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                <title>14 year old - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एमबीएस अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा खुद बीमार, 14 साल पुरानी गाड़ियों से ढो रहे गंभीर मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[एडवांस लाइफ सपोर्ट की जरूरत, बेसिक सुविधाओं से चल रहा काम; 5 में से 2 एम्बुलेंस अगले साल होंगी एक्सपायर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital%E2%80%99s-ambulance-service-ailing--critically-ill-patients-transported-in-14-year-old-vehicles/article-165442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडोती संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र एम.बी.एस. अस्पताल में गंभीर मरीजों को लाने-ले जाने का जिम्मा संभाले एम्बुलेंस का बेड़ा आधे से ज्यादा पूरी तरह बूढ़ा हो चुका है। अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं के चलते मरीजों को 14 साल पुरानी खटारा गाड़ियों में शिफ्ट करने को मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल के बेड़े में शामिल 5 एम्बुलेंसों में से 2 वैन अगले साल अपनी मियाद पूरी कर 'एक्सपायर' हो जाएंगी। इसके बावजूद नई गाड़ियों की व्यवस्था को लेकर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रहा है।</p>
<p><strong>एमआरआई के लिए एमएमसीएच के फेरे</strong><br />अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई जांच के लिए न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाना पड़ता है। इसके लिए अस्पताल की एम्बुलेंस को प्रतिदिन 15 से 20 फेरे लगाने पड़ते हैं। दिन-रात लगातार चलने के कारण ये पुरानी गाड़ियां कभी भी रास्ते में जवाब दे सकती हैं।</p>
<p><strong> नाम की एम्बुलेंस</strong><br />एक ही एम्बुलेंस में कई मरीजाें को ले जाया जाता है ऐसे में बीच रोड पर यदि कोई अनहोनी या किसी मरीज की तबीयत ज्यादा खराब हो जाए तो उन्हें लाईफ सपोर्ट के लिए अलग से दुसरी एम्बुलेंस का इंतजार करना पडेगा। एक साथ कई मरीजाे को लेकर जाने पर कई बार तो आक्सी जन का सिलेडर ही नहीं रखा जाता। सवाल यह भी है कि एक से ज्यादा मरीजो को लेकर जा रही एम्बुलेंस में आक्सीजन जैसी इमरजेन्सी मे केवल एक ही मरीज को सुविधा मिल सकती है बाकी मरीजाे के लिए तो यह केवल एक सवारी गाडी ही है।</p>
<p><strong>ऑक्सीजन सिलेंडर रखने तक की जगह नहीं</strong><br />एमबीएस अस्पताल के पास कागजों में कुल 5 गाड़ियां दर्ज हैं जिनमें 2 मारुति वैन, 2 क्रूजर और 1 मारुति इको एम्बुलेंस शामिल हैं। जमीनी हकीकत यह है कि इन गाड़ियों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का भारी अभाव है। गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन स्थिति में जो क्रूजर एम्बुलेंस लगाई गई हैं, उनमें ऑक्सीजन सिलेंडर तक रखने का उचित स्थान नहीं है। ऐसे आक्सीजन सिलेन्डर काे रखने के लिए रस्सियों से सीट के पीछे बांधना पडता है। किसी गंभीर मरीज को ले जाते समय रास्ते में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>ठेके के ड्राइवरों के भरोसे आपातकालीन सेवा</strong><br />अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा चालकों की भारी कमी से भी जूझ रही है। बेड़े के लिए स्वीकृत 4 स्थायी चालकों के पदों में से 1 पद लंबे समय से खाली पड़ा है। कार्यरत 3 स्थायी चालकों में से केवल 1 (इंचार्ज) एमबीएस में तैनात है, जबकि चालक राजेंद्र कुमार को मेडिकल कॉलेज में और महावीर सिंह को प्रिंसिपल के ड्राइवर के रूप में डेपुटेशन पर लगा रखा है। नतीजतन, आपातकालीन एम्बुलेंसों के संचालन की कमान निजी संवेदक के ठेका चालकों के हाथों में सौंप दी गई है।</p>
<p><strong>मांग का प्रस्ताव ही नहीं</strong><br />एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह के अनुसार अस्पताल में फिलहाल 5 एम्बुलेंस संचालित हैं। 14 साल पुरानी दो गाड़ियों को हटाने या नई गाड़ियों की खरीद के लिए फिलहाल कोई आधिकारिक प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का मानना है कि प्रपोजल देने पर भामाशाहों या सरकारी बजट से नई गाड़ियां उपलब्ध हो जाएंगी।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अस्पताल के अधीन एम्बूलेेेंसों व चालकों को प्रशानिक रूप से उपयोग में लिया जा रहा है। संवेदक से स्टाफ लगाया गया है। गम्भीर मरीजों के समय 108 एम्बूलेन्स काे बुलाया जाता है।<br /><strong>-डॉ. राकेश सिंह, अधीक्षक एमबीएस असपताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 15:30:49 +0530</pubDate>
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