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                <title>BSP ने व्हिप किया जारी:  बसपा विधायक ना कांग्रेस को वोट देंगे ना बीजेपी को, निर्दलिय को कर सकेंगे वोट</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते सभी 6 विधायकों को व्हिप जारी कर कांग्रेस और भाजपा को वोट देने के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देने की निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bsp-issued-a-whip-bsp-mlas-will-neither-vote-for-congress-nor-for-bjp/article-11326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bsp.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने राज्य में दस जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीते सभी छह विधायकों को व्हिप जारी किया है।</p>
<p>बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते सभी 6 विधायकों को व्हिप जारी कर कांग्रेस और भाजपा को वोट देने के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देने की निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी दोनों प्रमुख दलों के साथ नहीं जाएगी बल्कि वे निर्दलीय  को वोट दे सकते है। ऐसे में पार्टी ने विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा, लाखन सिंह, दीप चंद, जोगिंदर सिंह अवाना, संदीप कुमार एवं वाजिब अली को व्हिप जारी कर कहा गया है कि वे राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस एवं भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को वोट नहीं करे और वे निर्दलीय उम्मीदवार को अपना वोट डाले।</p>
<p><br />उन्होंने बताया कि इस निर्णय के तहत इन विधायकों को व्हिप जारी की गई है। उन्होंने कहा कि अगर ये विधायक व्हिप का उल्लंघन करेंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि बसपा के इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने का मामला न्यायालय में चल रहा है और ये पार्टी व्हिप का उल्लघन करेंगे तो उनके खिलाफ एक मजबूत आधार होगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि अहम निर्णय के तहत इन विधायकों को व्हिप जारी की गई है। उन्होंने कहा कि अगर ये विधायक व्हिप का उल्लंघन करेंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि बसपा के इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने का मामला न्यायालय में चल रहा है और ये पार्टी व्हिप का उल्लघन करेंगे तो उनके खिलाफ एक मजबूत आधार होगा। <br /><br />उल्लेखनीय है कि गत विधानसभा चुनाव में ये विधायक बसपा उम्मीदवार के रुप में विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक चुने गए और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। राज्य में राज्यसभा की चार सीटों पर होने वाले चुनाव में चौथी सीट पर मुकाबला होने के चलते कांग्रेस की उदयपुर में उसके एवं उसके समर्थित विधायकों की बाड़ेबंदी चल रही है और बसपा के टिकट पर जीते इन विधायकों में जोङ्क्षगदर ङ्क्षसह अवाना उदयपुर पहुंच चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 15:44:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कहने को घड़ियाल सेंचुरी, कोटा में न नाम न कोई काम</title>
                                    <description><![CDATA[चम्बल में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन व लगातार बढ़ते जलीय प्रदूषण से घड़ियालों का अस्तिव खतरे में पड़ गया है। जवाहर सागर से कोटा बैराज व केशवरायपाटन तक के इलाके में एक भी घड़ियाल नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alligator-sanctuary-to-say--neither-name-nor-work-in-kota/article-11208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tipper1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन व लगातार बढ़ते जलीय प्रदूषण से घड़ियालों का अस्तिव खतरे में पड़ गया है। जवाहर सागर से कोटा बैराज व केशवरायपाटन तक के इलाके में एक भी घड़ियाल नहीं है। वहीं, ग्रामीण इलाके के इटावा उपखंड में एकमात्र नेस्टिंग साइड गुड़ला है। यह गांव खातौली कस्बे से करीब 25 किमी दूर है। यहां 40 से 45 घड़ियालों की मौजूदगी है। <br /><br />विशेषज्ञों के मुताबिक चंबल घड़ियाल अभयारण्य के दायरे में आने वाले इलाके (राणा प्रताप सागर से कोटा बैराज तक) एक भी घड़ियाल नहीं बचा। जबकि, 30 साल पहले यहां घड़ियाल हुआ करते थे। इसका सबसे बड़ा कारण अवैध खनन, अवैध मतस्याखेट, किनारों पर होने वाली पेटाकाश्त व नदी में गिरते नाले हैं। जिन पर समय रहते अंकुश नहीं लगा तो जिले की नेस्टिंग साइड पर पनप रहे घड़ियालों की प्रजाति लुप्त हो जाएगी।  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के मुताबिक घड़ियाल अभयारण्य में किसी भी तरह का खनन नहीं किया जा सकता। जबकि, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते खननकर्ता हर दिन चंबल का सीना छलनी कर बजरी व पत्थर निकाल रहे हैं।  <br /><br /><strong>बिखरा घरौंदा</strong><br />वन्यजीव स्कॉलर तरुण नायर के मुताबिक घड़ियाल रेत में पनपते हैं लेकिन चम्बल में लगातार बजरी का अवैध खनन होने से न नदी बची है और न ही घड़ियालों की मेटिंग के लायक माहौल। जैसे-तैसे घड़ियालों ने अंडे दे भी दिए हो तो वह सुरक्षित नहीं बच पाते। खनन के दौरान होने वाला शोर-शराबे से प्रजनन में खलल पड़ता है, जिससे घड़ियाल अपना इलाका छोड़ने को मजबूर हो गए।  <br /><br /><strong>कोटा की एकमात्र नेस्टिंग साइड है गुड़ला</strong><br />चंबल नदी के विशेषज्ञ हरिमोहन मीणा बताते हैं, कोटा में चंबल-पार्वती नदी का संगम स्थल गुडला जिले का एक मात्र घड़ियाल नेस्टिंग साइट है। यहां अच्छी तादात में घड़ियाल देखे जा सकते हैं। वर्तमान में यहां 40 से 45 घड़ियाल हैं। एक मादा करीब 50 अंडे देती है लेकिन, बाढ़ व पानी के बहाव के कारण 2 प्रतिशत ही जिंदा बच पाते हैं।<br /><br /><strong>ढाई साल पहले यहां चार घड़ियाल और 35 बच्चे थे अब एक भी नहीं</strong><br />मंडावरा नाका के वनरक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि वर्ष 2020 में बूढ़ादीत कस्बे का मोराना गांव नेस्टिंग के लिए चर्चा में रहा। यहां तीन मादा और एक नर घड़ियाल था। वातावरण अनुकूल होने पर कुछ ही महीनों में मेटिंग होने से 35 से ज्यादा बच्चे नदी में अटखेलियां करते नजर आए थे, जो पानी के तेज बहाव में बह गए। वर्तमान में यहां एक भी घड़ियाल मौजूद नहीं है। हालांकि, चंबल-कालीसिंध नदी के संगम स्थल इटावा के नोनेरा गांव में वर्ष 2022 की गणना में एक घड़ियाल नजर आया है। <br /><br /><strong>ऐसे बस सकती है यहां घड़ियालों की बस्ती</strong> <br />राष्टÑीय चंबल अभयारण्य प्रशासन को सबसे पहले राणासागर बांध से कोटा बैराज तक के एरिए में घड़ियालों के लिए प्राकृतिक आवास चिन्हित करना चाहिए। सरवाइवल बजरी (विशेष मोटाई वाली रेत) चिन्हित स्थान पर बिछाकर अवैध मतस्य आखेट पर पूरी तरह रोक लगाएं। इसके बाद दो व्यस्क नर व मादा घड़ियालों को रेडियो ट्रांसमीटर लगाकर प्राकृतिक आवास में छोडेÞ। ट्रांसमीटर के जरिए इनकी गतिविधियों पर बराबर नजर रही जाए। यदि 2 माह तक ये घड़ियाल जोड़ा इस वातावरण में जीवित रह जाता है तो फिर एक-एक साल के बच्चे इनके पास छोड़े जाना चाहिए। इन प्रयासों के बाद यहां घड़ियालों की बस्ती बसाने की उम्मीद की जा सकती है।  <br /><strong>-डॉ. कृष्नेंद्र सिंह नामा, सहायक आचार्य एवं रिसर्च सुपरवाइजर वनस्पति विभाग एलजेबरा कॉलेज</strong><br /><br /><strong>चंबल को प्रदूषित होने से बचाना जरूरी</strong> <br />घड़ियाल अभयारण्य की जद में आने वाला चंबल का शहरी इलाका प्रदूषित हो चुका है। नदी में 22 तरह के नालों का गंदा पानी कैमिकल के साथ गिर रहा है। जिससे जलीय वन्यजीव अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अफसर मूक दर्शक बने हुए हैं, इनकी तरफ से चंबल शुद्धिकरण को लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया। घड़ियालों को बसाने के लिए चंबल की शुद्धी जरूरी है। <br /><strong>-बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी, पीपुल फॉर एनिमल्स</strong><br /><br /><strong>गुडला में हैं 40 से 45 घड़ियाल</strong><br />चंबल सेंचुरी में आने वाले शहरी इलाकों में एक भी घड़ियाल नहीं है, जबकि ग्रामीण इलाके के खातौली कस्बे से 25 किमी दूर गुडला में इनकी संख्या 40 से 45 है। अप स्टीम का एरिया पथरीला होने से ये टकराकर अकाल मौत का शिकार हो जाते है। चंबल-पार्वती नदी का संगम स्थल गुड़ला कोटा की एकमात्र नेस्टिंग साइड है। <br /><strong>-हरिमोहन मीणा, चंबल नदी विशेषज्ञ</strong><br /><br /><strong>मानवीय दखल सबसे बड़ा कारण</strong><br /> घड़ियाल सेंसटीव जीव होता है। चंबल के आसपास खेती करने वाले लोग विभिन्न तरह के रसायनों का उपयोग करते हैं, जो नदी में मिलने से पानी दूषित होता है, जिसके कारण जलीय जीव जीवित नहीं रह पाते। मानवीय गतिविधियां अधिक होने से शोर-शराबे के कारण ये अपनी जगह बदल है।<br /><strong>अनिल यादव, एसीएफ, चंबल अभयारण्य</strong><br /><br /><strong>घड़ियालों को बसाने के किए जाएं इंतजाम</strong><br />करीब 25 साल पहले वन्यजीव विभाग ने हाड़ौती नेच्यूरल सोसाइटी के सहयोग से चंबल गार्डन से 8-9 घड़ियालों को जवाहर सागर की कड़पका खाळ में शिफ्ट किया था। क्योंकि, यहां पानी का दबाव कम होने के साथ वातावरण भी इनके अनुकूल था लेकिन संरक्षण के अभाव में कुछ ही सालों बाद यह गायब हो गए। राष्टÑीय चंबल अभयारणय प्रशासन को घड़ियाल के कुछ अंडे लाकर इनक्यूबेटर में रखें और बच्चे निकलने के बाद इन्हें अभेड़ा व उम्मेदगंज के रियासतकालीन तालाब में छोड़ा जाए। साथ ही इनके पालन-पोषण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। <br /><strong>-एमएच जेदी, नेचर प्रमोटर</strong><br /><br /><strong>1970 के बाद तेजी से हुई गिरावट</strong> <br />1970 के बाद से धड़ियालों की संख्या में तेजी से गिरावट होने लगा। क्योंकि इनका नेच्यूरल आवास खत्म होने लगे। अवैध खनन व मतस्य आखेट के कारण इन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। यहां घड़ियालों की बस्ती फिर से बसाने के लिए विभाग को गाइड लाइन तैयार करनी चाहिए। <br /><strong>-डॉ. फातिमा सुल्ताना, विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र जेडीबी कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 16:09:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजस्थान में तीसरी लहर में एक फीसदी से कम भर्ती हुए, मौतें प्रति हजार एक या इससे कम रही</title>
                                    <description><![CDATA[ओमिक्रॉन वेरिएंट से यूं मिला सुरक्षा कवच प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/less-than-one-percent-were-admitted-in-the-third-wave-in-rajasthan--deaths-were-one-per-thousand-or-less--we-defeated-the-corona-that-caused-havoc-in-china--18-percent-of-the-variants-of-the-variant-came--but-neither-got-seriously-ill-nor-died/article-6565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/corona2.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। चीन में कोरोना के ओमिक्रॉन बी-टू वेरिएंट से कोहराम मचा हुआ है। लाखों लोग न केवल गंभीर बीमार हो रहे हैं, बल्कि रिपोर्टस के मुताबिक करीब पांच फीसदी के करीब मौतें भी हो रही हैं। यही वेरिएंट राजस्थान की तीसरी लहर में बेअसर सा रहा। इससे लोग संक्रमित जरूर हुए, लेकिन ना गंभीर बीमार हुए और ना ही मौतें हुईं। चिकित्सा विभाग के जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट की माने तो ओमिक्रॉन के सामान्य वेरिएंट के अलावा बी-टू वेरिएंट ने राजस्थान में तीसरी लहर में कुल मरीजों में से करीब 18 फीसदी संक्रमित हुए, लेकिन संक्रमित होने वाले लोगों ने उसे मात दी। एक फीसदी मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी और मौतें तो न के बराबर 0.001 फीसदी ही इससे हुई। जिनकी मौत हुई, उनमें भी ज्यादातर उम्रदराज, बीमारियों से ग्रस्त लोग ही थे। <br /><br /><strong>ओमिक्रॉन वेरिएंट से यूं मिला सुरक्षा कवच प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित हुई</strong><br />पहली और दूसरी डेल्टा वेरिएंट की लहर में आईसीएमआर के सीरो सर्वे में करीब 80 फीसदी लोगों में कोविड के खिलाफ एंडी बॉडीज मिली। अर्थात वायरस का संक्रमण हुआ, लेकिन वे लक्षण विहीन रहे। बीमार नहीं हुए। इस बड़ी आबादी में प्राकृतिक इम्यूनिटी वायरस के खिलाफ विकसित हो गई। इसके चलते हल्के वेरिएंट बी-टू ओमिक्रॉन के संक्रमण से लोगों में आई प्रतिरोधक क्षमता ने आसानी से मुकाबला कर लिया। <br /><br /><strong>टीकाकरण ने बूस्ट किया</strong><br />पहली लहर में सीरो सर्वे के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोग सामान्य कोविड वायरस से संक्रमित हुए। हालांकि बीमार कम ही हुए, लेकिन एंडी बॉडीज बनी। फिर कोरोना टीकाकरण शुरू हो गया। पहले से एंटी बॉडीज और फिर कोरोना टीकाकरण की दो डोजों ने बूस्टर की तरह काम किया। दूसरी लहर में ही वैक्सीनेशन जारी रहा। ऐसे में लोग तीसरी लहर में ओमिक्रॉन से लड़ सके। <br /><br /><strong>चीन में संक्रमण का तांडव क्यों</strong><br />चीन में मौतें क्यों हो रही है, संक्रमण का तांडव क्यों है। इसकी डिटेल स्टडी सामने नहीं आई है। लगता है कि वहां प्राकृतिक इम्यूनिटी हमारे मुकाबले कम विकसित हुई। संभवत: जो वैक्सीन उपयोग में आई, वह कम असरकारक रही होगी। <br />-<strong>डॉ. रमन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर</strong><br /><br /><strong>चीन में इम्यूनिटी नहीं मिली</strong><br />चीन और उसके पड़ोसी देशों में शुरुआती दो लहरों में कम केसेज आए। इससे प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित नहीं हुई। वैक्सीनेशन भी कम असरकारक दिख रहा है। हमारे यहां प्राकृतिक और वेक्सीन से इम्यूनिटी दोनों प्रभावी रहे। <br />-<strong>डॉ. वीरेन्द्र सिंह, सदस्य सीएम सलाहकार समिति</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 11:18:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है: HC]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sectarian--historic-verdict--karnataka-high-court--while-dismissing-five-petitions-seeking-permission-to-wear-the-hijab-in-the-classroom--has-ruled-that-the-hijab-is-neither-a-mandatory-part-of-islam-nor-does-its-non-wearing-violate-any-religious-right/article-6303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की अपील करने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया है कि हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हिजाब न पहनने से निजता व शिक्षा के मूल अधिकार का हनन नहीं होता है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से मान्य है। वर्दी के मामले में छात्राओं की आपत्ति उचित नहीं है। वास्तव में यह ऐसा रूढिवादीता फैसला है, जिसका मुस्लिम समाज के प्रगतिशील तबके को स्वागत करना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला भी है, जिसके बाद हिजाब विवाद यहीं समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन लगता है ऐसा नहीं होगा क्योंकि याचिका दायर करने वाली छात्राओं के वकील ने कहा है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। दरअसल, कर्नाटक स्थित उड्डी के दो सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इससे पहले फरवरी के मध्य में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में फिर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया। जब इस मामले का विरोध हुआ तो कुछ छात्र भगवा शॉल डालकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म रही। तब इस विवाद के मूल में राजनीतिक निहितार्थ की बात कही गई। इसे लेकर मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने भी कहा कि अकादमिक सत्र के बीच में अचानक यह मुद्दा क्यों उठा? लगता है कि इसके पीछे किसी का हाथ है। निस्संदेह, अशांति पैदा करने व सद्भाव को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया। इस विवाद को लेकर आंदोलन में जगह-जगह पथराव, तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं। स्कूल-कॉलेज बंद तक करने की नौबत आ गई। धार्मिक स्वतंत्रता व निजता के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई। लेकिन अंतत: अदालत ने इस सबसे इनकार कर दिया। लेकिन हिजाब की रस्म को जिस तरह मजहबी-चोला पहनाकर इस्लाम के मुल्ला व फतवा जारी करने वालों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। जबकि आज महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:03:58 +0530</pubDate>
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                <title>केसरिया रंग में रंगा खाटू का दरबार</title>
                                    <description><![CDATA[हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/khatu-s-court-painted-in-saffron-color--flood-of-reverence--neither-the-fatigue-of-the-journey-nor-the-care-of-the-ulcers-in-the-feet/article-5977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/khatushyam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p>खाटूश्यामजी। हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह। हर कोई आस्था की डोर के सहारे खाटू दरबार की ओर खिंचा चला आ रहा है। केसरिया रंग में रंगे बाबा के इन भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। ऐसे नजारे बाबा श्याम के फाल्गुनी लक्खी मेले के दौरान खाटूधाम की ओर जाने वाले हर रास्ते में पग-पग पर नजर आ रहे हैं। मेले के पांचवें दिन गुरुवार को एक लाख श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में मत्था टेककर परिवार की खुशहाली की कामना की। मेले के पांचवें दिन भी हारे के सहारे का अलौकिक शृंगार किया। श्याम भक्तों ने बाबा श्याम के दर पर प्रसाद चढ़ाकर धोक लगायी। रींगस रोड पर पदयात्रियों के जत्थों की रेलमपेल लगी हुई है। स्वयसेवी संस्थाओं की ओर से लगाए भण्डारों में भक्तों को भोजन की मनुहार की जा रही है।</p>
<p><br /><strong> बाबा की मोरछड़ी में है जादू</strong> <br /> बाबा श्याम के लक्खी मेले में लाखों की तादाद में श्याम भक्त खाटूनगरी में पहुंचते हैं। बाबा श्याम के दरबार में श्रद्धालु शीश नवाकर मनौतयां मांगते हैं। बाबा श्याम के दरबार में मोरछड़ी का भी बहुत महत्व है। बाबा के दर पर मोरछड़ी के झाड़े से ना केवल दु:ख दूर होते हैं, वहीे मनोकामना भी पूरी होती है। कहते हैं कि झुक गए बड़े बड़े सरकार तेरी मोरछड़ी के आगे....।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 15:54:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>58 मिनट 52 सैकण्ड का होगा राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह, न पुलिस पदक वितरित होंगे और न ही योग्यता प्रमाण पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[गणतंत्र दिवस पर होने वाले राज्य स्तरीय समारोह पर भी कोरोना का साया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/58-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%9F-52-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9--%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0/article-4148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/vidhan-sabha.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। गणतंत्र दिवस पर बुधवार को होने वाले राज्य स्तरीय समारोह पर भी कोरोना का साया नजर आएगा। समारोह में न तो पुलिस पदक वितरित किए जाएंगे और न ही योग्यता प्रमाण पत्र। समारोह भी 58 मिनट 52 सैकण्ड का होगा। सवाई मानसिंह स्टेडियम में समारोह में राज्यपाल कलराज मिश्र झण्डारोहण करेंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद रहेंगे। समारोह में कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। इसके चलते कार्यक्रम के समय में कटौती की है।  सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिए जाने वाले पुलिस पदक और सराहनीय कार्यों के लिए दिए जाने वाले योग्यता प्रमाण पत्र संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे, जो सामान्य समारोह में कर्मचारियों और अधिकारियों को दिए जाएंगे। राजधानी से बाहर के कर्मचारी और अधिकारी को संबंधित प्रभारी मंत्री के हाथों सम्मानित कराया जाएगा। <br /> <br /> <strong>अब यह रहेगा कार्यक्रम</strong><br /> राज्यपाल मिश्र सुबह साढ़े नौ बजे स्टेडियम पहुंचेंगे और झण्डारोहण, राष्ट्रीय अभिवादन, राष्ट्रगान और परेड का निरीक्षण करेंगे। 9.40 बजे परेड का विसर्जन करेंगे। इसके बाद लोक कलाकार 25 मिनट का सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। दस बजकर आठ मिनट पर 13 मिनट का डॉग शो और घुड़सवार शो शुरू होगा। इसके बाद 10.21 बजे पुलिस और सेना बैण्ड का वादन होगा। अंत में 10.28 बजे राष्टÑगान शुरू होगा और 52 सैकण्ड बाद राज्यपाल कार्यक्रम से रवाना होंगे। <br /> <br /> <strong>रिहर्सल संपन्न</strong><br /> समारोह के लिए सोमवार को अंतिम रिहर्सल हुई। अब स्टेडियम बुधवार सुबह खोला जाएगा, जो सुरक्षा अधिकारियों के हवाले कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jan 2022 13:27:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘जस’ ने बढ़ाया पुलिस का ‘यश’... न ये घूस खाएं, ना आलस करें,  धर दबोचते हैं मुजरिमों को</title>
                                    <description><![CDATA[मौके पर ही पकड़वा देते हैं आरोपी को, पुलिस डॉग्स हर कदम अपराध रोकने में दे रहे सहयोग, सभी डॉग्स बेल्जियम मेलिनॉइस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E2%80%98%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E2%80%99-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E2%80%98%E0%A4%AF%E0%A4%B6%E2%80%99----%E0%A4%A8-%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%98%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82--%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82---%E0%A4%A7%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B/article-4144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/dogs-story.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में हो रहे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए पुलिस जहां भरसक प्रयास करती है वहीं इनके साथ वारदात खोलने में पुलिस के डॉग्स भी अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 2021 में हुए जघन्य अपराधों की बात की जाए तो इनमें से 52 अपराधों में मौके पर पहुंचे पुलिस डॉग्स ने पकड़वाया है। इनमें सबसे ज्यादा पुलिस का यश ‘जस’ ने बढ़ाया है। वहीं काईजर, शाहीन, नौवी, स्कॉच और जुनून समेत अन्य डॉग्स ने भी पुलिस का मान बढ़ाया है। ये सभी बेल्जियम मेलिनॉइस ब्रीड के हैं। इन सभी डॉग्स का प्रशिक्षण बंगलूरू में हुआ है। इसी ब्रीड के डॉग ने ओसामा बिन लादेन और अबु-बकर-बगदादी जैसे खूंखार आतंकियों तक पहुंचने में अहम रोल अदा किया था।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>अकेले जस ने ही कर दिया 15 जघन्य अपराधों का खुलासा</strong></span></span></span><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong><br /> जस</strong></span></span><br /> उम्र-पांच साल एक माह , <br /> हैण्डलर-अनिल कुुमार कांस्टेबल, कार्यक्षेत्र-झुंझुनूं, चूरू, खासियत-ट्रेकर-स्निफर<br /> उपलब्धि वर्ष 2020 में 12 और 2021 में 15 वारदातों में मौके पर आरोपियों को पकड़वाया, छह बार रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>काईजर</strong></span></span><br /> उम्र-छह साल पांच माह<br /> हैण्डलर-संत कुमार  कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-बीकानेर<br /> खासियत-ट्रेकर-नारकोटिक्स<br /> उपलब्धि-मानसरोवर में मुथुट फाइनेंस में नौ करोड़ रुपए चोरी और मुहाना में पत्नी की हत्या कर फैक्ट्री में जाकर छिपे पति को पकड़वाया, डीजीपी डिस्क समेत अन्य रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>स्कॉच</strong></span></span><br /> उम्र-पांच साल तीन माह <br /> हैण्डलर-अमित कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-कोटा रेंज<br /> खासियत-नारकोटिक्स और ट्रेकर<br /> उपलब्धि-कुल चार खुलासे, रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>शाहीन</strong></span></span><br /> उम्र-साढ़ तीन साल <br /> हैण्डलर-संत कुमार कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-कोटा रेंज<br /> खासियत-नारकोटिक्स<br /> उपलब्धि-कुल पांच खुलासे, बूंदी में गैंगरेप का खुलासा, एक हजार, 1100 रुपए 151 रुपए का रिवार्ड (गोल्ड मेडल)<br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;">नौवी</span></span><br /> उम्र-छह साल पांच माह<br /> हैण्डलर-रमेश कांस्टेबल(198)<br /> कार्यक्षेत्र-बीकानेर रेंज<br /> खासियत-नारकोटिक्स और ट्रेकर<br /> उपलब्धि-कुल चार खुलासे, हैण्डलर को डीजीपी डिस्क, बीकानेर में गैंगरेप, चोरी के मामले में पांच किलोमीटर पीछा कर आरोपी तक पहुंचाया, रिवॉर्ड<br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>जुनून</strong></span></span><br /> उम्र-पांच साल तीन माह<br /> हैण्डलर-अरविंद कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-सीकर<br /> खासियत-नारकोटिक्स और ट्रेकर<br /> उपलब्धि-कुल तीन खुलासे, सीकर के दातारामगढ़ और सीकर में डबल मर्डर को खुलासा, रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>डेल्टा</strong></span></span><br /> उम्र-छह साल तीन माह<br /> हैण्डलर-कमलेश कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-भीलवाड़ा<br /> खासियत- ट्रेकर<br /> उपलब्धि-कुल तीन <br /> खुलासे, चोरी, हत्या के मामलों को मौके पर खोला, आॅल इण्डिया गेम खेले, रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>क्वाला</strong></span></span><br /> उम्र-पांच साल तीन माह<br /> हैण्डलर-उत्तम कोटेड कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-भीलवाड़ा<br /> खासियत- ट्रेकर<br /> उपलब्धि : कुल तीन खुलासे, चित्तौड़गढ़ के बेगू, भोपालसागर और विजयपुर में हत्या का खुलासा, रिवॉर्ड<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>जैमा</strong></span></span><br /> उम्र-पांच साल तीन माह<br /> हैण्डलर-विक्रम कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-जोधपुर रेंज<br /> खासियत- ट्रेकर-नारकोटिक्स<br /> उपलब्धि- तीन बड़ी वारदातों का खुलासा<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#0000ff;"><strong>गोल्फ</strong></span></span><br /> उम्र-छह साल पांच माह  हैण्डलर-बाबूलाल कांस्टेबल<br /> कार्यक्षेत्र-जयपुर कमिश्नरेट  खासियत- ट्रेकर-नारकोटिक्स<br /> उपलब्धि-कुल दो खुलासे, बस्सी में चप्पल के जरिए मर्डर के आरोपी को पकड़वाया, झुंझुनूं में 30 लाख रुपए चोरी का किया खुलासा, रिवॉर्ड<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> इनकी अहम भूमिका</strong></span></span><br /> हैड कांस्टेबल दिवाकर प्रसाद इन सभी डॉग्स को वर्ष 2016 से प्रशिक्षण दे रहे हैं। इन्हें गैलेन्ट्री प्रमोशन मिल चुका है। आॅल इण्डिया में गोल्ड मेडल मिल चुका है। कांस्टेबल जयप्रकाश इनका साथ देते हैं। कांस्टेबल कैलाश चंद इन सभी डॉग्स का मैनेजमेंट देखते हैं। कुतुबुद्दीन डायर नारकोटिक्स स्पेशलिस्ट हैं। <br /> <br /> पुलिस के डॉग्स हर गम्भीर अपराध में मौके पर साक्ष्य जुटाने में मदद करते हैं। जिससे कई बड़ी वारदातों का खुलासा किया है। यह डॉग्स स्पेशल ट्रेनिंग लिए हैं। इनके पूरे खान-पान और रहने की बेहतर व्यवस्था है। इन्हें केस के हिसाब से रिवॉर्ड भी दिए जाते हैं। - <strong>राहुल प्रकाश, डीआईजी क्राइम, पुलिस मुख्यालय राजस्थान</strong><br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jan 2022 11:11:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>दैनिक नवज्योति स्पेशल : राज्य की पहली चार सरकारों में ना महिला, ना एससी-एसटी</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीतिक बदलाव : अब मंत्रिमंडल में इनकी संख्या ज्यादा विभाग भी जिम्मेदारी वाले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%B2---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-2628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/first-pic-rajasthan-govt.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नए मंत्रिमंडल में महिला, आदिवासी और अनुसूचित जाति के मामले में बड़ा शिफ्ट किया है। इस मंत्रिमंडल में संख्या और विभागों के हिसाब से पहली बार ये वर्ग ताकतवर होकर उभरे हैं। इसकी तुलना राज्य के और कांग्रेस के भी शुरू के चार मंत्रिमंडलों से करें तो बदलाव सुखद है।  शुरू के तीनों मंत्रिमंडलों में न तो कोई महिला थी और न ही एससी-एसटी के किसी प्रतिनिधि को मंत्री बनाया गया था।  राजस्थान में बनी पहली अन्तरिम सरकार में मात्र 10 मंत्री थे, इस सरकार का कार्यकाल 30 मार्च, 1949 से 5 जनवरी, 1951 तक रहा। इस सरकार के मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री थे। इसके बाद गठित अन्तरिम सरकार में 11 मंत्री शामिल किए गए थे और जयनारायण व्यास को मुख्यमंत्री बनाया गया था। दूसरी अन्तरिम सरकार का कार्यकाल 26 अप्रैल,1951 से 3 मार्च,1952 रहा। इसके बाद राजस्थान में पहली लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ जिसमें टीकाराम पालीवाल मुख्यमंत्री थे। पहली लोकतांत्रिक (निर्वाचित) सरकार का कार्यकाल 3 मार्च, 1952 से 01 नवम्बर, 1952 रहा। पहली अन्तरिम सरकार के मुख्यमंत्री शास्त्री के पास सामान्य प्रशासन, राजनीतिक, वित्त और राजस्व विभाग थे। उनके मंत्रिमण्डल के सदस्य नृसिंह कछवाहा के पास श्रम,हकार, ग्रामीण पुनर्गठन, प्रेमनारायण माथुर के पास पुलिस, शिक्षा, प्रचार, कारखंजाब, भ्रष्टाचार निरोधक तथा फूलचन्द बाफना के पास स्वायत्त शासन, भूरेलाल बया के पास यातायात, सार्वजनिक निर्माण,रघुवर दयाल गोयल के पास कृषि, वन, नागरिक आपूर्ति, वेदपाल त्यागी के पास न्याय, विधि, शरणार्थी सहायता पुननर्वास, शेभाराम के पास राजस्व, भू-प्रबन्ध, सिद्धराज ढढ्ढा के पास वाणिज्य,उद्योग, राजस्व और हनुवन्त सिंह के पास जेल, चिकित्सा, जन स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा था। इसके बाद गठित दूसरी अन्तरिम सरकार में मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के पास सामान्य  प्रशासन, राजनीतिक, गृह, नियुक्ति और कुम्भाराम आर्य के पास स्वायत्त शासन, श्रम,जसवन्त सिंह के पास पृथक राजस्व, वित्त (ग्रुप-ाा),टीकाराम पालीवाल के पास राजस्व, मुद्रण लेखन सामग्री,नरोत्तमलाल जोशी के पास न्याय विधि, विधि परामर्शी,निर्वाचन, बलवंत सिंह मेहता के पास वाणिज्य, उद्योग,बृजसुन्दर शर्मा के पास वित्त (ग्रुप-Þ1),मथुरादास माथुर के पास शिक्षा, चिकित्सा, जन स्वास्थ्य, मोहनलाल सुखाडिया के पास नागरिक आपूर्ति, कृषि, युगलकिशोर चतुर्वेदी के पास सार्वजनिक निर्माण, शरणार्थी सहायता निर्वास और अमृतलाल यादव के पास अजा,अजजा व पिछडा वर्ग कल्याण विभाग का जिम्मा था। पहली लोकतांत्रिक सरकार में टीकाराम पालीवाल  मुख्यमंत्री बने थे। इस सरकार का कार्यकाल 3 मार्च, 1952 से 1 नवम्बर, 1952 रहा। पालीवाल के मंत्रिमण्डल में कुल आठ सदस्य थे। मुख्यमंत्री पालीवाल के पास गृह, नियुक्ति,सामान्य प्रशासन (देवस्थान रहित) राजनीतिक, आयोजना,अमृतलाल यादव के पास वन, सहकार, श्रम, शरणार्थी सहायता, पुनर्वास,नाथूराम मिर्धा के पास वित्त, शिक्षा, स्वायत्त शासन,भोगीलाल पाण्ड्या के पास खाद्य, नागरिक आपूर्ति, सिंचाई, अजा,अजजा व पिछडा वर्ग कल्याण, देवस्थान, भोलानाथ के पास सार्वजनिक निर्माण,पृथक राजस्व, शरणार्थी सहायता, पुनर्वास, यातायात, मोहनलाल सुखाडिया के पास कृषि, राजस्व (वन व सहकार रहित), अकाल राहत, रामकरण जोशी के पास स्वायत्त शासन, श्रम और रामकिशोर व्यास के पासउद्योग, चिकित्सा, जन  स्वास्थ्य, न्याय,विधि, विधि परामर्शी, विधानसभा, निर्वाचन, नगरीय विकास एवं वाणिज्य विभाग की जिम्मेदारी थी। चौथा मंत्रिमंडल जयनारायण व्यास का (1-11-52 से 13-11-54) था। इसमें भी एससी-एसटी और महिला को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। महिला को मौका मिला मोहनलाल सुखाड़िया मंत्रिमंडल (13-11-54 से 11-4-57) में। इसमें कमला को लिया गया था। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Nov 2021 10:47:08 +0530</pubDate>
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