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                <title>रजनीकांत ने दी सफाई, द्रमुक-अन्नाद्रमुक गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश में नहीं थे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[सुपरस्टार रजनीकांत ने स्पष्ट किया है कि वे अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) को सत्ता से दूर रखने के किसी राजनीतिक जोड़-तोड़ का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ऐसी राजनीति उनकी गरिमा के खिलाफ है। रजनीकांत ने 52 वर्ष की उम्र में विजय की इस बड़ी जीत को एमजीआर और एनटीआर से भी बड़ी सफलता बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajinikanth-clarified-that-he-was-not-involved-in-trying-to/article-154167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnikant.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु में सबसे बड़े एकल दल के रूप में उभरी अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (टीवीके) को सत्ता से दूर रखने के लिए पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक की गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास में अपनी भूमिका की लगातार अटकलों से परेशान सुपरस्टार रजनीकांत ने रविवार को स्पष्ट किया कि वह इतने ओछे नहीं हैं कि इस तरह के कदम में शामिल हों। चेन्नई के पोएस गार्डन स्थित अपने आवास पर जल्दबाजी में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इस तरह की भूमिका निभाना मेरी गरिमा के खिलाफ है। मैं कभी भी ऐसे स्तर पर नहीं गिरूंगा। चुनाव नतीजे आने के बाद से मेरे बारे में कई तरह की खबरें और आलोचनाएं आ रही हैं, इसलिए मुझे लगा कि अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया, "अगर मैं अतीत में चुनावी मैदान में उतरा होता तो एकतरफा चुनाव जीत जाता।" सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता ने स्पष्ट किया, "मैं स्टालिन सर से इसलिए मिला, क्योंकि हम पिछले 38 से 40 वर्षों से मित्र हैं। हमारी दोस्ती राजनीति या विचारधारा के बंधनों में बंधी नहीं है, बल्कि इन सीमाओं से परे है। लोकतंत्र में जीत और हार तो आम है। मैं एक दोस्त से मिलने गया था, क्योंकि कोलाथुर चुनाव क्षेत्र में स्टालिन की हार से मैं काफी परेशान था।"</p>
<p>विजय की जीत से ईर्ष्या होने की बात को पूरी तरह से खारिज करते हुए सुपरस्टार ने कहा, "यह एक बहुत बड़ी जीत है। महज़ 52 साल की छोटी उम्र में उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है और वह फिल्म उद्योग से ताल्लुक रखते हैं। यह सफलता एमजीआर (अन्नाद्रमुक के संस्थापक, अभिनेता से पूर्व मुख्यमंत्री बने) और एनटी रामाराव (तेलुगु देशम के संस्थापक, अभिनेता से आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बने) की उपलब्धियों से भी बड़ी है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "मैं विजय की इस जीत से हैरान भी हूं और खुश भी।" उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "मैं विजय से क्यों ईर्ष्या करने लगा? मैंने उन्हें बच्चे से बड़े होते देखा है। मेरे और विजय के बीच लगभग 28 साल या उससे अधिक का पीढ़ीगत अंतर है।"<br />इसके बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, "अगर मुझे कभी ईर्ष्या होती भी, तो तब होती जब कमल हासन मुख्यमंत्री बन जाते! लेकिन, तब भी मैं ऐसा नहीं करता।" उन्होंने आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा "मुझ पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं कि मैंने श्री विजय को बधाई नहीं दी, उसके विपरीत मैंने नतीजे आते ही 'एक्स' पर उन्हें अपनी शुभकामनाएं दे दी थीं। मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता था, लेकिन दो या तीन मौकों पर हवाई अड्डे पर मीडिया मौजूद नहीं थी, इसलिए मैंने यह संवाददाता सम्मेलन बुलाया है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 18:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फस्ट अप्रैल फूल’स डे पर खास : दोस्ती जिंदाबाद, दोस्त को 1959 में बनाया था ‘फूल’, 400 को देते हैं हर फस्ट अप्रैल को पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के जाने माने सीए सतीश अजमेरा ने 66 साल पहले स्कूलिंग के दौरान अपने खास दोस्त सुधीर वर्मा को एक अप्रैल पर अपने घर पर डिनर पार्टी देने के लिए झूठा न्यौता देकर अप्रैल फूल बनाया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-first-april-phools-day-a-special-friendship-was/article-109261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के जाने माने सीए सतीश अजमेरा ने 66 साल पहले स्कूलिंग के दौरान अपने खास दोस्त सुधीर वर्मा को एक अप्रैल पर अपने घर पर डिनर पार्टी देने के लिए झूठा न्यौता देकर अप्रैल फूल बनाया था। तब सुधीर शाम को उनके घर आए, लेकिन सतीश उन्हें अप्रैल फूल बनाने के लिए घर से गायब हो गए, लेकिन सतीश के आने तक सुधीर उनके घर पर ही बैठे रहे। सतीश अजमेरा की मां को सुधीर ने सारा किस्सा बताया और कहा कि वे डिनर करके ही जाएंगे। वे उनके घर डिनर करके ही गए। सतीश अजमेरा ने इसे एक यादगार शाम के रूप में याद रखा। जिसे वे हर साल सेलिब्रेट करते हैं। माता-पिता की रजामंदी से तब से उन्होंने हर साल सुधीर सहित अपने दोस्तों को एक अप्रैल पर पार्टी देने का सिलसिला शुरू किया। सतीश अपने खास दोस्त सुधीर वर्मा जो सीनियर आईएएस पद से रिटायर हुए, उनके साथ अपने सभी दोस्तों को एक अप्रैल को अप्रैल फूल पार्टी देते हैं। 66 साल यानी 1959 से उनका पार्टी देने का सिलसिला अनवरत जारी रहा। केवल कोविड की वजह से चार साल का ब्रेक आया, लेकिन बीते साल से उन्होंने फिर इस पार्टी को शुरू किया है, जिसमें न केवल सुधीर वर्मा बल्कि उनके सभी दोस्त-रिश्तेदार और मिलने जुलने वाले आते हैं। डिनर के साथ संगीत कार्यक्रम का आयोजन भी होगा। डिनर की कैटरिंग हर साल केवल ज्ञानजी कैटर्स की होती है। पार्टी में जयपुर ही नहीं देशभर से कई आईएएस अधिकारी, पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, बिजनेसमैन, कलाकार, पत्रकार, जाने-माने डॉक्टर्स, वकील, बैंकर्स इत्यादि आते हैं।</p>
<p><strong>अनूठी पार्टी में न्यौता भी अनूठा :</strong></p>
<p>सतीश अजमेरा और उनकी पत्नी सुमन की अपनी तरह की यूनिक पार्टी में हर साल लोग जुड़ते जाते हैं। उनके संपर्क में आने वाले व्यक्ति, दोस्त, रिश्तेदार इत्यादि को केवल एक बार पार्टी में आने का न्यौता देते हैं। यह न्यौता आगामी सभी वर्षों के लिए होता हैं। हर साल अतिथियों को खुद पार्टी में आने का ध्यान रखना होता हैं। </p>
<p>एक बार मिला न्यौता हर साल का होता है, दोबारा खुद याद रखते हैं दोस्त।</p>
<p><strong>दुनिया में नहीं ऐसी दूसरी पार्टी : एक ही होस्ट के साथ वैन्यू-कैटर्स भी नहीं बदला</strong></p>
<p>सतीश अजमेरा की यह पार्टी 66 साल से उनके चितरंजन मार्ग स्थित घर पर ही होती है। खास यह है कि इतने सालों से अजमेरा अकेले इस पार्टी के होस्ट हैं। </p>
<p>साथ ही पार्टी का वैन्यू यानी जगह और कैटर्स भी ज्ञानजी कैटर्स ही हैं। वे इसे तब से लेकर अब तक नहीं बदले हैं। दशकों से चली आ रही पार्टी को गीनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए करीब दस साल पहले उनकी टीम जयपुर आई थी। सतीश अजमेरा बताते हैं कि तब टीम ने उनसे पार्टी के आयोजन के सालों पुराने खर्चे के बिल-वाउचर मांगे, लेकिन वे उनके पास नहीं थे। तब पार्टी में बरसों से आ रहे राजस्थान सरकार के तीन पूर्व मुख्य सचिव के अधिकारियों ने टीम को खुद का शपथ पत्र देने की बात कही थी, लेकिन टीम नहीं मानी। अन्यथा उनकी पार्टी गीनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होती। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 10:38:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नये जमाने में क्यों गुम हो गई, पुराने जमाने की दोस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[दोस्ती वो है जो एक भरोसे से शुरू होती है और एक भरोसे से ही खत्म हो जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-has-the-friendship-of-the-old-times-disappeared-in-the-new-era/article-53946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/naye-zamane-me-kyu-gum-ho-gyi-purane-zamane-ki-dosti...kota-news-07-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दोस्ती एक बड़ा ही पवित्र रिश्ता होता है। दोस्ती में दो लोगों के बीच स्थायी स्नेह, सम्मान, और विश्वास होता है । दोस्ती का मतलब ही है कि जैसा है, उसे वैसे ही स्वीकार करें और बदलने की कोशिश न करें। हमारी छोटी-छोटी खुशियों से लेकर बड़ी-बड़ी मुसीबतों में भी जो साथ खड़ा रहे वो होती है दोस्ती । हमारे हजार झगड़े होने के बाद भी मुसीबत मे दौड़कर आता है और गले लगा के कहता है मैं हूं ना सब ठीक हो जाएगा' दोस्ती वो है । दोस्त के पास हर चीज के नुस्खे होते है, बात चाहे किसी और से दोस्ती कराने की हो या दोस्तों के बीच आई दरार को दूर करना हो। इतना ही नहीं ब्रेकअप के लिए भी उनके पास हर अच्छा - बुरा नुस्खा होता है। सबसे खास तो तब होता है जब कोई दुख आता है तो दोस्त दुनिया से लड़ जाने की बात करते हैं। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो इस मतलब भरी दुनिया में बेमतलब साथ रहता है। दोस्ती वो है जो एक भरोसे से शुरू होती है और एक भरोसे से ही खत्म हो जाती है। दोस्ती में अगर कुछ मायने रखता है तो वो सिर्फ 'याराना' है। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर युवा पीढ़ी से इस बारे में बात की , कि पहले और अब के समय की दोस्ती में क्या बदलाव आए तो उनका कहना था कि आज के समय में दोस्ती का मतलब बदल चुका है। कृष्ण - सुदामा की दोस्ती की आज भी मिसाल दी जाती है फिर उसके बाद के युग में भी दोस्त ऐसे होते थे जिनकी इतनी अच्छी बॉन्डिंग होती थी कि बचपन की दोस्ती बुढ़ापे तक चलती थी। एक दूसरे के सुख दुख में साथ खड़े होते थे। लेकिन आज दोस्ती के मायने बदल गए हैं । अगर हर मर्ज की दावा दोस्ती है तो, हर कांड की वजह भी दोस्ती बन रही है। हालांकि ऐसे सभी नहीं होते हैं..आज की जनरेशन में भी बहुत से दोस्त ऐसे हैं जिनकी दोस्ती की बॉन्डिंग काफी मजबूत है। लेकिन आज के समय में कुछ दोस्त समय के साथ बदल गए हैं। ऐसा आज की पीढ़ी मानती है। दोस्ती बदलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उनमें से कुछ सिर्फ अपने फायदे के कारण दूर चले जाते हैं। कुछ लोग नए दोस्त मिलते ही आपको नजरअंदाज करने लगते हैं। परिस्थितियों के साथ और जब नए सामाजिक लक्ष्य सामने आते हैं तो बदल जाते हैं । यदि दोस्ती गहरे आपसी स्नेह और सम्मान पर नहीं बनी है तो मतभेद होने या पहचान में बदलाव होने पर इसके टिकने की संभावना मुश्किल होती है।</p>
<p>आज के जमाने में किसी पर भरोसा नहीं कर सकते। सामने वाला व्यक्ति कैसा हो? जो अपने होते है जिन दोस्तों पर भरोसा करते हैं वहीं साथ नहीं देते स्वार्थी होते है और दगाबाजी कर जाते है । जिन पर भरोसा नहीं करते वह दिल के साफ होते है। आज के समय में दोस्त कितना भी खास हो पीठ पीछे आपकी बुराइयां करते हैं। <strong>- ललित कुशवाहा, कॉलेज स्टूडेंट, </strong></p>
<p><strong>कोटा विश्वविद्यालय</strong><br />आज के दौर में दोस्ती एक सीमित दायरे में सिमट के रह गई है। पहले के समय की और अब की दोस्ती में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले दोस्ती दिल से , शिद्दत के साथ निभाई जाती थी। आज दोस्ती में पैसों की तरफ भी देखा जाता है। लेकिन सभी जगह ऐसा नहीं है आज भी कई बहुत सच्चे और अच्छे दोस्त भी है लेकिन , कम है। आजकल दोस्ती में बैकग्राउण्ड देखा जाता है। कहीं-कहीं पर दोस्ती में स्वार्थ भी हावी हो रहा है।<br /><strong>- नमो मीणा, स्टूडेंट, गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p>दोस्ती सभी तरह की है। आज के समय में पहले जैसी बात दोस्तों में नहीं है। पहले के समय में जो दोस्ती में बॉन्डिंग होती थी वैसी कम है। आज स्वार्थ का जमाना आ गया है। पैसा एक ऐसी चीज है उससे रिश्ते खराब ही होते है। आज सोशल मीडिया वाली फ्रेंडशिप है सोशल मीडिया पर दोस्त बनते है। ये दोस्ती सबसे खतरनाक है। इसमें गलत काम होते है। सोशल मीडिया की दोस्ती को कभी मैं फ्रेंडशिप नहीं कहता । वह टेंपरेरी, टाइम पास है। ये दुनिया है इसमें सभी तरह के लोग है। कुछ अच्छे भी है, कुछ खराब भी है, कुछ बहुत अच्छे दोस्त भी है।<br /><strong>- अर्पित जैन, स्टूडेंट एवं प्रेसीडेंट, कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>मित्रता गरीबी-अमीरी, बड़े-छोटे का भेद नहीं देखती। मित्रता में छल, कपट भी नहीं होता। आजकल ज्यादातर दोस्ती बस टाइम पास या अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए की जाती है। किसी का आपसे कोई काम पूरा हो सकता है, तो वह तुरंत आपका दोस्त बन जाएगा। वह इतना मीठा बोलेगा, कि आपको लगेगा, इससे अच्छा दुनिया में कोई है ही नहीं, जहां उसका काम निकला, वह तुरंत नौ दो ग्यारह हो जाएगा।<br /><strong>- सौरभ रावल</strong></p>
<p><strong>कॉलेज स्टूडेंट</strong><br />किसी भी मुश्किल समय में हमें जिस व्यक्ति की मदद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह दोस्त ही होते हैं। परंतु आज के समय में बहुत कम ही ऐसे होते हैं, जिन्हें हम दोस्त कह सकते हैं। आधुनिकता और स्वार्थ की चकाचौंध ने आज दोस्ती को माध्यम की तरह बना दिया है। <br /><strong>- आशीष कुमार वर्मा </strong></p>
<p><strong>कॉलेज स्टूडेंट</strong><br />बदलते दौर में दोस्ती के मायनों में बदलाव आया है। आज दोस्ती को दुश्मनी में तब्दील होते वक्त नहीं लगता है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि  भागदौड़ भरी जल्दबाजी की दुनिया में हम अक्सर ‘साथी’ को ‘दोस्त’ मान बैठते हैं और फिर उससे दोस्ती की उम्मीद लगा लेते हैं। जबकि ‘साथी’ और ‘दोस्त’ में बहुत फर्क है। स्कूल, कालेज, आफिस इत्यादि जगहों पर साथ रहने वाले लोग साथी हो सकते हैं मगर दोस्त कुछ चुनिंदा लोग ही होते हैं। दोस्ती वो रिश्ता है जो कि दिल से जुड़ता है। जहां बीच में दिमाग ने दस्तक दी, दोस्ती खत्म! ‘दोस्ती’ वो होती है जिसमें हमें सामने वाले की ‘खुशी में छुपा गम’ और ‘गम में छुपी खुशी’ का बखूबी अहसास हो जाए ।<br /><strong>- संदीप शरारे, मेडिकल स्टूडेंट, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>हमारे समय में इतना डेवलपमेंट नहीं था। गिने-चुने दोस्त होते थे। आपस में स्वार्थ नहीं होता था। वादे के पक्के होते थे और उसे निभाते थे। उस समय की दोस्ती ऐसी ही थी। आज हम भी उसी दोस्ती की वजह से आगे बढ़े हैं। मेरा एक दोस्त वकील और एक अकाउंटेंट था। दोनों दोस्तों ने मुझे प्रमोट किया कि तुम काम करो नौकरी छोड़ दो। उन्होंने ही मुझे फाइनेंस किया और काम चालू करवाया। आज की पीढ़ी को जब देखते हैं तो अधिकांशतया दोस्ती मतलब पर टिकी हुई है। आपको सामने वाले से कितना  मतलब है उतनी ही दोस्ती रखते है। ये वक्त की बात है। आगे बढ़ना है या दोस्त को कमिटमेंट करना है सही सलाह दो। कभी किसी से गलत कमिटमेंट मत करो। आगे चलकर यहीं दोस्ती में दरार का कारण बनता है।<br /><strong>- बी.एल. जैन, ओनर, ट्रेड सेंटर</strong></p>
<p>आज की पीढ़ी की दोस्ती में काफी बदलाव आ गए है। अब पहले जमाने वाली बात नहीं रही। आज की अधिकतर दोस्ती लालच व स्वार्थ से भरी हुई है। दोस्ती में स्वार्थ की भावना आ गई है। कहीं ना कहीं कुछ स्वार्थ छिपा रहता है। मैंने अधिकतर लोगों में देखा है कि दोस्ती करने से पहले वह अपना स्वार्थ देखते है। फिर दोस्ती का हाथ बढ़ाते है। आज दोस्ती में स्टेटस देखा जाता है। पहले इस तरह का भेदभाव नहीं था कि यह छोटा है या बड़ा है। कृष्ण और सुदामा में आपस में कितनी भिन्नता थी लेकिन मित्रता के आगे उन्होंने भिन्नता को नहीं दर्शाया । सुदामा को उन्होंने आदर, सम्मान और प्रेम दिया। आज की पीढ़ी के ज्यादातर बच्चों में स्वार्थ व स्टेटस सिंबल को देखा जाने लगा है।<br /><strong>- सुषमा बंसल, प्रेसीडेंट, </strong></p>
<p><strong>रोटरी क्लब पद्मिनी कोटा</strong><br />आज की पीढ़ी की दोस्ती में तो बहुत परिवर्तन आ गया है। हमारे समय में दोस्ती में  प्रेम, सद्भावना थी कोई स्वार्थ नहीं था। किसी तरह का आपस में कॉम्पटीशन नहीं था कि किस तरह के कपड़े पहने है कहां घूमने-खाना खाने जा रहे है, इन चीजों से कोई मतलब नहीं था। साथ आते-जाते थे, पढ़ाई करते थे और एक दूसरे की मदद करते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद करते थे। बताते थे कि यह एग्जाम दे रहे है। आज सब छिपाते है। स्वार्थ आ गया है। पहली क्लास से अभी तक जब मैं रिटायर्ड हो गया हूं तब से जो मित्रता है वह आज भी कायम है। आज की पीढ़ी में यह बात नहीं है। कारण पहले अर्थ युग नहीं था। आज के युग को देखते हुए नई पीढ़ी  की अपनी मजबूरियां है। आज की पीढ़ी की दोस्ती स्वार्थ पर, पैसे पर आधारित है। वह देखते है कि सामने वाला कितना पैसे वाला है। उसे उसी हिसाब से इम्पोर्टेन्स दी जाती है। हमारे समय में ऐसा नहीं था। मेरे बचपन के मित्र  बहुत बड़े घरों से भी थे लेकिन हम साथ उठते बैठते खाते-पीते थे किसने चाय के पैसे दिए किसने कैंटीन में बिल चुका दिया पता ही नहीं चलता था। आज की  दोस्ती में वह चीज नहीं है। बल्कि सामने वाले का खर्चा कराएंगे या स्वयं का ही खर्चा करेंगे।<br /><strong>- विभेष कुमार सोरल, सेवानिवृत, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 12:58:59 +0530</pubDate>
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                <title>एकतरफा प्यार: फ्रेंडशिप से मना किया तो छात्रा का गला काटा</title>
                                    <description><![CDATA[बेखौफ इतना कि अस्पताल जाकर लोगों से पूछा जिंदा है या मर गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/pali/%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%AB%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%BE/article-2680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/pali.jpg" alt=""></a><br /><p>राणावास। निकटवर्ती गांव बिठौडा कलां गांव के राजकीय सीनियर सैकंडरी विद्यालय में मंगलवार को एक छात्र ने सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया। विद्यालय की एक छात्रा के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ वार कर जख्मी कर  दिया। जानकारी मिलने पर शिक्षकों ने खून से लथपथ छात्रा को मारवाड़ जंक्शन सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे पाली रेफर कर दिया गया। इतने में भी छात्र का मन नहीं पसीजा और अस्पताल जाकर उसने लोगों से पूछा कि वह जिंदा है या मर गई। बताया जा रहा है कि यह छात्र काफी समय से फ्रेंडशिप के लिए छात्रा पर दबाव बना रहा था। उसके मना करने के दौरान आरोपी छात्र ने इस घटना को अंजाम दिया है। जख्मी छात्रा का पाली के ट्रोमा वार्ड में इलाज जारी है। पुलिस आरोपी छात्र की तलाश में जुटी है।</p>
<p><br /> प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विद्यालय में कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा लंच के दौरान अपनी कक्षा में खाना खा रही थी। इतने में मौका पाकर बाहरवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने छात्रा के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ वार कर उसे जख्मी के दिया। अचानक हुए इस हमले को देख अन्य छात्रों के चिल्लाने की आवाज से स्कूल स्टाफ मौके पर जाकर देखा तो छात्रा लहूलुहान हालत में पड़ी हुई थी जिसको तुरंत मारवाड़ के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सक विकास गहलोत ने स्थिति गंभीर होने के कारण इलाज के लिए पाली रेफर कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>पाली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Nov 2021 11:51:06 +0530</pubDate>
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