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                <title>municipal corporation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का :  नगर निगम ने 37 भवन मालिकों व विज्ञापन दाताओं को दिए नोटिस, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कई जगह से लोगों ने खुद ही हटाए होर्डिग्स व वॉलड्रॉप। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--municipal-corporation-issues-notices-to-37-building-owners-and-advertisers/article-153221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में निजी भवनों की छतों व दीवारों पर लगे अवैध होर्डिंग्स व वॉल ड्रॉप के मामले में नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से शुक्रवार को 37 भवन मालिकों व विज्ञापन दाताओं को नोटिस जारी किए गए। वहीं कई जगह पर लोगों ने खुद ही वॉल ड्रॉप हटा लिए।<br />शहर में पुराने शहर से लेकर नए शहर के पॉश इलाकों तक में और झालावाड़ रोड से लेकर बूंदी रोड तक बड़ी संख्या में निजी भवनों व प्रतिष्ठानों की छतों पर अवैध रूप से होर्डिग्स लगे हुए हैं। साथ ही कई भवनों व दुकानों की दीवारों पर भारी भरकम वॉल ड्रॉप लगाए हुए हैं। जिससे मौसम में बदलाव होने पर आंधी तूफान व बरसात के समय में तेज हवा से ये उड़कर सड़क पर गिर रहे हैं या गिरने का खतरा बना हुआ है। जिससे राह चलते लोगों के साथ कभी भी हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p>इसे देखते हुए नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के निर्देश पर नगर निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा जहां भी इस तरह के होर्डिग्स व वॉलड्रॉप लगे हुए मिले उन सभी को नोटिस जारी किए गए। विशेष रूप से एरोड्राम चौराहे से अनंतपुरा तक कार्रवाई करते हुए 37 लोगों को नोटिस जारी किए गए।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />शहर में निजी भवनों की छतों पर अवैध होडिंग्स व वॉल ड्रॉप लगाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 7 मई को पेज 6 पर: छतों पर लगे अवैध होडिंग्स व वॉल ड्रॉप से दुर्घटनाओं का खतरा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें हाल ही में बदले मौसम से स्टेशन क्षेत्र में गिरे एक होर्डिग्स को लेकर शहर में इस तरह के कई जगह पर होने का मामला प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होते ही नगर निगम प्रशासन हरकत में आया।आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि जिन भी जगह पर इस तरह से अवैध होडिंग्स व वॉलड्रॉप लगे हुए हैं। वहां कार्रवाई करने के लिए संबंधित उपायुक्तों को निर्देशित किया गया है।</p>
<p>वहीं उपायुक्त राजस्व धीरज सोनी के मार्गदर्शन में निगम के फायर अनुभाग की टीम हरकत में आई। टीम ने शुक्रवार को एक ही दिन में सुबह से शाम तक एरोड्राम चौराहे से झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा तक 37 जनों को नोटिस जारी किए। जिनमें से अधिकतर को तो नोटिस थमाए। वहीं कई जगह पर दुकान व मकान बंद होने पर वहां नोटिस चस्पा भी किए गए हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार नोटिस के डर से कई लोगों ने तो खुद ही होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप तुरंत हटा दिए।</p>
<p><strong>आम सूचना भी की प्रकाशित</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार नगर निगम की ओर से इस संबंध में आम सूचना भी जारी की गई है। जिसमें सभी को अवगत कराया गया कि निगम की ओर से भवनों की छतों पर विज्ञापन होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप लगाना अवैध व प्रतिबंधित किया हुआ है। साथ ही सभी को चेताया है कि यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो वे स्वयं उन्हें हटा लें वरना निगम के स्तर पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:24:50 +0530</pubDate>
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                <title>फिर पुराना राग, हादसे के बाद चेता अनुभाग</title>
                                    <description><![CDATA[आज से होगी मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में फायर सुरक्षा की जांच।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-same-old-story--department-wakes-up-only-after-a-tragedy/article-152325"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। झालावाड़ रोड स्थित सिटी मॉल में एक दिन पहले हुई अग्नि दुर्घटना से सबक लेते हुए एक बार फिर हादसे के बाद निगम का फायर अनुभाग चेता है। इस हादसे के बाद अब शहर के सभी मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में फायर सुरक्षा की जांच की जाएगी।विज्ञान नगर थाना क्षेत्र स्थित सिटी मॉल के एक स्टोर में बुधवार को सुबह अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग इतनी अधिक भीषण थी कि उससे पूरा मॉल आग व धुए़ं की चपेट में आ गया था। हालांकि गनीमत रही कि मॉल में स्टोर के अलावा अन्य दुकानों तक आग नहीं पहुंची लेकिन धुएं व आग बुझाने के दौरान दमकलों के पानी से मॉल में गिरी फॉल्स सीलिंग, आग बुझाने व धुआं निकालने के लिए तोड़े गए कांच से मॉल में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। नतीजा कई दिन तक मॉल बंद रहेगा। आमजन को वहां प्रवेश नहीं मिलेगा और दुकानदार अपनी दुकानों से ग्राहकी नहीं कर सकेंगे।हालत यह है कि इस हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग चेता और सभी मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में फायर उरकरणों, सिस्टम व आग से सुरक्षा की जांच व सर्वे किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो टीमों का किया गठन</strong><br />हादसे के बाद मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में आग से सुरक्षा की जांच व सर्वे के लिए उपायुक्त फायर राकेश व्यास ने गुरुवार को फायर अनुभाग की दो टीमों का गठन किया है। निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के निर्देश पर टीम का गठन किया गया है।</p>
<p><strong>ये हैं टीम में शामिल</strong><br />उपायुक्त फायर राकेश व्यास ने बताया कि एक टीम में अग्नि शमन अधिकारी मोहम्मद अजहर खान को प्रभारी बनाया गया है। इनके साथ 6 फायरमैन को लगाया गया है। वहीं दूसरी टीम में सहायक अग् िनशमन अधिकारी सीता चौबदार को प्रभारी बनाया गया है। इनके साथ 5 फायरमैन को लगाया गया है।</p>
<p><strong>चार दिन में देंगे रिपोर्ट</strong><br />उपायुक्त फायर व्यास ने बताया कि दोनों टीमें अपने-अपने जोन में मॉल, शॉपिंग कॉम्पलेक्स व मरकेंटायल भवनों का आग से सुरक्षा की दृष्टि से सर्वे व निरीक्षण करेंगी। इसके बाद 4 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। जिसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। सर्वे व निरीक्षण का काम शुक्रवार से शुरु होगा।</p>
<p><strong>पहले भी हादसों के बाद ही चेतता रहा है प्रशासन</strong><br />यह पहला मौका नहीं है जब आग लगने के बाद निगम का फायर अनुभाग चेता है और सभी मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में आग से सुरक्षा की जांच की जाएगी। इससे पहले भी शहर या अन्य जगहों पर जिस भी तरह के हादसे हुए हैं। उसी तरह के मामलों की जांच, सर्वे व नोटिस के साथ ही कार्रवाई की जाती रही है।<br />गत दिनों इंद्र विहार में नॉनवेज रेस्टोरेंट के धराशाही होने के बाद निगम व केडीए प्रशासन हरकत में आया था और सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करते हुए नोटिस दिए गए और सीजिंग की गई। हालांकि उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p><strong>लाइब्रेरियों व हॉस्टलों की हुई थी जांच</strong><br />इसी तरह से गत दिनों एक अंडरग्राउंड लायब्रेरी में पानी भरने से कई अभ्यर्थियों की मौत होने के बाद कोटा में निगम प्रशासन हरकत में आया था। यहां सभी अंडर ग्राउंड लायब्रेरियों की कुछ दिन तक जांच की गई। जांच में अधिकतर के अवैध पाए जाने पर उन्हें बंद भी कराया गया। लेकिन उसके बाद फिर से सभी जगह पर ये संचालित हो रही है।वहीं नदी पार कुन्हाड़ी स्थित चंचल विहार के एक हॉस्टल में आग लगने पर निगम के फायर अनुभाग की ओर से सभी हॉस्टलों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। अधिकतर में कमियां मिलने पर किसी को नोटिस दिया गया तो किसी को सीज किया गया। लेकिन उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बनी हुई है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मॉल के स्टोर में आग लगने के बाद शहर के सभी मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स में आग से सुरक्षा के उपायों व संसाधनों का सर्वे व निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए आयुक्त के निर्देश पर दो टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें शुक्रवार से अपना काम करेंगी। जिस भी तरह की रिपोर्ट आएगी उसके अनुसार संबंधित के खिलाफ ठोस व प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त फायर नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 14:14:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नगर निगम कैथून में भी बनाएगा गौशाला, आयुक्त ने अधिकारियों के साथ देखी जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-to-establish-a-gaushala-in-kathun-as-well/article-152080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से कैथून में भी गौशाला बनाने की योजना है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त ने अधिकारियों के साथ कई जगह पर जमीन देखी है।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने सोमवार को कैथून क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका और कोटा विकास प्राधिकरण की कई जमीनों को देखा। जहां गौशाला बनाई जा सकती है।</p>
<p>आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई है। ऐसे में यहां भी बड़ी संख्या में निराश्रित मवेशी हैं। उन्हें यहां से पकड़कर बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में ले जाना काफी भारी पड़ रहा है। कैथून से गौशाला की दूरी करीब पचास किमी. है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कैथून में ही गौशाला की संभावना तलाशने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देशों की पालना में ही यहां कई जगह पर जमीन देखी है।</p>
<p><strong>एक हजार गायों के लिए बनेगी गौशाला</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि कैथून में करीब एक हजार गायों को रखने के लिए गौशाला बनाने की योजना है। जिससे इस क्षेत्र से निराक्षित गौवंश को पकड़कर यहीं रखा जा सकेगा। उन्हें बंधा गौशाला नहीं ले जाया जा सकेगा। इसके लिए उतनी बड़ी जमीन की तलाश की जा रही है। कुछ जमीन देखी हैं उन पर विचार कर निर्णय किया जाएगा।</p>
<p><strong>बंधा गौशाला में होंगे एक करोड़ के काम</strong><br />इधर नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में करीब एक करोड़ रुपए के कार्य करवाए जाएंगे।आयुक्त मेहरा ने बताया कि वर्तमान में करीब 28 लाख रुपए के टेंडर तो हो चुके हैं। 80 लाख रुपए और स्वीकृत करवाए जाएंगे। जिनसे यहां शेड, पानी की टंकी, प्रशासनिक भवन, टॉयलेट्स , चार दीवारी निर्माण समेत अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।</p>
<p><strong>डेढ़ हजार की क्षमता होगी विस्तारित गौशाला की</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि निगम की बंधा गौशाला में वर्तमान में करीब दो हजार गौवंश हैं। वहीं इसके पास ही करीब 25 बीघा जमीन केडीए से प्राप्त हुई है। जिसका विस्तार किया जा रहा है। इस विस्तारित गौशाला में भी करीब डेढ़ हजार गौवंश को रखा जाएगा। इस तरह से बंधा गौशाला की क्षमता भी बढ़ जाएगा।</p>
<p><strong>गर्मी से बचाव के इंतजाम किए जा रहे</strong><br />शहर में पड़ रही भीषण गर्मी का असर जहां इंसानों पर हो रहा है। वहीं जानवर भी इससे अधूते नहीं है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला और किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में गौवंश को गर्मी से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कायन हाउस में ग्रीन नेट लगाई गई है। जबकि गौशाला में पुरानी नेट तो लगी हुई है। नई ग्रीन नेट भी लगाई जा रही है। साथ ही गौशाला में अलग-अलग बाड़ों के हिसाब से 20से अधिक पंखे व कूलर भी लगाए गए हैं।</p>
<p> शहर की तुलना में बंधा की तरफ तापमान अधिक रहता है। ऐसे में जहां गौवंश को गर्मी से राहत के इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं ट्रेक्टर से फव्वारा पद्धति से गौवंश पर व बाड़ों में पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।<br /><strong>-जितेन्द्र सिंह ,पूर्व अध्यक्ष गौशाला समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:00:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : लौटेगा लक्खी बुर्ज का पुराना वैभव, नगर निगम करवाएगा सौंदर्यीकरण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं और सुविधाएं की जाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--lakhi-burj%E2%80%99s-former-glory-to-return--municipal-corporation-to-undertake-beautification-work/article-151935"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---lautega-lakhi-burj’-ka-purana-vaibhav,-nagar-nigam-karavaega-saundaryekaran-kary...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में शामिल लक्खी बुर्ज का पुराना वैभव पुन: नजर आएगा। नगर निगम लक्खी बुर्ज के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना बना रहा है। इसको लेकर आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने सोमवार को लक्खी बुर्ज का निरीक्षण भी किया।आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि कोटा के पर्यटक स्थलों में लक्खी बुर्ज की प्रमुखता से गिनती होती है। पूर्व में इसका वैभव बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देश पर अब लक्खी बुर्ज के सौंदर्यीकरण की योजना नए सिरे से तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि लक्खी बुर्ज में नाइट ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए फसाड लाइट्स लगाने के कार्यादेश पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं। लेकिन दोपहर और शाम के समय भी यहां पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं और सुविधाएं की जाएंगी।</p>
<p><strong>कैफेटेरिया भी होगा शुरु</strong><br />लक्खी बुर्ज पर जल्द ही कैफेटेरिया प्रारंभ किया जाएगा। जिससे यहां आने वाले पर्यटक किशोर सागर और आसपास की खूबसूरती को निहारते हुए खाने-पीने का आंनद भी ले सकेंगे। इसके अलावा यहां एक भव्य फ व्वारा और बच्चों के लिए झूले भी लगाए जाएंगे। रात के समय लक्खी बुर्ज पर पर्याप्त रोशनी रहे इसके लिए एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी। लक्खी बुर्ज की मरम्मत और रंगरोगन भी किया जाएगा।</p>
<p><strong>दूरबीन भी बनेगी आकर्षण का केन्द्र</strong><br />काफी वर्षो पहले लक्खी बुर्ज पर आने वाले पर्यटकों के लिए दूरबीन भी बड़ा आकर्षण होती थी। विशेष प्रकार की इस दूरबीन से काफी दूर तक नजारा देखा जा सकता था। सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया में लक्खी बुर्ज पर फि र से दूरबीन लगाने का भी निर्णय लिया गया है। यह दूरबीन पर्यटकों के अनुभव को और अधिक आनंदित बनाएगी। लक्खी बुर्ज में टेलीस्कोप लगाने की भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी। निरीक्षण के दौरान उनके साथ अधिशाषी अभियंता कुलदीप प्रेमी, राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री और स्वास्थ्य अधिकारी मौतीलाल चौधरी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि लक् खी बुर्ज की दुर्दशा का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 27 अप्रैल को पेज दो पर' एक लाख में बना इसलिए नाम रखा लक्खी बुर्ज, 100 फीट ऊंचा साथ ही देखरेख के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रहा लक्खी बुर्ज शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इस पुराने एतिसाहिक पर्यटन स्थल के बारे में बताया गया है। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम आयुक्त स्वयं मौके पर पहुंचे और वहां की स्थिति को देखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि नगर निगम इसका सौन्दर्यीकरण करवाकर इसके पुराने वैभव को लौटाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:29:46 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाल हो रहे पार्क : चोरी हो रहे सामान ; सुरक्षा दीवारों के साथ झूले भी टूटे, मैदान में हो रहे गड्ढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[पार्क हरियाली की जगह गंदगी, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों के जमावड़े का केंद्र बना। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parks-fall-into-disrepair--equipment-stolen--boundary-walls-and-swings-broken--grounds-riddled-with-potholes/article-151434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर क्षेत्र के पार्क बदहाल हो रहे हैं। न केवल झूले बल्कि सुरक्षा दीवारें भी टूट रही हैं। वहीं, पार्क का मैदान भी गड्ढ़ों से उबड़-खाबड़ हो रहा है। जहां खेलते वक्त बच्चों के पैर मुड़ जाने से चोटिल हो रहे हैं। हालात यह हैं कि पार्क में लगे सामान तक चोरी हो गए। जिम्मेदारों की लापरवाही से पार्क अब हरियाली की जगह गंदगी, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों के जमावड़े का केंद्र बन गए हैं। परेशान क्षेत्रवासियों ने सुरक्षा दीवारें बनवाने व पार्क के विकास को लेकर जिला कलक्टर से गुहार लगाई।</p>
<p><strong>रेलिंग काटकर पटकी, कहीं सुरक्षा दीवार तोड़ी</strong></p>
<p>महात्मा गांधी पर्यावरण विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट अमजद खान ने बताया कि पिछले एक साल में पार्कों की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई। कई जगहों पर बाउंड्री वॉल तोड़ दी गई तो कई जगहों पर रेलिंग काटकर पटक दी गई। पार्क खुले मैदान की तरह लावारिस हालत में छोड़ दिए गए हैं। जिससे सरकारी सम्पतियों के चोरी होने का डर बना रहता है।</p>
<p><strong>पार्कों में गंदगी का ढेर, असमाजिक तत्वो का जमावड़ा</strong></p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले पार्कों की देखरेख नगर निगम के अधीन थी, जो अब केडीए के अधीन है। जिम्मेदारों की लापरवाही से चल रहे विकास कार्य भी रुके पड़े हैं। न लेबर आती है और न ही ठेकेदारों का अता-पता है। पार्क पूरी तरह से लावारिस हालत में हैं। जिसकी वजह से पार्कों में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जो शोर-शराबा व गाली-गलौच करते हैं। ऐसे में मॉर्निंग वॉक व इवनिंग वॉक पर आने वाले लोगों द्वारा टोकने पर झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। पार्क में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। सुरक्षा दीवारें टूटने से मवेशी पार्क में घुस जाते हैं। जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>लोहे के डस्टबीन हो गए चोरी</strong></p>
<p>क्षेत्रवासियों का कहना है कि माहत्मा गांधी पार्क-(छोटा) में लगाए गए लोहे के डस्टबीन नशेडी चोरी कर ले गए। वहीं, पार्क में लोहे की जालियां पड़ी हुई हैं, ऐस में उसके चोरी होने का खतरा बना रहता है। शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही पार्क की दशा सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा।</p>
<p><strong>सफाई कर्मचारी हटाए, सफाई व्यवस्था ठप</strong></p>
<p>पार्क समिति के अध्यक्ष मुकेश मेवाड़ा का कहना है कि पार्क केडीए के अधीन आने के बाद से ठेकेदार ने सफाई कर्मचारियों को हटा दिया, जिससे नियमित सफाई बंद हो गई और पार्क कचरे से भर गए हैं। शिकायत करने पर जिम्मेदार अधिकारी भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं, क्षेत्रवासी अनीता ने बताया कि पार्क के सामने घर होने के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से परिवार को काफी दिक्कत होती है। नशे का धुआं घरों तक पहुंचता है और विरोध करने पर गाली-गलौज की जाती है।</p>
<p><strong>खुले पड़े बिजली तार, पैनल टूटे</strong></p>
<p>स्थानीय निवासी रमेशचंद्र नागर ने बताया कि असामाजिक तत्वों ने पार्कों की लाइटें और पैनल तक तोड़ दिए हैं, जिससे पार्क में अंधेरा होने से संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही हैं। पुलिस को शिकायत देने के बावजूद गश्त नहीं बढ़ाई जा रही है। समिति सदस्यों व स्थानीय लोगों ने जिला कलक्टर से बदहाल पार्कों की स्थिति सुधरवाने की मांग की है। छत्रपुरा तालाब व गांधी गृह के पार्कों के हालात बदतर हो रहे हैं। जगह-जगह पार्क की दीवारें टूटी हुई हैं तो कहीं जगहों पर लोहे की जालियां यूं ही पटक रखी है, जबकि जिम्मेदार केडीए अधिकारी को इसे गोदाम में जमा करवाना चाहिए ताकि, सरकारी सम्पति चोरी होने से बच सके। इलाके के 3 वार्डों में करीब 6 से ज्यादा पार्क हैं, जिनमें ठेकेदार द्वारा मात्र 3-4 ही लेबर ही लगा रखी है, जो कभी-कभी आती है। वहीं, ठेकेदार के भी अते पते नहीं है। पार्कों की दशा बिगड़ रही है। संबंधित अधिकारी को कई बार लिखित व मौखिक शिकायत कर चुके हैं, इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही।</p>
<p><strong>-कपिल शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>पार्कों में विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। यदि, कहीं कार्य में कोई कमी है तो मौका स्थिति देखकर दुरुस्त करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>-सतीश तोमर, एईएन केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:56:07 +0530</pubDate>
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                <title>कछुआ चाल से चल रहा सीवरेज के प्रोपर्टी कनेक्शन का काम, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से शहर में सीवरेज लाइन डालने का 90 फसदी काम पूरा ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/property-connection-work-for-sewerage-system-progressing-at-a-snail-s-pace/article-150787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अमृत 2.0 के तहत एक ओर जहां सीवरेज की नई लाइनें डाली जानी हैं वहीं उन लाइनों से घरों को जोड़ते हुए प्रोपर्टी कनेक्शन भी किए जाने हैं। लेकिन हालत यह है कि शहर में 21 हजार 800 घरों में कनेक्शन किए जाने हैं। जिनमें से अभी तक मात्र 9 हजार घरों के ही कनेक्शन हुए हैं।अमृत 2.0 के तहत पांच चरण में काम होने हैं। जिनमें से एक सीवरेज लाइनें डालना, दूसरा उन लाइनों से प्रोपर्टी कनेक्शन करना। तीसरा सीवरेज पम्पिंग स्टेशन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ट्रीटमेंट प्लांट को सोलर सिस्टम से जोडऩा। हालांकि ये सभी काम एक साथ चल रहे हैं। कई काम की गति को फिर भी ठीक है लेकिन संवेदक फर्म द्वारा प्रोपर्टी कनेक्शनकरने का काम धीमी गति से किया जा रहा है।</p>
<p><strong>लाइन डालने का 90 फीसदी काम हुआ</strong><br />नगर निगम की ओर से शहर में सीवरेज लाइन डालने का काम भी किया जाना है। यह लाइनें करीब 262 कि.मी. एरिया में बिछानी है। जिसमें से 250 कि.मी. से अधिक यानि करीब 90 फसदी काम पूरा किया जा चुका है। शेष काम प्रगति पर है।</p>
<p><strong>प्रोपर्टी कनेक्शन हुए कम</strong><br />निगम की ओर से सीवरेज लाइनों से घरों को जोडऩे के लिए कनेक् शन का काम भी किया जाना है। जानकारी के अनुसार निगम को 21 हजार 800 घरों में प्रोपर्टी कनेक् शन करने का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन संवेदक फर्म द्वारा किए गए सर्वे में कई घर ऐसे हैं जहां अभी कोई नहीं रह रहा है। ऐसे घरों व एरिया को छोड़ते हुए करीब 17 हजार से अधिक कनेक् शन होने हैं। उनमें भी 3 हजार से अधिक कनेक् शन ऐसे हैं जिन पर लोगों द्वारा आपत्ती या विरोध करने के कारण नहीं हो पा रहा है। शेष 13 हजार 500 में से अभी तक करीब 9 हजार ही कनेक् शन हुए हैं।</p>
<p><strong>निगम आयुक्त ने काम की गति बढ़ाने को किया था पाबंद</strong><br />नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने गत दिनों अमृत 2.0 के तहत शहर में किए जा रहे विभिन्न कार्यो, धाकडख़ेड़ी स्थित 20 एमएलडी एसटीपी के अपग्रेडेशन कार्य और आरयूआईडीपी से निगम को हस्तांतरित किए गए 40 एमएलडी एसटीपी का निरीक्षण किया था। इस दौरान बारां रोड की विभिन्न कॉलोनियों में चल रहे कार्यों का निरीक्षण भी किया। यहां प्रोपर्टी कनेक्शन की धीमी गति को देखते हुए उन्होंने संवेदक को पाबंद किया था कि काम की गति बढ़ाते हुए प्रतिदिन 40 से 50 प्रोपर्टी कनेक्शन देने के लक्ष्य के साथ काम किया जाए।</p>
<p><strong>अपग्रेडेशन काम समय पर पूरा करने के निर्देश</strong><br />आयुक्त मेहरा ने धाकडखेड़ी में 20 एमएलडी एसटीपी के अपग्रेडेशन कार्य को मानकों के अनुरूप तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए थे।<br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि प्रोपर्टी कनेक् शन की धीमी गति पर संवेदक को इसे बढ़ाने के लिए पाबंद किया हुआ है। हालांकि पूर्व में किए गए निरीक्षण के बाद इनकी संख्या बढ़ी है। वहीं लाइनें बिछाने का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है। धाकडख़ेड़ी में एसटीपी के पास ही सोलर सिस्टम बनाया जाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:27:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - कोटा में जल्द दौड़ेंगी फायर फाइटिंग बाइक्स</title>
                                    <description><![CDATA[फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---firefighting-bikes-to-soon-hit-the-streets-of-kota/article-150466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अग्निशमन व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जल्द ही सडणकों पर फायर फाइटिंग बाइक्स दौड़ती नजर आएंगी। जिससे तंग गलियों में भी तेजी से आग पर काबू पाया जा सकेगा।यह जानकारी नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने दी। अग्निशमन सेवा सुरक्षा सप्ताह के शुभारम्भ पर मंगलवार को आयुक्त मेहरा ने बताया कि अग्निशमन बेड़े को मजबूत करने के लिए संसाधनों में निरंतर वृद्धि की जा रही है। तंग गलियों में त्वरित कार्रवाई के लिए फायर फाइटिंग बाइक्स खरीदी जाएंगी।आयुक्त ने बताया कि वहीं रोशनी की बेहतर व्यवस्था के लिए दो लाइटिंग टावर भी जल्द शामिल किए जाएंगे। फायर बाइक्स व लाइटिंग टावर की स्वीकृति शीघ्र ही डीएलबी से मिलने की संभावना है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इन दोनों को क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुख्यालय को भेजा हुआ है प्रस्ताव</strong><br />कोटा शहर में जहां बड़ी -बड़ी दमकलें और बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाने के लिए विदेशी हाइड्रोलिक लेडर दमकलें तक निगम के फायर अनुभाग में हैं। वहां पुराने शहर की तंग गलियों में लगनी वाली आग को काबू करने में आने वाली परेशाने को दूर करने के लिए फायर बाइक्स नहीं हैं।हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कई साल पहले ही डीएलबी को चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ है। लेकिन अभी तक वहां से फायर बाइक्स नहीं आई है।</p>
<p><strong>दो की आवश्यकता</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि पहले दो नगर निगम होने से चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ था। लेकिन वर्तमान में दो ही फायर बाइक्स की आवश्यकता है। करीब 15 से 17 लाख कीमत की इन फायर बाइक्स की डीएलबी से स्वीकृति मिलते ही उन्हें क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि शहर में हर बार गर्मी के सीजन में तंग गलियों में आग बुझाने में परेशानी को देखते हुए फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है। समाचार पत्र में 10 मार्च को पेज 3 पर इस  बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम अधिकारी व फायर अनुभाग अधिकारियों ने इस संबंध में कार्रवाई को गति दी। जिसके बाद अब फायर बाइक्स क्रय करने की संभावना बनी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
                                    <description><![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शहर को बदरंग करने वालों पर निगम डाल रहा पर्दा</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति के किसी भी तरह का प्रचार प्रसार करने व विज्ञापन फ्लेक्स और पोस्टर-बैनर लगाना गलत । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-steps-in-to-counter-those-defacing-the-city/article-147985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)53.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाने बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं निजी संस्थाएं व लोग शहर को बदरंग करने में जुटे हैं। लोगों की उस करतूत को नगर निगम अपने काम से परदा डाल रहा है। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर चाहे चार दीवारी हो या फोर्ट। फ्लाई ओवर हो या गेंट्री बोर्ड। कहीं भी बिना अनुमति के किसी भी तरह का प्रचार प्रसार करने व विज्ञापन फ्लेक्स और पोस्टर-बैनर लगाना गलत है। उसके बाद भी लोग व निजी संस्थाएं उन्हीं जगहों पर पोस्टर बैनर लगाकर निगम व केडीए कार्रवाई को धता बता रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निगम हटा रहा, लोग लगा रहे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से व केडीए की ओर से पूर्व में कई बार सार्वजनिक स्थानों से अवैध रूप से लगे पोस्टर व बैनर हटाए जा चुके हैं। लेकिन लोग हैं कि उन्हीं जगहों पर फिर से प्रचार प्रसार के पोस्टर व फ्ïलैक्स लगा रहे हैं। जिससे निगम की कार्रवाई का असर ही नजर नहीं आ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">इन जगहों पर क्रेन की सहायता से हटाए</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम की ओर से शहर में कई जगह पर अधिक ऊंचाई पर लगे पोस्टर व बैनर और फ्लैक्स को क्रेन की सहायता से हटाया गया। जानकारी के अनुसार नाग नागिन मंदिर से कोटड़ी चौराहा, छावनी फ्लाई ओवर के ऊपर से एरोड्राम चौराहा होते हुए विज्ञान नगर चौराहे तक कार्रवाई की गई। इसके साथ ही टीलेश्वर चौराहे से सीएडी रोड होते हुए कई अन्ज जगह पर कार्रवाई की। निगम के गैराज से बड़ी क्रेन व लिफ्ट मशीन की सहायता से करीब </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">300 से अधिक पोस्टर बैनर हटाए गए।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निगम कर्मचारियों ने बताया कि डिवाइडर के बीच, बिजली के खम्बो,ग्रीन बेल्ट, सार्वजनिक शौचालयों, खेल मैदानों की दीवारों पर बड़ी संख्या में निजी स्कूल, कोचिंग, हॉस्पिटल और डॉक्टरों के विज्ञापन वाले कागज व प्लास्टिक के बैनर और फ्लेक्स लगाए हुए हैं। ऐसे करीब 700 पोस्टर बैनर को लोहे के ब्रश, पत्ती व पानी की सहायता से 700 पोस्टर बैनर साफ किए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सम्पति विरूपण के तहत कार्रवाई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी ऋचा गौतम ने बताया कि पूर्व में निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा अवैध पोस्टर बैनर हटाए गए थे। अब निगम के जन स्वास्थ्य अनुभाग कर्मचारियों द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। बिना अनुमति व सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर बैनर लगाकर प्रचार करना सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत आता है। इस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। पूर्व में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई जगह पर केडीए की ओर से भी इस तरह की कार्रवाई की जा चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:09:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इस बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक, चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fire-engines-will-not-be-seen-in-the-narrow-streets-this-time-either/article-145962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही शहर में जहां आग लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना है। वहीं निगम की ओर से आग पर काबू पाने की तैयारी तो की गई है लेकिन तंग गलियों में आग लगने पर वहां आग बुझाने के लिए अभी भी निगम के फायर अनुभाग के पास फायर बाइक नहीं आई है। जिससे इस बार भी बिना फायर बाइक के ही गर्मी निकालनी पड़ेगी। नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। 30 छोटी बड़ी और दो हाइड्रोलिक दमकलें भी हैं। जिनसे बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाई जा सकती है। करोड़ों रुपए की लागत वाली बड़ी-बड़ी दमकलें तो हैं। लेकिन मात्र 5 से 7 लाख रुपए कीमत वाली फायर बाइक नहीं हैं। जिससे पुराने शहर की तंग गलियों में आग लगने पर वहां बड़ी दमकलों के नहीं पहुंचने पर आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कोटा में चार फायर बाइक की आवश्यकता होने पर राज्य सरकार को इसकी डिमांड भेजी हुई है। नगर निगम कोटा के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि वैसे तो निगम के पास हर तरह की दमकलें हैं। लेकिन तंग गलियों वाले इलाकों में आग लगने पर कई बार समस्या आती है। उसके लिए फायर बाइक की जरूरत पड़ती है। कोटा में चार फायर बाइक की डिमांड राज्य सरकार को भेजी हुई है। वहां स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर जब भी फायर बाइक क्रय की जाएंगी। वहां से कोटा भी आएंगी।</p>
<p><strong>दो और फायर स्टेशनों के लिए मिली जमीन</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग के पास शहर में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। जिनमें सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाहमंडी, रानपुर , कैथून और स्टेशन रोड स्थित खेड़ली फाटक में तो फायर स्टेशन हैं। जबकि नदी पार और बारां रोड पर भी फायर स्टेशन की आवश्यकता है। इसके लिए नगर निगम की ओर से केडीए को जमीन आवंटन के लिए पत्र लिखा गया था। जिसके बाद केडीए की ओर से कुन्हाड़ी और बारां रोड पर जमीन भी चिन्हित कर दी गई है। अब निगम की ओर से उन पर फायर स्टेशन बनाया जाना है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार से उसके लिए बजट आने पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>जयपुर में 20 हैं लेकिन उपयोग नहीं</strong><br />सूत्रों के अनुसार जयपुर में करीब 19 से 20 फायर बाइक हैं। जो नगर निगम ने करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की लागत से वर्ष 2018 में क्रय की थी। उनमें से अधिकतर फायर बाइक का उपयोग ही नहीं हो रहा है। वे वहां धूल फांक रही हैं या उनका आग बुझाने के अलावा अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम जयपुर के सीएफओ गौतम लाल ने बताया कि जयपुर में फायर बाइक पहले से ही हैं। जरूरत पडे पर उनका उपयोग किया जाता है। फिलहाल नई फायर बाइक क्रय करने की जानकारी नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:38:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुधारू गाय को खुला छोड़ना पड़ रहा भारी, एक बार में 56 सौ रुपए लग रहा जुमार्ना</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की ओर से अभियान चलाकर पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध कर रहे है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaving-milch-cows-running-loose-is-proving-costly--with-a-fine-of-5-600-rupees-per-visit/article-145822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ सड़कों पर निराश्रित हालत में घूम रहे मवेशी आमजन के लिए खतरा व हादसों का कारण बन रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पशु पालक पालतू पशुओं को भी सड़कों पर खुला छोड़ रहे हैं। जबकि अब निगम की ओर से उन्हें पकड़ने का अभियान चलाया हुआ है। जिससे अब दुधारू गाय को खुला छोड़ना पशु पालकों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर में मवेशियों के कारण हो रहे हादसों को देखते हुए नगर निगम की ओर से उन्हें अभियान चलाकर पकड़ा जा रहा है। नगर निगम के गौशाला अनुभाग व अतिक्रमण निरोधक दस्ते की टीम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार पशुओं को पकड़ा जा रहा है। जिससे पशु पालकों में हडकम्प मचा हुआ है।</p>
<p><strong>गत माह पकड़े 300 मवेशी</strong><br />नगर निगम के गौशाला अनुभाग की ओर से लगातार मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। वहीं फरवरी में अभियान चलाकर शहर के सभी क्षेत्रों से मवेशी पकड़े गए। निगम की गौशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार फरवरी में करीब 300 मवेयिशों को पकड़ा गया है। उनमें से करीब 90 फीसदी पालतू और उनमें भी अधिकतर दुधारू गाय हैं।</p>
<p><strong>निगम टीम को करना पड़ रहा विरोध का सामना</strong><br />नगर निगम की ओर से एक तरफ तो आमजन को राहत देने के लिए सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ मवेशियों को पकड़ने के दौरान निगम टीम को लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। गत दिनों सकतपुरा में गायों को पकड़ने के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें सरकारी स्कूल में घुसा दिया था। जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। वहीं एक जगह पर पशु पालकों ने निगम के वाहन से ही पशुओं को छुड़ा लिया था।</p>
<p><strong>विरोध का कारण अधिक जुमार्ना</strong><br />नगर निगम सूत्रों के अनुसार शहर में सड़कों पर सांड को छोड़कर अधिकतर पालतू पशु हैं। जिन्हें पशु पालक दूध निकालने के बाद चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में एक बार पकड़े जाने के बाद उन पशुओं को छोड़ने पर 56 सौ रुपए जुमार्ना लगता है। साथ ही सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चारे-पानी का भी लगता है। एक बार में यदि किसी पशु पालक के दो-तीन पशु भी पकड़े गए तो उन्हें छुडवाना भारी पड़ता है। इस कारण से लोग उन्हें पकड़ने ही नहीं देते हैं।</p>
<p><strong>निगम गौशाला में क्षमता से अधिक मवेशी</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 2 हजार से अधिक मवेशी हैं। जबकि इसकी क्षमता ही करीब 15 सौ की है। हालांकि यहां मवेशियों को रखने के लिए अलग-अलग बाड़े बनाए हुए हैं। लेकिन उनमें से कई तो बीमार, लावारिस व पॉलिथीन खाई हुई है। करीब 25 फीसदी सांड हैं। दुधारू गाय भी हैं।हालांकि केडीए की ओर से निगम की गौशाला विस्तार के लिए जमीन आवंटित कर दी है। उस पर चार दीवारी निर्माण का काम किया जा हरा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सड़कों पर अधिकतर पालतू पशु हैं। पशु पालक जानबूझकर उन्हें छोड़ रहे हैं। अब निगम की ओर से अभियान चलाकर उन्हें पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध करने आते हैं। इसका कारण एक तो गाय का दुधारू व महंगा होना है। साथ ही पकड़े जाने पर उसे छुड़वाना अधिक महगा पड़ रहा है। गाय के 56 सौ व बछड़े के 4 हजार रुपए लगते हैं। फरवरी में 300 पशु पकड़े जिनमें से करीब 90 फीसदी गाय हैं। हालांकि उनमें से 25 से 30 गायों को पशु पालकों ने छुडंवाया है। जिनसे निगम को करीब डेढ़ लाख रुपए से अधिक जुमार्ने के रूप में राजस्व प्राप्त हुआ है।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:59:38 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर भवनों को मालिक खुद तोड़ दे, वरना निगम करेगा कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/owners-must-demolish-the-dilapidated-buildings-themselves--or-the-corporation-will-take-action/article-144943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा की ओर से शहर में जर्जर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिनमें उन्हें खुद तोड को कहा है। उनके ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। जिनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन अधिक हैं। उन भवनों पर लाल निशान तो लगाए हुए हैं। साथ ही अब निगम की ओर से सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं जर्जर भवन</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। हालांकि बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>..तो निगम वसूलेगा खर्चा</strong><br />आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे स्वयं उन्हें अपने स्तर पर हटा लें। यदि निर्धारित समय में वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम उन भवनों को ध्वस्त करेगा। उसका पूरा खर्चा हजार्ना भवन मालिकों से वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>हादसों की आशंका अधिक</strong><br />आयुक्त ने बताया कि निगम की ओर से हर साल अनंत चतुर्दशी से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कर उन पर लाल निशान लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन भवनों को अभी तक नहीं तोड़ा गया है। जिससे अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान भीड़ के उन मकानों पर चढ?े से हादसों की आशंका बनी रहती है।ऐसे में पहले से ही कार्यवाई की जाएगी तो हादसे व अनहोनी को टाला जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:00:52 +0530</pubDate>
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