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                <title>JDA की नई पहल: भूमि आवंटन से जुड़ी हर जानकारी अब आमजन के लिए उपलब्ध, बढ़ेगी जवाबदेही और पारदर्शिता</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वर्ष 2014 से 2026 तक के भूमि आवंटन का पूरा रिकॉर्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है। आमजन अब घर बैठे आवंटन तिथि, भूखंड संख्या और आवेदक का नाम देख सकेंगे। वर्ष 2002 से 2013 तक का डेटा भी जल्द अपलोड होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jdas-new-initiative-every-information-related-to-land-allocation-will/article-154643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jda.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। अब वर्ष 2014 से 2026 तक भूमि के बदले भूमि आवंटन तथा विभिन्न संस्थाओं को किए गए भूमि आवंटन की पूरी जानकारी जेडीए की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी गई है। इससे आमजन घर बैठे आवंटनों का विस्तृत ब्यौरा देख सकेंगे। जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि वेबसाइट पर जोन, योजना का नाम, भूखंड संख्या, साइज, भूमि उपयोग, प्रॉपर्टी आईडी, आवेदक का नाम और आवंटन तिथि सहित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं।</p>
<p>इसके अलावा शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सेवा, खेल, शोध और जनसुविधाओं से जुड़ी संस्थाओं को आवंटित भूमि का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने बताया कि इससे भूमि आवंटन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रांतियों की गुंजाइश खत्म होगी। जेडीए आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2002 से 2013 तक के रिकॉर्ड को भी वेबसाइट पर अपलोड करने की प्रक्रिया जारी है। तकनीकी कार्य पूरा होते ही यह जानकारी भी आमजन के लिए उपलब्ध करा दी जाएगी।इस पहल से प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होगा और संस्थागत विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:52:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जनगणना-2027 में स्व-गणना के लिए सरकारी कर्मचारियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कर्मचारियों को 15 मई तक स्व-गणना (Self-Enumeration) पूरी करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की पहल के बाद अब प्रशासन की बारी है। वेब पोर्टल के माध्यम से सटीक आंकड़े जुटाना इस राष्ट्रीय मिशन की प्राथमिकता है, जिससे विकास की नई राह खुलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-ensure-100-participation-of-government-employees-for-self-enumeration/article-153068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/v.-srinivass.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत राज्य के समस्त राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की स्व-गणना में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को 15 मई 2026 से पूर्व स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें और आवश्यक निर्देश जारी करें। जारी निर्देशों के अनुसार जनगणना-2027 का प्रथम चरण राजस्थान में 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।</p>
<p>इससे पहले 1 मई से 15 मई 2026 तक निर्धारित वेब पोर्टल सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल⁠ पर स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि 1 मई को महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं स्व-गणना कर प्रदेशवासियों के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में शत-प्रतिशत एवं सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-ensure-100-participation-of-government-employees-for-self-enumeration/article-153068</link>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:27:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहली डिजिटल जनगणना आज से शुरू: ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुली, प्रगणक को घर पर दिखानी होगी एसई आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना शुरू हो गई है। वाराणसी के नागरिक 21 मई तक पोर्टल पर जाकर अपनी 'स्व-गणना' कर सकते हैं। 33 सवालों के बाद प्राप्त 11 अंकों की SE ID भविष्य के सर्वे को आसान बनाएगी। यह प्रक्रिया विकास का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/first-digital-census-starts-from-today-self-enumeration-window-opened-enumerator/article-152984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jan-ga.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना-2027 गुरुवार से शुरु हो गयी। इसके पहले चरण के तहत ‘स्व-गणना’ की खिड़की खुल गई है, जो 21 मई तक चलेगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जनपदवासियों से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। नागपाल ने बताया कि केंद्र सरकार की इस पहल के तहत नागरिकों को पहली बार आधिकारिक पोर्टल (https:e.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना और अपने परिवार का विवरण दर्ज करने की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि नागरिक अपने मोबाइल नंबर और नाम के माध्यम से पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। ओटीपी सत्यापन के बाद उन्हें 33 सवालों की प्रश्नावली भरनी होगी। विवरण सफलतापूर्वक जमा होने पर एक 11 अंकों की ‘एसई आईडी’ प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है।</p>
<p>नगर आयुक्त ने कहा कि ‘स्व-गणना’ करने वाले परिवारों को 22 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे के दौरान काफी सुविधा मिलेगी। जब प्रगणक घर पहुंचेंगे, तो उन्हें केवल अपनी एसई आईडी दिखानी होगी। यदि डेटा रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी। नगर आयुक्त ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और डेटा एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान आपसे किसी भी प्रकार की बैंक जानकारी या आधार संख्या जैसे दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। प्रगणक के आने पर उनका आधिकारिक पहचान पत्र अवश्य देख लें। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विकास योजनाओं की नींव तैयार करने का आधार है, न कि नागरिकता का प्रमाण।</p>
<p>(हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग) मई-जून 2026 में चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या, साक्षरता, रोजगार और जातिगत डेटा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। नगर निगम प्रशासन ने इस डिजिटल जनगणना को सफल बनाने के लिए प्रगणकों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और आम जनता से इस ‘जन अभियान’ में जुड़ने की अपील की है। नगर आयुक्त ने कहा, “वाराणसी को एक स्मार्ट और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए सटीक डेटा अनिवार्य है। मेरा शहरवासियों से अनुरोध है कि सात से 21 मई के बीच पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करें और डिजिटल इंडिया के इस महाकुंभ में सहभागी बनें।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:09:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गांव का नाम बदला तो एमएसपी पोर्टल पर अटका पंजीयन, किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[खेड़ारसूलपुर से खेड़ारामपुर होने के बाद आ रही तकनीकी दिक्कत, समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित किसान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-village-renaming-stalls-registration-on-msp-portal--farmers-distressed/article-148550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>खेड़ारामपुर। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण में तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव का नाम बदलने के बाद रिकॉर्ड और पोर्टल में अंतर होने से सैकड़ों किसान परेशान हैं। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य गेहूं खरीद केंद्र पर फसल बेचने के लिए एमएसपी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण गांव के नाम में बदलाव बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा कुछ समय पहले ग्राम खेड़ारसूलपुर का नाम बदलकर खेड़ारामपुर कर दिया गया। इसके बाद भू-राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी और गिरदावरी में नया नाम दर्ज हो गया है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र और एमएसपी पोर्टल पर अभी भी पुराने नाम खेड़ारसूलपुर से ही डाटा संचालित हो रहा है। किसान विष्णु अजमेरा और चंदन गहलोत ने बताया कि इस समस्या को लेकर राजफैड सहित संबंधित विभागों और अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>किसानों ने जिला कलेक्टर से लगाई गुहार</strong><br />किसानों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि एमएसपी पोर्टल और खरीद केंद्रों पर गांव के नाम में सुधार कर जल्द से जल्द ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कराया जाए, ताकि किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकें।</p>
<p>जब वे पंजीकरण के लिए एमएसपी पोर्टल पर गिरदावरी अपलोड करते हैं, तो गांव के नाम में अंतर के कारण दस्तावेज अपलोड नहीं हो पाते और तकनीकी त्रुटि सामने आ जाती है। इससे खेड़ारामपुर के सैकड़ों किसान पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं और समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित हो रहे हैं।<br /><strong>- सुरेश गुर्जर, किसान, खेड़ारामपुर</strong></p>
<p>एमएसपी पोर्टल पर गांव का नाम बदलने से आ रही पंजीकरण की समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और शीघ्र समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- विष्णु शर्मा, राजफैड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:28:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग की लापरवाही, सपने चकनाचूर</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की इस लापरवाही से हजारों अभिभावकों का बच्चों के एडमिशन के सपने पर पानी फिर गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department-s-negligence--dreams-shattered/article-118593"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/74582.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों अभिभावकों का सपना चकनाचूर हो रहा है। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन के लिए विभाग का शाला दर्पण पोर्टल कक्षावार रिक्त सीटों की संख्या वास्तविक सीटों से तीन गुना अधिक बता रहा है। जिससे अभिभावक भ्रमित हो रहे हैं और पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्त सीटों के आधार पर संबंधित स्कूलों में दाखिले के लिए रिपोर्टिंग कर रहे हैं। क्योंकि, पोर्टल पर प्रदर्शित सीटों की संख्या के अनुसार लॉटरी में चयनित बच्चों का नंबर आसानी से आ रहा होता है। जब अभिभावक स्कूलों में दस्तावेज जमा करवाने पहुंचते हैं, तब उन्हें वास्तिविक सीटों का पता लगता है, जो नाममात्र की होती है। विभाग की इस लापरवाही से हजारों अभिभावकों का बच्चों के एडमिशन के सपने पर पानी फिर गया। </p>
<p><strong>पोर्टल पर 25 रिक्त सीटें, वास्तविक सात ही</strong><br />महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। गत 17 जून को लॉटरी निकलने के बाद से अभिभावक वरियता क्रम के अनुसार पांच स्कूलों का चयन कर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। लेकिन, शाला दर्पण पर प्रदर्शित हो रही रिक्त सीटों की संख्या  वास्तविक संख्या से 3 गुना अधिक है। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरएसी कॉलोनी में पोर्टल पर कक्षा-6 के लिए 25 सीटें रिक्त दिखा रहा है। जबकि, वास्तिविक में यहां मात्र 7 ही सीटें हैं। इसी तरह श्रीनाथपुरम स्कूल की सीटें-27 दिख रही है, लेकिन यहां 9 ही सीट रिक्त है।  वहीं, कक्षा-1 में 24 सीटें नजर आ रही लेकिन हकीकत में 9 ही रिक्त हैं। यह स्थिति जिले के अधिकांश स्कूलों में बनी हुई है।</p>
<p><strong>गलती विभाग की, खामियाजा भुगत रहे अभिभावक</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि शाला दर्पण पोर्टल पर  प्रदर्शित हो रही कक्षावार रिक्त सीटों की संख्या के आधार पर ही तो हम संबंधित स्कूलों का चयन करेंगे। लेकिन पोर्टल तो वास्तविक सीटों से तीन गुना ज्यादा सीटें रिक्त दिखा रहा है। ऐसे में जिन बच्चों का लॉटरी में 20 नंबर है, उनके अभिभावक पोर्टल के आधार पर एडमिशन को लेकर आश्वस्त होकर रिपोर्टिंग कर दी। लेकिन, दस्तावेज जमा करवाने स्कूल जाते हैं तो पता लगता है कि वहां तो 9 ही सीटें रिक्त थी। लेकिन, तब तक अभिभावक आवेदन लॉक करवा चुका होता है। ऐसी स्थिति में वह दूसरे स्कूल में भी रिपोर्टिंग से वंचित हो जाता है। शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों विद्यार्थी एडमिशन से वंचित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे परिजन</strong><br />शिक्षा विभाग की गलती का खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। गुमानपुरा निवासी सत्येंद्र पारीक ने बताया कि  मामले को लेकर तीन दिन से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां न तो अधिकारी मिल रहे और न ही कोई समाधान बता रहा। छावनी के पुष्पेंद्र नायक का कहना है कि पिछले दिनों से डीओ सैकंडरी व एलीमेंट्री के चक्कर लगा रहा हूं। वहां मौजूद कर्मचारी बीकानेर मुख्यालय का हवाला देकर पल्ला झाड़ बैरंग लौटा रहे हैं। कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही। </p>
<p><strong>अनलॉक का मिले ऑप्शन, दोबारा निकले लॉटरी</strong><br />शिवपुरा निवासी महेश प्रजापति, दादाबाड़ी के सुरेंद्र गोयल, अखिलेश मेहरा का कहना है कि गलती विभाग की है, उनका पोर्टल गलत आंकड़ा दिखा रहा है। अभिभावक परेशान हो रहे हैं। पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर संबंधित स्कूल में एक बार रिपोर्टिंग किए जाने पर आवेदन लॉक हो जाता है। जिससे दूसरे स्कूल में रिपोर्टिंग का अवसर भी खत्म हो जाता है। ऐसे में शिक्षा विभाग पोर्टल की गलती सुधारें और अनलॉक का ऑप्शन भी देकर अभिभावकोें को दूसरे स्कूलों में रिपोर्टिंग का मौका दिया जाए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />20 जून को हमने महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरएसी कॉलोनी में कक्षा-6 के लिए की थी। यहां शाला दर्पण पोर्टल पर 25 सीटे रिक्त दिखाई दी। जबकि, बेटे का लॉटरी में 27 नंबर था। ऐसे में एडमिशन की उम्मीद थी। रिपोर्टिंग के बाद आवेदन जमा करवाने स्कूल पहुंचे तो वहां बताया कि सीटें तो 7 ही खाली थी, जो भर गई। ऐसे में बच्चे का प्रवेश नहीं हो पाया। शिक्षा विभाग को अपनी गलती सुधार कर दोबारा लॉटरी निकालनी चाहिए।<br /><strong>-वर्षा शर्मा, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>जब हम रिपॉर्टिंग के लिए श्रीनाथपुरम-बी स्कूल गए तो हम आश्वस्त थे कि बच्चे का एडमिशन हो जाएगा। क्योंकि पोर्टल पर कक्षा के लिए 27 सीटें रिक्त थी, जबकि, लॉटरी में बच्चे का नंबर 21 था। लेकिन, स्कूल जाने पर पता चला कि यहां तो 9 ही सीटें खाली हैं। अब हम क्या करें, बच्चे का एडमिशन नहीं हो पा रहा। जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में भी सम्पर्क किया लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। सरकार को हस्तक्षेप कर दोबारा लॉटरी निकालनी चाहिए ताकि, विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रह सके।<br /><strong>-लीला प्रजापति, शिवपुरा</strong></p>
<p>मामला संज्ञान में आया है। शाला दर्पण पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्त पदोें की संख्या में सुधार के लिए संबंधित स्कूल से पत्र मिला है। जिससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा रहे हैं।<br /><strong>-संतराम वर्मा, सहायक निदेशक महात्मा गांधी प्रकोष्ठ</strong></p>
<p>शाला दर्पण पर रिक्त सीटों की संख्या वास्तविक सीटों से अधिक प्रदर्शित हो रही है। इसमें सुधार के लिए हमने जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक को पत्र भेजा है।<br /><strong>- लोकेश जैन, शिक्षक आरएसी कॉलोनी स्कूल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:03:30 +0530</pubDate>
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                <title>18 दिन बाद भी पोर्टल पर शो नहीं हो रहे परिणाम, फर्स्ट ग्रेड एग्जाम की पात्रता पर लटकी तलवार  </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा यूनिवर्सिटी ने यूजी व पीजी के सैकंड और फोर्थ सेमेस्टर के  परिणाम तो जारी कर दिए लेकिन रिवोलेशन के रिजल्ट पोर्टल पर शो नहीं हो रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/results-not-showing-on-portal-even-after-18-days/article-118102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(1)42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी ने यूजी व पीजी के सैकंड और फोर्थ सेमेस्टर के  परिणाम तो जारी कर दिए लेकिन रिवोलेशन के रिजल्ट पोर्टल पर शो नहीं हो रहे। जबकि, विवि ने इन्हीं सेमेस्टर के एग्जाम फॉर्म भी निकाल दिए हैं। ऐसे में विद्यार्थी असमंजस में है कि पुन:मूल्यांकन में नंबर बढ़ने पर पास होते हैं तो अगले सेमेस्टर की तैयारी करें या फेल होने पर इसी सेमेस्टर के एग्जाम फॉर्म फिर से भरें। यह तय नहीं हो पा रहा। विवि की लेटलतीफी से परेशान विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। </p>
<p><strong>रात 9.30 बजे तक भी अपलोड नहीं हुए रिजल्ट </strong><br />विश्वविद्यालय ने 2 जून को पीजी में सैकंड व फोर्थ सेमेस्टर  के पुन:मूल्यांकन का परिणाम जारी किया था। इसके बाद 12 जून को यूजी के सैकंड सेमस्टर रिवोलेशन का रिजल्ट जारी किया था, जो 20 जून की रात 9.30 बजे तक भी पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए। ऐसे में 18 दिन से विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। </p>
<p><strong>40% विद्यार्थी हो रहे परेशान</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा के निर्वतमान छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष मीणा का कहना है कि विवि की लेटलतीफी के कारण 40% विद्यार्थियों के परिणाम शो नहीं हो रहे। गत 8 व 9 जून को सवाईमाधोपुर सहित शहर के कई विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के परीक्षा में स्थित शिकायत समाधान  विंडों पर गए तो वहां कार्यरत कर्मचारियों ने 15 जून तक पोर्टल पर रिजल्ट अपलोड किए जाने की बात कही थी लेकिन अब तक रिजल्ट का अता पता नहीं है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>इधर, एग्जाम फॉर्म भरें या नहीं, असमंजस में विद्यार्थी </strong><br />यूनिवर्सिटी ने यूजी व पीजी के सैकंड व फोर्थ सेमेस्टर के एग्जाम फॉर्म निकाल दिए हैं। जिसकी अंतिम तिथि 26 जून है। ऐसे में विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि वह परीक्षा फॉर्म भरे या नहीं। क्योंकि, जो विद्यार्थियों पुन:मूल्यांकन   के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, उनमें असमंजस बना हुआ है कि यदि, वह पास हो जाते हैं तो वे अगले सेमेस्टर के एग्जाम फॉर्म भरेंगे यदि फेल हो जाते हैं तो फिर से सेकंड व फोर्थ सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म भरेंगे। इसी कशमकश में आवेदन की अंतिम तिथि निकल गई तो यह विद्यार्थी न इधर के रहेंगे न उधर के।  </p>
<p><strong>रोल नंबर डालते ही पोर्टल बता रहा इनवेलिड </strong><br />छात्र कैलाश कुमार, योगेंद्र नथावत ने बताया कि विवि के पोर्टल पर सही रोल नंबर डालने पर भी इनवेलिड बता रहा है। जबकि, पूर्व में यूनिवर्सिटी जाकर बात की तो वहां कर्मचारियों ने जवाब दिया कि रिलोवेशन के रिजल्ट अभी कंप्लीट नहीं हुए हैं, कंप्लीट होने पर अपलोड कर दिए जाएंगे।  </p>
<p><strong>करौली व सवाई माधोपुर तक के विद्यार्थी काट रहे चक्कर </strong><br />विद्यार्थियों का कहना था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि हम चरणबद्ध तरीके से परिणाम जारी करते हैं, यदि, ऐसा है तो विवि को नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए ताकि करौली,सवाई माधोपुर,गंगापुर सिटी,झालावाड़ दूर-दूराज से किराया लगाकर विवि आने वाले छात्रों को चक्कर नहीं काटने पड़े।</p>
<p><strong>फर्स्ट ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा से वंचित होने का खतरा</strong><br />राजस्थान लोकसेवा आयोग की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग में फर्स्ट ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन 23 जून से होना है। जिसके लिए विद्यार्थियों की यूजी व पीजी दोनों की डिग्री कम्पलीट होना  जरूरी है। लेकिन, कई विद्यार्थी ऐसे हैं, जो एमए, एमएससी व एमकॉम के सैकंड व फोर्थ सेमेस्टर के पुन:मूल्यांकन का फॉर्म भरा था, जिनका परिणाम अब तक नहीं आने से उनकी डिग्री अधूरी पड़ी है।  यदि, नंबर बढ़ने पर पास होते हैं तो उनकी पीजी की डिग्री कम्पलीट हो जाएगी और वे भर्ती परीक्षा देने के पात्र हो सकेंगे। ऐसे में विवि को विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए जल्द से जल्द पुन:मूल्यांकन के परिणाम अपलोड करने चाहिए। <br /><strong>-आशीष मीणा, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>एग्जाम फॉर्म भरुं या अगले सेमेस्टर की तैयारी करुं</strong><br /> मैं बीएससी फोर्थ सेमेस्टर का छात्र हूं। सेकंड सेमेस्टर में पुन:मूल्यांकन का फॉर्म भरा था। मेरा अभी तक भी रिजल्ट साइड पर अपलोड नहीं हुआ है। ऐसे में 7 दिन पूर्व सवाईमाधोपुर से कोटा आकर विवि गया था तो वहां कार्यरत कर्मचारियों ने एक-दो दिन में रिजल्ट अपलोड करने की बात कही थी। लेकिन अब तक नहीं हुआ। वहीं, यूनिवर्सिटी में हमारे एग्जाम फॉर्म भी निकल दिए हैं, अब असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि मैं फिर से फोर्थ सेमेस्टर का एग्जाम फॉर्म भरुं या अगले सेमेस्टर कीतैयारी करुं। <br /><strong>-अभिषेक कुमार, छात्र सवाईमाधोपुर  </strong></p>
<p><strong> फर्स्ट ग्रेड के पेपर का क्या होगा</strong><br />मैं एमएससी फोर्थ सेमेस्टर की छात्रा हूं। मेरा थर्ड सेमेस्टर के रिवोलेशन का रिजल्ट अब तक नहीं आया। जबकि, मेरा फोर्थ सेमेस्टर क्लियर हो गया है। इन दिनों स्कूल भर्ती परीक्षा फर्स्ट ग्रेड की तैयारी कर रही हूं, जिसका पेपर 23 जून को है। ऐसे में जल्द से जल्द रिजल्ट अपलोड होना जरूरी है ताकि डिग्री कम्पलीट होने पर मैं एग्जाम के लिए पात्र हो सकूं।  <br /><strong>-नीतेश कुमारी, छात्रा एमएससी गवर्नमेंट साइंस कॉलज कोटा</strong></p>
<p>मेरा सेकंड सेमेस्टर का रिजल्ट 12 तारीख को आ चुका है। जिसमें एक विषय में बैक आई थी। इसलिए मैंने पुन:मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। लेकिन, अब तक रिजल्ट अपलोड नहीं हुआ। इस वजह से फोर्थ सेमेस्टर का एग्जाम फॉर्म भरने में दिक्कत आ रही है। विवि को जल्द रिजल्ट अपलोड करना चाहिए। <br /><strong>-लक्की नागर, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज कोटा </strong></p>
<p>हमारी तरफ से सभी विद्यार्थियों के पुन:मूल्यांकन के परिणाम  शुक्रवार को ही वेबसाइड पर अपलोड कर दिए गए हैं। अब परिणाम शो हो रहे हैं। <br /><strong>-प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 16:48:21 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - किसान सम्मान निधि पोर्टल पर वर्षों बाद आया मोईकलां का नाम</title>
                                    <description><![CDATA[फॉर्मर आईडी के लिए किसानों को करना पड़ सकता है इंतजार । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---moikalan-s-name-appeared-on-the-kisan-samman-nidhi-portal-after-years/article-116352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर मोईकलां का नाम आने से एक तरफ जहां किसानों की बड़ी समस्या का समाधान हो गया है, वहीं फॉर्मर आईडी के लिए अभी उनको इंतजार करना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार 03 जून के अंक में दैनिक नवज्योति ने क्षेत्र के किसानों की इस समस्या को उठाते हुए प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने वाले दिन ही पोर्टल पर मोईकलां का नाम आने से किसानों ने राहत की सांस ली है। लेकिन पोर्टल में मोईकलां का नाम नहीं आने से पूर्व में इस क्षेत्र के किसानों की फॉर्मर आईडी नहीं बन पाई थी। साथ ही अब फॉर्मर आईडी के लिए लगने वाले शिविर भी बंद कर दिए गए हैं। जिससे फॉर्मर आईडी के लिए अब यहां के किसानों को इंतजार करना पड़ेगा।  </p>
<p>गौरतलब है कि कई वर्ष से पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर मोईकलां का नाम प्रकाशित नहीं होने से किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए परेशान होना पड़ रहा था। अभी तक पोर्टल पर मोईकलां की जगह मोरियाहेड़ी गांव का नाम आता था। सांगोद तहसील क्षेत्र में इस नाम का कोई गांव ही नहीं है। यह गांव कनवास तहसील का हिस्सा बताया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर कोई भी किसान योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करता था तो मोईकलां का नाम ही प्रकाशित नहीं होता था। जिसके चलते सैंकड़ों किसानों को परेशान होना पड़ रहा था। समस्या को लेकर किसानों की ओर से उर्जा मंत्री हीरालाल नागर को अवगत करवाया गया था। वहीं पीएम किसान सम्मान निधि के नोडल अधिकारी बलविंदर सिंह गिल ने बताया कि उर्जा मंत्री नागर के निर्देश पर राज्य एवं जिला स्तर पर निरंतर पत्राचार के चलते आखिरकार मोईकलां का नाम पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर प्रकाशित हो गया। </p>
<p><strong>अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई समस्या </strong><br />किसानों की एक बड़ी समस्या भले ही खत्म हो गई। परन्तु दूसरी समस्या अभी किसानों के सामने खड़ी हुई है। जो भी किसान पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करेगा तो उसको किसान फॉर्मर आईडी के नम्बर डालना होता है। वैसे लगभग मोईकलां को छोड़कर सभी पंचायतों पर फॉर्मर आईडी शिविर लगाए जा चुके हैं। यहां पर शिविर इसलिए नही लगाया गया कि किसान फॉर्मर आईडी पोर्टल पर भी मोईकलां का नाम नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>योजना का लाभ लेने में होगी आसानी</strong><br />मोईकलां निवासी पवन यादव, राकेश यादव व ई-मित्र संचालक योगेन्द्र मेरोठा ने बताया कि पोर्टल पर मोईकलां का नाम प्रदर्शित होने के बाद अब किसानों को योजना का लाभ लेने में आसानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jun 2025 17:12:59 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र सरकार के अधिकृत पोर्टल पर मोईकलां का नाम गायब, फार्मर आईडी नहीं बनने से किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[सांगोद तहसील के इस गांव का नाम केंद्र सरकार के पोर्टल पर नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/moikalan-s-name-missing-from-the-official-portal-of-the-central-government/article-116249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer14.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। केंद्र सरकार के पोर्टल से कोटा जिले के मोईकलां का नाम नहीं होने से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर व जिला कलक्टर रविंद्र गोस्वामी को भी इस समस्या से अवगत करवा चुके हैं। लेकिन अभी तक इस परेशानी से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार सिंगल पंचायत का गांव मोईकलां जिसकी आबादी 5500 के करीब है, केंद्र की सरकारी योजनाओं से वंचित है। सांगोद तहसील के इस गांव का नाम केंद्र सरकार के पोर्टल पर नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि मोईकलां सर्च करने पर पोर्टल पर कनवास तहसील के मौर्यहरी गांव का नाम आता है। जिससे कई बार डॉक्यूमेंट सत्यापन में भी समस्या आ जाती है।</p>
<p><strong>फार्मर आईडी नहीं बनने से किसान परेशान</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र की योजना फॉर्मर किसान आईडी कार्ड को लेकर शिविर में कोड जनरेट नहीं होने से किसानों की फार्मर आईडी भी नहीं बन पा रही है। जिससे क्षेत्र के किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसी प्रकार आयुष्मान भारत, मातृ वंदना योजना, ई-श्रम कार्ड जैसी केंद्र सरकारी की योजनाओं से मोईकलां पंचायत के निवासी वंचित हैं। </p>
<p><strong>सरकारी सुविधाओं से सज्जित पंचायत</strong><br />मोईकलां पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय पशु चिकित्सालय, बैंक, पुलिस चौकी, ग्राम सेवा सहकारी समिति, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका विद्यालय, आयुर्वेदिक औषधालय, पोस्ट आॅफिस, नर्सरी जैसी तमाम सरकारी सुविधाएं मौजूद हैं। फिर भी केंद्र सरकार के पोर्टल पर गांव का नाम नहीं है। </p>
<p><strong>इनका  कहना</strong><br />इस बारे में 3 माह पूर्व तहसीलदार को लिखा था। परन्तु पोर्टल से मोईकलां का नाम गायब है। जिसके चलते फार्मर कार्ड, आयुष्मान भारत, मातृ वंदना योजना, ई-श्रम कार्ड जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है। इस बारे में स्थानीय अधिकारियों से जानकारी मांगी तो उन्होंने कुछ कहने से मना कर दिया।<br /><strong>-पवन यादव, भाजपा नेता, मोईकलां </strong></p>
<p>पोर्टल पर मोईकलां का नाम नहीं होने से किसानों का सम्मान निधि के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। जब पोर्टल पर मोईकलां डाला जाता है तो माौर्यहरी गांव का नाम आता है। इसके लिए अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया है। परन्तु इसे सुधारा नहीं गया है।<br /><strong>-योगेंद्र मेरोठा, ई-मित्र संचालक, मोईकलां</strong></p>
<p>केंद्र के पोर्टल में मोईकलां पंचायत नहीं होने की मौका स्थिति की रिपोर्ट बनाकर जिला स्तर पर भेज रखी है। जिला स्तर के अधिकारियों ने राज्य स्तर पर समस्त से अवगत कराया है। सम्बंधित मामले में जयपुर से ही आगामी कार्यवाही होगी। <br /><strong>-सपना कुमारी, एसडीएम, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 17:01:31 +0530</pubDate>
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                <title>कहां गए 9000 पेंशनर्स, नहीं कराया भौतिक सत्यापन</title>
                                    <description><![CDATA[ संदेह के दायरे में आ रहे पेंशनर ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-have-9000-pensioners-gone--physical-verification-not-done/article-99208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रहे लाभार्थियों को भौतिक सत्यापन कराना जरूरी है। सरकार ने भौतिक सत्यापन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की है। इस अवधि में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं कराने पर नए साल में पेंशनर्स की पेंशन अटक सकती है। कोटा जिले में 219606  पेंशनर्स हंै। इनमें से अब तक जिले में 210606 पेंशनर ने ही भौतिक सत्यापन करवाया है। जबकि 9000 पेंशनर अभी तक भौतिक सत्यापन से शेष है। इनमें से शहरी क्षेत्र में करीब 7000 और ग्रामीण क्षेत्र के 2000 पेंशनर्स हैं। पिछले एक साल से लगातार तिथि बढ़ाई जा रही है। इसके बावजूद इनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया है। इस कारण यह पेंशनर संदेह के दायरे में आ रहे हैं। </p>
<p><strong>सत्यापन कराने में ग्रामीण क्षेत्र के  पेंशनर आगे:</strong> विभागीय अधिकारियों के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पेंशन को चालू रखने के लिए हर साल भौतिक सत्यापन कराना होता है। कोटा जिले में 219606 पेंशनर्स हैं। इसमें सभी श्रेणियों के पेंशनर शामिल हैं। 31 दिसंबर अंतिम तिथि होने के बावजूद अभी भी कई पेंशनरों ने भौतिक सत्यापन नहीं करवाया है। जिले के शहरी क्षेत्र से 7 हजार और ग्रामीण क्षेत्र से 2 हजार पेंशनर सत्यापन से वंचित है। यानी सत्यापन कराने में जिले के ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनर आगे हैं। जबकि सत्यापन से वचिंत सबसे ज्यादा पेंशनर शहरी क्षेत्र के हैं। पिछले एक साल से पेंशन सत्यापन की तिथि बढ़ाई जा रही है। इसके बावजूद इनका सत्यापन नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>एक साल से बढ़ रही तारीख</strong><br />सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत प्रतिवर्ष पेंशनरों को पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए विभाग के पोर्टल पर ई-मित्र के माध्यम से वार्षिक भौतिक सत्यापन कराना आवश्यक होता है। पूर्व में भौतिक सत्यापन की तिथि 31 दिसम्बर 2023 निर्धारित की गई थी। निर्धारित तिथि निकलने के बाद भी काफी संख्या में पेंशनरों ने सत्यापन नहीं करवाया था। इसके बाद तिथि बढ़ाकर 31 जनवरी और फिर 31 मार्च कर दी थी। इसके बाद भी जिले में शत-प्रतिशत पेंशनरों का सत्यापन नहीं हो पाया था। अब सत्यापन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की गई। इस अवधि में भी सत्यापन नहीं कराने पर पेंशन बंद कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>विभागों को भेज दी वंचितों की सूची</strong><br />अधिकारियों के अनुसार कई बार तिथि बढ़ाने के बाद भी 9000 पेंशनरों ने अभी तक सत्यापन नहीं करवाया है। इनकी सूची नगर निगम और पंचायत समितियों में भेज रखी है। शहरी क्षेत्र के पेंशनरों के बारे में जानकारी करने के लिए नगर निगम को पत्र जारी किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनरों के बारे में पंचायत समितियों को लिखा गया है। अभी तक सत्यापन नहीं कराने वाले पेंशनरों के सम्बंध में इन विभागों से जानकारी जुटाने को कहा गया है। निगम को कई बार जिला कलक्टर के माध्यम से सत्यापन से वंचित पेंशनरों के बारे में सूची भेजी जा चुकी है। अब वंचित पेंशनरों का डाटा खंगालने के बाद ही इनके बारे में कुछ पता लग पाएगा। कई बार तिथि बढ़ाने के बाद भी सत्यापन नहीं करवाने के कारण अब जिले के 9000 पेंशनर संदेह के दायरे में आ रहे हैं।</p>
<p><strong>सत्यापन में दिक्कत तो यहां करें सम्पर्क</strong><br />पेंशनधारकों को वार्षिक भौतिक सत्यापन कराने के लिए ई-मित्र कियोस्क, राजीव गांधी सेवा केन्द्र, ई-मित्र प्लस आदि केन्द्रों पर फिंगर प्रिंट देना होगा। अंगुली की छाप नहीं देने वाले पेंशनर्स का भौतिक सत्यापन आइरिस स्कैन से भी कराया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से किसी पेंशनर का वार्षिक भौतिक सत्यापन नहीं होने की स्थिति में पेंशनर को पेंशन स्वीकृतकर्ता अधिकारी (विकास या उपखंड अधिकारी) के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अधिकारी की एसएसओ आइडी से एसएसपी पोर्टल पर संबंधित पेंशनर का पीपीओ नम्बर दर्ज करने पर उस पेंशनर के रजिस्टर्ड मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के आधार पर भौतिक सत्यापन किया जा सकेगा।फैक्ट फाइल</p>
<p><strong>कोटा जिले में पेंशनर-219606</strong><br /><strong>अब तक भौतिक सत्यापन-210606</strong></p>
<p>जिले में इतने पेंशनर वंचित-9000ं जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रहे लाभार्थियों को भौतिक सत्यापन कराना जरूरी है। सरकार ने भौतिक सत्यापन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की है। इस अवधि में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं कराने पर नए साल में पेंशनर्स की पेंशन अटक सकती है। <br /><strong>-सविता कृष्णिया, संयुक्त निदेशक, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2024 15:24:00 +0530</pubDate>
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                <title>डिजिटलाइज्ड होगी पुरासम्पदा, चोरी हुए तो लगा सकेंगे पता</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातत्व व सर्वेक्षण विभाग डिजिटल डाटा बेस करेगा तैयार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ancient-property-will-be-digitized--if-stolen--you-can-find-it/article-95330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग अपने ऐतिहासिक संग्रहालयों सहित सभी पुरासम्पदा का डिजिटल डाटा बेस तैयार करेगा। इससे पुरासम्पदा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आॅनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए केन्द्र सरकार ने एनएमएमए यानि राष्टÑीय स्मारक और पुरावशेष मिशन शुरू किया है। पहले चरण में विभाग के संग्रहालयों में संरक्षित पुरासंपदा का डिजिटल बेस कार्य किया जाएगा। इससे पहले पुरातत्व विभाग में आॅफलाइन रिकॉर्ड रखा जाता  था। अब पुरासम्पदा को डिजिटल करने की योजना बनाई गई है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विभाग के पास प्रत्येक पुरासम्पदा का डिजिटल डाटा एकत्र हो जाएगा। अगर कोई पुरासम्पदा गायब भी होगी तो विभाग पुलिस तक उसकी डिटेल रिपोर्ट भेज सकेगा। अभी पुलिस के पास डाटा नहीं होने से गायब पुरासम्पदा का पता लगाने में परेशानी होती है। अब आॅनलाइन डाटा होने से गायब पुरासम्पदा का पता लगाने में आसानी हो जाएगी।</p>
<p><strong>डिजिटल रिकॉर्ड के तीन बड़े फायदे</strong><br />देशभर के चिन्हित पुरावशेषों का डाटा विभागीय पोर्टल पर एकत्र हो जाएगा। उनकी आकृति, रंग रूप, भार और आकार का डाटा पोर्टल पर सिर्फ एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेगा। अभी वे फोटोग्राफ्स के आधार पर पुस्तकों में दर्ज है। वहीं अगर कोई पुरासम्पदा चोरी होती है तो विभाग पुलिस और इंटरपोल को विस्तृत डिटेल में धरोहर की जानकारी दे सकेगा, ताकि उस ऐतिहासिक धरोहर को ट्रेक किया जा सके। पोर्टल पर सभी पुरासम्पदा का डाटा एकत्र होने के बाद स्कॉलर्स को बड़ा फायदा मिल सकेगा। इससे उनको शोध करने के कार्य में आसानी होगी।</p>
<p><strong>इतिहासकारों और शोधार्थियों को मिलेगा लाभ</strong><br />भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की राष्टÑीय मिशन की गाइड लाइन के अनुसार स्मारकों, संग्रहालयों आदि में सहेजे गए  पुरासम्पदा का डिजिटल रिकार्ड एक साथ तैयार होगा। हजारों की संख्या में पुरासम्पदा का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। यह डाटा शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए काफी काम आएगा। वहीं देश विदेश के विद्यार्थियों को हमारी विरासत से रूबरू होने का मौका प्रदान करेगा। इस मिशन का उद्देश्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों तक भारत की ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी पहुंचाना है। </p>
<p><strong>हर पुरासम्पदा का होगा यूनिक नम्बर</strong><br />भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा देश की हर साइट पर यह कार्य किया  जाना प्रस्तावित किया गया है। इसमें पुरासम्पदा की लम्बाई,चौड़ाई और ऊंचाई का माप किया जाएगा। इसके बाद 360 डिग्री कोण से उसकी 3 डी फोटो तैयार की जाएगी। फोटो में यह भी ध्यान रखा जाएगा कि उसका रंग रूप वास्तविकता से अलग न दिखाई दे। इसके लिए विभाग द्वारा उच्च क्वालिटी के कैमरे इस्तेमाल किए जाएंगे। इसके बाद हर पुरासम्पदा को एक यूनिक नम्बर दिया जाएगा, जो केएलबी सीरिज से शुरू होगा। 21 बिंदुओं की गाइड लाइन फॉलो करने के बाद उस पुरासम्पदा की डिटेल विभाग की पोर्टल पर अपलोड होती रहेगी। फोटो खींचने से लेकर उसे संग्रहालय या स्मारक में सहेजने के लिए भी विभाग द्वारा दी गई गाइड लाइन को फॉलो करना होगा।</p>
<p>प्रारंभिक पाषाणकाल, मध्य पाषाणकाल, उत्तर पाषाणकाल, ताम्रयुग, लोहयुग, जनपद, मौर्य, शुंग, कुषाण से लेकर ब्रिटिशकाल तक के प्रमाण बिखरे पड़े हैं। बिखरी पुरा संपदाओं को सुरक्षित रखने के लिए यह मिशन काफी लाभदायक साबित होगा। वहीं सभी को ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में आॅनलाइन जानकारी भी मिल सकेगी।<br /><strong>- ओमप्रकाश, पुरा अन्वेषक </strong></p>
<p>भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग अपने ऐतिहासिक संग्रहालयों सहित सभी पुरासम्पदा का डिजिटल डाटा बेस तैयार करेगा। इससे पुरासम्पदा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आॅनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए केन्द्र सरकार ने एनएमएमए यानि राष्टÑीय स्मारक और पुरावशेष मिशन शुरू किया है। <br /><strong>- ललित कुमार, वरिष्ठ लिपिक, पुरातत्व विभाग कोटा  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 16:41:52 +0530</pubDate>
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                <title>24797 सफाई कर्मियों की भर्ती की लॉटरी में अभी लगेगा समय, डीओआईटी से तैयार नहीं हुआ पोर्टल</title>
                                    <description><![CDATA[डीएलबी निदेशक सुरेश ओला बताया कि निर्धारित केटेगिरी का रिजर्वेशन चेक करने में समय लग रहा है, पोर्टल के तैयार होने के बाद भर्ती की लॉटरी निकाल दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lottery-for-recruitment-of-24797-sanitation-workers-will-take-time/article-83762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्थानीय निकायों में 24797 रिक्त पदों पर होने वाली सफाई कर्मियों की भर्ती में अभी और समय लगने के आसार हैं। इसकी लॉटरी निकालने के लिए तैयार किए जाने वाले पोर्टल की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण देरी हो रही है।  </p>
<p>पूर्व की सफाई कर्मियों की भर्ती के अनुभव को देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग भर्ती में आरक्षित कैटिगरी के पदों को लेकर बारीकी से अध्ययन कर रहा है, ताकि लॉटरी निकलने के बाद भर्ती  किसी तरह की लीगल प्रक्रिया में नहीं अटक सके। इसके लिए डीएलबी डीओआईटी से एक पोर्टल तैयार करवा रहा है, जिसमें योग्य सभी आवेदनों को पोर्टल में डालकर लॉटरी निकाली जाएगी। डीएलबी निदेशक सुरेश ओला बताया कि निर्धारित केटेगिरी का रिजर्वेशन चेक करने में समय लग रहा है, पोर्टल के तैयार होने के बाद भर्ती की लॉटरी निकाल दी जाएगी। इस मामले में सीएमओ को भी अवगत करा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पिछले सप्ताह स्वायत्त शासन विभाग की समीक्षा बैठक में सफाई कर्मियों की लंबित भर्ती की आगामी 10 दिन में लॉटरी निकालने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग लॉटरी की कवायद में जुट है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 19:47:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन साल से राशन कार्ड में नहीं जुड़ रहे नए नाम </title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना काल में राशन कार्ड में सदस्यों के नए नाम शामिल करने की प्रक्रिया बंद हो गई थी। इससे कई लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-names-are-not-being-added-to-the-ration-card-for-three-years/article-69312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer1.jpg" alt=""></a><br /><p>दीगोद। क्षेत्र के सैंकड़ों परिवारों के सदस्यों का नाम राशन कार्ड में नहीं होने से उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। साथ ही सरकार का संबंधित पोर्टल भी लॉक है। जिससे उपभोक्ता अपने परिवार के नए सदस्यों का नाम राशन कार्ड में शामिल करने से वंचित हैं। जानकारी के अनुसार पिछले 3 वर्ष से उपभोक्ता पोर्टल चालू होने और राशन कार्ड में नाम जुड़ने का इंतजार कर रहे हंै। सरकार ने अभी तक पुराने राशन कार्ड में परिवार के किसी भी सदस्य का नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। कोरोना काल में राशन कार्ड में सदस्यों के नए नाम शामिल करने की प्रक्रिया बंद हो गई थी। इससे कई लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। वहीं क्षेत्र के कई सामूहिक परिवारों के सदस्यों की शादी होने के बाद 3 वर्ष से अधिक का समय बीत गया है। लेकिन दुल्हन तथा उनके बच्चों के नाम भी अभी तक राशन कार्ड में नहीं जुड़ पाए हैं। </p>
<p><strong>पुराने राशन कार्डों में नहीं जुड़ पा रहे नए नाम</strong><br />राज्य सरकार ने खाद्य सामग्री में नए नाम शामिल करने के लिए पिछले वर्ष पोर्टल ओपन किया था। उस दौरान कई नए राशन कार्ड खाद्य सामग्री योजना में शामिल हो गए थे। लेकिन पुराने राशन कार्ड में नए सदस्यों के नाम नहीं जुड़ पाए हैं।</p>
<p><strong>बदस्तूर जारी है नाम हटाने की प्रक्रिया </strong><br />गौरतलब है कि राशन कार्ड से परिवार के सदस्य का नाम हटाने की व्यवस्था पूर्व की भांति चल रही है। जबकि खाद्य सुरक्षा और नाम जोड़ने का कार्य पूर्णतया बंद है।</p>
<p>राशन कार्ड में नाम नहीं जोड़ना और सरकारी योजना का लाभ आमजन को नहीं मिलना यह बहुत बड़ी समस्या है। गरीब परिवार के लोग इस योजना का लाभ पाकर अपनी भूख मिटाते हैं। ऐसे में जल्द से जल्द इस पोर्टल को खोला जाना चाहिए और राशन कार्ड में नाम भी जोड़ना चाहिए। कांग्रेस सरकार ने पोर्टल खोला था। अब दोबारा बीजेपी सरकार को भी जल्द से जल्द इस ओर ध्यान देकर आमजन को राहत पहुंचाना चाहिए।<br /><strong>-हरिप्रकाश शर्मा, जनप्रतिनिधि, दीगोद</strong></p>
<p>राशन कार्ड में नाम जोड़ने के साथ खाद्य सुरक्षा का भी पोर्टल बंद है। कई गरीब परिवारों को गेहूं नहीं मिल पा रहे हैं। इसको लेकर कई बार सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित में शिकायत देकर अवगत करवाया है। लेकिन अभी तक पोर्टल शुरू नहीं हुआ है। इस समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए। <br /><strong>-कृष्णा शर्मा, प्रधान, पंचायत समिति सुल्तानपुर</strong></p>
<p>कई परिवारों के सदस्यों की शादी को कई वर्ष बीत चुके हैं। कई युवा पत्नी का नाम राशन कार्ड में शामिल करवाने के लिए ई-मित्र पर चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। समस्या का समाधान जल्द होना चाहिए। ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। <br /><strong>-डॉक्टर एलएन शर्मा, पूर्व भाजपा देहात जिलाध्यक्ष</strong></p>
<p>मेरी शादी 30 अप्रैल 2021 को हुई थी। शादी को करीब 3 साल होने को आए। लेकिन अभी तक मेरी पत्नी का नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ पाया है। जिसकी वजह से हमें सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में जल्द से जल्द सरकार को पोर्टल चालू करना चाहिए और खाद्य सुरक्षा में नाम जोड़ना चाहिए।<br /><strong>-रितेश मेघवाल, ग्रामीण, भीमपुरा </strong></p>
<p>फिलहाल खाद्य सुरक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना विभाग की तरफ से नहीं मिली है। जैसे ही पोर्टल चालू होने या राशन कार्ड में नाम जोड़ने की कोई सूचना आती है तो उसको सार्वजनिक किया जाएगा। ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।<br /><strong>-पुष्पा हरवानी, डीएसओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 16:40:15 +0530</pubDate>
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