<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/e-commerce/tag-9308" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>e-commerce - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/9308/rss</link>
                <description>e-commerce RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रपोजल इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट के खिलाफ भारत-तुर्की आए साथ, बीजिंग को अमेरिका का सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और तुर्की ने 40 देशों के साथ मिलकर चीन समर्थित इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD) फ्रेमवर्क का विरोध किया है। WTO की बैठक में नई दिल्ली ने इसे 'डिजिटल उपनिवेशवाद' और नीतिगत स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विवादित प्री-इन्वेस्टमेंट अपील सिस्टम और ई-कॉमर्स प्रावधानों पर सर्वसम्मति न होने के कारण भारत ने इस पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-t%C3%BCrkiye-come-together-against-the-proposal-investment-facilitation-for-development/article-147625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(7)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और तुर्की के रिश्ते हाल के समय में अच्छे नहीं रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ खड़े होने के कारण ऐसा हुआ। हालांकि, चीन के एक प्रस्ताव के खिलाफ दोनों एक साथ खड़े हुए हैं। यही नहीं, भारत और तुर्की समेत 40 देशों को इसकी चुभन महसूस हुई है। इन देशों ने इस हफ्ते हुई मंत्री-स्तरीय बैठक में चीन के समर्थन वाले एक नए फ्रेमवर्क के प्रस्ताव पर विश्व व्यापार संगठन में चिंता जताई है। इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) ने इस मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। इस नए फ्रेमवर्क का नाम इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट है। यह घटनाक्रम कई मायने में महत्वपूर्ण है। कारण है कि इस प्रस्ताव के समर्थक 26 से 29 मार्च तक कैमरून में होने वाले डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्री-स्तरीय सम्मेलन (एमसी14) में इस पर कोई समझौता करने के लिए उत्सुक हैं।</p>
<p><strong>समझौते को 120 देशों का समर्थन</strong></p>
<p>हालांकि, इस समझौते का समर्थन करने वाले करीब 120 सदस्य देशों का दावा है कि इससे प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, चिंता की बात यह है कि इसके तहत एक स्वतंत्र संस्था के जरिए निवेश की जांच के लिए प्री-इन्वेस्टमेंट अपील सिस्टम बनाया जाएगा। इससे पॉलिसी फ्लेक्सिबिलिटी सीमित हो जाएगी।</p>
<p><strong>भारत समेत विरोध करने वाले देशों की चिंता</strong></p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली और अन्य सदस्य देशों ने सीमित नीतिगत दायरे और गरीब देशों के लिए विशेष और अलग व्यवहार के प्रावधानों की कमी को लेकर चिंता जताई है। तुर्की ने अलग से चिंता जताते हुए कहा है कि इस प्रस्ताव में प्री-इन्वेस्टमेंट और पोस्ट इन्वेस्टमेंट प्रावधानों को लेकर स्पष्टता का अभाव है। साथ ही रक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में ई-कॉमर्स को भी शामिल कर लिया गया है। नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने भी अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। वे इस पहल में शामिल नहीं हैं। वहीं, अमेरिका, जो आईएफडी का सदस्य नहीं है, फिर भी इस समझौते को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में शामिल किए जाने का समर्थन कर रहा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने 2024 के मंत्री-स्तरीय सम्मेलन के दौरान आईएफडी को डब्ल्यूटीओ के ढांचे में शामिल करने के प्रयासों को रोक दिया था।</p>
<p><strong>क्या चल रहे हैं प्रयास?</strong></p>
<p>फिलहाल, इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि आईएफडी समझौते को डब्ल्यूटीओ के कानूनी ढांचे के तहत संगठन के परिशिष्ट 4 में एक बहुपक्षीय समझौते के रूप में शामिल किया जाए। परिशिष्ट 4 में सूचीबद्ध बहुपक्षीय समझौते केवल उन सदस्य देशों पर लागू होते हैं, जो उनमें शामिल होते हैं। जो सदस्य शामिल नहीं होते, उन पर ये समझौते बाध्यकारी नहीं होते। किसी भी समझौते को इस परिशिष्ट में जोड़ने के लिए संगठन के सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति होना जरूरी है। एक अधिकारी ने बताया, जिन सदस्य देशों ने इस पहल में हिस्सा लिया है, उन्हें भी इस समझौते की परिभाषा, इसके दायरे और इसकी गतिविधियों को लेकर स्पष्टता के अभाव से जुड़ी चिंताएं हैं।</p>
<p>नई दिल्ली ने यह रुख बनाए रखा है कि व्यापार और निवेश से जुड़े किसी भी पहलू पर चर्चा डब्ल्यूटीओ के दायरे से बाहर है। कारण है कि यह कोई व्यापार समझौता नहीं है। साथ ही, संगठन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बहुपक्षीय समझौते अपवाद ही बने रहें, न कि एक सामान्य नियम बन जाएं। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि माराकेश समझौते के परिशिष्ट 4 में नए समझौतों को शामिल करना न केवल सदस्यों के अंतरराष्ट्रीय समझौते करने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है, बल्कि यह डब्ल्यूटीओ के कामकाज से भी संबंधित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/india-t%C3%BCrkiye-come-together-against-the-proposal-investment-facilitation-for-development/article-147625</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/india-t%C3%BCrkiye-come-together-against-the-proposal-investment-facilitation-for-development/article-147625</guid>
                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 10:56:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%29-%287%296.png"                         length="890246"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSME निर्यात को बढ़ावा: इलेक्ट्रानिक तरीके से डाक के जरिये निर्यात पर प्रशुल्क, कर वापसी के लाभ लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने ई-कॉमर्स और MSME को बड़ी राहत देते हुए डाक के जरिए होने वाले निर्यात पर RoDTEP और RoSCTL जैसे लाभ देना शुरू कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/benefits-of-tariff-tax-refund-applicable-on-exports-through-electronic/article-139793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/msme.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने ई-कॉमर्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के एक महत्वपूर्ण कदम के तहत डिजिटल तरीके से डाक के जरिए किए गए निर्यात पर भी ड्यूटी ड्रॉबैक तथा राज्यों और केंद्रीय करों की वापसी अथवा समन की योजनाओं का लाभ देने का निर्णय गुरुवार से लागू कर दिया है।</p>
<p>ड्यूटी ड्राबैक निर्यात माल तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले आयातित कच्चेमाल और सामानों पर लगे आयात शुल्क को समायोजित करने की योजना है। इसी तहत सरकार निर्यात माल को घरेलू शुल्कों, करों तथा उपकरों के बोझ से मुक्त रखने के लिए भी छूट या वापसी की योजनाएं लागू कर रखी हैं। राज्य स्तरीय शुल्क और करों को वापस करने की निर्यातित उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट योजना और  केंद्रीय तथा राज्य स्तरीय शुल्कों और लेबी को वापस करने की राज्य और केंद्रीय करों और लेवी पर छूट की योजना (आरओएससीटीएल) योजना का लाभ अब ई-कॉमर्स के तरीके से डाक के जरिये भेजे जाने वाले माल पर मिलेगा।</p>
<p>इन योजनाओं को अप्रत्यक्ष कर एजेंसी-केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के माध्यम से लागू किया जाता है। वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह ऐतिहासिक कदम डाक चैनल का उपयोग करने वाले निर्यातकों को समान अवसर प्रदान करने तथा इलेक्ट्रानिक बाजार माध्यम से विदेश में सामान बेचने के अवसरों के विस्तार के लिए एक अनुकूल और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पहल से विशेष रूप से छोटे शहरों और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित एमएसएमई निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होने तथा डाक निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>सीबीआईसी ने डाक निर्यात (इलेक्ट्रॉनिक घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम,2022 में संशोधनों के तहत लागू किये हैं। निर्यात तक अब ई-वाणिज्य के रूप में डाक से निर्यात किये गए माल पर ड्यूटी ड्रॉबैक, आरओडीटीईपी औरआरओएससीटीएल के लाभों का दावा कर सकेंगे।</p>
<p>ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात को और बढ़ावा देने के लिए, सीबीआईसी ने डाक विभाग के सहयोग से दिसंबर 2022 में एक नये 'हब एंड स्पोक' मॉडल (धुरी और तीलियों वाला मॉडल) शुरू किया। इसके तहत छोटे माल के निर्यातक भारतीय डाक राष्ट्रीय नेटवर्क का लाभ उठा कर माल डाक के जरिए विदेश भेज सकते हैं। देश भर में 1,000 से अधिक डाक निर्यात केंद्र अधिसूचित किये गये हैं। ये केंद्र विशेष रूप से एमएसएमई और छोटे निर्यातकों को लाभ पहुँचाते हुए निर्यात पार्सलों की बुकिंग, एकत्रीकरण और प्रसंस्करण की सुविधा प्रदान करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/benefits-of-tariff-tax-refund-applicable-on-exports-through-electronic/article-139793</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/business/benefits-of-tariff-tax-refund-applicable-on-exports-through-electronic/article-139793</guid>
                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 14:20:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/msme.png"                         length="1106823"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्लिपकार्ट ने मिनिवेट एआई में हासिल की नियंत्रक हिस्सेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट ने एआई एवं मशीन लर्निंग समाधान प्रदाता मिनिवेट एआई में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल कर ली है। यह अधिग्रहण फ्लिपकार्ट की जेनरेटिव एआई क्षमताओं को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे ग्राहकों को अधिक सहज और उन्नत खरीदारी अनुभव मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/flipkart-acquires-controlling-stake-in-minivet-ai/article-136548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/flipkart-news.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट ने एआई और मशीन लैंग्वेज समाधान प्रदाता कंपनी मिनिवेट एआई में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल कर ली है। फ्लिपकार्ट ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह अधिग्रहण मूल रचनात्मक एआई (जेनएआई) क्षमताओं के निर्माण और उनमें निवेश की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। इससे फ्लिपकार्ट और दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के अधिक सहज तथा बेहतर खरीदारी अनुभव की ओर तेजी से बढऩे की उम्मीद है। </p>
<p>मिनिवेट एआई ई-कॉमर्स के लिए रचनात्मक वीडियो पर केंद्रित है, जो उत्पादों के कैटलॉग को तस्वीरों की सीमाओं से निकालकर आकर्षक वीडियो कंटेंट में बदलता है। यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक प्रोडक्शन लागत से बेहद कम खर्च पर उच्च-गुणवत्ता के परिणाम प्रदान करता है। वीडियो के अलावा मिनिवेट एआई ई-कॉमर्स की एआई क्षमताओं का एक व्यापक सूट भी पेश करता है। </p>
<p>अधिग्रहण पर टिप्पणी करते हुए मिनिवेट एआई के संस्थापक आदित्य राचकोंडा ने कहा, फ्लिपकार्ट के साथ यह साझेदारी मिनिवेट एआई के लिए एक निर्णायक क्षण है। इससे हमें अपनी स्वामित्व वाली जेनएआई समाधानों को देश के अग्रणी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद मिलेगी, जिससे लाखों ग्राहकों के लिए खरीदारी और भी अधिक सहज और बेहतर बनेगी। </p>
<p>फ्लिपकार्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि अय्यर ने कहा, मिनिवेट एआई का अधिग्रहण एक रणनीतिक निवेश है, जो विशिष्ट प्रतिभा और उन्नत स्वामित्व वाली तकनीक के एकीकरण के माध्यम से फ्लिपकार्ट की कोर जेनएआई क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा। ये विजुअल-फस्र्ट और वीडियो-फस्र्ट कॉमर्स के बढ़ते उद्योग रुझान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और अंतत: फ्लिपकार्ट प्लेटफॉर्म पर उच्च ग्राहक जुड़ाव, बेहतर कन्वरर्ज्न और दीर्घकालिक नवाचार को बढ़ावा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/flipkart-acquires-controlling-stake-in-minivet-ai/article-136548</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/flipkart-acquires-controlling-stake-in-minivet-ai/article-136548</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 18:09:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/flipkart-news.png"                         length="1038943"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पारंपरिक व्यवसाय को निगल रहा है ई-कॉमर्स </title>
                                    <description><![CDATA[ई-कॉमर्स बिजनेस के क्षेत्र में किसी बड़ी क्रांति से कम नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/e-commerce-is-swallowing-traditional-business/article-110829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>ई-कॉमर्स बिजनेस के क्षेत्र में किसी बड़ी क्रांति से कम नहीं है। इसने व्यवसाय करने के परिदृश्य को पूर्णत बदल कर रख दिया है। विक्रेता और क्रेता दोनों के नजरिए में परिवर्तन किया है। घर, ऑफिस, दुकान आदि हर सेवा क्षेत्र से संबंधित सामान ऑनलाइन उपलब्ध है। एक सुई से लेकर हवाई जहाज तक सबकी डील ऑनलाइन संभव हो चुकी है। यदि ई-कॉमर्स के इतिहास पर एक नजर डालें तो पाएंगे कि 1960 के दशक में, इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज मूल्य वर्धित नेटवर्क वैन के जरिए ई-कॉमर्स की शुरुआत हुई थी। 1990 के दशक में इंटरनेट का व्यावसायीकरण हुआ और ऑनलाइन शॉपिंग और पेमेंट की सुविधा को ई-कॉमर्स का नाम दिया गया। माना जाता है कि वर्ष 1999 में रेडिफ डॉट कॉम ने भारत में ई-कॉमर्स ऑनलाइन शॉपिंग शुरु की थी। इसी वर्ष के.वैथीस्वरन ने भारत की पहली ई-कॉमर्स कंपनी फैबमार्ट की स्थापना की थी। जिसका बाद में नाम बदलकर इंडियाप्लाजा कर दिया गया। </p>
<p>2002 में आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन पेमेंट करके टिकट बुक करने का विकल्प दिया। 2003 में एयर इंडिया ने भी ऑनलाइन टिकट बेचना शुरू कर दिया। 2006 में यात्रा डॉट कॉम ने ऑनलाइन टिकट देने की सुविधा शुरू की। आज ई-कॉमर्स के क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों ने अपना वर्चस्व कायम कर रखा है। ई-कॉमर्स ईलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स ने भारतीय बाजार में क्रांति ला दी है, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। जिसके भविष्य में दूरगामी प्रभाव को देखने को मिल सकते हैं जैसे ई-कॉमर्स के कारण पारंपरिक दुकानदारों, छोटे दुकानदारों और स्थानीय खुदरा व्यापारियों की बिक्री में गिरावट आई है। ग्राहक आज ऑनलाइन सामान, सस्ते दामों पर खरीदना पसंद करते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार कमजोर हो रहा है। जबकि ग्राहक भूल जाता है कि दुकान से खरीदी गई सामान का खराब निकलने पर तुरंत बदला जा सकता है, जबकि ऑनलाइन खरीदारी में सामान के वापिस या बदलने के लिए कई नियम और शर्ते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा लगाई जाती हैं।</p>
<p>कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की माने तो ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव से देश भर में 40प्रतिशत तक व्यापार में गिरावट दर्ज की गई है। <br />भारत में करीब 7 करोड़ छोटे व्यापारी हैं, जिनमें से लाखों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक को उत्पाद देखने का मौका नहीं मिलता। कई बार नकली या घटिया या फिर डैमेज्ड सामान भेजा जाता है। एक सर्वे के अनुसार, 38प्रतिशत ग्राहकों ने माना कि उन्हें ऑनलाइन खरीदे गए उत्पाद की गुणवत्ता उम्मीद से कम मिली। फिक्की की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बिकने वाले नकली उत्पादों का 30प्रतिश से अधिक हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से आता है। ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करती हैं। अगर यह डेटा लीक होता है, तो ग्राहक को धोखाधड़ी का सामना करना पड़ सकता है। ग्राहक डेटा की सुरक्षा में जोखिम की संभावना बनी रहती है। सी ईआरटी-इन के अनुसार, 2022 में भारत में लगभग 13 लाख साइबर सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें ई-कॉमर्स वेबसाइटें भी शामिल थीं। वर्तमान डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम के बढ़ते जोखिम के कारण ई-कॉमर्स वेबसाइट और भी संवेदनशील बनती जा रही हैं। </p>
<p>बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा कर रही हैं, जिससे छोटे व्यापारी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते। इसे एक अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा ही माना जा सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 70प्रतिशत ऑनलाइन खरीदारी डिस्काउंट के चलते होती है, न कि ब्रांड या गुणवत्ता के आधार पर। ई-कॉमर्स कंपनियों में डिलीवरी बॉय और वेयरहाउस स्टाफ जैसे कामों में अस्थायी नौकरियां मिलती हैं, जिनमें वेतन कम और काम का दबाव अधिक होता है। नौकरी की अनिश्चितता हमेशा बनी ही रहती है। अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, भारत में ई-कॉमर्स सेक्टर के श्रमिकों में से 65प्रमिशत अनुबंध या अस्थायी कर्मचारी होते हैं। ई-कॉमर्स ने सुविधा, विकल्प और कीमतों में पारदर्शिता तो दी है, लेकिन इसके कारण स्थानीय व्यापार, उपभोक्ता अधिकार, और रोजगार की स्थिति पर नकारात्मक असर भी पड़ा है। </p>
<p>सरकार, नीति निर्धारक और अर्थशास्त्रियों को इस दिशा में विचार कर एक ई कॉमर्स और पारंपरिक व्यवसाय के बीच संतुलन बनाने की पहल करनी होगी अन्यथा पारंपरिक व्यवसाय जैसी अवधारणा समाप्त होने के साथ ही छोटे और माध्यम व्यवसाय वर्ग आर्थिक संकट के शिकार हो सकते हैं। भारतीय संदर्भ में पारंपरिक व्यवसाय आज भी लोगों की एक महत्वपूर्ण जरूरत बनी हुई है क्योंकि समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी आर्थिक रूप से इतना संपन्न नहीं हुआ है कि वह सारी खरीदारी कैश में कर सके। </p>
<p><strong>-राजेंद्र कुमार शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/e-commerce-is-swallowing-traditional-business/article-110829</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/e-commerce-is-swallowing-traditional-business/article-110829</guid>
                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 11:55:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/257rtrer-%281%2947.png"                         length="432444"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Amazon पर अंकुश लगाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन अमेजन के झूठे लुभावने ऑफर से हमारे छोटे कारोबारियों की कमर पहले से टूटी हुई है, लेकिन नशे के कारोबार को बढ़ावा मिले, ये कैट बर्दाश्त नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazon-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B6-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2619"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स राजस्थान के अध्यक्ष सुभाष गोयल व महामंत्री सुरेन्द्र बज ने कहा कि अमेज़न ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिये गांजा की बिक्री मानवता के साथ जघन्य अपराध है। केंद्र को इस संबंध में ठोस ई-कॉमर्स नीति बराकर इनकम पर अंकुश लगाना चाहिए वह राजस्थान में भी कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी इस तरह का जघन्य  कारोबार न कर सके इस पर नजर रखी जानी चाहिए ।<br /> <br /> कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स राजस्थान प्रदेश के महामंत्री सुरेन्द्र बज ने बताया कि ऑनलाइन अमेजन के झूठे लुभावने ऑफर से हमारे छोटे कारोबारियों की कमर पहले से टूटी हुई है, लेकिन नशे के कारोबार को बढ़ावा मिले, ये कैट बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्य सरकार से मांग की जाती हैं कि अमेजन के गैरकानूनी तरीके से किये जाने वाले कारोबार पर तुरंत रोक लगाई जाएं।<br /> <br /> जयपुर व्यापार महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश केड़िया व उपाध्यक्ष सचीन गुप्ता   ने केंद्र सरकार से बड़ी विदेशी  ई-कॉमर्स कंपनियों  के बिजनेस मॉडल की गहन  जांच करने का आग्रह किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री या राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं की जाती हैं और इन मार्केटप्लेस की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए ! पोर्टल पर पंजीकृत होने वाले विक्रेताओं की सख्त केवाईसी की जाए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और  तकनीक का उपयोग कर  केवल वही सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जाए  जो वैध हैं।<br /> आज की प्रेस वार्ता में केट के राष्ट्रीय सचिव जे के वैष्णव व प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्र रूपानी एवं राधेश्याम गुप्ता भी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazon-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B6-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2619</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazon-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B6-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2619</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Nov 2021 17:20:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-11/6.jpg"                         length="116113"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        