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                <title>british - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>british RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत से जलियांवाला पर माफी मांगे ब्रिटिश सरकार, यूएस सांसद ने कहा- हत्याकांड ब्रिटिश साम्राज्य पर एक धब्बा</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में कहा कि ब्रिटिश सरकार को 13 अप्रैल से पहले माफी मांगनी चाहिए। अगले महीने जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी मनाई जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/british-government-us-mp-apologized-to-jallianwala-from-india-the/article-109002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)61.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने ब्रिटेन सरकार से 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए भारत के लोगों से औपचारिक तौर पर माफी मांगने को कहा है। उन्होंने संसद में कहा कि ब्रिटिश सरकार को 13 अप्रैल से पहले माफी मांगनी चाहिए। अगले महीने जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी मनाई जाएगी। </p>
<p>ब्रिटिश सांसद ब्लैकमैन ने अपने भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है। सांसद ब्लैकमैन ने कहा कि जालियावांला हत्याकांड ब्रिटिश साम्राज्य पर एक धब्बा है। इसमें 1500 लोग मारे गए थे और 1200 घायल हुए थे। आखिरकार ब्रिटिश साम्राज्य पर इस दाग के लिए जनरल डायर को बदनाम किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 10:42:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटिश सरकार पर सेक्स स्कैंडल का साया, कई मंत्रियों के इस्तीफे </title>
                                    <description><![CDATA[लंदन।  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उनके दो मंत्रियों ने अपने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वित्त मंत्री ऋषि सुनक और स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने वरिष्ठ सांसद क्रिस पिंचर के प्रमोशन के विरोध में यह कदम उठाया है। बाद में कई अन्य मंत्रियों के भी इस्तीफे की खबर है। दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। ऐसे में बोरिस जॉनसन के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल सरकार पर यौन स्कैंडल का साया है। क्रिस पिंचर पर यौन उत्पीड़न के भी आरोप लग चुके हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/british-government-is-haunted-by-sex-scandal-resignation-of-many--ministers/article-13788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/v-11.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन।  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उनके दो मंत्रियों ने अपने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वित्त मंत्री ऋषि सुनक और स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने वरिष्ठ सांसद क्रिस पिंचर के प्रमोशन के विरोध में यह कदम उठाया है। बाद में कई अन्य मंत्रियों के भी इस्तीफे की खबर है। दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। ऐसे में बोरिस जॉनसन के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल सरकार पर यौन स्कैंडल का साया है। क्रिस पिंचर पर यौन उत्पीड़न के भी आरोप लग चुके हैं। फिर भी उनके प्रमोशन से जनता का विसाल वर्ग और कई सांसद एवं नेता क्षुब्ध हैं।  उल्लेखनीय है कि क्रिस पिंचर पर यौन उत्पीड़न के भी आरोप लग चुके हैं। इसके अलावा पिंचर ने लंदन क्लब में दारू पीने के बाद दो लोगों के साथ अभद्रता की थी। जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बोरिस जॉनसन को यह पहला झटका नहीं है, बल्कि पार्टीगेट स्कैंडल के बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। वहीं उनकी पार्टी दो उपचुनावों में हार का सामना कर चुकी है।  अपने त्यागपत्र में वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने कहा, जब पूरी दुनिया आर्थिक संकट से जूझ रही है। कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन का युद्ध चुनौती बना हुआ है। ऐसे समय में यह फैसला लेना आसान नहीं है। हालांकि जनता इस बात की उम्मीद रखती है कि सरकार सही कदम उठाएगी। मैं जानता हूं कि हो सकता है मैं जीवन में आखिरी बार मंत्री बना हूं, लेकिन सरकार के स्टैंडर्ड को मेनटेन रखने के लिए यह आवश्यक हो गया है। इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं।  वहीं स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने कहा, मुझे कहते हुए दुख हो रहा है कि मैं अब और इस पद पर नहीं रहूंगा।<br /><br /><strong>बोरिस जॉनसन ने माफी मांगी</strong> <br />मंगरवार का दिन यूके की राजनीति में बहुत ही अहम दिन था। दो मंत्रियों के इस्तीफा देने से पहले प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस बात के लिए माफी मांगी की 2019 में पिंचर पर आरोप लगने के बाद भी उन्हें पद से हटाया नहीं गया। 1 जुलाई को प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि उन्हें क्रिस पिंचर पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी नहीं थी।  इसके बाद सोमवार को ही बात पलट गई और उनके प्रवक्ता ने कहा कि जॉनसन को इस बारे में जानकारी थी। साइमन मैकडोनाल्ड नाम के सीनियर सिविल सर्वेंट ने इस बात का भंडाफोड़ कर दिया कि 2019 में क्रिस पिंचर ने जो कुछ भी किया और इसके बाद कोर्ट में जिस तरह मामला चला, उसकी पूरी जानकारी जॉनसन को थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 11:50:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटिश सोशलाइट घिसलीन मैक्सवेस को यौन अपराधों के लिए 20 साल कैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[ वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मशहूर फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन के साथ सेक्स रैकेट चलाने, युवा लड़कियों को इसमें भर्ती करने, उन्हें तैयार करने और उनकी यौन तस्करी करने के अपराध के लिए ब्रिटिश सोशलाइट घिसलीन मैक्सवेल को अमेरिका की जेल में 20 साल कैद की सजा सुनाई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/british-socialite-ghislaine-maxves-sentenced-to-20-years-for-sex-crimes/article-13206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ghislaine-maxwell.jpg" alt=""></a><br /><p> वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मशहूर फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन के साथ सेक्स रैकेट चलाने, युवा लड़कियों को इसमें भर्ती करने, उन्हें तैयार करने और उनकी यौन तस्करी करने के अपराध के लिए ब्रिटिश सोशलाइट घिसलीन मैक्सवेल को अमेरिका की जेल में 20 साल कैद की सजा सुनाई गई है। एपस्टीन की पूर्व प्रेमिका 60 साल की मैक्सवेल को पिछले साल दिसंबर में दोषी ठहराया गया था। उन पर आरोप लगाने वालों में से एक ने न्यूयॉर्क में अदालत के बाहर कहा कि उन्हें अपनी बची-खुची ङ्क्षजदगी जेल में ही रहना चाहिए।<br /><br />उल्लेखनीय है कि एपस्टीन ने साल 2019 में उन पर मुकदमा चलने के दौरान मैनहट्टन जेल की कोठरी में आत्महत्या कर ली थी। घिसलीन मैक्सवेल ने इन जघन्य अपराधों को साल 1994 से 2004 के बीच में अंजाम दिया। उन्हें सजा सुनाते हुए न्यायाधीश एलिसन जे नाथन ने कहा कि मैक्सवेल का आचरण Þजघन्य और ङ्क्षहसकÞ रहा है। पूर्व न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए अमेरिका के जिला न्यायालय की न्यायाधीश सुश्री नाथन ने कहा,''मैक्सवेल ने एपस्टीन के साथ मिलकर लड़कियों को सेक्स रैकेट में भर्ती के लिए चुना और उनके यौन शोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस मामले के संदर्भ में अपराधी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे समाज के लोगों को एक संदेश पहुंचे और आने वाले समय में कोई भी इस तरह के जघन्य अपराध को करने से पहले एक बार सोचे। कोर्ट ने कैद के साथ-साथ उन पर 750,000 डॉलर का जुर्माना भी लगाया है। मैक्सवेल साल 2020 से पुलिस की हिरासत में है। उनका नाम अक्तूबर, 2017 में अमेरिका में मीटू आंदोलन की शुरुआत के दौरान उभरकर सामने आया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 13:06:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंग्रेजों ने 114 साल पहले बनाया था किसानों की जमीन कुर्क और नीलाम करने का कानून</title>
                                    <description><![CDATA[14 सरकारें, 11 सीएम आए, किसी ने भी नहीं ली कर्जदार किसानों की सुध, अब सरकार ने भेजा तो मामला राजभवन और केंद्र में अटका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-114-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8/article-4113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/17.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। किसानों की ऋणशुदा जमीन को कुर्क या नीलाम करने के जिस कानून को लेकर प्रदेश में एक सप्ताह से बवाल मचा हुआ है, वह 114 साल पहले 1908 में बना था। इस कानून को अंग्रेज सरकार ने बनाया था। हालांकि इस कानून में संशोधन के लिए राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पिछले साल अक्टूबर महीने में नया बिल लेकर आई थी, लेकिन वह केन्द्र और राज्य सरकार के बीच कृषि कानूनों को लेकर उपजे विवाद में फंस कर रह गया। अगर कोई भी बैंकों से अपनी अचल संपत्ति गिरवी रखकर ऋण लेता है, और बार-बार आग्रह पर भी किस्तें जमा नहीं होती तो उसे कुर्क अथवा नीलाम करने का कानून सन् 1908 में बनाया गया था। उसका नाम सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 है, और केन्द्रीय अधिनियम संख्या पांच की धारा 60 में इस तरह का प्रावधान किया गया था। इस कानून में प्रावधान है कि ऐसी संपत्ति जो डिक्री के निष्पादन में कुर्क और विक्रय की जा सकेगी। इस संपत्ति में किसानों की जमीन, अन्य भूमि, गृह, अन्य निर्माण, माल, धन, बैंक नोट, चैक, विनिमय पत्र, हुण्डी, वचन पत्र, सरकारी प्रतिभूतियां और धन के लिए वैध पत्र शामिल है।<br /><br /><strong>कानून में ये किए संशोधन</strong><br />राजस्थान सरकार ने इस 113 साल पुराने कानून में संशोधन के लिए 31 अक्टूबर 2020 को विधानसभा में एक बिल पेश किया। इसका नाम सिविल प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 है, जो सदन में चर्चा के बाद इसे दो नवम्बर को ही पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया। इस संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया था कि किसानों की ऋणशुदा जमीनों को न तो कुर्क किया जा सकेगा और विक्रय किया जा सकेगा। इस नए कानून में किसानों की जमीन, शिल्पी औजार और किसान के दूध देने वाले ऐसे ढोर (जिनके दो साल में ब्याना संभाव्य है) खेती के उपकरण, जो किसान को समर्थ बनाने के लिए आवश्यक है, को शामिल किया गया था।<br /><br /><strong>अब इस कानून का कोई औचित्य नहीं</strong><br />राजभवन के सूत्रों के अनुसार जब केन्द्र सरकार ने नए कृषि कानून बनाए थे, तब राजस्थान सरकार ने भी अपने चार अलग कानून बनाए थे। इनमें सिविल प्रक्रिया संहिता (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 के साथ ही आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण)कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 और कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण)(राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 शामिल है। अब जब केन्द्र सरकार ने अपने तीनों कानून वापस ले लिए, तो इन कानूनों का भी कोई औचित्य नहीं रह जाता। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 15:12:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>सभी के लिए चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए इस बार क्रिसमस की पार्टियों के आयोजन रद्द कर दिए जाएं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इसके लिए तैयार नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%80/article-3296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/corona4.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व के कई देशों में कोरोना के नए वेरियंट ओमिक्रॉन के फैल रहे संक्रमण के बीच ब्रिटेन से खबर आई है कि वहां विशेषज्ञों ने साफ  कहा है कि ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए इस बार क्रिसमस की पार्टियों के आयोजन रद्द कर दिए जाएं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इसके लिए तैयार नहीं हैं। खतरा सिर्फ  ब्रिटेन पर नहीं, उन सब पर है, जिन्होंने सावधानी बरतनी बंद कर दी है। यह चेतावनी हम सबके लिए भी है, क्योंकि ओमिक्रॉन अब भारत पहुंच चुका है। कोरोना संक्रमण की तुलना हम आमतौर पर इसके पहले आई महामारी स्पैनिश फ्लू से करते हैं। 1918 में फैली यह महामारी हर मामले में कोविड से ज्यादा खतरनाक थी। दो साल के अंदर ही इसने करोड़ों लोगों की जान ले ली और उसके बाद यह हमेशा के लिए विदा हो गई। इस महामारी के खत्म होने के 13 साल बाद यह पता लगाया जा सका कि यह किस वायरस की वजह से फैली थी। जिसे आज हम वायरस कहते हैं, उस समय तक उसे खोजा भी नहीं जा सका था। इसलिए उस दौर में उस संक्रमण का जो इलाज हुआ, वह बहुत कुछ अंधेरे में तीर चलाने जैसा ही था। फिर भी मास्क लगाने, हाथ धोने, सार्वजनिक स्थानों पर जमा होने पर पाबंदियां, क्वारंटीन और सामाजिक दूरी जैसे प्रोटोकॉल उस दौर के चिकित्सकों ने भी लागू कर दिए थे। हालांकि, यह सब किस तरह से मददगार हैं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उस समय तक मौजूद नहीं था।मिशिगन विश्वविद्यालय में औषधि इतिहास के प्रोफेसर जे एलेक्जेंडर नवारो ने पिछले दिनों जब 1918 के अमेरिकी समाज के रवैए और आज के समाज के रवैए की तुलना की, तो उन्हें बहुत दिलचस्प समानताएं दिखाई दीं। स्पैनिश फ्लू की पहली लहर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुई थी कि अमेरिका में पाबंदियों को हटाने की मांग होने लगी थीं। थियेटर और डांस बार के मालिक कारोबार फिर से शुरू करने की मांग करने लगे थे। उनका कहना था कि कारोबार का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्कूल खोलने की मांग होने लगी थी। धीरे-धीरे पाबंदियां ढीली पड़ती गईं और तभी स्पैनिश फ्लू की दूसरी लहर ने हमला बोला, जो पहली से ज्यादा घातक थी। इस लिहाज से देखें, तो पिछले सौ साल में विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। अब कम से कम हम यह ठीक से जानते हैं कि यह महामारी कैसे फैलती है, किससे फैलती है और किस तरह से हमें अपना शिकार बनाने के लिए खुद को बदलती है। अब हम यह भी जानते हैं कि भले ही इससे पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन इसे कैसे खुद से दूर रखने की कोशिश की जा सकती है। हमारे पास अभी इसका पक्का इलाज नहीं है, लेकिन इससे होने वाले नुकसान और उससे निपटने के तरीकों के बारे में हमने पिछले डेढ़ साल में एक समझ जरूर बना ली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 15:26:35 +0530</pubDate>
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                <title>संविधान हमारा, कानून आज भी अंग्रेजों के</title>
                                    <description><![CDATA[संविधान दिवस पर विशेष :  1897 में जिस कानून में सर्वप्रथम बाल गंगाधर तिलक को सजा हुई थी, वह आज भी लागू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87/article-2738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/constitution.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। यह ऐसा ही अचंभा है, जैसे पहले संतान पैदा हो और मां बाद में। देश में संविधान तो तैयार होकर पारित हुआ 26 नवंबर 1949 को और लागू हुआ 26 जनवरी 1950 को। लेकिन संविधान की भावनाओं के अनुरूप बनने वाले कानून इससे भी 100 साल पुराने मौजूद हैं। ये आज भी न केवल लागू हैं, अदालतें इन्हीं के आधार पर फैसले करती हैं। विधिवेत्ताओं के अनुसार देश में अपराध भी उसे ही माना गया है, जिसका उल्लेख अंग्रेजों ने 1860 में बनी आईपीसी किया है। इंडियन एविडेंस एक्ट भी 1872 का है। विधिवेत्ताओं के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 13 में प्रावधान किया गया कि जो तत्कालीन कानून संविधान के मूल अधिकारों से नहीं टकराते हैं, उन्हें लागू रखा जाएगा। हालांकि इतना लंबा समय बीतने के बाद भी अब तक अंग्रजों के बनाए कानून यथावत हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>इनका कहना है</strong></span></span></span><br /> मैंने 1255 कानूनों को हटाने की सिफारिश की थी। संविधान के मूल ढ़ांचे में बदलाव नहीं हो सकता। हालांकि समय के साथ कानूनों में बदलाव किया जाना चाहिए। नेशनल लॉ कमीशन के चेयरमैन पद पर रहते हुए मैंने प्रदेश के 1255 कानूनों में से कई कानूनों को स्क्रैप करनी की सिफारिश की थी पर कार्रवाई नहीं हुई।<br /> जस्टिस वीएस दवे<br /> <br /> <strong><br /> </strong><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>महात्मा गांधी पर दायर किया था राजद्रोह का मुकदमा</strong></span></span></span><br /> ब्रिटिश काल में स्वतंत्रता सेनानियों को आईपीसी की धारा 124ए का लागू होती थी। तिलक पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें इस कानून के तहत 1897 में सजा हुई। महात्मा गांधी, भगत सिंह और जवाहर लाल नेहरू सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अंग्रेजों ने इस धारा का बखूबी प्रयोग किया। इस कानून के तहत वर्ष 1922 में महात्मा गांधी पर भी यंग इंडिया में उनके लेखों के कारण राजद्रोह का मुकदमा दायर किया गया था। वहीं आजादी के बाद पहली बार यह मामला वर्ष 1951 में आया। पंजाब हाईकोर्ट ने तारासिंह गोपीचंद बनाम राज्य सरकार के मामले में निर्णय दिया कि धारा 124ए बोलने की आजादी असीमित नहीं है। हाल ही में सीजे एनवी रमन्ना की खंडपीठ ने इसकी वैधानिकता पर बोलते हुए कहा था कि महात्मा गांधी और तिलक को चुप कराने के लिए अंग्रेजों का ये औपनिवेशिक कानून है।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>मोटर वाहन अंग्रेजों के थे, इसलिए एक्सीडेंट में सजा मामूली</strong></span></span></span><br /> उस समय अधिकांश मोटर वाहन अंग्रेजों के पास ही होते थे। ऐसे में दुर्घटनाओं में मौत होने पर जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता के साथ ही आईपीसी की धारा 304ए को लागू किया गया था।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>ये हैं कुछ उदाहरण</strong></span></span></span><br />     आईपीसी - 6 अक्टूबर 1860 में लागू की गई। <br />     इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 में लागू किया गया था।<br />     सीआरपीसी - दीवानी या सिविल प्रकृति के मामलों के लिए 1908 में लागू। <br />     संविदा अधिनियम- 1872 में लागू किया गया था।<br />     माल एवं बिक्री अधिनियम- 1930 में लागू किया गया था।<br />     शासकीय गुप्त बात अधिनियम- देश की सुरक्षा या हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए गुप्त रखी गई बातों या दस्तावेजों को प्रकट करने से रोकने के लिए वर्ष 1923 में इस कानून को लागू किया गया था।<br />     घातक दुर्घटना अधिनियम- वर्ष 1855 में लागू इस अधिनियम के तहत हादसे में हुई क्षति को लेकर पीड़ित पक्ष को मुआवजा दिलाया जाता है। पेड़ गिरने से दबकर मौत, करंट लगने, आवारा पशु सहित अनेक अन्य कारणों को लेकर हुई क्षति को लेकर मुआवजा देने का प्रावधान है।<br /> सराय अधिनियम- ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1867 में इस कानून को बनाया था। बड़ी से बड़ी होटल हो या गेस्ट हाउस सभी इस अधिनियम के तहत नियंत्रित होते हैं।<br /> टेलीग्राफ अधिनियम- अंग्रेजों ने वर्ष 1885 में इस अधिनियम को लागू किया था। इसके पीछे मंशा दूरसंचार के साधनों को प्रतिबंधित करने की थी। वर्तमान में सारा दूरसंचार इस अधिनियम के नियंत्रण में आता है। इस कानून के तहत सरकार को आपातकाल या लोक सुरक्षा के हित में फोन संदेश को प्रतिबंधित करने एवं उसे टेप करने व निगरानी करने का अधिकार है।<br /> कारागार अधिनियम- जेल व्यवस्था कैसी रहेगी और कैदियों को लेकर क्या नियम रहेंगे, इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1894 में इस अधिनियम को लागू किया था।<br /> <br /> हम आज भी अंग्रेजों के बनाए कानून पर न्याय दिला रहे हैं। जल्द और सुलभ न्याय के लिए अब नए कानूनों की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुराने कानूनों को हटाने की शुरुआत कर दी है।  -<strong>ओम बिरला, लोस अध्यक्ष</strong><br /> <br /> अंग्रेजों ने अधिकांश कानून भारतीयों को दबाए रखने के लिए बनाए थे। आजादी मिलने के बाद देशवासियों को आशा थी कि अब देशी कानून होंगे, लेकिन सात दशक बाद भी कानून नहीं बदले हैं। -<strong>अजय कुमार जैन, अधिवक्ता</strong><br /> <br /> हमें कानून को समय के साथ नहीं देखना चाहिए। यदि कोई कानून पुराना होते हुए भी अभी तक प्रासंगिक है तो उसे बनाए रखना चाहिए। इतना जरूरी है कि समय के साथ अप्रासंगिक कानूनों को रद्द कर देना चाहिए।-<strong>डॉ. गुंजन शर्मा, अधिवक्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Nov 2021 11:11:20 +0530</pubDate>
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