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                <title>hike - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: डीए में 20% की बढ़ोतरी, अक्टूबर से मिलेगा 38% महंगाई भत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने बजट में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 20% अतिरिक्त डीए/डीआर की घोषणा की है। इसके साथ ही कुल डीए बढ़कर 38% हो जाएगा, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-gift-to-west-bengal-employees-da-increased-by-20/article-157736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/west-bengal-budget-2026.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने सोमवार को वर्ष 2026 के राज्य बजट में राज्य सरकार के कर्मचारियों, अर्ध-सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक बड़े राहत पैकेज की घोषणा की। बजट की घोषणा के अनुसार, मौजूदा 18 प्रतिशत महंगाई भत्ते के अलावा अतिरिक्त 20 प्रतिशत डीए दिया जाएगा, जिससे कुल डीए 38 प्रतिशत हो जाएगा। पेंशनभोगियों को भी इसी दर पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) मिलेगी। बढ़ी हुई डीए और डीआर दरें एक अक्टूबर, 2026 से लागू होंगी। सरकार ने इस घोषणा को सरकारी नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को लागू करने में कर्मचारियों के योगदान की मान्यता के तौर पर पेश किया है। भाजपा सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि अपने पहले राज्य बजट में डीए में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है।</p>
<p>विधानसभा चुनावों से पहले, पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में वादा किया गया था कि अगर वे सत्ता में आए, तो राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार की दरों पर डीए दिया जाएगा। सोमवार को बजट में की गई घोषणा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाती है। बढ़ोतरी के बावजूद, राज्य और केंद्र सरकार की डीए दरों के बीच अंतर बना हुआ है। इस नई बढ़ोतरी के साथ, पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों का डीए बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाएगा जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अभी 58 प्रतिशत डीए मिलता है, जिससे 20 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए में की गई यह बढ़ोतरी अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारी संगठनों को पहले ही बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिल गए थे और उन्हें ऐसी घोषणा की उम्मीद थी। कर्मचारियों के संयुक्त मंच के नेताओं ने बजट पेश होने से पहले बकाया डीए का भुगतान करने, स्थायी पद सृजित करने और अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर वेतन संरचना लागू करने की मांगें भी उठाई थीं। इस ताज़ा घोषणा से पूरे पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों को बहुत राहत मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:11:55 +0530</pubDate>
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                <title>कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, जनता की जेब पर डाका डालने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[1 जून से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹42 की बढ़ोतरी हुई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत ₹3113.50 हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे जनता की जेब पर डाका बताते हुए कहा कि कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद कीमतें बढ़ाकर सरकार 'लूट का सिलसिला' चला रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-mp-tiwari-attacks-the-government-on-the-cost-of/article-155623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pramod-tiwari-i.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा उपनेता और सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर जनता की जेब पर डाका डालने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक तरफ प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी सरकार गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है।</p>
<p>प्रमोद तिवारी ने सोमवार को कहा कि 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपये और कोलकाता में 3255.50 रुपये पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम में 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे छात्रों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों पर सीधा असर पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि जनवरी से जून के बीच 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल 1560 रुपये और 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 323 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। </p>
<p>उन्होंने इसे “लूट का सिलसिला” बताते हुए कहा कि सरकार लगातार जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं, इसके बावजूद एलपीजी के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की जेब काट रही है और लोग इस स्थिति को भली-भांति समझ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गैस कंपनियों ने 1 जून से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे पहले 1 मई को भी कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए थे। नयी कीमतें लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:29:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर लगी आग: 10 दिन में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें दिल्ली सहित आपके शहर में क्या है आज भाव ?</title>
                                    <description><![CDATA[तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए। दिल्ली में पेट्रोल ₹2.61 महंगा होकर ₹102.12 और डीजल ₹2.71 बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। पिछले 11 दिनों में यह चौथी बढ़ोतरी है, जिससे जनता पर महंगाई का बोझ और बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/inflation-again-hits-the-common-mans-pocket-petrol-and-diesel/article-154895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/petrol3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ा दिये। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल आज से 2.61 रुपये महंगा होकर 102.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। डीजल की कीमत भी 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गयी। गत 15 मई से अब तक 11 दिन में दोनों जीवाश्म ईंधनों की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है।</p>
<p>चार बार में दिल्ली में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये महंगा हो चुका है। दूसरे शहरों में भी कीमतों में इसी अनुपात में बदलाव किया गया है, हालांकि वैट तथा लॉजिस्टिक्स लागत अलग-अलग होने से प्रभावी बदलाव में थोड़ा अंतर होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 11:17:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रेपो दर में बढ़ोतरी से शेयर बाजार धराशाही</title>
                                    <description><![CDATA[ निफ्टी 391.50 अंक का गोता लगाकर 16,677.60 अंक पर रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/share-market-collapse-due-to-hike-in-repo-rate/article-9136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/stock-market-1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। रिजर्व बैंक (RBI) के महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से आज अप्रत्याशित कदम उठाते हुए रेपो दर में 40 आधार अंक की बढ़ोतरी करने से घबराए निवेशकों की चौतरफा बिकवाली से शेयर बाजार में कोहराम मच गया, जिससे शेयर बाजार में तेजी से गिरावट हुई।<br /><br />बता दे कि आरबीआई ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुये इसको काबू में करने के उद्देश्य से रेपो दर में बुधवार को तत्काल प्रभाव से 40 आधार अंक की बढोतरी करने का निर्णय लिया है। इससे कारोबार के अंतिम चरण में हुई चौतरफा बिकवाली से बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1306.96 अंक लुढ़ककर करीब ढाई माह के निचले स्तर एवं 56 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे 55,669.03 अंक पर आ गया। इससे पहले सेंसेक्स 14 मार्च को 56,486.02 अंक पर रहा था। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 391.50 अंक का गोता लगाकर 16,677.60 अंक पर रहा।<br /><br />साथ ही विश्व स्तर पर निवेशक वर्ष 2000 के बाद से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में सबसे बड़ी वृद्धि के लिए तैयार हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका असर भी घरेलू शेयर बाजार पर रहा। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.57, जर्मनी का डैक्स 0.23, जापान का निक्केई 0.11 और हांगकांग का हैंगसैंग 1.10 प्रतिशत टूट गया जबकि चीन के शंघाई कंपोजिट में 2.41 प्रतिशत की तेजी रही। इस दौरान बीएसई के सभी 19 समूहों में गिरावट रही। बेसिक मैटेरियल्स 2.53, सीडीजीएस 3.01, ऊर्जा 1.02, एफएमसीजी 1.67, वित्त 2.63, हेल्थकेयर 2.92, इंडस्ट्रियल्स 2.64, टेलीकॉम 2.73, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.88 और रियल्टी समूह के शेयर 3.31 प्रतिशत गिर गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 May 2022 18:57:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश की नई मौद्रिक नीति एवं मूल्य वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति के अंतर्गत कोई भी नीतिगत ब्याज दरों में परिवर्तन नहीं किया गया है और यथास्थिति वादी दृष्टिकोण को अपनाते हुए कोरोना काल में घोषित नीति को ही लागू किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/country-s-new-monetary-policy-and-price-hike/article-4564"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/rbi.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति के अंतर्गत कोई भी नीतिगत ब्याज दरों में परिवर्तन नहीं किया गया है और यथास्थिति वादी दृष्टिकोण को अपनाते हुए कोरोना काल में घोषित नीति को ही लागू किया गया है। संभावना व्यक्त की जा रही थी कि विश्व के विकसित देशों में मूल्य वृद्धि जनित मुद्रास्फीति ब्याज दरों पर प्रभाव पड़ा है तथा मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए अमेरिका का फेडरल रिजर्व बैंक ब्याज दर में वृद्धि का नीतिगत निर्णय ले सकता है। इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का मानना है कि विश्व के दूसरे विकसित देशों की तुलना में भारत में मूल्य वृद्धि के प्रभाव एवं कारणों में अंतर है। भारत में मूल्य वृद्धि के कारण विकसित देशों की तुलना में अलग है। विश्व के देशों में विश्व खाद्य संगठन के अनुसार खाद्य मूल्य वृद्धि लगभग 30 प्रतिशत है, जबकि भारत में खाद्य मूल्य वृद्धि 6.5 प्रतिशत है। अमेरिका में कार मूल्य वृद्धि का कारण है लेकिन भारत में नहीं है। यूरोपीय देशों में ट्रकों को चलाने के लिए ड्राइवर की उपलब्धता मूल्य वृद्धि का कारण है लेकिन भारत में नहीं है। ऐसी स्थिति में मूल्य वृद्धि की संभावनाओं एवं जोखिम का विशेषण करके एवं आमिकान जैसे कोरोना के पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए ही यथावत एवं समायोजित मौद्रिक नीति घोषित की गई है तथा मौद्रिक नीति समिति की भी यही सिफारिश है।</p>
<p><br />मौद्रिक नीति के अंतर्गत विकास एवं मूल्य स्थिरता एक महत्वपूर्ण चुनौती है। आर्थिक सर्वेक्षण के अंतर्गत वर्ष 2022-23 के लिए 8 से 8.5 प्रतिशत आर्थिक विकास दर में वृद्धि का अनुमान लगाया गया था, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने विकास दर वृद्धि का अनुमान 7.8 प्रतिशत लगाया है। इसी तरह से खुदरा मुद्रा प्रसार 5.3 प्रतिशत घटकर वर्ष 2023 में 4.5 प्रतिशत रह जाएगा। वर्तमान खुदरा मुद्रा मूल्य सूचकांक लगभग 6 प्रतिशत है, जबकि थोक मूल्य सूचकांक 12 से 13 प्रतिशत तक है। खुदरा मूल्य एवं थोक मूल्य सूचकांक में अंतर का कारण कर माना जाता है जिसको कि खुदरा मूल्य सूचकांक की गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता है। मौद्रिक नीति प्रतिवेदन में विकास दर में कमी का अनुमान है, लेकिन मुद्रास्फीति नियंत्रित सीमा में 4 से 6 प्रतिशत के मध्य रहेगी। देश में विकास दर में वृद्धि भी आवश्यक है तथा महंगाई पर नियंत्रण भी। देश के गरीब, निर्धन एवं आमजन को विकास भी प्रभावित करता है तथा महंगाई भी। यदि विकास दर बढ़ती है तो रोजगार, आय एवं उत्पादन स्तर बढ़ता है, लेकिन महंगाई बढ़ती है तो आमजन का जेब खर्च बढ़ता है। लेकिन मूल्य वृद्धि का लाभ उद्योगपतियों, व्यापारियों, दलालों एवं कंपनियों की जेबों में तो जाता है, लेकिन गरीब की जेब तो खाली हो जाती है। इसका सीधा सा कारण भारत में मजदूरी की दरें तेजी से नहीं बढ़ती है तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम सरकारी एवं संगठित क्षेत्रों पर तो लागू होता है लेकिन असंगठित एवं निजी क्षेत्र पर नहीं।</p>
<p><br />महंगाई को रोकने एवं विकास दर में वृद्धि का उपाय यह है कि ब्याज दरें संतुलित एवं स्थिर रहे। मौद्रिक नीति में उल्लेखित बैंक दर, रेपो दर एवं रिवर्स रेपो दर साख की लागत को प्रभावित करती है तथा बचत पर मिलने वाले ब्याज दर से भी इस संबंध है। यदि उपभोग को बढ़ाना है तो ब्याज दर कम होनी चाहिए ताकि मांग में उठाव पैदा हो। मांग का उपभोग स्तर पूर्व कोरोना काल के स्तर पर आए। देश में रियलिटी एवं कंस्ट्रक्शन क्षेत्र, होटल एवं पर्यटन व्यवसाय, आॅटोमोबाइल क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद आदि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। इन उत्पादों में लगी कंपनियों एवं थोक व खुदरा व्यापारियों को अत्यधिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। यदि ब्याज दरें बढ़ती है तो उपभोक्ता ऋण महंगे हो जाते हैं तथा बड़ी लागत को उपभोक्ता तक लादने में उत्पादक व व्यापारी शत-प्रतिशत सफल नहीं हो पाते हैं।उपभोक्ता वस्तुओं में हुई मूल्य वृद्धि में कर नीति एवं साख की लागत का अत्यधिक प्रभाव होता है, जो कि आपूर्ति बाधा उत्पन्न करता है। ऐसे में साख की उठाव क्षमता को बनाए रखना एवं बढ़ाना है। देश में मांग के साथ-साथ पूर्ति बाधाएं भी मूल्य वृद्धि का कारण बन जाती है जो कि लॉजिस्टिक लागत को बढ़ाती है। देश में लॉजिस्टिक लागत अत्यधिक है, जो कि 15 से 20 प्रतिशत तक है, जबकि चीन में मात्र 4 से 5 प्रतिशत है । यह भी कारण है कि दुनिया के देशों में चीन सस्ता उत्पाद बेचने में सफल हो जाता है।</p>
<p><br />देश में आगामी समय में संभावित सामान्य मानसून, निर्यात बढ़ोतरी, नए बजट में पूंजीगत व्यय में वृद्धि तथा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राथमिकता वृद्धि की दृष्टि से मूल्य राहत प्रदान होने की संभावनाएं है, लेकिन देश में खाद्य एवं ऊर्जा मूल्य वृद्धि पर कोई नियंत्रण नहीं है। खाद्य उत्पादों के मूल्य तेजी से बढ़ते हैं तो मूल्य सूचकांक भी बढ़ता है जिसके लिए आयात एक विकल्प है। देश में दालों एवं खाद्य तेल के संबंध में यह बात लागू होती है। दूसरी समस्या खनिज तेल के अंतरराष्टÑीय मूल्य में तेजी से वृद्धि है, जो कि दिसंबर 2021 में 69 डालर प्रति बैरल था जो कि अभी 94 प्रति बैरल हो गया है तथा रूस यूक्रेन के युद्ध एवं रूस व अमेरिकी देशों की खनिज तेल उत्पादन की भावी नीति मूल्य वृद्धि का कारण बनने की संभावना है। अभी देश में पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं तो पेट्रोल एवं डीजल के दाम तेल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए हैं चुनाव बाद तेजी से बढ़ेंगे। यहां पर अर्थ नीति असफल है, राजनीति नहीं। </p>
<p><strong>  -डॉ. सुभाष गंगवाल<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>अर्थचक्र</strong></span></span><br />महंगाई को रोकने एवं विकास दर में वृद्धि का उपाय यह है कि ब्याज दरें संतुलित एवं स्थिर रहे। मौद्रिक नीति में उल्लेखित बैंक दर, रेपो दर एवं रिवर्स रेपो दर साख की लागत को प्रभावित करती है तथा बचत पर मिलने वाले ब्याज दर से भी इस संबंध है। यदि उपभोग को बढ़ाना है तो ब्याज दर कम होनी चाहिए ताकि मांग में उठाव पैदा हो। मांग का उपभोग स्तर पूर्व कोरोना काल के स्तर पर आए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 14:27:19 +0530</pubDate>
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                <title>उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में नहीं होगी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने जारी किया टैरिफ : स्थाई शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/619f3363046e0/article-2714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/electricity-grid-energy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कम्पनियों की याचिकाओं पर टैरिफ जारी कर दिया है। इसमें आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बिजली दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। बिजली कम्पनियों के उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज बढ़ाने के प्रस्ताव को भी आयोग ने खारिज कर दिया है। आयोग की टैरिफ में घरेलू, अघरेलू, सार्वजनिक स्ट्रीट लाइट, कृषि, लघु, माध्यम और बड़े उद्योग और मिश्रित भार ईवी चार्जिंग स्टेशन और ट्रैक्शन लोड के उपभोक्ताओं को राहत दी है। इन श्रेणियों के लिए मौजूदा छूट भी लागू रहेगी।  जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 के लिए टैरिफ याचिकाएं लगाई थी। इन याचिकाओं पर आए आपत्ति-सुझावों के बाद और आयोग की बैठकों के बाद फैसला हुआ। आयोग ने वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 पर विचार किया। इसमें मौजूदा टैरिफ दरों के राजस्व आंकलन के हिसाब से जयपुर और अजमेर डिस्कॉम सरप्लस और जोधपुर डिस्कॉम घाटे में सामने आया। <br /> <br /> <strong>छूट लागू रहेगी</strong><br /> आयोग ने राहत देने के पीछे कोविड का प्रभाव, फिक्स चार्ज से संभावित व्यावहरिक कठिनाई और राजस्व अंतराल का हवाला दिया है। सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी नहीं हुई। इन श्रेणियों के लिए मौजूदा छूट भी लागू रहेगी। बीपीएल श्रेणी और सिलिकोसिस पीड़ित परिवार उपभोक्ताओं के लिए छूट लागू रहेगी। <br /> <br /> <strong>बड़े उपभोक्ताओं पर लगेगा सरचार्ज</strong><br /> बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए पिछली बार दी गई छूट के वांछित परिणाम नहीं मिलने पर खपत के आधार पर सरचार्ज की व्यवस्था की गई है। अब बड़े उद्योगों को रात 12 से  सुबह छह बजे तक 15 फीसद छूट मिलेगी और सुबह छह से दस बजे तक पांच प्रतिशत सरचार्ज लगेगा। आयोग ने व्हीलिंग शुल्क और क्रॉस सब्सिडी शुल्क के सरचार्ज भी तय किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Nov 2021 12:42:33 +0530</pubDate>
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