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                <title>HC - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>काटली नदी के अतिक्रमियों को सुनवाई का मौका देकर करें कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझुनूं के नटास गांव में स्थित काटली नदी में करीब आठ सौ बीघा भूमि पर अतिक्रमण के मामले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित पीएलपीसी कमेटी को कहा है कि वह मामले में अतिक्रमियों को सुनवाई का मौका देकर तीन माह में अतिक्रमण हटाने पर निर्णय करें। इसके लिए अदालत ने याचिकाकर्ता को कमेटी के समक्ष अपना अभ्यावेदन देने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/take-action-by-giving-opportunity-to-the-trespassers-of-katli/article-13674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझुनूं के नटास गांव में स्थित काटली नदी में करीब आठ सौ बीघा भूमि पर अतिक्रमण के मामले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित पीएलपीसी कमेटी को कहा है कि वह मामले में अतिक्रमियों को सुनवाई का मौका देकर तीन माह में अतिक्रमण हटाने पर निर्णय करें। इसके लिए अदालत ने याचिकाकर्ता को कमेटी के समक्ष अपना अभ्यावेदन देने को कहा है। जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश सुमित्रा की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।</p>
<p>जनहित याचिका में अधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया और अधिवक्ता हिमांशु ठोलिया ने अदालत को बताया कि काटली नदी के बहाव क्षेत्र में नटास सरपंच के परिजनों सहित अन्य रसूखदार लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। अतिक्रमी नदी में पक्के निर्माण कर कुए और ट्यूबवेल खोदकर सिंचाई कर रहे हैं। जमाबंदी के अनुसार नदी की करीब सत्रह सौ बीघा जमीन नटास गांव की सीमा से जुड़ी हुई है। इसमें से करीब पचास फीसदी जमीन पर अतिक्रमण हो गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से स्थानीय कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी सहित स्थानीय प्रशासन के अन्य अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत की है, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा गया कि उसने प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जनहित याचिका पेश की है। ऐसे में उसके साथ कोई अप्रिय घटना भी घटित हो सकती है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कमेटी को तीन माह में अतिक्रमण हटाने पर निर्णय करने को कहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 17:10:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लखीमपुर हिंसा: मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को करना होगा आत्मसमर्पण, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत को किया रद्द, SC ने HC से नये सिरे से विचार करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[पीठ ने जमानत रद्द करने का आदेश पारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने कई अप्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया और जल्दबाजी में अपना फैसला लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lakhimpur-violence--main-accused-ashish-mishra-will-have-to-surrender--supreme-court-cancels-bail-granted-by-allahabad-high-court--sc-asks-hc-to-reconsider/article-8067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बड़ी खबर लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से है। जहां सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र और लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत सोमवार को रद्द करते हुए उसे (आशीष को) एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने आशीष की जमानत रद्द करने तथा उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश देने के साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कहा कि वह नये सिरे से विचार करे कि उसे (आशीष को) जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। <br /><br />पीठ ने जमानत रद्द करने का आदेश पारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने कई अप्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया और जल्दबाजी में अपना फैसला लिया। पीड़तिों को प्रथम दृष्टया आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही अपना आदेश पारित कर दिया। पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चार अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।<br /><br />गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक कार्यक्रम का विरोध करने के  दौरान हिंसक घटनाएं हुई थी। इस हिंसा में केंद्र के तत्कालीन तीन कृषि कानूनों (अब रद्द कर दिए गए) के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गयी थी। मामले के मुख्य आरोपी आशीष को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को जमानत दी थी। पुलिस ने आशीष को नौ अक्टूबर को गिरफ्तार किया था।  <br /><br />जमानत के खिलाफ मृतक किसानों के परिजनों एवं अन्य ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जमानत रद्द करने की मांग वाली उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ ने जमानत के'आधार" पर कई सवाल खड़े किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को आशीष की जमानत के खिलाफ अपील करने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने उसे नजरअंदाज कर दिया था। एसआईटी ने 30 मार्च को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने मुख्य आरोपी की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने के संबंध में प्रदेश सरकार से सिफारिश की थी।<br /><br />मुख्य आरोपी आशीष की जमानत का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं ने गवाहों को धमकाने तथा सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के भी आरोप लगाए थे हालांकि, राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वकील महेश जेठमलानी ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा था कि मामले से संबंधित गवाहों को पूरी सुरक्षा प्रदान की जा रही है। किसी को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया था कि एसआईटी ने गवाहों पर खतरे की आशंका के कारण आशीष की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सरकार ने सभी गवाहों को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का दावा करते हुए एसआईटी के विचार  से अपनी असहमति व्यक्त की थी।<br /><br />जमानत का विरोध कर रहे कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने गवाहों को धमकी दिए जाने के मुद्दे को जोरशोर से पीठ के समक्ष उठाया था। उन्होंने कहा कि एक गवाह को भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में सत्ता में लौटने का जिक्र करते हुए धमकी दी गई थी। श्री दवे ने पीठ के समक्ष उक्त गवाह की शिकायत पढ़ते हुए कहा था, अब बीजेपी सत्ता में है। देखना तेरा क्या हाल करता हूं।Þ उन्होंने सवाल किया कि क्या इस तरह की धमकी गंभीर मामला नहीं है?</p>
<p> </p>
<p>किसानों के परिजनों से कुछ दिन पहले अधिवक्ता सी एस पांडा और शिव कुमार त्रिपाठी ने भी जमानत के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। इन वकीलों की याचिका पर ही शीर्ष न्यायालय ने मामले की जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। कथित रूप से कार से कुचलकर चारा किसानों की मृत्यु होने के बाद भड़की ङ्क्षहसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा एक अन्य कार चालक एवं एक पत्रकार की मृत्यु हो गई थी। किसानों की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाये गये हैं कि उत्तर प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार है, जिस पार्टी की सरकार में आरोपी आशीष के पिता केंद्र में राज्य मंत्री हैं।  शायद इसी वजह से प्रदेश सरकार ने जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर नहीं की थी।<br /><br />केंद्रीय राज्य मंत्री के पुत्र आशीष की जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जमानत का प्रभावी ढंग से विरोध नहीं करने के उस पर लगाए गए आरोप  Þपूरी तरह से गलत एवं असत्य हैं। सरकार ने कहा था कि उच्च न्यायालय द्वारा आशीष को जमानत देने के आदेश को चुनौती देने का निर्णय संबंधित अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने के शीर्ष अदालत के आदेश पर सरकार ने कहा था कि उसने घटना से संबंधित 98 गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। सभी की सुरक्षा का जायजा  नियमित रूप से लिया जाता है। टेलीफोन के माध्यम से पुलिस ने उनसे बातचीत की थी। गवाहों ने 20 मार्च को अपनी सुरक्षा पर संतोष व्यक्त किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 13:24:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>PM मोदी की सुरक्षा चूक पर 'SC' सख्त : पंजाब-हरियाणा HC के रजिस्ट्रार को सभी रिकॉर्ड रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ में हुई सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%82%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--sc--%E0%A4%B8%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%A4---%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BE-hc-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-3857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। SC ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले दिनों पंजाब दौरे से संबंधित सभी रिकॉर्ड  सुरक्षित और संरक्षित करने का शुक्रवार को निर्देश दिये है। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश के साथ ही मोदी की पिछले दिनों पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में कथित चूक मामले में केंद्र और पंजाब द्वारा गठित दो अलग-अलग कमेटियों को याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए जांच नहीं करने का निर्देश दिया।</p>
<p><br /> शीर्ष अदालत ने चंडीगढ़ के महानिदेशक और एनआईए और एसपीजी सहित विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों के अन्य शीर्ष अधिकारियों से कहा है वे प्रधानमंत्री की यात्रा से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध  कराने में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल  की आवश्यक सहयोग करें। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कथित चूक के खिलाफ एनजीओ 'लॉयर्स वॉयस' की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते ये निर्देश दिया। यह याचिका गुरुवार को दायर की गई थी और इस मामले में विशेष उल्लेख के तहत शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई गई थी।<br /> <br /> उच्चतम न्यायालय पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक पर सवाल खड़े करने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई  की गुहार वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने लगाई थी। उन्होंने पंजाब के भटिंडा में गत बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के दौरान सुरक्षा चूक से जुड़े मामले को अत्यावश्यक बताते शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई आज (शुक्रवार को) करने के लिए सहमत हुई थी।<br /> <br /> याचिका में भविष्य में प्रधानमंत्री की'सुरक्षा चूक' की पुनरावृत्ति से बचने के लिए पूरे प्रकरण की 'कुशल और पेशेवर' जांच की मांग की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से भटिंडा के जिला न्यायाधीश  को सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित पूरे रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। गौरतलब है कि फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा नाकेबंदी किए जाने के कारण बुधवार को मोदी का काफिला फ्लाईओवर पर फंसा गया था। जिसके कारण मोदी को अपनी रैली और पंजाब में होने वाले अन्य कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 14:17:46 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व मिसेज राजस्थान प्रियंका चौधरी को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर व्यापारी से लाखों रुपए की वसूली करने के आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में चल रही पूर्व मिसेज प्रियंका चौधरी को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9D%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C/article-863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/rajasthan_high_court1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर व्यापारी से लाखों रुपए की वसूली करने के आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में चल रही पूर्व मिसेज राजस्थान प्रियंका चौधरी को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने यह आदेश आरोपी प्रियंका की जमानत याचिका को खारिज करते हुए दिए। कोर्ट ने कहा कि प्रकरण में अनुसंधान लंबित है, ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। <br /> <br /> आरोपी की ओर से जमानत याचिका में कहा गया कि पुलिस ने उसे झूठा फंसाया है। इसके अलावा उससे कोई पूछताछ और बरामदगी भी शेष नहीं है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए, जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील शेरसिंह महला ने कहा कि याचिकाकर्ता पर व्यापारी से 50 लाख रुपए से अधिक लेने का आरोप है। उसने पीड़ित को हनी ट्रैप में फंसाया और फिर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने की धमकी देकर रुपए और भूखंड मांगा। इसके अलावा आरोपी का पति पुलिस में तैनात है। पुलिस ने अनुसंधान पूरा नहीं किया है, इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आरोपी महिला की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jun 2021 16:37:30 +0530</pubDate>
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                <title>रिश्वत में अस्मत मांगने के आरोपी पूर्व RPS कैलाश बोहरा को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाइकोर्ट ने रिश्वत में अस्मत मांगने के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे आरोपी पूर्व आरपीएस कैलाश बोहरा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश पंकज भंडारी ने यह आदेश आरोपी बोहरा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-rps-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80/article-613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/rajasthan_high_court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने रिश्वत में अस्मत मांगने के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे आरोपी पूर्व आरपीएस कैलाश बोहरा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश पंकज भंडारी ने यह आदेश आरोपी बोहरा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया था कि प्रार्थी आरपीएस के पास परिवादी महिला का कोई काम लंबित नहीं था। परिवादी महिला आपराधिक छवि की महिला है, जिसने गत जुलाई माह में अपने होने वाले पति के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था, जिसमें प्रार्थी की सिफारिश पर पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया था। ऐसे में प्रार्थी पर यह आरोप लगाना गलत है कि उसने परिवादी महिला से रिश्वत की मांग की। <br /> <br /> याचिका में बताया गया कि गत 14 मार्च को परिवादी महिला ने प्रार्थी को आधा दर्जन मिस कॉल किए थे। इस पर प्रार्थी की ओर से इसका कारण पूछने पर महिला ने मुकदमे के संबंध में मिलकर कुछ दस्तावेज देने की बात कही, लेकिन एसीबी अधिकारियों से मिलीभगत कर प्रार्थी को फंसाया गया। इसके अलावा प्रार्थी का कमरे से सड़क पर देखने के लिए कांच का बहुत बड़ा पारदर्शी शीशा लगा हुआ है, जिसके चलते कमरे में होने वाली घटना को बाहर से देखा जा सकता है। इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यदि आरोपी को जमानत का लाभ दिया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 17:41:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निजी कॉलेज स्थापित करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की भूमि के आकार में अंतर क्यों रखा: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि निजी कॉलेज स्थापित करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की भूमि के आकार में अंतर क्यों रखा गया है। न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह आदेश श्री राज राजेश्वरी शिक्षण समिति की याचिका पर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%BE--%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F/article-367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/rajasthan_high_court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि निजी कॉलेज स्थापित करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की भूमि के आकार में अंतर क्यों रखा गया है। न्यायाधीश अशोक गौड़ ने यह आदेश श्री राज राजेश्वरी शिक्षण समिति की याचिका पर दिए। याचिका में कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में वर्ष 2014 तक निजी कॉलेज स्थापित करने के लिए दस एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई थी। वहीं अब राज्य सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग आकार की भूमि होना निर्धारित कर दिया है। <br /> <br /> याचिका में बताया कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र में निजी कॉलेज स्थापित करने के लिए 2 हजार वर्गमीटर भूमि होना तय किया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में इस भूमि को 4 गुणा बढ़ाकर 8 हजार वर्गमीटर कर दिया गया है। याचिका में कहा गया कि कॉलेज स्थापित करने के लिए राज्य सरकार दोहरे मापदंड नहीं अपना सकती है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 May 2021 16:45:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जन अनुशासन पखवाड़े में आवश्यक सेवा के तहत वकीलों को क्यों नहीं दी आवागमन की छूट, HC ने मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख गृह सचिव और जिला कलेक्टर से पूछा है कि जन अनुशासन पखवाडे में आवश्यक सेवा के तहत वकीलों को आवागमन की छूट क्यों नहीं दी गई। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश मनोज व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश दीनदयाल खंडेलवाल की जनहित याचिका पर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%96%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%B5%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9B%E0%A5%82%E0%A4%9F--hc-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AC/article-295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/rajasthan_high_court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख गृह सचिव और जिला कलेक्टर से पूछा है कि जन अनुशासन पखवाडे में आवश्यक सेवा के तहत वकीलों को आवागमन की छूट क्यों नहीं दी गई। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश मनोज व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश दीनदयाल खंडेलवाल की जनहित याचिका पर दिए।</p>
<p>याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने गत 30 अप्रैल को आदेश जारी कर महामारी रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़े के तहत 3 मई से 17 मई तक आवागमन को लेकर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। कुछ श्रेणियों को आवश्यक सेवा के तहत आवागमन की छूट दी गई है। राज्य सरकार ने इस अवधि में आवागमन को लेकर वकीलों को कोई छूट नहीं दी है, जबकि हाईकोर्ट प्रशासन ने गत 2 मई को आदेश जारी कर वकीलों को अति आवश्यक मुकदमों में पैरवी की छूट दी है।</p>
<p> </p>
<p>याचिका में कहा गया कि गत दिनों शाहपुरा पुलिस कोर्ट से लौट रहे एक वकील से दुर्व्यवहार कर चुकी है। याचिका में कहा गया कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर वकीलों को आवागमन में छूट दी जानी चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 May 2021 17:45:45 +0530</pubDate>
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                <title>HC का कर्मचारी चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोटिस, पूछा- 652 पदों पर ही क्यों दी नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोटिस जारी कर पूछा कि वर्ष 2018 में जब 700 पदों के लिए लाइब्रेरियन भर्ती निकाली गई तो दस्तावेज सत्यापन के बाद सिर्फ 652 पदों पर ही नियुक्ति क्यों दी गई। न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार ने यह आदेश ममता वर्मा की याचिका पर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hc-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B8--%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9B%E0%A4%BE--652-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/rajasthan_high_court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोटिस जारी कर पूछा कि वर्ष 2018 में जब 700 पदों के लिए लाइब्रेरियन भर्ती निकाली गई तो दस्तावेज सत्यापन के बाद सिर्फ 652 पदों पर ही नियुक्ति क्यों दी गई। न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार ने यह आदेश ममता वर्मा की याचिका पर दिए। याचिका में बताया कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने लाइब्रेरियन के 700 पदों के लिए मई 2018 में भर्ती निकाली थी। जिसमें मेरिट में आने पर याचिकाकर्ता को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। <br /> <br /> याचिका में कहा गया कि बोर्ड की ओर से दस्तावेज सत्यापन के बाद सिर्फ 652 पदों पर ही नियुक्तियां दी जा रही है और दस्तावेज सत्यापन होने के बाद भी याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दी गई है। याचिका में कहा गया कि भर्ती में धांधली को लेकर एसओजी भी जांच कर रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 May 2021 12:17:08 +0530</pubDate>
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