<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/entrepreneurs/tag-9531" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>entrepreneurs - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/9531/rss</link>
                <description>entrepreneurs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कम लागत, पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया से निवेशकों का बढ़ा भरोसा: एक मई से शुरू होगा रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना का दसवां चरण, 14 मई तक जमा होगी ईएमडी   </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में 'राइजिंग राजस्थान' के निवेश समझौतों को धरातल पर लाने के लिए रीको 1 मई 2026 से प्रत्यक्ष आवंटन योजना का नया चरण शुरू कर रहा है। नियमों के सरलीकरण के बाद अब निवेशक 14 मई तक आवेदन कर सकेंगे। इस पहल से उद्यमियों को कम लागत पर औद्योगिक भूखंड मिलेंगे और विकास को गति मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/investors-confidence-increased-due-to-low-cost-transparent-allotment-process/article-151892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/riico-logo.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट में निवेशकों के साथ एमओयू निष्पादित होने के पश्चात् मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि ये सभी समझौते जमीनी स्तर पर वास्तविक निवेश में परिवर्तित होंगे। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा नई नीतियां लागू की जा रही हैं तथा पुरानी नीतियों का सरलीकरण भी किया जा रहा है। निवेश को धरातल पर लाने के लिये रीको द्वारा मार्च-2025 में प्रत्यक्ष आवंटन योजना लागू की गई जिससे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने हेतु कम लागत पर औद्योगिक भूखण्ड उपलब्ध कराये जा सकें।</p>
<p>इस योजना के अंतर्गत अब तक 1662 भूखण्डों के लिए आवंटन/ऑफर लेटर जारी किए जा चुके हैं। रीको द्वारा प्रत्यक्ष आवंटन योजना का दसवां चरण 1 मई 2026 से प्रारंभ होगा। निवेशक 14 मई 2026 तक ईएमडी जमा कर आवेदन कर सकेंगे। उद्यमियों की सहुलियत के लिये प्रत्यक्ष आवंटन योजना में प्रमुख बदलाव किया गया है। पूर्व में उद्यमी को योजना में भाग लेने के लिये चरण प्रारंभ होने से पंद्रह दिन पूर्व राज्य सरकार के साथ एमओयू निष्पादित करना होता था परंतु अब चरण प्रारंभ होने के पश्चात् भी निवेशक ईएमडी जमा कराने की अंतिम तिथि तक एमओयू करके योजना में भाग ले सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/investors-confidence-increased-due-to-low-cost-transparent-allotment-process/article-151892</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/investors-confidence-increased-due-to-low-cost-transparent-allotment-process/article-151892</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:31:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/riico-logo.png"                         length="109129"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: लाभार्थियों के लिए दो दिवसीय राज्य-स्तरीय प्रदर्शनी सह व्यापार मेले का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[एमएसएमई विकास कार्यालय जयपुर ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों हेतु शिल्पग्राम में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रदर्शनी सह व्यापार मेले का आयोजन शुरू किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inauguration-of-two-day-state-level-exhibition-cum-trade-fair-for-pradhan/article-142316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अन्तर्गत एमएसएमई-विकास कार्यालय, जयपुर द्वारा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य संस्थान, राजस्थान के सहयोग से दो दिवसीय राज्य-स्तरीय प्रदर्शनी सह व्यापार मेले का आयोजन शनिवार से शिल्पग्राम, जवाहर कला केंद्र, जयपुर में शुरू हुआ। यह रविवार को भी जारी रहेगा।</p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर श्रीमती मंजू शर्मा, सांसद, जयपुर उपस्थित रहीं। साथ ही कार्यक्रम अध्यक्ष गोपाल शर्मा, विधायक, सिविल लाइन्स, जयपुर भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के कार्यान्वयन में राजस्थान, देश में दूसरा अग्रणी राज्य है। विश्वकर्मा लाभार्थियों को ऋण देने तथा टूलकिट वितरण में भी राजस्थान, देश में दूसरे स्थान पर है। इसके साथ ही कारीगरों को प्रशिक्षण प्रदान करने में राज्य तीसरे स्थान पर है। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य राज्य भर के कारीगरों और शिल्पकारों के असाधारण कौशल और प्रतिभा को प्रदर्शित करना है। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से कारीगरों एवं उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन अलग-अलग स्टाल्स पर किया। लोगों ने विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया एवं बढ़-चढ़ कर खरीदारी की।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार प्रात: 11:00 बजे मुख्य अतिथि श्रीमती मंजू शर्मा द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर जानकारी दी। </p>
<p>कार्यक्रम का प्रथम तकनीकी सत्र दोपहर 02:00 बजे से आरंभ हुआ, जिसमें मुख्य रूप से डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग के विषय में विश्वकर्मा योजना लाभार्थियों को जानकारी दी गई। कार्यक्रम में शाम 05:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। <br />कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरूआत, रविवार प्रात: 11:00 बजे द्वितीय तकनीकी सत्र से होगी। इस सत्र में मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता के बारे में जानकारी दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inauguration-of-two-day-state-level-exhibition-cum-trade-fair-for-pradhan/article-142316</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inauguration-of-two-day-state-level-exhibition-cum-trade-fair-for-pradhan/article-142316</guid>
                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:01:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%29-%289%296.png"                         length="1510606"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान के उद्यमियों को विकास के नए रास्ते अपनाने का किया आह्वान, कहा- राजस्थान में बदलाव की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि राजस्थान में टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म, आईटी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अपनाकर राज्य देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान दे सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vice-president-jagdeep-dhankhar-called-for-the-entrepreneurs-of-rajasthan/article-111558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/453.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) की ओर से सोमवार को आयोजित "राष्ट्र निर्माण में राजस्थान के उद्यमियों की भूमिका" समारोह में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान के उद्यमियों को विकास के नए रास्ते अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म, आईटी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अपनाकर राज्य देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान दे सकता है।</p>
<p><strong>राजस्थान में बदलाव की जरूरत</strong><br />उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि राजस्थान के लोग दुनिया भर में अपनी मेहनत और उद्यमशीलता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "जहां कोई नहीं, वहां राजस्थानी की दुकान मिल जाएगी।" हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि राजस्थान विकास की दौड़ में अन्य राज्यों से पीछे रह गया है। उन्होंने कहा, "जयपुर को मेट्रो सिटी कहने में संकोच होता है। हमें बेंगलुरु जैसे शहरों से प्रेरणा लेनी होगी। जयपुर के लोग बेंगलुरु में काम कर रहे हैं, उन्हें यहीं अवसर मिलने चाहिए।"</p>
<p><strong>ग्रीन एनर्जी और टूरिज्म पर जोर</strong><br />उन्होंने जैसलमेर और बाड़मेर में सोलर और ग्रीन एनर्जी की संभावनाओं पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही, राजस्थान को डेस्टिनेशन वेडिंग का हब बताते हुए मेडिकल टूरिज्म और आईटी हब के रूप में विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "हमारा फोकस केवल बजरी पर नहीं होना चाहिए। ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश की जरूरत है।"</p>
<p><strong>सिविल सर्विसेज की भूमिका</strong><br />सिविल सर्विसेज डे के अवसर पर धनखड़ ने सिविल सर्वेंट्स की प्रशासन और विकास में अहम भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, "पिछले दस साल में भारत ने अभूतपूर्व विकास किया है। आज सुविधाएं घर तक पहुंच रही हैं। सिविल सर्वेंट्स ने शासन-प्रशासन में उत्कृष्ट काम किया है।"</p>
<p><strong>फोर्टी को निमंत्रण</strong><br />उपराष्ट्रपति ने फोर्टी की महिला और युवा विंग को 28 जुलाई को नई दिल्ली में लोकसभा और राज्यसभा भ्रमण के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, फोर्टी की कार्यकारिणी को अगले तीन सप्ताह में उपराष्ट्रपति भवन में लंच और डिनर के लिए न्योता दिया। उन्होंने फोर्टी से शिक्षा, मेडिकल टूरिज्म और सर्विस इंडस्ट्री पर ध्यान देने को कहा।</p>
<p><strong>फोर्टी का योगदान</strong><br />फोर्टी चेयरमैन सुरेश अग्रवाल ने बताया कि संगठन 15 देशों का दौरा कर चुका है और इसका लक्ष्य राजस्थान का विकास और भारत की जीडीपी में राज्य की भागीदारी बढ़ाना है। फोर्टी के संरक्षक सुरजाराम मिल ने कहा, "फोर्टी व्यापार, उद्योग और सरकार के बीच सेतु का काम करता है। अब सरकार हमारी बात सुन रही है।"</p>
<p><strong>विकास के लिए संकल्प</strong><br />धनखड़ ने उद्यमियों से आग्रह किया कि वे पुराने ढर्रे से बाहर निकलें और नए संकल्प लें। उन्होंने कहा, "सही डायग्नोसिस से समस्याओं का समाधान आसान हो जाता है। हमें अन्य राज्यों और देशों से सीखना होगा।" यह समारोह राजस्थान के उद्यमियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना, जिसमें उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए कि राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से कैसे नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vice-president-jagdeep-dhankhar-called-for-the-entrepreneurs-of-rajasthan/article-111558</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vice-president-jagdeep-dhankhar-called-for-the-entrepreneurs-of-rajasthan/article-111558</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 18:28:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/453.png"                         length="387039"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि मण्डियों में एक हफ्ते से काम ठप : आटा मिल व मसाला उद्योगों में भी हड़ताल जारी, मांगे नहीं मानने पर व्यापारियों में रोष </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ द्वारा बंद के आह्वान पर मण्डियों में एक हफ्ते से कामकाज ठप पड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-agricultural-markets-for-a-week-there-is-anger-among/article-106022"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/5.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ द्वारा बंद के आह्वान पर मण्डियों में एक हफ्ते से कामकाज ठप पड़ा है। राजधानी कृषि उपज मण्डी, कुकर खेड़ा में एक व्यापारियों की प्रदेशव्यापी आम सभा होगी। मण्डी व्यापारियों, दाल मिल, तेल मिल, आटा मिल, व मसाला उद्योग के व्यापारी भाग लेंगे। सरकार द्वारा मांगे नहीं मानी जाने के कारण भारी रोष प्रकट किया। करीब दस हजार करोड़ के व्यापारिक टर्नऑवर का नुकसान हो चुका है। जिस पर उपस्थित व्यपारियों ने चिंता जाहिर की और कहा कि व्यापारी, मुनीम, गुमास्ते, पल्लेदार बेरोजगार है और प्रदेश में उपभोक्ता खाद्य सामग्री की किल्लत का सामना कर रहे हैं। मण्डियों के बन्द होने के कारण आने वाले समय में यदि प्रदेश में खाद्य किल्लत की स्थिति ज्यादा बिगड़ती है, तो यह सरकार की जिम्मेवारी होगी।</p>
<p>राजस्थान की सभी मण्डियों में धरने-प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, के समाचार प्राप्त हुए हैं। व्यापारी राज्य सरकार को ज्ञापन भेजकर निवेदन कर रहे हैं कि हमारी मांगें शीघ्र माने जिससे मण्डियों में व्यापार गति पकड़े। व्यापारी, किसान और उपभोक्ता सभी लाभान्वित हों और मजदूरों को रोजगार मिलें। </p>
<p>राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी प्रदेश के मंत्रियों से मिलकर समस्याओं के समाधान का निवेदन कर रहे हैं जिस पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों का सकारात्मक रुख सामने आ रहा है। और संभावना जताई जा रही है कि एक-दो दिन में  के यहां से भी राजस्थान संघ के प्रतिनिधिमण्डल को बुलाया जा सकता है।</p>
<p>राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि मण्डी व्यापारियों, दाल मिल, तेल मिल, आटा मिल व मसाला उद्योग की माँग है कि कृषक कल्याण फीस समाप्त की जायें, राज्य से बाहर अन्य राज्यों में कृषि मण्डी शुल्क चुकाने के बाद राज्य में आने वाले कृषि जिन्सों पर पुनः कृषि मण्डी शुल्क तथा कृषक कल्याण फीस नहीं लिया जायें। मोटे अनाज (श्रीअन्न) पर आढ़त 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.25 प्रतिशत की जायें। फल-सब्जी मण्डी में कृषक कल्याण फीस समाप्त कर यूजर चार्ज लगाया जायें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-agricultural-markets-for-a-week-there-is-anger-among/article-106022</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-agricultural-markets-for-a-week-there-is-anger-among/article-106022</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 19:00:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/5.jpeg"                         length="384637"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेल, दाल, आटा, मसाला उद्यमियों ने किया सद्बुद्धि यज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल तथा राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के तत्वावधान में राजधानी कृषि उपज मंडी कूकर खेड़ा में सद्बुद्धि यज्ञ किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/oil-dal-dough-masala-entrepreneurs-performed-sadhuddhi-yajna/article-103017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल तथा राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के तत्वावधान में राजधानी कृषि उपज मंडी कूकर खेड़ा में सद्बुद्धि यज्ञ किया गया। उपस्थित उद्यमियों और व्यापारियों ने यज्ञ में आहुति दी। राजस्थान के तेल मिल, आटा मिल, दाल मिल तथा मसाला उद्योग के उद्योगपत्ति ने प्रदेशभर में सद्बुद्धि यज्ञ किया। संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार  पहले बाहर से आयात की गयी कृषि जिंस पर राजस्थान में मण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस नहीं लगने का निर्णय नहीं करती है, तथा साथ ही पुरानी मीलों को नयी मीलों की तरह रिप्स में छूट नहीं देती है, तो राज्य की तेल मीले, आटा मीलें. दाल मीलें, मसाला उद्योग राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलन और तेज किया जाएगा। यदि फिर भी राज्य सरकार हमारी मांग नहीं मानती है, तो जयपुर में बड़ी सभा आयोजित की जायेगी, जिसमें आंदोजन की अग्रिम रूपरेखा तय की जायेगी। आवश्यक हुआ तो तेल, दाल. आटा, मसाला उद्योगों को बन्द भो किया जा सकता है, जिसकी सारी जिम्मेवारी राज्य सरकार की होगी।</p>
<p>भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि उद्यमियों और व्यापारियों में रोष बढ़ रहा है। सरकार रिप्स में नयी मीलों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाकर नये उद्योग लगाना चाहती है। परन्तु सभी उद्योगों के लिये राज्य के बाहर से दलहन, गेहूँ, तिलहन एवं मसाले आयात करने पर दुबारा गण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस लेती हैं, जिसका उद्योगों पर वितरीत प्रभाव पडता है। पैरिटी नहीं आने के कारण पुरानी मीलें बन्द होती जा रही है। इसलिये आवश्यक है कि आयातित कृषि जिन्स पर राज्य में मण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस नहीं लगायी जायें। नयी मीलों की तरह पुरानी मीलों को भी रिप्स में छूट दी जायें तथा अन्य दी जाने वाली सब्सिडी भी पुरानी मीलों को उपलब्ध करवायी जायें। दाल मिल उद्यमी पवन अग्रवाल और ऋषभ अग्रवाल ने बताया कि यह उद्योग हित में, किसान के हित में तथा उपभोक्ताओं के हित में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/oil-dal-dough-masala-entrepreneurs-performed-sadhuddhi-yajna/article-103017</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/oil-dal-dough-masala-entrepreneurs-performed-sadhuddhi-yajna/article-103017</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 17:08:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-02/3.png"                         length="479908"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उद्योगों के लिए संसाधन पर्याप्त,  राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी पेचीदगियां बन रही नए उद्योग लगाने में बाधक।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enough-resources-for-industries--but-no-political-will/article-78835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(22)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चर्मण्यवती  के पावन  तट पर बसा कोटा, कभी राज्य की इंडस्ट्रियल राजधानी रहा कोटा, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में लाखों को रोजगार देने वाला कोटा आज क्यों औधोगिक परिदृश्य से औझल हो रहा है। कोटा अपनी पहचान क्यों खो रहा है। पानी, बिजली, ट्रांसपोर्ट  समेत हर तरह की सुविधा, पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, लेबर, कनक्टिविटी, संचार, केपिटल, सबकुछ होने के बावजूद भी कोटा अपनी औद्योगिक नगरी की पहचान क्यों खोता जा रहा है।  नए उद्योग क्यों नहीं लग रहे हैं। इन्ही सब मुद्दों को लेकर दैनिक नवज्योति ने मंगलवार को अपने कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया। परिचर्चा में शहर के उद्योगपतियों, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप और जिला उद्योग केन्द्र के अधिकारियों ने उद्योग लगाने में आने वाली समस्याओं व परेशानियों को नवज्योति के साथ साझा किया। वहीं नए उद्योग लगाने व शहर की पहचान को फिर से बनाने के लिए अच्छे सुझाव भी दिए। परिचर्चा में अधिकतर उद्यमियों ने  सरकारी  पेचीदगियों के साथ राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव को इसका प्रमुख कारण माना।  </p>
<p><strong>एयरपोर्ट सबसे बड़ी बाधा</strong><br />- युवाओं में स्किल डवलपमेंट के लिए कोई साधन नहीं। <br />- नरेगा के कारण यहां लेबर की सबसे बड़ी समस्या। <br />- उद्यमियों के तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं।<br />- पर्यावरण विभाग से उद्योग लगाने के लिए स्वीकृति लेने में आती परेशानी।<br />- उद्योग लगाने के लिए गारंटर नहीं  मिलने से बैंक से लोन नहीं  मिलता। <br />- उद्योग लगाने के लिए विभागों में आपसी तालमेल का अभाव।<br />- सस्ती दर पर जमीन नहीं मिलने से उद्योग नहीं लग पा रहे है। <br />- कोटा में बिजली का उत्पादन होते हुए बिजली महंगी है। <br />- सीएनजी और एलपीजी प्लांट नहीं होने से यहां उद्योग नहीं पनप रहे।<br />- उद्योगों को विकसित करने के लिए कॉमन प्लेटफार्म नहीं है।<br />- कोटा में उद्योगिक विकास का कोई डेटा और रोडमेप नहीं है।<br />- राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी। <br />- उद्योग लगाने में सरकारी खामियां अधिक है। <br />- लघु उद्योग के लिए ग्रामीण हाट बाजार नहीं है।<br />- किसानों को अपनी तैयार की गई उपज का दाम लगाने का अधिकार नहीं</p>
<p><strong>उद्योगों को सुविधाएं कम दी जा रही</strong><br />कोटा औद्योगिक नगरी रहा है। यहां बड़े-बड़े उद्योग थे। अभी भी  नए उद्योग के लिए जमीन भी पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन सरकार व प्रशासन की ओर से उद्योगों के लिए जमीन नहीं दी जाती। बिजली पर्याप्त है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यहां उद्योगों को कई गुना अधिक महंगे दाम पर बिजली दी जा रही है। एलपीजी जीएसटी के दायरे में आ रही है लेकिन पीएनजी को शामिल नहीं किया है। जिससे पीएनजी आधारित उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। एक्सप्रेस हाइवे बनाया जा रहा है लेकिन रेलवे कोरिडोर बन रहा है लोकिन हम ध्यान नहीं दे रहे। दूसरी बड़ा कारण नरेगा  के कारण उद्योगों को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। बिना श्रमिक के उद्योग चलाना मुश्किल है। सरकारी पेचीदगियां कम हों और राजनीतिक इच्छा शक्ति होने पर यहां नए उद्योग लग सकते हैं। <br /><strong>- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष दी एसएसआई एसोसिएशन </strong></p>
<p><strong>कोटा शिक्षा नगरी नहीं कोचिंग इंडस्ट्री</strong><br />कोटा को बार-बार शिक्षा नगरी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। जबकि यह शिक्षा नगरी नहीं यहां केवल कोचिंग मिल रही है। शिक्षा नहीं। शौध की कमी है। नवाचार की कमी है। नये विजन की कमी है जो शिक्षा से मिलती है। कोटा में एम्स जैसे उच्च शिक्षण संस्थान आने चाहिए।  जिससे यहां शोध किया जा सके। कोटा में उद्योगों की स्थापना के लिए राजनीतिक विजन की कमी है। उद्योग लगाने के लिए सरकारी प्रक्रिया को सरल करने की जरुरत है। साथ ही इंडस्ट्रियल फोरम का गठन किया जाए। जिसमें उद्योग जगत समेत इससे जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। जिससे नये उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिल सके। <br /><strong>- डॉ. गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री </strong></p>
<p><strong>प्रतिभाओं की कमी नहीं, प्लेटफार्म की जरूरत</strong><br />कोटा में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कॉमर्स में सीए व सीएस करने वालों को तो रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। लेकिन बी.कॉम करने वाले युवाओं को रोजगार व उद्योग लगाने का पर्याप्त प्लेटफार्म नहीं मिल पाता। ऐसे में उन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। कॉमर्स कॉलेज में जगह व प्रतिभाएं हैं लेकिन प्रशिक्षण देने वाले यहां आएं तो युवा नए उद्योग लगाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रैैक्टिकल एजुकेशन की कमी है। कोटा में किस तरह के उद्योग हैं और कितनी इंडस्ट्री हैं इसका एक डेटा बेस तैयार किया जाना चाहिए। कोटा में कोटा डोरिया व टैक्सटाइल के क्षेत्र में अच्छा काम हो सकता है।</p>
<p><strong>- डॉ. प्रेरणा सक्सेना, प्राचार्य कॉमर्स कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>लघु  उद्योगों को मिले प्रोत्साहन</strong></p>
<p>कोटा औद्योगिक नगरी रहा है। यहां बड़े-बड़े उद्योग रहे हैं। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है। उसमें नए व बड़े उद्योग नहीं लग पा रहे हैं तो ऐसे में लघु उद्योग लगाने को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। जिससे युवा पीढ़ी सरकारी व प्राइवेट नौकरी की तरफ न भागकर उद्योग लगाने पर फोकस करे। साथ ही उद्योग लगाने में व उन्हें चलाने में जिस तरह से सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की जाती है उसे भी समाप्त किया जाना चाहिए। सिंगल यूज प्लास्टिक,शराब व तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से नहीं उनका उत्पादन ही बंद करना समाधान है। <br /><strong>- जी.डी. पटेल, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>सरकारी अफसरों के द्वारा बनाई नीतियों से उद्योग नहीं पनप सकते</strong><br />शहर का विकास वहां के उद्योग व व्यापार के बिना संभव नहीं है। कोटा में उद्योग व व्यापार के नाम पर फिलहाल कोचिंग है लेकिन यह स्थायी उद्योग नहीं है। कोटा के विकास के लिए स्थायी उद्योग लगाने की जरूरत है। बाहर से इनवेस्टर को लाने के लिए एयरपोर्ट यहां की महती आवश्यकता है। जिसके लिए दस साल से प्रयास तो हो रहे हैं लेकिन अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। वहीं उद्योगों के लिए जो नीति बनाई जाती है उसमें उद्योग व व्यापार से जुड़े लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। सरकारी अफसरों के द्वारा बनाई नीतियों से उद्योग नहीं पनप सकते। युवाओं को नई तकनीक की जानकारी दी जाए और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लगाई जाए।  <br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>नई ट्रेक्नोलॉजी डवलप करने की आवश्यकता</strong><br />कोटा में युवाओं के रोजगार शुरू करने के लिए काफी कुछ है। यहां बिजली, पानी और जमीन होते हुए भी उद्योग नहीं लगने की सबसे बड़ी वजह यहां पर  टेक्नोलॉजी डवलप नहीं है। युवा न्यू स्टार्टअप शुरू तो करना चाहता है लेकिन उसके पास आइडिया नहीं है। यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं है। ग्रामीण हाट को बढ़ावा देने की जरुरत है। कोटा में नई इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बातें तो बहुत होती है लेकिन उनको मूर्तरूप नहीं दिया जाता है। <br /><strong>-आयुष त्यागी, आई स्टार्ट नेस्ट मेंटोर</strong></p>
<p><strong>कोटा में स्किल्ड लेबर की समस्या</strong><br />कोटा में बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कैरी बैग बनाने का स्टार्टअप शुरु किया है। इसे शुरु किए दो साल का समय हो गया है।  इसका मार्केट भी अच्छा है। उत्पादन भी हो रहा है। लेकिन इसके लिए कोटा में स्किल्ड लेबर और कच्चा माल नहीं मिलता।  कच्चा माल बिहार, उत्तर प्रदेश व गुजरात से लाना पड़ रहा है जो काफी महंगा होता है। जिससे काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। साथ ही युवा कोई भी स्टार्टअप शुरु करना चाहते हैं तो उसके लिए बैंक से लोन मिलने में भी काफी परेशानी आती है। युवाओं को प्रोत्साहन, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और जागरूकता की कमी है। कॉलेजों में जाकर प्रशिक्षण देना चाहते हैं लेकिन युवा उसे सीखना नहीं चाहते। <br /><strong>- मोहक व्यास,फाउंडर स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>कभी थी कोटा की शान जेके फैक्ट्री</strong><br /><strong>उत्पादन में कोटा की पहचान नहीं</strong><br />कोटा में करीब 750 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग हैं। लेकिन यहां किसी एक विशेष उद्योग के उत्पादन में कोटा की पहचान नहीं है। हर जिले व राज्य  में होने वाले उत्पादन की अपनी पहचान बनी हुई है। लोग उसके हिसाब से ही वहां जाते हैं। कोटा में भी होने वाले सभी उत्पादनों की पहचान को प्रोत्साहन व बढ़ावा देने की जरूरत है। उस पहचान के आधार पर ही बाहर से व्यापारी यहां माल खरीदने आएगा तभी तो इनकम होगी। कोटा के उद्योग जगत को राजनीतिक इच्छा शक्ति  की जरूरत है।</p>
<p><strong>-अनुज माहेश्वरी, सचिव दी एसएसआई एसोसिएशन </strong></p>
<p><strong>एयरपोर्ट नहीं होना सबसे बड़ी समस्या</strong><br />कोटा में युवाओं के लिए रोजगार के कई विकल्प है। लेकिन उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं होने से वो अपना स्वयं का न्यू स्टार्टअप कैसे शुरू करें इसके लिए कोई प्लेटफार्म नहीं है। यहां उद्योग लगाने के आइडिया तो बहुत दिए जाते है। उन्हे मूर्तरूप देने में पसीना आ जाता है। कोटा में कोई प्रोडेक्ट तैयार करें तो उसका मार्केट नहीं है। उस माल को अन्य स्थान पर बेचना बड़ा चुनौती का कार्य है। कोटा में न्यू स्टार्टअप शुरू करना ही बढ़ा चलेंज है। मैने अपना न्यू स्टार्टअप कोटा में तीन साल पहले शुरू किया था। कई बाधाएं आई लेकिन आज अच्छे मुकाम पर चल रहा है। कोटा में उद्योग नहीं पनपने का सबसे बड़ा कारण यहां एयरपोर्ट की सुविधा नहीं है। बड़े व्यापारी यहां इंड्रस्टीज लगाए तो उनकी कोटा से जोड़ने वाली एयरपोर्ट जैसी कनेक्टिविटी नहीं है। यहां उद्योग शुरू करने की सबसे बड़ी समस्या यह है कि न्यू स्टार्टअप से के लिए किसी से बात करें। यहां आ रही समस्याओं का समाधान करने वाले प्लेटफार्म नहीं है। <br /><strong>- ऐश्वर्या न्यू स्टार्टअप एकत्र की फाउंडर</strong></p>
<p><strong>लघु उद्योग से तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं</strong><br />कोटा में कृषि विज्ञान केंद्र युवाओं और महिलाओं को न्यू स्टार्टअप देने के लिए कई सारे ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रखे है। जिसमें महिलाएं व युवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकेते है। यहां धनिया और लहसून के प्रसंस्करण केंद्र है। सोयाबीन से सोया मिल्क और सोया पनीर बनाने का कार्य युवाओं को सिखाया जा रहा है। कोटा की अधिकांश होटल में बिकने वाला पनीर सोया पनीर है। इसका अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कोटा लघु उद्योग को प्रोत्साहन करने के लिए बाजार नहीं है। वर्तमान में आठवीं व दसवी पास महिलाएं कई नये व्यवसाय शुरू किए लेकिन उनके माल बेचने के लिए बाजार नहीं बड़े माल में बार कोड मांगते कम पड़ी लिखी महिलाएं गुणवत्ता युक्त माल तैयार कर रही है लेकिन उसका व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो पा रहा है। बार कोड रजिस्टेशन कराने जाए या अपने माल को बेचे। यह सबसे बड़ी समस्या है।   हमारे किसान जो माल तैयार कर रहे उसका दाम तय करने काम व्यापारी कर रहे है। दाम तय करने काम किसानों को मिले तभी धनिया, लहसून प्रसंस्करण का पूरा लाभ किसानों को मिल सकेंगा। लोगों में जागरुकता की कमी है। मोस्टली सब्सिडी के लालच में उद्योग लगाते हैं। <br /><strong>- गुंजन सनाढ्य, विषय विशेषज्ञ केवीके कोटा </strong></p>
<p><strong>नए उद्यमी की सफलता की स्टोरी छपे, तब दूसरे युवा  प्रोत्साहित होंगे</strong><br />कोटा में उद्योग लगाने की अपार संभावनाएं है।  कोटा में नए उद्यमी के लिए क्लब बनना चाहिए जिसमें उन्हे यह बताया जाए कि करना क्या है। अपने न्यू स्टार्टप में जो सफल रहे उनकी सक्सेज स्टोरी सोशल मीडिया अखबार में प्रकाशित हो जिससे प्रेरित होकर दूसरे युवा भी  अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। कोटा युवाओं के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वो करना क्या चाहते उनका विजन क्लीयर होना चाहिए। कई ऐसे उद्योग है जिसमे कच्चा माल लेकर युवा अपने घर से माल तैयार कर न्यू स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। हमने उनको ट्रेनिंग देने के लिए निजी वेंडर रखा हुआ जो यह जानकारी दे रहा उन्हे कैसे व्यवसाय करना है। नए उद्यमी के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करने की आवश्यकता है। इसके लिए स्टार्टअप वाले कॉलेज स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को बताएं वो क्या उद्योग कर सकते हंै। उनका विजन सही होगा तभी वो यहां उद्योग लगा सकेंगा। कॉलेज जाकर यह बताने की जरुरत है विद्यार्थी कैसे रोजगार करें। युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एक आॅन लाइन प्लेटफार्म तैयार हो जिससे अपनी उद्योग लगाने आ रही समस्या का समाधान पा सकें।  कोटा शीघ्र ग्रामीण हाट बाजार शुरू करने जा रहे जिसमें महिलाएं अपना तैयार माल बेच सकेंगी।  <br /><strong>- हरिमोहन शर्मा, संयुक्त निदेशक जिला उद्योग केंद्र कोटा </strong></p>
<p><strong>कोटा में न्यू स्टार्टअप शुरू करना बड़ी चुनौती</strong><br />हमारे पास जो युवा न्यू स्टार्टअप के लिए आ रहे उनका माइड सेट वो चार पांच साल में कमा कर दूसरा व्यवसाय करना चाहता है। अब युवा पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले उद्योग लगाने मूड में कम नजर आते है। उन्हें कम समय में अधिक लाभ वाला व्यवसाय चाहिए। नई टेक्नोलॉजी से लेस उद्योग की डिमांड ज्यादा है। कोटा में करीब 350 से अधिक न्यू स्टार्टअप चालू किए है। हमारे पास कॉलेज के विद्यार्थी आ रहे उन्हे शार्ट टर्म वाला व्यवसाय चाहिए। कोटा में कलस्टर इंडस्ट्री चाहिए इसका डवलपमेंट हो। दूसरा यहां टूरिज्म व्यवसाय में काफी संभावनाएं इस काम को करने की जरुरत है।   <br /><strong>- कौस्तुभ भट्टाचार्य, आई स्टार्ट नेस्ट मेंटोर</strong></p>
<p><strong>कोटा में उद्योग की एक साइकिल चल रही उसको तोड़ना होगा</strong><br />कोटा में नए उद्योग शुरू करने के लिए यहां पर्याप्त संसाधन है लेकिन यहां एक साइकिल बनी हुई वहीं घूम रही है। उसको चेंज करने की आवश्यकता है।  यहां कई उद्योग शुरू होकर बंद हो गए है। उसका कारण यह है कि जैसी यहां जोखिम बढ़ता है लोग यहां से पलायन कर जाते है। 80 के दशक में यहां काफी उद्योग थे लेकिन उसके बाद यहां से लोग पलायन करना शुरू कर दिया। उसके बाद यहां एजुकेशन की साइकिल चली लेकिन यह भी लंबी नहीं चलेगी। यहां स्थाई उद्योग शुरू नहीं हुए है। इसके कई फैक्टर है। <br /><strong>- रोहित पाटोदी, अध्यक्ष सीए एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>युवाओं नहीं मिलता सहजता से लोन, पैचिदगियां कम हो</strong><br />आजकल शिक्षा रोजगारमुखी रही नहीं है। कॉमर्स कॉलेज 80 के दशक में बना था। काफी जमीन है यहां युवाओं के लिए रोजगार का कोई ट्रेनिंग सेंटर खुले जिससे युवा प्रशिक्षित होकर अपना व्यवसाय कर सकें। यहां नेता चुनाव में उद्योगों की घोषणा तो करते है लेकिन यहां डेढ दर्जन से अधिक बंद हो चुके उद्योगों पुन शुरू करने की कोई बात नहीं करता है।राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी होने से नए उद्योग नहीं आ रहे है। युवाओं को रोजगार उद्योग के लिए अच्छे आइडिया देने वाला प्लेटफार्म नहीं है। उद्योग लगाने का कोई रोडमेप नहीं बताता है।  हर साल कॉमर्स कॉलेज में बड़ी कंपनियां विद्यार्थियों को रोजगार देने के लिए प्लेसमेंट  ऐजेंसी शिविर लगाती है। ट्रेनिंग के नाम पर 50 हजार रुपए मांगते है। लेकिन युवा 50 हजार  लाए कहां से।<br /><strong>- अर्पित जैन, छात्र संघ अध्यक्ष </strong></p>
<p><strong>इको संसेटिव जोन घोषित नहीं होना बड़ी बाधा</strong><br />कोटा में रोड व रेलवे कनेक्टिविटी है। बिजली व पानी की कोई कमी नहीं है। लेकिन यहां गरड़िया महादेव से कोटा बैराज तक नदी के दोनों तरफ 11-11 किमी. क्षेत्र को घड़ियाल सेंचुरी में इको सेंसेटिव जोन घोषित नहीं किया है। सरकार द्वारा जब तक इसे इको संसेटिव जोन घोषित नहीं किया जाएगा तब तक यहां न तो नए उद्योग लग सकते हैं और न ही वर्तमान उद्योेगों का विकास हो सकता है। 22 कि.मी, के क्षेत्र में पूरा कोटा कवर हो रहा है। यहां से पुराने उद्योग बंद होने का कारण भी यही है। वे विकास करना चाहते थे लेकिन उसके लिए पर्यावरण व अन्य स्वीकृतियां लेने में लगने वाले समय व उस पर होने वाला खर्चा काफी अधिक है। ऐसे में उद्यमी दूसरी जगह पर उद्योग लगा सकता है।   सरकार को शीघ्र्र सीमित एरिया को इको संसेटिव जोन घोषित करना चाहिए जिससे बाकी क्षेत्र में उद्योग लगाए जा सके। <br /><strong>- मेजर विक्रम सिंह, जीएम श्रीराम रेयंस</strong><br /><strong> </strong><br /><strong>लोगों में इच्छा शक्ति की कमी</strong><br />कोटा में व्यापार की अपार संभावनाएं है लेकिन यहां के लोगों की अब व्यापार करने इच्छा शक्ति कम होती जा रही है। जिसका सबसे बड़ा कारण है यहां जागरुकता की कमी है। नए उद्योग शुरू करने के लिए उसकी प्रक्रिया को सरल बनाए तो यहां कई उद्योग शुरू हो सकते है। कोटा उद्योग देने वाले विभागों का आपसी तालमेल का अभाव है जिससे  यहां उद्योग शुरू नहीं हो पा रहे है। यहां उद्योग लगाने के दस्तावेज का सरलीकरण हो। लोगों को नियम और कानून की पूरी जानकारी होनी चाहिए। यहां सबसे बड़ी समस्या सस्ती दर पर जमीन नहीं मिलती है। उद्योग लगाने सबसे बड़ी बाधा यहां कागजी औपचारिकता अधिक है। यहां पर्यावरण विभाग, लोन देने वाला बैंक के बीच आपसी सामजस्य नहीं है लोग लोन के लिए चक्कर लगाते लोन नहीं मिलता। उद्योग विकसित करने के लिए ठोस नीति की आवश्यकता है। यहां उद्योग नहीं पनपने का कारण मजदूर युनियन का मजबूत होना राजनीतिक संरक्षण मिलने से यहां उद्यमी आना नहीं चाहते है। <br /><strong>- प्रतिभा दीक्षित, एडवोकेट व सदस्य स्थाई लोक अदालत कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enough-resources-for-industries--but-no-political-will/article-78835</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enough-resources-for-industries--but-no-political-will/article-78835</guid>
                <pubDate>Wed, 22 May 2024 11:30:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/t21rer-%2822%291.png"                         length="528770"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लघु उद्यमियों ने फ्यूल सरचार्ज के विरोध में किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने कहा कि फ्यूल सरचार्ज के नाम पर वसूली से छोटे उद्यमियों का व्यापार चौपट हो रहा है। सामान्य उपभोक्ता की तरह छोटे उद्यमियों और व्यापारियों को भी राहत दी जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/entrepreneurs-protest-in-te-opposed-of-the-fuel-surcharge/article-52347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बिजली बिलों में फ्यूल सरचार्ज के विरोध और सरचार्ज वसूली वापस करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर छोटे उद्यमियों ने प्रदर्शन किया। लघु उद्योग भारती एवं सहयोगी संस्थान के आह्वान पर हुए विद्युत उपभोक्ता संघर्ष समिति के प्रदर्शन में लघु उद्यमी, व्यापारी और आम उपभोक्ता शामिल हुए। </p>
<p>लोगों ने कहा कि फ्यूल सरचार्ज के नाम पर वसूली से छोटे उद्यमियों का व्यापार चौपट हो रहा है। सामान्य उपभोक्ता की तरह छोटे उद्यमियों और व्यापारियों को भी राहत दी जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/entrepreneurs-protest-in-te-opposed-of-the-fuel-surcharge/article-52347</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/entrepreneurs-protest-in-te-opposed-of-the-fuel-surcharge/article-52347</guid>
                <pubDate>Fri, 21 Jul 2023 10:42:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-07/630-400-size-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AA%E0%A5%80-%283%29.jpg"                         length="240502"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत ग्रामीण अब बन रहे उद्यमी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना से राज्य का ग्रामीण जन जीवन व संस्कृति विदेशों में भी लोकप्रियता हासिल कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/villagers-are-now-becoming-entrepreneurs-under-rajasthan-rural-tourism-scheme/article-47127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ीिे्ुप.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना से राज्य का ग्रामीण जन जीवन व संस्कृति विदेशों में भी लोकप्रियता हासिल कर रही है। पर्यटन विभाग की निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा के अनुसार इस योजना के चलते राज्य में अब ग्रामीण एक उद्यमी के रूप में भी अपनी पहचान बनाने में सफल हो सकेंगे। डॉ. शर्मा के अनुसार राजस्थान के किसान इस योजना के चलते कृषि जनित आय के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन व पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने में कामयाब हो रहे हैं।</p>
<p>विभाग की निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा के अनुसार अल्प समयावधि में प्रदेश में 35 से अधिक ग्रामीण पर्यटन ईकाइयां पंजीकृत हो चुकी हैं और अधिकतर ने कार्य करना शुरू भी कर दिया है । इन ग्रामीण पर्यटन ईकाइयों के कारण विदेशी मेहमान न सिर्फ राजस्थान के ग्रामीण जीवन को नजदीक से देख औऱ समझ पा रहे हैं वरन ग्रामीण जीवन शैली को आत्मसात करते हुए ग्रामीण पर्यटन से जुड़ रहे हैं।  </p>
<p>निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा के अनुसार वर्तमान राज्य सरकार द्वारा राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना वर्ष 2022 में लागू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाना देना, ग्रामीण जन जीवन, लोक कला व संस्कृति के साथ स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए रोजगार के अवसरों को सृजित करना है।<br />योजना गांव से शहर की ओर रोजी-रोटी के लिए हो रहे पलायन को रोकने में भी काफी कारगर सिद्ध होगी  क्योंकि  राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत लैंड कंवर्जन के बिना ही भूमि का पर्यटन गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा सकता है जिसका सीधा फायदा कृषि पर्यटन ईकाइ व ग्रामीणजनों को हो रहा है। </p>
<p><strong>क्या है राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजनाः-</strong><br />इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में भी लोग पर्यटकों को अपने घर पर ठहरा सकते हैं । रिहायशी जमीन पर एक से पांच कमरों को  होम स्टे और छह से दस कमरों को गेस्ट हाऊस के रूप में संचालित किया जा सकता है ।  योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि पर  अनुमोदित कृषि ईकाइ की स्थापना की जा सकती है, जो की न्यूनतम दो हजार वर्गमीटर व अधिकतम दो हैक्टेयर होनी चाहिए । जिसके दस प्रतिशत भू-भाग पर ग्राउण्ड फ्लोर व एक मंजिल तक कुल नौ मीटर ऊंचाई तक निर्मित भाग में आवास व भोजन की व्यवस्था और शेष 90 प्रतिशत भाग का उपयोग कृषि व बागवानी कार्य, ऊंट फॉर्म, घोड़ा फार्म, पक्षी एवं पशुधन, फसल बोने के लिए, हस्तशिल्प, बगीचे  आदि गतिविधियों द्वारा पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश का अनुभव देने के लिए किया जाएगा।   इस योजना के तहत जिले के पर्यटन कार्यालय या पर्यटन स्वागत केंद्र पर आवेदन किया जा सकता है ।</p>
<p><strong>कैसे मिलेगा रोजगारः</strong><br />इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जाने वाली ईकाइयां जैसे ग्रामीण गेस्ट हाऊस, कृषि पर्यटन ईकाइयां, कैम्पिंग साइट और कैरावन पार्क की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं । </p>
<p><strong>ग्रामीण संस्कृति, हस्तशिल्प व खेलकूद का भी संरक्षणः </strong><br />राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना की खास बात यह भी है कि इसके  जरिए ग्रामीण संस्कृति, हस्तशिल्प व खेलकूद का भी संरक्षण हो रहा है, इसके लिए पर्यटन विभाग के पर्यटक स्वागत केंद्र पंचायत स्तर पर संयोजन कर उनके माध्यम से समय समय पर खेलकूद प्रतियोगिताएं, हस्तशिल्प मेले और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करवाता है जिससे पर्यटकों का सीधा जुड़ाव ग्रामीण जनजीवन, कला संस्कृति, हस्तशिल्प और कलाकारों के साथ हो सके।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/villagers-are-now-becoming-entrepreneurs-under-rajasthan-rural-tourism-scheme/article-47127</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/villagers-are-now-becoming-entrepreneurs-under-rajasthan-rural-tourism-scheme/article-47127</guid>
                <pubDate>Mon, 29 May 2023 18:23:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-05/%E0%A5%80%E0%A4%BF%E0%A5%87%E0%A5%8D%E0%A5%81%E0%A4%AA.png"                         length="432282"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिलेट्स सेक्टर में पर्यटन, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए बहुत स्कोप है</title>
                                    <description><![CDATA[जितेंद्र जोशी ने कहा कि भारत के मिलेट उत्पादन में सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में, राजस्थान का इंटरनेशनल ईयर आफ मिलैट्स 2023 में मिलेट पहल की सफलता में भी बड़ा सहयोग है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/millets-sector-has-lots-of-scope-for-tourism-startups-and/article-45942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/a-9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान को हर क्षेत्र में अपनी विविध प्रकार की मिलेट्स की पेशकश के साथए पर्यटकों के बीच एक कलिनरी डेस्टिनेशन के रूप में प्रचारित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर स्ट्रीट फूड में बाजरा को शामिल करने से इसे लोगों के बीच प्रचलित किया जा सकता है। इसलिए पर्यटन उद्योग में मिलेट्स का लाभ उठाने के अच्छे अवसर हैं। इसके साथ ही, विशेष रूप से 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ध्यान में रखते हुए, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए मिलेट्स का उपयोग करके नवीन और ओर्गेनिक व्यंजनों और उत्पादों को विकसित करने की अपार संभावना है। यह बात सहकारिता राजस्थान सरकार की प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने राजस्थान मिलेट कॉन्क्लेव में कही। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव फिक्की द्वारा किया गया।  चेयरमैन फिक्की टास्क फोर्स आन मिलेट्स एंड डायरेक्टर सीड्स साउथ एशियाए कोर्टेवा एग्रीसाइंस जितेंद्र जोशी ने कहा कि भारत के मिलेट उत्पादन में सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में, राजस्थान का इंटरनेशनल ईयर आफ मिलैट्स 2023 में मिलेट पहल की सफलता में भी बड़ा सहयोग है। कृषि विभाग, संयुक्त निदेशक शंकर बाबू ने कहा कि मिलेट्स चावल और गेहूं की तुलना में बहुत अधिक पौष्टिक होता है और इसे लोगों के दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए। कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन, निदेशक पीडब्ल्यूसी गुना नंद शुक्ला ने कहा कि राजस्थान में मिलेट्स आसानी से पैदा हो सकता है, लेकिन किसानों की आमदनी और मुनाफा बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए रोडमैप में तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/millets-sector-has-lots-of-scope-for-tourism-startups-and/article-45942</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/millets-sector-has-lots-of-scope-for-tourism-startups-and/article-45942</guid>
                <pubDate>Fri, 19 May 2023 10:28:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-05/a-9.png"                         length="120427"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा बजट में मांग रहा नया उद्योग और प्रोत्साहन पॉलिसी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में पिछले कई सालों में नया उद्योग भी नहीं लगा है।  केन्द्र व  राज्य सरकार का बजट पेश होना है। ऐसे में कोटा के उद्यमी व व्यापारी भी सरकार से यहां बहुत कुछ नया मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-budget-demanding-new-industry-and-incentive-policy/article-34748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/kota-budget-mei-maang-raha-naya-udhyog-aur-protsahan-policy...kota-news..12.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार की ओर से इस माह विधानसभा में बजट पेश किया जाना है। उस बजट में कोटा के उद्योग व व्यापार को भी बहुत कुछ मिलने की उम्मीद है। उद्यमी व व्यापारी सरकार से यहां नया उद्योग स्थापित करने व उद्योगों की प्रोत्साहन पॉलिसी को सही ढंग से लागू किया जाए। कोटा की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में रही है। यहां बड़े-बड़े उद्योग थे लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे सभी उद्योग व फैक्ट्री काल के गर्त में समाकर बंद हो गई हैं। कोटा वर्तमान में औद्योगिक नगरी से शिक्षा नगरी के रूप में पहचाना जाना जाने लगा है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन उसे पूरी तरह से स्थापित होने में समय लगेगा। कोटा में पिछले कई सालों में नया उद्योग भी नहीं लगा है। केन्द्र व  राज्य सरकार का बजट पेश होना है। ऐसे में कोटा के उद्यमी व व्यापारी भी सरकार से यहां बहुत कुछ नया मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।</p>
<p><strong>पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लिया जाए</strong><br />उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी बहुत अधिक है। हर राज्य में यह अलग-अलग है। ऐसे में इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह स्टीम लाइन पॉलिसी बनाए।  जिससे अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हो सके। उद्योगों के लिए लागू प्रोत्साहन योजना को सख्ती से लागू किया जाए। जिससे नए उद्योग लगाने के लिए व्यापारी व उद्यमी प्रोत्साहित हो सके। पेट्रोलियम उत्पादों को भी जीएसटी के दायरे में लिया जाए। राज्य सरकार बजट में इसका प्रावधान करे तो केन्द्र सरकार भी इसे जीएसटी में लेने को मजबूर होगी। शराब व तम्बाकू उत्पादों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी के स्थान पर टैक्स को 100 फीसदी बढ़ा देना चाहिए। जिससे सरकार की आय भी होगी और इस तरह के उत्पादों की बिक्री कम हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से ठोस योजना बनाई जाए। जिससे उन क्षेत्रों का विकास हो सके और लोगों को रोजगार भी मिल सके।<br /><strong>-गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>कुटीर उद्योगों को मिले बढ़ावा</strong><br />कोटा में कोटा साड़ी व खादी का अच्छा स्कोप है। यहां बड़ी मात्रा में इन्हें तैयार भी किया जा रहाहै। लेकिन इनका मार्केट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कोटा में हस्त शिल्प उत्पादों व कुटीर उद्योगों को भी बढ़ावा देने के लिए बजट में सि तरह के प्रावधान किए जाएं। कोरोना काल के बाद इस उद्योग की भी कमर टूट गई है। इसे बढ़ावा देने की जरूरत है।<br /><strong>-राजेन्द्र जैन, अध्यक्ष, खाद्यी ग्रामोद्योग संघ</strong></p>
<p><strong>नया उद्योग स्थापित हो</strong><br />कोटा की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में है। लेकिन यहां पुराने अधिकतर उद्योग बंद हो गए हैं। नया उद्योग लगा नहीं है। जिससे कोटा की औद्योगिक नगरी की पहचान खत्म होती जा रही है। सरकार से अपेक्षा है कि बजट में कोटा में कोई नया उद्योग व इंडस्ट्री स्थापित करने की घोषणा करे। जिससे यहां के लोगों को रोजगार भी मिल सके। केवल कोचिंग उद्योग के भरोसे कब तक चला जा सकता है। मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में भी उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। वहां उद्यमियों ने महंगी जमीनें ले रखी हैं। लेकिन न तो होटल बना पा रहे हैं और न ही अन्य उद्योग लगा पा रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह मुकुन्दरा में उद्योग स्थापित करने की घोषणा करे।<br /><strong>-क्रांति जैन, अध्यक्ष, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>सेंड व कोटा स्टोन को मिले बढ़ावा</strong><br />कोरोना काल के बाद से कोटा में सेंड स्टोन व कोटा स्टोन का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सेंड स्टोन का निर्यात भी नहीं हो सका। जिससे सेंड स्टोन उद्योग घाटे की मार झेल रहा है। सरकार से अपेक्षा है कि वह बजट में सेंड स्टोन व कोटा स्टोन को सरकारी भवनों के निर्माण में आवश्यक करे। जिससे इस उद्योग को बढ़ावा मिल सके।    पर्यटन के क्षेत्र में कोटा में प्रयास हो रहे हैं। रा’य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन कोटा में किया जाए। जिससे उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। <br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>निर्यात के लिए  हो बजट में प्रावधान</strong><br />कोटा की पहचान यहां के कोटा स्टोन से है। लेकिन कोटा में जो सरकारी निर्माण चल रहे हैं उनमें कोटा स्टोन का उपयोग बहुत कम हो रहा है। यहां बाहर के पत्थर का उपयोग हो रहा है। कोटा स्टोन को बढ़ावा देने के लिए बजट में इस तरह की पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। जिससे इस उद्योग को लगाने के लिए उद्यमी आगे आएं। लेकिन वर्तमान में इस उद्योग पर आर्थिक संकट मंडराने लगा है। कोटा स्टोन का निर्यात बढ़ाने के लिए भी  बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-राजेश गुप्ता, संस्थापक अध्यक्ष,हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-budget-demanding-new-industry-and-incentive-policy/article-34748</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-budget-demanding-new-industry-and-incentive-policy/article-34748</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Jan 2023 15:22:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-01/kota-budget-mei-maang-raha-naya-udhyog-aur-protsahan-policy...kota-news..12.1.2023.jpg"                         length="302829"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन गार्ड के भरोसे अमृता हाट की 110 दुकानें</title>
                                    <description><![CDATA[मेले में दुकाने लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ नहीं है। रात के समय एक गार्ड रहता है। बाहर घुमन्तु जाति के लोग रहते है। इनके बच्चे और महिलाए दिन समय घुमती रहती है मौका देखते ही सामानों पर हाथ साफ कर देती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/110-shops-of-amrita-haat-depends-on-three-guards/article-32825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/teen-guard-k-bharose-amrita-haat-ki-110-dukanei..kota-news..20.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग स्तरीय अमृता हाट मेले की शुरुआत 16 दिसंबर को हुई। मेले में प्रदेशभर के महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्कृष्ट हस्तनिर्मित उत्पादों की 110 दुकानें लगाई गई है। लेकिन महिला एवं अधिकारिता विभाग की ओर से सुरक्षा के नाम पर तीन गार्ड लगाए है। दशहरा मैदान में अतिक्रमण कर रह रहे घुमत्तु जाति के लोगों ने डेरा जमा रखा है। ये लोग मेला प्रांगण में घुसकर दुकानदारों के सामान चुरा रहे है। वहां तैनात गार्ड इनको कई बार बाहर निकाल चुका है। लेकिन सामान खरीदने के बहाने ये अंदर प्रवेश कर के व्यवस्था बिगाड़ रहे है। लोगों ने बताया कि रविवार को यहां बड़ी संख्या में लोग आए थे। शाम के समय एक व्यक्ति की मोटर साइकिल चोरी हो गई वहीं मेला प्रागंण लगी कपड़े की एक दुकान से एक कुर्ता , कुशन आदि चोरी हो गए है। मेले में दुकाने लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ नहीं है। रात के समय एक गार्ड रहता है। बाहर घुमन्तु जाति के लोग रहते है। इनके बच्चे और महिलाए दिन समय घुमती रहती है मौका देखते ही सामानों पर हाथ साफ कर देती है। इसलिए हर समय सर्तक रहना पड़ रहा है। सर्दी में सामान के साथ रहना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हस्तकला को प्रोत्साहन के लिए लगाया मेला</strong><br /> महिला स्वयं सहायता समूह के उत्पाद गुणवत्ता के साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेहतर होते हैं।  उनको बाजार देने के लिए इस मेले का आयोजन किया गया।  लेकिन यहां प्रदेश से आई महिलाए यहां की अव्यवस्था से परेशान नजर आ रही है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर महिला समूह द्वारा एकता व मनोभाव से घरेलू उत्पादों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के बाजारीकरण के युग में महिला स्वयं सहायता समूह के उत्पादों का भली-भांति प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। लेकिन यहां प्रचार प्रसार नहीं होने से लोग कम आ रहे है। रविवार को अच्छी भीड रही लेकिन माल कम बिका। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />मेले में पुलिस और विभाग के तीन गार्ड लगा रखे है। रात के समय मेले प्रागंण का गेट बंद कर दिया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है। <br /><strong>- मनोज मीणा,उपनिदेशक महिला अधिकारिता विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/110-shops-of-amrita-haat-depends-on-three-guards/article-32825</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/110-shops-of-amrita-haat-depends-on-three-guards/article-32825</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Dec 2022 16:44:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-12/teen-guard-k-bharose-amrita-haat-ki-110-dukanei..kota-news..20.12.2022.jpg"                         length="830847"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नारायण राणे कल करेंगे उधमियो को सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[फोर्टी यूथ आईकॉन अवॉर्ड समारोह का होगा आयोजन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-24-at-15.16.33.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर–फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री की ओर से गुरुवार को फोर्टी यूथ आईकॉन अवॉर्ड समारोह का आयोजन किया जाएगा । होटल हिल्टन में शाम 7:00 बजे से शुरू होने वाले इस अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नारायण राणे होंगे । समारोह की अध्यक्षता  बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष  सतीश पूनिया करेंगे।  जयपुर सांसद  रामचरण बोहरा  विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे। फोर्टी की ओर से पहली बार प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में  अपनी मेहनत और लगन  से  राजस्थान का देश और दुनिया में नाम रोशन करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। इस अवार्ड समारोह में 15 श्रेणियों में कुल 33 अवार्ड दिए जाएंगे ।</p>
<p> </p>
<p>फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है कि हमारा देश दुनिया में सबसे ज्यादा युवा शक्ति वाला देश है। इस युवा शक्ति को देश के विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उसका प्रोत्साहन जरूरी है इसलिए फोर्टी ने यह अवॉर्ड्स की श्रंखला शुरू की है। फोर्टी के महासचिव नरेश सिंगल का कहना है कि हमने इस अवार्ड के लिए प्रदेश की विभिन्न उन  प्रतिभाओं को चुना है , जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मेहनत से एक अलग मुकाम हासिल किया है। फोर्टी के कार्यकारी अध्यक्ष अरुण अग्रवाल का कहना है फोर्टी प्रदेश के उद्योगों और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करती है साथ ही यहां बेहतरीन  औद्योगिक वातावरण बने इसके प्रयास  करती है इसी क्रम में युवा उद्यमियों और दूसरे सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले युवाओं को इस अवार्ड समारोह में सम्मानित किया जाएगा । आ</p>
<p> </p>
<p>योजन कमेटी के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि फोर्टी  की जूरी ने अवार्ड के लिए  पूरी पारदर्शिता और गहन अध्ययन  के बाद युवाओं का चयन किया है । फोर्टी के चीफ सेक्रेट्री गिरधारी लाल खंडेलवाल का कहना है  कि फोर्टी प्रदेश में उद्योग और व्यापार का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित कर हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। फोर्टी ने प्रदेश के युवा  उद्यमियों को  आगे बढ़ाने के लिए फोर्टी यूथ विंग की स्थापना की है । इसके सक्रिय प्रतिभाशाली अध्यक्ष  धीरेंद्र सिंह राघव   का कहना है  कि हमारे प्रदेश में युवा हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं फोर्टी यूथ विंग जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि उनको और प्रोत्साहित करें ताकि यह नई ऊर्जा के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकें। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए हमने फोर्टी यूथ आईकॉन अवार्ड की शुरुआत की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2703</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2703</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Nov 2021 18:50:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-11/whatsapp-image-2021-11-24-at-15.16.33.jpeg"                         length="199522"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        