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                <title>survey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिहार में खरीफ महाभियान-2026 का आगाज: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिखाई किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी; योजनाओं, तकनीक और अनुदान की जानकारी गांव-गांव पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने किसान जागरूकता और कृषि ज्ञान वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यह वाहन किसानों को डिजिटल क्रॉप सर्वे, अनुदानित योजनाओं, उन्नत तकनीकों और फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर उनकी आय बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharif-maha-abhiyan-2026-started-in-bihar-chief-minister-samrat-choudhary/article-156965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/samrat1.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को 01 अणे मार्ग से किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया।श्री चौधरी ने इस दौरान शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 से संबंधित दो कृषि ज्ञान वाहन सहित सभी जिलों के लिए किसान जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम चौधरी ने बताया कि किसान जागरूकता वाहन द्वारा किसानों को खरीफ मौसम से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि शारदीय (खरीफ) मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा खरीफ में अनुदानित दर पर उपादान वितरण की जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आय बढ़ाने, डिजिटल क्रॉप सर्वे / फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अवगत कराने के साथ-साथ कृषि उपकरण की भी जानकारी दी जायेगी।</p>
<p>सीएम चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया जायेगा। साथ ही खेत बचाओ अभियान, प्रकृति तथा संतुलित उर्वरक की जानकारी एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरुक किया जायेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ.वीरेन्द्र प्रसाद यादव, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, कृषि विभाग के निदेशक सौरभ सुमन यादव, निदेशक, उद्यान अभिषेक कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जनगणना 2027: घर-घर पहुंच रहे प्रगणक ; हेल्पलाइन 1855 पर पूछे जा रहे दिलचस्प सवाल डेटा देने से हमें क्या फायदा होगा? लोगों की जिज्ञासाओं का केंद्र बनी हेल्पलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में जनगणना 2027 का काम शुरू हो चुका है। डेटा सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर लोगों की जिज्ञासाएं दूर करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 जारी किया गया है। नागरिक फोन करके पूछ रहे हैं कि आंकड़े देने पर उन्हें सरकार से क्या सुविधाएं मिलेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/census-2027-enumerators-reaching-every-home-interesting-questions-being-asked/article-155663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/scaled_1000110865.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जनगणना 2027 के तहत प्रदेशभर में घर-घर जाकर जनगणना का कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए नियुक्त प्रगणक लोगों के घर पहुंचकर आवश्यक जानकारी एकत्र कर रहे हैं। वहीं नागरिकों की सहायता और शंकाओं के समाधान के लिए जनगणना निदेशालय द्वारा हेल्पलाइन नंबर 1855 भी जारी किया गया है, जिस पर बड़ी संख्या में लोग संपर्क कर रहे हैं। जनगणना निदेशालय के अनुसार हेल्पलाइन पर केवल तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी प्रश्न ही नहीं, बल्कि कई रोचक और जिज्ञासापूर्ण सवाल भी पूछे जा रहे हैं। लोगों में जनगणना को लेकर उत्सुकता साफ दिखाई दे रही है।</p>
<p>डेटा देने से हमें क्या मिलेगा? सबसे आम सवाल हेल्पलाइन पर आने वाले कॉल्स में कई लोग यह पूछ रहे हैं कि सरकार उनके घर की जानकारी और आंकड़े क्यों एकत्र कर रही है और इससे उन्हें क्या लाभ मिलेगा। कुछ लोगों ने सीधे सवाल किया कि आप हमारा डेटा ले रहे हैं, बदले में हमें क्या फायदा होगा? गैस सिलेंडर और सरकारी योजनाओं को लेकर भी सवाल कई नागरिकों ने यह भी पूछा कि यदि वे जनगणना में यह जानकारी देते हैं कि उनके घर में गैस सिलेंडर नहीं है, तो क्या उन्हें सरकार की ओर से गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं कुछ लोगों ने यह जानना चाहा कि जनगणना के बाद मोदी सरकार हमें कौन-कौन सी सुविधाएं दिलाएगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:10:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्दारमैया ने जाते-जाते शिवकुमार, राहुल के लिए खड़ी की मुश्किलें, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूरी देकर कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी उलझन में डाल दिया है। इस फैसले से राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार असहज स्थिति में हैं, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी और नया आरक्षण समीकरण पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-created-problems-for-shivkumar-rahul-while-leaving-read-what/article-155452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dkk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जाते-जाते राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की तैयार की गयी 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूर कर कांग्रेस नेतृत्व को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सियासत में कभी-कभी ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई सरकारी फाइल सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसका अपना एक अलग वजूद बन जाता है। कर्नाटक की जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट भी एक ऐसा ही मोहरा है। जहां निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस अफसरशाही इत्मीनान और राजनीतिक अंतिम रूप के साथ इसे मंजूर किया है, उसने खामोशी से वही काम करना शुरू कर दिया है, जो आंकड़े अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं- </p>
<p><strong>ताकतवरों की नींद उड़ाना।</strong></p>
<p>रिपोर्ट की मंजूरी देने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके भीतर ज्यादा दिलचस्प हलचल छिपी हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अब खुद को ऐसी असहज स्थिति में पा रहे हैं, जहां उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। वे उसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के सियासी मिजाज के मंझे खिलाड़ी सिद्दारमैया ने शायद वही किया है, जो तजुर्बेकार सियासतदान अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं एक ऐसा माहौल छोड़ जाना, जो कानूनी तौर पर तो बिल्कुल साफ-सुथरा हो लेकिन राजनीतिक रूप से काफी उलझा हुआ हो। यह रिपोर्ट एक बार मंजूर होने के बाद अब सिर्फ कोई सुझाव नहीं रह गयी है। यह एक ऐसा सवाल बन चुकी है, जो जवाब के इंतजार में है।</p>
<p>शिवकुमार के लिए यह मुद्दा फिलहाल सबसे अहम है और सीधे उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राज्य का जातीय समीकरण कभी भी हवा-हवाई नहीं होता। यह उन समुदायों के रूप में सामने आता है, जो पुरानी बातें याद रखते हैं, ऐतराज जताते हैं और एकजुट होते हैं। वोक्कालिगा समुदाय का एक वर्ग, जो पहले भी जातीय सर्वेक्षण को लेकर हुए विवादों को लेकर संवेदनशील रहा है, इसके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर कड़ी और सतर्क निगाह रख सकता है। पद्धति और आंकड़ों पर बहस भले ही दफ्तरों में हो, लेकिन पहचान और प्रतिनिधित्व का सवाल सड़कों पर तय होता है।</p>
<p>राहुल गांधी की परेशानी का स्तर थोड़ा अलग है। जातिगत जनगणना के हक में उनका लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक रुख अब इसे अमली जामा पहनाने में टेडी खीर नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी आदत के मुताबिक, इस सूरत-ए-हाल को नीति के विकास के रूप में नहीं, बल्कि एक सियासी विरोधाभास के तौर पर देखना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा बोलती है और राज्यों में दूसरी। कांग्रेस जैसा लाजिमी है, इस बात से सरासर इनकार करती है।</p>
<p>अब कांग्रेस के सामने दो रास्ते खुलते हैं, और दोनों में से कोई भी रास्ता आरामदेह नहीं है। अगर इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता है, तो इसके प्रशासनिक ईमानदारी और फिर उसके बाद आने वाली राजनीतिक हिचकिचाहट का एक और भारतीय उदाहरण बन जाने का खतरा है। इसने पिछड़े समुदायों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों के बीच जो उम्मीदें जगाई हैं, वे इतनी आसानी से खत्म नहीं होंगी। ऐसी सूरत में इस रिपोर्ट को इस बात के लिए कम याद किया जायेगा कि इसमें क्या कहा गया था, बल्कि इस बात के लिए ज्यादा याद किया जायेगा कि इसके साथ क्या नहीं किया गया।</p>
<p>अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसके नतीजे ज्यादा त्वरित और साफ तौर पर दिखाई देने वाले होंगे। आरक्षण का नये सिरे से निर्धारण समुदायों का प्रतिनिधित्व और जनसांख्यिकीय दावे सक्रिय रूप से राजनीति के केंद्र में आ जायेंगे। समर्थन और विरोध दोनों एक साथ खड़े होंगे। कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं। प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं तथा गठबंधन को संभालना और भी मुश्किल हो जायेगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए इसका मतलब पार्टी के अनुशासन और अपने समुदाय की भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी और श्री गांधी के लिए इसका मतलब अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को उसकी तमाम अपरिहार्य उलझनों के साथ प्रशासनिक हकीकत में बदलना होगा। दोनों ही सूरतों में दबाव खत्म नहीं होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सिद्दारमैया के इस रिपोर्ट को मंजूर किये जाने को सिर्फ कागजी या प्रक्रियात्मक कार्रवाई से बढ़कर देखा जा रहा है। इस जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर खामोशी लेकिन मजबूती के साथ दूसरों के कंधों पर डालने के तौर पर देखा जा रहा है- एक तजुर्बेकार सियासतदान का यह तय करने का तरीका कि एक बार जो फैसला ले लिया गया, वह आराम से सिर्फ उनका ही होकर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:09:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूपी चुनाव 2027 की तैयारी : भाजपा का विधायकों पर 'परफॉर्मेंस टेस्ट' शुरू, सर्वे में खराब निकले तो कटेगा टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मौजूदा विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' बनाना शुरू कर दिया है। दो बाहरी एजेंसियों द्वारा कराए जा रहे इस सर्वे में जनता की नाराजगी झेल रहे विधायकों की जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश की जा रही है। मुरादाबाद मंडल पर पार्टी का विशेष ध्यान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-2027-bjps-performance-test-on-mlas-begins-if-they/article-154532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp-kerala.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में जीते अपने विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी यह परख रही है कि क्षेत्र में विधायक की जमीनी पकड़ कैसी है और जनता के बीच उनकी सक्रियता कितनी है। जिन विधायकों से जनता नाराज है, उनकी जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी गई है।</p>
<p>पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, “हाईकमान ने पूरे सर्वे की जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है जिनकी टीमें पिछले कई दिनों से शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रही हैं। विधायकों के काम, व्यवहार और क्षेत्र में मौजूदगी पर जनता की राय ली जा रही है। इसके अलावा संभावित नए दावेदारों की लोकप्रियता और जातीय-सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा यह तय करना चाहती है कि 2027 में किस चेहरे पर दांव लगाने से जीत की गारंटी मिलेगी।”</p>
<p>सर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार कराया जा रहा है। ज्यादातर मंडलों में भाजपा की स्थिति मजबूत है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। 2017 के चुनाव में भाजपा को यहां 27 में से 14 सीटें मिली थीं, जो 2022 में घटकर सिर्फ 10 रह गईं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल में खास सतर्कता बरत रही है और हर सीट पर मजबूत उम्मीदवार खोज रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन अपने स्तर पर जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बना रहा है। इसमें स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी महत्व दिया जाएगा। बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा।</p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जो नाम दोनों जगह कॉमन होंगे और जिन पर सहमति बनेगी, उनका टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसियों की रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली हाईकमान को सौंप दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में सिर्फ विधायकों का ही नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किस इलाके में सरकार की ब्रांडिंग मजबूत है और कहां एंटी-इनकंबेंसी है। नेतृत्व का मानना है कि अभी से मिली जमीनी फीडबैक से 2027 की रणनीति को धार दी जा सकेगी। साफ संकेत हैं कि जो विधायक काम में फिसड्डी साबित हुए, उनका पत्ता अगले चुनाव में कटना तय है।</p>
<p>गौरतलब है कि इसी तरह कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्राइवेट एजेंसियों से संभावित चेहरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है। सपा भी अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है। मायावती की बसपा कई सीटों पर प्रभारी और संभावित प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। आजाद की आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी है। कुल मिलाकर 2027 का चुनावी दंगल शुरू होने से पहले ही सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। टिकट का गणित, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट ही तय करेंगे कि अगली बार लखनऊ की सत्ता किसके हाथ आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:03:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तेलंगाना में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू: एक अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची, जानें किन किन दस्तावेजों की पड़ेगी आवश्यकता </title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना के सीईओ सुदर्शन रेड्डी ने घोषणा की है कि 25 जून से 24 जुलाई 2026 तक मतदाता सूची के संशोधन के लिए घर-घर गणना की जाएगी। बीएलओ प्रपत्र भरने में सहायता करेंगे, जिसे ऑनलाइन भी जमा किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर को प्रकाशित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sir-process-starts-in-telangana-final-voter-list-will-be/article-154128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/up-sir.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सी. सुदर्शन रेड्डी ने शनिवार को घोषणा की कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के अंतर्गत घर-घर जाकर गणना 25 जून से 24 जुलाई, 2026 तक की जाएगी, जबकि मतदाता सूची का मसौदा 31 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 30 अगस्त तक जारी रहेगी और अंतिम मतदाता सूची एक अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। राज्य में चल रहे एसआईआर अभ्यास के संबंध में मीडिया को संबोधित करते हुए, सीईओ ने संशोधन प्रक्रिया में शामिल कार्यक्रम एवं प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया।</p>
<p>रेड्डी ने बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर मौजूदा मतदाताओं को आंशिक रूप से पहले से भरे हुए जनगणना प्रपत्र वितरित करेंगे, प्रपत्र भरने में उनकी सहायता करेंगे और जनगणना प्रक्रिया के दौरान उन्हें एकत्र करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएलओ को प्रत्येक घर में कम से कम तीन बार जाना अनिवार्य है। मतदाताओं के पास चुनाव आयोग की वेबसाइट के माध्यम से अपने जनगणना प्रपत्र ऑनलाइन जमा करने का विकल्प भी होगा और वे "बीएलओ के साथ कॉल बुक करें" सुविधा का उपयोग कर सकते हैं या सहायता के लिए टोल-फ्री मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान जनगणना प्रपत्र के अलावा कोई अन्य दस्तावेज एकत्र नहीं किए जाएंगे। हालांकि, मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने के बाद, मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) उन व्यक्तियों को नोटिस जारी करेंगे जिनके विवरण का मिलान नहीं हो सका है या जिनमें विसंगतियां पाई गई हैं। मतदाता की जन्मतिथि के आधार पर आवश्यक दस्तावेजों की रूपरेखा बताते हुए, सीईओ ने कहा कि एक जुलाई, 1987 से पहले जन्मे मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान को साबित करने वाला कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।</p>
<p>एक जुलाई, 1987 और दो दिसंबर, 2004 के बीच जन्मे लोगों को माता-पिता में से किसी एक से संबंधित अतिरिक्त प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे, जबकि 2 दिसंबर, 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को दोनों माता-पिता से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। स्वीकृत दस्तावेजों में जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र और सरकारी एजेंसियों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी पहचान पत्र शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आधार कार्ड से संबंधित सत्यापन चुनाव आयोग द्वारा सितंबर 2025 में जारी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।</p>
<p>संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत तेलंगाना राज्य की चुनावी प्रोफाइल के अनुसार, राज्य में 119 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 12 अनुसूचित जनजातियों के लिए और 19 अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं। तेलंगाना में वर्तमान में 35,985 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से 14,750 शहरी क्षेत्रों में और 21,157 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या वर्तमान में 3,39,24,664 है, जिनमें 5.22 लाख से अधिक दिव्यांग मतदाता, 3,573 प्रवासी मतदाता और 18 से 19 वर्ष की आयु के 8.18 लाख युवा मतदाता शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि पूर्व-एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत 64.38 प्रतिशत मतदाताओं का मानचित्रण पहले ही किया जा चुका है। संवाददाता सम्मेलन में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. वासम वेंकटेश्वर रेड्डी, सरकार के अतिरिक्त सचिव शंकर, सहायक सचिव ए.एस. चारी, एसजीडीसी बी. चेन्नैया, एसजीडीसी एन. प्रसूनम्बा और प्रधानमंत्री (आईटी) चिरंजीवी भी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 11:37:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>धार भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : हिंदू पक्ष की मांग मंजूर, पूजा की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी है। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के अनुसार, एएसआई सर्वे और साक्ष्यों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। कोर्ट ने सरकार को मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि पर विचार करने का निर्देश दिया है, जिससे वर्षों पुराना विवाद सुलझने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indore-high-courts-historic-decision-in-dhar-bhojshala-case-hindu/article-153940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dhar-bhojshala.png" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश। धार भोजशाल केस मेें इंदौर हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष की मांग को मंजूर कर दिया है और हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी है। इस केस के बारे में एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा, कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार भी दिया है... हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे अपना एक प्रत्यावेदन सरकार को दें। सरकार इस पर विचार करेगी कि उन्हें धार में एक वैकल्पिक भूमि दी जाए या नहीं।</p>
<p>गौरतलब है कि 'हिंदू फ्रंट फ़ॉर जस्टिस' के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा "हाई कोर्ट, इंदौर बेंच में 'हिंदू फ्रंट फ़ॉर जस्टिस' ने 2022 में हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और अन्य लोगों के ज़रिए एक याचिका दायर की थी। यह मामला काफ़ी लंबे समय से, लगभग चार सालों से चल रहा है। इस मामले में एएसआई ने एक सर्वे किया और अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इतना ही नहीं कोर्ट ने सुनवाई से पहले भोजशाला का मुआयना भी किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना-2027 में स्व-गणना के लिए सरकारी कर्मचारियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कर्मचारियों को 15 मई तक स्व-गणना (Self-Enumeration) पूरी करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की पहल के बाद अब प्रशासन की बारी है। वेब पोर्टल के माध्यम से सटीक आंकड़े जुटाना इस राष्ट्रीय मिशन की प्राथमिकता है, जिससे विकास की नई राह खुलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-ensure-100-participation-of-government-employees-for-self-enumeration/article-153068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/v.-srinivass.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत राज्य के समस्त राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की स्व-गणना में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को 15 मई 2026 से पूर्व स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें और आवश्यक निर्देश जारी करें। जारी निर्देशों के अनुसार जनगणना-2027 का प्रथम चरण राजस्थान में 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।</p>
<p>इससे पहले 1 मई से 15 मई 2026 तक निर्धारित वेब पोर्टल सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल⁠ पर स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि 1 मई को महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं स्व-गणना कर प्रदेशवासियों के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में शत-प्रतिशत एवं सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:27:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली डिजिटल जनगणना आज से शुरू: ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुली, प्रगणक को घर पर दिखानी होगी एसई आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। वाराणसी के नागरिक 21 मई तक पोर्टल पर जाकर अपनी 'स्व-गणना' कर सकते हैं। 33 सवालों के बाद प्राप्त 11 अंकों की SE ID भविष्य के सर्वे को आसान बनाएगी। यह प्रक्रिया विकास का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/first-digital-census-starts-from-today-self-enumeration-window-opened-enumerator/article-152984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jan-ga.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना-2027 गुरुवार से शुरु हो गयी। इसके पहले चरण के तहत ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुल गई है, जो 21 मई तक चलेगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जनपदवासियों से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। नागपाल ने बताया कि केंद्र सरकार की इस पहल के तहत नागरिकों को पहली बार आधिकारिक पोर्टल (https:e.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना और अपने परिवार का विवरण दर्ज करने की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि नागरिक अपने मोबाइल नंबर और नाम के माध्यम से पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। ओटीपी सत्यापन के बाद उन्हें 33 सवालों की प्रश्नावली भरनी होगी। विवरण सफलतापूर्वक जमा होने पर एक 11 अंकों की ‘एसई आईडी’ प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है।</p>
<p>नगर आयुक्त ने कहा कि ‘स्व-गणना’ करने वाले परिवारों को 22 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे के दौरान काफी सुविधा मिलेगी। जब प्रगणक घर पहुंचेंगे, तो उन्हें केवल अपनी एसई आईडी दिखानी होगी। यदि डेटा रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी। नगर आयुक्त ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और डेटा एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान आपसे किसी भी प्रकार की बैंक जानकारी या आधार संख्या जैसे दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। प्रगणक के आने पर उनका आधिकारिक पहचान पत्र अवश्य देख लें। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विकास योजनाओं की नींव तैयार करने का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।</p>
<p>(हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग) मई-जून 2026 में चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या, साक्षरता, रोजगार और जातिगत डेटा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। नगर निगम प्रशासन ने इस डिजिटल जनगणना को सफल बनाने के लिए प्रगणकों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और आम जनता से इस ‘जन अभियान’ में जुड़ने की अपील की है। नगर आयुक्त ने कहा, “वाराणसी को एक स्मार्ट और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए सटीक डेटा अनिवार्य है। मेरा शहरवासियों से अनुरोध है कि सात से 21 मई के बीच पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करें और डिजिटल इंडिया के इस महाकुंभ में सहभागी बनें।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:09:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर वन विभाग 1 और 2 मई को जिले के 85 से अधिक वॉटर होल्स पर वन्यजीव गणना आयोजित करेगा। यह गणना 24 घंटे चलेगी, जिसमें वन कर्मी पग-मार्क और प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर आंकड़े जुटाएंगे। पुष्कर, किशनगढ़ और नसीराबाद सहित सभी क्षेत्रों के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)29.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वन विभाग की ओर से एक व 2 मई को जिले के जंगलों में वन्य जीव गणना की जाएगी। यह गणना वॉटर होल्स पद्धति से होगी। जिले के जंगलों के 85 से अधिक वाटर होल्स पर यह गणना होगी। वन कार्मिक वॉटर्स होल्स पर पानी पीने के लिए आने वाले जीवों को देखकर उनकी संख्या निर्धारित प्रपत्रों में दर्ज करेंगे। साथ भी उनके पग मार्ग, मल मूत्र को भी गणना का आधार बनाएंगे। उपवन संरक्षक पी बालामुरुगन ने बताया कि गणना 1 मई को सुबह 8:00 बजे शुरू होकर 2 मई को सुबह 8:00 बजे संपन्न होगी। अजमेर सहित ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, सरवाड़ व पुष्कर के जंगलों में वाटर होल्स पर होने वाली गणना के लिए टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम के कार्मिकों को गणना का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गणना के दिन अधिकारियों की टीम वॉटर होल्स का औचक निरीक्षण भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> असर खबर का : फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू, खेतों में उतरी टीमें</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--survey-of-crop-damage-begins--teams-deployed-to-fields/article-147551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलेभर में कृषि व राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय होकर खेतों में पहुंचने लगी हैं और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। शनिवार को कई गांवों में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और फसलों की स्थिति का आकलन किया। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर कटी व खड़ी फसलों का निरीक्षण कर रही हैं। पटवारी, गिरदावर और कृषि पर्यवेक्षक किसानों के साथ खेतों में जाकर नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। कई जगहों पर टीमों ने फसल की नमी, गिरावट और पानी भराव की स्थिति का रिकॉर्ड भी तैयार किया।</p>
<p><strong>किसानों से ली विस्तृत जानकारी</strong><br />टीमों के अधिकारियों ने किसानों से फसल की बुवाई, कटाई और बारिश के समय की स्थिति के बारे में जानकारी ली। किसानों ने भी खुले तौर पर अपनी समस्या रखते हुए बताया कि कटाई के दौरान हुई बारिश से उन्हें भारी नुकसान का डर है। कई किसानों ने भीगी हुई गेहूं और सरसों की फसल दिखाकर नुकसान का अंदेशा जताया। कुछ टीमों द्वारा सर्वे के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए फोटो और लोकेशन के साथ डेटा अपलोड किया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके और रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जा सके। प्रशासन की सक्रियता से किसानों में मुआवजे की उम्मीद जगी है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आंकलन कर सरकार को भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश</strong><br />मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला कलक्टर्स को सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की हर परिस्थिति में सहायता के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ तत्पर है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि किसानों की पीड़ा हमारी पीड़ा है। राजस्थान की समृद्धि का आधार हमारे अन्नदाता भाई-बहन हैं। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ किसान भाइयों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी है। प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, इसके लिए सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में शनिवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि इन दिनों जिले में रबी फसलों की कटाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों में गेहूं, सरसों और अन्य फसलें कटी हुई पड़ी हैं। ऐसे में बारिश होने से कटी फसलों के भीगने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और अन्य साधनों का सहारा लिया, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण उन्हें पूरी तरह बचा पाना मुश्किल साबित हुआ। ऐसे में उत्पादन और भाव दोनों पर असर पड़ने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।</p>
<p>सरकार के निर्देश पर बारिश से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर कटी फसलों में खराबे की संभावना है। अभी सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी।<br /><strong>- राजेन्द्र मीणा, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:58 +0530</pubDate>
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                <title>शौचालय, लीकेज, पुलिस चौकी… इंदौर में जहरीले पानी से अब तक 13 लोगों की मौत, ICU में भर्ती 32 मरीज, आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने लापरवाह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/toilet-leakage-police-post%E2%80%A6-13-people-died-so-far-due/article-138097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बता दें कि इंदौर स्वचछता के मामले में पूरे देश में सिरमौर है। इंदौर में दूषित पानी के कारण अब तब 13 लोग अपनी जान गवां चुके है और करीब 300 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बनी हैं, जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस मामले में सीएम मोहन यादव की कुछ अधिकारियों पर गाज गिरी जिसके कारण उनको तुरंत ही उनके पद से सस्पेंड कर दिया गया है। बीते दिन गुरूवार को करीब 338 नए मरीज मिले हैं जिनमें से करीब 32 मरीजों को आईसीयू में भर्ती करवाया गया हैं, जहां उनको प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इस मामले में लैब रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासा हुआ है और उसके बाद आज हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई होगी।</p>
<p>हालांकि, इस मामले में प्रशासन की तरफ से केवल 4 मौतों की ही पुष्टि हुई है, लेकिन कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले में अब तक करीब 1400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि की है। इन मामलों के सामने आने के बाद भागीरथपुरा स्थानियों निवासियों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, यहां पीने की पानी के लिए टैंकर की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इन मामलों के सामने आने के बाद स्थानिय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। इस की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमने यहां पर करीब 21 टीमें बनाई हुई है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल, एएनएम व आशा कार्यकर्ता शामिल है, जों समय समय पर घर घर जाकर सबको समझाने की कोशिश करते हैं। इसके आगे अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि, गत दिवस हमने करीब 1714 मकानों का सर्वे किया,​ जिसमें से 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से करीब 338 लोगों की हालत खराब थी। अब तक इस मामले में 272 लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया जा चुका है।</p>
<p>दूषित पानी के मामले में 13 लोगों की मौत होने के बाद एनएचआरसी ने स्वत: सज्ञान लिया है और इस मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:33:27 +0530</pubDate>
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                <title>राज्य में मौसमी बीमारियों पर सख्त निगरानी के निर्देश, मुख्य सचिव ने दिए घर-घर सर्वे के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-secretary-ordered-from-house-to-house-survey-for-strict/article-128911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन बीमारियों का संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए समय पर सर्वे कर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्यकर्मी और वॉलंटियर्स लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर तत्काल उपचार सुनिश्चित करें।</p>
<p>मुख्य सचिव ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मच्छरों का प्रकोप मिले, वहां तुरंत फोगिंग और लार्वा नियंत्रण की कार्रवाई की जाए। स्थानीय निकायों और चिकित्सा विभाग को समन्वय कर सफाई और फोगिंग कार्य में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में पर्याप्त दवाइयां, प्लेटलेट्स और आवश्यक सामग्री उपलब्ध रखी जाए। बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने और लोगों को साफ-सफाई व जलभराव हटाने के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:58:52 +0530</pubDate>
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