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                <title>आंगनबाड़ी में मासूमों को एक्सपायरी पोषाहार, टूटे खिलौने और जर्जर छत</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं पोषाहार पकाने के लिए नहीं अलग कमरा, चूहों ने कुतरे बच्चों के खाने के पैकेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/expired-nutritional-food--broken-toys--and-a-dilapidated-roof-for-innocent-children-at-the-anganwadi/article-166018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)65.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुनहरे भविष्य का सपना आंखों में लिए नन्हे-मुन्ने बच्चे जब आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचते हैं तो वहां उनका सामना किताबों और खिलौनों की दुनिया से कम, बदहाल व्यवस्थाओं और खतरों से ज्यादा होता है। टूटे खिलौनों के बीच बच्चे बैठने को मजबूर हैं और जिस कमरे में पढ़ाई होती है, वहीं पोषाहार पकाया जा रहा है। केन्द्रों पर पोषाहार के बड़े-बड़े कट्टे रखे हैं और गैस चूल्हे की आग से हादसे का खतरा बना हुआ है। एक केन्द्र पर तो एक्सपायरी डेट का पोषाहार भी मिला। नयापुरा क्षेत्र के कालपुरा सेकंड स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र की तस्वीर व्यवस्था की गंभीरता बताने के लिए काफी है। एक कमरे में चल रहे इस केन्द्र की छत की पट्टियां टूट चुकी हैं। कमरे को गिरने से रोकने के लिए लोहे के एंगल लगाए गए हैं। बच्चों के खेलने के लिए रखे खिलौने भी टूटे पड़े हैं। इसी कमरे में पोषाहार के कट्टे रखे हैं और गैस पर पोषाहार भी बनाया जाता है। ऐसे में जरा सी चूक बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।</p>
<p><strong>45 बच्चों का नामांकन, पहुंचते हैं 8 से 10</strong><br />कालपुरा प्रथम केन्द्र की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। केन्द्र में पोषाहार बनाने के लिए अलग जगह नहीं है। पढ़ाई और खाना बनाने का काम एक ही कमरे में होता है। नामांकित बच्चों की संख्या 45 है, लेकिन छोटा कमरा होने के कारण एक समय में 8 से 10 बच्चे ही आ पाते हैं। बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त खिलौने तक नहीं हैं। केन्द्र पर कार्यरत निशा आजाद के अनुसार आसपास के लोगों से टूटे-फूटे खिलौने मांगकर बच्चों को खेलने के लिए दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>बच्चों को खिलाया जा रहा था एक्सपायरी पोषाहार</strong><br />खाईरोड प्रथम केन्द्र पर मूंग-दलिया-चावल की खिचड़ी के पैकेट एक्सपायरी मिले। सहायिका रेणू मीणा के अनुसार केन्द्र में 48 बच्चे नामांकित हैं, जबकि 10 से 15 बच्चे ही नियमित आते हैं। बच्चों की कम उपस्थिति के कारण पोषाहार बच जाता है और नया पोषाहार आने पर पुराना पड़ा-पड़ा एक्सपायरी हो जाता है। सवाल यह है कि जब पोषाहार की तारीख निकल चुकी थी तो उसे बच्चों तक पहुंचने से पहले हटाया क्यों नहीं गया?</p>
<p><strong>चूहों ने कुतरे पोषाहार के पैकेट</strong><br />खाईरोड द्वितीय केन्द्र में पोषाहार के कट्टे भरे पड़े थे, लेकिन चूहों ने कई पैकेट कुतर दिए। इससे पोषाहार की स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्यकर्ता सुनीता मोदी ने बताया कि 17 बच्चों का पंजीयन है, लेकिन करीब आठ बच्चे ही आते हैं। पोषाहार बनाते समय पंखा बंद करना पड़ता है, जिससे गर्मी में बच्चों को परेशानी होती है।</p>
<p><strong>दलिए में छिलके और पोषाहार में कंकर</strong><br />नयापुरा पावर हाउस के मालीपाड़ा में खाईरोड के केन्द्र को लेकर स्थानीय लोगों ने पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि दलिए में दाल की जगह छिलके और पोषाहार में कंकर तक निकलते हैं। बच्चों को ऐसा भोजन पसंद नहीं आता। यदि सरकार को देना ही है तो वह कम पोषाहार दे लेकिन गुणवत्तापूर्ण दे, जिससे बच्चों का पेट तो भर सके।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जिले में 1,282 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। इनमें शहरी क्षेत्र और लाडपुरा के कुछ क्षेत्र को शहरी क्षेत्र में शामिल किया है। दोनों को मिलाकर 341 आगनबाड़ी केन्द्र है। शहरी क्षेत्र में 285 केन्द्र किराए के कमरों में चल रहे हैं। जिले में 3 से 6 वर्ष आयु के 27 हजार 625 बच्चे आंगनबाड़ी केन्द्रों से जुड़े हैं। शहरी क्षेत्र में 5 हजार 751 बच्चे आंगनबाड़ी केन्दों में अध्ययनरत है। केन्द्रों की बदहाल व्यवस्था केवल भवनों की समस्या नहीं, बल्कि हजारों मासूमों की सुरक्षा और पोषण से जुड़ा सवाल है।</p>
<p>खिलौनों के लिए अलग बजट नहीं आता, इन्हें जनसहयोग से मंगवाना पड़ता है। उनका कहना है कि केन्द्र पर आया पोषाहार घटिया या एक्सपायरी नहीं हो सकता; संभव है कि समय पर वितरण नहीं होने से वह एक्सपायरी हो गया होगा।<br /><strong>- आलोक शर्मा, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 15:32:27 +0530</pubDate>
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