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                <title>defense - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत और अल्जीरिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति: भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी होगी प्रगाढ़, परस्पर सहयोग से दोनों बनेंगे विकसित राष्ट्र </title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम ने 'विकसित राष्ट्र' बनने के साझा लक्ष्य के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। वहीं, भारत और अल्जीरिया ने सैन्य प्रशिक्षण और उद्योगों में सहयोग बढ़ाने हेतु रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-algeria-agreed-to-increase-defense-cooperation-india-vietnam-will/article-152932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत और वियतनाम ने अपनी समग्र रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का निर्णय लिया है और दोनों देश एक-दूसरे के विजन तथा लक्ष्यों में सहयोग करते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को मिलकर साकार करेंगे। पीएम मोदी ने भारत यात्रा पर आये वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम के साथ बुधवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता में परस्पर संबंधों के पहलुओं पर व्यापक बातचीत की । इसके बाद पीएम मोदी ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि तो लम ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बोध गया से की है। उन्होंने कहा," यह हमारे दोनों देशों की साझा सभ्यतागत और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है। उनकी इस यात्रा और सार्थक चर्चाओं से, हम अपनी सद्भावना को कई ठोस परिणामों में बदल रहे हैं।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक दशक से समग्र रणनीतिक साझेदारी है और इस दौरान संबंधों में व्यापक प्रगति हुई है । दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन संबंध मजबूत हुए हैं। इस मजबूत नींव पर आगे बढते हुए " आज हम अपने संबंधों को और अधिक मजबूत समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जा रहे हैं। अब हम अपनी साझेदारी को और ऊँचे लक्ष्यों की ओर अग्रसर करेंगे। संस्कृति, संपर्क, क्षमता निर्माण के साथ-साथ, सुरक्षा, सततता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला हर क्षेत्र में हमारा सहयोग नए स्तर पर पहुँचेगा।" उन्होंने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में अपनी प्रतिभा, सुशासन और आर्थिक सुधार के बल पर, भारत और वियतनाम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में उभर रहे हैं। अब हमारी प्रगाढ़ रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से, हम एक-दूसरे के तेज विकास के सहायक बनेंगे।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में परस्पर सहयोग पर सहमति व्यक्त की है और यह बुद्ध की शिक्षाओं की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा ," जैसा कि बुद्ध की शिक्षाओं की भावना है कि यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है। इसी भावना के साथ, हम एक-दूसरे के विजन और लक्ष्यों में सहयोग करते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को मिलकर साकार करेंगे। हम साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे, और साथ जीतेंगे।"</p>
<p>भारत और अल्जीरिया ने रक्षा सहयोग का दायरा बढाने तथा इसे और प्रगाढ बनाने पर सहमति जतायी है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को यहां बताया कि भारत-अल्जीरिया संयुक्त आयोग की मंगलवार को यहां हुई पहली बैठक में यह सहमति बनी। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा सहयोग और रक्षा उद्योगों के क्षेत्र में पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग गतिविधियों को और अधिक विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>दोनों देशों ने भारत-अल्जीरिया रक्षा सहयोग के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए उत्तरदायी कार्यप्रणाली नियमों पर हस्ताक्षर किए, यह संयुक्त आयोग की बैठकों के लिए मार्गदर्शक प्रारूप के रूप में कार्य करेंगे। बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद और अल्जीरिया की नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं, मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ, रक्षा उत्पादन विभाग, डीआरडीओ, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे।</p>
<p>भारत और अल्जीरिया के बीच रक्षा संबंध 2024 में रक्षा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद से निरंतर आगे बढ रहे हैं और दोनों पक्षों की उच्च स्तरीय यात्राओं से संबंध और मजबूत हो रहे हैं। अल्जीरिया के नौसेना प्रमुख की यह यात्रा भारत-अल्जीरिया रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण पहल है और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। बैठक से पहले मेजर जनरल कायद नूर एड्डिन ने यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। अल्जीरिया का प्रतिनिधिमंडल इस यात्रा के दौरान रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों से भी वार्तालाप करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:34:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने की ईरान युद्ध खत्म होने की घोषणा, कहा-'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने हासिल किए लक्ष्य, भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर होगा। अमेरिका अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, हालांकि जवाबी कार्रवाई के विकल्प खुले रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-announced-the-end-of-iran-war-said-operation/article-152877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया प्रमुख सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब समाप्त हो गया है। ह्वाइट हाउस में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे के आसपास प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस अभियान के अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किये गये आक्रामक सैन्य अभियान के सभी रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिये गये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने अब अपने आक्रामक चरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब ध्यान भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।</p>
<p>इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत अब सेना 'आक्रामक' रुख छोड़कर 'रक्षात्मक' मुद्रा में आ गयी है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब नयी जंग शुरू करने के बजाय अमन को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने हालांकि यह चेतावनी भी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में ताकत के इस्तेमाल का विकल्प अब भी खत्म नहीं हुआ है। यदि अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होता है तो अमेरिका अपनी पूरी शक्ति के साथ जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p>आक्रामक अभियान की समाप्ति के बाद अब अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की है। इस नये मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना और फिर से खोलना है। 'टाइम' और 'सीएनए' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेगी। रुबियो ने इसे एक 'रक्षात्मक कवच' बताते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी सेना पर गोली नहीं चलायी जायेगी, तब तक उनकी तरफ से कोई हमला नहीं होगा, लेकिन वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए मुस्तैद रहेंगे।</p>
<p>व्हाइट हाउस की इस ब्रीफिंग में यह संदेश भी दिया गया कि अब सारा ध्यान सैन्य कार्रवाई से हटकर कूटनीति पर रहेगा। अमेरिका का अगला लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अंत एक बड़े युद्ध के थमने का संकेत तो है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और कड़ी निगरानी अब भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 : राजनाथ सिंह ने कहा-बदला है वार फेयर का चेहरा, तकनीक के चलते हुये क्रांतिकारी बदलाव, साइबर स्पेस में भी लड़े जा रहे युद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा त्रिवेणी का संगम बताया। उन्होंने आधुनिक युद्ध में AI और ड्रोन की भूमिका को गेम चेंजर करार दिया। सिंह ने भारतीय सेना से चौकन्ना रहने और वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/north-tech-symposium-2026-rajnath-singh-said-the-face/article-152620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में शुरु हुये नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को ज्ञान व शक्ति का महाकुंभ बताते हुये कहा कि यह वास्तव में रक्षा त्रिवेणी का संगम है। राजनाथ सिंह ने तीन दिवसीय कार्यक्रम का उदघाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि हर काल खंड में वार फेयर का चेहरा बदला है,विश्व युद्ध के बाद नई तकनीक का समावेश होते हुए दुनिया ने देखा है। 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी के नए युग का आगाज हुआ है। उन्होने कहा कि यह इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। आज साइबर स्पेस में भी युद्ध लड़े जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि बीते 10-15 वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर उन्होने कहा कि दोनों के बीच पारंपरिक युद्ध शुरू हुआ, लेकिन अब यह युद्ध ड्रोन और सेंसर युद्ध के रूप में गेम चेंजर बनकर उभरा है। आज सब कुछ वैपनाइज किया जा सकता है। आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे भारतीय सेना का शौर्य याद आता है। ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल हुए नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया था। रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना से सक्रिय ही नहीं बल्कि चौकन्ना भी रहने का आह्वान करते हुये कहा कि तभी हम आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा में नई टेक्नोलॉजी एक साल बाद भी लागू कर सकते हैं,लेकिन सेना में अगर हमने देरी की तो काफी पीछे हो जाएंगे,रक्षा मंत्री ने सेना से सरप्राइज एलिमेंट विकसित करने का आह्वान किया,सरप्राइज एलिमेंट ऐसा हो जिसे दुश्मन देश ने सोचा भी ना हो। उन्होने कहा कि आगे बढ़ने का एक ही मंत्र अनुकूलनशीलता है। सेना में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, यूपी में डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस का निर्माण किया जा रहा है, यूपी में हाल में ही लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे को भी डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बताया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियन दी गई हैं। रक्षा मंत्री ने इंडस्ट्री और एकेडमिया से अपील की, कि वे डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर का भी निर्माण करें। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि सबके सामूहिक प्रयास से ही भारत विश्व पटल पर सैन्य ताकत के रूप में स्थापित होगा, सबके प्रयासों से ही भारत वैश्विक महाशक्ति बनेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजनाथ सिंह का दो दिवसीय प्रयागराज दौरा आज : नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का करेंगे उद्घाटन, तकनीक और भविष्य की जरूरतों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज प्रयागराज में भारतीय सेना के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। 4 मई को वे नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करेंगे, जहाँ स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन होगा। आयोजन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना है। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singhs-two-day-visit-to-prayagraj-will-inaugurate-north-tech/article-152520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh.png-3.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आएंगे। वह शाम को अरैल में भारतीय सेना की ओर से आयोजित कल्चरल इवेंट में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। चार मई को न्यू कैंट के कोबरा ऑडीटोरियम में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का इनॉगरेशन करेंगे। यह आयोजन 4 से 6 मई तक सिम्पोजियम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य मंत्री (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) जीतेंद्र सिंह की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। यह कार्यक्रम न्यू कैंट स्थित कोबरा ऑडिटोरियम के पास होगा। आयोजन हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा।</p>
<p>इसमें सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और उद्योग जगत से जुड़े लोग मौजूद रहेंगे।आधुनिक रक्षा उपकरणों का होगा प्रदर्शन सिम्पोजियम में सेना में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा। कई उपकरणों का लाइव डेमो भी दिखाया जाएगा। ताकि लोग समझ सकें कि ये तकनीकें कैसे काम करती हैं।</p>
<p>ड्रोन और सैन्य वाहनों पर रहेगा फोकस कार्यक्रम में ड्रोन, ऑल-टेरेन वाहन, सर्विलांस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी तकनीकों को खास तौर पर दिखाया जाएगा। स्वदेशी यानी भारत में तैयार तकनीकों पर ज्यादा जोर रहेगा।इस आयोजन का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थानों और सेना को एक मंच पर लाना है। यहां रक्षा तकनीक और भविष्य की जरूरतों को लेकर चर्चा भी होगी।कार्यक्रम के दौरान रक्षा नवाचार, सैन्य निर्माण और नई तकनीकों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञ बताएंगे कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कैसे आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन के मद्देनजर अरैल घाट पर कड़ा सुरक्षा पहरा लगाया गया है। यहां लोकल पुलिस के साथ ही मिलिट्री पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं। उधर पुलिस की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर अरैल घाट को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया गया है। यह प्रतिबंध दो मई की शाम पांच बजे से शुरू हो गया हैं।और यह रविवार रात 12 बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान अगर कोई ड्रोन उड़ाता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:28:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुश्मन देशों की खैर नहीं: सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय सेना का दल कंबोडिया रवाना, आतंकवाद-रोधी अभियानों पर होगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना का 120 सदस्यीय दल द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स-II के लिए कंबोडिया रवाना हो गया। 17 मई तक चलने वाले इस अभ्यास में आतंकवाद-रोधी अभियानों, ड्रोन संचालन और स्नाइपर रणनीतियों पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/enemy-countries-are-not-well-indian-army-team-leaves-for/article-152516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-army.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय सेना का एक दल भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय में हिस्सा लेने के लिए रविवार को कंबोडिया रवाना हो गया। यह अभ्यास सोमवार से 17 मई तक कंबोडिया के कंम्पोंग स्प्यू प्रांत स्थित तेचो सेन फ्नोम थॉम म्रियास प्रांतीय रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र (कैम्प बेसिल) में होगा। मित्र देशों के साथ भारत के सतत रक्षा सहयोग के तहत कंबोडिया के साथ यह द्विपक्षीय अभ्यास वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बदलते परिदृश्य में विशेष महत्व रखता है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अंतर्गत आयोजित इस अभ्यास में भारतीय सेना के दल में कुल 120 सैनिक शामिल हैं, जिनमें अधिकांश मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। कंबोडियाई दल में 160 सैनिक शामिल हैं, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।</p>
<p>यह संयुक्त अभ्यास संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के दौरान शांति सेना द्वारा सामना किए जाने वाले आतंकवाद-रोधी अभियानों की गतिशीलता के अनुरूप होगा। इस उद्देश्य को विभिन्न व्यावहारिक और व्यापक चर्चाओं तथा सामरिक अभ्यासों के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यापक सत्यापन अभ्यास किया जाएगा। अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार और स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता, समन्वय और कार्यात्मक तालमेल को बढ़ाना है।</p>
<p>यह अभ्यास न केवल वैश्विक शांति बनाए रखने में दोनों देशों की क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अर्ध-शहरी स्थिति में शत्रु बलों के खिलाफ विभिन्न अभियानों के दौरान प्राप्त सर्वोत्तम विधियों और संचालनात्मक अनुभवों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगा। संयुक्त सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय भारत और कंबोडिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है और यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। यह क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक समझ को भी बढ़ावा देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 16:09:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ने रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दोहराई प्रतिबद्धता, जनरल द्विवेदी ने कहा-दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पेंटागन का दौरा कर भारत-अमेरिका सैन्य संबंधों को नई ऊंचाई दी है। चर्चा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग, संयुक्त अभियानों और सैन्य प्रशिक्षण पर जोर दिया। इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए आपसी तालमेल को और सुदृढ़ करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-america-reiterated-commitment-to-strengthen-defense-relations-general-dwivedi-said/article-152073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india-and-us.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता, उन्नत क्षमता विकास और प्रगाढ़ सैन्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सेना ने बुधवार को बताया कि भारत–अमेरिका सैन्य साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पिछले सप्ताह अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन का दौरा किया। चार दिन की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा की।</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने अमेरिका के सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल के साथ बातचीत की। साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना के कार्यवाहक स्टाफ प्रमुख जनरल क्रिस्टोफर ला नेव से भी मुलाकात की। उनकी बातचीत द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विस्तार, सेना-से-सेना संबंधों को सुदृढ़ करने तथा प्रशिक्षण, क्षमता विकास और संयुक्त अभियानों में सहयोग के नये क्षेत्रों का पता लगाने पर केंद्रित रहीं। दोनों पक्षों ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक संचालन क्षमता और संयुक्तता के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p>जनरल द्विवेदी ने रक्षा नीति के अवर सचिव एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो के प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस के साथ भी बातचीत की। इन बैठकों ने रक्षा नीति समन्वय, संस्थागत संबंधों और भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक व्यापक रणनीतिक आयाम जोड़ा। पेंटागन में हुई ये बैठकें इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं, जो एक गतिशील वैश्विक सुरक्षा वातावरण के बीच दोनों देशों द्वारा रक्षा साझेदारी को दिये जा रहे बढ़ते महत्व को दर्शाती हैं। इन संवादों ने आपसी विश्वास को मजबूत करने में मदद की और प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं पर समानता को उजागर किया। जनरल द्विवेदी की यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता, उन्नत क्षमता विकास और गहरे सैन्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है रूस, जखारोवा ने कहा-रूस ईरान के आसपास की गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भारत के साथ गहरे सैन्य संबंधों की पुष्टि की है। रूस न केवल हथियारों की आपूर्ति, बल्कि संयुक्त विकास और लाइसेंस प्राप्त निर्माण के लिए भी तैयार है। यह सहयोग भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को नई गति देगा। साथ ही, रूस ने पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने में सहायता की भी पेशकश की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-is-keen-to-increase-military-technical-cooperation-with-india-zakharova/article-152037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/maria-zakharova.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस ने कहा है कि वह भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग को और बढ़ाने का इच्छुक है और मिल कर काम करने तथा और लाइसेंस प्राप्त हथियार निर्माण के लिए तैयार है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भारतीय सूचना पोर्टल 'फर्स्टपोस्ट' को दिए एक साक्षात्कार में कहा "रूस, भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग बढ़ाना जारी रखने का इरादा रखता है। भारतीय सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं के लिए विस्तृत श्रृंखला में सैन्य उत्पादों की आपूर्ति परस्पर सहमत समय सीमा पर की जा रही है। इसके अलावा वह संयुक्त रूप से लाइसेंस प्राप्त हथियारों के निर्माण के लिए भी तैयार है।"</p>
<p>राजनयिक ने कहा, "रूस न केवल तैयार सैन्य उत्पादों का निर्यात करने के लिए तैयार है, बल्कि संयुक्त विकास, आधुनिक हथियारों के लाइसेंस युक्त निर्माण और विभिन्न प्रकार के उपकरणों के आधुनिकीकरण एवं अन्य परियोजनाओं को लागू करने के लिए भी तैयार है।" उन्होंने उल्लेख किया कि रूसी सशस्त्र बल अपनी रणनीतिक पहल को लेकर आश्वस्त हैं और विशेष अभियान क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। जखारोवा ने कहा, "वर्तमान में, रूसी सशस्त्र बल अपनी रणनीतिक पहल को लेकर आश्वस्त हैं और आगे बढ़ रहे हैं।" पश्चिम एशिया संकट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि रूस ईरान के आसपास की गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए तैयार है। जखारोवा ने कहा, "हम इस गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:31:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की बड़ी घोषणा : युद्धविराम टूटा तो होर्मुज जलडमरूमध्य में होंगे लगातार हमले, नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को बनाएंगे निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध नई रणनीति तैयार की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री संसाधनों को निशाना बनाया जाएगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बीच, अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी और विशिष्ट सैन्य ठिकानों पर हमलों पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है क्योंकि ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी सक्रिय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-if-the-ceasefire-is-broken-there-will/article-151582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/होर्मुज-जलडमरू.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि मौजूदा संघर्षविराम समाप्त होता है तो ईरान की उपस्थिति को लक्ष्य बनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों की नयी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजनाएं पहले की रणनीति से अलग हैं, जिसमें हमले मुख्य रूप से ईरान के अंदरूनी क्षेत्रों तक सीमित थे। नई रणनीति में जलमार्गों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेष रूप से तेज गति वाली नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को निशाना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और इससे अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर भी दबाव बढ़ा है। सात अप्रैल से लागू युद्धविराम अभी औपचारिक रूप से कायम है। सूत्रों के अनुसार, केवल हवाई हमलों के जरिए जलमार्ग को शीघ्र खोल पाना कठिन हो सकता है, क्योंकि ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अब भी सक्रिय है और उसके पास पर्याप्त संख्या में छोटी नौकाएं मौजूद हैं।</p>
<p>इसके साथ ही अमेरिकी योजनाकार ईरान के ऊर्जा ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं, जिसे संभावित रूप से स्थिति को और गंभीर बना देने वाला कदम माना जा रहा है। एक अन्य विकल्प के तहत कुछ विशिष्ट सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें अहमद वाहिदी का नाम शामिल बताया गया है।</p>
<p>अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में स्वीकार किया था कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं को पुनर्स्थापित किया है, जिन्हें समझौता विफल होने की स्थिति में निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी आकलनों के अनुसार, ईरान की लगभग आधी मिसाइल प्रक्षेपण क्षमता और बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन अभी भी सुरक्षित हैं। वर्तमान में क्षेत्र में अमेरिका के 19 नौसैनिक पोत तैनात हैं, जिनमें दो विमानवाहक पोत शामिल हैं, जबकि हिंद महासागर में सात अन्य पोत मौजूद हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रहे हैं और कई जहाजों को रोका या उनकी जांच की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के ईरान के कदम का आकलन पहले कम किया गया था, जबकि यह स्थिति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:33:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने लागू की नई हथियार हस्तांतरण रणनीति : घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना उद्देश्य, कहा- तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए आ गया समय</title>
                                    <description><![CDATA[यह पहल अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगी, ताकि उसमें अमेरिकी सेना, उसके सहयोगियों और साझेदारों का समर्थन करने की पर्याप्त क्षमता बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-implemented-new-arms-transfer-strategy-to-promote-domestic-defense/article-142287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ttrump-.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर अमेरिका फर्स्ट आर्म्स ट्रांसफर स्ट्रेटेजी की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य विदेशी सैन्य बिक्री में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व और तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए अब समय आ गया है कि अमेरिका को आगे रखने वाली हथियार हस्तांतरण रणनीति को स्थापित, लागू और क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह रणनीति एक तकनीकी रूप से श्रेष्ठ, तैयार और लचीले राष्ट्रीय सुरक्षा औद्योगिक उद्यम को आगे बढ़ाएगी। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा कि यह पहल अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगी, ताकि उसमें अमेरिकी सेना, उसके सहयोगियों और साझेदारों का समर्थन करने की पर्याप्त क्षमता बनी रहे, विशेष रूप से ऐसे समय में जब अमेरिका साझा रक्षा बोझ बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस आदेश के तहत युद्ध, विदेश और वाणिज्य विभागों को आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अमेरिकी निर्मित सैन्य उपकरणों का उपयोग एक ओर विदेश नीति के साधन के रूप में किया जा सके और दूसरी ओर देश के रक्षा औद्योगिक आधार को सशक्त बनाया जा सके। आदेश में कहा गया है, अमेरिका में निर्मित सैन्य उपकरण दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आदेश में कहा गया है कि यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में होने वाले हथियार हस्तांतरण घरेलू उत्पादन, तकनीकी श्रेष्ठता और राष्ट्रीय सुरक्षा को समर्थन दें। रणनीति के तहत संघीय एजेंसियों के लिए समय-सीमा तय की गई है, जिसके भीतर उन्हें विदेशी बिक्री के लिए प्राथमिक हथियारों और प्रणालियों की पहचान करनी होगी, उद्योग सहभागिता योजनाएं तैयार करनी होंगी और निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा। इसके अलावा, विदेशी सेनाओं द्वारा अमेरिकी हथियारों के उपयोग की निगरानी में सुधार और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है, ताकि हथियार हस्तांतरण में मौजूद अक्षमताओं को कम किया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रणनीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए प्रोमोटिंग अमेरिकन मिलिटरी सेल्स टास्क फोर्सÞ नामक एक नया कार्यबल गठित किया जाएगा, जो त्रैमासिक बैठक करेगा और अमेरिकी उद्योग तथा विदेशी साझेदारों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रदर्शन मानकों पर रिपोर्ट देगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हथियार बिक्री को उन देशों के पक्ष में प्राथमिकता दी जाएगी जो अपनी रक्षा क्षमताओं में निवेश करते हैं, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित हैं या अमेरिकी आर्थिक सुरक्षा में योगदान देते हैं। साथ ही, नवाचार और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए नये और गैर-पारंपरिक रक्षा कंपनियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:58:33 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, बलूचिस्तान में 92 आतंकवादी ढ़ेर</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों ने आतंक रोधी अभियानों में 92 आतंकवादी मारे। हालिया हिंसा नाकाम हुई, नागरिकों-सैनिकों की मौत के बीच अभियान तेज रखे जाएंगे, सरकार सख्त रुख।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-success-for-security-forces-in-pakistan-92-terrorists-killed/article-141539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने शनिवार को देश के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में 92 आतंकवादियों को मार गिराया और आतंकवादियों के बुरे इरादे को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सेना ने एक बयान में यह जानकारी दी है। बयान में कहा गया है कि आतंकवादियों ने कल पूरे प्रांत में कई आतंकवादी गतिविधियां कीं, और कहा कि हमलों का मकसद स्थानीय लोगों के जीवन और बलूचिस्तान के विकास में रुकावट डालना था।</p>
<p>सेना ने कहा कि ग्वादर और खारान जिलों में 18 निर्दोष नागरिक 15 सैनिक मारे गए। बयान में आगे कहा गया, पिछले दो दिनों में इन सफल अभियानों के साथ, बलूचिस्तान में चल रहे अभियानों में मारे गए आतंकवादियों की कुल संख्या 133 हो गई है और इनमें से 41 शुक्रवार को प्रांत में मारे गए।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि इन इलाकों में लगातार आतंक रोधी अभियान चलाए जा रहे हैं, और इन आतंकवादी कामों को अंजाम देने वालों और उन्हें मदद देने वालों को सजा दी जाएगी। सेना ने कहा कि खुफिया रिपोर्ट ने साफ तौर पर पुष्टि की है कि ये हमले पाकिस्तान के बाहर से काम कर रहे आतंकवादी समूह के नेताओं ने करवाए और उन्हें निर्देशित किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 14:27:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान में होने वाला है कुछ बड़ा! ट्रंप ने कहा 'कई बेहद कड़े विकल्पों' पर विचार कर रहा है अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े विकल्पों, संभावित सैन्य कार्रवाई सहित, पर विचार कर रहा है और स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/something-big-is-going-to-happen-in-iran-trump-said/article-139356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ कई बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान ने किसी ऐसी लाल रेखा को पार कर लिया है जिससे जवाबी कार्रवाई जरूरी हो जाए, ट्रंप ने कहा, ऐसा लगता है कि वे ऐसा करना शुरू कर रहे हैं। हम इस पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए हैं। सेना भी इस पर विचार कर रही है और हम कई बेहद कड़े विकल्पों पर काम कर रहे हैं। हम जल्द ही कोई फैसला करेंगे।</p>
<p>राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्हें ईरान की स्थिति पर हर घंटे रिपोर्ट दी जा रही है। ट्रंप ने यह खुलासा भी किया कि ईरान के नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, ईरान के नेताओं ने फोन किया। वे बातचीत करना चाहते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रविवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप को ईरान में हो रही अशांति पर जवाब देने के विकल्पों के बारे में मंगलवार को जानकारी दी जाएगी।</p>
<p>रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन इस बैठक में शामिल होंगे। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, विचार-विमर्श शुरुआती चरण में होने के कारण इस बैठक में ट्रंप के किसी अंतिम निर्णय की उम्मीद नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के विकल्पों में ईरान में सरकार विरोधी ऑनलाइन स्रोतों को बढ़ावा देना, ईरानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर गुप्त साइबर हथियारों का इस्तेमाल, देश पर और अधिक प्रतिबंध लगाना तथा सैन्य हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा एलन मस्क की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के टर्मिनल ईरान भेजने की संभावना भी शामिल है।</p>
<p>पेंटागन ने संभावित सैन्य हमलों की तैयारी में किसी भी बल की तैनाती नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले शुरू करने के साथ-साथ क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए भी संसाधन जुटाने होंगे। हाल ही में अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप को भूमध्य सागर से लैटिन अमेरिका भेज दिया है, जिसके बाद फिलहाल न तो मध्य पूर्व और न ही यूरोप में कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात है।</p>
<p>इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर ने रविवार को कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने पहले कार्रवाई की, तो ईरान मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को ईरान, सीरिया और अन्य मध्य पूर्वी मुद्दों को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की।</p>
<p>ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरान इसमें शामिल होता है, तो अमेरिका वहां सेना नहीं भेजेगा। उन्होंने कहा, अगर वे पहले की तरह लोगों की हत्या शुरू करते हैं, तो हम हस्तक्षेप करेंगे। हम उन्हें वहां बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएंगे, इसका मतलब है बहुत गंभीर  वार करना।</p>
<p>गौरतलब है कि रियाल की भारी गिरावट और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में दिसंबर के अंत से ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या लगातार बढऩे की रिपोर्टें हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:55:27 +0530</pubDate>
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                <title>जोधपुर में तैनात हुआ एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर का फ्लीट, इन्हीं हेलिकॉप्टरों ने वेनेजुएला में बरपाया था कयामत </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वायुसेना ने पंजाब और राजस्थान सीमा पर घातक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं। अत्याधुनिक सेंसर और मारक क्षमता से लैस ये हेलिकॉप्टर दुश्मन की हर हरकत को नाकाम करने में सक्षम हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/fleet-of-ah-64-apache-attack-helicopter-deployed-in-jodhpur-these/article-138293"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ah-64.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत पंजाब और राजस्थान से लगती पाकिस्तानी सीमा पर अपने एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और सीएच-47 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर तैनात कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इन्हीं हेलिकॉप्टरों ने अभी वेनेजुएला की राजधानी काराकास में अपने सटीक हमलों से कयामत ही बरपा कर दी है। एएच-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर दुनिया के सबसे खतरनाक हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। इन्हीं अपाचे के एडवांस वर्जन अमेरिका की ओर से भारत को भी मिले हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना पश्चिमी मोर्चे पर तैनात करने जा रही है।</p>
<p>इन अपाचे की काबिलियत को देखते हुए अमेरिकी सेना ने हाल ही में इसे बनाने वाली कंपनी बोइंग को 2030 तक एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर फ्लीट को बनाए रखने के लिए 2.7 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। बीते 16 दिसंबर को भारतीय सेना को भी अमेरिका से तीन एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का आखिरी बैच मिला, जिससे राजस्थान के जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में छह यूनिट का बेड़ा पूरा हो गया। सर्विस में शामिल होने से पहले ये हेलीकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर उतरे थे।</p>
<p><strong>पाकिस्तान के बरक्श निर्णायक ताकत मिली</strong></p>
<p>सूत्रों ने बताया कि छह एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जिससे पाकिस्तान की तरफ पश्चिमी सेक्टर में सेना की स्ट्राइक और जासूसी क्षमताएं काफी बढ़ जाएंगी। इस स्क्वाड्रन को पिछले साल मार्च में पश्चिमी मोर्चे पर आॅपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए खास तौर पर बनाया गया था। यह डिलीवरी इस साल जुलाई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद हुई है, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए चल रही और आने वाली पहलों की समीक्षा की थी। बातचीत के दौरानअमेरिका ने भारत को दो हफ्तों के भीतर तीन अपाचे हेलीकॉप्टरों का पहला बैच और बाकी तीन इस साल नवंबर तक देने का आश्वासन दिया था।</p>
<p><strong>रेडीनेस, विश्वसनीयता और उपलब्धता पर केंद्रित</strong></p>
<p>अमेरिकी सेना इस लॉन्ग-टर्म अपाचे सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए सस्टेनमेंट डिसिप्लिन लागू कर रही है, जो रेडीनेस, विश्वसनीयता और उपलब्धता पर केंद्रित है। यह कोशिश अमेरिकी सेना के सबसे जरूरी कॉम्बैट एविएशन प्लेटफॉर्म में से एक को सपोर्ट करती है। एएच-64 अपाचे एक ट्विन-इंजन, चार-ब्लेड वाला अटैक हेलीकॉप्टर है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसे हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें एक टैन्डम कॉकपिट होता है जो दोनों क्रू मेंबर्स को आजादी से उड़ने और हथियार चलाने की सुविधा देता है, जिससे बचने की संभावना और मिशन की मजबूती बेहतर होती है। बाद के अपाचे वेरिएंट, जैसे एएच-64 एपाचे और सीएच-64 में मेन रोटर के ऊपर लॉन्गबो फायर कंट्रोल रडार लगा होता है। यह रडार सभी मौसम में और युद्ध के मैदान में धुंध या रुकावटों के बावजूद टारगेट का पता लगाने, उन्हें पहचानने और उन पर हमला करने की सुविधा देता है। भारत के पास भी यही एडवांस वर्जन एएच-64  हेलिकॉप्टर हैं। इंटीग्रेटेड हेलमेट एंड डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम क्रू को सिर हिलाकर 30 एमएम एम230 चेन गन को कंट्रोल करने की सुविधा देता है।</p>
<p><strong>दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टर </strong></p>
<p>भारत को मिले एएच-64 अपाचे को दुनिया का सबसे एडवांस्ड मल्टी-रोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो अत्याधुनिक एवियोनिक्स, सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस है। ये सभी मौसम और इलाके की स्थितियों में काम करने में सक्षम है। इसके शामिल होने से पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना की हमला करने और दुश्मन को रोकने की क्षमताओं को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रक्षा प्रणालियों में रडार चेतावनी रिसीवर, लेजर चेतावनी प्रणाली, जैमिंग उपकरण और इन्फ्रारेड काउंटरमेजर शामिल हैं, जिनका मकसद मुश्किल माहौल में जीवित रहने में मदद करना है। एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अमेरिका से मिलने वाले अपाचे हेलीकॉप्टरों का कॉन्ट्रैक्ट फरवरी 2020 में 600 मिलियन डॉलर की डील के तहत किया गया था। तीन हेलीकॉप्टरों का पहला बैच इस साल की शुरूआत में डिलीवर किया गया था और आखिरी खेप के आने से आर्मी के डेडिकेटेड अपाचे स्क्वाड्रन का पूरी तरह से आॅपरेशनल होना पक्का हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 11:47:13 +0530</pubDate>
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