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                <title>CBSE के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार सख्त, चेयरमैन-सचिव का तबादला, टेंडर और री-वैल्यूएशन पोर्टल की जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम विवाद पर सख्त कदम उठाते हुए बोर्ड के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है। सरकार डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया में धांधली और री-वैल्यूएशन पोर्टल की तकनीकी खामियों की आईआईटी विशेषज्ञों से ऑडिट करा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amidst-the-questions-raised-on-the-digital-evaluation-system-of/article-155793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई चेयरमैन और सचिव का तबादला करते हुए पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया और री-वैल्यूएशन पोर्टल में सामने आई तकनीकी खामियों को गंभीरता से लिया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सरकार सीबीएसई की अब तक दी गई सफाई से संतुष्ट नहीं है। इसी कारण ओएसएम सिस्टम से जुड़ी खरीद प्रक्रिया और टेंडर शर्तों की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। आरोप हैं कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए निकाले गए टेंडर में पात्रता नियमों और तकनीकी शर्तों में बदलाव कर हैदराबाद की एक कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।</p>
<p>परीक्षा के बाद छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं के धुंधले स्कैन, पन्ने गायब होने और री-वैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी समस्याओं की शिकायतें की थीं। मंत्रालय ने अब आईआईटी विशेषज्ञों की मदद से पोर्टल और साइबर सुरक्षा ढांचे का ऑडिट शुरू कराया है। सीबीएसई को डिजिटल सिस्टम मजबूत करने और छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:39:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एलयूसीसी चिटफंड घोटाला: सीबीआई की मुंबई में बड़ी कार्रवाई, दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले में सीबीआई ने मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से ₹800 करोड़ की ठगी की गई थी। आरोपियों को देहरादून की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lucc-chit-fund-scam-cbi-arrests-two-masterminds-from-mumbai/article-155759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/cbi.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि दोनों आरोपियों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई विस्तृत वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण, बैंक लेन-देन की जांच, मौखिक साक्ष्य जुटाने तथा देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक जांच-पड़ताल के बाद की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने एलयूसीसी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ 18 प्राथमिकी दर्ज की थीं। मामला जनता से अवैध रूप से धन जमा कराने, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, धन के दुरुपयोग तथा अनियमित जमा योजनाओं के संचालन से संबंधित है। जांच में अब तक सामने आया है कि उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को विभिन्न अनियमित निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रलोभन दिया गया था। निवेशकों से जुटाई गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।</p>
<p>सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं और उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों से एकत्र धन के संग्रहण, प्रबंधन, हस्तांतरण और कथित गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जो लाखों निवेशकों से जुटाई गई धनराशि के उपयोग और उसके प्रवाह से जुड़े व्यापक षड्यंत्र की ओर संकेत करते हैं।</p>
<p>सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून ले जाया जाएगा और बड्स अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। इससे पहले सीबीआई ने 12 और 13 मई को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर भी शामिल थे। सभी आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p>जांच एजेंसी ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है। इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेजा गया है और उन्हें फ्रीज करने तथा बड्स अधिनियम के तहत पीड़ित निवेशकों के हित में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दानिश इकबाल का बड़ा बयान, कहा- कागज पर चल रहे मदरसों की सहायता राशि होनी चाहिए बंद, सरकारी धन के दुरूपयोग का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कागजों पर चल रहे फर्जी मदरसों और संस्थाओं की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के चल रहे संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता अविलंब बंद होनी चाहिए और उस राशि का उपयोग सही स्कूलों के विकास में किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/danish-iqbals-big-statement-said-assistance-amount-to-madrassas/article-155736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/madarse.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर सिर्फ कागज पर चल रहे मदरसों की जांच कर उनकी सहायता अविलंब बंद कर देनी चाहिए। इकबाल ने बयान जारी कर कहा कि सरकार यदि इस तरह के कागजी मदरसों की जांच करवाती है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में बिना बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बहुत से मदरसे चलाये जा रहे हैं और इस क्रम में सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कागजी संस्थान फर्जीवाड़े की श्रेणी में आते हैं और उनका खुलासा करते हुए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि उनका वक्तव्य केवल मदरसों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी बहुत सी संस्थाएं चलाई जा रही हैं, जो सरकारी पैसे के दुरुपयोग के लिए कागजों पर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी सभी संस्थाओं की जांच करनी चाहिए और उनकी सहायता बंद कर सुरक्षित की गई राशि का उपयोग सही ढंग से संचालित स्कूलों में बच्चों के भविष्य निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों में करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओडिशा बॉक्साइट खनन विवाद: कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप, केंद्र से निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ओडिशा के कोरापुट और कालाहांडी जिलों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ ग्रामीणों के प्रदर्शन पर चिंता जताई है। उन्होंने कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड द्वारा 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग और ग्राम सभा की फर्जी मंजूरियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/odisha-bauxite-mining-dispute-congress-alleges-violation-of-tribal-rights/article-155714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ओडिशा में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शनों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र से इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने खनन परियोजनाओं से जुड़े वन अधिकार कानून, 2006 के कथित उल्लंघन, वन भूमि के उपयोग तथा ग्राम सभा की स्वीकृतियों में कथित अनियमितताओं के आरोपों को गंभीर बताते हुए उनकी व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव एवं संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि ओडिशा के कोरापुट जिले में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई स्वीकृतियों को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। उन्होंने कहा कि कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड पर लगभग 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिस पर आंदोलनरत ग्रामीण वन अधिकार कानून, 2006 के तहत अपने पारंपरिक और आध्यात्मिक अधिकार होने का दावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया में कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई है। उनका कहना था कि इसी प्रकार के आरोप कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों में भी लगाए जा रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री ओडिशा से हैं, वन अधिकार कानून, 2006 को उसकी भावना और प्रावधानों के अनुरूप लागू कराने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों और उनके कारणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:33:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NHRC ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को घेरा : 53 गर्भवती महिलाओं की मौत का लिया स्वतः संज्ञान, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में चिकित्सा के अभाव में एक वर्ष में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए राज्य के मुख्य सचिव को दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nhrc-cornered-the-government-on-health-services-took-suo-motu/article-155715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nhrc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के सिधी जिले में चिकित्सा सुविधाओं और जागरूकता के अभाव के कारण एक वर्ष के भीतर 53 गर्भवती महिलाओं की मौत होने की खबर का स्वतः संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने मंगलवार को बताया कि आयोग ने मामले को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सिधी जिले में प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद कुल 53 महिलाओं की मौत हुई। इनमें अधिकांश महिलाएं पहली या दूसरी बार मां बनने वाली थीं तथा मृतकों की औसत आयु 26 वर्ष बताई गई है। आयोग ने कहा कि यदि रिपोर्ट में बताए गए तथ्य सही हैं तो यह मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को दर्शाता है और नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों के हनन का मामला बनता है।</p>
<p>आयोग ने इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से मातृ मृत्यु के कारणों, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, चिकित्सा कर्मियों की स्थिति तथा सुधारात्मक कदमों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:00:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुजानगढ़ में परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई: 25 ओवरलोड वाहन जब्त, बिना टैक्स की फॉर्च्यूनर सीज</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर परिवहन विभाग ने सुजानगढ़ क्षेत्र में स्थानीय पुलिस के साथ विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर 25 ओवरलोड वाहनों को जब्त किया। बिना टैक्स चुकाए चल रही एक फॉर्च्यूनर कार को भी सीज कर कुल 29 चालान काटे गए। शांति व्यवस्था भंग करने पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-action-of-transport-department-in-sujangarh-25-overloaded-vehicles/article-155612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sujangarh.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की ओर से सुजानगढ़ क्षेत्र में रविवार को परिवहन विभाग ने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान का नेतृत्व प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, जयपुर द्वितीय धर्मेन्द्र कुमार ने किया। इस दौरान डीटीओ शाहपुरा यशपाल यादव सहित परिवहन विभाग की टीमों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से विभिन्न मार्गों पर सघन जांच अभियान संचालित किया।</p>
<p>जांच के दौरान परिवहन नियमों का उल्लंघन करने वाले 25 ओवरलोड वाहनों को रतनगढ़, राजलदेसर, सालासर तथा डीटीओ सुजानगढ़ कार्यालय में जब्त किया गया। इसके अलावा बिना कर (टैक्स) जमा कराए संचालित की जा रही एक फॉर्च्यूनर वाहन को भी सीज़ किया गया। अभियान के तहत कुल 29 चालान बनाए गए। कार्रवाई रविवार से शुरू होकर सोमवार सुबह तक जारी रही। अभियान में परिवहन निरीक्षक राजेश कुमार चौधरी, घनश्याम गुर्जर, श्रीचंद ढाका, तनसुख टांक, मुकेश सैनी और भूपेन्द्र डाबल सहित विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। </p>
<p>अधिकारियों ने ओवरलोडिंग, कर चोरी, बिना वैध दस्तावेज संचालित वाहनों तथा मोटरयान अधिनियम के अन्य उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को रतनगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों और संचालकों से नियमों की पालना करने तथा सभी वैध दस्तावेज साथ रखने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:44:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसी भाषा की जानकारी नहीं होने के आधार पर नार्को टेस्ट से नहीं किया जा सकता इनकार: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने भाषा की अज्ञानता के आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार करने को गलत बताया है। जस्टिस अनूप कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दुभाषिया (इंटरप्रेटर) की मदद ली जा सकती है। अदालत ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए डिप्टी स्तर के अधिकारी से निष्पक्ष अग्रिम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/narco-test-cannot-be-refused-on-the-basis-of-not/article-155540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या से जुड़े मामले में कहा है कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि प्राधिकारी ने इस आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार कर दिया कि संबंधित व्यक्ति को हिंदी धाराप्रवाह नहीं आती है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में पुलिस की ओर से पेश एफआर को स्वीकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराई जाए और वह जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट सहित जांच करते हुए रिपोर्ट निचली अदालत में पेश करे। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश फेलीराम की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि नार्को टेस्ट के लिए फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, सामान्य चिकित्सक और मनोचिकित्सक के साथ जरूरत होने पर </p>
<p>दुभाषिया को शामिल किया जा सकता है। केवल भाषा नहीं बोलने के चलते नार्को टेस्ट करने से मना नहीं किया जा सकता। याचिका में अधिवक्ता गौरव शर्मा ने बताया की याचिकाकर्ता ने अपने भाई की हत्या को लेकर साल 2015 में दौसा के रामगढ़ पचवाड़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें जांच अधिकारी ने लचर जांच करते हुए एफआर पेश कर दी और निचली अदालत ने 23 सितंबर, 2022 को उसे स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया कि जांच के दौरान अनुसंधान अधिकारी ने याचिकाकर्ता का नार्को टेस्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और याचिकाकर्ता ने भी अपनी सहमति दे दी थी। इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारी ने यह कहते हुए टेस्ट करने से इनकार कर दिया कि टेस्ट के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता धारा प्रवाह हिंदी नहीं बोल सकता है। याचिका में कहा गया कि वह अभी भी नार्को टेस्ट के लिए तैयार है। </p>
<p>ऐसे में मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यदि अदालत जांच के आदेश देती है कि नया जांच अधिकारी नियुक्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मामले में अग्रिम जांच के आदेश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:59:33 +0530</pubDate>
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                <title>शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला : सार्वजनिक जगहों पर पशु वध पर प्रतिबंध, जानें उल्लघंन पर कितनी होगी सजा ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना के अनुसार, केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के "अनुपयुक्त" पशुओं का वध ही प्रमाणित बूचड़खानों में संभव होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-shubhendu-government-ban-on-slaughter-of-animals/article-153769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/west-bengal-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के चार दिन बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को पूरे राज्य में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के 6 अगस्त, 2018 के फैसले और 8 जून, 2022 को जारी संबंधित सरकारी दिशानिर्देश के अनुसार जारी की गई है।</p>
<p>यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब आरोप लगे थे कि एक विशेष समुदाय सड़क पर पशुओं का वध कर रहा था, जिससे आस-पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को असुविधा हो रही थी। आठ सूत्रीय निर्देश में, राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के सभी वैध बूचड़खानों को पशु वध संबंधी कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बैल, बछड़े, गाय, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया भैंस सहित किसी भी पशु का वध करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि पशु को वध के लिए उपयुक्त घोषित करने वाला प्रमाण पत्र प्राप्त न हो जाए।</p>
<p>अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्र नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष द्वारा सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से जारी किए जा सकते हैं। प्रमाण पत्र तब जारी किया जा सकता है जब अधिकारी लिखित रूप से संतुष्ट हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है और प्रजनन या काम के लिए उपयुक्त नहीं है, या आयु, चोट, विकृति या बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि यदि ऐसे प्रमाण पत्र के लिए आवेदन अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो प्रभावित व्यक्ति अस्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पशुओं के लिए वध प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनका वध केवल नगर निगम के वधशालाओं या स्थानीय प्रशासन द्वारा नामित वधशालाओं में ही किया जा सकता है। ऐसे पशुओं का खुले सार्वजनिक स्थानों पर वध करना सख्त वर्जित है।</p>
<p>अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नगर निगम अध्यक्षों, पंचायत समिति अध्यक्षों, सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारियों या उनके द्वारा कानून के प्रवर्तन के लिए अधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम के तहत किए गए निरीक्षणों में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 1950 के अधिनियम के तहत सभी अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना जाएगा। अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि इस मामले से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णय सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 13:23:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार का प्रौद्योगिकी आधारित श्रम सुधारों को लागू करने पर जोर, सुचारू कार्यान्वयन के लिए राज्य और उद्योग जगत की भूमिका : श्रम सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने नए श्रम संहिताओं के तहत 29 कानूनों को 4 संहिताओं में समेकित करने की घोषणा की है। इस डिजिटल सुधार से 1,228 धाराओं को घटाकर मात्र 480 कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना, अनुपालन बोझ कम करना और श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-governments-emphasis-on-implementing-technology-based-labor-reforms-role-of/article-153704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vandana.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी ने बुधवार को कहा कि सरकार अनुपालन के बोझ को कम करने, श्रमिक कल्याण में सुधार लाने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उद्देश्य से नए श्रम संहिताओं के सुचारू और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए सरकार राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रही है। वह "नए श्रम संहिता: कार्यान्वयन, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए अनुपालन और उद्योग की तैयारी" के विषय में राजधानी में उद्योग मंडल संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं ।</p>
<p>संगोष्ठी में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, मानव संसाधन पेशेवरों, कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए गुरनानी ने कहा कि केंद्र ने श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में सामंजस्य स्थापित करने के लिए राज्यों के साथ व्यापक परामर्श किया है, साथ ही नियमों और अनुपालन ढाँचों को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है है। उन्होंने कहा, "श्रम संहिताओं की सफलता सरकार, उद्योग और श्रमिकों के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करेगी।"</p>
<p>श्रम सचिव ने बताया कि इन सुधारों के तहत 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है, 1,228 धाराओं को घटाकर 480 धाराएं कर दिया गया है और 1,436 नियमों को सुव्यवस्थित करके 357 नियम बना दिए गए हैं, जिससे भारत की श्रम अनुपालन प्रणाली में काफी सरलता आई है। सरकार के डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्रम सचिव ने कहा कि श्रम संहिता के तहत भविष्य में होने वाले निरीक्षण जोखिम-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और हस्तक्षेपकारी प्रवर्तन के बजाय सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित होंगे। उन्होंने कहा, "उद्देश्य अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना है।"</p>
<p>केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश कृष्णमूर्ति ने कार्यक्रम में कहा, "ईपीएफओ नए श्रम संहिता के अनुरूप डिजिटल सेवा वितरण का तेजी से विस्तार कर रहा है।" उन्होंने बताया कि ईपीएफओ नियोक्ताओं और श्रमिकों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के लिए एपीआई-आधारित रिटर्न फाइलिंग सिस्टम, स्वचालित खाता हस्तांतरण और सरलीकृत निकासी तंत्र शुरू कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:13:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली के स्कूलों में तेज गर्मी को लेकर मानवीय पहल : अब बच्चों को पीने की पानी की याद दिलाने के लिए बजेगी घंटी, हर 45-60 मिनट बाद मिलेगा हाइड्रेशन ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी को देखते हुए दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों में प्रार्थना सभा और आउटडोर गतिविधियों पर रोक रहेगी। बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के लिए हर घंटे "वॉटर बेल" बजेगी। सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का पालन कर 2 मई 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/humanitarian-initiative-regarding-extreme-heat-in-delhi-schools-now-bell/article-151805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/delhi-school.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजधानी में तेज़ होती गर्मी और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके तहत स्कूलों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।</p>
<p>नए आदेश के अनुसार, खुले मैदान में होने वाली प्रार्थना सभाओं और कक्षाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि सभा आयोजित करना जरूरी हो, तो उसे कम समय के लिए और छायादार या भवन के भीतर ही किया जाएगा। विद्यार्थियों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए “पानी की घंटी” व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत हर 45 से 60 मिनट में घंटी बजाकर बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाएगी। साथ ही स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।</p>
<p>भीषण गर्मी को देखते हुए सभी आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियां फिलहाल बंद रहेंगी। बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। स्कूलों में हीटवेव और हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होंगे। जरूरत पड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। हर स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा और 2 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ऑडिट समितियों की बैठकें समय पर हों, वित्त विभाग के सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने सभी विभागों को प्रतिवर्ष चार त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। गबन और वित्तीय अनियमितताओं के त्वरित निस्तारण हेतु यह कदम उठाया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन नियमों की पालना अनिवार्य होगी, ताकि CAG रिपोर्ट में किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी से बचा जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/finance-department-gives-strict-instructions-to-conduct-audit-committee-meetings/article-151502"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वित्त विभाग ने सभी विभागों को ऑडिट समिति की बैठकें निर्धारित समयावधि में आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। अंकेक्षण अनुभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विभागों एवं उनके अधीन बोर्ड और निगमों से जुड़े लंबित अंकेक्षण प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए नियमित बैठकें अनिवार्य हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन, अंकेक्षण आपत्तियां, सीएजी रिपोर्ट के अनुच्छेद, जनलेखा समिति की सिफारिशें, गबन एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की समीक्षा समय पर होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासनिक सचिव की अध्यक्षता में गठित ऑडिट समितियों की वर्ष में चार बैठकें त्रैमासिक रूप से आयोजित करना जरूरी है। निर्देशों के अनुसार पहली बैठक जून तक, दूसरी सितंबर तक, तीसरी दिसंबर तक और चौथी मार्च तक आयोजित करना अनिवार्य रहेगा। विभाग ने यह भी कहा कि निर्धारित संख्या में बैठकें नहीं होने पर इसका उल्लेख सीएजी रिपोर्ट में किया जाता है, जिसे गंभीरता से लिया जाता है। प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया ने सभी विभागों से वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन निर्देशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने को कहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:51:00 +0530</pubDate>
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                <title>महापौर लिख रहे यूओ नोट, 7 माह में भी तैयार नहीं बोर्ड बैठक की पालना रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पार्षदों का कहना है कि महापौर को कई बार कह चुके हैं बोर्ड बैठक बुलाने के लिए लेकिन किसी का ध्यान ही नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mayor-is-writing-uo-note--compliance-report-of-board-meeting-not-ready-even-in-7-month/article-58080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/mhapor-likh-rhe-uo-note,-saat-maah-me-bhi-tyyar-nhi-board-bethak-palna-report...kota-news-26-09-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के बाद कोटा दक्षिण निगम में भी बोर्ड बैठक बुलाने की मांग तो उठने लगी है लेकिन हालत यह है कि पिछली बोर्ड बैठक की पालना रिपोर्ट तक तैयार नहीं हुई है। सात माह से पालना रिपोर्ट के इंतजार में बैठक तक नहीं हो पा रही है। जबकि पालना रिपोर्ट के लिए महापौर कई बार यू ओ नोट लिख चुके हैं।  नगर पालिका अधिनियम 2009 के तहत हर 60 दिन में साधारण सभा(बोर्ड) की बैठक किया जाना आवश्यक है। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण दोनों ही निगमों में पिछले तीन साल से साल में एक बार ही बोर्ड बैठक हो रही है। नगर निगम कोटा उत्तर  व दक्षिण में इस साल फरवरी के पहले सप्ताह में बजट की बोर्ड बैठक हुई थी। उसके बाद से अभी तक सात माह से अधिक का समय हो गया है। लेकिन अभी तक कोटा दक्षिण निगम में दोबारा से बोर्ड बैठक नहीं हुई है। जबकि सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष के पार्षद भी कई बार महापौर व आयुक्त से मिलकर बोर्ड बैठक बुलाने की माग कर चुके हैं। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर की हुई बैठक</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की गत बोर्ड बैठक 8 फरवरी को हुई थी। जिसमें वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट पारित किया गया  था। उसके 7 माह बाद 22 सितम्बर को बोर्ड बैठक हुई। कोटा उत्तर निगम के नेता प्रतिपक्ष लव शर्मा का कहना है कि यह बैठक भी मजबूरी में बुलाई गई है। यदि मेले का बजट नहीं बढ़ाना होता तो बैठक बुलाते ही नहीं। जबकि वे काफी समय से महापौर व आयुक्त से मिलकर बोर्ड बैठक बुलाने की मांग कर चुके थे। </p>
<p><strong>विकास कार्य समेत कई मुद्दे हैं चर्चा के लिए</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के भाजपा व कांग्रेस पाषदों का कहना है कि वार्डों में विकास कार्य से लेकर साफ सफाई, रोड लाइटों समेत कई ऐसे विषय हैं जिन पर अधिकारियों से चर्चा की जानी है। वैसे तो अधिकारी टालते रहते हैं। बोर्ड बैठक में सभी के सामने अधिकारियों को जवाब देना होता है। ऐसे में अधिकारी जान बूझकर बोर्ड बैठक नहीं बुलाते जिससे उन्हें जवाब नहीं देना पड़े। पार्षदों का कहना है कि महापौर को कई बार कह चुके हैं बोर्ड बैठक बुलाने के लिए लेकिन किसी का ध्यान ही नहीं है। </p>
<p><strong>बिना पालना रिपोर्ट नहीं होगी बैठक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि 7 माह से अधिक का समय हो गया है बोर्ड बैठक हुए। जबकि नियमानुसार हर दो माह में बोर्ड बैठक होनी चाहिए। जनता से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सदन में चर्चा होनी है। लेकिन अधिकारियों ने अभी तक पिछली बोर्ड बैठक की पालना रिपोर्ट ही नहीं भेजी है। बिना पालना रिपोर्ट के बोर्ड बैठक नहीं होगी। उन्होंने बताया कि पालना रिपोर्ट के बिना कैसे पता चलेगा कि पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की पालना हुई या नहीं। यदि अधिकारियों ने बिना पालना रिपोर्ट के बैठक बुलाई तो विपक्ष उसका बहिष्कार करेगा। नियमानुसार पालना रिपोर्ट के बाद बैठक का ऐजेंडा जारी होगा। बैठक से 7 दिन पहले इसकी सूचना सभी पार्षदों को भेजी जाती है। विशेष परिस्थिति में 3 दिन में भी बैठक बुलाई जा सकती है। यदि अभी बैठक नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने पर बैठक होना संभव नहीं है। फिर अगले साल पर जा पड़ेगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नियमानुसार तो बोर्ड बैठक हर 60 दिन में होनी चाहिए। जबकि पिछली बोर्ड बैठक को 7 माह से अधिक हो गया है। अभी तक तो पिछली बोर्ड बैठक की पालना रिपोर्ट ही नहीं मिली है। इस संबंध में आयुक्त को पूर्व में भी यू ओ नोट लिखा था। हाल ही में बैठक की पत्रावली आई थी। जिसमें नाोटिंग की है कि पहले पालना रिपोर्ट भिजवाओ। हालत यह है कि बोर्ड बैठक के तीन माह बाद तो प्रोसीडिंग तैयार हुई है। बिना पालना रिपोर्ट के बैठक करने का कोई मतलब ही नहीं है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 16:12:52 +0530</pubDate>
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