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                <title>श्रीराम गोदावरी धाम अखाड़ा : 1971 में हिंद केसरी चंदगी राम ने रखी थी नींव</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shri-ram-godavari-dham-akhada--founded-by--hind-kesari--chandgi-ram-in-1971/article-166413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की समृद्ध अखाड़ा परंपरा और अनंत चतुर्दशी के ऐतिहासिक सफर को समेटे श्रीराम गोदावरी धाम अखाड़ा वर्तमान में विशाल रूप ले चुका है। शुरुआती दौर में चंद अखाड़ों से शुरू हुआ अनंत चतुर्दशी का यह जुलूस वर्तमान में सैकड़ों झांकियों और 6 दर्जन से अधिक अखाड़ों के समागम के साथ आज कोटा शहर का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन गया है। नए मार्ग पर सर्वप्रथम कोटड़ी कश्यप अखाड़ा और सब्जी मंडी स्थित सुंदर धर्मशाला से लाड़पुरा का लाला जी घाट अखाड़ा इस जुलूस में सम्मिलित हुए। इसके पश्चात पाटनपोल स्थित यति जी का अखाड़ा भी इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बना। समय के साथ शहर की विभिन्न कीर्तन और भजन मंडलियाँ इसमें जुड़ती गईं। वानर सेना और वर्तमान स्वरूपवर्तमान में वर्षों से बंद पड़ा रामपुरा मार्ग पुन: खुल चुका है और सभी अखाड़ों व शहरवासियों के सहयोग से यह धार्मिक जुलूस अपनी पूर्ण भव्यता के साथ निकाला जा रहा है।</p>
<p><strong>1971 हुआ था शुभारंभ</strong><br />श्रीराम गोदावरी धाम अखाड़े की स्थापना संस्थापक बाबा गोपीनाथ के सानिध्य में हुई थी। वर्ष 1971 में भारत के सुप्रसिद्ध पहलवान मास्टर हिंद केसरी चंदगी राम ने विधिवत पूजा-अर्चना कर इस अखाड़े का शुभारंभ किया था। शुरुआती दौर में जब जुलूस घंटाघर से निकलता था, तब भुवान उस्ताद के सानिध्य में अखाड़े का संचालन व साहसिक प्रदर्शन होता था।1990 के जुलूस का पारंपरिक मार्ग में बदलाव करना पड़ा।</p>
<p><strong>सिर पर श्री गणेश प्रतिमा लेकर नये मार्ग की शुरूआत</strong><br />बाबा शैलेन्द्र भार्गव ने बताया कि बाबा गोपीनाथ ने बाद में रामपुरा का मुख्य मार्ग बंद होने के कारण जुलूस को सीधे बाराद्वारी में विसर्जित करने की परंपरा शुरू हुई। इस नए मार्ग के कुशल संचालन और नेतृत्व में अखाड़े के गुरु सुरेंद्र जी पाराशर, बंटू उस्ताद और लखपत सिंह जी हाड़ा ने योगदान दिया। अन्य अखाड़ों व कीर्तन मंडलियों का जुड़ना और विशाल स्वरूपनए मार्ग से जुलूस शुरू होने के बाद शहर के अन्य पारंपरिक अखाड़े भी इससे जुड़ते चले गए। आयोजन में विशेष रूप से गजेंद्र जी भार्गव के नेतृत्व में संचालित ह्यवानर सेनाह्ण भी अपनी सक्रिय और अनुशासित भूमिका निभा रही है। अनन्त चतुर्दशी महोत्सव आयोजन समिति के रूद्रेश भारद्वाज ने बताया कि शुरुआती दौर से लेकर आज तक का यह सफर कोटा की कौमी एकता, शौर्य और जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुका है।</p>
<p><strong>श्री वीर बजरंगी व्यायामशाला थेकड़ा</strong><br /><strong>25 वर्षों बाद पुनर्जीवित हुआ अखाड़ा, 100 युवा-बेटियाँ सीख रहे शस्त्र कला</strong><br />लगभग 25 वर्षों तक बंद रहने के बाद वर्ष 2022 में पुनः शुरू हुए ऐतिहासिक अखाड़े में आज 150 से अधिक बच्चे और युवा पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र चलाने का अभ्यास कर रहे हैं। इस अखाड़े की नींव 1990 के दशक में श्री मंगलेश्वरी व्यायामशाला के संरक्षक धन्नालाल सुमन और गोविंद पटेल ने रखी थी। कालांतर में बंद होने के बाद 2022 में इसे पुनर्जीवित किया गया।<br />वर्तमान में संचालन व प्रशिक्षण की कमान गुरु पवन नायक संभाल रहे हैं, जो श्री हरदोल व्यायामशाला से आए हैं। अखाड़े में 6-7 वर्ष के मासूमों से लेकर 10 से 20 बेटियाँ भी उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं। इनमें कम उम्र की चित्रांशी सुमन 6 वर्ष और कुणाल 8 वर्ष, भी पट्टा चक्र चलाते नजर आए। यहाँ युवाओं को मुख्य रूप से तलवारबाजी, लठ्ठबाजी, बनेटी, चक्कर, पटा संचालन और कुश्ती का नि:शुल्क व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे प्राचीन शस्त्र कला जीवंत हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 15:26:53 +0530</pubDate>
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