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                <title>harmful - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अलर्ट: धड़ल्ले से बिक रही गंदे पानी से बनी बर्फ</title>
                                    <description><![CDATA[बर्फ की शुद्धता की जांच नहीं होती। इसलिए यह पता नहीं चल पाता कि बर्फ में किस प्रकार का बैक्टीरिया है और यह कितने गंदे पानी से बनाई जाती है। बर्फ का गोला बेचने वाले कई बार दूषित पानी का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे उल्टी, दस्त, इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alert--ice-made-from-dirty-water-being-sold-indiscriminately/article-45887"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/alert-dhadalle-se-bik-rhi-gande-pani-ki-barf...kota-news-18-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी शुरू होते ही शीतलपेय पर्दार्थो की मांग में 60 से 70 फीसदी इजाफा हो गया है। वहीं  बाजार में ठंडे के नाम पर अमानक बर्फ की कुल्फी, आइसक्रीम, और जूस बिक्री धडल्ले से हो रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से नमूने तो लिए जा रहे है लेकिन 19 लाख की आबादी वाले कोटा में मामूली नमूने सेहत बंद रखने में  नाकाफी साबित हो रहे है। मार्च से कोटा में बर्फ, आइसक्रीम, जूस और डिब्बा बंद पेय पदार्थो की मांग बढ़ी हुई है। लेकिन इनकी गुणवत्ता की जांच के लिए पर्याप्त नमूने नहीं लिए जाने से बाजार धड़ल्ले अमानक खाद्य पदार्थो की बिक्री हो रही है। बर्फ गोला और आइसक्रीम खाने से बच्चों के गले खराब हो रहे  है। अस्पताल में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गला खराब होने की शिकायत लेकर प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे अस्पताल में आ रहे है। इन दिनों बाजार में धड़ल्ले से मिलावटीखोरी चल रही है। मिलावटी सामग्री में अब आइसक्रिम भी शामिल हो गई है। गर्मी का फायदा उठाकर बाजार में मिलावटी आइसक्रीम बेची जा रही है। जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक और जानलेवा तक साबित हो सकती है।  रविवार को नागौर में तीन बच्चों द्वारा अमानक स्तर की आइसक्रीम  खाने से सोमवार को अजमेर में तीनों बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो गई। ऐसे कोटा में बिक रही दो रुपए पांच रुपए वाली चुस्की और आइसक्रीम बच्चों की सेहत ना बिगाड़ दे। बर्फ फैक्ट्रियों के पानी की जांच भी मार्च के बाद नहीं हुई है। पिछले साल भी 70 से अधिक बच्चे दूषित पानी पीने से बीमार हो गए थे और एक बच्चे की मौत हो गई थी।</p>
<p><strong>रंगीन शरबत लीवर के लिए घातक</strong><br />डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि बर्फ के गोले में मिलाया जाने वाला रंगीन शरबत लीवर के लिए घातक होता है।  सिर्फ ब्रांडेड आइसक्रीम ही खाएं। खुले में बिकने वाले शीतलपेय बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। बहुत अधिक बर्फ के उपयोग से गले में इंफेक्शन हो जाता है। आइसक्रीम में मिलावट हो तो पेट में दर्द होने लगता है। इसलिए अपने बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर ही रखना चाहिए।</p>
<p><strong>सेहत पर पड़ रही भारी</strong><br />बर्फ की शुद्धता की जांच नहीं होती। इसलिए यह पता नहीं चल पाता कि बर्फ में किस प्रकार का बैक्टीरिया है और यह कितने गंदे पानी से बनाई जाती है। कोई मानक तय नहीं होने के कारण बर्फ किसी भी पानी से बना दी जाती है। रख-रखाव में भी कोई साफ-सफाई नहीं बरती जाती। जिससे गर्मी में पेट दर्द, पीलिया, उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जूस, गन्ने के जूस में बर्फ मिलाई जाती है लेकिन मानक स्तरीय बर्फ नहीं होने से ये लोगों की सेहत खराब कर रही है। </p>
<p><strong>रंग बिरंगे बर्फ के गोले बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक</strong><br />जेकेलोन उपअधीक्षक व शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. गोपीकिशन शर्मा ने बताया कि  गर्मी आते ही बाजार में कई तरह के आइसक्रीम बिक रही है। ये बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी खाना खूब पसंद आती है। गर्मियों में  बच्चों को रंगीन बर्फ का गोला बहुत पसंद आता है लेकिन ये रंग-बिरंगे आकर्षक दिखने वाले गोले बच्चों को बीमार कर सकते हैं।  रंग-बिरंगे बर्फ के गोले में कई तरह के केमिकल युक्त रंग डाले जाते है। इस रंग को तैयार करके महीनों इस्तेमाल किया जाता है।  ऐसे में इससे पेट और लीवर को नुकसान पहुंच सकता है।  आंतों में संक्रमण हो सकता है। बर्फ का गोला बेचने वाले कई बार दूषित पानी का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे उल्टी, दस्त, इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों अस्पताल में उल्टी, दस्त पेट में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गर्मियों के मौसम में वैसे भी संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।  ऐसे में ये कलरफुल गोला खाने से हानिकारक केमिकल एलर्जी का मुख्य कारण बन जाता है।  बर्फ का गोला खाने से सर्दी जुखाम हो सकता है।  बाहर तेज धूप में बर्फ खाने से बच्चों को सर्दी जुखाम होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे कंजेशन हो जाता है जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बर्फ गोला,पेप्सी, चुस्की बच्चों के गले में इंफेक्शन का मुख्य कारण बन रहे है। इससे बच्चों के गले में दर्द और सूजन की समस्याा होती है। कई बार बर्फ का गोला निमोनिया और टाइफाइड का भी कारण बन सकता है। बर्फ के गोले में केमिकल के साथ-साथ चीनी की भी बहुत ज्यादा मात्रा होती है। ऐसे में इसे खाने से दांतों में कैविटी का भी खतरा हो जाता है। </p>
<p><strong>तीन माह में विभाग ने इनके लिए नमूने </strong><br />चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की खाद्य सुरक्षा टीम की ओर से मार्च माह में 109 सैंपल लिए है। जिसमें मिल्क के 16, मिल्क से बनने वाले खाद्य पदार्थो के 22 सैंपल, घी आॅयल के 15 सैंपल, बैकरी आइटम, केक, पेस्टी 2 नमूने और अन्य खाद्य पदार्थो के22 नमूने लिए। वहीं बर्फ के 6 नमूने, आइसक्रीम 8, पानी के 8, जूस के 5 नमूने लिए। वहीं अप्रैल माह में 69 नमूने लिए गए जिसमें मिल्क 1, मिल्क से बने पदार्थो के लिए 6, घी तेल के 7 नमूने, आइसक्रीम 6 नमूने, जूस के 14 नमूने, बेकरी के 7 , अन्य 20 नमूने लिए।  मिठाई और खाद्य पदार्थ8 नमूने लिए। मई माह में कुल 33 नमूने अभी तक लिए जा चुके है जिसमें दूध का एक, घी तेल के सात, जूस 2,बेकरी 6 नमूने, साल्ट के तीन, अन्य के 11 नमूने लिए गए है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गर्मी बढ़ने के साथ ही खाद्य सुरक्षा की टीम की और से अनवरत नमूने लिए जा रहे है। शहर में पानी, बर्फ, आइसक्रीम, जूस के लिए नमूने लेकर लैब में भेज गए है। टीम की और से हॉस्टल के पानी के सैंपल लगतार लेकर जांच रही है। <br /><strong>-संदीप अग्रवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 14:33:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल कितना हानिकारक -एक्सपर्ट्स  </title>
                                    <description><![CDATA[अगर आप महिला हैं और आपको भी स्क्रीन देखने की लत हो चुकी है तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इसका खामियाजा आपके साथ आपके बच्चों को भी उठाना पड़ सकता है,क्योंकि गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल आप को देखकर बच्चे जरूर सीखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/how-harmful-is-the-excessive-use-of-gadgets---experts/article-6372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/gadgets.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आप महिला हैं और आपको भी स्क्रीन देखने की लत हो चुकी है तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इसका खामियाजा आपके साथ आपके बच्चों को भी उठाना पड़ सकता है,क्योंकि गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल आप को देखकर बच्चे जरूर सीखेंगे।<br /><br />आज के डिजिटल दौर में शायद ही कोई हो जो इन गैजेट्स का इस्तेमाल न कर रहा हो। चाहे घंटों नेटफ्लिक्स देखना हो, कंप्यूटर या लैपटॉप पर सारा दिन काम करना हो, वीडियो गेम्ज या फिर मोबाइल पर गेम या सोशल मीडिया देखना ही क्यों न हो। हम सभी अपने दिन का अच्छा ख़ासा वक्त स्क्रीन को देखते हुए गुजारते हैं।</p>
<p><br /><strong>हाल ही में हुई रिसर्च</strong> <br /> 70 प्रतिशत टीनएजर्स महसूस करते हैं कि उन्हें मोबाइल की लत लग चुकी है, और 40 प्रतिशत पैरेंट्स ये मानते हैं कि वे भी अपने स्मार्टफोन्स से दूर नहीं रह पाते। हम में से ज्यादातर लोग सोने से ज्यादा वक्त स्क्रीन्स को देखने में लगाते हैं। यह समस्या किसी एक देश की नहीं है, यह देखना आसान है कि डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता एक विश्वव्यापी समस्या है।</p>
<p><br /><strong>डिजिटल आई स्ट्रेन</strong><br />कंप्यूटर स्क्रीन के सामने काम करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोग डिजिटल आई स्ट्रेन नामक स्थिति का अनुभव करते हैं। डिजिटल आई स्ट्रेन के सामान्य लक्षणों में आंखों की थकान, आंखों में ड्राईनेस, आंखों में जलन या खुजली, आंखों का लाल होना और सिरदर्द होना शामिल हैं। इन लक्षणों को उच्च-ऊर्जा दृश्य प्रकाश या डिजिटल उपकरणों द्वारा उत्सर्जित नीली रोशनी के अत्यधिक संपर्क के कारण माना जाता है।</p>
<p><br /><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट</strong><br /> आंखों पर जोर पड़ना एक सामान्य स्थिति है, जो विशेष रूप से लंबे समय तक कंप्यूटर, फोन और टैबलेट सहित डिजिटल उपयोग की वजह से होती है। आंखों पर जोर कम पड़े इसके लिए आप  हर 20 मिनट बाद 20 सेकेंड का ब्रेक लें और डिजिटल स्क्रीन को 20 फीट दूर रखें। साथ ही आईड्रॉप्स का उपयोग भी कर सकते हैं। लाइटिंग का ध्यान भी रखें ताकि आंखों पर स्ट्रेन कम पड़े। इसके अलावा हर आधे घंटे पर 5 मिनट का ब्रेक लेने से थकावट और स्ट्रेन दोनों से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Mar 2022 13:14:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हानिकारक पतंग धागे पर प्रतिबध हेतु निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[चाईनीज मांझे के क्रय-विक्रय, भंडारण व उपयोग पर धारा 144 द.प्र.सं. के अन्तर्गत निषेधात्मक आदेश जारी कराने के निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61b1e09be5a3d/article-3038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/chainij-manjha.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अतिरिक्त महानिदेशक अपराध डॉ. रवि प्रकाश ने उपायुक्त जयपुर व जोधपुर एवं समस्त जिला पुलिस अधीक्षकों को पतंग उडाने के प्लास्टिक, सिन्थेटेटिक, चाईनीज व हानिकारक पदार्थ जैसे लोहा, ग्लास इत्यादि के धागे के निर्माण, विपणन एवं उपयोग को प्रतिबन्धित करने की निषेधाज्ञा जारी एवं पालना करवाने के निर्देश दिये है। <br /> <br /> उल्लेखनीय है कि पतंग उडाने में कांच व धातु मिश्रित चाईनीज मांझे व सिथेटिक धागे का उपयोग भी किया जाता है। इस धातु मिश्रित मांझे से पंतग उडाने से ना केवल बडी संख्या में पक्षी घायल होते है, बल्कि सडक पर पैदल चलने वाले और दुपहिया वाहन पर चलने वाले राहगीरों का जीवन भी संकट में आ सकता है। शीत ऋतु में लोग भारी संख्या में पतंग उडाते है। इन दिनों में यह खतरा और अधिक बढ जाता है। <br /> <br /> अतिरिक्त महानिदेशक अपराध ने बताया कि सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट से समन्वय कर धातु मिश्रित चाईनीज मांझे के क्रय-विक्रय, भंडारण व उपयोग पर धारा 144 द.प्र.सं. के अन्तर्गत निषेधात्मक आदेश जारी कराने के निर्देश दिये गये है। निषेधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध प्रभावी कानूनी कार्यवाही करने तथा ऐसी घातक सामग्री को जप्त करने के भी निर्देश दिये गये है। उल्लंघनकर्ता के विरूद्ध भारतीय दण्ड सहिता की उचित धाराओं में भी कार्यवाही की जाएगी। धातु मिश्रित चाईनीज  मांझे के उपयोग को रोकने के लिए जन जागृति हेतु थाने की सीएलजी, पुलिस मित्र, ग्रामरक्षक, सुरक्षासखी और क्षेत्र के अन्य, सामुदायिक समुहों का सक्रिय सहयोग लेने के भी निर्देश दिये गये है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Dec 2021 17:27:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dabar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आयुर्वेद कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने प्रीमियम आयुर्वेदिक प्रोडक्ट- डाबर च्यवनप्राश पर एक वैज्ञानिक अध्ययन किया है। इस अध्ययन के द्वारा यह जानने की कोशिश की गई कि पार्टीकुलेट मैटर के कारण होने वाली श्वास संबंधी  की बीमारियों पर डाबर च्यवनप्राश किस तरह से असरदार है। अध्ययन से पता चला है कि डाबर च्यवनप्राश वायु प्रदूषकों जैसे पीएम 2.5 के कारण होने वाली फेफड़ों संबंधी बीमारियों से सुरक्षित रखने में काफ़ी कारगर है।<br /><br />अध्ययन के परिणामों से पता चला हे कि डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन करने से इन्फेक्शन और पार्टीकुलेट मैटर के कारण फेफड़ों की बीमारियों की संभावना कम हो सकती  है। च्यवनप्राश सेहत के लिए, खासतौर पर रेस्पीरेटरी सिस्टम के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यह शरीर की इम्यूनिटी  बढ़ाकर क्रोनिक रेस्पीरेटरी रोगों जैसे क्षय (ट्युबरकुलोसिस)  म॓ समर्थन देता है।च्यवनप्राश में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं और प्राचीनकाल से ही इम्यूनिटी बढ़ाने एवं लम्बी उम्र के लिए इनका उपयोग किया जाता रहा है।</p>
<p><br />इन परिणामों के बारे में बात करते हुए राजीव जॉन, वाईस प्रेज़ीडेन्ट- मार्केटिंग, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा, ‘‘बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और इसकी वजह से लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आज इम्युनिटी बढ़ाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुका है। 40  से अधिक जड़ी-बूटियों जैसे आंवला, अश्वगंधा और गिलोय के गुणों से भरपूर डाबर च्यवनप्राश हमेशा से एलर्जी और इन्फेक्शन से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाता रहा है। सीपीसीएसईए के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किए गए इस अध्ययन के बाद हमें विश्वास है कि डाबर च्यवनप्राश खासतौर पर शहरी भारत के लोगों को वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रखने में मददगार है।’ <br /><br />वायू प्रदूषण में पार्टीकुलेट मैटर मुख्य रूप से पाया जाता है, इसमें प्राकृतिक एवं मानवजनित स्रोतों से उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थ होते हैं। पार्टीकुलेट मैटर के कणों का आकार 2.5 स॓10 मिलीमीटर या इससे भी कम हो सकता है । ऐसे में ये लम्बे समय तक हवा में बने रहते हैं और सांस के साथ शरीर के भीतर जाकर फेफड़ों में जमा होने लगते हैं। ये मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।<br /><br /></p>
<p>डॉ जेएलएन शास्त्री, ग्लोबल आर एण्ड डी हैड, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा कि इससे पहले भी डाबर ने कई क्लीनिकल और प्रीक्लीनिकल अध्ययन किए हैं जो बताते हैं कि च्यवनप्राश इम्यूनिटी , मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों, एलर्जी एवं इन्फेक्शन आदि के लिए काफ़ी फायदेमंद है। च्यवनप्राश त्रिदोष- वात, पित्त और कफ को संतुलित बनाने में मदद करता है, जिनका विवरण प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में दिया गया है। यह डेनड्रिटिकसैल्स, एन के सैल्स और मैक्रोफेजेज़ को एक्टिवेट कर जर्म्स से लड़ने में मदद करता है। डाबर हमेशा से आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के संयोजन के साथ हेल्थ सोल्युशन्स लाता रहा है। इस अध्ययन के परिणाम इम्यूनिटी  के लिए च्यवनप्राश के फायदों को  दर्शते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 16:45:54 +0530</pubDate>
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