटर या इससे भी कम हो सकता है । ऐसे में ये लम्बे समय तक हवा में बने रहते हैं और सांस के साथ शरीर के भीतर जाकर फेफड़ों में जमा होने लगते हैं। ये मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।<br /><br /></p>
<p>डॉ जेएलएन शास्त्री, ग्लोबल आर एण्ड डी हैड, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा कि इससे पहले भी डाबर ने कई क्लीनिकल और प्रीक्लीनिकल अध्ययन किए हैं जो बताते हैं कि च्यवनप्राश इम्यूनिटी , मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों, एलर्जी एवं इन्फेक्शन आदि के लिए काफ़ी फायदेमंद है। च्यवनप्राश त्रिदोष- वात, पित्त और कफ को संतुलित बनाने में मदद करता है, जिनका विवरण प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में दिया गया है। यह डेनड्रिटिकसैल्स, एन के सैल्स और मैक्रोफेजेज़ को एक्टिवेट कर जर्म्स से लड़ने में मदद करता है। डाबर हमेशा से आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के संयोजन के साथ हेल्थ सोल्युशन्स लाता रहा है। इस अध्ययन के परिणाम इम्यूनिटी  के लिए च्यवनप्राश के फायदों को  दर्शते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 16:45:54 +0530</pubDate>
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