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                <title>noc - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अपना कोटा भी बैठा है एनओसी के बारूद पर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में होटल के बाद बिहार के निजी अस्पताल आईसीयू में लगी आग से हुई कई मौत।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota--too--sits-on-a--powder-keg--regarding-noc-compliance/article-156087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित बहुमंजिला होटल में लगी आग में एक दिन पहले ही 21 लोगों की मौत हुई थी। उसके अगले दिन गुरुवार को तड़के बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित निजी अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से भी कई लोगों की मौत हो चुकी है। उसी तरह की स्थिति व हालात कभी भी कोटा में हो सकते हैं। इसका कारण बिल्डि़ंगों में फायर सिस्टम लगाने व फायर एनओसी लेने में बरती जा रही लापरवाही है।दिल्ली के होटल अग्निकांड की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि 24 घंटे क भीतर ही बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित निजी अस्पताल की 5 वीं मंजिल पर आईसीयू में आग लग गई। आग तड़के तीन बजे शॉर्ट सर्किट से लगी। जिससे कई लोगों की मौत हो गई व कई लोग घायल हो गए। गर्मी के मौसम में एक के बाद लगातार हो रही इन घटनाओं का कारण लाखों करोड़ों रुपए की बहुमंजिला आवासीय व व्यवसायिक इमारतें बनाने के बाद भी उनमें आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं करना है।</p>
<p><strong>कोटा के सरकारी अस्पतालों में हो चुकी घटनाएं</strong><br />संभागीय मुख्यालय होने से यहां आधा दर्जन सरकारी अस्पतालों के अलावा बड़ी संख्या में निजी अस्पताल भी है। निजी अस्पतालों की बहुमंजिला इमारते हैं। जिनमें रोजाना हजारों मरीजों व उनके परिजनों का आवागमन रहता है।कोटा में संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल, जे.के. लोन अस्पताल, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, न्यून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रामपुरा स्थित जिला अस्पताल के अलावा एमबीएस व जे.के. लोन में नई ओपीडी व आईपीडी अस्पताल भी है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार एमबीएस अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग व जे.के. लोन की पुरानी बिल्डिंग में कई बार बिजली के पैनल बॉक्स में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। जे.के. लोन में तो आग लगने से एनआईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई तक बंद हो गई थी।हालांकि आग अधिक बड़ी नहीं होने से समय रहते उस पर काबू पा लिया था। जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन यदि आग अधिक बढ़ जाए तो बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक होटल में हुई थी घटना</strong><br />शहर में वैसे बड़ी संख्या में छोटे-बड़े होटल हैं। उनमें से आधों में न तो फायर सिस्टम है और न ही एनओसी है। हालांकि गनीमत है कि यहां अभीतक किसी होटल में आग की बड़ी घटना नहीं हुई है। लेकिन छावनी स्थित एक होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना हो चुकी है। जिसमें वहां रिसेप् शन व हॉल में रखे सोफे व अन्य सामान हीजलकर रह गया था। समय रहते आग पर काबू पाने से बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन आग से हुए नुकसान को सही करने के लिए कई दिन तक होटल को बंद रखना पड़ा था।</p>
<p><strong>कई हॉस्टलों में भी हो चुकी है अग्निदुर्घटना</strong><br />शहर में सैकड़ों की संख्या में बहुमंजिला इमारतें हैं। जिनमें हॉस्टल, होटल, अस्पतालों के अलावा कोचिंग संस्थान, आवासीय व व्यवसायिक इमारतें, मॉल और शॉपिंग कॉम्पलेक्स शामिल है। शहर के सभी कोचिंग क्षेत्रों में हॉस्टल तो बने हुए हैं लेकिन उनमें से भी अधिकतर में न तो फायर सिस्टम लगे हुए हैं और न ही एनओसी ली हुई है। यही कारण है कि शहर के कई हॉस्टलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।</p>
<p>बारां रोड नयानोहरा स्थित कोरल पार्क के एक हॉस्टल में आग लगने की घटना हो चुकी है। इस हॉस्टल में निकास द्वार भी संकरा था। साथ ही मुख्य द्वार के पास बिजली के पैनल में आग लगने से धुंआ अधिक होने पर छात्रों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में छात्रों को छत के सहारे दूसरे हॉस्टल से बाहर निकालना पड़ा था।वहीं कुन्हाड़ी स्थित चंचल विहार के एक हॉस्टल में भी आग लग चुकी है। उस समय हॉस्टल में न तो फायर सिस्टम था और न ही एनओसी थी। उस हॉस्टल में बड़ा जनरेटर भी लगा हुआ था। गनीमत रही थी कि यहां कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन अधिकारियों के निर्देश पर निगम के फायर अनुभाग ने उस हॉस्टल को सीज कर दिया था।इसी तरह से नए कोटा शहर के तलवंडी व राजीव गांधी नगर में भी कई हॉस्टलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी है।वहीं गत दिनों झालावाड़ रोड स्थित सिटी मॉल के एक स्टोर में भी भीषण आग लग गई थी। जिससे मॉल में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। साथ ही करीब एक माह से अधिक समय तक मॉल को बंद रखने से दुकानदारों का भी काफी नुकसान हुआ है।</p>
<p><strong>घटना के बाद नोटिसों से इतिश्री</strong><br />शहर में आग लगने की जब भी कोई घटना होती है तो उसके बाद नगर निगम का फायर अनुभाग सक्रिय हो जाता है। मॉल में आग लगी तो मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स की जांच की गई। हॉस्टल में आग लगने पर हॉस्टलों की जांच, होटल में आग तो होटलों की जांच व अस्पातल में आग तो अस्पतालों की जांच। जांच के बाद जहां भी फायर सिस्टम नहीं लगा होता या एनओसी नहीं होती फायर विभाग की ओरसे संबंधित को नोटिस देकर उसे सिस्टम लगाने व एनओसी लेने के लिए नोटिस देकर पाबंद कर दिया जाता है। उसके बाद फोलोअप नहीं होने से सुधार हुआ या नहीं इसका पता नहीं चलता।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा के किसी होटल में आग नहीं लगी है। हालांकि जे.के. लोन व एमबीएस अस्पताल में बिजली के पैनल में आग की घटनाएं हुई थी। अधिकतर अस्पतालों में चाहे सरकारी हैं या प्राइवेट सभी में फायर सिस्टम लगे हुए हैं और एनओसी भी है। हालांकि जे.के. लोन में उपकरण लगे हुए हैं लेकिन सिस्टम नहीं है। सिस्टम लगाने के लिए टेंडर किया हुआ है। फायर अनुभाग की ओर से समय-समय पर सभी जगह की फायर ऑडिट कर कमियां पाए जाने पर नोटिस देकर सुधार भी करवाए जाते हैं। शहर में करीब पंद्रह सौ से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिसों के बाद हॉस्टल व अस्पतालों में सुधार हुआ है। होटलों में भी सिस्टम लगाने व जांच के लिए टीमें गठित कर अभियान चलाया जाएगा। साथ ही होटल एसोसिएशन के साथ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।<br /><strong>राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:24:05 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ने दी अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस, शंख एयर को उड़ान भरने की मंज़ूरी, जानें कब से शुरू होगी उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 'अल हिंद एयर' और 'फ्लाईएक्सप्रेस' को परिचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया है। मंत्री के. राममोहन नायडू ने इसकी पुष्टि की। यह कदम घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और मौजूदा डुओपॉली (indigopoly) के बीच यात्रियों को बेहतर विकल्प देने के उद्देश्य से उठाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/india-gives-approval-to-fly-to-al-hind-air-flyexpress/article-137068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/al-hind-air.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत का सिविल एविएशन बाज़ार अब नई प्रतिस्पर्धाओं के लिए पूरी तरह से तैयार है और इसके लिए केंद्र सरकार ने नई फ्लाइट्स को मंजूरी दी है। बता दें कि भारत सरकार ने जिन दो एयरलाइंस को मंजूरी दी है उनमें एक अल हिंद एयर और दूसरी फ्लाईएक्सप्रेस है। इन एयरलाइंस को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी मिल चुके हैं।</p>
<p>नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने मंगलवार को X पर एक पोस्ट में नवीनतम मंज़ूरियों की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि ये मंज़ूरियाँ ऐसे समय में दी गई है, जब सरकार दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते घरेलू विमानन बाज़ारों में से एक में भागीदारी बढ़ाने के अपने इरादे का संकेत दे रही है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में, केवल नौ शेड्यूल्ड घरेलू एयरलाइंस की सुविधा चालू हैं। </p>
<p>बता दें कि अल हिंद एयर को केरल स्थित अलहिंद ग्रुप प्रमोट कर रहा है, जबकि फ्लाईएक्सप्रेस उन महत्वाकांक्षी कैरियर्स की सूची में शामिल हो गई है। इन मंजूरियों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने कहा, उद्योग की स्पष्ट डुओपॉली को लेकर बढ़ती चिंता के बीच नए प्रवेशकों को बढ़ावा देने की ज़रूरत बढ़ गई है। हाल ही में, इंडिगो ने अपनी कई फ्लाइट्स को रद्द किया था जिसके कारण लाखों यात्रियों को परेशान होना पड़ा था। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 16:29:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पार्श्वनाथ अपार्टमेंट में 600 परिवारों की जान से किया जा रहा खिलवाड़, दिखावे के लिए लगा है फायर सिस्टम </title>
                                    <description><![CDATA[फायर सिस्टम दिखावे का, नहीं ले रखी फायर एनओसी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/600-families-lives-are-being-played-with-in-parsvanath-apartment/article-101098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नांता स्थित पार्श्वनाथ अपार्टमेंट में रहने वाले 600 परिवारों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस मल्टीस्टोरी में फायर सिस्टम दिखावे के लिए लगा हुआ है। पिछले कई सालों से यहां फायर एनओसी तक नहीं है। साथ ही आग लगने पर दमकलों के अंदर पहुंचने का पर्याप्त रास्ता तक नहीं है। इस 9 मंजिला आवासीय अपार्टमेंट में करीब 800 फ्लैट बने हुए हैं। जिनमें से वर्तमान में यहां करीब 600 फ्लैट में परिवार रह रहे है। बिल्डर प्रदीप दाधीच व प्रकाश जैन ने  इतनी बड़ी बिल्ड़िंग तो बना दी लेकिन उसमें रहने वालों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया। लाखों रुपए में एक फ्लैट लेने वाले लोग यहां सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आए थे लेकिन हालत यह है कि यहां आग लगने की यदि कोई घटना हो जाती है तो उसे बुझाने के सिस्टम तक काम नहीं कर रहे है। सिस्टम लगे हुए तो है लेकिन उनका उपयोग तक करना लोगों को नहीं आता है। </p>
<p>दो दिन पहले रात के समय बिल्डिंग की छत पर रखे स्क्रेप में अचानक आग लग गई थी। आग इतनी अधिक भीषण थी कि उससे वहां रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि जिस समय यह हादसा हुआ उस समय अधिकतर लोग अपने घरों पर जगे हुए थे। जिससे समय रहते सभी लोग घरों से बाहर निकलकर नीचे कम्पाउंड में आ गए थे। वहीं सूचना पर जब नगर निगम की दमकल मौके पर पहुंची तो उसे बिल्डिंग के अंदर जाने तक का रास्ता नहीं मिला। नगर निगम कोटा उत्तर की सहायक अग्निशमन अधिकारी सीता चौपदार रात को ही मौके पर पहुंची थी। उन्होंने बताया  कि छत पर करीब एक ट्रक से ज्यादा कबाड़ रखा हुआ था। वहां फायर सिस्टम तो लगा हुआ  था लेकिन संभवत: वह कार्यशील अवस्था में नहीं था। जिससे  बिल्ड़िंग में रहने वालों ने ही फायर सिस्टम के पाइप को फोड़कर पानी डाककर आग बुझाई। उन्होंने बताया कि यदि यह हादसा देर रात को या किसी फ्लैट में हो जाता तो बड़ा हादसा हो सकता  था। एएफओ चौपदार ने बताया कि जिस समय दमकल मौके पर पहुंची तो उस समय बिल्डिंग का गेट इतना संकरा था कि वहां से दमकल अंदर नहीं जा सकती थी। गेट के आधे हिस्से में वाहनों को रोकने के लिए बेरियर लगा हुआ था। साथ ही बिल्डिंग के मल्टी स्टोरी होने से वहां हाइड्रोलिक दमकल से ही आग बुझाई जा सकती है। लेकिन पर्याप्त सैटबैक तक नहीं होने से हाइड्रोलिक दमकल को ही अंदर घूमने तक में परेशानी होगी। </p>
<p><strong>नहीं है फायर एनओसी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार  पार्श्वनाथ अपार्टमेंट को फिलहाल एनओसी जारी नहीं की गई है।  यहां एनओसी के लिए अगस्त 2020 में आवेदन किया गया था। लेकिन एनओसी जारी नहीं की गई। नगर निगम कोटा उत्तर/दक्षिण के सीएफओ राकेश  व्यास ने बताया कि वे अवकाश पर है। शुक्रवार को कोटा आएंगे। उसके बाद देखकर ही बता पाएंगे। वैसे बिल्डिंग में फायर सिस्टम लगा हुआ है। शुरुआत में बिल्डर ने फायर एनओसी ली थी। लेकिन उसके बाद सोसायटी वालों ने एनओसी ली या नहीं  इसकी जानकारी नहीं है। </p>
<p><strong>सोसायटी में तीन गेट, दमकल जाने की जगह</strong><br />अपार्टमेंट में 799 फ्लैट बने हुए है।जिनमें से वर्तमान में करीब 600 फ्लैट में लोग रह रहे है। सोसायटी का पंजीयन 2019 में रजिस्ट्रार कार्यालय में कराया गया था। बिल्डिंग की छत पर स्क्रेप में आग लगने का कारण फिलहाल पता नहीं चल सका है। उसके लिए सीसीटीवी कैमरे देखे जाएंगे। साथ ही जिनका कबाड़ है उन्हें दोबारा से छत पर कबाड़ नहीं रखने के लिए पाबंद किया है। साथ ही बिल्डिंग में तीन गेट है। जहां से दमकल आसानी से जा सकती है। हो सकता है रात के समय दमकल जिस गेट की तरफ से आई हो वह बंद हो। लेकिन दमकल को अंदर जाने की पर्याप्त जगह है।  <br /><strong>- राजकुमार सोनी, अध्यक्ष, पार्श्वनाथ अपार्टमेंट वेलफेयर सोसायटी </strong></p>
<p><strong>बिल्डिंग 2019 में ही सोसायटी को हैंडओवर</strong><br />बिल्डिंग  बनाने के समय यहां पूरा फायर सिस्टम लगाया गया था। बिना फायर एनओसी के सरकारी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती है। बिल्डिंग के अधिकतर मकान बिकने के बाद इसे वर्ष 2019 में सोसायटी को हैंड ओवर कर दी थी। उसके बाद सोसायटी वालों ने फायर एनओसी ली या नहीं इसकी जानकारी मुझे नहीं है।  कुछ समय पहले जानकारी जरूर मिली थी कि फायर अनुभाग ने यहां फायर सिस्टम का भौतिक सत्यापन किया था। <br /><strong>- प्रदीप दाधीच, बिल्डर,पार्श्वनाथ अपार्टमेंट नांता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 15:42:07 +0530</pubDate>
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                <title>ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, समय पर मिलेगी एनओसी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में लाइव एवं कैडेवर अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को लेकर मेडिकल टूरिज्म के माध्यम से अंग प्रत्यारोपण और अंगदान को बढ़ावा दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/organ-transplant-process-will-be-online-noc-will-be-received/article-84537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा शिक्षा विभाग में एसीएस शुभ्रा सिंह की अध्यक्षता में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर बनी स्टेट एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई, जिसमें तय हुआ है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट और अंगदान के सिस्टम को मजबूती देने के लिए अस्पतालों में निचले स्तर तक के कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। ट्रांसप्लांट सेंटरों और नॉन ट्रांसप्लांट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर्स को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। शुभ्रा सिंह ने कहा कि अंगदान संवेदनशील विषय है। ऐसे में अंग प्रदाता और उनके परिजनों की काउंसलिंग आवश्यक है। चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर एवं ट्रांस्पलांट टीम सहित प्रत्येक स्तर पर ट्रेनिंग दिए जाने के लिए स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन यानी सोटो काम करेगी। शुभ्रा सिंह ने बताया कि इसमें पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।  </p>
<p>स्टेट ऑथोराइजेशन कमेटी भी अंग प्रदान करने के लिए तय समय में ही एनओसी प्रदान करेगी। जिससे अंग प्राप्तकर्ता को अधिक इंतजार ना करना पड़े। प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने के लिए पोर्टल तैयार होगा। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना सहित अन्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अंगदान को पैकेज के रूप में शामिल किया गया है। ताकि परिजनों पर आर्थिक भार ना आए। </p>
<p><strong>ऑर्गन ट्रांसप्लांट और अंगदान को प्रोटोकॉल बनेगा</strong><br />प्रदेश में लाइव एवं कैडेवर अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को लेकर मेडिकल टूरिज्म के माध्यम से अंग प्रत्यारोपण और अंगदान को बढ़ावा दिया जाएगा। ब्रेन डेड अंग प्रदाता के केस में ब्रेन डेड मरीज की पहचान, परिजनों की अंगदान के लिए सहमति और अंगदान संबंधी प्रक्रिया का प्रोटोकॉल स्पष्ट और सुनिश्चित होगा। सोटो को प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया है। </p>
<p><strong>अप्रैल से अब तक 75 एनओसी जारी</strong><br />बैठक में फर्जी एनओसी प्रकरण की भी समीक्षा की। इस दौरान एनओसी के लिए तैयार की गई एसओपी का प्रस्तुतीकरण दिया गया। सभी स्टेक होल्डर्स के साथ बैठक कर एसओपी पर सुझाव लेने के निर्देश दिए।  बैठक में बताया गया कि फर्जी एनओसी प्रकरण के बाद गठित नई राज्य स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा एनओसी जारी करने के लिए नियमित बैठकें कर एक अप्रैल से 5 जुलाई तक 86 प्रकरण प्राप्त हुए थे, जिनमें से 75 एनओसी जारी की गई है। सात प्रकरण विभिन्न कारणों से निरस्त हुए हैं। शेष एनओसी जारी होना प्रक्रियाधीन हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jul 2024 12:10:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दवाएं मिल नहीं रही, एनओसी लेना भी आसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े अस्पतालों में मरीज दवाईयों के लिए ईधर उधर भटकने को मजबूर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medicines-are-not-available--getting-noc-is-also-not-easy/article-74276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/dwayi-mil-nhi-rhi,-noc-lena-bhi-asan-nhi...kota-news-02-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के अस्पतालों में लोगों को दवाईयों के लिए ईधर से उधर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। साथ ही कई दवाइयों से भी वंचित रहना पड़ रहा है। अस्पतालों में नहीं मिलने वाली दवाइयों की एनओसी बनाने के लिए लोगों को अस्पताल में ही यहां से वहां दौड़ना पड़ रहा है। जहां हर जगह सिर्फ लंबी कतारें ही मरीजों का इंतजार कर रही हैं। एमबीएस अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज असपताल तक में मरीजों को सिर्फ कतारों में लगा पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एमबीएस में मरीजों को जो दवाइयां दवा काउंटर पर नहीं मिलती हैं उनके लिए एनओसी जारी करने की सुविधा है। लेकिन उस एनओसी को बनाने के लिए मरीजों और तीमारदारों को तीन तीन जगह लाइन पर लगना पड़ता है। जिसमें एक दवाई लेने में ही 1 से 2 घंटे का समय लग जाता है।</p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज में एक गेट से दूसरे गेट तक चक्कर</strong><br />इसी तरह मेडिकल कॉलेज में पर्ची कटाने के लिए पहले 2 नंबर गेट पर जाना होता है फिर डॉक्टर को दिखाने के बाद गेट नंबर 2 के बाहर वापस दवाई लेने आना होता है वहां कोई दवाई नहीं मिलती है तो फिर 4 नंबर गेट पर जाना होता है वहां भी नहीं मिलती है जो गेट नंबर दो पर जन औषधि काउंटर चैक करना होता है। अगर इन सभी जगहों पर दवाई नहीं मिलती है तो उसके लिए गेट नंबर 4 से एनओसी बनाकर उसे युनिट हेड या उप अधिक्षक से वेरीफाई कराने के बाद ही आपको दवाई मिल सकती है।</p>
<p><strong>एनओसी नहीं बनाने पर बाहर से खरीदनी पड़ती है दवा</strong><br />अस्पतालों में एनोसी की सुविधा इस उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी कि अस्पताल में किसी दवा के नहीं मिलने पर मरीज उसे बाहर से बिना किसी खर्चे के ले सके लेकिन लाइनों और बार बार यहां घुमने से परेशान होकर मरीज मेडिकल स्टोर से लेने को मजबूर हो जाता है।</p>
<p><strong>एमबीएस और सुपर स्पेश्यिलिटी में भी कतारें </strong><br />इसी तरह एमबीएस अस्पताल में भी किसी दवाई की एनओसी बनाने के लिए ओपीडी ब्लॉक में उपर नीचे होना पड़ता है। जहां डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा लेने के लिए नीचे आना होता है जहां अगर कोई दवाई नहीं मिलती है तो उसकी एनओसी बनाने के लिए फिर उपर जाना होता है उसके बाद ही एनओसी बन पाती है। वहीं सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल में भी एनोसी बनाने के बाद दवा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ जाता है। जहां डॉक्टर की पर्ची व आधार कार्ड की जैरोक्स देने के बाद 2 से 3 घंटे बाद आने के लिए कहा जाता है। इस तरह संभाग के सबसे बड़े अस्पतालों में मरीज दवाईयों के लिए ईधर उधर भटकने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>लाइन ही लाइन</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एमबीएस अस्पताल में पर्ची बनाने के लिए मरीजों को पहले पर्ची काउंटर पर फिर दिखाने के बाद दवा काउंटर पर तो लगना ही होता है। लेकिन आपको को कोई दवाई अस्पतालों के दवा काउंटरों पर नहीं मिली तो आपको तीन तीन जगह लाइन में लगना पड़ सकता है। क्योंकि इन अस्पतालों में एनोसी जारी करने के लिए पहले आप को सभी दवा काउंटर पर पहले दवाई को खोजना होगा नहीं मिलने के बाद भी आपकी एनओसी जारी की जाएगी। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />अस्पतालों में हर जगह लाइनों में लगना पड़ता है पहले पर्ची फिर दवा काउंटर अगर जांच लिख दी तो वहां भी लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। जिससे आधा समय तो लाइनोें में ही निकल जाता है। इसका समाधान करना चाहिए और काउंटर आसपास ही रहने चाहिए।<br /><strong>- अशोक कुमार, रंगबाड़ी</strong></p>
<p>डॉक्टर ने मुझे चार दवाईयां लिखी थी तीन तो काउंटर पर मिल गई लेकिन एक दवाई नहीं मिली जिसके लिए ईधर उधर दौड़ लगानी पड़ी। अगर एनओसी के लिए काउंटर एक ही जगह होते तो यहां वहां जाने के बजाए एक ही जगह पर काम हो जाता।<br /><strong>- रविंद्र पारेता, अनंतपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही एनओसी की प्रक्रिया की जा रही है, वहीं एनोसी जारी करने के लिए गेट नंबर चार पर स्थाई काउंटर बनाया हुआ है। काउंटरों को एक ही स्थान पर लाने की योजना बनाई जा रही है।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>
<p>एनओसी तब ही दी जाती है जब अस्पताल के पास दवाई मौजूद न हो इसके लिए सभी काउंटरों पर देखना जरूरी है जो राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार है। इसमें मौजूद समस्या को दूर करने के लिए सरकार को सुझाव भेजेंगे।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 17:50:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनओसी की प्रक्रिया अब होगी ऑनलाइन </title>
                                    <description><![CDATA[ ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनओसी जारी करने में हुए फर्जीवाड़े से हरकत में आई राज्य सरकार के निर्देश के बाद एमएमएस मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को सुबह ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनओसी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बैठक आयोजित हुई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/organ-transplant-noc-process-will-now-be-online/article-74272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sms.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनओसी जारी करने में हुए फर्जीवाड़े से हरकत में आई राज्य सरकार के निर्देश के बाद एमएमएस मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को सुबह ऑर्गन ट्रांसप्लांट एनओसी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बैठक आयोजित हुई। कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजीव बगरहट्टा की अध्यक्षता में आयोजित इस, बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में तय हुआ कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया को अब ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित निजी हॉस्पिटल से भी क्रॉस चेक किया जाएगा। वहीं ऑर्गन ट्रांसप्लांट की NOC की रेगुलर मीटिंग के भी प्रयास किए जाएंगे। बैठक में  एसएमएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा, नेफ्रोलॉजी HOD डॉ. धनंजय अग्रवाल, ट्रोमा इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़ सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 16:16:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> फायर एनओसी नहीं होने पर आकाश मॉल किया सीज</title>
                                    <description><![CDATA[ फायर एनओसी नहीं होने पर कोटा नगर निगम ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए आकाश मॉल को सीज कर दिया।  निगम के अधिकारियों ने बताया कि कई बार मॉल संचालक को नोटिस दिया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/akash-mall-seized-for-not-having-fire-noc/article-10593"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/akash-mall-seized-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। फायर एनओसी नहीं होने पर कोटा नगर निगम ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए आकाश मॉल को सीज कर दिया।  निगम के अधिकारियों ने बताया कि कई बार मॉल संचालक को नोटिस दिया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है। <br /><br />नगर निगम कोटा की अग्निशमन टीम ने शुक्रवार को सुबह 7 बजे एरोड्रम स्थित आकाश मॉल पर पहुंचकर इस बिल्डिंग को सीज कर दिया।  फायर एनओसी आकाश मॉल के पास नहीं थी, इसके चलते नगर निगम की टीम ने कई नोटिस उन्हें दिए, लेकिन नोटिस का जवाब भी आकाश मॉल के संचालक नहीं दे रहे थे।  ऐसे में नगर निगम दक्षिण आयुक्त राजपाल सिंह के आदेश के बाद मॉल को सीज कर दिया गया है। इसमें सिनेमाघर, आधार सेंटर के अलावा कई आॅफिस और रेस्टोरेंट संचालित होते हैं।  शहर के बीचोबीच स्थित यह बिल्डिंग कई सालों से बिना फायर एनओसी के ही संचालित हो रही थी ।<br /><br />कार्रवाई करने दक्षिण के चीफ  फायर आॅफिसर दीपक राजौरा, उत्तर के जलज घसीजा व असिस्टेंट फायर आॅफिसर देवेंद्र गौतम सहित पूरा अमला पहुंचा । अचानक निगम की फायर टीम को देखते हुए मॉल के सिक्योरिटी गार्ड भी सकते में आ गए। इसके बाद  मॉल के मालिक और संचालकों को फोन किया, लेकिन मालिक मॉल तक पहुंचते उससे पहले ही नगर निगम की अग्निशमन अनुभाग टीम ने मॉल को सीज कर दिया।<br /><br />चीफ  फायर आॅफिसर दीपक राजौरा ने बताया कि अग्निशमन की टीम ने आकाश मॉल संचालकों को बीते 5 सालों से कई नोटिस दिए हैं। मैंने खुद ने 2021 में तीन नोटिस इस मॉल संचालकों को दिए थे। उन्होंने कहा कि हमने कई बार फायर सेफ्टी के उपकरणों की जांच की, जिन्हें हम भी नहीं चला पा रहे थे। ऐसे में आम व्यक्ति कैसे इनका उपयोग कर पाएगा, साथ ही इस मॉल में चल रहे सिनेमा घर में भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन वहां भी फायर फाइटिंग के कोई इंतजाम नहीं हैं, मॉल संचालक फायर एनओसी को रिन्यूअल भी नहीं करा रहे थे और नई एनओसी के लिए भी आवेदन नहीं कर रहे थे।<br /><br /><strong>एक हजार बिल्डिंग्स नही है एनओसी</strong><br />मॉल में फायर सेफ्टी के उपकरण चालू हालात में भी नहीं हैं, सीएफओ जलज घसीजा ने बताया कि पूरे कोटा दक्षिण और उत्तर नगर निगम के एरिया में 1000 बिल्डिंगों को नोटिस दिए हुए हैं। इनमें कई हाईराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंग, हॉस्पिटल, कोचिंग संस्थान,हॉस्टल,होटल, मैस,स्कूल, बड़े शोरूम और इंडस्ट्रियल फैक्ट्रियां शामिल हैं । सभी को कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी है। ऐसे में अब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सख्ती शुरू की है। इसी के तहत आकाश मॉल को सीज कर दिया है, उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ऐसे में लोग फायर एनओसी तुरंत लें, ताकि आगजनी की घटनाओं पर रोक लग सके ।<br />अस्पतालों को सरकार ने इसमें थोड़ी रियायत दी हुई है और कोटा शहर के 90 फीसदी अस्पतालों के पास इस तरह की फायर एनओसी भी है, हालांकि अन्य 10 फीसदी अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। इन पर भी हम सख्ती कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 16:43:25 +0530</pubDate>
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                <title>पशुपालन विभाग में भर्ती परीक्षाओं के लिए एनओसी लेने की आवश्यकता समाप्त </title>
                                    <description><![CDATA[कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया की पहल पर कृषि विभाग के बाद अब पशुपालन विभाग में भी विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के भर्ती परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) लेने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/need-ended-to-take-noc-for-recruitment-examinations-in-animal-department/article-7538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4564654646.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया की पहल पर कृषि विभाग के बाद अब पशुपालन विभाग में भी विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के भर्ती परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) लेने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। कटारिया ने बताया कि विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों की ओर से संघ लोक सेवा आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन बोर्ड एवं विश्वविद्यालय भर्ती आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने से पूर्व विभागीय अनापत्ति मांगी जाती है, जिससे न केवल प्रकरण में विलम्ब होता है, बल्कि अनावश्यक पत्राचार एवं कार्यभार भी बढ़ता है।</p>
<p>इसके मध्यनजर अधिकारी-कर्मचारियों के हित में निर्णय लेते हुए भर्ती परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए अपने विभागाध्यक्ष और प्रशासनिक विभाग से अनापत्ति प्राप्त करने की जरूरत को समाप्त किया गया है। इस संबंध में एक विभागीय परिपत्र जारी कर शैक्षणिक कार्यक्रमों को छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग और अन्य केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के संगठनों की ओर से आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं पर लागू किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कृषि विभाग द्वारा 30 मार्च को एक परिपत्र जारी कर विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के किसी भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए आवश्यक विभागीय एनओसी लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया था।  प्रार्थी विभाग को केवल सूचना देकर परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। अंतिम चयन होने पर नई सेवा में ज्वॉइन करने के लिए ही अनुमति लेनी होगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 13:19:47 +0530</pubDate>
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                <title>आगजनी की दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम, एनओसी की प्रक्रिया होगी सरल, होगा सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[सभी प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य :  जन जागरूकता के लिए नगर निगम ग्रेटर चलाएगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/619765c500da4/article-2545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/jaipur-nagar-nigam1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। शहर में आगजनी की दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नियमों में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य किया जाएगा। इसके लिए बिना फायर एनओसी के चलने वाले प्रतिष्ठानों का नगर निगम जयपुर ग्रेटर प्रशासन सर्वे कराया जाएगा। आयुक्त यज्ञ मित्र सिंहदेव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फायर एनओसी की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, जिससे आवेदकों को आवेदन करने में आसानी हो और अधिक से अधिक लोग एनओसी के लिए आवेदन कर सकें। इसके साथ ही आयुक्त ने अग्निशामक शाखा के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक उपकरणों तथा वाहनों की तत्काल खरीद किए जाने के साथ फायरमैनों के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने के अधिकारियों को निर्देश दिए। फायर शाखा को मजबूत करने के लिए शाखा में कार्यरत कार्मिकों के नियमित प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। बैठक में उन्होंने समय समय पर मॉकड्रिल कर कार्मिकों को हर विकट परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार रखने के अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /> <br /> <strong>इन प्रतिष्ठानों को लेना अनिवार्य</strong><br /> निगम क्षेत्र में संचालित विद्यालय, होटल, औद्यौगिक इकाइयां, वेयर  हाउस, कोचिंग, हॉस्पिटल, नो मीटर से अधिक के आवासीय संस्थान तथा अन्य व्यवसायिक संस्थान जो फायर एनओसी के दायरे में आते है उनका सर्वे किया जाएगा। सर्वे के दौरान बिना फायर एनओसी के संचालित प्रतिष्ठानों के संचालकों को नोटिस देकर एनओसी लेने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद भी ऐसे प्रतिष्ठान जिनके पास फायर एनओसी नही  होगी उन्हें सीज करने की निगम ग्रेटर प्रशासन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 14:37:12 +0530</pubDate>
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