<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/ganesh/tag-9591" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>ganesh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/9591/rss</link>
                <description>ganesh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>न्याय के द्वार पर बिराजे है पूरब मुखी गणेश</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा न्यायालय परिसर का पूरब मुखी गणेश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/east-facing-ganesh-is-seated-at-the-gate-of-justice/article-126022"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर का न्यायालय परिसर केवल न्याय का केंद्र ही नहीं, बल्कि आस्था का भी पावन स्थल है। यहां स्थित पूरबमुखी गणेश मंदिर न केवल न्यायालयकर्मियों की श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि आमजन के लिए भी विश्वास और आस्था का प्रतीक बना हुआ है। लगभग 177 वर्ष पुराना यह मंदिर आज भी अपनी ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक मान्यता को जीवित रखे हुए है। इस गणेश मंदिर की स्थापना रियासतकालीन समय में हुई थी। पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही मान्यता है कि जब कोटा का न्यायालय भवन आकार ले रहा था, तभी इस परिसर में गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई थी। गणेशजी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं से मिली जानकारी के अनुसार पूरब दिशा ज्ञान, विकास और ऊर्जा की दिशा मानी जाती है। पूरबमुखी गणपति की उपासना करने से न केवल कार्य सिद्धि होती है, बल्कि जीवन में समृद्धि और सकारात्मकता भी बनी रहती है। कोटा न्यायालय परिसर का पूरब मुखी गणेश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। इस मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर रिद्धी-सिद्धी को भी विराजमान करवाया गया। इस मंदिर में हनुमान व शिव परिवार के साथ गणेश भगवान विराजमान है।</p>
<p><strong>कोर्ट मैरिज और पूरब मुखी गणेश को धोक</strong><br />कोटा शहर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में जोड़े कोर्ट मैरिज के लिए न्यायालय पहुंचते हैं। विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये नवदम्पत्ति मंदिर में जाकर गणेशजी को धोक लगाना अपनी परंपरा मानते हैं। उनका विश्वास है कि जीवन के नए अध्याय की शुरूआत विघ्नहर्ता गणेशजी के आशीर्वाद से करने पर वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। </p>
<p><strong>आस्था का अनूठा संगम की अलग ही पहचान</strong><br />न्यायालय परिसर में रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं। इनमें न्यायालयकर्मी, वकील, पक्षकार और उनके परिजन शामिल होते हैं। अदालत के बाहर इंतजार करने वाले लोग भी कुछ क्षण मंदिर में जाकर गणपति का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ आने वाले श्रद्धालु प्राय: वही होते हैं जो न्याय के काम से जुड़े होते हैं। चाहे कोई केस की सुनवाई के लिए आया हो या कोर्ट मैरिज करवाने के लिए—हर कोई पहले गणपति को धोक लगाता है। यह मंदिर को बाकी धार्मिक स्थलों से एक अलग ही पहचान रखता है।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी पर होता है विशेष शृंगार</strong><br />पूरे वर्ष मंदिर में पूजा-पाठ नियमित रूप से चलता है, लेकिन गणेश चतुर्थी पर इसका स्वरूप ही बदल जाता है।  फूलों, झालरों और रोशनी से मंदिर परिसर को सजाया जाता है। न्यायालयकर्मी और श्रद्धालु मिलकर गणपति का श्रृंगार करते हैं और दिनभर भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। गणेश चतुर्थी पर यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। कई बार न्यायालय परिसर से निकलने वाले राहगीर भी आस्था के इस रंग में रंग जाते हैं।</p>
<p><strong>कोर्ट मैरिज कर लेते है आशीर्वाद</strong><br />श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से यहां जो भी प्रार्थना की जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। न्यायालय में केस लड़ रहे कई लोग मंदिर में आकर यह मन्नत भी मांगते है उनके पक्ष में फैसला हो। कोर्ट मैरिज करने वाले नवदंपत्ती भी धोक लगाते है। वहीं इसके अलावा कई लोग परीक्षा, नौकरी, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं से निजात पाने के लिए भी यहां आते हैं। कई बार लोग केस की सुनवाई से पहले गणेशजी का आशीर्वाद लेकर ही अदालत कक्ष में प्रवेश करते हैं।</p>
<p><strong>न्यायालयकर्मी ही होते हैं पुजारी</strong><br />पुजारी हरिओम शर्मा व गुलाब सैनी ने बताया कि मंदिर की एक और अनूठी विशेषता है कि इसका पुजारी भी कोर्टकर्मी ही है। परंपरा के अनुसार इस मंदिर की देखरेख हमेशा न्यायालय से जुड़े व्यक्ति ही करते आए हैं। प्रारंभिक समय में प्रेम नामा नामक कोर्टकर्मी मंदिर की पूजा-अर्चना करते थे। धीरे-धीरे जब मंदिर का विस्तार हुआ तो इसे न्यायालय परिसर के बाहर की ओर भव्य रूप में स्थापित किया गया। इसके बाद गुलाब सैनी ने पूजा-पाठ की जिम्मेदारी संभाली। वे कोर्ट में स्टेनो थे, वो अब रिटायर्डकर्मी है। वर्तमान समय में प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती तथा मंदिर की देखभाल कोर्टकर्मी हरिओम शर्मा ही करते है। यह परंपरा इस मंदिर को न्यायालय से गहराई से जोड़े रखती है। यह मंदिर अवकाश के अलाा पूरे दिन खुला रहता है। कभी भी आकर पूजा-अर्चना करते सकते है।</p>
<p><strong>हर मन्नत होती हैं पूरी</strong><br />एडवोकेट अतीश सक्सेना ने बताया कि इस मंदिर में हर मनोकामना पूर्ण होती  है। इस कोर्ट परिसर में यहां आने वाले लोग गणेश जी को धोक लगाकर सच्चे मन से मनोकामना करते हैं। कोर्ट में अधिकांश मामले आते है। लोग अपने पक्ष में फैसले को लेकर भी पूरब मुखी गणेश से कामना करते है। इस परिसर में अधिकांश श्रद्धालु एडवोकेट, न्यायालयकर्मी ही है। यहां बाहर से भी श्रद्धालु आते हैं। न्याय के द्वार पर ही विराजमान है। यहां से आने-जाने वाले सभी कर्मी व अन्य धोक लगाकर निकलते है।</p>
<p><strong>मेरी भी मनोकामना हुई पूरी</strong><br />एडवोकेट विनिता कुमारी ने बताया कि कोर्ट में 2015 से कार्य कर रही हूं। मैंने हमेशा से ही कोर्ट परिसर में आते ही पहले पूरबमुखी गणेश को याद करके ही अपना कार्य की शुरूआत करती हंू। पूरब मुखी गणेश मंदिर रियासतकालीन का बना हुआ है। इस मंदिर के पुजारी रोजाना पूजा-अर्चना करते है। वहीं अधिकांश कर्मी उनको धोक लगाकर ही अपने कार्य को शुरू करना पसंद करते है। मैंने भी अच्छे वर के लिए कामना की थी जो मेरी पूरी हुई। आज मैं अपने परिवार के साथ काफी खुश हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/east-facing-ganesh-is-seated-at-the-gate-of-justice/article-126022</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/east-facing-ganesh-is-seated-at-the-gate-of-justice/article-126022</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 16:24:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/untitled-design-%281%293.png"                         length="393262"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार सौ साल पुराना गणेश मंदिर आस्था और रहस्य का है अनोखा संगम</title>
                                    <description><![CDATA[रियासतकालीन तालाब किनारे बने चबूतरे से जुड़ी है प्राचीन परंपरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-four-hundred-year-old-ganesh-temple-is-a-unique-confluence-of-faith-and-mystery/article-125789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के हृदय स्थल पर, पुरानी सब्जी मंडी स्थित विशाल पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान हैं श्री खड़े गणेश। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और अध्यात्म का संगम है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पहले यहां सब्जी मंडी लगती थी। अब वर्तमान में पुरानी सब्जी के नाम से ही इस जगह को जानते है। सड़क के दोनों तरफ बाजार स्थित है। रियासतकालीन समय में यहां एक तालाब हुआ करता था। उसी तालाब किनारे बने चबूतरे पर खड़े गणेशजी स्थापित थे। पहले यहां उनके साथ रिद्धी सिद्धी विराजमान नहीं थी। लेकिन वर्तमान में पूजा-अर्चना के साथ उनके साथ रिद्धी-सिद्धी को भी विराजमान करवाया। इस दौरान हवन भी हुए, प्राण-प्रतिष्ठा भी करवाई। स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों के अनुसार यह मंदिर लगभग चार सौ साल से भी अधिक पुराना है। खास बात यह है कि गणेशजी यहां खड़े रूप में विराजमान हैं और उनकी सूंड बांयी ओर है। मंदिर की प्राचीनता और रहस्य ने ही इसे आज एक अनूठे तांत्रिक गणेश मंदिर के रूप में पहचान दी है। मंदिर के पास राजा-कृष्ण का मंदिर, भैरूजी का मंदिर, माता का मंदिर भी मौजूद है। श्रद्धालुओं के अनुसार भैरूजी की मूर्ति प्राचीन बावड़ी से मिली थी। इस कारण इन्हें बावड़ी वाले भैरूजी भी कहते हैं।</p>
<p><strong>तंत्र साधना का केंद्र रहा है गणेश मंदिर</strong><br />मुख्य पुजारी लोकेश गौतम बताते हैं कि उनके दादाजी प्रभूलाल जी इस मंदिर के प्रमुख पुजारी थे और वर्षों तक इसकी देखरेख उन्होंने ही की। उन्होंने बताया कि  यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा है। पहले यहां तांत्रिक क्रियाएं की जाती थीं। समय बदला, परंपराएं बदलीं, लेकिन गणेशजी की महिमा और श्रद्धा आज भी वैसी ही है।श्रद्धालुओं ने बताया कि किंवदती के अनुसार रियासतकाल में जब कोटा दरबार तंत्र साधना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का बड़ा केंद्र था, उस समय खड़े गणेश मंदिर साधकों की साधना स्थली रहा। धीरे-धीरे यहां भक्ति और पूजा-अर्चना का रंग गहराता गया और आज यह हर वर्ग के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है।</p>
<p><strong>खड़े गणेश का लोकजीवन में महत्व</strong><br />हाड़ौती शहर में होने वाले बड़े आयोजनों, शादियों, व्यापारिक शुभारंभ और यहां तक कि छात्रों की परीक्षा से पहले भी लोग खड़े गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। आस्था है कि गणेशजी की बांयी सूंड समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि जब भी कोई नई शुरूआत करनी होती है, सबसे पहले खड़े गणेश को याद किया जाता है। इस परंपरा ने मंदिर को केवल धार्मिक ही नहीं, सामाजिक जीवन का भी केंद्र बना दिया है। श्रद्धालु गिरीराज ने बताया कि मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं।  चार सौ साल से अधिक पुराने इस मंदिर ने कोटा की सांस्कृतिक और धार्मिक धारा को न केवल संजोया है, बल्कि आस्था का एक अटूट केंद्र भी बना हुआ है।</p>
<p><strong>चार सौ से अधिक श्रद्धालु रोजाना लगाते हैं धोक</strong><br />मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रोजाना चार से पांच सौ तक पहुंच जाती है। गिरीराज प्रसाद, जो वर्षों से यहां रह रहे है, उन्होंने बताया कि हमारे हर शुभ कार्य की शुरूआत खड़े गणेशजी को धोक लगाकर ही होती है। यहां आकर मन को शांति और ऊर्जा मिलती है। स्थानीय लोगों में आज भी विश्वास है कि गणेशजी को सच्चे मन से स्मरण करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी हो या सामान्य बुधवार, मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी पर दस दिन का उत्सव</strong><br />गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर का नजारा बिल्कुल अलग होता है। सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। खास शृंगार किया जाता है और दिनभर विशेष अनुष्ठान चलते हैं।-गणेश चतुर्थी से लेकर दस दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग भोग अर्पित किए जाते हैं।-भोग के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा है, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।-गणेशजी के शृंगार में साढ़े पांच घंटे से भी अधिक समय लगता है। फूलों, वस्त्रों और गहनों से गणेशजी को सजाया जाता है।</p>
<p><strong>मंदिर के समय और व्यवस्थाएं</strong><br />- गणेश चतुर्थी पर होते हैं भव्य कार्यक्रम<br />- बुधवार को पूरे दिन मंदिर खुला रहता है<br />- सामान्य दिनों में  सुबह 7 से 10 बजे तक और शाम 5 से 11 बजे तक दर्शन<br />- मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखता है।<br />- पीढ़ी दर-पीढ़ी हो रही है मंदिर की पूजा</p>
<p><strong>पीपल के नीचे खड़े गणेश</strong><br />मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान है। माना जाता है कि पीपल स्वयं देववृक्ष है और इसके नीचे गणेशजी की उपस्थिति आस्था को कई गुना बढ़ा देती है। शुरूआत में गणेशजी अकेले विराजमान थे। समय के साथ रिद्धि-सिद्धि को भी उनके साथ विराजमान किया गया। मंदिर के संरक्षक लालचंद प्रजापत हैं उनके अनुसार मंदिर के विकास में श्रद्धालुओं का सहयोग लगातार मिलता रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-four-hundred-year-old-ganesh-temple-is-a-unique-confluence-of-faith-and-mystery/article-125789</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-four-hundred-year-old-ganesh-temple-is-a-unique-confluence-of-faith-and-mystery/article-125789</guid>
                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 15:00:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/%28630-x-400-px%29-%285%292.png"                         length="770258"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुकणा गणेश करते हैं श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[आज भी यह मंदिर अपने मूल स्वरूप में संरक्षित है ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukna-ganesh-fulfills-the-wishes-of-devotees/article-125568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर के भीतरी हिस्से में मोखापाड़ा क्षेत्र में स्थित मुकणा गणेश मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और विश्वास का जीवंत प्रतीक है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग तीन सौ साल पुराना है और आज भी उसी प्राचीन शैली में खड़ा है। पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा करने वाले पुजारियों और श्रद्धालुओं की भक्ति इस मंदिर को विशिष्ट बनाती है। यह मंदिर रियासतकालीन के समय का बना हुआ है। इस मंदिर में पीढ़ी-दर पीढ़ी सेवा कर रहे है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना मुकणा गणेश जी पूरा करते हैं। इस मंदिर में सात सीढ़ियां बनी हुई है। इस मंदिर आज भी प्राचीन की शैली में बना हुआ है। मंदिर में मुकणा गणेश की मूर्ति पत्थर की बनी हुई है। इस मंदिर में जो भी श्रद्धलु अपनी व्यथा लेकर आते हैं उनकी मनोकामना जरूरी पूरी होती है।</p>
<p><strong>पांच कंकर गणेश के रूप में ले जाते हैं </strong><br />मुकणा गणेश मुदिर के मुख्य पुजारी पं. आलोक शर्मा ने बताया कि विवाह की इच्छा रखने वाले युवक-युवतियां यहां आते हैं और अपनी शादी की मनोकामना करते हैं। जब विवाह तय हो जाता है तो परिवार मंदिर से पांच छोटे-छोटे कंकर गणेश जी का प्रतीक मानकर घर ले जाते हैं। शादी सम्पन्न होने के बाद इन्हीं कंकरों को वापस मंदिर में अर्पित कर दिया जाता है।  यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है और इसे श्रद्धालु आस्था का अद्वितीय चिह्न मानते हैं। मुकणा गणेश जी को क्षेत्रवासी हर शुभ अवसर पर सबसे पहले न्योता भेजते हैं। चाहे वह विवाह हो, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार या अन्य धार्मिक आयोजन—गणेश जी का निमंत्रण प्रथम होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसा करने से सभी कार्य सहजता और सरलता से सम्पन्न होते हैं।</p>
<p><strong>भीतरी शहर के अंदर स्थित है मुकणा गणेश</strong><br />यह मंदिर कोटा शहर के भीतरी शहर में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए परकोटे के अंदर होकर जाना पड़ता है। यहां अधिकांश घर प्राचीनकालीन के बने हुए है। यहां की गलियां आज भी पुराने शहर की शैली को संजोए हुए है। वर्तमान में इस मंदिर की शैली के दर्शन करने के लिए लोग आज भी यहां पहुंचते है। इस मंदिर में मुकणा गणेश के चांदी के मुकुट, चांदी के दांत तथा चांदी का छत्र से सुशोभित हो रह है। यहां गणेश जी अकेले ही विराजमान है। इनकी सूंड दांयी तरफ है। यहां पूजा-अर्चना सिद्धी-विनायक की तर्ज पर ही होती है। इस मंदिर के दर्शन के लिए रोजाना दौ सौ श्रद्धालु आ जाते हैं। इस मंदिर का प्राचीन शिलालेख नहीं होने से इसके ऐतिहासिक प्रमाण भी मौजूद नहीं है। यहां पीढी दर पीढ़ी जो श्रद्धालु आ रहे है उनके अनुसार तीन सौ साल पुराना मंदिर बताते है। मंदिर तक पहुंचते समय श्रद्धालु पुरानी हवेलियों और संकरी गलियों से गुजरते हैं, जो उन्हें अतीत की याद दिलाती हैं।</p>
<p><strong>चार सौ साल पुराना है सदापूरण गणेश मंदिर</strong><br />सदापूरण गणेश मंदिर भी मोखापाड़ा में स्थित है। यह अपनी अनूठी मान्यतों को संजोए हुए है। श्रद्धालु नीरज जोशी व तन्मय जोशी ने बताया कि यह मंदिर रियासतकालीन के समय का बना हुआ है। यह मंदिर पहले मिट्टी व गोबर से प्रतीक के रूप में बना हुआ था उस दौरान पुराने घर भी मिट्टी से ही बने होते थे। इस मंदिर की मान्यता है कि श्रद्धालु अपने मन में अपनी इच्छा मांगते है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु धोक लगाकर अपनी ईच्छानुसार भेंट भी चढ़ाते हैं। इस मंदिर में सदापूरण गणेश मंदिर में मूषक भी विराजमान है। वर्तमान में यह मंदिर आस्था का केन्द्र बना हुआ है। इस मंदिर में पुजारी प्रमोद शर्मा के अलावा सुरेन्द्र शर्मा, सागर शर्मा भी पूजा-अर्चना करवाते हैं। </p>
<p><strong>मंदिर दर्शन कार्यक्रम</strong><br />- हर बुधवार को पूरे दिन मंदिर खुला रहता है।<br />- बुधवार के लिए मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है।<br />- रोजाना मंदिर में महाआरती सुबह और शाम होती है<br />- महआरती के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है।<br />- दूर क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालु कभी भी मंदिर के दर्शन <br />कर सकते हैं।<br />- यहां सालाना जागरण, व धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते है।<br />- मंदिर तक पहुंचने के लिए सात सीढ़ियां लगी हुई है।<br />- मुकणा गणेश के दर्शन व पूजा-अर्चना के बाद चारों तरफ फेरी भी लगा सकते हैं।</p>
<p><strong>पीढ़ी दर पीढ़ी होती हैं सेवा</strong><br />मुख्य पुजारी पं. आलोक शर्मा ने बताया कि इस मुकणा गणेश मंदिर के लिए कोई ट्रस्ट बना हुआ नहीं है। इस मंदिर में पीढ़ी-दर पीढ़ी सेवाभाव चला आ रहा है। इस मंदिर में पं. मोतीलाल शर्मा व सक्षम शर्मा भी पूजा का कार्य करते हैं। यहां आने वाले कई ऐसे श्रद्धालु है जो पीढ़ी-दर पीढ़ी यहां मुकणा गणेश के दर्शनार्थ के लिए आते हैं। यहां कोटा के अलावा अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं। गणेश चतुर्थी के विशेष दिन में वीआइपी लोग भी आते हैं। यहां पूजा-अर्चना कर मनोकामना करते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukna-ganesh-fulfills-the-wishes-of-devotees/article-125568</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukna-ganesh-fulfills-the-wishes-of-devotees/article-125568</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 15:41:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/1ne1ws-%28630-x-400-px%29-%284%291.png"                         length="436288"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्किट हाउस में बिराजे हैं संकटमोचन गणेशनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[125 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, जहां वीआइपी भी नवाते हैं शीश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sankatmochan-ganeshnath-is-seated-in-the-circuit-house/article-124812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)65.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रतिष्ठित सर्किट हाउस में स्थित एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर है, जो न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में विराजमान संकटमोचन गणेशनाथ अब पूरे हाड़ौती क्षेत्र में वीआईपी गणेश या सर्किट हाउस गणेश के नाम से जानते है। मंदिर में स्थापित संकटमोचन गणेश प्रतिमा रियासती कालीन धरोहर है, श्रद्धालुओं के अनुसार यह गणेश मंदिर सवा सौ साल पुराना है। मंदिर के पुजारी नितेश शर्मा ने बताया कि रियासतकालीन दौर में बना यह मंदिर सर्किट हाउस परिसर में स्थित है, जो उस समय राजा-महाराजाओं का विश्रामगृह हुआ करता था। मंदिर परिसर में स्थित चबूतरे को उस समय संकटमोचन गणेशनाथ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ सर्किट हाउस और मंदिर दोनों का स्वरूप बदला, लेकिन भगवान गणेश के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उतनी ही अडिग है, जितने प्राचीनकाल में हुआ करती थी। वहीं वर्षों से गणेश मंदिर आ रहे टीकाराम गुर्जर गणेशजी के अनन्य भक्त है। वे हमेशा मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोगी की भूमिका निभाते है। </p>
<p><strong>वीआइपी गणेश मंदिर में लगाते हंै धोक</strong><br />सर्किट हाउस में रुकने वाले सभी उच्च पदस्थ अधिकारी—जैसे मजिस्ट्रेट, कलक्टर, एसपी, आइजी, मंत्री और विधायक—मंदिर में हाजिरी लगाना नहीं भूलते। यही कारण है कि इस गणेश प्रतिमा को वीआईपी गणेश कहा जाता है। इस मंदिर की ख्याति अब कोटा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। देश-विदेश से भी वीआइपी गणेश में हर चतुर्थी पर धोक लगाते आते हैं। यूएसए निवासी प्रियंका  इस बार गणेश चतुर्थी पर सवामणी भी करवा रही है। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें उनकी आस्था और श्रद्धा का प्रमाण दे रही है। वर्तमान में संकटमोचन गणेश अब सर्किट हाउस वाले गणेश या वीआईपी गणेश के नाम से जाने जाते है।</p>
<p><strong>एक सौ पच्चीस साल पहले बाढ़ में बहकर आई थी प्रतिमा</strong><br />सर्किट हाउस परिसर में स्थित ऐतिहासिक वीआइपी गणेश मंदिर की जानकारी देते हुए  पुजारी नितेश शर्मा ने बताया कि यह प्रतिमा वर्षों पहले भीषण बाढ़ में बहकर एरोड्रम वाले क्षेत्र में आई थी, जहां मेरे दादाजी ग्यारसीलाल ने इसे लाकर एक चबूतरे पर स्थापित किया। उन्होंने कहा कि पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जहां अब मंदिर है, वहां पहले से एक चबूतरा था, जहां संकटमोचन गणेशनाथ की प्रतिमा स्थापित थी।  किंवदंती है कि एक बार विश्राम गृह परिसर में मैनेजर के बच्चे की तबीयत खराब हो गई थी। इस पर उन्होंने गणेशनाथ प्रतिमा को हटवाने की कोशिश की थी  लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिल नहीं पाई।  इसके बाद उन्होंने वहीं एक छोटा मंदिर बनवाया और संकटमोचन गणेशनाथ प्रतिमा यथावत स्थापित रही।</p>
<p><strong>11 प्रकार के लड्डुओं से लगेगा भोग </strong><br />27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता घर-घर विराजेंगे। वहीं सर्किट हाउस अर्थात वीआइपी गणेश पूजन का मुख्य कार्यक्रम सुबह 7:30 बजे शुरू होगा। सुबह सवा सौ किलो दूध से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। उसके बाद गणेश प्रतिमा का स्वर्ण शृंगार किया जाएगा। वहीं मंदिर में हवन भी होगा। इस बार गणेश चतुर्थी पर 11 प्रकार के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इस दौरान 1600 किलो लड्डु बनाए जाएंगे। जिनमें पांच सौ किलो दूध, 280 किलो बेसन, 5 क्विंटल शक्कर तथा सवा सौ किलो ड्राय फ्रुट तथा 20 पीपे देशी घी के उपयोग में लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sankatmochan-ganeshnath-is-seated-in-the-circuit-house/article-124812</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sankatmochan-ganeshnath-is-seated-in-the-circuit-house/article-124812</guid>
                <pubDate>Tue, 26 Aug 2025 16:03:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-08/1ne1ws-%282%2965.png"                         length="669697"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हवामहल कार्यालय में 100 साल से भी अधिक पुरानी वुडन की मूर्ति </title>
                                    <description><![CDATA[ हवामहल स्मारक के अधीक्षक कार्यालय में 100 साल से भी अधिक पुरानी वुडन की चर्तुभुज मूर्ति हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/old-wooden-statue-of-ganesh-in-office/article-21074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/dsc_0301-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विभाग के संग्रहालयों में विभिन्न तरह के सालों पुराने सिक्के भी प्रदर्शित हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं। दूसरी ओर एक स्मारक ऐसा भी है, जहां गणेश की वुडन और पुरा पाषाण प्रतिमाएं भी संग्रहित हैं। हवामहल स्मारक के अधीक्षक कार्यालय में 100 साल से भी अधिक पुरानी वुडन की चर्तुभुज मूर्ति हैं। यह करीब 19वीं शताब्दी की बताई जाती है। इसे साल 1983 को अल्बर्ट हॉल संग्रहालय से स्मारक लाय गया था। इसके अतिरिक्त चाकसू, गलता से भी प्राचीन पाषाण मूर्तियां स्मारक में संगृहीत हैं, जो 9वीं शताब्दी की हैं। अधीक्षक सरोजनी चंचलानी ने बताया कि भगवान गणेशजी की कई पाषाण प्रतिमाएं स्मारक में प्रदर्शित हैं। इसके साथ ही कई स्टोर में संगृहीत हैं।</p>
<p><strong>प्राचीन सिक्कों में भगवान गणेश का अंकन</strong><br />इसी के अन्तर्गत विभाग के स्टोर में भगवान गणेश का अंकन प्राचीन काल के सिक्के भी देखने को मिलेंगे। मराठों, आरकोट के शासकों, मुदरई के नायक शासकों, श्रीवीरा, सतुपथी के सिक्कों एवं तंजौर के शावकों के ताम्र सिक्कों पर भगवान गणेश का अंकन देखने को मिलता है। पुरातत्व विभाग के मुद्राशास्त्री प्रिंसकुमार उप्पल ने बताया कि ये सिक्के विभाग के स्टोर में संग्रहित हैं। इसके अतिरिक्त गणेशजी पर कई अन्य सिक्के भी स्टोर में संग्रहित हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/old-wooden-statue-of-ganesh-in-office/article-21074</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/old-wooden-statue-of-ganesh-in-office/article-21074</guid>
                <pubDate>Wed, 31 Aug 2022 11:14:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-08/dsc_0301-copy5.jpg"                         length="384794"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जोधपुर से अमरनाथ की यात्रा के लिए रातानाडा गणेश मंदिर से तीन बसों में तीर्थयात्री रवाना </title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर से अमरनाथ की यात्रा के लिए रातानाडा गणेश मंदिर से तीन बसों में रवाना हुए तीर्थयात्री 15 दिन के सफर के लिए रवाना हुए यात्री। राकेश देवड़ा ने बताया कि यात्रा अमरनाथ हर साल की भांति इस वर्ष भी गणेश मंदिर रातानाडा से रवाना हुए हैं। जिसमें 3 बसें में ढाई सौ लोग स्थित है यह यात्रा जोधपुर से रातानाडा गणेश मंदिर रवाना होकर खेड़ापति बालाजी, देशनोक, पंजाब के अमृतसर होते हुए कुल्लू मनाली, वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/to-travel-from-jodhpur-to-amarnath--ratanada-left-from-ganesh-temple-in-three-buses/article-13466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bus.jpg" alt=""></a><br /><p style="color:#222222;margin-right:0px;margin-bottom:0px;margin-left:0px;font-size:12px;line-height:normal;font-family:'System Font';"> </p>
<p style="color:#222222;margin-right:0px;margin-bottom:0px;margin-left:0px;font-size:12px;line-height:normal;font-family:'System Font';"><span>जोधपुर से अमरनाथ की यात्रा के लिए रातानाडा गणेश मंदिर से तीन बसों में रवाना हुए तीर्थयात्री 15 दिन के सफर के लिए रवाना हुए यात्री। राकेश देवड़ा ने बताया कि यात्रा अमरनाथ हर साल की भांति इस वर्ष भी गणेश मंदिर रातानाडा से रवाना हुए हैं। जिसमें 3 बसें में ढाई सौ लोग स्थित है यह यात्रा जोधपुर से रातानाडा गणेश मंदिर रवाना होकर खेड़ापति बालाजी, देशनोक, पंजाब के अमृतसर होते हुए कुल्लू मनाली, वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा करेंगे। वहां से पुणे पंजाब होते हुए सालासर बालाजी के दर्शन कर जोधपुर लौटेंगे। यह कुल 14 दिन की यात्रा होगी जिसमें महिलाएं पुरुष शामिल है। शनिवार को गणेश मंदिर के दर्शन कर अमरनाथ की जय कारा के साथ मंदिर पृथ्वी द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया सभी के चेहरों पर धार्मिक यात्रा को लेकर खुशी नजर आ रही थी सभी एक से बढ़कर एक जयकारा की गोश्त करते हुए यात्रा प्रारंभ की और उन्होंने बताया कि यात्रा में देश की शांति और चयन अमन के  भी कामना की जाएगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जालोर</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/to-travel-from-jodhpur-to-amarnath--ratanada-left-from-ganesh-temple-in-three-buses/article-13466</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/to-travel-from-jodhpur-to-amarnath--ratanada-left-from-ganesh-temple-in-three-buses/article-13466</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 16:02:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/bus.jpg"                         length="61217"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[jodhpur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूरी पेंशन खर्च कर गणेश मंदिर बनवाया चौकीदार रहमान ने</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के चमराजानगर के चिखोले रिजर्व में एक मुस्लिम चौकीदार के अपनी पेंशन की रकम से मंदिर बनवाने की चर्चा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chowkidar-rahman-got-ganesh-temple-built-by-spending-full-pension-said---god-is-one--then-how-is-the-difference/article-7804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ganesh-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p>चमराजानगर। कनार्टक में जब धार्मिक आधार पर नफरत की आग भड़कने लगी है तब एक मुसलमानों के हाथों भगवान गणेश का मंदिर बनने की घटना अपने आप में बहुत राहत देने वाली है। कर्नाटक के चमराजानगर के चिखोले रिजर्व में एक मुस्लिम चौकीदार के अपनी पेंशन की रकम से मंदिर बनवाने की चर्चा हो रही है। पी. रहमान ने कहा कि उन्हें दिव्य शक्तियों ने मंदिर बनवाने का निर्देश उनके सपने में दिया था। उन्होंने उन्हीं निदेर्शों का पालन किया है। रहमान ने नासिर्फ मंदिर बनवाया है बल्कि उन्होंने मंदिर में एक पुजारी भी नियुक्त किया है जिसे वह हर महीने अपनी जेब से चार हजार रुपए का वेतन भी देते हैं। वह हर हफ्ते सोमवार और शुक्रवार को वहां पूजा के लिए फूलों और अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था भी करते हैं। पूजा के बाद रहमान प्रसादम का भी वितरण करते हैं।</p>
<p> </p>
<p>जब रहमान से आजकल के माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह नहीं समझ पा रहे कि लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। रहमान कहते हैं कि मनुष्यों में केवल पुरुष और महिला का अंतर है। बाकी सब तो एक ही हैं। उन्होंने कहा कि चार साल पहले यह मंदिर बनवाया था। इससे बनाने के लिए मैंने अपनी पेंशन खर्च कर दी, लेकिन परिवार ने कभी विरोध नहीं किया। मेरे समुदाय के लोगों को भी इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि मैं हिंदू भगवान की पूजा क्यों करता हूं या मैंने क्यों मंदिर बनवाया है। रहमान का कहना है कि इंसान के तौर पर हिंदू और मुस्लिम में कोई अंतर नहीं है। हमारा एक ही खून है। चिक्काहोल बांध के पास एक शिलाखंड पर एक मूर्ति थी जो चोरी हो गई। मैंने स्थानीय संतों से परामर्श किया और भगवान गणेश की मूर्ति लाने के लिए तमिलनाडु गया। ईश्वर एक है। उनके सच्चे भक्त इसके लिए अंतर नहीं करते हैं कि मंदिर एक मुसलमान की ओर से बनाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि अचानक से कलह क्यों हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/chowkidar-rahman-got-ganesh-temple-built-by-spending-full-pension-said---god-is-one--then-how-is-the-difference/article-7804</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/chowkidar-rahman-got-ganesh-temple-built-by-spending-full-pension-said---god-is-one--then-how-is-the-difference/article-7804</guid>
                <pubDate>Tue, 12 Apr 2022 16:01:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/ganesh-mandir.jpg"                         length="72816"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यू ईयर का पहला दिन अपने आराध्य के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%88%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8/article-3714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/10.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर/दौसा। न्यू ईयर का पहला दिन अपने आराध्य के दर्शन के साथ शुरू करने के आस्थाभाव को लेकर सिद्धपीठ मेहंदीपुर बालाजी धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है। यहां बीती रात से ही बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। जिससे न्यू ईयर की सुबह को बालाजी मंदिर के सामने श्रद्धालुओं का जमघट लग गया। मंगला आरती के बाद श्रद्धालु दर्शनों के लिए कतारबद्ध हो गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए लालायित देखे गए। जिन्होंने जयकारे लगाते हुए बालाजी, भैरवबाबा, प्रेतराज सरकार, सीताराम दरबार व समाधि वाले बाबा के दर्शन कर न्यू ईयर सुखमय व्यतीत होने की मनोती मांगी। <br /> <br /> <strong>महंत नरेशपुरी ने की आरती </strong><br /> न्यू ईयर के पहले दिन मंदिर के महंत नरेशपुरी महाराज के सानिध्य में अलसुबह बालाजी महाराज का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद सोने का चोला चढ़ाकर फूल बंगला झांकी सजाई गई। जहां महंत नरेशपुरी महाराज ने बालाजी की महाआरती की। इस दौरान मंदिर के घंटे घड़ियाल गूंज उठे तो बाहर खड़े श्रद्धालु अपने आराध्य की भक्ति भाव में डूबे रहे। यहां मंदिर ट्रस्ट द्वारा बालाजी महाराज को 56 भोग की विशेष झांकी सजाई गई।</p>
<p>जयपुर। पौष मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शनिवार को नववर्ष 2022 का आरम्भ हुआ है। इस अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर नववर्ष मंगलमय होने की प्रार्थना की।  साथ ही पिछले साल कोरोना के दौरान अपने परिवार जनों, मित्रों, रिश्तेदारों को खोने के बाद ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की। कोविड गाइडलाइन के अनुसार भक्तों ने गोविंद देव जी, आनंद कृष्ण बिहारी जी चांदनी चौक, ताड़केश्वर जी चौड़ा रास्ता, गणेश मंदिर मोतीडूंगरी, पैट्रोल पंप वाले हनुमान जी सहित मंदिरों के दर्शन किए। शनिवार होने के कारण हनुमान मंदिरों और शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ऊर्जा, बुद्धि और बल के दाता श्रीहनुमान से नववर्ष मंगलमय होने की प्रार्थना की।</p>
<p>जयपुर के चांदनी चौक में स्थित ठाकुर आनंद कृष्ण बिहारी जी मंदिर में नववर्ष पर भक्तों ने बधाइयाँ गाकर, नृत्य करके रिझाया। मंदिर महंत मातृप्रसाद शर्मा ने बताया कि शनिवार को पौष माह में ठाकुर जी के राजभोग झांकी सजाई गई | गर्म तासीर के व्यंजनों का भोग लगाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%88%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8/article-3714</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%88%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8/article-3714</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Jan 2022 14:47:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-01/10.jpg"                         length="79831"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में युवा कांग्रेसियों ने निकाली जन जागरण पदयात्रा: जाम से लोग परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ हल्ला-बोल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-25-at-12.32.24.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश भर में केन्द्र सरकार की मंहगाई और अन्य आर्थिक नीतियों के विरोध में प्रदेश युवा कांग्रेस ने गुरुवार को युवा कांग्रेस बनीपार्क मुख्यालय से कलेक्ट्रेट सर्किल, शहीद स्मारक होते हुए सिविल लाइन्स फाटक तक जनजागरण पदयात्रा निकाली। प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष गणेश घोगरा के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवा कांग्रेसजनों ने भाग लिया। हालांकि इस पदयात्रा से आमजन को खासी परेशानी उठानी पड़ी। पदयात्रा के रूट पर जाम की स्थिति बन गई।</p>
<p><br /> प्रदेश युवा कांग्रेस संगठन महासचिव आयुष भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोगरा के नेतृत्व में निकली इस रैली में केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ हल्ला बोल किया गया। आज देश में केंद्र की जनविरोधी नीतियों के कारण महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ गई है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोगरा ने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। इसी वजह से आज बाजार में महंगाई चरम पर पहुंच गई है आम आदमी का घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। महिलाओं का रसोई का बजट भी बहुत गड़बड़ा गया है। सिविल लाइन फाटक पर रैली समापन के बाद घोगरा ने कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का कॉन्ग्रेस शुरू से विरोध कर रही है आम आदमी को राहत दिलाने के लिए प्रदेश युवा कांग्रेस भी आम आदमी के बीच जन जागरण अभियान जारी रखेगी। आज मोदी सरकार को जगाने के लिए पदयात्रा निकाली गई है। जब तक केंद्र सरकार महंगाई पर लगाम कसने के लिए कदम नहीं उठाती, तब तक प्रदेश युवक कांग्रेस का हल्ला बोल कार्यक्रम जारी रहेगा और अब आगे भी विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2721</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2721</guid>
                <pubDate>Thu, 25 Nov 2021 14:35:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-11/whatsapp-image-2021-11-25-at-12.32.24.jpeg"                         length="328482"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        