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                <title>roads - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बरसात से पहले ही सड़कों का हुआ बुरा हाल, पानी भरने पर रहेगा हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं गड्ढे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, वहीं सीवरेज कार्य के बाद कई सड़कों की मरम्मत भी अधूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-in-poor-condition-even-before-the-monsoon/article-157558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक:</strong> जयपुर गोल्डन से ज्वाला तोप की तरफ जाने वाले रास्ते पर सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे तालाब के सहारे की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हो रहे हैं कि वहां से निकलने वाले वाहन हिचकोले खा रहे हैं। विशेष रूप से दो पहिया वाहनों का यहां संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे रोजाना कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>दृश्य दो:</strong> एरोड्राम सर्किल पर अंरडपास के ऊपर की सड़क जो झालावाड़ हाइवे रोड है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में और तेजी से वाहन निकल रहे हैं। वह सड़क बीच से बदहाल हो रही है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों के गड्ढ़ों से बचकर निकलने के कारण कई बार वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन:</strong> डीसीएम रोड स्थित इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एक सड़क का बीच से काफी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसे में वहां से दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों तक को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को इन गड्ढ़ों से बचकर निकलना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के बदहाली को बताने के लिए। ऐसी कई अन्य सड़कें व मुख्य मार्ग हैं जहां बरसात से पहले ही सड़कों की हालत खराब हो रही है। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी है। कहीं सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों को सही ढंग से नहीं भरा गया। जिससे सड़कें बीच से धंस गई है। ऐसे में अभी ही उनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरु होने वाली है। ऐसे में इन गड्ढों व टूटी सड़कों पर पानी भरने से उनका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं होने पर इनसे गुजरने वाले वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर हादसों का खतरा अधिक होने की संभावना है।</p>
<p><strong>हमेशा होती मरम्मत, फिर भी हालत खराब</strong><br />सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे वाली सड़क का छोटा सा हिस्सा पिछले कई सालों से बार-बार खराब हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इसे हर बार सही भी कराया जाता है। लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाता। कुछ समय बाद फिर से वही पुरानी हालत हो जाती है। गत वर्ष भी बरसात में यहां की सड़क खराब होने से इसमें पानी भरने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा था। लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे सही भी करवा दिया था। लेकिन वर्तमान में फिर वही पुरानी जैसी हालत हो गई है। शुक्रवार को भी इस जगह पर कई वाहनों का संतुलन बिगड़ा। जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों को गति धीमी करनी पड़ी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बरसात में यहां हादसों की संभावना अधिक है।</p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़कों की हालत अधिक खराब</strong><br />शहर में डामर सड़क हो या सीसी अधिकतर की हालत खराब है। लेकिन विशेष रूप से सीवरेज के लिए बीच से खोदी गई सीसी सड़कों की हालत अधिक खराब है। हर सड़क बीच से खुदी हुई है। लाइन डालने के बाद उनकी मरम्मत तो की गई लेकिन सही ढ़ंग से नहीं होने से अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जिससे बरसात में पानी भरने पर वहां गड्ढ़े होने से हादसों का खतरा अधिक है। यह स्थिति किसी एक या दो जगह की नहीं वरन् पूरे शहर की है। फिर चाहे वह छावनी का क्षेत्र हो या धानमंडी का। नयापुरा का क्षेत्र हो या विज्ञान नगर का। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ ऑफिस के सामने से कॉमर्स कॉलेज तक की सड़क और विज्ञान नगर मुख्य मार्ग की सड़क, नयापुरा मुक्तिमार्ग की सड़क सभी जगह पर ऐसी स्थिति है कि दो पहिया वाहनों का चलना दूभर हो रहा है।</p>
<p><strong>नाले को व्यू कटर से ढका, सड़क बदहाल</strong><br />औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंद्रा गांधी नगर में एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में नाले पर पुलिया बनी हुई है। हाल ही में नगर निगम की ओर से उस पुलिया पर दोनों तरफ दीवार खड़ी कर व्यू कटर लगा दिए। जिससे नाले की गंदगी नजर नहीं आए। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया गया। निगम सूत्रों का कहना है कि यह सड़क केडीए के अधीन है। ऐसे में उस सड़क पर इतने अधिक व बड़े-बड़े गड्ढ़ें हैं कि वहां जरा सी बरसात में ही पानी भर गया। जिससे वाहनों व पैदल ही लोगों को निकलने पर संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संबंधित विभाग सुधारे सड़कें</strong><br />छावनी निवासी ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि नगर निगम हो या केडीए। सड़कों को सही करना इनकी जिम्मेदारी है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइनों के कारण खराब हुई है। जिन विभाग के अधीन जो सड़क आती है उसे सही करवानी चाहिए। वरना बरसात में ये सही होंगी नहीं। जिससे लोगों को महीनों तक परेशानी व हादसों का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>प्रेम नगर निवासी मुकेश जोनवाल का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर के इस नाले की पुलिया से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यहां से कई निजी व सरकारी स्कूलों के ऑटो व वैन भीबच्चों को लेकर जाती है। अभी गर्मी की छुट्टी है जिससे बच्चों के वाहन तो नहीं आ-जा रहे। लेकिन स्थानीय लोग तो निकल ही रहे हैं। अभी से यह हालत है तो बरसात में हालत अधिक खराब होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। नगर निगम या केडीए जिस भी विभाग के अधीन सड़क आती है उन्हें बरसात से पहले सही करवाना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करवाई जाती है। सीवरेज लाइन डालने के बाद उस सड़क को सही करने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक फर्म की रहती है। फिर भी यदि कहीं सड़कों पर गड्ढ़े हैं तो उनका पता करवाकर सही करवाया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>पहली बारिश में डूबी व्यवस्थाएं : लाखों खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था फेल</title>
                                    <description><![CDATA[जाम नालियों से बढ़ी परेशानी, नगरपालिका की कार्यशैली पर उठाए सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/systems-overwhelmed-by-the-first-rain--sanitation-efforts-fail-despite-heavy-spending/article-157354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। राज्य सरकार के शहरी सेवा शिविरों में जनसमस्याओं के समाधान के दावों के बीच अटरू कस्बे में पहली ही बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। मुख्य बाजार, मुख्य सड़क और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नालियों की सफाई नहीं होने और जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने से आमजन में नाराजगी देखने को मिली। राज्य सरकार, के निर्देशानुसार आयोजित शहरी सेवा शिविरों में आमजन की समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अटरू कस्बे की सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पहली बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। मुख्य बाजार, मुख्य रोड और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>नालियों पर बने पक्के ढकान बने समस्या की वजह</strong><br />स्थानीय नागरिक पवन मालवीय, गणेश सेन और लोकेश पंचोली ने बताया कि मुख्य रोड क्षेत्र में कई स्थानों पर दुकानों के सामने नालियों पर पक्के ढकान बना दिए गए हैं। इन डंकानों के कारण नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पाती, जिससे उनमें गाद और कचरा जमा हो जाता है। परिणामस्वरूप पानी का प्रवाह बाधित हो जाता हैऔर थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नागरिकों का कहना है कि पहले नालियों से पानी का निकास सुचारु रूप से हो जाता था, लेकिन अब सफाई व्यवस्था की अनदेखी और अवरोधों के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>जनता की ये है प्रमुख मांगें</strong><br />अटरू कस्बे में जलभराव और सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगरपालिका के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगे रखी हैं। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में राहत देने के लिए तत्काल कराई जाए। साथ ही नालों पर बने अवैध एवं स्थायी अवरोधों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके। पूरे कस्बे की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p><strong>सड़कों पर भरा बारिश का पानी</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पूर्व नालियों की समुचित सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। कई स्थानों पर गंदा पानी दुकानों के सामने तक पहुंच गया, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी। हालात ऐसे बने कि कई जगह लोगों को स्वयं नालियों की सफाई कर पानी की निकासी करनी पड़ी।</p>
<p><strong>कलेक्टर के निर्देशों पर उठे सवाल</strong><br />गौरतलब है कि जिला कलक्टर बालमुकुंद असावा समय-समय पर शहरी सेवा शिविरों एवं नगर निकायों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद पहली ही बरसात में जलभराव और गंदगी की स्थिति सामने आने से व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया तो आगामी बरसात में स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p><strong>दुकानदार खुद कर रहे जाम नालियों की सफाई</strong><br />नगरपालिका की ओर से समय पर सफाई नहीं होने के कारण मुख्य बाजार क्षेत्र के दुकानदारों को खुद नालियों की सफाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के दौरान जब नालियों का पानी सड़कों और दुकानों के सामने जमा हो गया, तब कई व्यापारियों ने फावड़े और अन्य उपकरणों की मदद से नालियों में जमा कचरा और गाद निकालकर पानी की निकासी का प्रयास किया। दुकानदारों का कहना है कि नियमित सफाई होती तो उन्हें यह काम स्वयं नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही है, जिसका खामियाजा आमजन और व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>मुख्य रोड एवं बाजार क्षेत्र में जलभराव तथा नालियों की समस्या को शिकायतें संज्ञान में आई हैं। प्रशासन द्वारा तथा नगरपालिका प्रशासन को आवश्यक निर्देश देकर समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई कराई जाएगी। जहां भी नालियों में अवरोध, जाम या जलनिकासी संबंधी समस्या पाई जाएगी, वहाँ तत्काल सफाई एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे, ताकि बरसात के दौरान आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। <br /><strong>-अभिमन्यु कुंतल, कार्यवाहक उपखंड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:18:01 +0530</pubDate>
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                <title>कीचड़ भरी सड़क, राहगीरों की राह में बनी रोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी और उमस  में क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mud-filled-roads-become-a-major-obstacle-for-commuters/article-155978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़ । पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत पखराना के मुख्य गांव में इन दिनों स्वच्छता और विकास के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, क्योंकि गांव के मुख्य आम रास्ते पर लंबे समय से नालियों की सुध नहीं लिए जाने के कारण हालात बदतर हो चुके हैं। नालियों में भारी मात्रा में कचरा और गंदगी फंसी होने से वे पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिसके चलते गंदे पानी की निकासी पूरी तरह बंद है और यही दूषित पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य सड़क पर बह रहा है, जिसका नतीजा यह है कि पूरी सड़क अब कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण संजय गुर्जर, अभिषेक मेहता, नितेश मेहता, सोनू मेहता, मुकेश मेहता और भुवनेश मेहता ने बताया कि यह गांव का मुख्य आम रास्ता है जिससे होकर पूरे गांव की आवाजाही होती है और अभी दो दिन पूर्व हुई सामान्य बारिश के बाद से ही सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ हो गया है जिससे ग्रामीणों का यहाँ से पैदल निकलना भी पूरी तरह दुश्वार हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि अगर समय रहते इस समस्या की सुध नहीं ली गई और नालियों की साफ-सफाई नहीं कराई गई तो आगामी बरसात का मुख्य मौसम आने वाला है जिसमें यहाँ की स्थिति और भी ज्यादा भयानक होने वाली है। राहगीर इस कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं जिससे कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं और इसमें सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। </p>
<p>सड़क पर लगातार गंदे और दूषित पानी का भराव रहने से जहां एक तरफ राहगीरों को गुजरना पड़ रहा है । वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ने लगा है जिससे ग्रामीणों में अब मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक और गंभीर बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा सता रहा है। इस पूरे मामले में जब ग्राम पंचायत प्रशासन से जानकारी ली गई तो बताया कि सफाई ठेकेदार को हर महीने नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा था,उसके बावजूद भी ग्राम पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई दुरुस्त नहीं की जा रही थी। सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की तरफ से निरंतर आ रही शिकायतों को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा पिछले लगभग 6 महीने से ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है। ठेकेदार को ग्राम पंचायत द्वारा भुगतान देने के बावजूद वह सफाई कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं कर रहा था और यदि भुगतान दिया भी जाता था तो वह अधूरा होता था, जिस कारण आर्थिक तंगी की वजह से सफाई कर्मचारी भी काम करने में असमर्थ थे और इसी खींचतान की वजह से गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा पंचायत क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई नहीं करने और घोर लापरवाही बरतने को लेकर विकास अधिकारी खानपुर को अवगत करा रखा है और उचित कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों को इस समस्या से जल्द राहत दिलाने के प्रयास करेंगे।<br /><strong>- गोविंद मेहता प्रशासक ग्राम पंचायत पखराना</strong></p>
<p>वर्तमान में पखराना ग्राम पंचायत के विकास अधिकारी अवकाश पर चल रहे हैं। उनके ड्यूटी पर लौटते ही इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान करवाया जाएगा।<br /><strong>- रविन्द्र शर्मा, विकास अधिकारी खानपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:31:10 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा : अगले माह से हमारे शहर में दौड़ने लगेंगी ई-बसें</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में 34 सिटी बसों में  से फिलहाल करीब 27 बसों का नियमित संचालन हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-buses-set-to-hit-the-roads-in-our-city-starting-next-month/article-154770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)40.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश में एक ओर जहां पेट्रोल -डीजल की किल्लत होने वाली है। वहीं इसे बचाने के प्रयास भी शुरु हो गए हैं। उसी दिशा में कारगर साबित होंगी कोटा में आने वाली ई बसें। कोटा में अगले माह जून तक ई बसों के आने की संभावना है। जिससे वर्तमान में संचालित सिटी बसे बंद हो जाएंगे। ऐसे में हर महीने लाखों रुपए के डीजल की बचत होने लगेगी। कोटा में नगरीय परिवहन सेवा के तहत वर्तमान में 34 सिटी बसें हैं। जिनमें से फिलहाल करीब 27 बसों का नियमित संचालन हो रहा है। स्टेशन से खड़े गणेशजी मंदिर व अन्य स्थानों तक इन बसों के माध्यम से लोगों को सस्ती व सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध हो रही है।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इन बसों के संचालन से वर्तमान में करीब 40 से 50 लाख रुपए महीने के डीजल की खपत हो रही है।</p>
<p><strong>ई बसें आएंगी तो सिटी बसें होंगी बंद</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार कोटा में प्रधानमंत्री ई बस योजना के तहत 100 बसें आनी हैं। जिनमें 95 तो 9 मीटर वाली हैं और 5 बसें 12 मीटर वाली हैं। ये बसें पूरी तरह से एसी होंगी। शहर में केडीए सीमा तक 20 निर्धारित मार्गों पर इन बसों का संचालन किया जाएगा। प्रति बस प्रति दिन करीब 180 से 200 कि.मी. चलेगी। ई बसों के आने के बाद सिटी बसों का संचालन बंद हो जाएगा। जिससे नगर निगम को तो लाभ नहीं होगा। इसका कारण सिटी बसों में डीजल का खर्चा संवेदक फर्म द्वारा ही वहन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>भविष्य में नहीं होगी डीजल की जरूरत</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता गैराज रविन्द्र सैनी ने बताया कि शुरुआत में 20 से 25 ई बसों के आने की संभावना है। इतनी बसें आने पर सिटी बसों का संचालन बंद नहीं हो पाएगा। ई बसें 20 मार्गों पर चलेंगी। यदि ई बसों की संख्या अधिक होगी तो सिटी बसें बंद हो जाएंगी।<br />सैनी ने बताया कि वर्तमान में सिटी बसों में हर महीने औसत 40 से 50 लाख रुपए के डीजल की खपत हो रही है। ई बसों के आने के बाद इतना डीजल तो बचेगा ही साथ ही भविष्य में बसों में डीजल पेट्रोल की जरूरत नहीं होगी। इससे कोटा के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी।</p>
<p><strong>इस माह तक पूरा होना है बस स्टॉप का काम</strong><br />नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि इस माह के अंत तक सुभाष नगर में ई बस स्टॉप का निर्माण कार्य पूरा होना है। साथ ही बसों के लिए चार्जिंग पॉइंट भी लग जाएंगे। उसके बाद जून के पहले सप्ताह तक ई बसों के आने की संभावना है। बसों के आने के बाद उनका संचालन किया जाएगा। सिटी बसों की तुलना में ई बसें पूरी तरह से एसी होंगी। ऐसे में इनका किराया भी संशोधित करने पर विचार किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:32:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का  : छात्रावास व स्कूल क्षेत्र में चला सफाई अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--sanitation-drive-conducted-in-hostel-and-school-areas/article-153793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)23.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा । वनवासी परिषद छात्रावास और आदर्श विद्या मंदिर क्षेत्र में दूषित पानी व फैली गंदगी को लेकर दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। खबर प्रसारित होते ही नगर पालिका ने चारभुजा क्षेत्र, बप्पा रावल आश्रम छात्रावास और आदर्श विद्या मंदिर स्कूल मार्ग पर विशेष सफाई अभियान चलाकर नालियों और सड़कों की सफाई करवाई। अभियान के दौरान मुख्य सड़क और नालियों में जमा गंदगी हटाई गई तथा रुके हुए पानी की निकासी करवाई गई। लंबे समय से बनी समस्या के समाधान के लिए सफाई कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में व्यापक सफाई कार्य किया गया। विशेष सफाई अभियान में सेक्टर जमादार शिवचरण, चैनल अर्जुन कुमार और स्वच्छता मित्र मौजूद रहे। । गौरतलब है कि छात्रावास और विद्यालय परिसर में रहने वाले करीब 350 बच्चों को पिछले कई दिनों से दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। बच्चों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और डायरिया जैसी शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए थे।</p>
<p><strong>यी जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी</strong><br />संस्था प्रधान ने बताया कि पिछले करीब एक महीने से बच्चों को दूषित पानी की समस्या झेलनी पड़ रही थी। कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। अब सफाई अभियान शुरू होने से स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है। छात्रावास प्रभारी ने कहा कि परिसर के आसपास लंबे समय से गंदगी और रुका हुआ पानी बड़ी समस्या बना हुआ था। सफाई से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन स्वच्छ पेयजल और स्थायी जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>नाली के बीचों-बीच स्थित बोरिंग बनी समस्या</strong><br />विद्यार्थी प्रमुख ने बताया कि छात्र काफी दिनों से परेशानी झेल रहे थे। अब सफाई कार्य शुरू होने से राहत महसूस हो रही है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा नहीं होनी चाहिए। वहीं सफाई कर्मचारी ने बताया कि क्षेत्र में बनी बोरिंग नाली के बीचों-बीच स्थित है, ग्रामीण टोज़गार की नई गारंटी जिससे समस्या और बढ़ रही है। हालांकि सफाई से जुड़े अन्य कार्य पूरे कर दिए गए हैं।</p>
<p> पालिका द्वारा प्रतिदिन दो पारियों में सफाई कार्य कराया जाता है। शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। हमारे ओर से आमजन से भी नालियों में कचरा नहीं डालने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई है।<br /><strong>- नरपत सिंह, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका,रावतभाटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:22:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब नहीं होगी रोड लाइटों में भ्रम की स्थिति, केडीए लगा रहा नई लाइटें</title>
                                    <description><![CDATA[लाइट खराब होने पर निगम और केडीए के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं रहती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-more-confusion-regarding-streetlights/article-152613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हजारों की संख्या में रोड लाइटें तो लगी हुई हैं लेकिन उन लाइटों के खराब या बंद होने पर सही करने में नगर निगम व केडीए में भ्रम की स्थिति रहती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।शहर में आधा एरिया नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में हैं और आधा एरिया कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में। पुराना शहर अधिकतर नगर निगम क्षेत्र में आता है और नए कोटा शहर का अधिकतर क्षेत्र केडीए में आता है। शहर में वैसे तो मेन रोड व डिवाइडर साइट पर अधिकतर लाइटें केडीए ने लगाई हैं और गलियों व वार्डों में नगर निगम ने। लेकिन कई इलाके ऐसे हैं जहां कहीं निगम ने तो कहीं केडीए ने सुविधा की दृष्टि से लाइटें तो लगा दी लेकिन उनके खराब होने पर दोनों ही विभागों में भ्रम की स्थिति रहती है कि लाइट किस विभाग की है। उसे कौन सही करेगा। ऐसे में शिकायतकर्ता से वहां की लोकेशन व फोटो समेत कई तरह की जानकारी ली जाती है। उसके आधार पर तय होता है कि लाइट किस एरिया में है और वह किसके अधिकार क्षेत्र में है। जिससे उन बंद व खराब लाइटों को सही करने में काफी समय तक लग जाता है। लेकिन अब इस भ्रम की स्थिति को समाप्त किया जा रहा है।</p>
<p><strong>केडीए लगा रहा नई लाइटें</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि दोनों विभागों के बीच की इस भ्रम वाली स्थिति को समाप्त किया गया है। इसके लिए अब केडीए की ओर से जो भी नई रोड लाइटें लगाई जा रही हैं वह गोल्डन रंग की है। खम्बे तो एक जैसे हो सकते हैं लेकिन उनके ऊपर की तरफ लाइटें व आसपास का रंग गोल्डन रखा गया है। जिससे दूर से ही देखकर पता चल जाएगा कि ये लाइटें केडीए की है। साथ ही इन पर ऊपर की तरफ केडीए लिखा भी गया है।</p>
<p><strong>चोरी होने पर भी पहचान होगी आसान</strong><br />अधिशाषी अभियंता मीणा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में रोड लाइटें चाहे वे सजावटी हों या सामान्य चोरी हो गई है। लाइटें चोरी होने के बाद भी पता नहीं चलता कि ये लाइटें किसकी हैं। लेकिन इन लाइटों पर केडीए लिखा गया है। जिससे इनके चोरी होने पर आसानी से पहचान हो सकेगी कि ये लाइटें केडीए की है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार एसपी ऑफिस चौराहे से लेकर स्टेशन की तरफ जाने वाले रास्ते, जेडीबी कॉलज रोड, नयापुरा समेत कई जगह से तो रोड लाइटें चोरी हो चुकी हैं। यहां तक कि डेकोरेटिव लाइटें तक चोरी हो गई है। जिससे लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़कों पर अंधेरा ही छाया हुआ है।</p>
<p><strong>शहर में ऐसी 500 लाइटें लगाई</strong><br />केडीए अभियंता ने बताया कि शहर में अब नई लाइटें ही लगाई जा रही है। अब तक ऐसी करीब 500 रोड लाइटें लगाई जा चुकी हैं। जिनमें रायपुरा से कैथून रोड, के. पाटन तिराहे से जैन मंदिर तक और बारां रोड समेत कई जगह पर इस तरह की लाइटें लगाई गई हैं।</p>
<p><strong>निगम की करीब 56 हजार लाइटें</strong><br />इधर नगर निगम के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) सचिन यादव ने बताया कि कोटा शहर में नगर निगम की करीब 56 हजार रोड लाइटें लगी हुई हैं। समय-समय पर इन लाइटों के बंद व खराब होने पर मेंटेनेंस की जा रही है। फिलहाल शहर में अधिकतर रोड लाइटें एलईडी ही हैं। जिससे कम से कम बिजली में अधिक से अधिक रोशनी लोगों को मिल सके।</p>
<p><strong>एसपी को लिखा है पत्र</strong><br />कोटा आने के बाद अधिकतर यही सुनाई में आता है कि रोड लाइटें अधिक चोरी हो रही है। कई जगह से लाइटें चोरी होने के मामले में तो पुलिस को फोटो व वीडियो तक उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। यहा तक कि एसपी को भी पत्र लिखकर लाइटें व अन्य सामान चोरी के मामले में कार्रवाई करने के संबंध में कहा गया है। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।<br /><strong>- बचनेश कुमार अग्रवाल, आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:12:25 +0530</pubDate>
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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
                                    <description><![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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                <title>वाहनों की जगह जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक,शहर में अधिकतर स्पीड ब्रेकर क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instead-of-braking-vehicles--they-could-put-a-stop-to-lives--most-speed-breakers-in-the-city-are-damaged/article-149082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मौहल्लों तक में वाहनों की तेज गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर ब्रेकर या तो क्षतिग्रस्त हो रहे हैं या बिना मानकों के बने हुए हैं। जिनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ये ब्रेकर वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने की जगह व्यक्ति की जिंदगी पर ब्रेक लगा सकते हैं। वाहन चालक निर्धारित गति से वाहन चलाएं और मोड व स्कूल-कॉलेज के पास वाहनों की गति को नियंत्रित कर सकें। इसके लिए यातायात नियमों के तहत मुख्य मार्गों समेत कई जगह पर नगर निगम, कोटा विकास प्राधिकरण व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। नियमानुसार तो ये स्पीड ब्रेकर निर्धारित मानकों के अनुसार ही बनाए जाने चाहिए। जिसमें उनकी ऊंचाई लम्बाई व चौड़ाई सभी निर्धारित है। साथ ही हर स्पीड ब्रेकर पर सफे द पट्टी भी होनी चाहिए। जिससे दूर से ही वाहन चालकों को स्पीड ब्रेकर का पता चल सके और वे अपने वाहनों की गति को धीमा कर सके। लेकिन हालत यह है कि शहर में अधिकतर ब्रेकर बिना मानक के और लोगों की मनमर्जी से बने हुए हैं।</p>
<p><strong>अधिकतर ब्रेकर बीच से टूटे हुए</strong><br />शहर में मुख्य मार्गो पर जहां बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। वहीं छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों तक में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। कई लोगों ने तो अपने घर के सामने, किसी ने अपनी दुकान के सामने, किसी ने शोरूम के सामने तो किसी ने बिना किसी कारण के स्पीड ब्रेकर बनाए हुए हैं। रबड़ वाले व डामर- गिट्टी के बने इन स्पीड ब्रेकर में अधिकतर बीच से टूटे हुए हैं। कई उबड़-खाबड़ हो रहे हैं। कई स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी भी नहीं हो रही है। जिससे उन स्पीड ब्रेकर से गुजरने वाले वाहनों विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन चालकों के लिए ऐसे स्पीड ब्रेकर खतरा बने हुए हैं।<br /> <br /><strong>कुछ को तोड़ा तो कुछ हुए खराब</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम व केडीए की ओर से यातायात पुलिस की सलाह पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं वे तो नियमानुसार बने हैं। लेकिन कई स्पीड ब्रेकर लोगों ने अपनी मर्जी से या बिना किसी की जानकारी के बनाए हैं वे गलत तरीके से बने हुए हैं। उनमें से कुछ को तो लोगों ने ही तोड़ दिया है। वहीं डामर के स्पीड ब्रेकर बरसात व भारी वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।</p>
<p><strong>शहर में हर जगह ऐसी स्थिति</strong><br />शहर में कोई भी जगह ऐसी नहीं हैं जहां स्पीड ब्रेकर पूरी तरह से सही हों। विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय रोड, छावनी, स्माल स्केल इंडस्ट्रीयल एरिया, नयापुरा, बसंत विहार, बजरंग नगर,महावीर नगर, रंगबाड़ी रोड व दादाबाड़ी और वल्लभ नगर समेत सभी जगह पर ऐसी स्थिति हैं जहां जितने स्पीड ब्रेकर हैं उनमें से ज्यादातर टूटे हुए ही हैं। जिन पर आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>जहां जरूरत हो वहीं बने ब्रेकर</strong><br />लोगों का कहना है कि स्पीड ब्रेकर की जहां जरूरत हो वहीं बनने चाहिए। साथ ही यातायात नियमों व मानकों के अनुसार ही बनाए जाएं।बजरंग नगर निवासी संजय साहू का कहना है कि जगह-जगह छोटी गलियों में बिना मानक के रबड़ वाले व डामर के छोटे ब्रेकर बनाना गलत है। उनसे वाहन तो रूकते नहीं हैं लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। साथ ही इन ब्रेकर पर वाहन उछलने ने लोगों को कमर दर्द समेत कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।भीमगंजमंडी निवासी महेश लोधा का कहना है कि बिना मानक के बने व क्षतिग्रस्त ब्रेकर अधिक नुकसान दायक हैं। इनसे दुर्घटना का खतरा होने के साथ ही वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों को पूरे मानक के अनुसार ही ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। गलत तरीके से ब्रेकर बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में स्पीड ब्रेकर तो वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। जहां भी ब्रेकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका सर्वे कराया गया है। पूरे मानक के अनुसार और जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशानुसार ब्रेकर की मरम्मत व रखरखाव का कार्य कराया जा रहा है।<br />-<strong>मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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                <title>टेक्नोलॉजी के जरिए सड़कें होंगी अधिक सुरक्षित : आमजन को मिलेगा सहज सफर, बैरवा ने तकनीक आधारित निगरानी तंत्र को सख्त करने के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्टी सीएम व परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई। ई-डिटेक्शन, वाहन ट्रैकिंग और ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। नियम उल्लंघन पर स्वत: चालान, सार्वजनिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्यता और परमिट सेवाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण पर जोर दिया। ओवरलोडिंग पर समन्वित कार्रवाई और डेटा आधारित योजनाओं को लागू करने के निर्देश भी दिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roads-will-become-safer-through-technology-common-people-will-get/article-148912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिप्टी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सीएम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉ</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रेम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चंद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मजबूत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तकनीक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधारित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निगरानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तंत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सख्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नियमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उल्लंघन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्रवाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिटेक्शन</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रैकिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आॅनलाइन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जरिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमजन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जवाबदेह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यवस्था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपलब्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करवाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गुरुवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शासन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सचिवालय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समीक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैठक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिटेक्शन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रणाली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नियमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उल्लंघन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्वत</span>: <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चालान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रक्रिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मजबूत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सार्वजनिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहनों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लोकेशन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रैकिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डिवाइस</span> (<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वीएलटीडी</span>) <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यापक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्रियान्वयन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जोर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यात्रियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुनिश्चित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होगी।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बैरवा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परमिट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संबंधित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सभी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पूर्णत</span>: ऑ<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नलाइन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रक्रियाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमजन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बिना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाधा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवाएं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपलब्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कराने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पोर्टलों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एकीकरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ओवरलोडिंग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जैसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मामलों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समन्वित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्रवाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सड़क</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्षेत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नवाचारों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ावा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देने</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डेटा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधारित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्ययोजनाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभावी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लागू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 11:01:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांसी में एक पखवाड़े से सफाई व्यवस्था ठप : बिगड़े हालात, नालियां जाम, सड़कों पर फैल रही गंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[बूंदी-देई मार्ग सहित मुख्य सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/sanitation-system-paralyzed-in-bansi-for-a-fortnight--conditions-deteriorate--drains-clogged--filth-spreading-on-roads/article-147205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)42.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र के बांसी कस्बे में पिछले पखवाड़े से सफाई व्यवस्था बाधित होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नालियों के अवरुद्ध होने और कचरा संग्रहण बंद रहने से सड़कों पर गंदगी फैल गई है। जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भण्डेड़ा क्षेत्र के बांसी कस्बे में करीब पंद्रह दिनों से घर-घर कचरा संग्रहण की गाड़ी बंद पड़ी है। जिससे कस्बे में कचरे के ढेर लग गए हैं। पूर्व में नियमित कचरा संग्रहण से पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था संतोषजनक बनी हुई थी। लेकिन वर्तमान में स्थिति बिगड़ गई है। कचरा गाड़ी बंद होने के कारण बाजारों और मोहल्लों का कचरा नालियों में जमा हो रहा है, जिससे नालियां अवरुद्ध हो गई हैं। नालियों के जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>प्रमुख चौराहों और तिराहों पर हालात और गंभीर </strong><br />कस्बे के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर स्थिति और अधिक गंभीर है। बूंदी-देई मार्ग सहित मुख्य सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। तेज गति से गुजरते वाहनों के कारण गंदे पानी के छींटे आसपास के मकानों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों का घरों के बाहर बैठना तक मुश्किल हो गया है। सड़कों पर फैले कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल भी हो रहे हैं। बैंक चौराहे पर लगातार पानी भरे रहने से सड़क पर गड्ढा बन गया है, जिससे दिनभर आवागमन में बाधा बनी रहती है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने जताई नाराजगी</strong><br />इस समस्या से नाराज एक दर्जन से अधिक ग्रामीण महिलाएं कीचड़ से भरी सड़क के पास एकत्रित होकर संबंधित विभाग के खिलाफ आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने बताया कि कचरा गाड़ी बंद होने से लोग कस्बे से बाहर कचरा डालने को मजबूर हैं। जहां पशु उसे खा रहे हैं। वहीं कचरे के ढेर में आग लगाने से उठता धुआं आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है। ग्रामीण कन्हैयालाल रेगर, दुगार्लाल रैगर, प्रकाश, रामगणेश, राजेंद्र, तेजमल, गुलाबचंद, गिरिराज सहित फूतरी बाई, कैलाश बाई, जानकी बाई, अनिता और मोहनी बाई ने भी आक्रोश जताया।<br />बांसी की समस्या को लेकर संवेदक को पाबंद किया जाएगा। जहां पर दुरस्ती करण का कार्य होना है, वहां पर जल्द ही दुरस्ती करण करवा दिया जाएगा। <br /><strong>-बाबूलाल कारपेंटर, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत बांसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:42:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : नगर परिषद ने आम रास्ते पर चलाया पीला पंजा, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद पर्वतीपुरम कॉलोनी में नगर परिषद ने की त्वरित कार्रवाई ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/results-of-the-report--the-municipal-council-has-launched-a-yellow-flag-on-the-public-road/article-144682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। पर्वतीपुरम कॉलोनी देवपुरा बूंदी में आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद नगर परिषद ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मार्ग को बहाल करा दिया है। दैनिक नवज्योति के 24 फरवरी अंक में जनसमस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने पर नगर परिषद बूंदी आयुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा ने तुरंत संज्ञान लिया। आयुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा के निर्देश पर नगर परिषद का अतिक्रमण दस्ता मौके पर पहुंचा और आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर मार्ग को पुन: चालू कराया।</p>
<p>स्थानीय निवासियों ने बताया कि अतिक्रमण के कारण कॉलोनीवासियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। संकरे मार्ग के कारण दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही थी। कई बार राहगीरों को वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता था। नगर परिषद की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में संतोष का माहौल है। मोहल्लेवासियों ने त्वरित कार्रवाई के लिए नगर परिषद प्रशासन का आभार व्यक्त किया। साथ ही समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित करने पर दैनिक नवज्योति का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी आम रास्तों पर अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन इसी प्रकार तत्परता से कार्रवाई करेगा, जिससे नागरिकों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:25:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोहरे के बीच भी रात को हो रही मेन रोड की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण  दुर्घटना हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-being-cleaned-at-night-even-amidst-the-fog/article-138579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से दिन के समय ही नहीं रात में भी मेन रोड की सफाई काफी समय से करवाई जा रही है। हालत यह है कि इन दिनों रात के समय पड़ रहे घने कोहरे के बीच भी सफाई जारी है।शहर में सुबह-शाम निकल रहे कचरे को देखते हुए निगम की ओर से दोनों समय पर वार्डों में ही नहीं मेन रोड पर भी सफाई करवाई जा रही है। सुबह बाजार खुलने पर दुकानदारों को सफाई नजर आए। इसे देखते हुए रात के समय ही मेन रोड की सफाई करवाई जा रही है। फिर चाहे डीसीएम रोड हो या सीएडी रोड। स्टेशन रोड या नयापुरा का क्षेत्र। पिछले काफी समय से यह कार्य किया जा रहा है।वही सिलसिला अभी भी बना हुआ है। </p>
<p>शहर में रविवार व सोमवार को सुबह के समय ही नहीं रात के समय भी घना कोहरा छाया हुआ था। उस कोहरे में बिजिबिलिटी इतनी कम थी कि पास के वाहन व रोड लाइटें तक नजर नहीं आ रही थी। उस कोहरे के बीच भी निगम के सफाई कर्मचारी महिलाएं और पुरुष दोनों मेन रोड पर झाडू लगाने से लेकर एकत्र कचरे को ट्रॉली में भरने में जुटे हुए थे।रात के समय मेन रोड से गुजरने वाले वाहन चालक सफाई कर्मचारियों के इस जज्बे को देखकर आश्चर्य करने लगे। लोगों का कहना था कि इतना घना कोहरा है कि उसमें न तो सफाई कर्मचाी नजर आ रहे थे और न ही ट्रेक्टर ट्रॉली। बिल्कुल नजदीक आने पर ही पता चल रहा था कि यहां कोई है। सफाई कर्मचारियों की रेडियम वाली यूनिफार्म तक दूर से नजर नहीं आ रही थी। पास आने पर भी उसकी चमक नहीं दिख रही थी। लोगों का कहना है कि ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण सफाई कर्मचारियों की दुर्घटना हो सकती है। या फिर कोई वाहन ट्रेक्टर ट्रॉली से टकराकर घायल हो सकता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से रात के समय सफाई करवाना अच्छा है। लेकिन कोहरे की अधिकता व मानवीय पहलू को देखते हुए कोहरा अधिक होने पर कर्मचारियों को राहत दी जानी चाहिए।</p>
<p>इधर नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा का कहना है कि शाम को दुकानें बंद होने के बाद रात को सड़कों पर कचरा अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय सफाई करवाई जा रही है। जिससे सुबह सड़कें साफ दिखे। कोहरा तो अभी कुछ समय का है। रात से अधिक दिन के समय हादसों का खतरा अधिक रहता है। साथ ही रात में एक बार सफाई बंद करवाने पर फिर से उसे शुरू करने में परेशानी हो सकती है। फिर भी कोहरा लगातार या अधिक समय तक रहा तो उसके हिसाब से निर्णय किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:33:18 +0530</pubDate>
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