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                <title>हाड़ौती में 52 सरकारी कॉलेज, 51 में पीटीआई ही नहीं, स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 सितंबर से 15 दिसंबर तक 43 खेलों का आयोजन, प्रशिक्षक और मैदान के अभाव में प्रतिभाएं परेशान।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sports-calendar-released-for-hadauti-region--yet-51-out-of-52-government-colleges-lack-physical-training-instructors--ptis/article-164908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज आयुक्तालय ने विद्यार्थियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए 43 खेलों का कैलेंडर जारी कर दिया है, लेकिन हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में खेल प्रतिभाओं की पहली सीढ़ी ही गायब है। संभाग के 52 सरकारी कॉलेजों में से 51 में नियमित शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) नहीं हैं। अधिकतर कॉलेजों के पास अपना खेल मैदान तक नहीं है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कैलेंडर में शामिल रग्बी, ताइक्वांडो, मलखंब, स्क्वैश, जिम्नास्टिक, तीरंदाजी जैसे खेलों में विद्यार्थी बिना प्रशिक्षक और पर्याप्त संसाधनों के कैसे तैयारी करें, यह बड़ा सवाल है। स्थिति यह है कि कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं का समय आते ही कुछ महीनों के लिए संविदा पर पीटीआई लगाए जाते हैं। प्रतियोगिताएं खत्म होते ही इन्हें हटा दिया जाता है। सालभर नियमित प्रशिक्षण नहीं मिलने से खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की दौड़ में पिछड़ जाते हैं।</p>
<p><strong>कैलेंडर में प्रोफेशनल गेम्स, कॉलेजों में प्रशिक्षक तक नहीं</strong><br />खेल कैलेंडर में हैंडबॉल, शतरंज, मलखंब, कबड्डी, तीरंदाजी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, रग्बी, ताइक्वांडो, गतका, कराटे, योग, बेसबॉल, मुक्केबाजी, हॉकी, सॉफ्टबॉल, स्क्वैश और जिम्नास्टिक सहित 43 खेल शामिल किए गए हैं। इनमें कई खेल ऐसे हैं, जिनमें केवल मैदान में उतरना पर्याप्त नहीं होता। तकनीक, फिटनेस, नियमित अभ्यास और प्रशिक्षित कोच का मार्गदर्शन जरूरी है। लेकिन, सरकारी कॉलेजों में खेलों की जिम्मेदारी संभालने के लिए न तो नियमित पीटीआई है और न ही मानकों के अनुरूप मैदान।</p>
<p><strong>तीन महीने चलेगा खेलों का महासंग्राम</strong><br />अंतर-महाविद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन 15 सितंबर से 15 दिसंबर तक किया जाएगा। करीब तीन महीने चलने वाली इन प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 240 महाविद्यालयों एवं संस्थानों के नियमित विद्यार्थी हिस्सा ले सकेंगे। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आगे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, आॅल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और इंटर-जोन प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे।</p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले-सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही प्रतिभाएं</strong><br />हमारे कॉलेज में खेल मैदान है लेकिन पीटीआई ही नहीं। 43 तरह के गेम्स हैं, बिना कोच के बारीकियां कैसे सीखेंगे। खेल उपकरण स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं और नियमित छात्रों को प्रैक्टिस के लिए सामान मांगने पर नेशनल या राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट की शर्त रखी जा रही है।<br /><strong>-चित्रांशा कंवर, छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क के साथ स्पोर्ट्स मद में फीस भी ली जाती है, इसके बावजूद खेल सुविधाएं नहीं मिलती। जब गेम्स आते हैं तो कॉलेज प्रशासन संविदा पर तीन से चार माह के लिए पीटीआई लगाते हैं और प्रतियोगिता की समाप्ती के बाद उन्हें हटा देते हैं।<br /><strong>-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>मैं आर्चरी खेलता हूं। कॉलेज में इस गेम्स के इक्यूपमेंट अच्छी स्थिति में नहीं है। प्रतियोगिताओं में कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हैं और मेडल जीतने की कोशिश करते हैं, लेकिन मार्गदर्शन और सुविधाएं नहीं मिलने हमारी तैयारी धरी रह जाती है।<br /><strong>-केशव मीणा, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>कॉलेज परिसर में आयुक्तालय के दिशा-निर्देशानुसार स्पोर्ट्स ग्राउंड विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>-प्रो. शालिनी भारती, प्राचार्य गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>हमारे पास ग्राउंड है, लेकिन निकाय चुनाव के चलते कॉलेज अधिग्रहण कर लिया गया। चुनाव ड्यूटी में लगे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का आना-जाना रहता है, जिससे छात्राओं की स्पोर्ट्स प्रेक्टिस प्रभावित होती है। मजबूरन, उन्हें स्टेडियम जाना पड़ता है।<br /><strong>-प्रो. अजय विक्रम सिंह, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>महाविद्यालय में जो सुविधाएं उपलब्ध हैंउसका उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा शहर में सार्वजनिक मैदान हैं, वहां भी प्रेकिटस कर सकते हैं। महाविद्यालय प्रशासन विकास समिति से खेल प्रशिक्षक लगाकर खिलाडि़यों को प्रेक्टिस करवाई जाती है ।<br /><strong>-प्रो. नवीन मित्तल,क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 15:04:40 +0530</pubDate>
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