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                <title>Indian Economy 2047 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत, वैश्विक व्यापार में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए मौके बढ़ाने हेतु ब्रिक्स सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा : पीयूष गोयल</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स डब्ल्यूबीए सम्मेलन में महिला उद्यमियों के लिए वैश्विक बाजार, आसान ऋण और स्पष्ट व्यापार नियमों की वकालत की। उन्होंने भारत की 'लखपति दीदी' और जीईएम जैसी सफल पहलों का उदाहरण देते हुए 2047 तक भारत को 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महिलाओं के नेतृत्व को निर्णायक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-to-work-with-brics-partners-to-expand-opportunities-for/article-165232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/piyuesh-goyal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को ब्रिक्स देशों से सबके लिए ऋण और बाजारों की आसानी और व्यापार के स्पष्ट नियमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महिला उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए अवसर बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिक्स डब्ल्यूबीए महिला-नेतृत्व विकास सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कदम रखने वाले उद्यमी को तीन मुख्य बाधाओं को पार करना होता है, ऋण तक पहुंच, खरीदारों और बाजारों तक पहुंच और ऐसे स्पष्ट नियमों तक पहुंच, जो मुक्त व्यापार और खुले अवसरों को बढ़ावा दें।</p>
<p>गोयल ने कहा कि भारत, उद्यमियों, खासकर महिला उद्यमियों के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के अपने अनुभव से मिली सीख को ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन और व्यापक ब्रिक्स व्यापार गतिविधियों में शामिल करना चाहेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ शिक्षा, कौशल और जीवन की बेहतर गुणवत्ता के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि उन्हें देश की प्रगति का मुख्य चालक बनाया जा सके।</p>
<p>महिलाओं के बीच वित्तीय समावेश को बढ़ाने में भारत के अनुभव पर प्रकाश डालते हुए गोयल ने कहा कि लगभग 12 साल पहले, अधिकांश महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण भारत में महिलाओं के पास बैंक खाते, अपने नाम पर संपत्ति या कर्ज लेने का कोई अधिकृत रिकॉर्ड नहीं थी और वे अक्सर ऋण के लिए पात्र नहीं होती थीं। उन्होंने कहा कि तब से भारत ने महिलाओं के नाम पर घर उपलब्ध कराए हैं, उनके लिए लगभग 30 करोड़ बैंक खाते खोले हैं और अपना काम शुरू करने की इच्छुक महिलाओं को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराए हैं, जिनमें वित्तीय रिकार्ड न रखने वाली महिलाएं भी शामिल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज लगभग 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं 90 लाख स्वयं-सहायता समूहों, छोटी सहकारी समितियों या महिलाओं के ऐसे समूहों की सदस्य हैं, जो अलग-अलग विचारों और कारोबार पर मिलकर काम कर रही हैं। अपनी निजी कमाई से एक लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाली महिलाओं की संख्या तीन करोड़ से ज्यादा हो गई है।उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को लखपति दीदी कहा जाता है और भारत को उम्मीद है कि इनकी संख्या और कमाई, दोनों में बढ़ोतरी होती रहेगी।</p>
<p>गोयल ने कहा कि भारत ने लघु उद्यमियों को लगभग 56 करोड़ ऋण प्रदान किए हैं, जिनमें से 68 प्रतिशत से ज्यादा ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं। उन्होंने कहा कि मकसद यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर न रहें। उन्होंने आगे कहा कि जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो वे भारत के विकास इंजन की चालक बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि लगभग एक दशक पहले तक भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी करीब 19 प्रतिशत थी। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे-जैसे आय का स्तर बढ़ेगा, शिक्षा बेहतर होगी, कौशल विकसित होंगे और प्रतिभाएं सामने आएगी, यह संख्या बढ़कर 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि विकसित समाजों में औपचारिक कार्यबल में महिलाओं का अनुपात 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे ज्यादा महिलाएं औपचारिक कार्यबल में शामिल होंगी, भारत आर्थिक विकास में बड़ी बढ़त हासिल कर सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसी व्यक्ति को काम-धंधा शुरू करने या परिवार की कमाई का हिस्सा बनने के लिए जरूरी साधन और समान अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि यही महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का मूल है, जो सिर्फ महिलाओं के विकास से अलग है। गोयल ने कहा कि महिला को शिक्षित या कुशल बनाने से पूरे परिवार को मदद मिलती है, क्योंकि वह परिवार को आगे बढ़ाती है और बच्चों को बेहतर भविष्य देने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर केंद्रित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों में महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माता के तौर पर देखा जाना चाहिए।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बढ़ाने पर, गोयल ने पिछले महीने जयपुर में हुई ब्रिक्स वाणिज्य और उद्योग मंत्रियों की बैठक का जिक्र किया, जहाँ मंत्री छोटे निर्यातकों के मूल्यांकन के लिए स्वैच्छिक सिद्धांतों पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन सिर्फ बिल और भुगतान पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि उद्यमी की क्षमता और अतीत से वर्तमान और भविष्य में आए बदलाव पर भी आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी व्यापार को सिर्फ गिरवी-आधारित व्यापार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समाजों और व्यवसायों को जोडऩे और हाशिए पर रहने वाले उन वर्गों को अवसर प्रदान करने के एक मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए, जो शायद कभी विदेश जाने की सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने जयपुर सहमति में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक साझा ब्रिक्स प्लेटफार्म तलाशने पर भी सहमति व्यक्त की थी, जो उद्यमियों के सामने आने वाली दूसरी चुनौती, यानी बाजारों और खरीदारों तक पहुँच, को हल करने में मदद कर सकता है।</p>
<p>गोयल ने कहा कि एक बार ऐसा मंच बन जाने के बाद, किसी एक ब्रिक्स सदस्य देश में उत्पाद की जरूरत के बारे में दूसरे सदस्यों को पता चल सकेगा, साथ ही इसमें शामिल लोगों के बीच जारी किए गए बिल को भी इस मंच पर सार्वजनिक और सभी की जानकारी में लाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, महिला उद्यमियों और छोटे उद्यमियों की मदद के लिए कई वित्तीय मध्यस्थ इस मंच से जुड़ सकेंगे। वैश्विक मूल्य श्रृंखला पर सदस्य देशों की आपसी समझ के लिए ब्रिक्स कार्य योजना का जिक्र करते हुए गोयल ने सरकारों से आग्रह किया कि वे महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, सम्मेलनों, सेमिनारों और बिजनेस फोरम में ज्यादा सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि इससे कई मंचों पर जुड़ाव संभव हो सकेगा। उन्होंने ब्रिक्स देशों से क्षेत्रों के आधार पर महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स देश क्षेत्र-विशिष्ट महिला-नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल आयोजित कर सकते हैं, जैसे कि पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व वाला वस्त्र प्रतिनिधिमंडल, जो एक ब्रिक्स सदस्य देश से दूसरे देश की यात्रा करे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिनिधिमंडलों को ज्यादा समर्थन मिल सकता है और वे मूल्य श्रृंखला को जोडऩे में मदद कर सकते हैं, साथ ही महिला उद्यमियों के लिए ब्रिक्स से परे बाजारों से जुडऩे के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।</p>
<p>व्यापार करने के लिए अनुमानित नियमों की तीसरी चुनौती पर, गोयल ने कहा कि पर्याप्त अनुमान और निश्चितता, खुली सीमाओं और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने वाले माहौल के बिना व्यापार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी ब्रिक्स सदस्यों ने डब्ल्यूटीओ के व्यापार नियमों के तहत बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा और उसे मजबूत करने का संकल्प लिया है, जिससे कम विकसित और विकासशील देशों को भी नीतिगत गुंजाइश मिलेगी। गोयल ने कहा कि ब्रिक्स सदस्यों को एक ऐसे साझा प्लेटफॉर्म के लिए काम करना चाहिए, जो इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज, ई-इनवॉइस, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग और ई-कस्टम्स डिक्लेरेशन की सुविधा दे। उन्होंने उन स्वैच्छिक सिद्धांतों का भी जिक्र किया, जिन पर हर देश के कानूनों का सम्मान और सुरक्षा करते हुए सीमाओं के पार ऑनलाइन सर्विस देने की सुविधा के लिए सहमति बनी थी।</p>
<p>ब्रिक्स देशों के बीच ज्यादा जुड़ाव का आह्वान करते हुए, गोयल ने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही सदस्य देशों, सहयोगी देशों और दुनिया के लिए ज्यादा समृद्ध भविष्य की ओर बढऩे का रास्ता है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार पर दबाव दिख रहा है और दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता वाले वीयूसीए के माहौल में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है और अभी दो युद्ध भी चल रहे हैं, उन्होंने बाकी दुनिया के साथ जुड़ते हुए ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p>गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने वैश्विक शांति और सामान तथा सेवाएं दोनों के अंतरराष्ट्रीय व्यपार को समर्थन देने के लिए एक साझा समझ के तहत देशों को एक साथ लाने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सदस्यों के बीच सेवा व्यापार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। वैश्विक सेवा व्यापार लगभग 10 लाख करोड़ डालर  होने के बावजूद, उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सेवा व्यापार का अपेक्षाकृत कम स्तर विकास की बड़ी संभावनाओं को दिखाता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं गतिशीलता और अलग-अलग तरह की सेवाओं के साथ-साथ तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के पास सेवा वितरण को बेहतर बनाने और महिला उद्यमियों तथा एमएसएमई को सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में शामिल होने में मदद करने के लिए मिलकर काम करने की बहुत संभावना है।</p>
<p>गोयल ने कहा कि ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों ने नेताओं द्वारा मंजूरी के लिए ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2030 की रणनीति की भी सिफारिश की थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन से ज्यादा ठोस एजेंडा, कार्य योजनाएं और नतीजे सामने आएंगे और 2030 आने वाले सालों और दशकों में लंबी अवधि की साझेदारी की दिशा में पहला कदम साबित होगा। गोयल ने 2030 तक के लिए विचार करने के लिए चार ठोस सुझाव रखे। कर्ज सुविधा तक पहुंच के मामले में, उन्होंने ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन से कहा कि वे अनंत गोयनका और उनके सहयोगियों के नेतृत्व वाली ब्रिक्स व्यापार परिषद के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि इनवॉइस डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाले अध्ययन में महिला निर्यातकों की असल जरूरतों को शामिल किया जाए। </p>
<p>उन्होंने सरकारों, बैंकों और एक्जिम बैंकों से भी ऋण देने का फ़ैसला करते समय ऐसे इनवॉइस पर विचार करने का आग्रह किया और जयपुर सहमति में जोर दिए गए महिला उन्नति कोष के प्रस्ताव को एक ठोस पहल में बदलने की बात कही। उन्होंने  खरीदारों तक पहुँच के बारे में बात करते हुए ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों की महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों से आग्रह किया कि वे ब्रिक्स की प्रदर्शनियों, मेलों और मंचों के साथ-साथ खरीदार-विक्रेता बैठकों में भी ज्यादा हिस्सा लें। उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल प्रगति की रिपोर्ट दी जानी चाहिए, जिसमें यह बताया जाए कि कौन से कारोबार सफल रहे, कौन से नहीं और किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत, ब्रिक्स देशों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देने वाली महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों पर अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।</p>
<p>गोयल ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के जरिए सरकारी खरीद में भारत के अनुभव का भी जिक्र किया। इस प्लेटफॉर्म पर केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों को पारदर्शी तरीके से सामान और सेवाएँ खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और खरीद के अवसर सभी के देखने के लिए उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और स्थानीय स्तर पर सरकार को सामान और सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों पर विशेष ध्यान दिया जाता है और उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है, इन उद्यमों की सरकारी खरीद में बहुत बड़ी हिस्सेदारी है।</p>
<p>महिला उद्यमियों की बढ़ती पहुँच का उदाहरण देते हुए, गोयल ने कहा कि नई दिल्ली से लगभग 2,500 किलोमीटर दूर स्थित महिला उद्यमी अब वाणिज्य मंत्रालय या प्रधानमंत्री कार्यालय को छोटे-छोटे ऑर्डर (कभी-कभी लगभग 100 डॉलर मूल्य के) भी मुहैया कराने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यह महिला उद्यमियों द्वारा तय किए गए लंबे सफर को दर्शाता है। भारत की एक जिला, एक उत्पाद पहल का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि भारत में लगभग 780 जिले हैं और हर जिले में बढ़ावा देने के लिए एक, दो या तीन उत्पादों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि यह पहल अब सेवाओं के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की खास खान-पान की पहचान करने वाली पहल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खान-पान और स्वाद में बदलाव देखने को मिलता है, यहाँ के अलग-अलग उत्पाद, स्वाद, मसाले और उनके मेल में दुनिया भर के बाजारों में कारोबार का बड़ा मौका है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में पहचाने गए उत्पादों, सेवाओं और खान-पान को राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि वैश्विक बाजार विकसित किए जा सके और जिलों को निर्यात का हब बनाया जा सके।</p>
<p>गोयल ने कहा कि ताजे भारतीय फलों और सब्जियों की विश्व भर में बढ़ती मांग, खासकर खाड़ी देशों से, जहाँ लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, छोटे किसानों और महिला उद्यमियों के लिए वैश्विक बाजार के हिसाब से खाद्य उत्पादों की क्वालिटी पैकेजिग, डिजाइनिंग और प्रोसेसिंग के बड़े मौके देती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच ज्यादा जुड़ाव से महिलाओं के समूह और महिलाओं के नेतृत्व वाले बाजार बनाने में मदद मिल सकती है, ताकि उनके उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>गोयल ने नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में हिस्सा लेने वालों से कहा कि वे उन दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों, प्रक्रियाओं और तौर-तरीकों की पहचान करें, जो उन्हें कारोबार करने या अपना काम करने से रोकते हैं या उनमें रुकावट डालते हैं। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव पर आधारित व्यावहारिक जानकारी सरकारों और नीति-निर्माताओं को प्रक्रियाओं तथा तौर-तरीकों को सही आकार देने, कागज़ी कार्रवाई कम करने और नीतियों को बेहतर बनाने में मदद करेगी, जिससे कारोबार करना आसान हो सकेगा। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे न सिर्फ समस्या के बारे में बताएं, बल्कि उस समाधान के बारे में भी बताएं, जो वे देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर समस्या के साथ कोई सुझाव या कार्रवाई का प्रस्ताव भी हो, तो सरकारों के लिए उस पर काम करना आसान हो जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि अपने साझेदारों के साथ भारत के सामान के व्यापार में बढ़ोतरी की बहुत गुंजाइश है और आने वाले सालों में जो महिलाएं निर्यात का काम कर रही हैं, वे अपने कारोबार को कई गुना बढ़ा लेंगी।</p>
<p>उद्यमियों से चुनौतियों को मौकों में बदलने का आह्वान करते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया में उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुस्ती के बावजूद, वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) में भारत के सामान निर्यात में 15 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक चुनौतियों को अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया, बल्कि उनमें मौके तलाशे और मौजूदा मुश्किल हालात के बावजूद इस साल के लिए बड़े लक्ष्य तय किए।</p>
<p>गोयल ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी जिक्र किया और बताया कि अप्रैल से जून की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर अर्थव्यवस्था में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो दुनिया में सबसे ज्यादा विकास दर है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी असली क्षमता को पहचान रहा है और मजबूती और आत्मविश्वास के साथ दुनिया के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के साथ जुडऩे से नहीं डरता और वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अपने दरवाजे और ज्यादा खोलना चाहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ईमानदारी से व्यापार करने और व्यापार में ऊँचे नैतिक मानक अपनाकर, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में बड़े अवसर देखता है।</p>
<p>गोयल ने कहा कि भारत ने आज की चार लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर  की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है, जब देश अपनी आजाद के 100 साल पूरे करेगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को एक रोडमैप का समर्थन मिला है, जिसमें हर हिस्से के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं और उन्होंने इसे 1.4 अरब भारतीयों की सामूहिक प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने कहा कि देश महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों के जरिए इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा, जब महिलाएँ तरक्की करती हैं, तो दुनिया तरक्की करती है। उन्होंने कहा कि महिलाएँ तेजी से अपनी कहानियाँ दुनिया को खुद बता रही हैं और उन्होंने भरोसा जताया कि युवा महिलाएँ दुनिया भर के नागरिकों के लिए ज्यादा खुशहाली और बेहतर भविष्य की ओर बढऩे के सफर को आकार देंगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 18:06:38 +0530</pubDate>
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