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                <title>surgery - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जटिल एवं विशाल सिर के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, एसएमएस मेडिकल कॉलेज की टीम ने रचा नया इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों ने 30 वर्षीय महिला के सिर से 4 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर निकालकर नया जीवन दिया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी क्योंकि ट्यूमर मस्तिष्क तक पहुँच चुका था। डॉ. आर.के. जैन और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा जगत में मिसाल कायम की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-operation-of-complex-and-huge-head-tumor-sms-medical/article-152531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sms.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल करते हुए 30 वर्षीय मरीज कृष्णा के सिर से लगभग 4 किलोग्राम वजनी जटिल एवं विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने में सफलता प्राप्त की है। यह सर्जरी ट्यूमर के असाधारण आकार, जटिल स्थिति तथा मस्तिष्क एवं महत्वपूर्ण नसों से जुड़े होने के कारण अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। मरीज लंबे समय से सिर पर अत्यधिक बड़े ट्यूमर से पीड़ित थी, जिसका आकार सिर से लगभग दोगुना हो चुका था। </p>
<p>ट्यूमर के कारण उसे चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही थी तथा दुर्गंध के चलते उसकी दैनिक जीवनशैली गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी थी। जानकारी के अनुसार, मरीज ने कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन ट्यूमर की जटिलता—खोपड़ी की हड्डियों को पार कर मस्तिष्क तक पहुंचने—के कारण अधिकांश स्थानों पर ऑपरेशन से मना कर दिया गया। अंततः यह चुनौतीपूर्ण केस न्यूरोसर्जरी विभाग से प्लास्टिक सर्जरी विभाग को रेफर किया गया, जहां डॉ. आरके जैन (विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी) के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। </p>
<p>इस सर्जरी में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. अंकित गोयल, डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. दिलप्रीत, डॉ. अंकित एवं डॉ. संधू शामिल रहे। चूंकि ट्यूमर मस्तिष्क के भीतर तक पहुंच चुका था, इसलिए न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अशोक गांधी का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. राजीव शर्मा ने किया, जिसमें डॉ. रजनी एवं डॉ. गोपा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:03:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>समय पर सर्जरी से मरीज का पैर कटने से बचाया गया, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[सीकर रोड स्थित निजी अस्पताल में समय पर की गई जटिल सर्जरी से दुर्घटनाग्रस्त युवक का पैर कटने से बच गया। हादसे में पैर की हड्डी टूटने के साथ रक्त आपूर्ति करने वाली प्रमुख धमनी भी कट गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल में वरिष्ठ वेस्कुलर सर्जन डॉ. गोविंद प्रसाद दुबे ने रातभर चली आपात सर्जरी कर मरीज की जान और पैर दोनों बचाए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/patients-leg-saved-from-amputation-by-timely-surgery-know-the/article-140461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)49.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीकर रोड स्थित निजी अस्पताल में समय पर की गई सर्जरी से मरीज का पैर कटने से बचाया जा सका है। दरअसल, एक युवक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके पैर की हड्डी टूटने के साथ-साथ पैर में रक्त आपूर्ति करने वाली प्रमुख धमनी भी कट गई, जिससे मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई।</p>
<p>जब मरीज को मणिपाल हॉस्पिटल में लाया गया तो वरिष्ठ वेस्कुलर सर्जन डॉ. गोविंद प्रसाद दुबे ने बिना किसी विलंब के मरीज को इमरजेंसी में लेकर तत्काल रात भर में ही इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। </p>
<p><br /><br /></p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 14:07:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चौथी बार हिप सर्जरी में मिली सफलता : मरीज को दोबारा मिला चलने-फिरने का आत्मविश्वास, पूर्व में 2 बार फेल हो गई थी हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[ फेल होती सर्जरियों और बढ़ते इंफेक्शन के बीच 60 वर्षीय मरीज के लिए चलना-फिरना मुश्किल हो गया था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/for-the-fourth-time-the-success-of-the-hip-surgery/article-108962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फेल होती सर्जरियों और बढ़ते इंफेक्शन के बीच 60 वर्षीय मरीज के लिए चलना-फिरना मुश्किल हो गया था। हिप फ्रैक्चर के बाद लगातार दो सर्जरियां असफल रहीं, जिससे उनकी हालत और बिगड़ती चली गई। निजी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने चौथी बार सर्जरी कर मरीज को फिर से चलने फिरने लायक बनाने में सफलता हासिल की है। वरिष्ठ जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. ललित मोदी ने बताया कि जब मरीज मेरे पास पहुंचे, तब तक इंफेक्शन काफी फैल चुका था और पहले की दो असफल सर्जरियों से हिप के टिश्यूज को भी काफी नुकसान पहुंचा था। ऐसे में हमने दो चरण में सर्जरी करने का निर्णय लिया।</p>
<p><strong>पहले चरण में इंफेक्शन पर नियंत्रण </strong><br />पहले चरण में इंफेक्शन को नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम जोड़ को निकालकर बोन सीमेंट का आर्टिफिशियल बॉल इंप्लांट किया गया, जिसमें एंटीबायोटिक्स भी मिलाए गए। इससे बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद मिली और मरीज बिना सहारे चलने-फिरने लगे। हालांकि, इस प्रक्रिया के बाद भी दूसरी सर्जरी जरूरी थी, लेकिन मरीज के निजी कारणों से यह सर्जरी 6 महीने तक टल गई।</p>
<p><strong>हृदय संबंधी दिक्कतों के कारण आगे बढ़ा इलाज </strong><br />दूसरी सर्जरी से पहले जांच में पता चला कि मरीज का हृदय ऑपरेशन के लिए पूरी तरह स्वस्थ नहीं था और ब्लड सप्लाई में कमी के कारण सर्जरी में जान का खतरा था। ऐसे में पहले एंजियोप्लास्टी की गई और उसके बाद 6 महीने तक किसी भी सर्जरी से बचना जरूरी था। इस कारण जो हिप सर्जरी 3 महीने में होनी थी, वह करीब सवा साल से ज्यादा समय तक टल गई।</p>
<p><strong>चुनौतियों के बीच चौथी सर्जरी में मिली सफलता </strong><br />इतने लंबे अंतराल के बाद जब चौथी सर्जरी का समय आया, तो बोन सीमेंट इंप्लांट के कारण आसपास के टिश्यू काफी सख्त हो चुके थे। डॉ. ललित मोदी ने बताया कि, "यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि इसमें मांसपेशियों और नसों को बिना नुकसान पहुंचाए हड्डी को दोबारा बनाना था। एंजियोप्लास्टी होने के कारण सर्जरी में रक्तस्राव कम से कम रखने की चुनौती भी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 18:56:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Robotic की मदद से की गयी जटिल Gallbladder surgery </title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने बताया कि महिला का इलाज समय पर इलाज न किया जाता तो गालब्लैडर आसपास के अंगों से और चिपक सकता था। उनके गॉलब्लैडर की दीवार भी सख्त हो गयी थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/complex-robotic-assisted-gallbladder-surgery/article-53597"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/robot.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने रोबोट की मदद से एक जटिल गाल ब्लैडर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।    फोर्टिस अस्पताल शालीमार के रोबोटिक- लैप जीआई ओंकोलॉजी, बेरियाट्रिक एंड मिनीमल इन्वेसिव सर्जरी के प्रधान निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप जैन ने संवाददाताओं को बताया कि 36 वर्षीय महिला का गॉल ब्लैडर आसपास फैली छोटी आंत एवं बड़ी आंत में बुरी तरह से फंसा हुआ था और बाइल डक्ट भी फंसी थी।</p>
<p>डॉ जैन ने बताया कि पीड़ित महिला का सीटी स्कैन और पेट स्कैन किया गया और रोबोट की मदद से उनका गालब्लैडर निकालने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि महिला का इलाज समय पर इलाज न किया जाता तो गालब्लैडर आसपास के अंगों से और चिपक सकता था। उनके गॉलब्लैडर की दीवार भी सख्त हो गयी थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमने सफलतापूर्वक उनकी रोबोटिक सर्जरी की। रोबोटिक-असिस्टेंस से की जाने वाली सर्जरी खासतौर से इस प्रकार की जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में काफी संभावनाओं से भरपूर है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी काफी फायदेमंद होती है। इसके प्रयोग के लिए लचीले उपकरणों के साथ-साथ बाइल डक्ट को ठीक प्रकार से देखने के लिए विशेषज्ञ तकनीकों का भी लाभ मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 19:42:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> 9 साल की बच्ची के फेफड़े में मिली सुई</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन लगभग 1 घंटे चला, ऑपरेशन के पश्चात बच्ची का इलाज सीटीवीएस विभाग में चल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/jodhpur-needle-in-the-lungs-of-a-9-year-old-girl/article-22406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/77.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर।मथुरा दास माथुर चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित द्वारा बताया गया कि प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ दिलीप कछवाहा के मार्गदर्शन में कार्डियोथोरेसिक विभाग में एक 9 वर्षीय बच्ची की फेफड़े में धसी हुई सुई को निकालने का सफल ऑपरेशन मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निशुल्क किया गया।<br /><br />9 वर्षीय बच्ची गत डेढ़ माह से दाहिने छाती के दर्द से परेशान थी। बच्ची तथा उसके परिजनों ने बताया कि डेढ़ माह पूर्व सोते समय बच्ची के छाती में यह बड़ी सुई घुस गई थी इस समस्या को लेकर मरीज के परिजनो ने अपने क्षेत्र मे परामर्श लिया, मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में भर्ती हुई जहां एक्स-रे तथा सीटी स्कैन में मरीज के दाहिने फेफड़ों  में सुई  की पुष्टि हुई।<br /><br />बच्ची का सफल ऑपरेशन ऑपरेशन डॉ सुभाष बलारा (सहा अचार्य तथा विभागयक्ष )के साथ मिलकर डॉ अभिनव सिंह (सहायक आचार्य) ने किया। इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की डॉ गीता सिंगारिया,डॉ देवेंद्र बोहरा, डॉ कश्मीरा शर्मा, स्टाफ  रेखा राम और मोनिका शामिल थे।<br />इस सुई की लंबाई लगभग 5 सेंटीमीटर थी और बच्ची के दाहिने फेफड़े के पोस्टीरियर बेसल सेगमेंट के पैरेंकाइमा में धंसी हुई थी जिसका आगे का सिरा सेगमेंटल  bronchus , artery और वेन से सिर्फ एक सेंटीमीटर की दूरी पर था इसलिए ऑपरेशन करते समय अत्यंत सावधानी की आवश्यकता थी अन्यथा मरीज के फेफड़े  को नुकसान पहुंच सकता था। ऐसे ऑपरेशन को करने के लिए अनुभवी डॉक्टर्स की टीम की आवश्यकता होती है, सुई को निकालने के बाद फेफड़े को रिपेयर कर दिया गया, यह ऑपरेशन लगभग 1 घंटे चला, ऑपरेशन के पश्चात बच्ची का इलाज सीटीवीएस विभाग में चल रहा है, जहां डॉ अंशुमन और डॉ सुखदेव इलाज में मदद कर रहे हैं। डॉ एस एन मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ जयराम रावतानी ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है और परिजन खुश हैं। ऐसे केसे काफी रेयर हैं और अगर सुई को समय रहते ना निकाला जाए तो फेफड़ों में मवाद और एंपाईमा बनने का खतरा रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Sep 2022 16:56:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दुर्लभ हिप आर्थरोस्कोपी कर 9 साल की बच्ची को दिया नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[ इंफेक्शन को रोकने के लिए ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल के नेतृत्व में आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा हिप जोड़ की सफाई की गई और प्रभावित टिश्यू बायोप्सी के लिए भेजा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rare-hip-arthroscopy-gave-new-life-to-9-year-old-girl/article-17421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/whatsapp-image-2022-08-02-at-1.23.47-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में एक हॉस्पिटल की ऑर्थोपेडिक्स टीम ने एक और उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। हाल ही में अस्पताल में नवीनतम हिप आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा एक 9 साल की बच्ची का ऑपरेशन कर उसे नया जीवनदान दिया गया। बच्ची को दांयी हिप जॉईंट में गंभीर इंफेक्शन था जो धीरे-धीरे उसके हिप के जोड़ को खराब कर रहा था। इंफेक्शन को रोकने के लिए ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल के नेतृत्व में आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा हिप जोड़ की सफाई की गई और प्रभावित टिश्यू बायोप्सी के लिए भेजा गया। हिप आर्थरोस्कोपी एक जटिन एवं दुर्लभ सर्जरी है और देश के चुनिंदा केन्द्रों में ही की जाती है।<br /><br />बच्ची को 2-3 हफ्तों से दांहिने हिप जोड़ में तेज़ दर्द और बुखार था जिसके चलते वो ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थी। दर्द दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा था। जब उसे धौलपुर से  जयपुर रैफर किया गया तो डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने पाया कि बच्ची के हिप जोड़ में गंभीर इंफेक्शन हो गया था - जिसका अगर तुरंत ईलाज नहीं किया जाता तो बच्ची का हिप जोड़ स्थायी रूप से खराब हो जाता। ऐसे मामलों में अक्सर ओपन सर्जरी की जाती है जिसमें 5 से 6 सेमी. का चीरा लगता है, निशान हो जाते है, जहां सर्जरी होती है उसके आसपास फाईब्रोसिस हो जाता है और हिप जोड़ तक जाने वाला खून का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है।<br /><br />नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि हिप के लिए आर्थरोस्कोपी सर्जरी करना मुश्किल और कौशलपूर्ण प्रोसिज़र है। बच्ची की उम्र और हिप आर्थरोस्कोपी में आयें नये एडवांसेज को देखते हुए हमने इस प्रकार हिप जोड़ की सफाई करने का निर्णय लिया जो काफी सफल रहा। बच्ची को केवल कुछ टांके लगे और हिप के टिश्यूज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा जिससे मरीज की रिकवरी काफी जल्दी हो गयी और वह दर्दमुक्त होकर फिर से खेलने-कूदने लायक हो गयी। हिप आर्थरोस्कोपी चुनिंदा मामलों में ही की जा सकती है इसलिए केस का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 16:06:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिमाग की सर्जरी के बाद मरीज को दौर आने हुए बंद</title>
                                    <description><![CDATA[एक युवक की दिमाग की सर्जरी की गई है। अजीत सिंह चौधरी, जो पिछले 6 साल से दिमाग के दौरे पड़ने की बीमारी से पीड़ित था। बीते 6 माह से मरीज को दिन में 15 से 20 बार दौरे पड़ते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-brain-surgery-of-one-youth/article-13705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4546546513.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक युवक की दिमाग की सर्जरी की गई है। अजीत सिंह चौधरी, जो पिछले 6 साल से दिमाग के दौरे पड़ने की बीमारी से पीड़ित था। बीते 6 माह से मरीज को दिन में 15 से 20 बार दौरे पड़ते थे। इन 6 सालों में अजीत को परिजनों ने करीब 18 से 20 डॉक्टर्स को दिखाया। इस दौरान उसका ईलाज चलता रहा, लेकिन मरीज को कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद मरीज के परिजनों ने निजी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. राजवेंद्र सिंह चौधरी को दिखाया। डॉ. चौधरी ने एमआरआई और सीटी स्कैन के बाद मरीज की दिमाग की सर्जरी की।</p>
<p>चौधरी ने बताया कि मरीज को फोकल कॉर्टिकल डिस्पलेजिया बीमारी थी। यह अलग तरह की सर्जरी है। इस तरह की सर्जरी प्रदेश में नहीं की जाती है। सिर की गंभीर सर्जरी के बाद मरीज पर नजर रखी जानी जरुरी थी। दो महीने से मरीज की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। अब मरीज को दौरे आने बंद हो गए है, मरीज स्वस्थ है। चौधरी के अनुसार यह जटिल सर्जरी है और कम मामलों में ही इस तरह की सर्जरी करनी पड़ती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 12:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एचआईवी महिला मरीज की सफल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के दुर्गापुरा स्थित निजी अस्पताल में 136 किलो वजन वाली एचआईवी पॉजिटिव महिला मरीज की नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-knee-replacement-surgery-of-women/article-10468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546546546541.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के दुर्गापुरा स्थित निजी अस्पताल में 136 किलो वजन वाली एचआईवी पॉजिटिव महिला मरीज की नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की। डॉक्टर्स ने दावा किया है कि शहर में इतने वजन के साथ एचआईवी पॉजिटिव मरीज की सफल नी रिप्लेसमेंटन सर्जरी का यह पहला मामला है। सीके बिरला हॉस्पिटल के सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि विदेश से आई एक मरीज के घुटने में दर्द की समस्या, अत्यधिक बढ़ा हुआ वजन और उसके अलावा वह एचआईवी पॉजीटिव थी। जयपुर में वे पहले अपने एक घुटने की समस्या से निजात पाने के लिए नी रिप्लेसमेंट सर्जरी करवा चुकी थी। इस केस में सबसे बड़ी चुनौती उनका एचआईवी पॉजिटिव होना भी था। एड्स के कारण लो इम्यूनिटी होने से कई दूसरे संक्रमण मरीज को घेर लेते हैं। इन मरीजों को बाद में भी संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है। इसके लिए अल्ट्रा क्लीन ओटी, रूम, वार्ड की व्यवस्था होनी आवश्यक है।</p>
<p><strong>पैरामेडिकल स्टॉफ को अपना बचाव करना भी जरूरी है</strong><br />डॉ. आशीष ने बताया कि ऐसे मरीजों का उपचार करते समय चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टॉफ को अपना बचाव करना भी जरूरी है। अगर किसी को यह संक्रमण हो जाता है तो इसका उपचार लंबा और बहुत स्लो होता है। कोरोना की तरह ही ऐसे में मरीजों का उपचार करते समय पीपीई किट और अन्य कई तरह कि सावधानिया भी रखी गई।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 12:08:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूबीई तकनीक के जरिए होगी कैडेवर और लाइव सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[यूबीई तकनीक से सर्जरी पर दो दिवसीय शैक्षिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन आज से शुरु किया गया जो 27 मार्च 2022 तक चलेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cadaver-and-live-surgery-will-be-done-through-ube-technology/article-6778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/opr.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीकर रोड स्थित निजी हॉस्पिटल में यूबीई तकनीक से सर्जरी पर दो दिवसीय शैक्षिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन आज से शुरु किया गया जो 27 मार्च 2022 तक चलेगा। राजस्थान में यूबीई तकनीक पर यह पहली कॉन्फ्रेंस मणिपाल हॉस्पिटल में आयोजित किया जा रही है। इस कॉन्फ्रेंस कैडवर वर्कशॉप और लाइव सर्जरी देष के प्रसिद्ध डौक्टर्स के द्वारा की जायेगी।</p>
<p><br />डॉ. नमित निठारवाल, कंसल्टेंट स्पाइन सर्जरी, मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर ने बताया कि यह कॉन्फ्रेस 25 से 27 मार्च 2022 तक मणिपाल अस्पताल जयपुर में यूबीई (एकतरफा द्विपक्षीय स्पाइन एंडोस्कोपी) पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कि जा रही है। इस आयोजन में भारत के जाने-माने फैकल्टी डॉ. मैल्कम डी. पेस्टनजी और डॉ. आनंद कवि (वे भारत में यूबीई सर्जरी शुरू करने वाले पहले व्यक्ति हैं) लाइव सर्जरी करेंगे और इस कॉन्फ्रेस में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टर्स भाग ने लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 16:23:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 साल से बिस्तर पर सिमटी थी जिंदगी, सर्जरी बाद मिला नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[20 साल से बिस्तर पर ही जिंदगी गुजारने को मजबूर 28 वर्षीय युवक को जटिल सर्जरी कर नया जीवन मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/life-was-confined-to-bed-for-20-years--got-new-life-after-surgery-the-patient-was-suffering-from-ankylosing-spondylitis/article-6585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/qq.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। 20 साल से बिस्तर पर ही जिंदगी गुजारने को मजबूर 28 वर्षीय युवक को जटिल सर्जरी कर नया जीवन मिला है। युवक एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसका दायां कूल्हे का जोड़ फ्यूज्ड हो चुका था। इससे न तो वह चल पा रहा था और न ही ठीक से बैठ पाता था। शैल्बी हॉस्पिटल के सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. धीरज दुबे ने अत्याधुनिक तकनीक से मरीज के अविकसित हिप जॉइंट को दोबारा बनाया और सर्जरी कर उसे फिर से चलने योग्य बना दिया। डॉ. दुबे ने बताया कि ऐसे केस में मरीज की सामान्य जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी नहीं हो सकती। इस केस में कूल्हे के जोड़ को दोबारा बनाने के लिए डबल विंडो एक्सपोजर तकनीक का उपयोग कर मरीज को विशेष तरह का ड्यूल मोबिलिटी कप जॉइंट लगाया गया, ताकि जोड़ की चाल सामान्य हो सके। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 15:19:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> दो साल की बच्ची के लीवर में घुसी 2 इंच लम्बी सूई ऑपरेशन कर बाहर निकाली, एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने फिर किया कमाल</title>
                                    <description><![CDATA[कार्डियक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर बचाई बच्चे की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-a-2-inch-long-needle-inserted-into-the-liver-of-a-two-year-old-girl-was-operated-and-pulled-out--the-needle-kept-on-the-bed-entered-the-girl-s-chest-while-playing--doctors-of-cardiac-surgery-department-saved-the-child-s-life-by-performing-complex-surgery/article-5471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bacha.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने दो वर्षीय बालिका के लिवर में घुसी कपड़े सिलने वाली दो इंच लंबी सूई को सर्जरी कर सफलतापूर्वक निकालने में कामयाबी हासिल की है। बच्ची को सूई घुसने के बाद पहले जेकेलोन अस्पताल में परिजनों द्वारा लाया गया था जहां से उसे एसएमएस अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग में रैफर किया गया।<br /><br /><strong>ये था मामला</strong><br />कार्डियक सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि एक दो वर्षीय बालिका जेकेलोन अस्पताल से रैफर होकर आई थी। बच्ची के छाती के एक्सरे में एक दो इंच लंबी कपड़े सिलने वाली सूई दिखाई दे रही थी। बच्ची के माता से पूछने पर उन्होंने बताया कि बच्ची बिस्तर पर खेल रही थी और खेलते खेलते सुईं धागे सहित बच्ची के छाती के निचले हिस्से में घुस गई। इस पर माता पिता बच्ची को तुरंत जेकेलोन अस्पताल ले गए। जहां इमरजेंसी में सूई निकालने का प्रयास किया गया लेकिन केवल धागा ही निकल पाया और सूई अंदर ही रह गई। कार्डियक सर्जरी में आने के बाद हमारी टीम ने बच्ची का एक्सरे किया तो सूई छाती के निचले हिस्से में दिखाई दे रही थी लेकिन जब ऑपरेशन किया गया तो सूई छाती की जगह पेट में लिवर के बांये हिससे में मिली। डॉ. शर्मा ने बताया कि सूई छाती से होती हुई डायफ्राम को पार करते हुए पेट में लिवर के बांये भाग में जाकर घंस गई लेकिन पेट के आंतरिक अंग को नुकसान नहीं हुआ। ऑपरेशन की टीम में शामिल डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. सौरभ मित्तल, डॉ. जमनाराम और डॉ. जील सहित एनेस्थिसिया से डॉ. इंदु डॉ. अंशुल और डॉ. सतवीर के प्रयासों से ऑपरेशन सफल रहा और बच्ची की जान बच गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 14:58:05 +0530</pubDate>
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                <title> पहली बार बोन बैंक से जबड़े की हड्डी लेकर की सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने बोन बैंक से जबडेÞ की हड्डी लेकर मरीज की सर्जरी की है। मरीज की मॉनिटरिंग की जा रही है। पूरी तरह से ठीक होने पर डिस्चार्ज किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/for-the-first-time-surgery-was-done-by-taking-jaw-bone-from-bone-bank/article-5408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/05new.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने बोन बैंक से जबडे की हड्डी लेकर मरीज की सर्जरी की है। जानकारी के अनुसार रावतभाटा निवासी जगदीश नरवाला (36) शौच जाते समय गिर गया। ऐसे में जबड़ा चोटिल हो गया। ये पूरी तरह से फ्रैक्चर हो गया था। इस पर परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल लेकर गए, लेकिन मरीज को राहत नहीं मिली। मरीज की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। ऐसे में मरीज को मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में लेकर पहुंचे। यहां पर इसको भर्ती कर लिया गया। 26 फरवरी को मरीज का ऑपरेशन कर दिया गया है। मरीज अभी स्वस्थ है। चिकित्सकों ने इसको मॉनीटरिंग के लिए रखा है। पूरी तरह से ठीक होने पर डिस्चार्ज किया जाएगा। हालांकि, मरीज की हालत में काफी सुधार है। ये बात भी कर रहा है। फिर भी चिकित्सक इसमें अभी किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहते है। यही वजह है कि मरीज की मॉनिटरिंग की जा रही है। पूरी तरह से ठीक होने पर इसको डिस्चार्ज किया जाएगा।</p>
<p><strong>प्लास्टिक सर्जरी विभाग का पहला मामला</strong></p>
<p>प्लास्टिक सर्जरी विभाग का ऐसा पहला मामला है, जब बोन बैंक से जबड़े की हड्डी ली गई है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल गुप्ता का कहना है कि सभी विभागों के साथ कम्युनिकेशन स्थापित कर सर्जरी की गई। अस्थि रोग विभाग के विभागाध्यक्ष और बोन बैंक प्रभारी डॉ. राजेश गोयल का काफी योगदान रहा। इसके साथ ही एनेस्थिया के चिकित्सकों के सहयोग अभाव में ऐसा संभव नहीं था। इससे पूर्व अस्थि रोग विभाग द्वारा पहला बोन ट्रांसप्लांट किया गया था। ये 7 फरवरी को हुआ था। इसके उपरांत ऐसा प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा किया गया है।</p>
<p><strong>19 दिसंबर को हुआ था बोन बैंक शुरू</strong></p>
<p>मेडिकल कॉलेज में बोन बैंक की शुरुआत 19 दिसंबर को हुई थी। स्वयं मुख्यमंत्री वचुर्अल माध्यम से जुडेÞ थे। ऐसे में इसको शुरू हुए दो माह से अधिक समय हो गया है। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने दो बड़ी सर्जरी कर दी है। ऐसा बोन बैंक से संभव हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बोन बैंक की शुरूआत होने से मरीजों को काफी राहत मिली है। ये मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पहले से सभी प्रकार की बोन उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज के विभाग सामंजस्य स्थापित कर यहां से प्राप्त कर सकते है।</p>
<p>प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा बोन लेकर ऑपरेशन किया गया है। बोन उपलब्ध थी। इसलिए उपलब्ध करवा दी गई।</p>
<p><strong>- डॉ. आरपी मीना, विभागाध्यक्ष, अस्थि रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>प्लास्टिक सर्जरी विभाग को बोन दी गई थी। उनके द्वारा ऑपरेशन किया गया था, लेकिन इसके परिणाम आने बाकी है।</p>
<p><strong>- डॉ राजेश गोयल, प्रभारी, बोन बैंक, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>बोन लेकर मरीज की सर्जरी की थी। मरीज अभी यहीं पर भर्ती है। उसकी मॉनीटरिंग की थी। इसमें सभी विभागों का सहयोग लिया गया है। हालांकि, मरीज पूरी तरह से ठीक होने पर स्थिति साफ होगी।</p>
<p><strong>- डॉ. निर्मल गुप्ता, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 15:24:47 +0530</pubDate>
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