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                <title>survey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर वन विभाग 1 और 2 मई को जिले के 85 से अधिक वॉटर होल्स पर वन्यजीव गणना आयोजित करेगा। यह गणना 24 घंटे चलेगी, जिसमें वन कर्मी पग-मार्क और प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर आंकड़े जुटाएंगे। पुष्कर, किशनगढ़ और नसीराबाद सहित सभी क्षेत्रों के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/wildlife-census-in-ajmer-forests-on-1-2-may-keeping-an/article-151553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)29.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। वन विभाग की ओर से एक व 2 मई को जिले के जंगलों में वन्य जीव गणना की जाएगी। यह गणना वॉटर होल्स पद्धति से होगी। जिले के जंगलों के 85 से अधिक वाटर होल्स पर यह गणना होगी। वन कार्मिक वॉटर्स होल्स पर पानी पीने के लिए आने वाले जीवों को देखकर उनकी संख्या निर्धारित प्रपत्रों में दर्ज करेंगे। साथ भी उनके पग मार्ग, मल मूत्र को भी गणना का आधार बनाएंगे। उपवन संरक्षक पी बालामुरुगन ने बताया कि गणना 1 मई को सुबह 8:00 बजे शुरू होकर 2 मई को सुबह 8:00 बजे संपन्न होगी। अजमेर सहित ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, सरवाड़ व पुष्कर के जंगलों में वाटर होल्स पर होने वाली गणना के लिए टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम के कार्मिकों को गणना का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। गणना के दिन अधिकारियों की टीम वॉटर होल्स का औचक निरीक्षण भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:15:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> असर खबर का : फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू, खेतों में उतरी टीमें</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--survey-of-crop-damage-begins--teams-deployed-to-fields/article-147551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलेभर में कृषि व राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय होकर खेतों में पहुंचने लगी हैं और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। शनिवार को कई गांवों में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और फसलों की स्थिति का आकलन किया। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर कटी व खड़ी फसलों का निरीक्षण कर रही हैं। पटवारी, गिरदावर और कृषि पर्यवेक्षक किसानों के साथ खेतों में जाकर नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। कई जगहों पर टीमों ने फसल की नमी, गिरावट और पानी भराव की स्थिति का रिकॉर्ड भी तैयार किया।</p>
<p><strong>किसानों से ली विस्तृत जानकारी</strong><br />टीमों के अधिकारियों ने किसानों से फसल की बुवाई, कटाई और बारिश के समय की स्थिति के बारे में जानकारी ली। किसानों ने भी खुले तौर पर अपनी समस्या रखते हुए बताया कि कटाई के दौरान हुई बारिश से उन्हें भारी नुकसान का डर है। कई किसानों ने भीगी हुई गेहूं और सरसों की फसल दिखाकर नुकसान का अंदेशा जताया। कुछ टीमों द्वारा सर्वे के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए फोटो और लोकेशन के साथ डेटा अपलोड किया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके और रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जा सके। प्रशासन की सक्रियता से किसानों में मुआवजे की उम्मीद जगी है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आंकलन कर सरकार को भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश</strong><br />मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला कलक्टर्स को सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की हर परिस्थिति में सहायता के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ तत्पर है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि किसानों की पीड़ा हमारी पीड़ा है। राजस्थान की समृद्धि का आधार हमारे अन्नदाता भाई-बहन हैं। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ किसान भाइयों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी है। प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, इसके लिए सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में शनिवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि इन दिनों जिले में रबी फसलों की कटाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों में गेहूं, सरसों और अन्य फसलें कटी हुई पड़ी हैं। ऐसे में बारिश होने से कटी फसलों के भीगने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और अन्य साधनों का सहारा लिया, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण उन्हें पूरी तरह बचा पाना मुश्किल साबित हुआ। ऐसे में उत्पादन और भाव दोनों पर असर पड़ने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।</p>
<p>सरकार के निर्देश पर बारिश से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर कटी फसलों में खराबे की संभावना है। अभी सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी।<br /><strong>- राजेन्द्र मीणा, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शौचालय, लीकेज, पुलिस चौकी… इंदौर में जहरीले पानी से अब तक 13 लोगों की मौत, ICU में भर्ती 32 मरीज, आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने लापरवाह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/toilet-leakage-police-post%E2%80%A6-13-people-died-so-far-due/article-138097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बता दें कि इंदौर स्वचछता के मामले में पूरे देश में सिरमौर है। इंदौर में दूषित पानी के कारण अब तब 13 लोग अपनी जान गवां चुके है और करीब 300 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बनी हैं, जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस मामले में सीएम मोहन यादव की कुछ अधिकारियों पर गाज गिरी जिसके कारण उनको तुरंत ही उनके पद से सस्पेंड कर दिया गया है। बीते दिन गुरूवार को करीब 338 नए मरीज मिले हैं जिनमें से करीब 32 मरीजों को आईसीयू में भर्ती करवाया गया हैं, जहां उनको प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इस मामले में लैब रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासा हुआ है और उसके बाद आज हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई होगी।</p>
<p>हालांकि, इस मामले में प्रशासन की तरफ से केवल 4 मौतों की ही पुष्टि हुई है, लेकिन कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले में अब तक करीब 1400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि की है। इन मामलों के सामने आने के बाद भागीरथपुरा स्थानियों निवासियों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, यहां पीने की पानी के लिए टैंकर की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इन मामलों के सामने आने के बाद स्थानिय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। इस की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमने यहां पर करीब 21 टीमें बनाई हुई है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल, एएनएम व आशा कार्यकर्ता शामिल है, जों समय समय पर घर घर जाकर सबको समझाने की कोशिश करते हैं। इसके आगे अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि, गत दिवस हमने करीब 1714 मकानों का सर्वे किया,​ जिसमें से 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से करीब 338 लोगों की हालत खराब थी। अब तक इस मामले में 272 लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया जा चुका है।</p>
<p>दूषित पानी के मामले में 13 लोगों की मौत होने के बाद एनएचआरसी ने स्वत: सज्ञान लिया है और इस मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्य में मौसमी बीमारियों पर सख्त निगरानी के निर्देश, मुख्य सचिव ने दिए घर-घर सर्वे के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-secretary-ordered-from-house-to-house-survey-for-strict/article-128911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन बीमारियों का संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए समय पर सर्वे कर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्यकर्मी और वॉलंटियर्स लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर तत्काल उपचार सुनिश्चित करें।</p>
<p>मुख्य सचिव ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मच्छरों का प्रकोप मिले, वहां तुरंत फोगिंग और लार्वा नियंत्रण की कार्रवाई की जाए। स्थानीय निकायों और चिकित्सा विभाग को समन्वय कर सफाई और फोगिंग कार्य में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में पर्याप्त दवाइयां, प्लेटलेट्स और आवश्यक सामग्री उपलब्ध रखी जाए। बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने और लोगों को साफ-सफाई व जलभराव हटाने के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:58:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चांदलोडिया-खोड़ियार रेलखंड के डबलिंग के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मिली मंजूरी, चांदलोडिया-खोड़ियार रेलखंड का परिचालन महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्रालय ने पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मण्डल के चांदलोडिया-खोड़ियार रेलखंड के डबलिंग हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति प्रदान कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/final-location-survey-for-dabling-of-chandlodia-khadiyar-railway-block-approved/article-128701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/untitled-1.pdf.png" alt=""></a><br /><p>अहमदाबाद। रेल मंत्रालय ने पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मण्डल के चांदलोडिया-खोड़ियार रेलखंड के डबलिंग हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति प्रदान कर दी है। हाल ही में रेलवे बोर्ड के सदस्य नवीन गुलाटी के अहमदाबाद मण्डल दौरे के दौरान इस खंड के डबलिंग की मांग की गई थी, जिसे ध्यान में रखते हुए रेलवे मंत्रालय ने फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए हरी झंडी दिखाई है। चांदलोडिया बी केबिन से खोड़ियार तक 10 किलोमीटर लंबा यह डबल लाइन प्रोजेक्ट खंड की क्षमता और परिचालन दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फाइनल लोकेशन सर्वे में एलाइन्मेंट, भूमि आवश्यकता, तकनीकी आकलन सहित सभी आवश्यक अध्ययन किए जाएंगे, जिससे भविष्य में संरचना और इन्फ्रास्ट्रक्चर के कार्यों की योजना को सटीक और प्रभावी बनाया जा सके। यह कार्य संबंधित इंजीनियरिंग विभाग की टीम द्वारा संपन्न किया जाएगा।</p>
<p><strong>चांदलोडिया-खोड़ियार रेलखंड का परिचालन महत्व</strong><br />चांदलोडिया-खोड़ियार खंड का परिचालन महत्व अत्यधिक है। यह खंड गांधीनगर कैपिटल को राजकोट और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे क्षेत्र से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। गांधीनगर से चलने वाली सभी ट्रेनें जो राजकोट, ओखा, पोरबंदर, भावनगर, सोमनाथ और एनडब्ल्यूआर क्षेत्र जैसे जोधपुर, जयपुर, अजमेर आदि की ओर जाती हैं, इसी खंड से होकर गुजरती हैं। भारी यातायात के कारण इस मार्ग पर ट्रेनों की गति और समयबद्ध संचालन में अक्सर चुनौतियां आती रही हैं। डबलिंग के बाद इस खंड की क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे यात्रियों और मालगाड़ियों के संचालन में सुधार होगा। यह परियोजना न केवल ट्रेन संचालन की स्थिरता और समयबद्धता को सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में भी योगदान देगी। सौराष्ट्र क्षेत्र को गुजरात की राजधानी गांधीनगर और आगे दिल्ली/उत्तर भारत से जोड़ने वाले मार्ग की निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, डबलिंग के माध्यम से मार्ग की भीड़ कम होगी, ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और यात्रियों को समय पर सेवाएं मिलने में सुविधा होगी।</p>
<p> चांदलोडिया-खोड़ियार खंड की डबलिंग से न केवल परिचालन दक्षता में सुधार होगा, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास और माल व यात्री परिवहन की सुगमता में भी योगदान देगा। आम जनता और यात्रियों के लिए यह कदम लंबी दूरी की यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने में सहायक सिद्ध होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/final-location-survey-for-dabling-of-chandlodia-khadiyar-railway-block-approved/article-128701</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:08:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अवैध पैटा काश्त : ड्रोन करें पहरेदारी और तारबंदी बने ढाल,  जलस्रोतों का दम घोंट रही अवैध खेती </title>
                                    <description><![CDATA[बरसाती नदियों और तालाबों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक रहा है। परिणाम स्वरूप तालाब आधे भी नहीं भर पा रहे और भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-patta-cultivation--drones-should-monitor-and-fences-become-a-shield--illegal-farming-is-choking-water-sources/article-128343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1111of-news-(1).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र में जलस्रोतों पर अवैध पैटा काश्त (कब्जा कर खेती) का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। तालाब और नदियों की जमीन पर ग्रामीण व प्रभावशाली लोग खुलेआम खेती कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से चना, सोयाबीन और मौसमी सब्जियां उगाई जा रही हैं। पानी की उपलब्धता और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां खेती आसानी से हो जाती है, लेकिन इसकी कीमत जलस्रोतों को चुकानी पड़ रही है। बरसाती नदियों और तालाबों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक रहा है। परिणामस्वरूप तालाब आधे भी नहीं भर पा रहे और भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में इन जलस्रोतों को सुरक्षा कवच की दरकार है। पर्यावरणविदें का कहन है कि जलस्रोतों की जमीन पर अवैध खेती से इनके अस्तित्व पर संकट आने लगा है। इसलिए अब इनकी सुरक्षा के लिए तारबंदी सहित अन्य उपाय करने जरूरी है। अन्यथा आगामी वर्षों में जलस्रोतों का नामोनिशान मिट जाएगा।<br /> <br /><strong>पैटा काश्त के नाम पर कर रहे कब्जा:</strong> तालाबों और नदियों के किनारे की जमीन को कानूनी रूप से संरक्षित माना जाता है, ताकि बारिश का पानी संग्रहित हो सके और भूजल स्तर बना रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन जलाशयों की जमीन पर खेती कर अवैध कब्जा किया जा रहा है, जिसे "पैटा काश्त" कहा जाता है। हाड़ौती अंचल में जलस्रोतों की जमीनों पर तेजी से हो रही अवैध पैटा काश्त (अस्थायी खेती) ने पर्यावरणविदों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई तालाब, नदियों की सीमाएं और बरसाती नालों की जमीनें किसानों और भूमाफियाओं द्वारा जोत ली गई हैं, जिससे भविष्य में जलसंकट और जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकार और प्रशासन की ओर से इनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता उपाय नहीं करने से अवैध पैटा काश्त का दायरा बढ़ता ही जा रहा है।</p>
<p><strong>कमाई के लिए कब्जे की होड़</strong><br />जानकारी के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में इन जमीनों को तालाब और नदी की भूमि बताया गया है। बावजूद इसके कब्जाधारी ट्रैक्टर से जुताई कर फसल बो देते हैं। प्रशासन की कई बार की कार्रवाई भी टिकाऊ साबित नहीं हुई। अधिकांश मामलों में खेत खाली करवाने के कुछ समय बाद फिर कब्जा हो जाता है। तालाबों और नदियों की जमीनों पर खेती करने के लिए किसानों और ग्रामीणों ज्यादा खर्चा नहीं करना पड़ता है। वहीं मुफ्त में सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध हो जाती है। इसलिए अब इस भूमि को अधिकांश किसानों ने अच्छी कमाई का जरिया बना लिया है। प्रशासन की ओर से प्रभावी नहीं होने से अवैध कब्जा काश्त के मामले बढ़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>यह हो सकती है कार्रवाई?</strong><br />- ड्रोन सर्वे व सीमांकन: तालाब-नदी की जमीन का ड्रोन से सर्वे करवा कर सीमांकन किया जाए।<br />- तारबंदी और पिलर: जलस्रोतों की परिधि तारबंदी कर या फिर पिलर लगाकर सुरक्षित की जाए।<br />- अतिक्रमण हटाने का स्थायी अभियान: केवल अस्थायी नहीं, बल्कि बार-बार निगरानी करते हुए कार्रवाई हो।<br />- जुर्माना व कानूनी कार्रवाई: कब्जाधारियों पर आर्थिक दंड और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने पर एफआईआर करवाई जाए।<br />- ग्राम पंचायत निगरानी समिति: स्थानीय स्तर पर चौकसी बढ़ाई जाए और पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।</p>
<p><strong>हाड़ौती क्षेत्र में अवैध पैटा काश्त के अनुमानित आंकड़े (2024-25)</strong><br /><strong>जिला जल स्रोतों की संख्या अवैध पैटा काश्त प्रभावित क्षेत्र (हैक्टेयर में)</strong><br />कोटा    1,200    700-800 हैक्टेयर<br />बूंदी    950    600-700 हैक्टेयर                 <br />बारां    800    500-600 हैक्टेयर                       <br />झालावाड़    1,100    750-850 हैक्टेयर   </p>
<p>जलस्रोतों की जमीन पर अवैध पैटा काश्त के कारण न केवल जलभराव और बाढ़ जैसी समस्या बढ़ रही है, बल्कि आने वाले समय में पीने के पानी की किल्लत और सिंचाई संकट भी गहरा सकता है। अब इसे रोकने के लिए तारबंदी और सीमांकन जरूरी है।<br /><strong>- राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>तालाबों के कैचमेंट एरिया पर खेती होने से जलभराव रुक जाता है। पहले जहां पानी महीनों रहता था, अब कुछ ही दिनों में सूख जाता है। कुछ लोग थोड़े फायदे के लिए आने वाली पीढ़ियों के जलस्रोत नष्ट कर रहे हैं। प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- रघुवीर सिंह, पूर्व उपसरपंच</strong></p>
<p>जहां भी जलस्रोतों की जमीन पर पैटा काश्त करने की शिकायत मिलती है तो वहां पर टीम भेजकर सीमांकन करवाया जाता है। मौके पर अवैध कब्जा काश्त मिलने पर उसे हटाने की कार्रवाई की जाती है। सुरक्षा के लिए तारबंदी सहित अन्य उपाय करने का मामला सरकार के स्तर का है। <strong> - जुगल कुमार, नायब तहसीलदार</strong></p>
<p>विभाग के अधीन जलस्रोतों पर अवैध कब्जा काश्त को रोकने के लिए नियमित रूप से निगरानी की जाती है। यदि कहीं से कोई शिकायत मिलती है तो इस सम्बंध में कार्रवाई भी करते हैं। वहीं किसानों और ग्रामीणों से समझाइश भी की जाती है।<br /><strong>- संजय कुमार, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग</strong></p>
<p>आलनिया तालाब पक्षियों के लिए बेतरीन वैटलेंड है। लेकिन, पेटाकाश्त करने वालों ने अतिक्रमण कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग व सिंचाई विभाग को इनके खिलाफ कार्रवाई कर गश्त बढ़ानी चाहिए।  ताकि, दोबारा पेटाकश्त न हो सके। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 17:24:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया खोज रहा मुकुंदरा में बीमारियां : टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट में मिलेगी मदद, बीमारियों व इंफेक्शन से बचाना उद्देश्य</title>
                                    <description><![CDATA[गत वर्षों में लगातार बाघों की मौत के बाद उठाया कदम। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wild-life-institute-of-india-is-looking-for-diseases-in-mukundra/article-126650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ से टाइगर-टाइग्रेस लाने से पहले वन विभाग एमएचटीआर में डिजीज सर्विलांस सर्वे करवा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को संरक्षित व सुरक्षित करने के लिए सर्वे शुरू किया है। ताकि, जंगल और आसपास के इलाकों के जानवरों में कोई बीमारी है तो उसका पता लग सके। यह डिजीज सर्विलांस सर्वे को दरा रेंज में बने 82 वर्ग किमी के घने जंगल में किया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच अचानक बाघ व बाघिनों की मौत के मामले सामने आए थे। जिसमें बीमारियों का भी अंदेशा जताया गया। ऐसे में वन विभाग द्वारा बाहरी प्रदेशों से बाघ लाने से पहले यह सर्वे करवाया जा रहा है। </p>
<p><strong>वाइल्ड एनीमल को बीमारियों व इंफेक्शन से बचाना उद्देश्य</strong><br />मुकुंदरा के वन्यजीव चिकित्सक तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने कहा कि रिजर्व के आसपास बसे गांवों में पालतू पशु चराई के लिए जंगल में आ जाते हैं, ऐसे में उनमें यदि कोई बीमारी हो और वह जंगल में किसी वाइल्ड एनिमल का शिकार हो जाता है तो उसे वह बीमारी लग सकती है। ऐसी संभावनाओं को देखते हुए यह सर्वे किया जा रहा है, ताकि पिकोशन रखा जा सके।  </p>
<p><strong>टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट में मिलेगी मदद</strong><br />संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि यह सर्वे गत वर्ष से शुरू हुआ था। पहले फेज के सैंपल एकत्रित हुए हैं, जिनका विशलेषण डब्ल्यूएआई द्वारा किया जा रहा है।  फिलहाल, हमें रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन इसकी रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व मैनेजमेंट में काफी मदद मिलेगी।  </p>
<p><strong>प्रथम फेज के सैंपल कलेक्ट, विशलेषण जारी </strong><br />उन्होंने बताया कि सर्वें में यह भी देखा जाता है कि पालतू पशु से फैलने वाली बीमारियों के संबंध में भी जानकारी ली जाती है। जिसका विशलेषण कर प्रीवेंटली डिसीजन लिए जा सके। इस रिपोर्ट के आधार पर टाइगर रिजर्व में बीमारियों से बाघों को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, उनकी भी जानकारी मिल जाएगी। अभी पहले फेज में सर्वे सैंपल हो गए हैं, जिनका विशलेषण किया जा रहा है। रिजर्व मैनेजमेंट में यह काफी मददगार हो सकता है। अगर पता चलता है की मवेशियों में कोई बीमारी है या फिर कोई उन बीमारियों को कैसे रोका जा सकता है? उसको लेकर एक पूरी एसओपी भी बनाई जा सकती है।</p>
<p><strong>प्रे-बेस व डोमेस्टिक एनिमल के इंटरेक्शन से बीमारियों का खतरा </strong><br />सर्वे के दौरान रिजर्व के शाकाहारी वन्यजीवों के स्केट के नमूने लिए जाते हैं। इसके अलावा रिजर्व के आसपास बसे गांवों के पालतु पशु भी रिजर्व क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। ऐसे में डिजीज सर्विलांस सर्वे में उन पर भी स्टडी होती है।  ज्यादातर शाकाहारी जानवरों के ही नमूने लिए जाते हैं। क्योंकि, यह जंगल में प्रे बेस के साथ विचरण करते हैं और घास भी खाते हैं। ऐसे में हार्बिवोर्स और डोमेस्टिक एनिमल का इंटरेक्शन होता है।  इससे बीमारियां भी इधर से उधर चले जाने का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>वर्तमान में चार टाइगर व एक शावक रिजर्व में </strong><br />मुकुंदरा में वर्तमान में चार टाइगर हैं। जिसमें एक बाघ व तीन बाघिन हैं। वहीं, एक शावक है।  बाघ एमटी-5 को साल 2022 में रणथंभौर से यहां शिफ्ट किया गया। इसके बाद मई 2023 में बाघिन एमटी-4 की मौत हो गई थी। वह गर्भवती थी  उसके गर्भ से तीन बच्चे थे, जो मृत मिले थे। इसके बाद एमटी 6 बाघिन को रणथम्भौर से यहां शिफ्ट किया गया। वहीं, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाइल्डिंग के लिए 11 दिसम्बर 2024 को फीमेल शावक को मुकुंदरा रिलीज किया गया,जो अभी एनक्लोजर में है। इसके बाद इसी वर्ष में रणथम्भौर से एक और बाघिन कनकटी को मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया।    </p>
<p>मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में डिजीज सर्विलांस सर्वे करवाया जा रहा है। यह सर्वे गत वर्ष से शुरू हुआ है। प्रथम फेज के सैंपल एकत्रित हो गए हैं, जिनका विशलेषण किया जा रहा है।  फिलहाल, हमें रिपोर्ट नहीं मिली है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व मैनेजमेंट में काफी मदद मिलेगी। हालांकि, हमने डब्ल्यूएआई को रिपोर्ट देने को पत्र भी लिखा है। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 15:56:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---instructions-to-survey-the-damage-caused-to-kharif-crops/article-122366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण इस फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करेगी। जिला कलक्टर ने सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर सात दिन में प्रशासन को सौंपने के निर्देश जारी किए है। कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।  </p>
<p><strong>निर्देश मिलते ही खेतों में पहुंची टीमें</strong><br />जिला कलक्टर ने शुक्रवार से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में राजस्व विभाग से पटवारी, कृषि विभाग से पर्यवेक्षक और बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। शुक्रवार को बारिश नहीं होने के कारण तीनों विभागों की संयुक्त टीमें खेतों में पहुंची और फसलों में नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया गया। जिले के सुल्तानपुर और इटावा क्षेत्र के खेतों में जलभराव होने से फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा हैं। किसानों के अनुसार लगातार बारिश के कारण यहां पर खेत तालाब में बन गए हैँ। पानी की निकासी नहीं हो पाई है। इस कारण बीज गल चुके हैं। वहीं अब सोयाबीन और उड़द की बुवाई का समय भी निकल चुका है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में अधिकांश खेत खाली ही रहेंगे। </p>
<p><strong>कृषि विभाग ने हाड़ौती में माना 30 फीसदी खराबा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस साल हाड़ौती क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य 12 लाख हैक्टेयर से अधिक निर्धारित किया गया था। इस बार जून माह में ही मानसून का आगाज और फिर लगातार बारिश होने से बुवाई का रकबा 10 लाख हैक्टेयर रह गया यानी लगभग दो लाख हैक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई। इसके बाद भी मूसलाधार बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। ऐसे में कृषि विभाग ने फसलों में नुकसान में प्रारम्भिक सर्वे किया था, जिसमें हाड़ौती क्षेत्र में फसलों में 30 फीसदी खराबा होना माना गया है। बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल को पहुंचा है।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई और बीज अंकुरित नहीं हो पाए। इस कारण किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />जुलाई माह में लगातार बारिश होने से फसलों में नुकसान होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण अधिक नुकसान सोयाबीन को पहुंचा है। इस बार कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई हैं। </p>
<p>तेज बारिश के कारण खेतों में पानी का भराव होने से सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बड़ी मुश्किल से बीज लेकर खेतों में बुवाई की थी। अब तो सब कुछ बर्बाद हो चुका है। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने में जुट गई है। <br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:24:41 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात शुरू, अब हो रहा जर्जर भवनों का सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के सीजन में पुराने व जर्जर भवनों को नुकसान होने व धराशाही होने का खतरा बना रहता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rains-have-started--now-the-survey-of-dilapidated-buildings-is-being-done/article-119208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से बरसात से पहले होने वाले काम को बरसात शुरु होने के बाद कराया जा रहा है। हालत यह है कि बरसात शुरु होने के बाद भी अभी तक वह काम पूरा नहीं हुआ है। यह मामला है शहर में जर्जर भवनों के सर्वे का। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने भवन हैं जो जर्जर हालत में है। जिनमें बरसात के समय में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हर साल 15 जून के बाद बरसात शुरु होने का समय रहता है। हालांकि अधिकतर समय बरसात देर से ही शुरु होती है। लेकिन इस बार समय से एक सप्ताह पहले ही मानसून ने एंट्री की वह भी धमाकेदार। बरसात के सीजन में जहां पुराने व जर्जर भवनों को नुकसान होने व धराशाही होने का खतरा बना रहता है। जिनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्हें रोकने के लिए नगर निगम की ओर से उनका सर्वे करवाकर ऐसे भवनों को खाली करवाने का काम किया जाता है। जिससे बरसात के समय में उनके कारण कोई हादसा न हो सके। हालांकि यह काम नगर निगम को बरसात शुरु होने से पहले करवाना चाहिए था। जबकि हालत यह है कि निगम की ओर से यह काम बरसात शुरु होने के बाद किया जा रहा है। वह भी अभी तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कभी भी ये हादसों का कारण बन सकते हैं। </p>
<p><strong>जर्जर भवनों की संख्या ही पता नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से जर्जर भवनों के सर्वे का काम पूरा नहीं होने से अभी तक अधिकारियों को इसकी जानकारी ही नहीं है कि उनके क्षेत्र में कितने जर्जर भवन हैं। जिनमें बरसात के दौरान कभी भी हादसा हो सकता है। जर्जर भवनों में मकान से लेकर सरकारी स्कूल, कार्यालय व अन्य इमारतें भी है। हालांकि नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में अनंत चतुर्दशी के दौरान करवाए गए जर्जर भवनों के सर्वे के लिए ऐसे भवनों पर क्रॉस के निशान लगाए हुए हैं। पुराने शहर के झाला हाउस, कैथूनीपोल, लाल बुर्ज समेत कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अधिकतर जर्जर भवन हैं। इसी तरह से नांता व सरायकायस्थान समेत कई जगह पर पुराने भवनों में संचालित सरकारी स्कूलों के भवन भी जर्जर हो रहे हैं। </p>
<p><strong>आयुक्त ने दी अधिकारियों को जिम्मेदारी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने हाल ही में इस संबंध में आदेश जारी किया है। जिसमें बरसात के दौरान जर्जर भवनों के सर्वे से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू करने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार उपायुक्त व अधीक्षण अभियंता महेश गोयल, अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी व संजय विजय को अधीनस्थ कनिष्ठ अभियंताओं के क्षेत्राधिकार में आने वाले जर्जर भवनों का सर्वे कर निरीक्षण करवाने को कहा गया है। साथ ही जर्जर भवनों को खाली भी करवाया जाना है। इसके अलावा अधिक बरसात व बाढ़ के हालात बनने पर पुनर्वास के लिए सामुदायिक भवनों की व्यवस्था करने, बाढ़ व आपदा की स्थिति में नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था संभालने, पानी की निकासी के लिए जेसीबी व अन्य संसाधनों को उपलब्ध करवाना, बिजली और आश्रय स्थलों की भी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को दी गई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुक्त के आदेश से दक्षिण निगम क्षेत्र में पुराने व जर्जर भवनों के सर्वे का काम किया जा रहा है। संबंधित कनिष्ठ अभियंताओं से यह काम कराया जा रहा है। अभी तक पूरी कम्पाइल रिपोर्ट नहीं आई है। जिससे अभी जर्जर भवनों की पुख्ता जानकारी नहीं दी सकती। <br /><strong>- महेश गोयल, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 16:30:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिलाओं को सशक्त बना रही कांग्रेस : नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे भी बिहार की स्थिति से अनजान, अलका लांबा ने कहा- हर महीने 400 करोड़ सैनिटरी पैड की जरूरत  </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस की महिला अध्यक्ष अलका लांबा ने बुधवार को कहा कि उनकी देश में महिलाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही है, जबकि बिहार की डबल इंजन सरकार सिर्फ खोखले वादे कर रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-national-family-health-survey-which-is-strengthening-women-also/article-117811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(5)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस की महिला अध्यक्ष अलका लांबा ने बुधवार को कहा कि उनकी देश में महिलाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही है, जबकि बिहार की डबल इंजन सरकार सिर्फ खोखले वादे कर रही है। अलका लांबा ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “ भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान ‘नारी न्याय’ पर बात हुई, जिसमें आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक न्याय पर चर्चा हुई। जब हम आर्थिक, राजनीतिक न्याय की बात करते हैं, तब बिहार की हालत सामने आ जाती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे भी बिहार की इस स्थिति से अनजान है। भारत सरकार द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं की गई है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि “आज भारत में 40 करोड़ वह महिलाएं हैं जिनकी उम्र 11 वर्ष से 49 वर्ष के बीच है। यह सभी पीरियड के दौरान पैड उपयोग करती हैं। ऐसे में हमें हर महीने 400 करोड़ सैनिटरी पैड की जरूरत है, लेकिन बिहार में 80 प्रतिशत बच्चियों को पैड नहीं मिलता है। बिहार के हर स्कूल में सेनेटरी मशीन लगनी थी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 40 हजार स्कूलों में से मात्र 350 स्कूलों में सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद बिहार सरकाक सभी स्कूलों में सैनिटरी पैड की व्यवस्था नहीं कर पाई है। ”</p>
<p>लांबा ने कहा कि “ जो काम बिहार सरकार को करना था, वह नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय महिला कांग्रेस ने ‘प्रियदर्शिनी उड़ान योजना’ के तहत किया है। महिला कांग्रेस ने शुरुआती तौर पर देश में 3 जगह- बेगूसराय, वैशाली और दिल्ली में सेनेटरी वेंडिंग मशीन लगाई। इन मशीनों के जरिए 50 महिलाओं को रोजगार दिया है। हम राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर कल बिहार में 25 हजार महिलाओं को सेनेटरी पैड वितरित करेंगे।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 18:03:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वन विभाग ने सरिस्का टाईगर रिजर्व में किया रैप्टर सर्वेक्षण कार्य, बफर जोन सहित विभिन्न रेंज का किया आंकलन</title>
                                    <description><![CDATA[ईगल प्रजातियों में शॉर्ट टोड स्नेक ईगल शामिल है। यहां देखे गए अन्य रैप्टर्स में रॉक ईगल आउल, इंडियन स्कोप्स आउल, यूरेशियन केस्ट्रेल, व्हाइट. आइड बज़र्ड, यूरेशियन स्पैरोहॉक और वेस्टर्न मार्श हैरियर शामिल थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/forest-department-assessed-various-range-including-rapter-survey-work-buffer/article-106234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वन विभाग ने विश्व वन्यजीव कोष के सहयोग से सरिस्का टाईगर रिजर्व में 5 दिवसीय 26 फरवरी से 2 मार्च तक रैप्टर सर्वेक्षण कार्य किया गया। इसका उद्देश्य सरिस्का, टहला, अकबरपुर, तालवृक्ष और बफर जोन सहित रिजर्व की विभिन्न रेंज में रैप्टर की विविधता और आवास का आंकलन करना था।</p>
<p>सर्वे के दौरान विशेष रूप से उन्होंने रेड हैडेड वल्चर, इडियन वल्चर, इजिप्टीयन वल्चर जैसे विश्व स्तर पर खतरे में पड़े गिद्धों को देखा। दर्ज की गई प्रमुख ईगल प्रजातियों में शॉर्ट टोड स्नेक ईगल शामिल है। यहां देखे गए अन्य रैप्टर्स में रॉक ईगल आउल, इंडियन स्कोप्स आउल, यूरेशियन केस्ट्रेल, व्हाइट. आइड बज़र्ड, यूरेशियन स्पैरोहॉक और वेस्टर्न मार्श हैरियर शामिल थे।</p>
<p>उप वन संरक्षक बाघ परियोजना सरिस्का ने बताया कि यह सर्वेक्षण विविध रैप्टर प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में सरिस्का टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है। ये निष्कर्ष सरिस्का टाइगर रिजर्व में लक्षित संरक्षण रणनीतियों में योगदान देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:19:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शुरू होने से पहले हारी भीख मांगने के खिलाफ लड़ाई, कोटा में भिक्षावृत्ति में लिप्त 265 लोग हैं चिन्हित </title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर की तर्ज पर भीख मांगने वालों के खिलाफ लड़ाई तो कोटा शहर ने भी शुरू की लेकिन मैदान में ताल ठोकने से पहले ही कोटा बाहर हो गया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-fight-against-begging-lost-before-it-could-start/article-104809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंदौर की तर्ज पर भीख मांगने वालों के खिलाफ लड़ाई तो कोटा शहर ने भी शुरू की लेकिन मैदान में ताल ठोकने से पहले ही कोटा बाहर हो गया। हम बात कर रहे हैं भिक्षावृत्ति मुक्त कोटा अभियान की। राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने आदेश जारी किया था। जिस पर काम तो शुरु हुआ लेकिन वह काम पहले चरण से आगे ही नहीं बढ़ सका। कोटा में भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का सर्वे करने का काम सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता  विभाग को दिया गया था। विभाग की ओर से सर्वे भी कराया गया। जिसमें 265 लोगों को ही चिन्हित किया गया। उसके बाद यह अभियान आगे नहीं बढ़ सका। </p>
<p><strong>इंदौर में तीन चरणों में किया गया काम</strong><br />इंदौर को भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने के लिए तीन चरणों में काम किया गया। परामर्श, बचाव व प्रवर्तन के तहत वहां भिक्षावृत्ति में लिप्त 8500 लोगों का सर्वे किया गया।  फरवरी 2024 में शुरु किए गए इस अभियान के तहत  परामर्श, बचाव व पुनर्वास तक  का सफर दिसम्बर 2024 तक चला। जिसमें कुल 470 को  पुनर्वास तक पहुंचाया गया। उसी तरह से कोटा शहर में भी चिन्हित भिखारियों का बचाव व पुनर्वास किया जा सकता है। लेकिन यहां सिर्फ एक विभाग द्वारा भिखारियों का सर्वे कर इतिश्री कर ली गई। जबकि सर्वे के बाद नगर निगम को  अगला काम करना था। ऐसे चिन्हित भिखारियों को भीख मांगने से रोकने के लिए उनके खाने और रहने की व्यवस्था रैन बसेरों में की जानी थी। जबकि ऐसा अभी तक भी नहीं किया गया है। </p>
<p><strong>कुछ फ्रोफेशन की तरह मांग रहे भीख</strong><br />भीख मांगने वाले सभी भिखारी हों ऐसा नहीं है। शहर में विशेष उत्सव या पर्व के समय बाहर से लोग भीख मांगने आते हैं। इनमें मध्य प्रदेश के लोग ज्यादा होते हैं। कुछ दिन कमाई कर यह लौट जाते हैं। इसी तरह से कुछ लोग वार के हिसाब से भगवान की फोटो लिए चलते हैं और भीख मांग कर अपना धंधा करते हैं। यह लोग मंगलवार को बजरंग बली की फोटो लिए घूमते हैं तो शनिवार को तेल से भरा कमंडल लेकर भीख मांगने निकल पड़ते हैं। एक एनजीओ के अनुसार कुछ भिखारी ऐसे भी हैं जिनके बैंक खातों में अच्छे पैसे हैं। फिर भी पूरे परिवार सहित झुग्गियों में रहते हैं। </p>
<p><strong>धार्मिक स्थलों पर अधिक </strong><br />शहर के प्रमुख व बड़े मंदिर खड़े गणेशजी, गोदावरी धाम, रंगबाड़ी बालाजी, शनि मंदिर, टिपटा स्थित सांई बाबा मंदिर, नयापुरा स्थित बालाजी मंदिर, स्टेशन का राम मंदिर समेत अन्य मंदिरों में इनकी भीड़ देखी जा सकती है। इसके अलावा किशोर सागर तालाब के किनारे  व झालावाड़ रोड  और गीता भवन समेत कई अन्य स्थानों पर भी इनकी भीड़ देखी जा सकती है। साथ ही कचौरी की दुकानों पर भी इन्हें भीख मांगते हुए दिनभर देखा जा सकता है। </p>
<p><strong>दो हजार भिखारियों की निकाली थी रैली</strong><br />कर्मयोगी सेवा संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया कि कोटा में भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों की संख्या हजारों में है। वर्ष 2003 में ही वे करीब दो हजार भिखारियों की रैली कोटा में निकाल चुके हैं। उन्होंने हर क्षेत्र में सर्वे कर रखा है। तत्कालीन जिला कलक्टर ओ.पी. बुनकर के समय में उनकी संस्था को भिखारियों के उन्मूलन की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने काम भी किया लेकिन प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने से वह काम आगे नहीं बढ़ सका। </p>
<p><strong>मंडाना में बनाया था स्कूल</strong><br />जानकारों के अनुसार कोटा के मंडाना में प्रशासन द्वारा लाखों रुपए की लागत से स्कूल का भवन बनाया था। यह  स्कूल केवल भिक्षावृत्ति में लिप्त परिवारों के बच्चों के लिए था। शुरुआत में तो इस स्कूल में भिक्षावृत्ति में लिप्त परिवारों के बच्चे पढ़े। लेकिन वर्तमान में स्कूल का नाम तो पुराना ही चल रहा है।  अब यह कक्षा 12 वें तक क्रमोन्नत हो गया है। इसमें भिक्षावृत्ति परिवारों के नहीं सामान्य परिवारों के बच्चे पढ़ रहे हैं। यह स्कूल कक्षा 6 से संचालित हो रहा है। </p>
<p><strong>2012 में बना था एक्ट</strong><br />राजस्थान में 2012 में भिखारी पुनर्वास अधिनियम बनाया गया था जिसका उद्देश्य भिखावृति को खत्म करना था। इसके लिए ऐसे लोगों का सर्वेकर उन्हें पुनर्वास केन्द्र में रखने का था। सभी जिलों में इसके लिए कमेटी भी बनी लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ पाया।  </p>
<p><strong>कोटा में सिर्फ सर्वे हुआ, जयपुर में पुनर्वास केन्द्र</strong><br />कोटा में भिखारियों के सर्वे के निर्देश थे। जिसके तहत विभाग ने पूर्व में सर्वे किया गया। जिसमें 265 को चिन्हित किया गया। लेकिन उसके बाद आगे क्या करना है उस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं मिले। वहीं अभी जयपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य स्तरीय पुनर्वास केन्द्र संचालित हो रहा है। जिसमें वर्तमान में 75 भिखारी रह रहे हैं। <br /><strong>- सविता कृष्णैया, संयुक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 14:59:35 +0530</pubDate>
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