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                <title>अगर होर्मुज में गतिरोध लगातार जारी रहा, तो वैश्विक तेल बाजार में संकट 2027 तक जारी रहेगा: अमीन नासिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने में नहीं खुला, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होगा। दुनिया पहले ही 1 अरब बैरल तेल खो चुकी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह मार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-the-standoff-in-hormuz-continues-the-crisis-in-the/article-153501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/अमीन-नासिर.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। अरामको के पहली तिमाही के परिणामों पर चर्चा करने के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि जलडमरुमध्य में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।</p>
<p>दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे। फारस की खाड़ी में तेल उत्पादक देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद करने से उत्पादन और निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले, इस जलमार्ग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग दो करोड बैरल तेल बाजार में आता था।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 'एकीकृत प्रस्ताव' के साथ आने का समय देने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया था। तीन मई को ट्रंप ने होर्मुज में फंसे जहाजों की सहायता के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। फिर ट्रंप ने पांच मई को कहा कि उन्होंने यह देखने के लिए थोड़े समय के लिए ऑपरेशन को रोकने का फैसला किया है कि क्या ईरान के साथ शांति समझौता हो सकता है। हालांकि सोमवार को उन्होंने अमेरिकी शांति प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पानी के लिए किया प्रदर्शन, प्रेम नगर इलाके में फिर होने लगी किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों में पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। इस साल भी पेयजल के लिए लोगों को निजी स्तर पर टैंकर मंगाने पड़े थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/protest-held-for-water--shortage-again-in-prem-nagar-area/article-92147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(10).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रेमनगर क्षेत्र में गर्मियों का मौसम निकल जाने के बाद भी पानी की समस्या बनी हुई है। क्षेत्र के कई इलाकों में लोगों को पानी के लिए भारी जद्दोजहत करनी पड़ रही है। इलाके में पिछले 10 से 15 दिनों से पानी की आपूर्ति ठीक से नहीं हो रही है। जिसके चलते स्थानियों ने मंगलवार को जलदाय विभाग की महावीर नगर स्थित चौकी पर प्रदर्शन कर समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन दिया। स्थानीयों के अनुसार इलाके में पिछले करीब 15 दिन से न तो ठीक से जलापूर्ति हो रही है और न ही अधिकारियों की ओर से सुनवाई हो रही है। </p>
<p><strong>गर्मियों जैसी किल्लत सितंबर में</strong><br />इलाके में पानी की समस्या कई सालों से बनी हुई है, इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई पुख्ता समाधान नहीं किया गया है। गर्मियों में पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। इस साल भी पेयजल के लिए लोगों को निजी स्तर पर टैंकर मंगाने पड़े थे। वहीं अब सितंबर माह में भी पानी की किल्लत हो रही है। नलों में कई घंटों तक पानी की सप्लाई नहीं होती है। लोगों को सुबह जल्दी उठकर पानी भरने के लिए दौड़ भाग करनी पड़ती है। फिर भी केवल पीने भर का पानी भर पाता है। अन्य कार्यों के लिए लोगों को हैंडपंप और ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है।</p>
<p>प्रेमनगर क्षेत्र में पानी की सालों से समस्या है लोगों को पानी भरने के लिए आज भी इंतजार करना पड़ता है। कई इलाकों में तो आज भी ठीक से जलापूर्ति नहीं होती है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन हर बार समस्या वापस हो जाती है। सालों से कोई समाधान नहीं हो रहा।<br /><strong>- हरीश राठौर, पूर्व उद्योग नगर मंडल अध्यक्ष, भाजपा</strong></p>
<p>इलाके में हनुमान मंदिर के पास, चौथ माता मंदिर, जागा मौहल्ला, बाबूलाल पांचाल के आस पास के मौहल्लों में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत है। लोग पानी के लिए कई बार पानी के कैंपरों पर निर्भर रहते हैं।<br /><strong>- मोनू वैष्णव, प्रेमनगर द्वितीय</strong></p>
<p>क्षेत्र में लोगों को पानी के लिए आज भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। अभी कई दिनों से पानी की किल्लत बनी हुई है। जिसके विरोध में ही ज्ञापन दिया गया है। अगर समाधान नहीं होगा तो बड़ा अंदोलन करना पड़ेगा।<br /><strong>- राकेश चक्रधारी, प्रेमनगर द्वितीय</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> प्रेमगनर क्षेत्र में पानी की समस्या की जानकारी है, पानी किल्लत ना हो इसके लिए इंतजाम किए हुए हैं। वहीं इलाके को अमृत योजना 2.0 में शामिल कर समस्या को दूर किया जाएगा।<br /><strong>- भरत भूषण मिगलानी, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 18:25:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेयजल संकट से सूखे कंठ, पानी आए तो मिले राहत </title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग को दिवाली त्योहार तक के लिए जलापूर्ति का समय बढ़ाना चाहिए या नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था करना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dry-throat-due-to-drinking-water-crisis--relief-if-water-comes/article-60974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/peyjal-sankat-s-sukhe-kanth,-pani-aye-to-mile-rahat...chaumhela,-jhalawar...kota-news-31-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>चौमहला। गंगधार उपखंड क्षेत्र के चौमहला कस्बे में जलदाय विभाग द्वारा की जा रही एकांतर जलापूर्ति के कारण आम उपभोक्ता को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। दीपावली का मुख्य त्यौहार नजदीक आ रहा है। ऐसे समय में अधिकांश घरों में पानी का उपयोग अधिक होने से घरों में पेयजल संकट होने के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बिजली कटौती से भी कई बार पानी की सप्लाई प्रभावित हो जाती है। जलदाय विभाग द्वारा एक घंटा एकांतर जलापूर्ति होती है, उसमें भी सप्लाई का प्रेशर कम होने के कारण समय के अनुपात में पर्याप्त मात्रा में पानी घरों में नहीं पहुंचता है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि इस समय दीपावली का मुख्य त्यौहार नजदीक आ रहा है। जलदाय विभाग को दिवाली त्योहार तक के लिए जलापूर्ति का समय बढ़ाना चाहिए या नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था करना चाहिए, ताकि ऐसी हालत में आम उपभोक्ताओं को बेवजह परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। एक दिन छोडकर एक दिन जलापूर्ति की जा रही है जिसके कारण ग्रामीणों को परेशानी तो हो ही रही है। वहीं कई बार तो दो- दो दिन तक पानी की समस्या बनी रहती है। इसी दौरान यदि बीच में कभी मोटर खराब हो जाती है या और भी कोई तकनीकी खराबी होने के कारण जलापूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे हालात में लोगों को दिनभर घरों में पानी भरने में ही दिन व्यतीत हो जाता है। </p>
<p>दीपावली का पर्व नजदीक है। जलदाय विभाग द्वारा की  जा रही जलापूर्ति का समय भले ही 1 घंटे हो लेकिन नलों में  प्रेशर से पानी नहीं आने के कारण पीने का पानी भी सही प्रकार से नहीं भर पाते हैं। एक घंटा सप्लाई के बीच में विद्युत विभाग द्वारा लाइट कटौती करने के कारण सप्लाई व्यवस्था चरमरा जाती है।<br /><strong>- मोहनलाल शर्मा, पेंशनर शिक्षक     </strong>  </p>
<p>चौमहला कस्बे में एकांतर जलापूर्ति की जा रही है, जिसके चलते घरों में हमेशा जल संकट बना रहता है।  त्योहार के समय एकांतर जलापूर्ति बाधित होती है तो ऐसे हालात में आम उपभोक्ताओं को घरों में पीने के पानी के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है। सर्दी के समय में जलापूर्ति के समय में भी परिवर्तन कर सुबह 6 बजे के स्थान पर 7 बजे से या 7 बजे के बाद में जलापूर्ति की जानी चाहिए।<br /><strong>- पूरण लाल शर्मा, पेंशनर शिक्षक  </strong>     </p>
<p>जलदाय विभाग द्वारा की जाने वाली एकांतर जलापूर्ति से घरों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती है । एकांतर जलापूर्ति की व्यवस्था किसी भी तकनीकी कारण से या अन्य कारण से बाधित होती है तो जल संकट का सामना करना पड़ता है। जलदाय विभाग द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति का प्रेशर भी कम रहता है।<br /><strong>- निरंजन पासी, चौमहला ग्रामीण </strong></p>
<p>चौमला में नियमित रूप से जलापूर्ति व्यवस्था शुरू नहीं की जा सकती है। जलापूर्ति के दौरान सप्लाई के समय प्रेशर पूरा ही रहता है। जलापूर्ति के समय नलों मे  मोटर लगाने के कारण प्रेशर कम हो सकता है।<br /><strong>- राकेश मीना, कनिष्ठ अभियंता जलदाय विभाग चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Oct 2023 18:34:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - 283 स्कूलों के 22 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जल्द मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति के प्रयास रंग लाए, जिस पर शिक्षकों ने दैनिक नवज्योति का आभार जताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---more-than-22-thousand-students-of-283-schools-will-soon-get-relief/article-60614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/asar-khabar-ka---283-schoolo-k-22-hazaar-s-zyada-vidhyarthiyo-ko-jald-milegi-rahat...karwar,-bundi-news-27-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर। नैनवां ब्लॉक में 283 स्कूलों के 22 हजार 892 विद्यार्थियों के गुरुवार को राहत की खबर आई। मिड डे मिल योजना के तहत खाद्यान्न का वितरण शुरु हो गया है। स्कूलों में खाद्यान्न पहुंचने से पोषाहार प्रभारी ने राहत की सांस ली। गौरतलब है बुधवार को दैनिक नवज्योति के अंक में 283 स्कूलों के 22 हजार 892 विद्यार्थियों पर पोषाहार का संकट...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और खाद्यान का वितरण शुरू कर दिया गया। दैनिक नवज्योति के प्रयास रंग लाए। जिस पर शिक्षकों ने दैनिक नवज्योति का आभार जताया। अक्टूबर से दिसंबर त्रैमासिक का खाद्यान्न नहीं आने से शिक्षकों द्वारा उच्च अधिकारियों को बार-बार लेटर लिखे रहे थे ,लेकिन विभाग द्वारा कोई सुनवाई नहीं हो रही थी, जिस कारण दबाव में शिक्षक गांवों में जाकर भामाशाहों या राशन की दुकान से गेंहू लेकर योजना का संचालन कर रहे थे। प्रदेश सहित देश के सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील नि:शुल्क मिलता है। इसकी राशि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से तय 60 व 40 प्रतिशत के अनुसार वहन की जाती है और खाद्यान्न केन्द्र सरकार की ओर से स्कूलों में पहुंचाया जाता है। इसके लिए कक्षा 1 से 5 तक मे 5.45 व 1-8 मे 8.17 रू प्रति लाभान्वित विद्यार्थी के हिसाब से कुकिंग कन्वर्जन राशि दी जाती है जो तेल, मिर्च, मसाले,सब्जी,आटा पिसाई आदि में खर्च की जाती है। एमडीएम योजना में पोषाहार पकाने के लिए स्कूलों में गेहूं और चावल केंद्र सरकार उपलब्ध करवाती है, इसके अलावा गर्म भोजन पकाने में लगने वाली सामग्री की व्यवस्था पोषाहार प्रभारी करते हैं। इसके लिए उन्हें विभाग से कुकिंग कंवर्जन राशि मिलती है, जिसमें कक्षा 1 से 5 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए 5 रुपए 45 पैसे प्रतिदिन प्रति विद्यार्थी और कक्षा 6 से आठ 8 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए 8रुपए 17 पैसे प्रतिदिन प्रति विद्यार्थी के हिसाब से कंवर्जन राशि दी जाती है। कुक कम हेल्पर को प्रतिमाह 2003 रुपए मानदेय मिलता है। प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनिकरण को बढ़ावा देना के लिए स्कूलों में बच्चों का नामांकन ठहराव और उपस्थिति बढ़ाना,ड्रॉप आउट को रोकना तथा शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देना है।</p>
<p>गुरुवार को पोषाहार सप्लाई शुरु हो गया है जिससे अब एमडीएम योजना चलाने में दिक्कत नही होगी। <br /><strong>- नाथूलाल बैरवा, शिक्षक </strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पोषाहार की सप्लाई शुरू होने पर अब शिक्षको को गांवों में जाकर गेंहू उधार नही लेना पड़ेगा,समस्या का समाधान करवाने पर दैनिक नवज्योति की बदौलत यह राहत मिल पाई है।<br /><strong>- पंकज जैन, मिडिया प्रभारी शिक्षक संघ राष्ट्रीय नैनवां</strong></p>
<p>खाद्यान्न की सप्लाई शुरू हो गई है अब शिक्षको को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा,दैनिक नवज्योति का आभार हौ। <br /><strong>- सुगनचंद मीणा, अध्यक्ष शिक्षक संघ राष्ट्रीय नैनवां</strong></p>
<p>खाद्यान्न सप्लाई करने के लिए हमने दो दिन पहले बड़ा प्रदर्शन की चेतावनी दी थी जिससे जिले के उच्चाधिकारी हरकत में आए और गुरुवार को ही सप्लाई शुरू हो गई।<br /><strong>- बाबूलाल शर्मा, संयुक्त कर्मचारी महासंघ एकीकृत अध्यक्ष नैनवा</strong></p>
<p>पोषाहार की गाड़ियां आने से अब शिक्षकों को अन्य जगह से मांगकर पोषाहार चलाना नही पड़ेगा।<br /><strong>- राधेश्याम मीणा, अध्यापक </strong></p>
<p>पोषाहार आने से अब हमारी समस्या का समाधान हो गया है। इसका श्रेय दैनिक नवज्योति का को जाता है। प्रमुखता से खबर का प्रकाशित की।  <br /><strong>- मोहन प्रजापत, पोषाहार प्रभारी</strong></p>
<p>गुरुवार को पोषाहार सप्लाई हो गया है।<br /><strong>- नाथूलाल बैरवा,संस्था प्रधान</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />आज से पोषाहार की सप्लाई शुरू कर दी गई है। एक दो दिन में नैनवां ब्लॉक के सभी स्कूलों में मीड डे मिल योजना का पोषाहार की सप्लाई कर दी जाएगी। <br /><strong>- अनिल गोयल, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 16:17:38 +0530</pubDate>
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                <title>भारत को अहम हथियारों और मिलिट्री उपकरणों की सप्लाई हो रही बाधित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी मैगजीन फॉरेन पॉलिसी की मानें तो रूस के रक्षा उद्योग इस समय भारत को अहम उपकरणों की सप्लाई के लिए संघर्ष से गुजर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/supply-of-important-weapons-and-military-equipment-to-india-is/article-41801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-211.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। भारत की सेनाएं काफी हद तक रूस के हथियार और मिलिट्री उपकरणों पर निर्भर हैं। आने वाले समय में भी इस स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं पड़ने वाला है। लेकिन जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला है तब से ही भारत काफी मुश्किलों में आ गया है। अमेरिकी मैगजीन फॉरेन पॉलिसी की मानें तो रूस के रक्षा उद्योग इस समय भारत को अहम उपकरणों की सप्लाई के लिए संघर्ष से गुजर रहे हैं। मैगजीन की मानें तो यह वह समय है जब रूसी सेनाएं खुद मुश्किल में हैं। ऐसे में रूस को खुद नहीं मालूम है कि वह कब भारत की सैन्य जरूरतों को पूरा करता रहेगा। इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि अगले एक दशक तक भारत को कई उपकरणों की सप्लाई होती रहेगी। ऐसे में भारत जो रूस का सबसे बड़ा ग्राहक है उसकी रक्षा जरूरतों पर बुरा असर पड़ने वाला है।</p>
<p><strong>भारत पर पड़ेगा असर</strong><br />मैगजीन के मुताबिक इसका तुरंत प्रभाव भारत पर नजर आने वाला है। भारतीय सेनाओं के पास ज्यादातर रूस के बने उपकरण हैं और ऐसे में इनकी उपलब्धता भी कम होने वाली है। भारत के लिए गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरना आसान नहीं होने वाला है। इसकी वजह से आपरेशनल क्षमताओं पर नकरात्मक असर पड़ेगा। यह भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इस समय भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा  पर चीन की आक्रामकता का सामना कर रही है, हिंद महासागर को सुरक्षित करने और पाकिस्तान के साथ तनाव से निबटने में लगी हुई है।</p>
<p><strong>सेनाओं की रूस पर कितनी निर्भरता</strong><br />विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध से पहले भारत हथियारों की आपूर्ति की दिशा में विविधता लाने के प्रयासों पर काम कर रहा था जिसमें घरेलू उत्पादन को भी बढ़ाना शामिल है। लेकिन रूस के बने उपकरणों की संख्या इतनी ज्यादा है कि किसी और पर निर्भरता बढ़ाने में काफी समय लगेगा। इन सबके बीच ही रूस के हथियार के भंडार को बनाए रखने, गोला बारूद और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई को बरकरार रखने की जरूरत है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के मुताबिक भारतीय सेना के पास 90 फीसदी से ज्यादा बख्तरबंद गाड़ियां, 69 फीसदी फाइटर जेट्स जो वायुसेना और नौसेना की तरफ से आॅपरेट किए जा रहे हैं, नौसेना के पास 44 फीसदी उपकरण जिसमें पनडुब्बी से लेकर युद्धक जहाज तक शामिल हैं, रूस पर निर्भर हैं। जो वॉरशिप्स नौसेना के पास हैं वो 65 फीसदी तक रूसी मिसाइलों से लैस हैं।</p>
<p><strong>क्यों रूस पर निर्भर हुआ भारत</strong><br />कई साल तक भारत को रूस पर निर्भर रहने का फायदा भी मिला। रूस, भारत को न सिर्फ रक्षा उपकरण मुहैया करा रहा था बल्कि वह टेक्नोलॉजी भी मुहैया करा रहा था, जो पश्चिमी देश देने से इनकार कर रहे थे। इसके अलावा रूसी उपकरण सस्ते भी होते हैं और इन्हें प्रयोग करना भी आसान होता है। ऐसे समय में जब भारत, चीन के साथ सीमा पर चुनौतियों का सामना कर रहा है, यूक्रेन पर रूस का हमला पहले ही सेनाओं की आपरेशनल क्षमताओं पर असर डाल रहा है। साथ ही रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से भी भारत को रूस से प्रमुख उपकरणों, स्पेयर पार्ट्स और गोला-बारूद की डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ा है।</p>
<p><strong>किन सिस्टम की डिलिवरी में देरी</strong><br />पांच एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी में भी देर हो गई है। भारत ने साल 2018 में रूस के साथ 5.4 बिलियन डॉलर के साथ इस सिस्टम की डील की थी। भारत को आखिरी दो रेजीमेंट की डिलिवरी का इंतजार है। अब माना जा रहा है कि साल 2024 की शुरूआत में इसकी डिलिवरी हो जाएगी जबकि इसे साल 2023 में ही मिल जाना था। इसके अलावा किलो श्रेणी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक को रूस में रिफिट किया जाना था। यह रिफिट तो हो गई है मगर अब वापसी में देरी हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Apr 2023 11:00:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चंबल की कहानी, यूं पहुंचता है घरों तक पानी</title>
                                    <description><![CDATA[चंबल नदी के पानी को पीने योग्य बनाने और घरों तक पहुंचाने के लिए चार प्रक्रियाएं अपनानी पड़ती है। जिसमें नदी से पानी उठाना, फिल्टर प्लांट तक पहुंचाना, प्लांट पर पानी को शुद्ध करना, गुणवत्ता परखना, मिनरल्स, आयरन, कैल्शियम सहित अन्य खनीज पदार्थ की जांच कर सप्लाई करना शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/story-of-chambal--this-is-how-water-reaches-homes/article-40949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/chambal-ki-kahani,-yu-pahuchta-hai-gharo-tak-paani...kota-news..27.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नल घुमाने से ही पानी नहीं मिलता, बल्कि जोखिम और चुनौतियों के बीच जान की बाजी लगाने पर नसीब होता है। चंबल से घर तक पानी का सफर आसान नहीं है। इसे आसान बनाने के लिए जलदाय विभाग का पूरा मैकेनिज्म काम करता है। विशालकाय मशीनों के बीच 24 घंटे 300 कर्मचारियों की हाड़तोड़ मेहनत, अथक परिश्रम और अधिकारियों का सुपरवीजन, पानी की राह आसान बनाता है।  दैनिक नवज्योति में पढ़िए, चंबल से घर तक पानी का सफर....</p>
<p><strong>नदी से घर तक पानी का सफर </strong><br />चंबल नदी के पानी को पीने योग्य बनाने और घरों तक पहुंचाने के लिए चार प्रक्रियाएं अपनानी पड़ती है। जिसमें नदी से पानी उठाना, फिल्टर प्लांट तक पहुंचाना, प्लांट पर पानी को शुद्ध करना, गुणवत्ता परखना, मिनरल्स, आयरन, कैल्शियम सहित अन्य खनीज पदार्थ की जांच कर सप्लाई करना शामिल है। </p>
<p><strong>पहली प्रक्रिया : चंबल से रॉ वाटर उठाना</strong><br />चंबल की कराइयों में नदी से पानी उठाने के लिए तीन पम्प हाउस बने हुए हैं। जिनमें आरयूआईडीपी, वर्ल्डबैंक और ओल्ड पम्प हाउस शामिल हैं। इन पम्पहाउस में विशालकाय मशीनों से तीन बड़ी-बड़ी पाइप लाइनें जुड़ी हैं। जिनसे 2 हजार 800 लाख रॉ वाटर चंबल से लिया जाता है, फिर पम्पहाउस से करीब दो किमी दूर फिल्टर प्लांट में शुद्धिकरण के लिए भेज दिया जाता है। </p>
<p><strong>तीसरी प्रक्रिया  पोस्ट क्लोरिनेशन यानी रॉ वाटर को फिल्टर करना</strong><br />दूसरी प्रक्रिया में पानी शुद्ध होने के बाद तीसरी प्रक्रिया में फिर से पानी को फिल्टर किया जाता है। इसके लिए पोस्ट क्लोरिनेशन अपनाई जाती है। इनलेट के क्लेरिफायर से पानी अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के जरिए सीधे मुख्य चैनल में लाया जाता है। इस चैनल को 64-64 एलडी के तीन फिल्टर यूनिट में बांटा गया है और यह तीनों यूनिटें 12 बेड से जुड़ी होती है। प्रत्येक बेड में तीन फिल्टर लेयर होती है। जिसमें पहली लेयर में कंकड, दूसरी में मोटी रेत, काई और तीसरी लेयर में बारिक रेत व अन्य पार्टिकल्स को पानी से अलग किया जाता है। प्रत्येक बेड से एक और चेम्बर जुड़ा होता है। जिसमें आखिरी बार पानी में क्लोरिन मिलाकर पानी को फिर से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब में शुद्ध पानी के सैंपल भेजे जाते हैं।  इसके बाद ही सप्लाई की जाती है।</p>
<p><strong>दूसरी प्रक्रिया :  पानी से गंदगी दूर करना </strong><br />आरयूआईडीपी, वर्ल्डबैंक और ओल्ड पम्प हाउस को मिलाकर कुल 2100 लाख लीटर अशुद्ध पानी को फिल्टर करने के लिए इनलेट में पहुंचाया जाता है। जहां एलम, ब्लिचिंग और क्लोरिन मिलाकर पानी में जमा गंदगी को दूर किया जाता है। गंदगी नीचे बैठ जाती है और साफ पानी विभिन्न पाइपलाइनों के जरिए इनलेंट से जुड़े 6 क्लेरिफायर में पहुंचता है। जहां पानी को फिर से शुद्ध करने के लिए प्री-क्लोरिनेशन की जाती है। प्रत्येक क्लेरिफायर चेम्बर 350 लाख लीटर क्षमता का होता है। चेम्बर में आए पानी में एलम और ब्लिचिंग मिलाकर डोजिंग की जाती है। जिससे पानी में मौजूद अशुद्धियां जैसे, काई, मिटटी, बारिक कंकड, रेत आदि नीचे बैठ जाते हैं और शुद्ध पानी पाइप लाइनों के जरिए आगे मैन चेनल में पहुंच जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 45 मिनट लगते हैं। </p>
<p><strong>चौथी प्रक्रिया  </strong><br /><strong>टेस्टिंग के बाद सप्लाई </strong><br />तीसरी प्रक्रिया में पानी पूरी तरह से पीने योग्य हो जाता है। लेकिन, शहर में सप्लाई से पहले पानी की गुणवत्ता परखी जाती है। इसके लिए पानी के सैंपल लैब भिजवाए जाते हैं। जहां, सीनियर कैमिस्ट पानी में टीडीएस, प्लोराइड, मिनरल्स सहित अन्य पैरामीटर की बारिकी से जांच करते हैं। पानी की क्वालिटी निर्धारित मापदंड पर खरी उतरने के बाद ही घरों तक पानी की सप्लाई की जाती है।</p>
<p><strong>किस प्लांट की कितनी क्षमता</strong></p>
<p><strong>आरयूआईडीपी पम्प हाउस </strong><br />इसमें 715 होर्स पावर के 4 पम्प चंबल से पानी खींचने के लिए लगे हैं। इसमें 3 पम्प वर्किंग में और 1 स्टैंड बाय में रखा जाता है। इस पम्प हाउस से 130 एमएलडी यानी 1300 लाख लीटर रॉ वाटर नदी से उठाया जाता है। </p>
<p><strong>वर्ल्डबैंक पम्प हाउस </strong><br />इसमें 375 होर्स पावर के 4 पम्प लगे हैं। जिनमें 3 पम्प वर्किंग में और 1 एक्सट्रा में है। जिसे जरूरत के मुताबिक यूज किया जाता है। इस पम्प हाउस से 100 एमएलडी यानी 1 हजार लाख लीटर पानी चंबल से उठाया जाता है। </p>
<p><strong>ओल्ड पम्प हाउस </strong><br />इस पम्पहाउस में नदी से पानी खींचने के लिए 300 होर्स पावर के 4 पम्प लगे होते हैं। इससे 40 एमएलडी यानी 400 लाख लीटर पानी लिया जाता है। यह तीनों पम्प हाउस 24 घंटे लगातार चलते हैं। </p>
<p>जलदाय विभाग का मूल उद्देश्य हर व्यक्ति को शुद्ध पानी उपलब्ध कराना है। हर कर्मचारी-अधिकारी कृत संकल्पित है। पानी को शुद्ध बनाने में मेहनत लगती है। अपनी पीढ़ियों के लिए पानी बचाएं।   <br /><strong>-भारत भूषण मिगलानी, एक्सईएन जलदाय विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 15:09:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यह कैसा मर्ज है, अब दवाएं भी दे रही दर्द </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर आॅपरेटरों के भरोसे चल रहा है । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-a-merge-is-this-now-medicines-are-also-giving-pain/article-26306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/yah-kaisa-marj-hai-,-ab-dawaye-bhi-de-rahi-dard...kota-news-12.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा मरीजों के जी का जंजाल बन रही है। सरकार की ओर से 864 नई दवाएं की स्वीकृति दी है। लेकिन अभी तक इन सप्लाई ड्रग हाउस में नहीं हुई जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। डॉक्टर नई स्वीकृत दवाए पर्ची पर लिख रहे लेकिन अस्पताल में इसका स्टॉक नहीं होने से इसकी एनओसी देकर बाजार से दवा उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे मरीजों को दवा के लिए घनचक्कर बनना पड़ रहा है। मौसमी बीमारियों की तादात बढ़ने से दवाओं की खपत बढ़ गई है। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के हालात सुधारने का नाम ही नहीं ले रहे है। पहले मरीजों को डॉक्टर को दिखाने में मशक्कत करनी पड़ती है अब दवा का चक्कर मरीजों को मर्ज से ज्यादा दर्द दे रहा है। कहने को अस्पताल में मुख्यमंत्री दवा योजना के 10 से अधिक काउंटर हैं लेकिन इन काउंटरों के खुलने का समय और बंद होने का समय अलग होने से मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा होना मजबूरी बनता जा रहा है। कई दवा काउंटर तो अस्पताल के बंद होने से पहले ही बंद हो जाते हैं ऐसे में खुले हुए दवा काउंटरों पर मरीजों तादात बढ़ जाती है जिससे मरीजों दवा लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।  सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाओं की सुविधा तो कर दी लेकिन मरीजों को वहां दवा काउंटरों पर उपलब्ध ही नहीं हो रही है। एमबीएस में एक ही काउंटर पर दवा दी जा रही है वहां भी आधी दवाओं के लिए एनओसी जारी की जा रही है। जिसके लिए मरीजों व तीमारदारों को इधर से उधर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सालभर में जिले में 8 से 10 लाख टैबलेट की खपत होती है, मौसमी बीमारियों के दौरान खपत बढ़ जाती थी। कोविड के में यह आंकड़ा दो साल में 16 लाख 80 हजार तक पहुंच गया था। मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से अप्रैल 2020 से 2022  तक पेरासिटा मोल की 500 एमजी की 8 लाख 80 हजार और 250 एमजी की 8 लाख 80 हजार टैबलेट खपत हो चुकी है। मेडिकल व्यवसायियों अनुसार कोविड में 20 लाख टैबलेट की खपत हुई है। अभी पेरासिटा मोल, खांसी की दवाई और एजिथ्रोमाइसीन की डिमांड ज्यादा है।</p>
<p><strong>अस्पताल बंद होने के पहले ही सात दवा काउंटर हो जाते बंद</strong><br />अंता निवासी धनराज ने बताया कि अस्पताल में बने दवा काउंटर के खुलने और बंद होने के समय अलग अलग होने से मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। सुबह अस्पताल खुलने के साथ ही सभी दवा काउंटर खुल जाते है लेकिन 2 बजे तक एक से लेकर सात काउंटर एक -एक कर बंद होने लगते है। दो बजे तक एनओसी व एक दवा काउंटर से चलता है। ऐसे में इमरजेंसी से लेकर 3 बजे तक डॉक्टरों दिखाने वाले मरीज दवा लेने के के लिए मशक्कत करते नजर आते है। ऐसा किसी एक दो मरीज के साथ नहीं होता है। कई मरीजों के साथ हुआ। जिससे मरीज परेशान होते रहे। कई मरीज तो गर्मी के कारण थक हार कर अस्पताल में जमीन पर ही बैठ गए। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज अधिक  परेशान हुए। मरीजों का कहना था कि सरकार ने दवा तो नि:शुल्क कर दी है। लेकिन व्यवस्था इतनी जटिल कर दी है कि उससे पार पाना मुश्किल हो रहा है। दवाई के लिए चक्कर घिन्नी होने से झुंझलाहट भी होने लगी। इन व्यवस्थाओं के चलते दवा काउंटर, आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने और एनओसी जारी करवाने के लिए मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लग गई। 2 बजे से 3 बजे तक काउंटर नंबर 9 व 10 ही खुले हुए थे जिसमें मरीजों की दवा लेने के लिए लंबी कतारे लगी हुई थी। </p>
<p><strong>लंबी कतार में घंटों खड़े रहने का दर्द अब आम हो गया</strong><br />शहर के कालातालाब निवासी 62 साल की वंदना ने बताया कि उसके सिर की नस में परेशानी होने से न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाया वहां से दवा लेने के लिए काउंटर पर पहुंची तो एक घंटा लाइन में खड़ी रही उसके बाद मेरा नंबर आया छह दवा में दो दवा ही मिली चार दवा नहीं मिली। दवा काउंटर वाले ने बताया कि बाकी दवा की एनओसी लेकर बाहर से लेनी पड़ेगी अभी सप्लाई नहीं आ रही है। एमबीएस में नि:शुल्क दवा लेना आसान काम नहीं है। </p>
<p><strong>इंडोर मरीजों के लिए 13 नंबर काउंटर बना परेशानी का सबब</strong><br />एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे चल रहा है । ऐसे में यहां दो बजे बाद मरीजों की दवा और एनओसी लेने के लिए लंबी कतारे लगी रहना आम बात है। </p>
<p><strong>एनओसी लेना नहीं है आसान</strong><br />रोटेडा निवासी 86 वर्षीय शमशुद्दीन ने बताया वो बीपी, शुगर और थाइराईड की दवा लेने के लिए एक घंटे तक दवा की लाइन में लगा लेकिन सात दवाओं में तीन दवाए ही मिली। चार दवाओं के लिए एनओसी बनाने के लिए इधर उधर चक्कर काटने में समय पूरा हो गया । ऐसे ही कई मामले मंगलवार को एमबीएस अस्पताल में देखने को मिले। मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर पर गए तो उन्हें 13 नम्बर काउंटर पर भेजा गया। वहां जाने पर आधी ही दवा उपलब्ध थी। जबकि आधी दवा के लिए उन्हें एनओसी जारी की जा रही है। लेकिन एनओसी के लिए पहले उसी डॉक्टर से हस्ताक्षर करवाने, उप अधीक्षक के हस्ताक्षर करवाने और फिर उस पर्ची की दो जेरोक्स करवाकर लाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। </p>
<p>सरकार की ओर से 864 दवाए स्वीकृत कर रखी है। अभी नई स्वीकृत दवाओं का स्टॉक नहीं आया है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अस्पताल में एनओसी काटकर मरीजों को दवाए उपलब्ध कराई जा रही है। मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने से दवाओं की खपत बढ गई है। पुरानी स्वीकृत दवाओं की सप्लाई नियमित हो रही है लेकिन खपत ज्यादा होने से बहुत सी दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। नई दवाओं का स्टॉक आने में अभी एक माह लगेगा। <br /><strong>- सुशील सोनी, प्रभारी औषधी भंडार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 14:39:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेयजल आपूर्ति का समय निर्धारित नहीं, उपभोक्ता परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[हालात यह हो गए हैं कि विभाग कभी सुबह तो कभी दोपहर व अनेक बार रात में पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। इसके लिए उपभोक्ता की गिद्धदृष्टि सुबह से लेकर देर रात तक नलों पर टिकी रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/drinking-water-supply-time-not-fixed-consumer-upset/article-15102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/w-7.jpg" alt=""></a><br /><p>बांदीकुई। जलदाय विभाग बांदीकुई में मची अंधेरगर्दी की वजह से विभाग में पोपाबाई का राज कायम हो गया है। पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़े इस विभाग के अफसर तो अफसर, कर्मचारी भी जनता के लिए धृष्टराज बन गए हैं, जो ना तो कुछ देखते है और ना ही गलत को सही करने का ही प्रयास कर रहे हैं। शहर की पेयजल सप्लाई का कोई समय निर्धारित नहीं है। कब किस मोहल्ले और कॉलोनी में नलों में पानी आएगा, इस तथ्य का जवाब विभाग के पास भी नहीं है। मसलन हजारों उपभोक्ताओं को सात से आठ दिन में नलों के माध्यम से मिलने वाले पानी की आपूर्ति सुबह, दोपहर या रात में होगी, इस बात को कोई धणीधोरी नहीं है। हालात यह हो गए हैं कि विभाग कभी सुबह तो कभी दोपहर व अनेक बार रात में पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। इसके लिए उपभोक्ता की गिद्धदृष्टि सुबह से लेकर देर रात तक नलों पर टिकी रहती है। उपभोक्ताओं 24 घंटे नलों से पानी आने की प्रतिक्षा में समय व्यतीत हो रहा है। शहर के वार्ड 24 का तो सबसे बुरा हाल है। नल उपभोक्ता विलम्ब से आने वाली ट्रेन की तरह नल से पानी आने के इंतजार में लगे रहते हैं। भले ही जलदाय विभाग ने बाणगंगा नदी में नलकूप खुदवाकर शहर में पेयजल आपूर्ति का अंतराल कम कर दिया है किन्तु विभाग दो माह बाद भी पेयजल आपूर्ति का समय निर्धारित नहीं कर पाया है। इसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 14:38:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 67 - घरों में सप्लाई हो रहा गंदा पानी, बीमारियों का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[ शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 67 में लंबे समय से गंदा पानी सप्लाई हो रहा हैं। लोगों को मजबूरन गंदा पानी पड़ रहा हैं। वार्ड में सीवरेज लाइन व लीकेज वाटर लाइन बड़ी समस्या हैं। इसके बावजूद प्रशासन इसकी और कोई ध्यान नहीं दे रहा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-67---dirty-water-being-supplied-to-homes--danger-of-diseases/article-15055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/nwe-1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 67 में लंबे समय से गंदा पानी सप्लाई हो रहा हैं। लोगों को मजबूरन गंदा पानी पड़ रहा हैं। वार्ड में सीवरेज लाइन व लीकेज वाटर लाइन बड़ी समस्या हैं। इसके बावजूद प्रशासन इसकी और कोई ध्यान नहीं दे रहा। पार्षद सहित वार्ड के वाशिदें प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुके हैं।  लोगों का कहना हैं कि लंबे समय से वार्ड में पानी की पाइपलाइन नहीं बदली गई। जिसकी वजह से पुरानी पाइनलाइन जगह-जगह से लीकेज हो रही हैं। इस पाइपलाइन में सीवरेज का गंदा पानी भी मिक्स हो जाता हैं, जो नलों के माध्यम से लोगों के  घरों तक पहुंचता हैं। वार्ड के लोगों को गंदा काला पानी पीना मजबूरी बन गया हैं। इसके साथ ही आरयूआईडीपी ने सीवरेज की पाइपलाइन ठीक करवाने के लिए वार्ड में जगह-जगह से खुदाई करवा रखी हैं। जिसके कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। बारिश में इन गड्ढोें में पानी भर जाता हैं जिससे आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। <br /><br /><strong>लोगों को बीमारियों का खतरा</strong> <br />वार्ड के लोगों का कहना हैं कि गंदा काला पानी पीने से उन्हें बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता हैं। गंदे पानी से नहाने से त्वचा के रोग, खुजली, दाद आदि हो रहे हैं। पानी में काले कीटाणू भी आ रहे हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंंचा रहे हैं।<br /><br /><strong>यह है वार्ड क्षेत्र</strong><br />इस वार्ड में टीचर कॉलोनी, सेक्टर-1 व 2, रंगविहार, कम्पीटशन कॉलोनी, अम्बेडकर बस्ती कॉलोनी आते हैं।<br /><br /><strong>मजबूरी में पी रहे गंदा पानी</strong><br /> लंबे समय से मजबूरी में गंदा पानी पड़ रहा हैं। जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई हैं। गंदा पानी पीने से हम लोग बीमार पड़ जाते हैं। शिकायत करने के बावजूद भी इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।  <br /><strong>-लक्की शर्मा, स्थानीय निवासी</strong><br /><br /><strong>जगह-जगह खोदरखे हैं गड्ढे</strong><br /> आरयूआईडीपी ने वार्ड में जगह-जगह गड्ढें खोद रखे हैं। रास्ते पूरी तरह से बंद कर रखे हैं। जिसके कारण आने जाने में परेशानी होती हैं। इसके साथ ही सीवरेज की पाइपलाइन भी जगह-जगह से लीकेज हो रही हैं और वार्ड में गंदा पानी बिखरा हुआ हैं।  <br /><strong>- रवी मीणा, स्थानीय निवासी</strong><br /><br /><strong>प्रशासन नहीं कर रहा सुनवाई</strong><br /> वार्ड में लंबे समय से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। इस सम्बंध में कई बार प्रशासन को अवगत करवाया, लेकिन इसकी और आज तक किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। गंदा पानी पीने से लोगों को बीमारियां हो रही हैं। वार्ड में जगह-जगह खुदाई से भी लोग परेशान हैं। <br /><strong>- भानुप्रताप सिंह, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 13:29:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1500 पंपों पर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई गड़बड़ाने से किल्लत बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[एचपीसीएल और बीपीसीएल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की हुई किल्लत से कुछ राहत है। बीपीसीएल के पंपों पर सप्लाई में काफी सुधार है, लेकिन एचपीसीएल के प्रदेशभर के करीब 1500 पंपों पर अभी भी सप्लाई गड़बड़ाई हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-petrol-and-diesel-shortage-at-1500-pumps/article-12291"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/454654654654.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एचपीसीएल और बीपीसीएल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की हुई किल्लत से कुछ राहत है। बीपीसीएल के पंपों पर सप्लाई में काफी सुधार है, लेकिन एचपीसीएल के प्रदेशभर के करीब 1500 पंपों पर अभी भी सप्लाई गड़बड़ाई हुई है। डिमांड के अनुसार सप्लाई पूरी नहीं होने से पंप चौबीस घंटे ग्राहकों को ईधन नहीं दे पा रहे हैं।  </p>
<p>गड़बड़ाई सप्लाई पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भी अलर्ट मोड़ में आ गया है। विभाग के शासन सचिव आशुतोष एटी पेणडनेकर ने सभी कंपनियों ने राजस्थान हैड्स को तलब किया। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि संदीप भगेरिया भी पहुंचे। कंपनियों ने जल्द सप्लाई दुरूस्त करने का भरोसा दिलाया है। मॉनिटरिंग के लिए एक अधिकारी को भी जिम्मेदारी दी है। डीएसओ को निर्देश दिए हैं कि वे पंप ड्राई, सप्लाई बाधित होने की सूचना अपडेट रखे और सप्लाई सुनिश्चित करने का काम करें।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 10:01:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पानी की किल्लत को लेकर पार्षद के साथ किया विरोध प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय जलदाय विभाग कार्यालय में रोजाना पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर कस्बे के विभिन्न वार्डों से लोग पहुंच रहे है। रविवार को वार्ड पार्षद गौतम बंसल के साथ कुछ पार्षद व नागरिक पेयजल की मांग को लेकर रामलीला पार्क में स्थित पानी की टंकी के पास इकट्ठे हुए और अधिकारियों को पेयजल की सप्लाई सुचारू नहीं करने पर टंकी पर चढ़ने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/protest-with-councilor-over-water-shortage/article-12084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bik-rawatsar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रावतसर।</strong> शहर में गर्मी बढ़ने के साथ साथ पेयजल की भयंकर किल्लत का शहर वासियों को सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय जलदाय विभाग कार्यालय में रोजाना पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर कस्बे के विभिन्न वार्डों से लोग पहुंच रहे है। रविवार को वार्ड पार्षद गौतम बंसल के साथ कुछ पार्षद व नागरिक पेयजल की मांग को लेकर रामलीला पार्क में स्थित पानी की टंकी के पास इकट्ठे हुए और अधिकारियों को पेयजल की सप्लाई सुचारू नहीं करने पर टंकी पर चढ़ने की चेतावनी दी। लेकिन अधिकारियों ने पार्षदों को दूरभाष पर ही शीघ्र ही वार्ड में पेयजल सप्लाई सुचारू करने का आश्वासन दिया और थोड़ी देर बाद वार्ड 21 में पेयजल सप्लाई छोड़ दी गई।</p>
<p>इसी क्रम में सोमवार को वार्ड 9, 20 व 21 मैं पेयजल सप्लाई नहीं पहुंचने का आरोप लगाते हुए लगभग दो दर्जन महिला व पुरुष जलदाय विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय पहुंचे और पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग की। सहायक अभियंता हेमंत कुमार सोनी ने बताया कि जहां पर पेयजल सप्लाई की मांग कर रहे हैं वह क्षेत्र काफी ऊंचा है इसलिए वहां पर पानी कम पहुंचता है। शहर वासियों ने बताया कि लगभग 5 से 7 दिन के अंतराल पर पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन वह भी हमारे घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है।प्रदर्शन कर रहे महिला व पुरुषों ने बताया कि यह समस्या वर्षों से है लेकिन विभाग द्वारा कोई हल नहीं किया जा रहा है। प्रदर्शन मैं शामिल लोगों ने बताया कि हमारे क्षेत्र की गलियां बहुत संकरी है इसलिए घर तक पानी का टैंकर भी नहीं पहुंच पाता है।  प्रदर्शन करने वालों में पार्षद देवीलाल नाथ, ओमप्रकाश,महेंद्र कुमार, सुनील सोनी, अरुण कुमार, रमेश जाजू आदि शामिल रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/protest-with-councilor-over-water-shortage/article-12084</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 14:47:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नल कनेक्शन में गड़बड़झाला, ज्यादा राशि नहीं देने पर अटकी जलापूर्ति </title>
                                    <description><![CDATA[शहर की प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नल कनेक्शन के मामले में गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। नगर विकास न्यास की ओर से यहां पर नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि न्यास के ठेकेदार फर्म कर्मचारी नल कनेक्शन का पूरा शुल्क जमा करवाने के बाद भी ज्यादा राशि की मांग कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-was-a-mess-in-the-tap-connection--water-supply-stuck-for-not-giving-more-amount/article-11825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/20855.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नल कनेक्शन के मामले में गड़बड़झाले का मामला सामने आया है। नगर विकास न्यास की ओर से यहां पर नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि न्यास के ठेकेदार फर्म कर्मचारी नल कनेक्शन का पूरा शुल्क जमा करवाने के बाद भी ज्यादा राशि की मांग कर रहे हैं। राशि नहीं देने पर नल कनेक्शन करने में आनाकानी कर रहे हैं। इससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br />प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में करीब दो हजार आवास बने हुए हैं। इस कॉलोनी में निर्माण के समय ही नल कनेक्शन कर दिए गए थे। उसके बाद कॉलोनी के निवासियों के लिए जलापूर्ति की जा रही थी। इसका कोई बिल जारी नहीं किया जा रहा था। अब शहर में न्यास की ओर से बनाई गई कॉलोनियों को जलदाय विभाग को हैंडओवर करने की कवायद चल रही है। इसी के तहत इन कॉलोनियों में नए नल कनेक्शन किए जा रहे हैं। पूर्व में इन कॉलोनियों में हो रहे कनेक्शनों को काट कर अब नए कनेक्शन कर रहे हैं। इस समय प्रेमनगर कॉलोनी में न्यास की ओर से नल कनेक्शन जोड़ने करने का कार्य किया जा रहा है।<br /><br /><strong>फाइल शुल्क 1800, फिर भी वसूली</strong><br />नए नल कनेक्शन के लिए फाइल बनानी पड़ती है। इसका शुल्क 1800 निर्धारित कर रखा है। फाइल तैयार होने के बाद नल कनेक्शन करने का कार्य न्यास के ठेकेदार फर्म की ओर से किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि फर्म के कर्मचारी फाइल का शुल्क जमा करवाने के बाद भी नल कनेक्शन करने के लिए 600 रुपए और मांग रहे हैं। स्थानीय निवासी रामफूल धाकड़, श्यामबिहारी नागर, जगदीश नागर, धनराज मेहरा, कृष्णमुरारी मीणा व धनराज मीणा ने बताया कि पहले कर्मचारियों ने 1800 रुपए फाइल चार्ज देने के बाद कुछ घरों में कनेक्शन किए थे। अब हम लोगों से फाइल चार्ज के अलावा 600 रुपए और मांग रहे हैं। मना करने पर कनेक्शन करने से आनाकानी कर रहे हैं। जब कुछ लोगों के 1800 रुपए में कनेक्शन किए हैं तो और अब ज्यादा रुपए क्यों मांग रहे है।<br /><br /><strong>पहले का खोल ले गए वॉल </strong> <br />लोगों ने बताया कि फर्म के कर्मचारियों ने पहले लगे कनेक्शन को काटते समय उसका वॉल खोला था। उस वॉल को खोलकर अपने पास रख लिया और अब नए वॉल को लगाने और कनेक्शन जोड़ने के लिए 600 रुपए मांग कर रहे हैं। जबकि फाइल बनवाते समय अलग से राशि देने के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अब यहां पर पहले से ही लगे वॉल को लगाने के बजाय नए के नाम से रुपए ऐठनें की कोशिश की जा रही है। इससे लोगों में रोष है। <br /><br /><strong>शिकायत की, लेकिन ध्यान नहीं दिया</strong><br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों द्वारा फाइल चार्ज के अलावा भी रुपए मांगने की शिकायत न्यास के अधिकारियों से की थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। कर्मचारियों ने कई घरों के कनेक्शन काट दिए और नया कनेक्शन भी नही किया। इस कारण अब लोगों के सामने पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। पड़ोसियों के यहां से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वहीं कुछ लोग मजबूरी में ज्यादा रुपए देकर कनेक्शन करवा रहे हैं।   <br /><br />प्रेमनगर अफोर्डेबल कॉलोनी में नए नल कनेक्शन करने का कार्य चल रहा है। इसके लिए एक फर्म को ठेका दिया गया है। फाइल चार्ज के अलावा और राशि मांगने की शिकायत उनके पास नहीं आई है। यदि ठेका कर्मी आनाकानी कर रहा है तो स्थानीय निवासी अन्य कर्मचारी से कनेक्शन करवा सकते हैं। फिर भी इस सम्बंध में ठेकेदार से जानकारी की जाएगी। <br /><strong>- प्रकाशवीर नाथानी, अधिशासी अभियंता नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 16:20:07 +0530</pubDate>
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