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                <title>refused - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>refused RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कांग्रेस महिला विधायक दिव्या रोहित जोशी के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाली पीड़तिा के पक्ष में उतरी, डीजीपी से FIR दर्ज करने से मना करने वाले थानेदार के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच के आदेश देने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस महानिदेशक और राजस्थान पुलिस को पीड़तिा एवं उसके परिवार को उनके राजस्थान के पैतृक निवास पर सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए: दिव्या मदेरणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--congress-came-out-in-favor-of-the-victim-who-filed-a-case-against-woman-mla-divya-rohit-joshi--demanding-the-dgp-to-order-an-immediate-departmental-inquiry-against-the-sho-who-refused-to-register-the-fir/article-9493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/divya-maderna.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस की विधायक एवं पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी के खिलाफ दिल्ली में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने वाली पीड़तिा के पक्ष में उतरते हुए कहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने से मना करने वाले थानेदार के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच के आदेश एवं पीड़तिा के निवास पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। <br /><br />ओंसिया से विधायक दिव्या मदेरणा ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कहा कि राजस्थान सरकार ने एक जून 2019 से थानों में मामला दर्ज नहीं करने पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने फरियादी का मामला दर्ज करने से मना करने पर संबंधित थानेदार के खिलाफ विभागीय जांच करने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली के सदर बाजार थाने में दर्ज जीरो नंबर एफआईआर अभी जांच के अधीन है। मेरा पुलिस प्रशासन से प्रश्न है कि यह एफआईआर राजस्थान पुलिस ने क्यों नहीं दर्ज की। पुलिस महानिदेशक को एफआईआर दर्ज करने से मना करने वाले थानेदार के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच के आदेश देने चाहिए।<br /><br />उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक और राजस्थान पुलिस को पीड़तिा एवं उसके परिवार को उनके राजस्थान के पैतृक निवास पर सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। हमारी सरकार बहुत संवेदनशील है, लेकिन पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले ने राजस्थान पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि एक युवती ने दिल्ली के सदर बाजार थाने में रोहित जोशी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 19:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन का दावा: रूसी सैनिकों ने पुतिन का आदेश मानने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[ फ्लेमिंग के हवाले से कहा कि ब्रिटेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने यूक्रेन सरकार और सैन्य प्रणालियों को बाधित करने के रूस के निरंतर इरादे को देखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/britain-s-claim--russian-soldiers-refused-to-obey-putin-s-order/article-7106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia1.jpg" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ब्रिटिश खुफिया प्रमुख जेरेमी फ्लेङ्क्षमग ने गुरुवार को कहा कि कुछ रूसी सैनिकों ने हथियारों और मनोबल की कमी के कारण अपने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेशों का यूक्रेन में पालन करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी जीसीएचक्यू फ्लेमिंग ने कैनबरा में कहा कि ऐसा लगता है कि  पुतिन ने स्थिति का बड़े पैमाने पर गलत आकलन किया है। यह स्पष्ट है कि उन्होंने यूक्रेन के लोगों के प्रतिरोध को गलत आकलन किया।<br /><br />उन्होंने कहा कि हमने रूसी सैनिकों को हथियारों और मनोबल की कमी के कारण  आदेशों को पूरा करने से इनकार करते हुए, अपने स्वयं के उपकरणों में तोडफ़ोड़ करते हुए और यहां तक कि गलती से स्वयं के विमानों को मार गिराते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि भले ही हम मानते हैं कि पुतिन के सलाहकार उन्हें सच बताने से डरते हैं। क्या हो रहा है और इन गलत निर्णयों की सीमा शासन के लिए स्पष्ट होनी चाहिए। </p>
<p> फ्लेमिंग के हवाले से कहा कि ब्रिटेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने यूक्रेन सरकार और सैन्य प्रणालियों को बाधित करने के रूस के निरंतर इरादे को देखा है। साथ ही उन संकेतकों को देखा है कि रूस के साइबर अभिनेता क्रेमलिन के कार्यों का विरोध करने वाले देशों में लक्ष्य की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने वैगनर समूह सहित यूक्रेन में भाड़े के सैनिकों और विदेशी लड़ाकों का उपयोग करने वाले रूस को लेकर कहा,'' समूह रूसी सेना की छाया शाखा के रूप में काम करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 18:43:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिजाब विवाद सुनवाई मामले पर अभी करना होगा इंतजार: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की  गुहार ठुकरा दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-refused-to-fix-any-fixed-date-for-hearing-the-petitions-challenging-the-karnataka-high-court-s-decision-on-hijab/article-6629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab01.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 'हिजाब' मामले पर  कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर  सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की  गुहार ठुकरा दी। <br /><br />कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए  उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।  कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।<br /><br />मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर  इस मामले पर  होली के बाद  विचार करने का संकेत दिया था। वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।</p>
<p><br />याचिकाकर्ताओं में शामिल लोगों ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि  विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।</p>
<p><br />अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं।  याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था। याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 13:22:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने बीएड अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत देने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने रीट लेवल वन में बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने को लेकर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय करते हुए तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल वन के पदों पर दी जाने वाली नियुक्तियों को एसएलपी के निर्णयाधीन रखा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refused-to-give-relief-of-candidates/article-6224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/46546546546533.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने रीट लेवल वन में बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने को लेकर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय करते हुए तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल वन के पदों पर दी जाने वाली नियुक्तियों को एसएलपी के निर्णयाधीन रखा है। कोर्ट ने यह आदेश बीएड अभ्यर्थी देवेश शर्मा और एनसीटीई की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। मामले के अनुसार एनसीटीई ने अधिसूचना जारी कर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल वन में बीएड अभ्यर्थियों को इस शर्त पर पात्र माना था कि संबंधित अभ्यर्थी को नियुक्ति के दो साल में छह माह का ब्रिज कोर्स पास करना जरूरी होगा। हाईकोर्ट ने इस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था।</p>
<p>इस आदेश के खिलाफ बीएड अभ्यर्थी और एनसीटीई ने एसएलपी दायर की थी, जिसका विरोध करते हुए बीएड अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता विज्ञान शाह ने कहा कि एनसीटीई ने अधिसूचना को केन्द्र सरकार के निर्देश पर जारी किया था, जबकि केन्द्र सरकार को आरटीई एक्ट व एनसीटीई एक्ट के तहत इस तरह का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करते हुए दी जाने वाली नियुक्तियों को एसएलपी के अधीन करते हुए मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refused-to-give-relief-of-candidates/article-6224</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 11:51:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का युद्ध में फंसे भारतीयों की वापसी की मांग वाली याचिकाओं पर आदेश पारित करने से इंकार </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने रूस-यूक्रेन युद्ध संकट में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग वाली याचिकाओं पर कोई आदेश पारित करने से इंकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refused-to-order-at-petition-for-return-of-indians/article-5412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/court-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रूस-यूक्रेन युद्ध संकट में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग वाली याचिकाओं पर कोई आदेश पारित करने से इंकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई की मांग पर कहा कि अदालत क्या करेगी। क्या रूस के राष्ट्रपति को युद्ध रोकने का निर्देश दे सकते है। एक याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे अधिवक्ता एएम दर  द्वारा याचिका पर सुनवाई का उल्लेख करने पर मुख्य न्यायाधीश ने  कहा कि क्या व्लादिमीर पुतिन से युद्ध रोकने के लिए कह सकता हूं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि अदालत विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी के लिए निर्देश दे सकती है। कोर्ट ने कहा कि यूक्रेन-रूस संघर्ष से उत्पन्न संकट में फंसे विद्यार्थियों के प्रति उनकी सहानुभूति है, लेकिन वह इस मामले में कोई आदेश पारित नहीं कर सकती है।</p>
<p>विशेष उल्लेख करने वाले अधिवकत ने एक छात्र समेत अन्य 30 विद्यार्थियों को रोमानिया की सीमा से भारत वापस लाने के लिए आवश्यक फैसले का निर्देश देने की याचिका पर सुनवाई की मांग की थी। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने न्यायालय से केंद्र सरकार को तत्काल आवश्यक कूटनीतिक फैसले के निर्देश देने की मांग की थी। उनकी ओर से दायर याचिका में यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर विशेष तौर पर चिंता व्यक्त की गई है। पढ़ाई एवं नौकरी तथा अन्य कार्यों से यूक्रेन गए लोगों के वहां से भारत लौटने की कोई व्यवस्था नहीं है। हजारों की संख्या में विद्यार्थी समेत अन्य लोग वहां फंसे हुए हैं। संकट में वहां के भारतीयों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे हालात में केंद्र सरकार कूटनीतिक माध्यम से आवश्यक फैसले करे। याचिकाकर्ता ने युद्ध की स्थिति को देखते हुए मेडिकल क्षेत्र में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिता व्यक्त की है। सरकार को छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई एवं शिक्षा से संबंधित सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। <br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 15:36:28 +0530</pubDate>
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                <title>एकतरफा प्यार: फ्रेंडशिप से मना किया तो छात्रा का गला काटा</title>
                                    <description><![CDATA[बेखौफ इतना कि अस्पताल जाकर लोगों से पूछा जिंदा है या मर गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/pali/%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%AB%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE/article-2680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/pali.jpg" alt=""></a><br /><p>राणावास। निकटवर्ती गांव बिठौडा कलां गांव के राजकीय सीनियर सैकंडरी विद्यालय में मंगलवार को एक छात्र ने सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया। विद्यालय की एक छात्रा के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ वार कर जख्मी कर  दिया। जानकारी मिलने पर शिक्षकों ने खून से लथपथ छात्रा को मारवाड़ जंक्शन सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे पाली रेफर कर दिया गया। इतने में भी छात्र का मन नहीं पसीजा और अस्पताल जाकर उसने लोगों से पूछा कि वह जिंदा है या मर गई। बताया जा रहा है कि यह छात्र काफी समय से फ्रेंडशिप के लिए छात्रा पर दबाव बना रहा था। उसके मना करने के दौरान आरोपी छात्र ने इस घटना को अंजाम दिया है। जख्मी छात्रा का पाली के ट्रोमा वार्ड में इलाज जारी है। पुलिस आरोपी छात्र की तलाश में जुटी है।</p>
<p><br /> प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विद्यालय में कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा लंच के दौरान अपनी कक्षा में खाना खा रही थी। इतने में मौका पाकर बाहरवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने छात्रा के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ वार कर उसे जख्मी के दिया। अचानक हुए इस हमले को देख अन्य छात्रों के चिल्लाने की आवाज से स्कूल स्टाफ मौके पर जाकर देखा तो छात्रा लहूलुहान हालत में पड़ी हुई थी जिसको तुरंत मारवाड़ के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सक विकास गहलोत ने स्थिति गंभीर होने के कारण इलाज के लिए पाली रेफर कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>पाली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Nov 2021 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>बाल विवाह रोकना पड़ा भारी : परिजनों ने किया बालिका को रखने से इनकार, बाल आयोग ने मौके पर की समझाइश.... पढ़े यह ख़बर</title>
                                    <description><![CDATA[परिजनों की दो टूक-जिसकी वजह से बदनामी हुई, उसे अपने घर में नहीं रखेंगे, क्या कानून से ऊपर है घरवालों की जिद?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80---%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B6-----%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%96%E0%A4%BC%E0%A4%AC%E0%A4%B0/article-2634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/22-udi-balika.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। जिले के कुराबड़ थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय बालिका द्वारा स्वयं का विवाह रुकवाने के मामले में जांच के लिए बाल आयोग अध्यक्ष संगीता बेनीवाल सहित अन्य अधिकारी सोमवार को उसके गांव पहुंचे। उन्होंने बालिका को परिजनों को सुपुर्द करना चाहा, लेकिन परिजनों ने दो टूक जवाब दिया कि इसकी वजह से उनके परिवार की बदनामी हुई है। ऐसे में वे इसे अपने घर में नहीं रख सकते। अध्यक्ष बेनीवाल व अन्य ने करीब दो घंटे तक परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। उल्लेखनीय है कि भूतिया गांव में सातवीं कक्षा तक पढ़ी बालिका का आटा-सांटा प्रथा में रविवार को विवाह होने वाला था। उसने गांव के ही एक युवक की मदद से बाल आयोग अध्यक्ष बेनीवाल से व्हाट्स एप पर लगातार चेटिंग करते हुए बाल विवाह की गतिविधियों की जानकारी शेयर की और विवाह रुकवाने की गुहार लगाई थी। इस पर बेनीवाल ने प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग से बारात आने से पहले ही बालिका को पड़ोस के घर से बरामद कर उसका विवाह रुकवा दिया था।</p>
<p><br /> <strong>बालिका को लेकर घर पहुंचे</strong><br /> बाल आयोग अध्यक्ष बेनीवाल, बाल अधिकारिता विभाग की उपनिदेशक मीना शर्मा, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष धु्रवकुमार कविया आदि बालिका गृह पहुंचे, जहां बालिका को उसके घर जाने के लिए राजी किया। शाम को सभी उसके गांव पहुंचे, तो परिजनों ने उसे रखने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong><br /> समाज के लोगों ने मामले को तूल दिया</strong>: बालिका के गांव पहुंचने की सूचना पर बड़ी संख्या में समाजजन उसके घर के बाहर एकत्र हो गए, जिन्होंने परिजनों की समझाइश करने के बजाय मामले को और तूल देने का प्रयास किया।आयोग अध्यक्ष ने करीब दो घंटे तक परिजनों और समाज के नेताओं से समझाइश की तो वे उस लड़के के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए, जिसने बालिका की मदद की थी। सभी प्रयास नाकाम होने पर आयोग अध्यक्ष एवं अन्य उदयपुर लौट आए। बालिका पुन:  बालिका गृह में पहुंच गई। <br /> <br /> <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Nov 2021 12:23:44 +0530</pubDate>
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