<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/bill/tag-9346" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>bill - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/9346/rss</link>
                <description>bill RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शांति विधेयक में जल्दी परमाणु दायित्व पर अमेरिकी दबाव का परिणाम : यह वास्तव में ट्रम्प विधेयक, जयराम रमेश ने कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा पर विदेशी हितों को प्राथमिकता दे रही सरकार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम के एक हिस्से में भारत का उल्लेख  किया है, जिसमें परमाणु दायित्व नियमों पर अमेरिका और भारत के बीच संयुक्त मूल्यांकन का उल्लेख किया गया है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-peace-bill-is-a-result-of-us-pressure-on/article-136640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(5).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र में परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने वाले शांति विधेयक को पारित करने को परमाणु दायित्व से संबंधित नियमों पर अमेरिकी दबाव से जुड़ा करार दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम के एक हिस्से में भारत का उल्लेख  किया है, जिसमें परमाणु दायित्व नियमों पर अमेरिका और भारत के बीच संयुक्त मूल्यांकन का उल्लेख किया गया है।</p>
<p>उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शांति विधेयक को लेकर सरकार की जल्दबाजी समझ आ गयी है कि यह शांति विधेयक वास्तव में ट्रम्प विधेयक है, जिसमें रिएक्टर उपयोग और प्रबंधन वादा अधिनियम है, इस कानून का उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को खुश करना है। उनका कहना था कि संसद में इसी सप्ताह पारित शांति विधेयक, परमाणु क्षति में नागरिक दायित्व अधिनियम 2010 के प्रमुख प्रावधानों को कमजोर करता है, जिससे सुरक्षा और दायित्व पर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।</p>
<p>विपक्षी दलों ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि इस विधेयक प्रावधान सुरक्षा से समझौता करने वाले हैं और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाला है। उनका कहना था कि खासकर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के लिए इस विधेयक के प्रावधान यही कहते हैं। उनहोंने कहा कि यह विधेयक अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण की परिणति है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा पर विदेशी हितों को प्राथमिकता दे रही है। दूसरी तरफ सरकार का कहना है इस विधेयक का उद्देश्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा देना और निवेश को आकर्षित करना है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/the-peace-bill-is-a-result-of-us-pressure-on/article-136640</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/the-peace-bill-is-a-result-of-us-pressure-on/article-136640</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 18:50:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/1200-x-600-px-%285%29.png"                         length="1604553"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गृह मंत्रालय ने किया स्पष्ट : संसद में नहीं लाया जाएगा चंडीगढ़ से संबंधित विधेयक, कानून की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को परिवर्तित करने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ministry-made-it-clear-that-the-bill-related-to/article-133356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/home-ministry.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने के बारे में आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अभी चंडीगढ़ के लिये केंद्र द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है और इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का कोयी प्रस्ताव नहीं है। इन रिपोर्टों के कारण सियासी  हलकों में प्रक्रिया हो रही है। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को परिवर्तित करने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है। </p>
<p>पोस्ट में कहा गया कि संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है7 इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को परिवर्तित करने की कोई बात नहीं है। चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p>इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नहीं है7 आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई विधेयक प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है। रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने की दिशा में काम कर रही है। इससे चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल के अधिकार कम हो जाएंगे। यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ में दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद सृजित कर सकती है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/ministry-made-it-clear-that-the-bill-related-to/article-133356</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/ministry-made-it-clear-that-the-bill-related-to/article-133356</guid>
                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 16:37:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/home-ministry.png"                         length="949347"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल इंडिया के दौर में घर-घर पानी के बिल बांट रहा जलदाय विभाग, एक की जगह दूसरे महीने में मिलता बिल </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[समय पर नहीं मिलते ऑफलाइन बिल, भुगतनी पड़ती है पैनल्टी।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-the-era-of-digital-india--the-water-department-is-distributing-water-bills-door-to-door/article-116353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की आजादी के 75 साल बाद भी जलदाय विभाग डिजिटलाइजेशन की दौड़ में पिछड़ रहा है। जबकि, प्राइवेट सेक्टर  पूरी तरह से डिजिटलाइज हो कर उपभोक्ताओं को जरूरत की हर सुविधाएं घर बैठे उपलब्ध करवाने से लेकर तकनीकी रूप से सशक्त करने तक का काम कर रहे है। जबकि, सरकारी विभाग अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। जिससे उपभोक्ता अनावश्यक परेशानियों से जूझने को मजबूर है। विशेषज्ञों का तर्क है, यदि जलदाय विभाग बिजली का बिल ऑनलाइन दे तो उपभोक्ताओं को कई परेशानियों से निजात मिल सकती है।</p>
<p><strong>एक की जगह दूसरे महीने में मिलता बिल</strong><br />छत्रपुरा निवासी मोहम्मद आमीन, हर्षवर्धन चौहान, पुरूषोत्तम नागर कहते हैं, बिजली की तरह पानी का बिल भी ऑनलाइन मिले तो समय पर जमा करवाना आसान हो जाता है। हालात यह है, जलदाय विभाग बिलिंग का काम संवेदक फर्म से कराता है। बिल डिलीवर के दौरान यदि मकान बंद है तो कर्मचारी पड़ौस के घर में ही बिल पटक जाते हैं, जिससे संबंधित उपभोक्ता को समय पर बिल नहीं मिलता और पैनल्टी के रूप में नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में बिल ऑनलाइन बिल जनरेट किए जाने चाहिए ताकि बाहर होने पर भी उपभोक्ता को बिल मिल सके और समय पर जमा करवा सके। इससे सरकार को ही राजस्व के रूप में फायदा होगा। </p>
<p><strong>ऑनलाइन बिलिंग के फायदे </strong><br /><strong>कतारों में लगने की झंझट से निजात :</strong> उपभोक्ताओं को पानी का बिल ऑनलाइन मिलने लगे तो जमा करवाने के लिए ई-मित्र या कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। वहीं, कतारों में लगने की झंझट से निजात मिलेगी। वहीं, समय की बचत हो सकेगी। <br /><strong>पैनल्टी से मिलेगी राहत :</strong> ऑफलाइन के कारण  उपभोक्ताओं को कई बार समय पर बिल नहीं मिल पाते। जिसका खामियाजा उन्हें पैनल्टी चुकाकर भुगतनी पड़ती है। जबकि, ऑनलाइन बिलिंग से उपभोक्ता समय पर भुगतान करने को प्रेरित होंगे। <br /><strong>सुरक्षा का भाव :</strong> ऑफलाइन बिलिंग के लिए नकदी का उपयोग करना पड़ता है। कई बार लूटपाट की आशंका से उपभोक्ताओं को असुरक्षा महसूस होती है।  जबकि, ऑनलाइन बिलिंग से इस तरह की आशंकाओं से बचा जा सकता है। </p>
<p><strong>ऑफलाइन बिलिंग के नुकसान</strong><br /><strong>समय की बर्बादी :</strong> ऑफलाइन बिलिंग के चलते कार्यालयों में लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी होती है।<br /><strong>लेटलतीफी बढ़ना : </strong>कई इलाकों में जलदाय विभाग के कार्यालय घरों से काफी दूर होते हैं, जिसकी वजह से लोग  अक्सर जाने में आलस कर जाते हैं। इससे लेटलतीफी बढ़ती है और समय पर बिल जमा नहीं होने से पैनल्टी बढ़ती है। वहीं, कार्यालयों की तलाश करना और उन्हें ढूंढना मुश्किल हो सकता है।<br /><strong>विभाग को मैन पावर का नुकसान: ऑ</strong>फलाइन बिलिंग से  जलदाय विभाग को मैन पावर की कमी से जूझना पड़ता है। क्योंकि, विभाग के पास नियमित स्टाफ की कमी है और बिल डिलीवरी का काम संवेदक के कर्मचारियों द्वारा करवाया जा रहा है। यदि, बिलिंग आॅनलाइन कर दी जाए तो इन कर्मचारियों का उपयोग पाइप लाइन लीकेज, मीटर रीडिंग सहित अन्य कार्यों में विभाग कर सकता है।  </p>
<p>जलदाय विभाग डिजिटलाइजेशन की ओर कदम बढ़ा चुका है। आगामी दिनों में होने वाले टेंडरों में इसी को लेकर कुछ शर्तें जोड़ी जाएगी। जिसके माध्यम से संवेदकों को पाबंद किया जाएगा कि वह उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर पर बिल आने का मैसेज दिया जाए। हालांकि, ई-मित्र पर ऑनलाइन पानी का बिल जमा करवा सकते हैं। साथ ही फोन-पे, गुगल पे पर भी यह सुविधा है। <br /><strong>- श्याम माहेश्वरी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>
<p><strong>उपभोक्ताओं का कहना है</strong><br />डिजिटलाइजेशन होने से लोगों को सुविधाएं मिली हैं। लेकिन, समाज का बड़ा तबका तकनीक से परिचित नहीं हैं। ऐसे में वह पारंपरिक तरीके से बिलों का भुगतान करना ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि नये लोग ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम का उपयोग करने में ज्यादा रुचि रखते हैं।  इससे जहां समय की बचत होती है वहीं सुविधा भी मिलती है।  सरकार द्वारा लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। <br /><strong>- फिरोज खान, शिक्षक</strong></p>
<p>ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करना पसंद नहीं है। साइबर ठगी  का खतरा बना रहता है। ई-मित्र या कार्यालय जाकर बिल जमा करवाना हमारे लिए आसान है। सबूत के तौर पर रसीद भी मिल जाती है। <br /><strong>- सुरेंद्र पुरोहित, उपेंद्र कुमार, छावनी</strong></p>
<p>आज डिजिटलाइजेशन का दौर है। ऐसे में मोबाइल का रिचार्ज से लेकर बिजली बिल तक मोबाइल पर मिलता है। लेकिन, जलदाय विभाग आज भी घर-घर बिल बांटता है। ऐसे में बाहर रहने पर बिल के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती। समय पर भुगतान नहीं होने पर पैनल्टी भुगतनी पड़ती है। पानी का बिल ऑनलाइन मोबाइल पर दिया जाना चाहिए।<br /><strong>- आशीष, राजेंद्र, अजय कुशवाहा, बोरखेड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पानी का बिल ऑनलाइन दिए जाने का सुझाव सरकार को भेजा जाएगा। वहां से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसकी पालना की जाएगी। हालांकि, ऑनलाइन मोड पर पानी का बिल जमा करवाने की सुविधा है। उपभोक्ताओं को आॅफिसों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। वह ऑनलाइन ही बिल जमा करवा सकते हैं।<br /><strong>- प्रकाशवीर नाथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-the-era-of-digital-india--the-water-department-is-distributing-water-bills-door-to-door/article-116353</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-the-era-of-digital-india--the-water-department-is-distributing-water-bills-door-to-door/article-116353</guid>
                <pubDate>Wed, 04 Jun 2025 17:25:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-06/rtroer22.png"                         length="292307"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वक्फ विधेयक संविधान पर सोचा समझा हमला : देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का किया प्रयास, जयराम रमेश ने कहा- अतिक्रमण करने वालों को बचाने के लिए किए जा रहे है उपाय </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[धार्मिक संस्थाओं के प्रशासनिक अधिकार से वंचित किया जा सके। इससे अपनी भूमि को वक्फ को देने में अस्पष्टता उत्पन्न करने के लिए वक्फ की परिभाषा ही बदली गई है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/waqf-bill-thought-on-the-constitution-an-attack-on-the/article-108397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/jairam_ramesh-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार वक्फ विधेयक के जरिए संविधान पर एक और सोचा समझा हमला किया है और कहा कि इससे देश के सामाजिक ताने-दाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने यहां जारी एक बयान में कहा कि सरकार का उद्देश्य बहु-धार्मिक समाज के सामाजिक सछ्वाव  तोड़कर अल्पसंख्यक समुदाय की परंपराओं और संस्थाओं को बदनाम कर चुनावी लाभ के लिए ध्रुवीकरण की स्थिति उत्पन्न करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कानूनों के तहत वक्फ प्रबंधन के लिए सभी संस्थानों की स्थिति, संरचना और अधिकार को सुनियोजित तरीके से कम कर अल्पसंख्यक समुदाय को परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं के प्रशासनिक अधिकार से वंचित किया जा सके। इससे अपनी भूमि को वक्फ को देने में अस्पष्टता उत्पन्न करने के लिए वक्फ की परिभाषा ही बदली गई है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि देश की न्यायपालिका द्वारा लंबे समय से निर्बाध चली आ रही परंपरा के आधार पर विकसित अवधारणा को समाप्त किया जा रहा है और वक्फ प्रशासन को कमजोर करने के लिए बिना किसी कारण के मौजूदा कानून के प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही वक्फ की भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को बचाने और ज्यादा  सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/waqf-bill-thought-on-the-constitution-an-attack-on-the/article-108397</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/waqf-bill-thought-on-the-constitution-an-attack-on-the/article-108397</guid>
                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 15:55:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-01/jairam_ramesh-sixteen_nine.jpg"                         length="365069"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलदाय विभाग की देरी उपभोक्ताओं पर भारी, छह महीनों से पानी के बिल उपभोक्ताओं को नहीं गए बांटे  </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जलदाय विभाग की ओर से शहर में करीब छह महीनों से पानी के बिल उपभोक्ताओं को बांटे ही नहीं गए। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/late-of-water-supply-department-did-not-distribute-water-bills/article-104092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/news-(10).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जलदाय विभाग की ओर से शहर में करीब छह महीनों से पानी के बिल उपभोक्ताओं को बांटे ही नहीं गए। अब इसका खामियाजा शहर के करीब साढ़े पांच लाख उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। राजधानी जयपुर में करीब छह माह बाद पानी के बिलों का वितरण फिर से शुरू किया गया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को जून, जुलाई, अगस्त और सितम्बर महीने के बिल भेजे ही नहीं गए। ये बिल अब फरवरी माह में भेजे जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अचानक से चार महीने के बिल की भारी भरकम राशि का आर्थिक बोझ पड़ गया है और उपभोक्ता इन बिलों को एक साथ जमा कराने पर मजबूर हैं। हालांकि जलदाय विभाग ने सहूलियत के तहत एक साथ चार माह का बिल देने की व्यवस्था की है। इस पर कोई पैनल्टी भी नहीं लगाई है, लेकिन इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। अब उन्हें एक साथ तीन से चार हजार रुपए या इससे ज्यादा की राशि चुकानी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें बिल की राशि किस्तों में जमा करने की सुविधा दी जाए, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम हो सकें।</p>
<p><strong>मार्च में फिर वसूलेंगे चार महीने का बिल :</strong></p>
<p>जलदाय विभाग की ओर से उपभोक्ताओं मई 2024 के बाद पानी के बिल भेजे ही नहीं गए। बिलिंग व्यवस्था ठप होने से उपभोक्ताओं को बिलों का वितरण नहीं हो पाया। ऐसे में अब फरवरी 2025 में जाकर बिलों का वितरण शुरू किया गया है और पिछले साल के बिलों की वसूली की जा रही है। मार्च माह में अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर 2024 के साथ ही जनवरी 2025 सहित चार महीने के बिल एक साथ भेजे जाएंगे। जिससे अगले महीने फिर से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। इससे शहर के उपभोक्ताओं में खासी नाराजगी है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong></p>
<p>काफी समय से पानी का बिल नहीं आ रहा था। अब चार महीने का बिल अचानक एक साथ आ गया है, ऐसे में घर का बजट गड़बड़ा गया है। जमा नहीं कराया तो कनेक्शन कटने का भी डर सता रहा है। <br /><strong>-उम्मेद खान, निवासी झोटवाड़ा। </strong></p>
<p>किन्हीं कारणों से पिछले कुछ समय से उपभोक्ताओं को बिल नहीं भेजा जा सका। अब चार माह का बिल एक साथ भेजा जरूर जा रहा है और अगले महीने फिर बकाया चार महीने का बिल भेजा जाएगा, लेकिन इस पर कोई पैनल्टी नहीं ली जाएगी, क्योंकि यह विभाग की देरी से हुआ है। उपभोक्ताओं राहत देने के बारे में भी हम विचार कर रहे हैं।<br /><strong>-शुभांशु दीक्षित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता। </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/late-of-water-supply-department-did-not-distribute-water-bills/article-104092</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/late-of-water-supply-department-did-not-distribute-water-bills/article-104092</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 10:57:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-02/news-%2810%29.png"                         length="335491"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिजली की समस्या के लिए 55 किमी दूर जाने की मजबूरी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सहायक अभियंता कार्यालय खोलने की दरकार। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/forced-to-go-55-km-away-for-electricity-related-problems/article-100610"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>डाबी। डाबी क्षेत्र में सहायक अभियंता कार्यालय नहीं होने से 9 हजार बिजली उपभोक्ता परेशान है। डाबी क्षेत्र के गांवों के ग्रामीणों को बिजली सबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए 55 किमी दूर सहायक अभियंता कार्यालय तालेड़ा जाना पड़ता है। जिससे समय और धन बर्बाद होता है। बिजली बिल में सुधार कराना हो या छोटी-बड़ी कोई भी समस्या हो उसके निजात के लिए तालेड़ा जाने को मजबूर है। एक ही काम के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते है। </p>
<p><strong>समय और पैसे की होती है बर्बादी</strong><br />ग्रामीणों को विद्युत सबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए सहायक अभियंता कार्यालय तालेड़ा जाना पड़ता है। सहायक अभियंता कार्यालय तालेड़ा पहुंचने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त चक्कर लगाकर पहुंचना पड़ता है। तालेड़ा के जमीतपुरा स्थित सहायक अभियंता कार्यालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को डाबी क्षेत्र से कोटा, कोटा से तालेड़ा व तालेड़ा जमीतपुरा तक पहुंचना होता है। इस बीच उनका लगभग 55 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार ग्रामीणों को एक ही काम के लिए बार बार चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है।</p>
<p><strong>डाबी जीएएसएस पर सहायक अभियंता कार्यालय शुरू करने की मांग</strong><br />उपभोक्ताओं को मीटर खराब होने पर बदलवाने, विद्युत बिल में आई भुगतान राशि में सुधार करवाने, नए उपभोक्ताओं को कनेक्शन के लिए फाइल लगाने, ट्रांसफार्मर लगाने जैसे कई कार्यों के लिए तालेड़ा के चक्कर लगाना पड़ता है। क्षेत्रवासी विद्युत सबंधित सभी समस्याओं का निराकरण डाबी में हो सके, इसके लिए जीएसएस डाबी पर सहायक अभियंता कार्यालय संचालित करवाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे है। 33/11 केवी जीएसएस डाबी से ग्राम पंचायत लाम्बाखोह, राजपुरा, गोपालपुरा, गणेशपुरा, बुधपुरा, गरड़दा, डाबी, सूतड़ा, धनेश्वर, खड़ीपुर व डोरा के कुछ गांव जुड़े हुए है। इन ग्राम पंचायतों को 13 फीडर लाम्बाखोह, धनेश्वर अरबन, धनेश्वर ग्रामीण, सिलिका, डाबी, खडीपुर, हॉस्टल, भवानीपुरा माळ, पीएचडी डाबी, बेवड़िया, बुधपुरा, क्रेशर, स्टोन अलायन फेक्ट्री पलका में विभाजित किया हुआ है, जिनसे करीब 9 हजार विद्युत उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। वर्तमान में अभी क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जल जाता है तो जमीतपुरा तालेड़ा से मांगना पड़ता है। </p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों का दर्द</strong><br />धनेश्वर भाजपा नेता  सुरेश सुवालका का कहना था डाबी में जल्दी बिजली सहायक अभियंता कार्यालय खोला जाना चाहिए जिससे आम जन को राहत मिल सके।</p>
<p>डाबी में बिजली सहायक अभियंता कार्यालय खुलवाने की मांग को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष सत्यनारायण सोलंकी सहित भाजपा कार्यकर्ताओं ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी लिखित में शिकायत देकर समस्या से अवगत कराया है।  </p>
<p>समाजसेवी रमेश सोलंकी का कहना था डाबी उप तहसील कार्यालय होने सात ही आस पास के गांव भी डाबी से जुड़े हुए है जिनको बिजली संबंधित  छोटी मोटी समस्याओं को लेकर जमीतपुरा तालेडा जाना पड़ता है जिस में उपभोक्ताओं का समय और पैसा बर्बाद होता है। साथ ही समय पर काम भी नहीं हो पाते है इसलिए जल्दी डाबी में सहायक अभियंता कार्यालय खोला जाए जिससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।</p>
<p>पूर्व सरपंच फूलचंद जैन डाबी का कहना था  डाबी में  बरड़ क्षेत्र छोटे बड़े सभी बिजली ऊपभोक्ता है जिनको  नए कनेक्शनों सहित कृषि कनेक्शन व ट्रांसफॉर्म  की समस्या होने पर जमीतपुरा जाना होता है। डाबी से तालेडा के लिए  सड़क सही नहीं होने पर डाबी से कोटा से होकर तालेड़ा जाना होता है जिस में समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है इसलिए स्थानीय उपभोक्ताओं की मांग है। जल्दी डाबी में सहायक उपभोक्ता कार्यालय खोला जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ग्रामीणों ने डाबी क्षेत्र में एक सहायक अभियंता खोलने की मांग है जिसका प्रपोजल तैयार कर आगे भिजवा दिया गया है। जो कि आगे विभाग से स्वीकृत होगा। जैसे ही लिखित आदेश आएंगे जल्द ही डाबी सहायक अभियंता कार्यालय खोला जाएगा। जिससे आम लोगों की समस्या का समाधान समय पर कार्यालय में काम हो और लोगों को भटकना नहीं पड़े। साथ ही कार्यालय के पास ही होने से बिजली संबंधी सामग्री भी उपलब्ध रहेगी। <br /><strong>- प्रतीक शर्मा, एईएन, बिजली निगम डाबी</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/forced-to-go-55-km-away-for-electricity-related-problems/article-100610</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/forced-to-go-55-km-away-for-electricity-related-problems/article-100610</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 18:25:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/257rtrer-%281%2918.png"                         length="435498"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में नागरिकता प्रमाण की आवश्यकता वाला विधेयक बहुमत से पारित </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[वह इस कानून का विरोध करता है, क्योंकि शायद कभी-कभार ही गैर-नागरिकों ने संघीय चुनावों में मतदान किया होगा, ऐसा हर बार हो ये जरुरी नहीं है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bill-requiring-citijenship-proof-in-america-passed-with-majority%C2%A0/article-84393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/australia-flag1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के निचले सदन ने एक विधेयक पारित किया गया है, जिसके तहत देश में संघीय चुनावों के मतदान के लिये पंजीकरण करवाने वाले व्यक्तियों को अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। सदन के सांसदों ने 221-198 बहुमत से विधेयक पारित किया, जिसके बाद सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट निरस्त हो गया। सदन के बहुमत नेता स्टीव स्कैलिस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के तहत दक्षिणी सीमा पर अवैध आव्रजनों की बढ़ी संख्या के बीच संघीय चुनावों में सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस विधेयक के तहत अमेरिकी नागरिक ही मतदान करने के पात्र हैं।</p>
<p>वह इस कानून का विरोध करता है, क्योंकि शायद कभी-कभार ही गैर-नागरिकों ने संघीय चुनावों में मतदान किया होगा, ऐसा हर बार हो ये जरुरी नहीं है। अरबपति उद्यमी एलन मस्क ने कहा कि कानून का विरोध करने वाले सांसद अमेरिका के गद्दार हैं और जो लोग इस विधेयक से असहमत हैं, वे चुनावों में धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/bill-requiring-citijenship-proof-in-america-passed-with-majority%C2%A0/article-84393</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/bill-requiring-citijenship-proof-in-america-passed-with-majority%C2%A0/article-84393</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 15:25:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/australia-flag1.png"                         length="294569"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>औद्योगिक क्षेत्र में सालों से नल का बिल आ रहा औसत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[रिडिंग सिर्फ उन्हीं इलाकों की ली जाती है जहां 24 घंटे सप्लाई चालू रहती है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/average-tap-bill-in-industrial-area-for-years/article-71191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/audhyogik-kshetr-me-saalo-ne-nal-ka-bil-arha-ausat...kota-news-26-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1 - </strong>प्रेम नगर निवासी महेश मेघवाल ने बताया कि उनके यहां जब से नई पाइप लाइन डलने के बाद नए कनेक्शन हुए थे उसके बाद आजतक कोई भी मीटर से रिडिंग लेने नहीं आया। जब से कनेक्शन हुआ है औसत बिल आ रहा है। हर दो महीने में नल का बिल औसत 50 हजार लीटर के हिसाब से आता है जबकी हमारी पूरे घर की एक दिन की खपत ज्यादा से ज्यादा 600 लीटर की है। अगर रोजना 600 लीटर से भी माने तो दो महीने में 36 हजार लीटर पानी का उपभोग हो सकता है लेकिन बिल 50 से 60 हजार लीटर के बीच ही आता है। </p>
<p><strong>केस 2 -</strong> कंसुआ निवासी लविश महावर का भी लगभग इतना ही औसत बिल आता है जबकी उनके घर में चार ही सदस्य हैं जिनका रोज का औसत उपभोग 400 से 500 लीटर है लेकिन औसत बिल के नाम पर उनके हर महीने 30 हजार लीटर उपभोग का बिल आता है। लविश का कहना है कि उनके यहां भी कभी भी रिडिंग लेने वाला नहीं आया। विभाग हर महीने बस औसत बिल भेज देता है। कई बार तो बिल जमा करवाने के बाद भी अगले में जुड़कर का आ जाता है।</p>
<p><strong>केस 3 -</strong> इसी तरह डीसीएम क्षेत्र के इंद्रा गांधी नगर में भी जलदाय विभाग द्वारा औसत के नाम पर उपभोग से ज्यादा का बिल दिया जा रहा है। इलाके तिलक पारेता ने बताया कि उनके परिवार में 6 सदस्य हैं जिनकी रोज की लगभग 700 से 800 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन बिल इसके उलट 35 से 40 हजार लीटर का आता है जो शुद्ध उपभोग से ज्यादा है। कई बार इसके लिए बोला भी लेकिन एक बार बिल कम कर देते हैं फिर औसत देना चालू कर देते हैं।</p>
<p>शहर में जलदाय विभाग द्वारा कई महीनों से बिना मीटर से रिडिंग लिए ही औसत बिल जारी किए जा रहे हैं। जिसकी ना विभाग को चिंता है ना अधिकारियों को, आमजन औसत से कम मात्रा में पानी का उपभोग करने के बावजूद पूरा बिल भरने को मजबूर हैं। जिसकी सुनवाई के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है। वहीं ठेका कंपनी भी टीम नहीं होने का बहाना बनाकर रिडिंग लेने से बच रही है। ऐसे में विभाग और ठेका कंपनी के बीच में असमंजस की स्थिति का नुकसान ग्राहकों को उठाना पड़ रहा है। जब से नई लाइन डली औसत बिल आ रहा।</p>
<p><strong>रेगुलर सप्लाई नहीं होने से औसत बिल</strong><br />विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ क्षेत्रों में पानी की रेगुलर सप्लाई नहीं है और पानी की सप्लाई या तो सुबह या शाम को ही की जाती है इस वजह से वहां औसल बिल जनरेट किया जाता है। रिडिंग सिर्फ उन्हीं इलाकों की ली जाती है जहां 24 घंटे सप्लाई चालू रहती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पानी की सप्लाई व्यवस्था सुचारु रुप से चालू है और जहां तक औसत बिल जनरेशन का मामला है तो उसमें उपभोक्ता लिखित रूप से रिडिंग के माध्यम से बिल जनरेट करने की एप्लीकेशन दे सकता है। उसका बिल रिडिंग के अनुसार ही जनरेट किया जाएगा। <br /><strong>- भरत भुषण मिगलानी, अधिशाषी अभियंता, जलदाय विभाग कोटा</strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/average-tap-bill-in-industrial-area-for-years/article-71191</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/average-tap-bill-in-industrial-area-for-years/article-71191</guid>
                <pubDate>Mon, 26 Feb 2024 18:00:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/audhyogik-kshetr-me-saalo-ne-nal-ka-bil-arha-ausat...kota-news-26-02-2024.jpg"                         length="493229"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 लोकसभा में पेश, दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि हमारे आपके बच्चों को इस तरह की परिस्थिति से बचाया जाए जहां संगठित अपराध करने वाले दुष्ट लोगों को हमारी भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-heavy-punishment-for-using-unfair-means-in/article-69353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/paper-leak1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाओं में अनुचित साधनों का प्रयोग किए जाने के विरुद्ध कठोर दंडात्मक प्रावधानों वाले सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 को आज लोकसभा में पेश किया गया।<br /><br />कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सदन में यह विधेयक पेश करने के बाद कहा कि देश में एक नई परिस्थिति ने जन्म लिया है। पेपर लीक होने, प्रश्नपत्र बाहर हल किये जाने, नकल किये जाने आदि प्रकार की शिकायतें एकाएक बढ़ गयीं हैं। राजस्थान में 2018 से ऐसे 12 घोटाले हुए। इसका परिणाम परिश्रम करने वाले बच्चों को भुगतना पड़ता है। उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है। कई बच्चे भावुकता में अतिवादी कदम उठा लेते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में कोटा में एक बच्ची ने आत्महत्या कर ली और उसकी चिट्ठी पढ़ कर सारे देश में लोगों की आंखें नम हो गई थीं।</p>
<p>डॉ. सिंह ने कहा कि हमारे आपके बच्चों को इस तरह की परिस्थिति से बचाया जाए जहां संगठित अपराध करने वाले दुष्ट लोगों को हमारी भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यही भावी पीढ़ी 2047 के विकसित भारत के मिशन के वाहक बनेगी। उन्होंने कहा कि हम भले ही किसी भी राजनीतिक दल के हों लेकिन बच्चे हमारे सबके साझा हैं। हमारी विरासत उनके हाथ में जानी है। इसलिए उनकी सुरक्षा जरूरी है।</p>
<p>इस विधेयक का उद्देश्य पांच सार्वजनिक परीक्षाओं - संघ लोकसेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेल भर्ती बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, बैंक कार्मिक चयन संस्थान तथा केन्द्र सरकार के विभागों एवं उनसे संबद्ध कार्यालयों में भर्ती की परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकना है। </p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित इन परीक्षाओं में प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी की अनधिकृत पहुंच या लीक होना, सार्वजनिक परीक्षा के दौरान उम्मीदवार की सहायता करना, कंप्यूटर नेटवर्क या संसाधनों के साथ छेड़छाड़, योग्यता सूची या रैंक को शॉर्टलिस्ट करने या अंतिम रूप देने के लिए दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़, और फर्जी परीक्षा आयोजित करना, फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना या नकल करने या पैसा कमाने के लिए प्रस्ताव पत्र जारी करने के साथ साथ समय से पहले परीक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी का खुलासा करना और व्यवधान पैदा करने के लिए अनधिकृत लोगों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने पर रोक लगाता है। इन अपराधों पर तीन से पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<p>विधेयक में कहा गया है कि सेवा प्रदाताओं को पुलिस और संबंधित परीक्षा प्राधिकारी को रिपोर्ट करना होगा। सेवा प्रदाता एक ऐसा संगठन है जो सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण को कंप्यूटर संसाधन या कोई अन्य सहायता प्रदान करता है। ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट न करना अपराध होगा। यदि सेवा प्रदाता स्वयं कोई अपराध करता है, तो परीक्षा प्राधिकारी को इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। विधेयक सेवा प्रदाताओं को परीक्षा प्राधिकरण की अनुमति के बिना परीक्षा केंद्र स्थानांतरित करने से रोकता है। सेवा प्रदाता द्वारा किए गए अपराध पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे सेवा प्रदाता से जांच की आनुपातिक लागत भी वसूल की जाएगी। इसके अलावा, उन्हें चार साल तक सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से भी रोक दिया जाएगा। इसी तरह से यदि यह स्थापित हो जाता है कि सेवा प्रदाताओं से जुड़े अपराध किसी निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन, या सेवा प्रदाताओं के प्रभारी व्यक्तियों की सहमति या मिलीभगत से किए गए थे, तो ऐसे व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा। इन्हें तीन साल से लेकर 10 साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये जुर्माने की सजा होगी।</p>
<p>उक्त विधेयक में संगठित अपराधों के लिए उच्च स•ाा के प्रावधान हैं। एक संगठित अपराध को सार्वजनिक परीक्षाओं के संबंध में गलत लाभ के लिए साझा हित को आगे बढ़ाने के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किए गए गैरकानूनी कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है। संगठित अपराध करने वाले व्यक्तियों को पांच साल से 10 साल तक की सजा और कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी संस्था को संगठित अपराध करने का दोषी ठहराया जाता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क और जब्त कर ली जाएगी, और परीक्षा की आनुपातिक लागत भी उससे वसूल की जाएगी।</p>
<p>विधेयक के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनयोग्य होंगे। यदि यह साबित हो जाए कि आरोपी ने नियमानुसार उचित कार्य किया था, तब कोई भी कार्रवाई अपराध नहीं मानी जाएगी। उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त रैंक से नीचे का अधिकारी अधिनियम के तहत अपराधों की जांच नहीं करेगा। केंद्र सरकार जांच को किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर सकती है।</p>
<p>विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस के के सुरेश ने कहा कि वह इस बात से सहमत है कि सभी बच्चे हमारे साझा हैं। इसलिए वह विधेयक का समर्थन करते हैं। भाजपा की ओर से डॉ. सत्यपाल ङ्क्षसह, द्रमुक के डी एम कथीर आनंद, वाईआरएस कांग्रेस की अनुराधा, शिवसेना के राहुल शेवाले, बीजू जनता दल के अच्युतानंद सामंत और बहुजन समाज पार्टी केे मलूक नागर ने भी विधेयक का समर्थन किया।</p>
<p>सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित निवारण) विधयक 2024 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के प्रताप चंद सारंगी ने कहा कि अनुचित साधन का परीक्षा में इस्तेमाल की कई घटनाएं ओडिशा में हुई है। उनका कहना था कि अनुचित साधनों पर रोक लगाना राष्ट्रीय हित में है और इसे रोकने के लिए सभी को काम करना चाहिए। परीक्षा में अनुचित काम पर रोक लगाने के लिए जो प्रावधान बने उसमें सख्त सजा की व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलनी चाहिए और उन्हें बक्शा नहीं जाना चाहिए।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि जो लोग अपराध करते हैं उन्हें दण्डित किया जाना चाहिए और उन्हें अपराध की सजा अवश्य मिलनी चाहिए। उनका कहना था की हर अपराध के साथ न्याय होना चाहिए, लेकिन न्याय के लिए जो भी प्रक्रिया अपनाई जाए उसमें ठोस सबूत का आधार होना बहुत जरूरी है। बिना ठोस सबूत के कोई न्याय नहीं होता। अपराधी गतिविधि को किसी भी हाल में रोकने का काम सबको करना है।</p>
<p>आईयूएमएल के टी मोहम्मद बसीर ने कहा कि प्रश्न हमारे सिस्टम की साख का है और उसे बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है। देश में 1000 से ज्यादा विश्वविद्यालय हैं दूसरे कॉलेज और अन्य कई बड़े प्रतिष्ठित संस्थान है। इन सबकी साख बनी रहनी चाहिए है।<br /><br />बहुजन समाज पार्टी के कुंवर दानिश अली लोक परीक्षा (अनुचित निवारण) विधेयक 2024 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि देश में इस बड़ी बीमारी को ठीक करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह नक़ल माफिया सक्रिय हैं उसे देखकर ऐसा लगता है कि उनको राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पेपर रद्द होने के कारण छात्रों का सालों साल $खराब हुआ और इसके तनाव में आकर ह•ाारों छात्रों ने $खुदकुशी की है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में माफिया इस प्रकार सक्रिय हैं कि उसके करतूतों को उजागर करने वालों को ही जेल जाना पड़ा है।</p>
<p>कांग्रेस के डॉक्टर के जयकुमार ने कहा कि यह बहुत अच्छा विधेयक है परंतु इसे देर से लाया गया है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में क्या चल रहा है उससे किस प्रकार युवा प्रभावित है यह बात किसी से छिपी नहीं है। पेपर लीक करवाने वाले माफ़यिाओं की वजह से युवाओं को बड़ी क़ुर्बानियाँ देनी पड़ रही है। पेपर लीक मामले में जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p>भाजपा के सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि यह विधेयक बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था ताकि छात्रों को जिन परेशानियों से गुजरना पड़ा वह नहीं हो पाता। राजस्थान में पिछले पाँच साल में सत्रह पेपर लीक हुए हैं। उस राज्य में तो इस मामले में एसआईटी भी गठित की गई है और अब तक बीस लोग गिरफ़्तार किए गए हैं। राज्य सरकारों को भी इस प्रकार का विधेयक लाना चाहिए ताकि ईमानदार छात्रों को इसका लाभ मिल सके।</p>
<p>समाजवादी पार्टी के एस टी हसन ने कहा कि इस विधेयक की अति आवश्यकता थी। इसका मक़सद योग्य छात्रों को इंसाफ़ दिलाना और माफियाओं के ऊपर नकेल कसना है। उन्होंने कहा कई बार छात्रों को अपने शिक्षकों या प्रबंधन से भी अनबन होने पर $खामिया•ाा भुगतना पड़ता है इसलिए साक्षात्कार की भी वीडियोग्राफी की जानी चाहिए।</p>
<p>एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने विधायक का समर्थन करते हुए कहा कि देर आए दुरुस्त आए। उन्होंने कहा कि परीक्षा संचालित करने वाली राज्य सरकार की भी एजेंसियों को इसके दायरे में लाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक छात्रों को इंसाफ़ मिल सके।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-heavy-punishment-for-using-unfair-means-in/article-69353</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-heavy-punishment-for-using-unfair-means-in/article-69353</guid>
                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 18:40:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/paper-leak1.jpg"                         length="43253"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rajyasabha में पेश हो सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित बिल, सीजेआई की भुमिका हो सकती है खत्म</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता हुआ करते थे।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-bill-related-to-the-appointment-of-the-chief-election/article-54232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/parliament-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मानसून सत्र में केन्द्र सरकार की ओर से राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को रेगुलेट करने से संबंधित बिल पेश किया जा सकता है। इस बिल के अस्तित्व में आने पर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को खत्म किया जा सकता है।</p>
<p>अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता हुआ करते थे। हालांकि अभी तक बिल का डार्फ्ट सामने नहीं आया है।   </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/the-bill-related-to-the-appointment-of-the-chief-election/article-54232</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/the-bill-related-to-the-appointment-of-the-chief-election/article-54232</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Aug 2023 13:25:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-08/parliament-%282%29.png"                         length="456916"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां कम वाले बिल का विरोध</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[रिपोर्ट के अनुसार वहां की सीनेट ने विपक्ष के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों में कटौती करने और पीठों के गठन के संबंध में विधेयक पारित किया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/opposed-the-bill-reducing-the-powers-of-the-court-in-pakistan/article-41470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/666-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>रावलपिंडी। पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां कम करने वाले बिल को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार वहां की सीनेट ने विपक्ष के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों में कटौती करने और पीठों के गठन के संबंध में विधेयक पारित किया। कई विपक्षी दल और जनता का एक बड़ा वर्ग इसका विरोध कर रहा है। जनता इसके खिलाफ आन्दोलन की राह पर है। बुद्धिजीवी और मानवाधिकारवादी भी बिल का खुला विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने इस कदम के लिए संघीय सरकार की आलोचना की और कहा कि बिल का मकसद न्यायपालिका पर और दबाव डालना है। पाकिस्तान के संसद के उच्च सदन सीनेट में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों में कटौती करने और पीठों के गठन के संबंध में विधेयक पारित हो गया। सुप्रीम कोर्ट प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर बिल, 2023 को देश के कानून और न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने पेश किया। उत्तरी वजीरिस्तान के सांसद मोहसिन दावर ने संशोधन पेश किए, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया।</p>
<p>इससे पहले यह बिल संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में पारित किया गया था।  हालांकि अभी इस बिल के कानून बनने में देर है। इसके लिए उसे कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। जब दोनों सदन अंतिम विषय वस्तु पर सहमत होते हैं, तो किसी भी विधेयक को संसद द्वारा सहमति मान ली जाती है। उसके बाद उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। जिनके हस्ताक्षर के बाद ही वह बिल कानून बन जाता है। कुछ दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय के दो न्यायाधीशों न्यायमूर्ति अली शाह और न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखैल ने सीजेपी की स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियों पर सवाल उठाया था।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/opposed-the-bill-reducing-the-powers-of-the-court-in-pakistan/article-41470</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/opposed-the-bill-reducing-the-powers-of-the-court-in-pakistan/article-41470</guid>
                <pubDate>Sun, 02 Apr 2023 11:18:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-04/666-copy5.jpg"                         length="132710"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राइट टू हेल्थ बिल का विरोध : वार्ता विफल आज परिवार सहित डॉक्टर सड़कों पर उतरेंगे</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[इस बिल के विरोध में देशभर में निजी अस्पताल बंद रहेंगे। डॉक्टरों ने रविवार को जेएमए सभागार में सरकार की सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ किए और बैठक कर आगे की रणनीति भी बनाई। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/protest-talks-against-right-to-health-bill-failed-doctors-along/article-40896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(3)8.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर प्रदेशभर में डॉक्टरों का चल रहा आंदोलन सोमवार को देशव्यापी रूप ले सकता है। आईएमए के आह्वान पर देशभर के प्राइवेट अस्पतालों को बंद रखने का ऐलान किया गया है। वहीं सरकार रविवार को वार्ता को आगे आई। शासन सचिवालय में मुख्य सचिव उषा शर्मा की अध्यक्षता में अधिकारियों ने आंदोलित डॉक्टरों के दस चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की है, लेकिन बैठक में डॉक्टर केवल और केवल बिल को रद्द करने पर ही आंदोलन खत्म करने की बात को दोहरा कर आए हैं। वार्ता विफल हो गई। एकबारगी तो डॉक्टरों ने संशोधन की बात करने पर चंद मिनटों में ही वार्ता खत्म कर दी। बाद में फिर से उन्हें समझा-बुझाकर वार्ता की टेबल पर लाया गया, लेकिन डॉक्टर बिल में संशोधन नहीं, बल्कि इसे पूरी तरह से रद्द करने की मांग पर ही अडे रहे। प्रतिनिधिमंडल में डॉक्टरों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन डॉ. सुनील चुघ सहित अन्य शामिल थे। आंदोलन के मुख्य संयोजक डॉ. अशोक शारदा ने बताया कि हम सरकार से वार्ता करने के लिए नहीं गए। बल्कि उनसे बिल को वापस करने की मांग को लेकर गए थे। वे सीएम से वार्ता करना चाहते हैं, क्योंकि वे ही बिल को रद्द कर सकते हैं। सचिव प्राइवेट हॉस्पिटल एण्ड नर्सिंग होम सोसायटी डॉ. विजय कपूर ने बताया कि सोमवार को डॉक्टर्स की एक बड़ी रैली 11 बजे एसएमएस अस्पताल के जेएमए सभागार से निकाली जाएगी। रैली में निजी अस्पतालों के स्टाफ और डॉक्टरों के परिवार भी हिस्सा लेंगे। रैली जेएमए से महारानी कॉलेज, पांच बत्ती, अजमेरी गेट से अर्ल्बट हॉल तक जाएगी। यहां सभा होगी। इस बिल के विरोध में देशभर में निजी अस्पताल बंद रहेंगे। डॉक्टरों ने रविवार को जेएमए सभागार में सरकार की सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ किए और बैठक कर आगे की रणनीति भी बनाई। </p>
<p><strong>मरीजों की जान सांसत में, 29 को सेवारत डॉक्टर नहीं आएंगे </strong><br />प्रदेशभर में प्राइवेट अस्पतालों के बंद रहने और सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में रेजीडेन्ट डॉक्टरों के बिल के विरोध में काम नहीं करने से मरीजों की जान सांसत में आ गई हैं। एसएमएस अस्पताल सहित प्रदेशभर में बड़े अस्पतालों की सेवाएं चरमराई हुई है। आॅपरेशन, ओपीडी, भर्ती मरीजों का इलाज रेंग-रेंग कर हो रहा है। वहीं 29 मार्च को प्रदेशभर के सेवारत डॉक्टरों ने प्रदेशभर में एक दिन हड़ताल पर रहने का ऐलान कर रखा है। ऐसा हुआ तो गांव-ढाणियों तक सेवाएं प्रभावित होंगी। </p>
<p><strong>गहलोत ने लिया डॉक्टर्स आंदोलन का फीडबैक रैली में कानून व्यवस्था बनाए रखने के दिए निर्देश</strong> <br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राइट टू हेल्थ बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे डॉक्टर्स की प्रस्तावित रैली में कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। गहलोत ने रविवार देर शाम डॉक्टर्स हड़ताल को लेकर उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में चिकित्सा विभाग, पुलिस, प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने डॉक्टर्स हड़ताल का फीडबैक लिया और अफसरों को डॉक्टर्स से संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। बिल के बिंदुओं को लेकर डॉक्टर्स से विस्तृत चर्चा करने के निर्देश दिए। संभवत: सोमवार को फिर से डॉक्टरों को वार्ता के लिए बुलाया जा सकता है। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/protest-talks-against-right-to-health-bill-failed-doctors-along/article-40896</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/protest-talks-against-right-to-health-bill-failed-doctors-along/article-40896</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 09:52:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-03/site-photo-size-%283%298.jpg"                         length="287550"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        