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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
                                    <description><![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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                <title>वाहनों की जगह जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक,शहर में अधिकतर स्पीड ब्रेकर क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instead-of-braking-vehicles--they-could-put-a-stop-to-lives--most-speed-breakers-in-the-city-are-damaged/article-149082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मौहल्लों तक में वाहनों की तेज गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर ब्रेकर या तो क्षतिग्रस्त हो रहे हैं या बिना मानकों के बने हुए हैं। जिनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ये ब्रेकर वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने की जगह व्यक्ति की जिंदगी पर ब्रेक लगा सकते हैं। वाहन चालक निर्धारित गति से वाहन चलाएं और मोड व स्कूल-कॉलेज के पास वाहनों की गति को नियंत्रित कर सकें। इसके लिए यातायात नियमों के तहत मुख्य मार्गों समेत कई जगह पर नगर निगम, कोटा विकास प्राधिकरण व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। नियमानुसार तो ये स्पीड ब्रेकर निर्धारित मानकों के अनुसार ही बनाए जाने चाहिए। जिसमें उनकी ऊंचाई लम्बाई व चौड़ाई सभी निर्धारित है। साथ ही हर स्पीड ब्रेकर पर सफे द पट्टी भी होनी चाहिए। जिससे दूर से ही वाहन चालकों को स्पीड ब्रेकर का पता चल सके और वे अपने वाहनों की गति को धीमा कर सके। लेकिन हालत यह है कि शहर में अधिकतर ब्रेकर बिना मानक के और लोगों की मनमर्जी से बने हुए हैं।</p>
<p><strong>अधिकतर ब्रेकर बीच से टूटे हुए</strong><br />शहर में मुख्य मार्गो पर जहां बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। वहीं छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों तक में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। कई लोगों ने तो अपने घर के सामने, किसी ने अपनी दुकान के सामने, किसी ने शोरूम के सामने तो किसी ने बिना किसी कारण के स्पीड ब्रेकर बनाए हुए हैं। रबड़ वाले व डामर- गिट्टी के बने इन स्पीड ब्रेकर में अधिकतर बीच से टूटे हुए हैं। कई उबड़-खाबड़ हो रहे हैं। कई स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी भी नहीं हो रही है। जिससे उन स्पीड ब्रेकर से गुजरने वाले वाहनों विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन चालकों के लिए ऐसे स्पीड ब्रेकर खतरा बने हुए हैं।<br /> <br /><strong>कुछ को तोड़ा तो कुछ हुए खराब</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम व केडीए की ओर से यातायात पुलिस की सलाह पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं वे तो नियमानुसार बने हैं। लेकिन कई स्पीड ब्रेकर लोगों ने अपनी मर्जी से या बिना किसी की जानकारी के बनाए हैं वे गलत तरीके से बने हुए हैं। उनमें से कुछ को तो लोगों ने ही तोड़ दिया है। वहीं डामर के स्पीड ब्रेकर बरसात व भारी वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।</p>
<p><strong>शहर में हर जगह ऐसी स्थिति</strong><br />शहर में कोई भी जगह ऐसी नहीं हैं जहां स्पीड ब्रेकर पूरी तरह से सही हों। विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय रोड, छावनी, स्माल स्केल इंडस्ट्रीयल एरिया, नयापुरा, बसंत विहार, बजरंग नगर,महावीर नगर, रंगबाड़ी रोड व दादाबाड़ी और वल्लभ नगर समेत सभी जगह पर ऐसी स्थिति हैं जहां जितने स्पीड ब्रेकर हैं उनमें से ज्यादातर टूटे हुए ही हैं। जिन पर आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>जहां जरूरत हो वहीं बने ब्रेकर</strong><br />लोगों का कहना है कि स्पीड ब्रेकर की जहां जरूरत हो वहीं बनने चाहिए। साथ ही यातायात नियमों व मानकों के अनुसार ही बनाए जाएं।बजरंग नगर निवासी संजय साहू का कहना है कि जगह-जगह छोटी गलियों में बिना मानक के रबड़ वाले व डामर के छोटे ब्रेकर बनाना गलत है। उनसे वाहन तो रूकते नहीं हैं लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। साथ ही इन ब्रेकर पर वाहन उछलने ने लोगों को कमर दर्द समेत कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।भीमगंजमंडी निवासी महेश लोधा का कहना है कि बिना मानक के बने व क्षतिग्रस्त ब्रेकर अधिक नुकसान दायक हैं। इनसे दुर्घटना का खतरा होने के साथ ही वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों को पूरे मानक के अनुसार ही ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। गलत तरीके से ब्रेकर बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में स्पीड ब्रेकर तो वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। जहां भी ब्रेकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका सर्वे कराया गया है। पूरे मानक के अनुसार और जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशानुसार ब्रेकर की मरम्मत व रखरखाव का कार्य कराया जा रहा है।<br />-<strong>मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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                <title>टेक्नोलॉजी के जरिए सड़कें होंगी अधिक सुरक्षित : आमजन को मिलेगा सहज सफर, बैरवा ने तकनीक आधारित निगरानी तंत्र को सख्त करने के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्टी सीएम व परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई। ई-डिटेक्शन, वाहन ट्रैकिंग और ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। नियम उल्लंघन पर स्वत: चालान, सार्वजनिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्यता और परमिट सेवाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण पर जोर दिया। ओवरलोडिंग पर समन्वित कार्रवाई और डेटा आधारित योजनाओं को लागू करने के निर्देश भी दिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roads-will-become-safer-through-technology-common-people-will-get/article-148912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिप्टी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सीएम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉ</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रेम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चंद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मजबूत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तकनीक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधारित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निगरानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तंत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सख्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नियमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उल्लंघन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्रवाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिटेक्शन</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रैकिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आॅनलाइन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जरिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमजन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जवाबदेह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यवस्था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपलब्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करवाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गुरुवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शासन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सचिवालय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समीक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैठक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिटेक्शन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रणाली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नियमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उल्लंघन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्वत</span>: <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चालान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रक्रिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मजबूत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सार्वजनिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहनों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लोकेशन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रैकिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिवाइस</span> (<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वीएलटीडी</span>) <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यापक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्रियान्वयन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जोर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यात्रियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुनिश्चित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होगी।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परमिट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संबंधित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सभी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पूर्णत</span>: ऑ<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नलाइन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रक्रियाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमजन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बिना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाधा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाएं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपलब्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कराने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पोर्टलों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एकीकरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ओवरलोडिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जैसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मामलों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समन्वित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्रवाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्षेत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नवाचारों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ावा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देने</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डेटा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधारित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्ययोजनाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लागू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 11:01:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांसी में एक पखवाड़े से सफाई व्यवस्था ठप : बिगड़े हालात, नालियां जाम, सड़कों पर फैल रही गंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[बूंदी-देई मार्ग सहित मुख्य सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/sanitation-system-paralyzed-in-bansi-for-a-fortnight--conditions-deteriorate--drains-clogged--filth-spreading-on-roads/article-147205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)42.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र के बांसी कस्बे में पिछले पखवाड़े से सफाई व्यवस्था बाधित होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नालियों के अवरुद्ध होने और कचरा संग्रहण बंद रहने से सड़कों पर गंदगी फैल गई है। जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भण्डेड़ा क्षेत्र के बांसी कस्बे में करीब पंद्रह दिनों से घर-घर कचरा संग्रहण की गाड़ी बंद पड़ी है। जिससे कस्बे में कचरे के ढेर लग गए हैं। पूर्व में नियमित कचरा संग्रहण से पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था संतोषजनक बनी हुई थी। लेकिन वर्तमान में स्थिति बिगड़ गई है। कचरा गाड़ी बंद होने के कारण बाजारों और मोहल्लों का कचरा नालियों में जमा हो रहा है, जिससे नालियां अवरुद्ध हो गई हैं। नालियों के जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>प्रमुख चौराहों और तिराहों पर हालात और गंभीर </strong><br />कस्बे के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर स्थिति और अधिक गंभीर है। बूंदी-देई मार्ग सहित मुख्य सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। तेज गति से गुजरते वाहनों के कारण गंदे पानी के छींटे आसपास के मकानों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों का घरों के बाहर बैठना तक मुश्किल हो गया है। सड़कों पर फैले कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल भी हो रहे हैं। बैंक चौराहे पर लगातार पानी भरे रहने से सड़क पर गड्ढा बन गया है, जिससे दिनभर आवागमन में बाधा बनी रहती है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने जताई नाराजगी</strong><br />इस समस्या से नाराज एक दर्जन से अधिक ग्रामीण महिलाएं कीचड़ से भरी सड़क के पास एकत्रित होकर संबंधित विभाग के खिलाफ आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने बताया कि कचरा गाड़ी बंद होने से लोग कस्बे से बाहर कचरा डालने को मजबूर हैं। जहां पशु उसे खा रहे हैं। वहीं कचरे के ढेर में आग लगाने से उठता धुआं आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है। ग्रामीण कन्हैयालाल रेगर, दुगार्लाल रैगर, प्रकाश, रामगणेश, राजेंद्र, तेजमल, गुलाबचंद, गिरिराज सहित फूतरी बाई, कैलाश बाई, जानकी बाई, अनिता और मोहनी बाई ने भी आक्रोश जताया।<br />बांसी की समस्या को लेकर संवेदक को पाबंद किया जाएगा। जहां पर दुरस्ती करण का कार्य होना है, वहां पर जल्द ही दुरस्ती करण करवा दिया जाएगा। <br /><strong>-बाबूलाल कारपेंटर, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत बांसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : नगर परिषद ने आम रास्ते पर चलाया पीला पंजा, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद पर्वतीपुरम कॉलोनी में नगर परिषद ने की त्वरित कार्रवाई ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/results-of-the-report--the-municipal-council-has-launched-a-yellow-flag-on-the-public-road/article-144682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। पर्वतीपुरम कॉलोनी देवपुरा बूंदी में आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद नगर परिषद ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मार्ग को बहाल करा दिया है। दैनिक नवज्योति के 24 फरवरी अंक में जनसमस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने पर नगर परिषद बूंदी आयुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा ने तुरंत संज्ञान लिया। आयुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा के निर्देश पर नगर परिषद का अतिक्रमण दस्ता मौके पर पहुंचा और आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर मार्ग को पुन: चालू कराया।</p>
<p>स्थानीय निवासियों ने बताया कि अतिक्रमण के कारण कॉलोनीवासियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। संकरे मार्ग के कारण दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही थी। कई बार राहगीरों को वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता था। नगर परिषद की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में संतोष का माहौल है। मोहल्लेवासियों ने त्वरित कार्रवाई के लिए नगर परिषद प्रशासन का आभार व्यक्त किया। साथ ही समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित करने पर दैनिक नवज्योति का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी आम रास्तों पर अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन इसी प्रकार तत्परता से कार्रवाई करेगा, जिससे नागरिकों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोहरे के बीच भी रात को हो रही मेन रोड की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण  दुर्घटना हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-being-cleaned-at-night-even-amidst-the-fog/article-138579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से दिन के समय ही नहीं रात में भी मेन रोड की सफाई काफी समय से करवाई जा रही है। हालत यह है कि इन दिनों रात के समय पड़ रहे घने कोहरे के बीच भी सफाई जारी है।शहर में सुबह-शाम निकल रहे कचरे को देखते हुए निगम की ओर से दोनों समय पर वार्डों में ही नहीं मेन रोड पर भी सफाई करवाई जा रही है। सुबह बाजार खुलने पर दुकानदारों को सफाई नजर आए। इसे देखते हुए रात के समय ही मेन रोड की सफाई करवाई जा रही है। फिर चाहे डीसीएम रोड हो या सीएडी रोड। स्टेशन रोड या नयापुरा का क्षेत्र। पिछले काफी समय से यह कार्य किया जा रहा है।वही सिलसिला अभी भी बना हुआ है। </p>
<p>शहर में रविवार व सोमवार को सुबह के समय ही नहीं रात के समय भी घना कोहरा छाया हुआ था। उस कोहरे में बिजिबिलिटी इतनी कम थी कि पास के वाहन व रोड लाइटें तक नजर नहीं आ रही थी। उस कोहरे के बीच भी निगम के सफाई कर्मचारी महिलाएं और पुरुष दोनों मेन रोड पर झाडू लगाने से लेकर एकत्र कचरे को ट्रॉली में भरने में जुटे हुए थे।रात के समय मेन रोड से गुजरने वाले वाहन चालक सफाई कर्मचारियों के इस जज्बे को देखकर आश्चर्य करने लगे। लोगों का कहना था कि इतना घना कोहरा है कि उसमें न तो सफाई कर्मचाी नजर आ रहे थे और न ही ट्रेक्टर ट्रॉली। बिल्कुल नजदीक आने पर ही पता चल रहा था कि यहां कोई है। सफाई कर्मचारियों की रेडियम वाली यूनिफार्म तक दूर से नजर नहीं आ रही थी। पास आने पर भी उसकी चमक नहीं दिख रही थी। लोगों का कहना है कि ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण सफाई कर्मचारियों की दुर्घटना हो सकती है। या फिर कोई वाहन ट्रेक्टर ट्रॉली से टकराकर घायल हो सकता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से रात के समय सफाई करवाना अच्छा है। लेकिन कोहरे की अधिकता व मानवीय पहलू को देखते हुए कोहरा अधिक होने पर कर्मचारियों को राहत दी जानी चाहिए।</p>
<p>इधर नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा का कहना है कि शाम को दुकानें बंद होने के बाद रात को सड़कों पर कचरा अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय सफाई करवाई जा रही है। जिससे सुबह सड़कें साफ दिखे। कोहरा तो अभी कुछ समय का है। रात से अधिक दिन के समय हादसों का खतरा अधिक रहता है। साथ ही रात में एक बार सफाई बंद करवाने पर फिर से उसे शुरू करने में परेशानी हो सकती है। फिर भी कोहरा लगातार या अधिक समय तक रहा तो उसके हिसाब से निर्णय किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:33:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुकुंदरा विहार में पौधे से ट्री गार्ड गायब व दुर्दशा के शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलोनी में बनी सड़क भी दुर्दशा का शिकार होने से वहां पर धूल उड़ती रहती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plants-in-mukundra-vihar-are-missing-tree-guards-and-are-in-a-state-of-neglect/article-137746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की मुकुंदरा विहार कॉलोनी में केडीए द्वारा पिछले दिनों कॉलोनी में रोड के दोनों तरफ लगाएं पौधे अब दुर्दशा का शिकार हो रहे उनसे से कुछ तो कुछ सूख गए और आसामाजिक तत्वों द्वारा ट्री गार्ड चोरी कर लिए गए है साथ ही ट्री गार्ड का बैसमेंट सही से नहीं बनाने के कारण ट्री अस्त व्यस्त हो गए हैं। अब बाकी पौधों को भामाशाह अपने खर्च व निजी देखरेख से उनको अब उन्होने बड़ा करने का बीड़ा उठाया हैं।</p>
<p> वहीं कॉलोनीनिवासियों द्वारा घर के सामने वालों पौधों को पानी पिलाया जाता है और उनकी देखरेख की जाती हैं। कॉलोनी में रहने वाले अशोक कुमार ने बताया कि  केडीए द्वारा पिछले दिनों जब पौधे लगाएं गए जब जिम्मेदार लोग गए थे तब से अब तक किसी ने आकर नहीं झांक। जिसके चलते पौधे अब दुर्दशा के शिकार हो गए हैं। कॉलोनी में रहने वाले नरेंद व सुनील कुमार ने बताया कि सोमवार को काफी मशक्कतों के बाद केडीए द्वारा एक पानी का टैंकर पौधों को पानी पिलाने के लिए भेजा गया।वहीं कॉलोनी में बनी सड़क भी दुर्दशा का शिकार होने के कारण वहां पर धूल उड़ती रहती हैं। जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।</p>
<p><strong>ट्री गार्ड गायब व दुर्दशा के शिकार </strong><br />मुकुंदरा विहार कॉलोनी में लगे पौधे जिम्मेदारों द्वारा पौधों की देखरेख नहीं करने से उनमें से कुछ तो मुरझा गए हैं।कॉलोनी निवासी कमलेश कुमार व दिनेश ने बताया कि ट्री गार्ड गायब हो गए साथ ही ट्री को सही ढ़ग से नहीं लगाने के कारण<br />आसामाजिक तत्वों द्वारा उनको चुरा लिया गया। जिससे अब केवल वहां पर गड्डे बचे।</p>
<p><strong>सड़क में जगह -जगह गड्डे की भरमार </strong><br /> कॉलोनी में रहने वाले दिनेश कुमार व रमेश कुमार ने बताया कि बारिश के बाद सड़क में जगह -जगह गड्ढे हो रहे है। जिससे दिनभर धूल उड़ती है जिससे यहां पर रहना दूभर हो रहा हैं।</p>
<p>मामला मेरे संज्ञान में आया है। जांच करने के लिए एक्सईन को भेजूंगा, और पौधे सूख चुके है उनकी जगह पर दूसरे पौधे लगाएं जाएंगे।<br /><strong>-मुकेश चौधरी,केडीए सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 15:28:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बांसी-देई मार्ग पर सड़कें बदहाल, राहगीरों में चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[डामरीकृत सड़क के कई हिस्सों पर मिट्टी बह जाने से गहरे गड्ढे बन गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-roads-in-dilapidated-condition-on-the-bansi-dei-route--causing-concern-among-commuters/article-137744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी से देई मुख्य मार्ग की सड़कें बारिश के बाद गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे वाहन चालक और पैदल राहगीर दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। भैरव बाबा के पास नाले की दीवार सहित मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुकी है और डामरीकृत सड़क के कई हिस्सों पर मिट्टी बह जाने से गहरे गड्ढे बन गए हैं।</p>
<p>स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मार्ग से चौपहिया वाहन गुजरते समय सामने से आने वाले वाहनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती। रात्रि में अनजान राहगीर इन गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं। जोगी कॉलोनी से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बांसी तक भी यह मार्ग खतरे भरा है। स्थानीय नागरिक सत्यनारायण, सोजीलाल सैनी, हरपाल माली आदि ने कहा कि विभाग बड़ा हादसा होने तक इंतजार कर रहा है। बरसात के बाद लगभग दो माह बीत गए हैं, लेकिन संबंधित विभाग ने अभी तक सड़क की सुध नहीं ली है। इससे क्षेत्रीय लोगों में विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है और आमजन इस लापरवाही का प्रत्यक्ष रूप से सामना कर रहे हैं।राहगीरों का कहना है कि समय रहते उचित मरम्मत न होने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है और विभाग को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।</p>
<p>इधर विभागीय अधिकारी का कहना है कि जलदाय विभाग द्वारा पाइपलाइन निकल जाए, जल्द ही नाले की पुलिया का निमार्ण कार्य शुरू करेगें। रही बात देई मार्ग पर सड़क की, तो जहाँ-जहाँ पर डामर के पास मिट्टी के गड्ढे अधिक है। पुलिया का कार्य शुरू होते ही उन्हें भी भरवाया जाएगा।<br /><strong>-रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, देई-नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:45:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य मार्गों पर गंदगी,  बरसों बाद भी कचरा पाइंट मुक्त नहीं हो रहा शहर</title>
                                    <description><![CDATA[घर-घर कचरा संग्रहण, फिर भी सड़क पर डल रहा कचरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-are-littered-with-garbage--the-city-remains-far-from-becoming-garbage-point-free-even-after-years/article-136614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी से पर्यटन नगरी बनने जा रहे कोटा शहर में जहां नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। उसके बाद भी शहर के मुख्य मार्गों पर ही कचरे का ढेर लगा हुआ है। बरसों बाद भी शहर कचरा पॉइंट मुक्त नहीं बन पाया।एक तरफ तो कोटा शहर को सफाई के मामले में इंदौर की तर्ज पर बनाने का दावा व प्रयास किया जाता है। लेकिन वास्तव में उस दिशा में किए जाने वाले प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं। नगर निगम की ओर से पूरे शहर में टिपरों के माध्यम से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। वैसे तो सुबह-शाम दो पारियों में टिपरों के संचालन का प्रावधान है लेकिन फिलहाल शहर में सुबह के समय ही टिपर चल रहे हैं। सुबह 7 से 11 बजे के बीच हर वार्ड में दो से तीन टिपर डोर टू डोर जाकर कचरा एकत्र कर रहे हैं। उसके बाद भी शहर में मुख्य मार्गों पर तो कचरा डल ही रहा है। अधिकतर जगहों पर कचरा पॉइंट भी दिनभर कचरे से अटे रहते हैं।</p>
<p><strong>शहर को कचरा पॉइंट मुक्त बनाने की थी योजना</strong><br />नगर निगम अधिकारियों का दावा था कि जिस तरह से इंदौर में सड़क पर कचरा नजर नहीं आता है। उसी तरह से कोटा शहर की सड़कों को भी बनाया जाएगा। इंदौर में ट्रेचिंग ग्राउंड तक पर कचरा नहीं दिखता। वहां हरियाली व गार्डन होने से लोग घूमने के लिए जाते हैं। उसी तरह की योजना कोटा में भी लागू करनी थी। लेकिन अभी तक वह मूर्त रूप नहीं ले सकी है। पिछले कांग्रेस बोर्ड के समय में कोटा उत्तर व दक्षिण निगम में कई कचरा पॉइंट को समाप्त किया गया था। उत्तर निगम क्षेत्र में ही कुछ ही समय में करीब तीन दर्जन कचरा पॉइंट खत्म किए गए थे। उनकी जगह पर हरियाली विकसित की गई। लेकिन उसके बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। जयपुर गोल्डन पर तालाब किनारे का क्षेत्र हो या नयापुरा में बृज टॉकीज, चम्बल की छोटी पुलिया का रास्ता हो या अन्य स्थान। ऐसी कई जगह पर कचरा पॉइंट खत्म कर वहां छतरी व हरियाली विकसित की गई।</p>
<p><strong>जरा-जरा सी दूरी पर कचरा पॉइंट</strong><br />शहर में कोई भी वार्ड या मुख्य मार्ग ऐसा नहीं हैं। जहां कचरा पॉइंट नहीं हो। हालत यह है कि जरा-जरा सी दूरी पर ही कचरा पॉइंट बने हुए हैं। फिर चाहे वह बारां रोड अंटाघर चौराहे से एसपी कार्यालय व पुलिस लाइन तक का क्षेत्र हो या नयापुरा का। बूंदी रोड परत बडगांव का क्षेत्र हो या अन्य कोई क्षेत्र। अभी भी वहां वार्डों से आने वाला कचरा निगम के कर्मचारी ही डाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर क्षेत्र में ही करीब 200 से अधिक कचरा पॉइंट हैं।वहीं लोग सड़क पर कचरा नहीं डालें इसके लिए निगम की ओर से जगह-जगह पर कचरा पात्र भी रखवाए गए हैं। फिर चाहे छावनी में एलआईसी बिल्डिंग के पास हो या गुमानपुरा में मल्टीपरपज स्कूल के पास। इसके अलावा कई अन्य जगह पर कचरा पात्र रखे गए हैं। उसके बाद भी उन जगह पर सड़कों पर ही कचरे के ढेर लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>रात में भी हो रही मुख्य मार्गों की सफाई</strong><br />शहर साफ व सुंदर दिखे। इसके लिए अभी नगर निगम की ओर से मुख्य मार्गों पर रात के समय भी सफाई करवाई जा रही है। डीसीएम रोड, सीएडी रोड से लेकर स्टेशन तक के क्षेत्र में रात के समय सफाई कर्मचारी झाडू लगाने से लेकर कचरे को हाथ ट्रॉली व ट्रेक्टर ट्रॉली से तुरंत हटा भी रहे हैं। लेकिन सुबह होते ही फिर से सड़क पर कचरा ही कचरा हो रहा है। विशेष रूप से नई धानमंडी के पास हालत अधिक खराब है।</p>
<p><strong>मजबूरी में बने हैं कचरा पॉइंट</strong><br /> टिपरों से कचरा एकत्र करने का मकसद ही यह है कि सड़क पर कचरा नहीं डले। लेकिन कई लोग टिपरों के समय में कचरा नहीं डालकर बाद में सड़क पर डाल रहे हैं। जिससे सफाई के बाद भी सड़क व शहर साफ नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं अभी भी डेरा प्रथा शहर में बनी हुई है। जिससे वार्डों का कचरा कचरा पॉइंट पर डल रहा है। वहीं जिन वार्डों में टिपर नहीं जाते वहां का कचरा भी सड़क किनारे ही डल रहा है। कई कचरा पॉइंट तो मजबूरी में ही चल रहे हैं। प्रयास है कि इन्हें कम से कम किया जाए।<br /><strong> - मोतीलाल चौधरी,स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 15:30:09 +0530</pubDate>
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                <title>दिया तले अंधेरा, निगम की करोड़ों की जमीन बनी कचरा घर</title>
                                    <description><![CDATA[कचरा डालने वाले अब अंदर जाने की जगह मेन गेट पर ही कचरा डाल रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/darkness-under-the-lamp--the-corporation-s-multi-crore-land-becomes-a-garbage-dump/article-135996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिया तले ही अंधेरा...यह कहावत सुनी तो सभी ने है लेकिन इसकी हकीकत नजर आ रही है सीएडी रोड पर। जहां नगर निगम कार्यालय के नजदीक और निगम के ही करोड़ों रुपए का भूखंड व मेन रोड ही कचरा घर बना हुआ है। नगर निगम की ओर से एक तरफ तो पूरे शहर में साफ सफाई करवाई जा रही है। वार्डों के साथ ही मुख्य मार्गों को चमकाने का दावा किया जा रहा है। मेन रोड पर रात को भी सफाई की जा रही है। जिससे शहर में सफाई नजर भी आ रही है।</p>
<p>लेकिन हालत यह है कि नगर निगम कार्यालय से कुछ ही दूरी पर सीएडी रोड स्थित बकरा मंडी के पास निगम की भूमि पर ही कचरे का अम्बार लगा हुआ है। जिस तरह से वहां कचरा पड़ा हुआ है और रोजाना डल रहा है। उसे देखकर लगता है जैसे महीनों से वहां न तो सफाई हुई है और न ही वहां से कचरा उठ रहा है। भूखंड पर मेन गेट के पास से ही कचरा डाला जा रहा है जो अंदर तक डल रहा है। कचरा डालने वाले अब अंदर जाने की जगह मेन गेट पर ही कचरा डाल रहे हैं। जिससे वह बाहर तक बिखर रहा है। उस कचरे पर मवेशियों का जमघट लगा होने से वह फेल रहा है। साथ ही उस कचरे की दुर्गंध के बीच से ही लोगों को निकलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>मेन रोड पर कचरे का अम्बार</strong><br />निगम के भूखंड पर ही नहीं, बकरा मंडी के भूखंड की चार दीवारी के सहारे मेन रोड पर ही कचरे का अम्बार लगा हुआ है। वह भी काफी बड़े हिस्से में। जिससे वहां से गुजरने वाले  और वहां रहने वाले लोगों को दुर्गंध का सामना करने के साथ ही बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। यहां जिस जगह पर कचरा डाला जा रहा है वहां चाय की थड़ी व अन्य दुकानें भी है। जहां दिनभर लोग बैठे रहते हैं। उसके बाद भी यहां काफी समय से सफाई नहीं हुई है।</p>
<p><strong>सफाई का सिर्फ दावा</strong><br />लोगों का कहना है कि नगर निगम पूरे शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने का दावा कर रहा है। निगम में सैकड़ों की संख्या में स्थायी व अस्थायी सफाई कर्मचारी दो पारियों में सफाई कर रहे हैं। उसके बाद भी हालत काफी खराब है। यह तो एक जगह है। शहर में ऐसी अनेकों जगह हैं जहां मेन रोड पर ही कचरा डाला जा रहा है। हालांकि यह कचरा स्थानीय लोग ही डाल रहे हैं। लेकिन कचरा डलने के बाद न तो सफाई हो रही है और न ही नियमित कचरा उठ रहा है। इसे देखकर ऐसा लग रहा है जब निगम कार्यालय के पास ही यह हालत है तो इससे अन्य जगहों का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p><strong>वार्ड के स्तर पर होती है सफाई</strong><br />नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम ने बताया कि शहर में सभी जगह पर मेन रोड व वार्डों में सफाई हो रही है। सीएडी रोड पर बकरा मंडी के पास की जो जगह है वहां भी वार्ड के स्तर पर ही सफाई हो रही होगी। फिर भी उसे दिखवाया जाएगा। यदि गंदगी हो रही होगी तो उसे साफ करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 15:42:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 8 - वार्ड के कुछ क्षेत्र में सीसी रोड व नालियों का निर्माण, अभी कई कार्य करवाने बाकी</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड के अंतिम छोर  पर बसे गांवों में कचरा गाड़ी नहीं आती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-8---construction-of-concrete-roads-and-drains-in-some-areas-of-the-ward--but-much-work-remains-to-be-done/article-135267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम दक्षिण के वार्ड 8 में विकास कार्यों को देखा जाए तो इसमें सीसी रोड व नालियों का निर्माण सहित अन्य कार्य किए गए हैं। इस वार्ड का प्रतिनिधित्व उपमहापौर पवन कुमार मीणा करते हैं। विनोबाभावे नगर निवासी गोविंद कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में सीसी रोड व नालियों का निर्माण हुआ है और कचरा गाड़ी नियमित रूप से आती है। धनराज गुर्जर व दिनेश भील ने बताया कि वे बंधा गांव में रहते हैं। यहां केवल सीसी रोड का निर्माण हुआ है। गांव के कुछ हिस्सों में नालियां बनी हैं, जबकि कुछ में अब भी निर्माण बाकी है। बनी हुई नालियों की सफाई नहीं होने से वे कचरे से अटी पड़ी रहती हैं। वहीं गांव में पानी की लाइन डाली हुई है, पर पानी प्रेशर से नहीं आने के कारण निवासियों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही रोड लाइटें भी कुछ जगह जलती हैं, कुछ बंद रहती हैं।</p>
<p>वार्ड में सड़कों का डामरीकरण, रोड लाइट, नालियों का निर्माण सहित विभिन्न निर्माण करवाए गए, पर अभी कई कार्य करवाने बाकी हैं। वार्डवासी विशाल व कारूलाल ने बताया कि उन्हें स्मार्ट सिटी में जोड़ा गया है, लेकिन उनकी तरफ स्मार्ट सिटी स्तर का विकास अभी तक नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>कुछ हिस्सों में साफ-सफाई का अभाव</strong><br />वार्ड की कुछ कॉलोनियों में प्रतिदिन कचरा गाड़ी आती है व सफाई होती है, पर वार्ड के अंतिम छोर या शहर के अंतिम छोर पर बसे गांवों में न तो कचरा गाड़ी आती है और न ही नालियों की साफ-सफाई होती है। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिनसे बदबू आती है और बीमारियां फैलने की आशंका रहती है।</p>
<p><strong>कुछ रोड लाइटें चालू, कुछ बंद</strong><br />वार्डवासी सुनील कुमार व अजय कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में लगी रोड लाइटें चालू हैं। वहीं बंधा व धर्मपुरा के निवासियों ने बताया कि पोल पर लगी कुछ लाइटें चालू तो हैं, पर उनमें पर्याप्त रोशनी नहीं है। कई लाइटें बंद रहती हैं, जिससे रात में परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया </strong><br />विनोबाभावे नगर (आंशिक), धर्मपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां, हाड़ौती कॉलोनी, डिफेंस कॉलोनी, ग्राम धर्मपुरा, ग्राम बंधा, ग्राम रथकांकरा, नंदनी नगर, मुकंदरा विहार, गणेश नगर, गणेश उद्यान क्षेत्र, बसंल स्कूल, आरोग्य नगर इत्यादि।</p>
<p>हाड़ौती कॉलोनी में अभी तक पानी की लाइन नहीं डाली गई है, जिसकी वजह से निजी ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ता है। डे्रनेज सिस्टम ठीक नहीं होने से गंदा पानी नालियों में जमा रहता है। गर्मी के दिनों में गांव जाकर रहना पड़ता है।<br /><strong>-धनराज,वार्डवासी</strong></p>
<p>आधी कॉलोनी में सड़क निर्माण हुआ है और आधी कॉलोनी अब भी अधूरी है। साथ ही हाड़ौती कॉलोनी में पानी की समस्या और नालियों में जमा गंदगी से लोग परेशान रहते हैं।<br /><strong>-लोकेश नागर, वार्डवासी</strong></p>
<p>रोड लाइटें कुछ बंद रहती हैं, कुछ जलती हैं। साथ ही पाइपलाइन में पानी का प्रेशर कम आता है, जिससे पानी की दिक्कत बनी रहती है।<br /><strong>-अन्ना वार्डवासी</strong></p>
<p>बंधा गांव में नलों में पानी प्रेशर से नहीं आता है, जिससे परेशानी बढ़ जाती है। नालियों की सफाई नहीं होने से बीमारियों का अंदेशा बना रहता है।<br /><strong>-दिनेश कुमार वार्डवासी</strong></p>
<p>पानी की लाइन डाली हुई है, पर कुछ लोग लाइन से पानी की चोरी करते हैं। वहीं वार्ड का एरिया काफी दूर-दूर तक फैला होने से भी दिक्कतें आती हैं। हाड़ौती कॉलोनी में रोड की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- पवन कुमार मीणा,निवर्तमान उपमहापौर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 14:32:28 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रामीण संपर्क सड़कें वर्षों से मरम्मत के अभाव में जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[उखड़ रहा डामर, पगडंडी में बदल गए  रास्ते,  ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/rural-connectivity-roads-are-dilapidated-due-to-years-of-lack-of-repair/article-135169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। ग्रामीण क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक संपर्क सड़कें पिछले लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुकी हैं। कई मार्गों पर डामर पूरी तरह उखड़ गया है, वहीं कुछ सड़कों पर जंगल कटिंग नहीं होने से रास्ता पगडंडी में बदल गया है। हालात इतने खराब हैं कि वाहन चालक जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि राज्य सरकार जहां हाईवे व प्रमुख राजमार्गों की घोषणाओं में व्यस्त है, वहीं गाँवों की सड़कों की सुध नहीं ली जा रही। गड्ढों में तब्दील मार्गों पर रोजाना बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। कई गंभीर रूप से घायल लोग लंबे समय से इलाज करा रहे हैं। चौपहिया वाहन भी गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। खराब सड़कों के कारण मिनटों का सफर घंटों में पूरा हो रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच, प्रधान, प्रमुख, विधायक, सांसद सहित प्रशासन के अनेक अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायतें देने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला, कार्य शुरू नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>ये लिंक रोड हैं बदहाल</strong><br />क्षेत्र में लबान-गुहाटा लिंक रोड, बगली लिंक रोड, बहड़ावली लिंक रोड, खाकता रोड, कोटड़ी लिंक रोड, मालिकपुरा लिंक रोड, नोटाडा लिंक रोड और ढगारिया लिंक रोड पर डामर उखड़ने से हालत बेहद खराब है। वहीं चहिचा लिंक रोड पर जंगल कटिंग नहीं होने से मार्ग पगडंडी की स्थिति में पहुंच गया है।</p>
<p>क्षेत्र में संपर्क सड़कों की मरम्मत और नवीनकरण के प्रस्ताव मुख्यालय भेजे गए हैं। कुछ मार्गों की स्वीकृति मिल गई है, जिन पर जल्द ही टेंडर जारी कर कार्य शुरू किया जाएगा। शेष सड़कों के लिए भी बजट स्वीकृति के प्रयास जारी हैं।<br /><strong>- हिमांशु दाधीच, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, लाखेरी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 15:04:32 +0530</pubDate>
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