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                <title>municipal corporation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - कोटा में जल्द दौड़ेंगी फायर फाइटिंग बाइक्स</title>
                                    <description><![CDATA[फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---firefighting-bikes-to-soon-hit-the-streets-of-kota/article-150466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अग्निशमन व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जल्द ही सडणकों पर फायर फाइटिंग बाइक्स दौड़ती नजर आएंगी। जिससे तंग गलियों में भी तेजी से आग पर काबू पाया जा सकेगा।यह जानकारी नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने दी। अग्निशमन सेवा सुरक्षा सप्ताह के शुभारम्भ पर मंगलवार को आयुक्त मेहरा ने बताया कि अग्निशमन बेड़े को मजबूत करने के लिए संसाधनों में निरंतर वृद्धि की जा रही है। तंग गलियों में त्वरित कार्रवाई के लिए फायर फाइटिंग बाइक्स खरीदी जाएंगी।आयुक्त ने बताया कि वहीं रोशनी की बेहतर व्यवस्था के लिए दो लाइटिंग टावर भी जल्द शामिल किए जाएंगे। फायर बाइक्स व लाइटिंग टावर की स्वीकृति शीघ्र ही डीएलबी से मिलने की संभावना है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इन दोनों को क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुख्यालय को भेजा हुआ है प्रस्ताव</strong><br />कोटा शहर में जहां बड़ी -बड़ी दमकलें और बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाने के लिए विदेशी हाइड्रोलिक लेडर दमकलें तक निगम के फायर अनुभाग में हैं। वहां पुराने शहर की तंग गलियों में लगनी वाली आग को काबू करने में आने वाली परेशाने को दूर करने के लिए फायर बाइक्स नहीं हैं।हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कई साल पहले ही डीएलबी को चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ है। लेकिन अभी तक वहां से फायर बाइक्स नहीं आई है।</p>
<p><strong>दो की आवश्यकता</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि पहले दो नगर निगम होने से चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ था। लेकिन वर्तमान में दो ही फायर बाइक्स की आवश्यकता है। करीब 15 से 17 लाख कीमत की इन फायर बाइक्स की डीएलबी से स्वीकृति मिलते ही उन्हें क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि शहर में हर बार गर्मी के सीजन में तंग गलियों में आग बुझाने में परेशानी को देखते हुए फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है। समाचार पत्र में 10 मार्च को पेज 3 पर इस  बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम अधिकारी व फायर अनुभाग अधिकारियों ने इस संबंध में कार्रवाई को गति दी। जिसके बाद अब फायर बाइक्स क्रय करने की संभावना बनी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
                                    <description><![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर को बदरंग करने वालों पर निगम डाल रहा पर्दा</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति के किसी भी तरह का प्रचार प्रसार करने व विज्ञापन फ्लेक्स और पोस्टर-बैनर लगाना गलत । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-steps-in-to-counter-those-defacing-the-city/article-147985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)53.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा। नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाने बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं निजी संस्थाएं व लोग शहर को बदरंग करने में जुटे हैं। लोगों की उस करतूत को नगर निगम अपने काम से परदा डाल रहा है। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर चाहे चार दीवारी हो या फोर्ट। फ्लाई ओवर हो या गेंट्री बोर्ड। कहीं भी बिना अनुमति के किसी भी तरह का प्रचार प्रसार करने व विज्ञापन फ्लेक्स और पोस्टर-बैनर लगाना गलत है। उसके बाद भी लोग व निजी संस्थाएं उन्हीं जगहों पर पोस्टर बैनर लगाकर निगम व केडीए कार्रवाई को धता बता रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निगम हटा रहा, लोग लगा रहे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से व केडीए की ओर से पूर्व में कई बार सार्वजनिक स्थानों से अवैध रूप से लगे पोस्टर व बैनर हटाए जा चुके हैं। लेकिन लोग हैं कि उन्हीं जगहों पर फिर से प्रचार प्रसार के पोस्टर व फ्ïलैक्स लगा रहे हैं। जिससे निगम की कार्रवाई का असर ही नजर नहीं आ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">इन जगहों पर क्रेन की सहायता से हटाए</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम की ओर से शहर में कई जगह पर अधिक ऊंचाई पर लगे पोस्टर व बैनर और फ्लैक्स को क्रेन की सहायता से हटाया गया। जानकारी के अनुसार नाग नागिन मंदिर से कोटड़ी चौराहा, छावनी फ्लाई ओवर के ऊपर से एरोड्राम चौराहा होते हुए विज्ञान नगर चौराहे तक कार्रवाई की गई। इसके साथ ही टीलेश्वर चौराहे से सीएडी रोड होते हुए कई अन्ज जगह पर कार्रवाई की। निगम के गैराज से बड़ी क्रेन व लिफ्ट मशीन की सहायता से करीब </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">300 से अधिक पोस्टर बैनर हटाए गए।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">निगम कर्मचारियों ने बताया कि डिवाइडर के बीच, बिजली के खम्बो,ग्रीन बेल्ट, सार्वजनिक शौचालयों, खेल मैदानों की दीवारों पर बड़ी संख्या में निजी स्कूल, कोचिंग, हॉस्पिटल और डॉक्टरों के विज्ञापन वाले कागज व प्लास्टिक के बैनर और फ्लेक्स लगाए हुए हैं। ऐसे करीब 700 पोस्टर बैनर को लोहे के ब्रश, पत्ती व पानी की सहायता से 700 पोस्टर बैनर साफ किए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सम्पति विरूपण के तहत कार्रवाई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी ऋचा गौतम ने बताया कि पूर्व में निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा अवैध पोस्टर बैनर हटाए गए थे। अब निगम के जन स्वास्थ्य अनुभाग कर्मचारियों द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। बिना अनुमति व सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर बैनर लगाकर प्रचार करना सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत आता है। इस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। पूर्व में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई जगह पर केडीए की ओर से भी इस तरह की कार्रवाई की जा चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:09:09 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक, चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fire-engines-will-not-be-seen-in-the-narrow-streets-this-time-either/article-145962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही शहर में जहां आग लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना है। वहीं निगम की ओर से आग पर काबू पाने की तैयारी तो की गई है लेकिन तंग गलियों में आग लगने पर वहां आग बुझाने के लिए अभी भी निगम के फायर अनुभाग के पास फायर बाइक नहीं आई है। जिससे इस बार भी बिना फायर बाइक के ही गर्मी निकालनी पड़ेगी। नगर निगम के पास कोटा में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। 30 छोटी बड़ी और दो हाइड्रोलिक दमकलें भी हैं। जिनसे बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाई जा सकती है। करोड़ों रुपए की लागत वाली बड़ी-बड़ी दमकलें तो हैं। लेकिन मात्र 5 से 7 लाख रुपए कीमत वाली फायर बाइक नहीं हैं। जिससे पुराने शहर की तंग गलियों में आग लगने पर वहां बड़ी दमकलों के नहीं पहुंचने पर आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>चार फायर बाइक की भेजी डिमांड</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कोटा में चार फायर बाइक की आवश्यकता होने पर राज्य सरकार को इसकी डिमांड भेजी हुई है। नगर निगम कोटा के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि वैसे तो निगम के पास हर तरह की दमकलें हैं। लेकिन तंग गलियों वाले इलाकों में आग लगने पर कई बार समस्या आती है। उसके लिए फायर बाइक की जरूरत पड़ती है। कोटा में चार फायर बाइक की डिमांड राज्य सरकार को भेजी हुई है। वहां स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर जब भी फायर बाइक क्रय की जाएंगी। वहां से कोटा भी आएंगी।</p>
<p><strong>दो और फायर स्टेशनों के लिए मिली जमीन</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग के पास शहर में करीब आधा दर्जन फायर स्टेशन हैं। जिनमें सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाहमंडी, रानपुर , कैथून और स्टेशन रोड स्थित खेड़ली फाटक में तो फायर स्टेशन हैं। जबकि नदी पार और बारां रोड पर भी फायर स्टेशन की आवश्यकता है। इसके लिए नगर निगम की ओर से केडीए को जमीन आवंटन के लिए पत्र लिखा गया था। जिसके बाद केडीए की ओर से कुन्हाड़ी और बारां रोड पर जमीन भी चिन्हित कर दी गई है। अब निगम की ओर से उन पर फायर स्टेशन बनाया जाना है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार से उसके लिए बजट आने पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p><strong>जयपुर में 20 हैं लेकिन उपयोग नहीं</strong><br />सूत्रों के अनुसार जयपुर में करीब 19 से 20 फायर बाइक हैं। जो नगर निगम ने करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की लागत से वर्ष 2018 में क्रय की थी। उनमें से अधिकतर फायर बाइक का उपयोग ही नहीं हो रहा है। वे वहां धूल फांक रही हैं या उनका आग बुझाने के अलावा अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम जयपुर के सीएफओ गौतम लाल ने बताया कि जयपुर में फायर बाइक पहले से ही हैं। जरूरत पडे पर उनका उपयोग किया जाता है। फिलहाल नई फायर बाइक क्रय करने की जानकारी नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:38:33 +0530</pubDate>
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                <title>दुधारू गाय को खुला छोड़ना पड़ रहा भारी, एक बार में 56 सौ रुपए लग रहा जुमार्ना</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की ओर से अभियान चलाकर पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध कर रहे है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaving-milch-cows-running-loose-is-proving-costly--with-a-fine-of-5-600-rupees-per-visit/article-145822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ सड़कों पर निराश्रित हालत में घूम रहे मवेशी आमजन के लिए खतरा व हादसों का कारण बन रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पशु पालक पालतू पशुओं को भी सड़कों पर खुला छोड़ रहे हैं। जबकि अब निगम की ओर से उन्हें पकड़ने का अभियान चलाया हुआ है। जिससे अब दुधारू गाय को खुला छोड़ना पशु पालकों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर में मवेशियों के कारण हो रहे हादसों को देखते हुए नगर निगम की ओर से उन्हें अभियान चलाकर पकड़ा जा रहा है। नगर निगम के गौशाला अनुभाग व अतिक्रमण निरोधक दस्ते की टीम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार पशुओं को पकड़ा जा रहा है। जिससे पशु पालकों में हडकम्प मचा हुआ है।</p>
<p><strong>गत माह पकड़े 300 मवेशी</strong><br />नगर निगम के गौशाला अनुभाग की ओर से लगातार मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। वहीं फरवरी में अभियान चलाकर शहर के सभी क्षेत्रों से मवेशी पकड़े गए। निगम की गौशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार फरवरी में करीब 300 मवेयिशों को पकड़ा गया है। उनमें से करीब 90 फीसदी पालतू और उनमें भी अधिकतर दुधारू गाय हैं।</p>
<p><strong>निगम टीम को करना पड़ रहा विरोध का सामना</strong><br />नगर निगम की ओर से एक तरफ तो आमजन को राहत देने के लिए सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ मवेशियों को पकड़ने के दौरान निगम टीम को लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। गत दिनों सकतपुरा में गायों को पकड़ने के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें सरकारी स्कूल में घुसा दिया था। जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। वहीं एक जगह पर पशु पालकों ने निगम के वाहन से ही पशुओं को छुड़ा लिया था।</p>
<p><strong>विरोध का कारण अधिक जुमार्ना</strong><br />नगर निगम सूत्रों के अनुसार शहर में सड़कों पर सांड को छोड़कर अधिकतर पालतू पशु हैं। जिन्हें पशु पालक दूध निकालने के बाद चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में एक बार पकड़े जाने के बाद उन पशुओं को छोड़ने पर 56 सौ रुपए जुमार्ना लगता है। साथ ही सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चारे-पानी का भी लगता है। एक बार में यदि किसी पशु पालक के दो-तीन पशु भी पकड़े गए तो उन्हें छुडवाना भारी पड़ता है। इस कारण से लोग उन्हें पकड़ने ही नहीं देते हैं।</p>
<p><strong>निगम गौशाला में क्षमता से अधिक मवेशी</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 2 हजार से अधिक मवेशी हैं। जबकि इसकी क्षमता ही करीब 15 सौ की है। हालांकि यहां मवेशियों को रखने के लिए अलग-अलग बाड़े बनाए हुए हैं। लेकिन उनमें से कई तो बीमार, लावारिस व पॉलिथीन खाई हुई है। करीब 25 फीसदी सांड हैं। दुधारू गाय भी हैं।हालांकि केडीए की ओर से निगम की गौशाला विस्तार के लिए जमीन आवंटित कर दी है। उस पर चार दीवारी निर्माण का काम किया जा हरा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सड़कों पर अधिकतर पालतू पशु हैं। पशु पालक जानबूझकर उन्हें छोड़ रहे हैं। अब निगम की ओर से अभियान चलाकर उन्हें पकड़ना शुरू किया तो पशु पालक ही विरोध करने आते हैं। इसका कारण एक तो गाय का दुधारू व महंगा होना है। साथ ही पकड़े जाने पर उसे छुड़वाना अधिक महगा पड़ रहा है। गाय के 56 सौ व बछड़े के 4 हजार रुपए लगते हैं। फरवरी में 300 पशु पकड़े जिनमें से करीब 90 फीसदी गाय हैं। हालांकि उनमें से 25 से 30 गायों को पशु पालकों ने छुडंवाया है। जिनसे निगम को करीब डेढ़ लाख रुपए से अधिक जुमार्ने के रूप में राजस्व प्राप्त हुआ है।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:59:38 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर भवनों को मालिक खुद तोड़ दे, वरना निगम करेगा कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/owners-must-demolish-the-dilapidated-buildings-themselves--or-the-corporation-will-take-action/article-144943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा की ओर से शहर में जर्जर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिनमें उन्हें खुद तोड को कहा है। उनके ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। जिनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन अधिक हैं। उन भवनों पर लाल निशान तो लगाए हुए हैं। साथ ही अब निगम की ओर से सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं जर्जर भवन</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। हालांकि बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>..तो निगम वसूलेगा खर्चा</strong><br />आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे स्वयं उन्हें अपने स्तर पर हटा लें। यदि निर्धारित समय में वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम उन भवनों को ध्वस्त करेगा। उसका पूरा खर्चा हजार्ना भवन मालिकों से वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>हादसों की आशंका अधिक</strong><br />आयुक्त ने बताया कि निगम की ओर से हर साल अनंत चतुर्दशी से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कर उन पर लाल निशान लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन भवनों को अभी तक नहीं तोड़ा गया है। जिससे अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान भीड़ के उन मकानों पर चढ?े से हादसों की आशंका बनी रहती है।ऐसे में पहले से ही कार्यवाई की जाएगी तो हादसे व अनहोनी को टाला जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:00:52 +0530</pubDate>
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                <title>सफाई के लिए लगाए कचरा पात्र हुए कचरा, प्लास्टिक के डस्टबीन  भी हुए गायब</title>
                                    <description><![CDATA[चम्बल रिवर फ्रंट के मुख्य द्वार से बोट चौराहे के बीच यहीं स्थिति है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/garbage-bins-installed-for-cleaning-have-become-garbage--plastic-dustbins-have-also-disappeared/article-142738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/854.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कचरा पात्र(डस्टबीन) कचरा डालने के लिए होता है। लेकिन हालत यह है कि शहर में कचरा पात्र खुद ही कचरा हो रहे हैं। इसका उदाहरण हैं नदी पार क्षेत्र में लगे नगर निगम के डस्टबीन।नगर निगम की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर पहले जहां कई तरह के कचरा पात्र लगाए थे। लेकिन लोहे व स्टील के होने से उनमें से अधिकतर चोरी हो गए थे। जिससे डस्टबीन होने के बाद भी उनका कोई फायदा नहीं हो रहा था। शहर में ऐसा किसी एक जगह नहीं पूरे कोटा दक्षिण क्षेत्र में देखने को मिला था।</p>
<p><strong>कोटा उत्तर क्षेत्र में प्लास्टिक के लगाए थे डस्टबीन</strong><br />पूर्व में चोरी हुए लोहे व स्टील के डस्टबीन से सबक लेते हुए नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से उस समय प्लास्टिक के डस्टबीन बनवाए। लोहे के ऐंगल वाले फ्रेम में गीला व सूखा कचरा डालने के लिए दो अलग-अलग डिब्बे लगाकर उन डस्टबीन को तैयार कराया गया। जिन्हें पूरे क्षेत्र में सड़क किनारे मुख्य मार्गों पर लगाया गया था। जिससे राह चलते लोग सड़क पर कचरा नहीं डालकर उन डस्टबीन में डाले। लेकिन हालत यह है कि प्लास्टिक के डस्टबीन में कचरा डालना तो दूर वे डस्टबीन ही कचरा हो गए।</p>
<p><strong>यह हो गई हालत</strong><br />कोटा उत्तर क्षेत्र में लगाए गए अधिकतर डस्टबीन में से कहीं तो केवल लोहे के ऐंगल वाले फ्रेम ही बचे हैं। उनमें से दोनों डिब्बे गायब हो गए। कहीं एक ही डिब्बा बचा है दूसरा गायब हो गया। कहीं एक डिब्बा है तो वह भी टूटा हुआ है। जिससे उसमें कचरा डाला नहीं जा सकता। ऐसी जगह पर दिखाने के लिए डस्टबीन हैं जबकि कचरा तो सड़क पर ही फैला हुआ है। किसी में दोनों डिब्बे हैं तो उनके ऊपर के ढक्कन गायब हैं।ऐसा नदी पार सकतपुरा क्षेत्र में चम्बल रिवर फ्रंट के मुख्य द्वार से बोट चौराहे के बीच की स्थिति है। वहीं राजकीय महाविद्यालय के सामने व गीता भवन के सामने तालाब किनारे भी यही स्थिति है।</p>
<p><strong>नगर निगम कोटा महोत्सव में आएंगे हजारों लोग</strong><br />हालत यह है कि आने वाले दिनों में 21 व 22 फरवरी को रिवर फ्रंट के शौर्य घाट पर कोटा महोत्सव का आयोजन किया जाना है। जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और बाहर से भी लोग आएंगे। उस समय वे लोग इस तरह के डस्टबीन व सड़क पर कचरे के ढेर देखकर शहर व निगम की धूमिल छवि साथ लेकर जाएंगे।</p>
<p><strong>500 में से 400 लगा दिए थे</strong><br />जानकारी के अनुसार नगर निगम की ओर से प्लास्टिक के करीब 500 डस्टबीन बनवाए थे। जिनमें से एक साथ 400 लगा दिए थे। लेकिन उसके बाद वर्तमान जिला कलक्टर द्वारा शहर में निरीक्षण के दौरान जहां टूटे डस्टबीन दिखे थे उन्हें बदल दिया था। लेकिन अब फिर से अधिकतर जगह पर डस्टबीन टूट चुके हैं व गायब हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्लास्टिक के डस्टबीन को न तो कोई चोरी कर रहा है और न ही ये गायब हो रहे हैं। इनमें कचरा डालने पर गाय व बंदर इनमें मुंह मारते हैं। खाने की चीजें लेने के प्रयास में वे जब डस्टबीन को हिलाते हैं तो कई टूट जाते हैं। टूटने के बाद उन्हें हटा दिया जाता है। जिससे ऐसा लगता है जैसे ये चोरी हो रहे हैं। वैसे पहले भी जहां टूटे व गायब हुए थे वहां बदल दिए थे। अब भी यदि कहीं ऐसे डस्टबीन हैं तो वहां भी बदल दिया जाएगा। हालांकि निगम की ओर से शीघ्र ही इस तरह के एक हजार और डस्टबीन क्रय किए जा रहे हैं। जिनका उपयोग होने से सड़क पर कचरा नहीं डलेगा।<br /><strong>- मोतीलाल चौधरी, स्वास्थ्य अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 14:56:12 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : शुभम लॉजिस्टिक्स को किया सीज तो जमा कराया बकाया 25 लाख टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[टैक्स जमा नहीं करवाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--shubham-logistics-seized--then-paid-the-outstanding-25-lakh-tax/article-142109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) के बकायादारों के खिलाफ टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। निगम की टीम ने गुरूवार सुबह यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर कैथून रोड स्थित एक वेयरहाउस को सीज कर दिया। शाम होते-होते वेयरहाउस संचालक ने निगम में 2009 से बकाया चल रही 25 लाख से अधिक की राशि जमा करवा दी। निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि कैथून रोड पर कोटा क्लब के सामने स्थित शुभम लॉजिस्टिक्स पर वर्ष 2009 से नगरीय विकास कर बकाया चल रहा था। निगम द्वारा वेयरहाउस संचालक को यूडी टेक्स जमा करवाने के लिए कई बार नोटिस देने के साथ व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था, परन्तु उसने यूडी टेक्स जमा नहीं करवाया।</p>
<p><strong>व्यवसायिक गतिविधियां हो रही थी संचालित</strong><br />इस वेयरहाउस में व्यवसायिक गतिविधियां भी की जा रही थीं। इस पर गुरूवार सुबह उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी के नेतृत्व में गठित निगम अधिकारियों की टीम ने वेयरहाउस को सीज कर दिया गया। इसके बाद वेयरहाउस संचालक निगम कार्यालय पहुंच गया और 2009 से बकाया चल रही 25 लाख 29 हजार 574 रूपए की कर की राशि जमा करवा दी। टेक्स जमा होने के बाद सीजिंग को खोल दिया गया।</p>
<p><strong>कई अन्य सम्पत्तियां चिन्हित</strong><br />आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि निगम ने यूडी टेक्स के बकाएदारों की सूची तैयार कर ली है। इन सभी को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। ऐसी कई सम्पत्तियों को चिन्हित भी किया गया है जिन पर लम्बे समय से मोटा यूडी टेक्स बकाया चल रहा है। निगम आने वाले दिनों में इनको भी सीज करने की कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>छूट का लाभ लेकर जमा करवाएं यूडी टेक्स</strong><br />आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि 2700 वर्गफीट से अधिक के आवासीय भवन व प्लॉट और 900 वर्गफीट से अधिक वाणिज्यिक भवन व प्लॉट नगरीय विकास कर के दायरे में आते हैं। नगरीय विकास कर भूखण्ड स्वामी के स्वनिर्धारण पर आधारित है। इस कारण कोई भी व्यक्ति नोटिस नहीं मिलने की बात कहकर कर जमा करवाने से बच नहीं सकता।</p>
<p><strong>31 मार्च तक छूट का प्रावधान</strong><br />वर्तमान में राज्य सरकार के आदेशानुसार पेनल्टी पर 100 प्रतिशत की छूट व वर्ष 2007-08 से 2010-11 तक मूल कर राशि पर 50 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया जा रहा है। आयुक्त ने अपील की कि जिन भी व्यक्तियों और संस्थाओं की सम्पत्ति यूडी टैक्स के दायरे में आती है, वह अविलम्ब अपना यूडी टैक्स जमा करवाएं। राज्य सरकार की ओर से बकाया पर ब्जाय पेनल्टी में छूट का प्रावधान 31 मार्च तक किया हुआ है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था समाचार प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि नगरीय विकास कर के दायरे में आने वाली सम्पत्तियों व उनके द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। समाचार पत्र में ज्ञ फरवरी के अंक में पेज 7 पर'यूडी टैक्स:ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में बकाया कर जमा नहीं करवाने वालों पर अब होगी सीजिंग की कार्रवाई शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें निगम द्वारा शीघ्र ही एक् शन करने की जानकारी दी थी। नवज्योति में समाचार प्रकाशित होते ही निगम टीम ने गुरुवार को पहले ही दिन कार्रवाई करते हुए एक वेयर हाउस को सीज किया। जिससे निगम में 25 लाख रुपए टैक्स जमा हो गया।</p>
<p><strong>ये अधिकारी रहे निगम टीम में शामिल</strong><br />सीजिंग की कार्रवाई के दौरान उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी, राजस्व अधिकारी, महावीर सिंह सिसोदिया, राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री, सहायक अभियन्ता व अतिक्रमण प्रभारी तौसिफ खान, विद्युत अभियन्ता लक्ष्मीनारायण बडारिया, सहायक राजस्व निरीक्षक, रियाजुद्दीन, संवेदक फर्म एसएसपीएल के प्रतिनिधि भुवनेश गोस्वामी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:34:02 +0530</pubDate>
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                <title>नगर निगम निगम की आय बढ़ाने में नहीं चला तुरुप का इक्का</title>
                                    <description><![CDATA[निगम के शहर में जितने भूखंड हैं उनमें से एक तिहाई भूखंडों की ही नीलामी लगाई गई ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-fails-to-play-its-trump-card-in-increasing-revenue/article-142054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आर्थिक संकट से जूझ रहे नगर निगम की आय बढ़ाने में बरसों से खाली पड़े भूखंड तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। लेकिन हालत यह है कि नीलामी में भूखंड बिक ही नहीं रहे हैं। 19 में से मात्र चार ही भूखंड नीलामी में बिके हैं। नगर निगम के शहरी सीमा क्षेत्र में कई जगह पर भूखंड खाली पड़े हुए हैं। बेशकीमती इन भूखंडों में से कुछ पर तो अतिक्रमण हो रहा है और कुछ को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इन भूखंडों से नगर निगम को करोड़ों रुपए की आय व राजस्व प्राप्त हो सकता है। लेकिन हालत यह है कि निगम प्रशासन द्वारा पहले तो इनकी अनदेखी करने से लोगों ने इन पर अतिक्रमण कर लिया था। निगम के तत्कालीन आयुक्तों ने प्रयास कर कई भूखंडों से अतिक्रमण हटाए भी थे और उनकी नीलामी की तो गिनती के ही भूखंड बिके थे।</p>
<p><strong>भाजपा बोर्ड के समय भी हुआ था प्रयास</strong><br />नगर निगम के पूर्व राजस्व अनुभाग अध्यक्ष महेश गौतम लल्ली का है कि नगर निगम के पास करीब 100 करोड़ से अधिक की राशि के भूखंड हैं। निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते उन पर अतिक्रमण हो रहे थे। उनके समय प्रयास कर कई भूखंडों से अतिक्रमण हटाए थे। साथ ही अधिकारियों ने राजस्व अनुभाग के माध्यम से उनकी नीलामी के प्रयास किए थे। लेकिन उस समय भूखंड नीलाम नहीं हो सके थे। जबकि तत्कालीन निगम अधिकारियों के समय गिनती के ही भूखंड नीलाम हुए थे। उन्होंने बताया कि निगम अधिकारी चाहे तो भूखंडों से निगम को अच्छी आय प्राप्त हो सकती है।</p>
<p><strong>एक तिहाई भूखंड ही लगाए नीलामी में</strong><br />कोटा में पहले जहां दो नगर निगम थे। वहीं अब एक निगम हो गया है। निगम के शहर में जितने भूखंड हैं उनमें से वर्तमान में एक तिहाई भूखंडों को ही नीलामी लगाई गई थी। जिनमें से भी एक चौथाई ही भूखंड बिके हैं। नगर निगम कोटा के उपायुक्त राजस्व धीरज सोनी ने बताया कि नगर निगम के कुल 53 भूखंड हैं। जिनकी नीलामी की जानी है। उनमें से जिनकी पत्रावली तैयार हो रही है। उनकी नीलामी की जा रही है। 53 में से हाल ही में 19 भूखंडों की नीलामी लगाई गई थी।</p>
<p><strong>प्रताप नगर व बकरा मंडी के भूखंड बेशकीमती</strong><br />नगर निगम की ओर से वर्तमान में जिन भूखंडों को नीलामी में लगाया गया उनमें से अधिकतर नए कोटा क्षेत्र के है। उनमें भी झालावाड़ रोड पर महावीर नगर प्रथम इलाके के रहे। जबकि सीएडी सर्किल पर प्रताप नगर में और सीएडी रोड स्थित बकरा मंडी के भूखंड बेश कीमती है। जिनसे निगम को अच्छी आय हो सकती है। निगम ने प्रताप नगर स्थित भूखंड से अतिक्रमण हटाकर चार दीवारी भी बनवा दी थी।</p>
<p><strong>4 भूखंडों से हुई 2 करोड़ की आय</strong><br />उपायुक्त राजस्व धीरज सोनी ने बताया कि निगम की ओर से नीलामी में लगाए भूखंडों में से फिलहाल 4 ही भूखंड बिके हैं। जिनसे निगम को करीब 2 करोड़ रुपए की आय हुई है। हालांकि एक भूखंड की दर निर्धारित से काफी कम आई है। इस कारण से उसे अब अन्य भूखंडों के साथ दोबारा से नीलामी में लगाया जाएगा। सोनी ने बताया कि बकरा मंडी वाले भूखंड की पत्रावली तैयार हो गई है। उसे भी शीघ्र ही नीलामी में लगाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:43:12 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स: ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में, नगर निगम ने दिए नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में यूडी टैक्स का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ud-tax--2-500-properties-under-the-tax-net--municipal-corporation-issues-notices/article-142042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) समय पर जमा नहीं करवाने वालों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। निगम द्वारा बड़े बकायादारों को नोटिस देने के बाद अब उनके प्रतिष्ठान की सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण थे। उस समय दोनों नगर निगम की बजट बोर्ड बैठकों में अन्य मदों के साथ ही नगरीय विकास कर के भी बजट लक्ष्य तय किए गए थे। हालांकि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से नगर निगम एक हो गया है। ऐसे में वर्तमान में नगरीय विकास कर का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>छूट का इंतजार</strong><br />राज्य सरकार द्वारा हर साल टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को राहत देने के लिए ब्याज पेनल्टी में छूट का प्रावधान करती है। जिससे अधिक से अधिक बकायादार बिना ब्याज पेनल्टी के टैक्स जमा करवा सके। हालाकि फरवरी का महीना शुरू हो गया है। अभी तक सरकार ने छूट की घोषणा नहीं की है। जबकि बड़े बकायादार सरकार की छूट का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर जमा करवाने वालों के लिए अभी समय है। लेकिन जो कर दाता बरसों से बकाया कर जमा नहीं करवा रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह का समय</strong><br />वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब मात्र दो माह का ही समय शेष है। 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूडी टैक्स वसूली के लक्ष्य को इन शेष दो माह की अवधि में ही पूरा करना है। जबकि हालत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे कर दाता हैं जिन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया है। साथ ही कई कर दाता तो ऐसे हैं जो पिछले काफी समय से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। उनके खिलाफ नगर निगम अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार </strong><br />नगर निगम की ओर से नगरीय कर की वसूली निजी फर्म के माध्यम से की जा रही है। फर्म द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में करीब 25 सौ प्रोपर्टी ऐसी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती हैं। जिनमें से दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार हैं। जिनमें से करीब एक चौथाई ने ही कर जमा कराया है।</p>
<p><strong>टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर हो सख्ती</strong><br />लोगों का कहना है कि नगरीय कर के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों को समय पर टैक्स जमा करवाना चाहिए। कर जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। नयापुरा निवासी महेश खत्री का कहना है सरकार ऐसे लोगों को पेनल्टी व सजा देने की जगह टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को हर साल छूट का लाभ देकर उपकृत करती है। ऐसा करना गलत है। जबकि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को कोई लाभ नहीं दिया जाता। दादाबाड़ी निवासी रामबाबू नागर का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान जब कमाई करते हैं तो उन्हें टैक्स भी समय पर देना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन कई कर दाता कार्रवाई का डर नहीं होने से टैक्स जमा नहीं करवाते हैं। जिससे कर जमा करवाने वालों को नुकसान होता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वित्त वर्ष समाप्त होने में अब मात्र दो माह का भी समय शेष नहीं है। ऐसे में नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले सभी कर दाताओं को धारा 131 के नोटिस दो से तीन बार दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी विशेष रूप से बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर अब निगम सख्ती करेगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर अब सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई शीघ्र ही चालू की जाएगी।<br /><strong>- धीरज सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:24:29 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा को अभी तक नहीं मिली मोटर बाइक दमकल</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर में गलियां इतनी तंग कि  आग लगने  पर दमकल  नहीं पहुंच सकती।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-has-not-yet-received-motorcycle-fire-engines/article-140616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(5)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के फायर अनुभाग में बड़ी दमकलों से लेकर फायर टंडर और हाईड्रोलिक लेडर समेत करीब तीन दर्जन दमकलें हैं जो बड़ी से बड़ी और बहुमंजिला आग को बुझाने में सहायक है। लेकिन शहर को बरसों से जिन छोटी दमकलों व मोटर बाइक दमकल की आवश्यकता है वह अभी तक भी नहीं मिली।<br />शहर में जहां नई कॉलोनियों व इलाकों का विस्तार हो रहा है। बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं। उनमें किसी भी तरह की आग जनित दुर्घटनाएं होने पर उन पर आसानी से काबू पाने के लिए निगम के पास पर्याप्त संसाधन हैं। जिनमें हर तरह की दमकलें शामिल हैं।</p>
<p><strong>पुराने शहर में हैं तंग इलाके</strong><br />लेकिन हालत यह है कि कोटा में पुराने शहर के कई इलाके ऐसे भी हैं जहां रास्ते संकरे हैं और गलियां इतनी तंग हैं कि वहां आग लगने की घटना होने पर दमकल तक नहीं पहुंच सकती।बुधवार देर रात को मोखापाड़ा के एक मकान में आग लगने पर ऐसा ही मामला सामने आया। जहां दमकल तो पहुंची लेकिन मकान का रास्ता व गली संकरी होने से घटना स्थल तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में यदि छोटी दमकल या मोटर बाइक होती तो आसानी से मकान तक पहुंच सकती थी। हालांकि पूर्व में भी पुराने शहर में इस तरह की घटना हो चुकी है जहां आग लगने पर दमकल मकान तक नहीं पहुंच सकी थी।</p>
<p><strong>मार्केट में भी भीड़भाड़ व रास्ते संकरे</strong><br />पुराने शहर में पाटनपोल, सरायकायस्थान, रेतवाली, मोखापाड़ा, घंटाघर, चश्मे की बावड़ी, हिरण बाजार, शनि मंदिर, बजाज खाना समेत कई इलाके और इंद्रा मार्केट, शास्त्री मार्केट, ठठेरा गले, सब्जीमंडी, चौथ माता बाजार, मकबरा समेत कई ऐसे मार्केट हैं जहां दिन के समय भीड़भाड़ होने से वहां बड़ी दमकलें नहीं पहुंच सकती। रात के समय भी गलियां व रास्ते संकरे होने पर वहां दमकलों का पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में इन जैसी जगहों के लिए छोटी दमकलों की दरकार शहर को है।</p>
<p><strong>छोटी दमकलें भी होनी चाहिए</strong><br />इधर शहर वासियों का कहना है कि जिस तरह से शहर में बहुमंजिला इमारतें बनने पर हाईड्रोलिक लेडर दमकलें क्रय की गई है। उसी तरह से मोटर बाइक दमकलें भी क्रय की जानी चाहिए।<br />इंद्रा मार्केट निवासी रमेश सोनी का कहना है कि नगर निगम व सरकार जब करोड़ों रुपए की बड़ी दमकलें खरीद सकती है तो लाखों रुपए की छोटी दमकलें क्रय करने में क्या समस्या है।</p>
<p><strong>प्रस्ताव भेजे हुए हैं मुख्यालय</strong><br />कोटा शहर में तंग इलाकों व संकरे रास्तों में और मार्केट में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए यहां छोटी दमकलों विशेष रूप से मोटर बाइक दमकलों की आवश्यकता है। उसे देखते हुए काफी समय पहले जब दो नगर निगम थे उस समय ही करीब चार मोटर बाइक दमकलों के प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजे हुए हैं। हालांकि सरकार के स्तर पर आश्वासन दिया गया है कि शीघ्र ही मोटर बाइक दमकलें क्रय कर भेजी जाएंगी। लेकिन अभी तक नहीं मिली है। वैसे निगम के फायर अनुभाग में पर्याप्त दमकलें व संसाधन हैं।<br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 16:00:09 +0530</pubDate>
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                <title>ये हटा रहे, वो लगा रहे, शहर को बदरंग करने वालों पर नहीं हो रही सख्ती</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार लगने के बाद उन्हें काफी समय तक हटाया भी नहीं जाता । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-are-removing-them--others-are-putting-them-up-again--no-strict-action-is-being-taken-against-those-who-are-defacing-the-city/article-139655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर को बदरंग करने वालों के खिलाफ सख्ती नहीं की जा रही है। जिससे नगर निगम द्वारा बार-बार हटाने के बाद भी संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से पोस्टर व बैनर लगाए जा रहे हैं।शहर में किसी भी सार्वजनिक स्थान चाहे वह फ्लाई ओवर हो या अंडरपास। बुर्ज की दीवार हो या निजी व सरकारी भवन की दीवार।शौचालय या अन्य किसी भी स्थान पर चाहे डिवाइडर पर लगे बिजली के खम्बे ही क्यों न हो वहां बिना अनुमति के किसी भी तरह की प्रचार सामग्री लगाना अवैध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।</p>
<p>शहर का कोई इलाका या सार्वजनिक स्थान ऐसा नहीं है जहां निजी संस्थाओं, होटल, कोचिंग, डॉक्टर व व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालक ने विज्ञापन के पोस्टर व बैनर नहीं लगा रखे हों। जन्म दिन की बधाई से लेकर रक्तदान शिविरों तक के विज्ञापन अवैध रूप से लग रहे हैं। एक बार लगने के बाद उन्हें काफी समय तक हटाया भी नहीं जा रहा। संबंधित विभागों के अधिकारी भी देखकर अनजान बने हुए हैं। हालांकि नगर निगम की ओर से टीमें लगाकर लगातार अवैध रूप से चस्पा विज्ञापनों को हटाया जा रहा है। पहले यह कार्रवाई निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से करवाई जा रही थी। जबकि वर्तमान में जन स्वास्थ्य अनुभाग के माध्यम से पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स को हटाया जा रहा है। हालत यह है कि एक तरफ नगर निगम की टीमें पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स हटाकर आती है। वहीं दूसरी तरफ संस्थाएं फिर से उसी जगह पर दोबारा से विज्ञापन चस्पा कर रही है। हालांकि कई संस्थाएं तो बार-बार ऐसा कर रही है और कई जगह पर हर बार नई संस्था का विज्ञापन नजर आ रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह लगे हैं विज्ञापन</strong><br />वर्तमान में एरोड्राम अंडरपास हो या छावनी फ्लाई ओवर। गुमानपुरा फ्लाई ओवर हो या दादाबाड़ी फ्लाई ओवर। यहां तक कि पुराने शहर में बुर्ज की दीवारों पर और डिवाइडरों के बीच बिजली के खम्बों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे पोस्टर, फ्लेक्स व बैनर लगे हुए हैं। जिन पर नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।</p>
<p><strong>बिना सख्ती मेनपावर का दुरुपयोग</strong><br />जानकारों का कहना है कि नगर निगम द्वारा एक या दो बार विज्ञापन हटाना तो किसी हद तक सही है। लेकिन बार-बार विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करना और फिद्दर से उन्हें अपने स्तर पर ही हटाना मेन पावर का दुरूपयोग है। तलवंडी निवासी अनिल जैन का कहना है कि जब तक नगर निगम की ओर से सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत सख्ती नहीं की जाएगी। भारी जुमार्ना या मुकदमा दर्ज नहीं कराया जाएगा तब तक किसी पर कोई असर नहीं हो रहा।</p>
<p>महावीर नगर निवासी कैलाश शर्मा का कहना है कि निजी संस्थाएं विज्ञापन एजेंसी या फर्म के माध्यम से अपना प्रचार कर रही है। एजेंसी मनमर्जी की जगह पर विज्ञापन चस्पा कर कमाई कर रही है। ऐसे में दोनों का काम हो रहा है। जबकि नुकसान नगर निगम को और शहर गंदा होने से छवि शहर की खराब हो रही है। जबकि ऐसा करने वालों के खिलाफ केवल कहने से नहीं सख्ती करने से ही असर होगा।</p>
<p><strong>नोटिस देने की तैयारी</strong><br />नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम ने बताया कि निगम आयुक्त के आदेश से जन स्वास्थ्य अनुभाग की टीमें अवैध पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स हटा रही है। साथ ही जो बार-बार लगा रहा है उनकी सूची तैयार कर राजस्व अनुभाग को दी जा रही है। राजस्व अनुभाग व आयुक्त के आदेश पर बार-बार विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ नोटिस जारी करने व जुमार्ना समेत सख्त कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:36:30 +0530</pubDate>
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