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                <title>defense - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जापान और फिलीपींस ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया: प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए और फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश गोपनीय सैन्य सूचना सुरक्षा और गश्ती पोतों के हस्तांतरण पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही एआई, अंतरिक्ष और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर सहयोग बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-and-philippines-elevate-their-relations-to-the-level-of/article-155339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/takaichi.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान और फिलीपींस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह जानकारी जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा, "28 मई को जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने फिलीपींस गणराज्य के राष्ट्रपति फर्डिनेंड रोमुआल्डेज़ मार्कोस जूनियर से शिखर सम्मेलन किया, जो राजकीय अतिथि के रूप में जापान की यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जो फिलीपींस के लिए अपनी तरह की पहली साझेदारी है। यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।"</p>
<p>बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष गोपनीय सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा के लिए एक समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि जापान और फिलीपींस गश्ती पोतों सहित उपकरणों के हस्तांतरण पर सहयोग में तेजी लाने का इरादा रखते हैं। इसके अतिरिक्त, जापान और फिलीपींस ने कथित तौर पर एशिया में आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने सहित आर्थिक सहयोग को और गहरा करने तथा कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, ऊर्जा और मानव संसाधन विकास में सहयोग विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस-यूक्रेन संघर्ष: रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में मार गिराए यूक्रेन के 208 ड्रोन</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने गुरुवार रातभर में यूक्रेन के 208 ड्रोन (UAV) मार गिराए। मॉस्को समयानुसार रात आठ बजे से सुबह सात बजे के बीच इन सभी फिक्स्ड-विंग मानवरहित हवाई वाहनों को हवा में ही नष्ट कर देश के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russia-shoots-down-208-ukrainian-drones-russian-defense-ministry/article-155336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/russia-plane.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस की वायु रक्षा प्रणालियों ने गुरुवार रातभर यूक्रेन के 208 ड्रोन को मार गिराया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि मॉस्को समयानुसार कल रात आठ बजे से आज सुबह सात बजे तक ड्यूटी पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन के 208 फिक्स्ड-विंग मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) को हवा में ही नष्ट कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:28:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>युद्धविराम के बीच अमेरिका का ईरान पर हमला, बंदर अब्बास में एयरस्ट्राइक से पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[अस्थायी युद्धविराम के बीच अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदर अब्बास शहर पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी कमान ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया, जबकि ईरानी मीडिया ने इसे 'दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई' करार दिया। हमलों के बावजूद बंदरगाह शहर में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और जनजीवन सामान्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-attacks-iran-amid-ceasefire-airstrike-in-bandar-abbas-increases/article-155034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान-अमेरिका के बीच जारी अस्थायी युद्धविराम के बीच अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में कई जगह हवाई हमलों को अंजाम दिया है, जिससे पश्चिम एशिया की शांति पर एक बार फिर आशंका के बादल छा गये हैं। सीएनएन ने मंगलवार को अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स के हवाले से कहा, "अमेरिकी बलों ने आज ईरानी बलों के खतरे से हमारे सैनिकों की रक्षा के लिए दक्षिण ईरान में आत्मरक्षा हमलों को अंजाम दिया। हमने मिसाइल लॉन्च ठिकानों और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया।"</p>
<p>ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने भी इन हमलों की पुष्टि की। इरना और मेहर समाचार एजेंसी ने सोमवार रात को बताया कि बंदर अब्बास के पूर्व में और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के सामने वाले तटीय इलाकों में धमाके जैसी कई आवाज़ें सुनी गईं। मेहर ने तुरंत पुष्टि की कि बंदरगाह शहर में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है, चिंता की कोई बात नहीं है और सामान्य गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी हैं। तसनीम और फ़ार्स समाचार एजेंसियों ने भी इसी तरह सिरिक और जास्क के पास सहित आसपास के इलाकों में विस्फोटों की आवाज़ों का उल्लेख किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ईरानी रक्षा प्रणालियों और अधिकारियों ने तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>ईरानी मीडिया ने कहा कि अमेरिका की यह ताज़ा "दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई" ऐसे समय में आयी है जब ईरान नाज़ुक युद्धविराम का लगातार पालन कर रहा है और फारस की खाड़ी में शांति बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में किसी भी विदेशी आक्रामकता से अंतरराष्ट्रीय नौवहन और ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, और ईरान के सशस्त्र बल इसका दृढ़ और समुचित जवाब देंगे। दक्षिणी ईरान के स्थानीय सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि निवासियों ने धमाकों की आवाज़ सुनी थी, लेकिन बंदर अब्बास में जनजीवन सामान्य रूप से चल रहा है। बंदरगाह के कामकाज, नागरिक जीवन और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर इसका कोई असर पड़ने की सूचना नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:01:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान में दुर्लभ खनिजों का महाभंडार: सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा देश की सामरिक सुरक्षा का नया केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार की पुष्टि हुई है। 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र से रक्षा, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कच्चा माल मिलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/balotras-sivana-ring-complex-will-become-the-new-center-of/article-154867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)71.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स देश की सामरिक, औद्योगिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स, हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार मिलने से भारत को रक्षा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>केन्द्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कम कॉस्ट कमेटियों की संयुक्त बैठक में सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स के तीन ब्लॉक्स में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार होने की पुष्टि की गई है। इन ब्लॉक्स के तकनीकी मूल्यांकन का कार्य तीन कंपनियों को आवंटित किया गया है। करीब 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ज्वालामुखीय क्षेत्र के सर्वेक्षण में नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स पाए गए हैं। इन खनिजों का उपयोग एयरोस्पेस इंजनों के सुपरअलॉय, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट, चिकित्सा उपकरणों और वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है।</p>
<p>इसके अलावा परमाणु रिएक्टर, इलेक्ट्रिक कार, मिसाइल तकनीक, रोबोटिक्स, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स और रासायनिक प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी इन दुर्लभ खनिजों की बड़ी भूमिका है। विशेषज्ञों के अनुसार ये खनिज देश की सामरिक सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स और सिवाना ग्रेनाइट क्षेत्र में रेयर अर्थ एवं हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपलब्धता राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>राज्य सरकार दुर्लभ खनिजों के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रेयर अर्थ एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना भी कर रही है। इसके लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च, आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी आईएसएम धनबाद जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की जा रही है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) शुरू किया है। इस मिशन के तहत ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए रणनीतिक खनिजों की खोज और विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:14:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनाथ सिंह ने की वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात, हिन्द-प्रशांत में स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता की जताई प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ हनोई में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों ने AI और क्वांटम प्रौद्योगिकी पर समझौते किए। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rajnath-singh-met-the-president-of-vietnam-expressed-commitment-to/article-154357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और वियतनाम ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से वियतनाम के वायु सेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। भारत एवं वियतनाम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री ने न्हा त्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की घोषणा की।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना, साइबर सुरक्षा तथा उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यासों और विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों की रक्षा सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पहलों के समर्थन में भारत के संकल्प को पुनः व्यक्त किया।जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता तथा बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 16:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वियतनाम-कोरिया दौरा: द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का होगा विस्तार, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों पर चर्चा संभव </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करना, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है। वह दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/defense-minister-rajnath-singhs-visit-to-vietnam-korea-will-expand-the/article-154197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रवाना हुए। रक्षा मंत्रालय ने आज बताया कि राजनाथ सिंह 18 से 19 मई तक वियतनाम की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जिसके बाद वह 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। राजनाथ सिंह ने दोनों देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले सोशल मीडिया में एक पोस्ट में दोनों एशियाई देशों की यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त किया ताकि द्विपक्षीय सहभागिता के दायरे का और विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस दौरान मुख्य ध्यान रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर होगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है, जिसे पांच से सात मई तक वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित किया गया था। राजनाथ सिंह वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी के लिए 2030 तक के संयुक्त दृष्टि वक्तव्य पर रक्षा मंत्री की 2022 की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। यह दृष्टि वक्तव्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित करता है। दोनों लोकतांत्रिक देशों की क्षेत्र में शांति और समृद्धि में समान रुचि है।</p>
<p>राजनाथ सिंह की यह यात्रा 19 मई को वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर के साथ भी मेल खाती है। रक्षा मंत्री हो ची मिन्ह समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और सम्मान प्रकट करेंगे। दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। मंत्रीगण दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे और द्विपक्षीय सहभागिता को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर विचार करेंगे। वे साझा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<p>रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चोल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। कोरियाई युद्ध में भारत का योगदान इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिभाषित होता है। भारत द्वारा इस युद्ध का समर्थन करने का निर्णय भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस इकाई को तैनात करके युद्ध में मानवीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया था। तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवा देते हुए इस इकाई ने दो लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया और लगभग 2,500 शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं संपन्न कीं, साथ ही अनेक नागरिकों का भी उपचार किया। भारत का दूसरा प्रमुख योगदान तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता था, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रस्ताव था और जिसे बहुमत से स्वीकार किया गया। इसके अनुसार भारत की संरक्षक सेना, भारतीय सेना की 5,230 सैनिकों वाली टुकड़ी ने युद्धोत्तर चरण में लगभग 2,000 युद्धबंदियों की शांतिपूर्ण वापसी सुनिश्चित की।</p>
<p>शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए 21 मई को देशभक्त एवं पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल के साथ भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन प्रस्तावित है। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' और कोरिया की 'हिंद-प्रशांत रणनीति' के बीच स्वाभाविक सामंजस्य तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों ने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय खोला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:10:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी नीदरलैंड दौरा: भारत-नीदरलैंड ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति, कई अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के पीएम रोब जेटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता हुई। व्यापार, रक्षा, एआई और हरित ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर भी जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-visits-netherlands-india-netherlands-agreed-to-strengthen-mutual-relations/article-154149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटेन के साथ आधिकारिक वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। साझा मूल्यों और आपसी विश्वास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य और सहयोग को देखते हुए, नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। उन्होंने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी रोडमैप अपनाने पर भी सहमति व्यक्त की। बढ़ते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी पर ध्यान देते हुए, नेताओं ने कहा कि भारत की विकास गाथा द्वारा प्रस्तुत अवसर डच कंपनियों के लिए बेहतर व्यावसायिक संभावनाएं प्रदान करते हैं।</p>
<p>दोनों नेताओं ने निरंतर उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। जल, कृषि और स्वास्थ्य] में सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर सहयोग के माध्यम से 'जल पर रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ करने पर करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य सुरक्षा सहित प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का भी स्वागत किया।</p>
<p>पीएम मोदी और जेटेन ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को महत्वपूर्ण बताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-ईयू एफटीए) की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इस पर जल्द हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगा।</p>
<p>दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और सेमीकंडक्टर सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं की भागीदारी वाले शामिल हैकाथॉन आयोजित करने को भी प्रोत्साहित किया। नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताते हुए, उन्होंने एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, हरित शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'मोबिलिटी पार्टनरशिप' (प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी) और उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने के लिए की गई नयी पहलों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस संबंध में, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुए समझौते पर विशेष रूप से उल्लेख किया।</p>
<p>दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहायता करने के लिए डच सरकार का आभार व्यक्त किया। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने लीडेन विश्वविद्यालय पुस्तकालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) के बीच सहयोग का भी स्वागत किया, जो इन ऐतिहासिक कलाकृतियों के ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। आधिकारिक वार्ता के बाद, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, जल, कृषि और स्वास्थ्य,शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में 14 समझौता ज्ञापनों(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री जेटेन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। भारत और नीदरलैंड्स के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग पर आधारित मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:09:45 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने जताई चिंता: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यावसायिक बदलावों से पर्यावरण और आदिवासियों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का सुझाव दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-expressed-concern-over-the-great-nicobar-project-jairam-ramesh/article-154130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा है कि इससे पर्यावरणीय नुकसान तथा आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका है। पार्टी का कहना है कि वह लगातार इस संबंध में सरकार को अवगत करा रही है, लेकिन उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखने के बाद अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक व्यावसायिक परियोजना को सुरक्षा जरूरतों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके पर्यावरणीय प्रभावों तथा आदिवासी हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर लगातार आलोचना हो रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के रनवे विस्तार और नौसैनिक जेट्टी जैसी योजनाएं कम पर्यावरणीय नुकसान के साथ बेहतर विकल्प हो सकती हैं। उन्होंने आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन जैसी मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का भी सुझाव दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टाउनशिप से सैन्य क्षमता नहीं बढ़ती, फिर भी इन्हें सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार करने और नौसेना अधिकारियों द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:08:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का यूएई का दौरा: राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद से की बात, पांच अरब डॉलर का होगा निवेश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ऐतिहासिक रही, जहाँ यूएई ने भारत में $5 बिलियन के निवेश की घोषणा की। ऊर्जा, रक्षा, शिपिंग और सुपर कंप्यूटर समेत 6 प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। यह निवेश भारतीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और ऊर्जा सुरक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-uae-president-mohammed-bin-zayeds-talk/article-153956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi4.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा की है इसके अलावा दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी और सुपर कंप्यूटर सहित छह क्षेत्रों में सहयोग के समझौते किये हैं। शुक्रवार सुबह अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर पहुंचे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद अल नहयान के साथ शिष्टमंडल स्तर की और द्विपक्षीय वार्ता की जिसके बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये ।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और निवेश, समुद्री अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र जिसमें फिनटेक शामिल है, रक्षा और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। प्रधान मंत्री मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों और इसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना जिसमें जहाजरानी भी शामिल है, और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों का भी आदान-प्रदान किया। इससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गति मिलेगी। एक महत्वपूर्ण कदम में यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है जिससे भारतीय बाजारों और अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा देश में रोजगार के अवसर बढेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:55:11 +0530</pubDate>
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                <title>तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'कलम और कवच' संवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में साइबर खतरों और हाइब्रिड युद्ध से निपटने के लिए नवाचार और रणनीतिक समन्वय जरूरी है। भारत अब रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण पर केंद्रित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singh-cannot-depend-on-old-methods-in-the-rapidly/article-153829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करने का आह्वान किया है और कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा अब पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकती। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां प्रमुख रणनीतिक संवाद 'कलम और कवच' में अपने वर्चुअल संदेश में कहा कि इस मंच का नाम ही देश के भविष्य के सुरक्षा ढांचे की सशक्त दृष्टि को दर्शाता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा , "कलम विचारों, तर्क और आगे की सोच रखने के साहस का प्रतीक है। कवच शक्ति, सुरक्षा और राष्ट्र की रक्षा करने की क्षमता का प्रतीक है। जो देश स्पष्ट रूप से सोच सकता है और मजबूती से अपनी रक्षा कर सकता है, वही दुनिया में ऊंचा खड़ा होता है। हम ऐसे ही भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं।" वैश्विक संघर्षों के बदलते स्वरूप पर राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया भर में रणनीतिक परिदृश्य लगातार अधिक अनिश्चित, प्रतिस्पर्धी और प्रौद्योगिकी-आधारित होता जा रहा है। उन्होंने भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, साइबर खतरे, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी और हाइब्रिड युद्ध के उभरते स्वरूपों को देशों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौती बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ऐसी दुनिया में राष्ट्रीय सुरक्षा पुराने आयामों पर आधारित नहीं रह सकती। इसके लिए हमारी तैयारी, लचीलापन, नवाचार और रणनीतिक आत्मविश्वास आवश्यक है।" रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि भारत के लिए रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "जो राष्ट्र महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यधिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहता है, वह संकट के समय कमजोर बना रहता है। हमें अपने राष्ट्रीय तंत्र के भीतर ही प्रमुख प्रणालियों का डिज़ाइन, विकास, उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन करना होगा। इसी तरह हम अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रख पाएंगे।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने विभिन्न हितधारकों के बीच अधिक समन्व्य की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि आधुनिक युद्ध में कई क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा, "आधुनिक युद्ध पारंपरिक सीमाओं का सम्मान नहीं करता। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपनी थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष सेनाओं को कितनी दक्षता से एक साथ ला पाते हैं। यह इस पर भी निर्भर करेगा कि हमारी प्रयोगशालाएं, उद्योग, स्टार्टअप, नीति निर्माता और सैन्य संस्थान कितनी निकटता से मिलकर काम करते हैं।"</p>
<p>रक्षा तैयारियों में तेज़ी से नवाचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में वही देश आगे रहेंगे जो विचारों को तेजी से परिचालन क्षमता में बदल सकें। उन्होंने कहा, "किसी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर अधिक निर्भर करेगी कि उसकी प्रयोगशालाएं, उद्योग और सशस्त्र सेनाएं कितनी जल्दी एकजुट होकर सोच और कार्य कर सकती हैं। भविष्य के युद्धक्षेत्र उन देशों के लिए अनुकूल होंगे जो किसी विचार, प्रोटोटाइप और परिचालन तैनाती के बीच का समय कम कर सकें।" राजनाथ सिंह ने संयुक्तता, स्वदेशी विनिर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और वैश्विक साझेदारियों पर होने वाली चर्चाओं को भारत की व्यापक रक्षा दृष्टि के परस्पर जुड़े स्तंभ बताया।</p>
<p>उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का रक्षा निर्यात बढ़ रहा है, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ रही है और सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी और हितधारकों से भारत के रक्षा तंत्र को लगातार मजबूत करते रहने का आग्रह किया। राजनाथ सिंह ने कहा, "कलम को और अधिक साहसी विचार लिखते रहना चाहिए। कवच को और अधिक मजबूत होते रहना चाहिए।" उन्होंने नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने के लिए आयोजकों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि इन विचार-विमर्शों से ऐसे व्यावहारिक परिणाम निकलेंगे जो सशस्त्र सेनाओं और राष्ट्र दोनों के लिए लाभकारी होंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:01:13 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: ईरान के विदेशी सैन्य खरीद नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, ईरानी हमलों में मदद करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने का आरोप, प्रतिबंधित संस्थाओं में चीनी कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के सैन्य नेटवर्क और ड्रोन कार्यक्रमों को कुचलने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने वाली चीनी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनी थीं। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आपूर्ति शृंखला को वैश्विक स्तर पर बाधित करने का यह सख्त कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-governments-big-announcement-ban-on-irans-foreign-military-procurement/article-153241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क की सहायता करने के आरोप में कई संस्थानों पर नये प्रतिबंध लगाये हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं के खिलाफ ईरानी हमलों में मदद करने के लिए उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेजरी) प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, मिसाइल  और ड्रोन संचालन सहित ईरानी सैन्य गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली उपग्रह चित्र और संबंधित तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए चार संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>अमेरिका ने कहा कि इस तरह की सहायता क्षेत्र में अमेरिकी और भागीदार सेनाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित किया है, जिन पर ईरान को उसके मानवरहित विमान (यूएवी) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से संबंधित हथियार और कच्चा माल प्राप्त करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये उपाय 'नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 2' के तहत ईरान की सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद उसके प्रसार-संवेदनशील कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने के किसी भी प्रयास को रोकने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई परमाणु प्रतिबद्धताओं के प्रति ईरान की 'बेहद लापरवाही' दिखाने के बाद सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रतिबंधों को फिर से लागू किये जाने के बाद की गयी है। इन उपायों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1929 के तहत ईरान को पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन स्थित कंपनियां जैसे मीनट्रॉपी टेक्नोलॉजी (मिज़ारविज़न) और द अर्थ आई (टीईई) शामिल हैं, जिन पर ईरानी सैन्य उपयोग से जुड़ी उपग्रह चित्र प्रदान करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य चीनी कंपनी, चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य स्थलों की तस्वीरें एकत्र करने और उनकी आपूर्ति करने तथा पहले अमेरिका के प्रतिबंधित हूतियों को डाटा प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के निर्यात केंद्र (माइंडेक्स), जिसे पहले मॉडलेक्स के नाम से जाना जाता था, को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका के लिए नामित किया गया है। अमेरिकी सरकार ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के उल्लंघन में ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाले किसी भी समर्थन के गंभीर परिणाम होंगे और ऐसी कार्रवाइयों का करारा जवाब दिया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य हालात फिर तनावपूर्ण: दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी के बाद भी युद्धविराम बरकरार, ट्रंप ने कहा- ईरान ने हमसे खिलवाड़ किया</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच भारी गोलीबारी के बावजूद युद्धविराम कायम है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी हमलों को "बचकाना" बताते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की पुष्टि की। अमेरिका ने आत्मरक्षा में मिसाइल ठिकानों को ध्वस्त किया, जबकि ईरान ने इसे समझौते का उल्लंघन बताया। तनाव के बीच शांति वार्ता पर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/situation-in-the-strait-of-hormuz-is-tense-again-ceasefire/article-153112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/uni.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि गुरुवार देर रात अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी के बाद भी युद्धविराम बरकरार है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पहले गोली किसने चलाई। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के शीर्ष सैन्य कमान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर आ रहे एक ईरानी तेल टैंकर और एक अन्य पोत को निशाना बनाया और कई तटीय क्षेत्रों पर "हवाई हमले" किए। इस बीच अमेरिका ने कहा कि उसने जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों पर ईरानी हमलों का जवाब "आत्मरक्षा" के तौर पर दिया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने "आज हमसे खिलवाड़ किया"।</p>
<p>ईरानी सरकारी मीडिया ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य में "विस्फोटों" की सूचना दी, जिसे "शत्रुता" के साथ "गोलीबारी" बताया गया। इस बीच, स्थानीय मीडिया ने तेहरान में विस्फोटों की आवाजें सुनने की सूचना दी। इसके कुछ ही समय बाद, ईरान के शीर्ष सैन्य कमान के एक बयान में कहा गया कि अमेरिकी "हवाई हमलों" ने बंदर खमीर, सिरिक और केशम द्वीप के तटों को निशाना बनाया। ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर तत्काल हमला करके जवाबी कार्रवाई की, जिससे "काफी नुकसान" हुआ, और अमेरिका पर "युद्धविराम का उल्लंघन" करने का आरोप लगाया।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने ईरान के हमलों को "बिना किसी उकसावे के" बताया और कहा कि जब अमेरिकी नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तब ईरानी सेना ने कई मिसाइलों, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमले किये। सेंटकॉम ने कहा कि उसने "आने वाले खतरों को खत्म कर दिया है और अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च स्थल; कमान और नियंत्रण केंद्र; और खुफिया, निगरानी और टोही केंद्र शामिल हैं।" बयान में कहा गया, "सेंटकॉम तनाव बढ़ाना नहीं चाहता है लेकिन अमेरिकी सेना की रक्षा के लिए हर समय तैनात और तैयार है।"ट्रुथ सोशल पर पोस्ट  करते हुए श्री ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने कई छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया जो "वह उसी तरह से समुद्र में गिर गईं, जैसे कोई तितली गिरती है!"</p>
<p>उन्होंने कहा, "ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने शांति समझौते को लेकर अपनी चेतावनी दोहराई, "जिस तरह हमने आज उन्हें फिर से करारा जवाब दिया है, अगर वे जल्द से जल्द समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो हम भविष्य में उन्हें और भी बुरी तरह और हिंसक तरीके से हराएँगे!" एक इजरायली सूत्र ने बीबीसी को बताया कि इन हमलों में इजरायल की कोई संलिप्तता नहीं है। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि ईरान में युद्ध "जल्द ही समाप्त हो जाएगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:17:47 +0530</pubDate>
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