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                <title>submarine - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>समंदर में मिले पाकिस्तान की पनडुब्बी के अवशेष </title>
                                    <description><![CDATA[यह सबमरीन मिलन 2024 नौसैनिक अभ्यास के दौरान समंदर में रेस्क्यू ऑपरेशन दिखाने के लिए उतारी गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/remains-of-submarine-found-in-the-sea-of-pakistan/article-70991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(1)28.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान रहस्यमयी स्थितियों में डूबी पाकिस्तान की पनडुब्बी पीएनएस गाजी के अवशेष समंदर मिले हैं। इनकी खोज भारतीय नौसेना के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ने की है। यह सबमरीन मिलन 2024 नौसैनिक अभ्यास के दौरान समंदर में रेस्क्यू ऑपरेशन दिखाने के लिए उतारी गई थी। </p>
<p>पाकिस्तानी नौसेना की हमलावर पनडुब्बी पीएनएस गाजी 1971 के युद्ध के दौरान विशाखापत्तनम के पास समंदर में रहमस्यमयी तरीके से डूब गई थी। इसमें सवार 93 पाकिस्तानी नौसैनिक मारे गए थे। इसके अलावा एक जापानी पनडुब्बी आरओ-110 भी इसी जगह के पास मिली है। इसे रॉयल इंडियन नेवी और ऑस्ट्रेलियन नौसेना ने वर्ल्ड वॉर-2 के समय पानी में डुबोया था। करीब 80 सालों से यह समंदर की तलहटी में पड़ी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Feb 2024 13:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत अब समुद्र में बढ़ाने लगा है अपनी ताकत </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस करंज गुरुवार को श्रीलंका पहुंची। ये पनडुब्बी दो दिनों के लिए श्रीलंका में रहेगी, जिसका नौसेना ने स्वागत किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-has-started-increasing-its-power-in-the-sea/article-69188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। लंबे समय से भारत ने अपने दो दुश्मनों चीन और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा को भूमि से केंद्रित रखा है, लेकिन अब भारत समुद्र में अब अपनी ताकत बढ़ाने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय जल में भारत ने चीन का मुकाबला करने के लिए नौसैनिक ताकत का विस्तार शुरू कर दिया है। भारत ने पड़ोसी श्रीलंका में अपनी एक पनडुब्बी भेजी है। भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस करंज श्रीलंका पहुंची। ये पनडुब्बी दो दिनों के लिए श्रीलंका में रहेगी, जिसका नौसेना ने स्वागत किया। </p>
<p>श्रीलंका ने कहा कि करंज 67.5 मीटर लंबी है और इसमें कमांडर अरुणाभ के नेतृत्व में 53 लोग सवार हैं। श्रीलंका की मीडिया के मुताबिक आईएनएस करंज 5 फरवरी को प्रस्थान करेगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Feb 2024 11:05:54 +0530</pubDate>
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                <title>स्कोर्पिन पनडुब्बी 'वाघशीर' के समुद्री परीक्षण शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[एमडीएल ने दो साल की अवधि में प्रोजेक्ट-75 की तीन पनडुब्बियों को नौसेना को सौंपा है और छठी पनडुब्बी का समुद्री परीक्षण शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आत्मनिर्भर भारत को बढावा मिलने का संकेत भी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sea-trials-of-scorpene-submarine-vaghshir-begin/article-46013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नौसेना की कलावरी श्रेणी की प्रोजेक्ट-75 के तहत बनायी जा रही छठी स्कोर्पिन पनडुब्बी वाघशीर के समुद्री परीक्षण शुरू हो गये हैं।</p>
<p>पनडुब्बी के अब समुद्री परीक्षण किये जायेंगे। इसे 20 अप्रैल 2022 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के कान्होजी आंग्रे वेट बेसिन से समुद्र में उतारा गया था। वाघशीर पनडुब्बी को परीक्षणों के पूरा होने के बाद अगले वर्ष की शुरुआत में भारतीय नौसेना को सौंपा जाएगा।</p>
<p>एमडीएल ने दो साल की अवधि में प्रोजेक्ट-75 की तीन पनडुब्बियों को नौसेना को सौंपा है और छठी पनडुब्बी का समुद्री परीक्षण शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आत्मनिर्भर भारत को बढावा मिलने का संकेत भी है।</p>
<p>यह पनडुब्बी अब समुद्र में सभी प्रणालियों के गहन परीक्षणों से गुजरेगी, इनमें प्रणोदन प्रणाली, हथियार और सेंसर प्रणाली आदि सम्मिलित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 17:55:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75आई में होगी जर्मनी की एंट्री, 6 महाशक्तिशाली पनडुब्बियों का दिया आफर</title>
                                    <description><![CDATA[राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के जरिए इन पनडुब्बियों के बेचने का एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germanys-entry-in-indian-navys-project-75i-will-be-offered-for/article-42021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-161.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी ने भारत को छह महाशक्तिशाली पनडुब्बियों का आफर दिया है। इन पनडुब्बियों को गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के तहत खरीदा जा सकता है। जर्मन विदेश मंत्री की आगामी भारत यात्रा के दौरान इस डील पर विस्तार से बातचीत होने की उम्मीद है। भारतीय नौसेना प्रोजेक्ट-75आई के तहत छह उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद करना चाहती है। इसकी अनुमानित लागत 45000 करोड़ रुपए से अधिक है। तकनीकी दिक्कतों के कारण यह परियोजना कुछ समय से अटकी हुई है। इसका असर भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों के बेड़े पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>जर्मन रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के दौरान हो सकती है डील</strong><br />राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के जरिए इन पनडुब्बियों के बेचने का एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे औपचारिक रूप से जल्द ही भारत सरकार के सामने पेश किया जाएगा। अधिकारियों और राजनयिक सूत्रों ने कहा कि अगले महीने में जर्मन रक्षा मंत्री भारत यात्रा पर आ रहे हैं, जिसके दौरान प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पेश किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि फरवरी में जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज की भारत यात्रा के दौरान भी यह मुद्दा चर्चा में आया था।</p>
<p><strong>2020 से ही छह पनडुब्बियां खरीदना चाहता है भारत</strong><br />जनवरी 2020 में भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने मझगाँव डॉक्स लिमिटेड (एमडीएल) और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को पी-75 (प्रोजेक्ट-75) डील के लिए भारतीय भागीदारों के रूप में चुना था। इसका मतलब कि जो भी विदेशी कंपनी पनडुब्बियों के सौदे के लिए चुनी जाती है, वे इन दोनों भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर उसका निर्माण करेंगी। इसका निर्माण भारत में ट्रांसफर आॅफ टेक्नोलॉजी के जरिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>कौन-कौन सी विदेशी कंपनियां दौड़ में शामिल</strong><br />भारत को पनडुब्बी बेचने की दौड़ में पांच विदेशी निमार्ता देवू शिपबिल्डिंग एंड मरीन इंजीनियरिंग (दक्षिण कोरिया), नेवल ग्रुप (फ्रांस), नवंतिया (स्पेन), रोसोबोरोनेक्सपोर्ट (रूस) और थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस, जर्मनी) शामिल हैं। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75आई के प्रस्ताव के लिए अनुरोध मूल रूप से जुलाई 2021 में एमडीएल और एलएंडटी को जवाब देने के लिए 12 सप्ताह की डेडलाइन के साथ जारी किया गया था। हालांकि, तब से लेकर अब तक इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है। अब नई डेडलाइन अगस्त 2023 तक है।</p>
<p><strong>जर्मन कंपनी को मिल सकती है डील</strong><br />भारतीय नौसेना के मानदंडों को केवल जर्मनी और दक्षिण कोरिया की कंपनियां ही पूरी करती हैं। दक्षिण कोरिया अपनी पनडुब्बियों के लिए ज्यादा पैसे मांग रहा है। इतना ही नहीं, दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी तकनीक के मामले में जर्मन पनडु्ब्बी से काफी पीछे है। ऐसे में संभावना है कि जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स को यह टेंडर मिल सकता है। टीकेएमएस चार तरह की पनडुब्बियों का निर्माण करती है। संभावना है कि भारत उसकी डॉल्फिन क्लास की पनडुब्बियों की खरीद करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Apr 2023 11:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ताइवान ने बनाई अपनी पनडुब्बी, दक्षिण चीन सागर में करेगी ड्रैगन का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[ प्राग स्थित थिंकटैंक एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स के रिसर्चर माइकल थिम कहते हैं कि ताइवान की ये स्वदेशी पनडुब्बी बहुत जरूरी है और इसे एक खास डिफेंस प्रोग्राम के तहत डेवलप किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taiwan-built-its-own-submarine--will-hunt-dragons-in-the-south-china-sea/article-20062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/taiwan-subs.jpg" alt=""></a><br /><p>ताइपे। चीन के साथ जारी तनाव के बीच ही ताइवान ने अपनी पहली पनडुब्बी की झलक दुनिया को दिखाई है। ताइवान के पास पनडुब्बियों का बहुत छोटा बेड़ा है लेकिन ये चीन को जवाब देने की ताकत रखता है। ताइवान की यह पनडुब्बी पूरी तरह से देश में बनी है और सितंबर में इसे लॉन्च कर दिया जाएगा। ताइवान के बेड़े में ये इकलौती स्वदेशी पनडुब्बी है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये उन लक्ष्यों में से एक लक्ष्य है जिसे ताइवान हमेशा से हासिल करना चाहता था।</p>
<p><strong>विदेशी विशेषज्ञों की मदद<br /></strong>थिम ने बताया कि पनडुब्बी की क्षमता की अगर बात करें तो ताइवान विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने में समर्थ है। पिछले कुछ सालों में डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए उसने कई विशेषज्ञों की मदद ली है। अमेरिका अभी तक ताइवान का वो सबसे बड़ा साझीदार रहा है जो पनडुब्बी से जुड़ी तकनीक उसे देता आ रहा है।  थिम का कहना है कि जापान की पनडुब्बी बनाने की क्षमता विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। ताइवान ने सन 1980 में जापान से हाई शियन क्लास की पनडुब्बी हासिल की थी और इसे कई बार अपग्रेड किया जा चुका है। ये पनडुब्बी दुश्मन के जहाज को खासा नुकसान पहुंचा सकती है। चीन के पास फिलहाल 60 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं।<br />जिन्हें वो जहाजों को ब्लॉक करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।</p>
<p><strong>खास प्रोग्राम के तहत हुई डेवलप<br /></strong>प्राग स्थित थिंकटैंक एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स के रिसर्चर माइकल थिम कहते हैं कि ताइवान की ये स्वदेशी पनडुब्बी बहुत जरूरी है और इसे एक खास डिफेंस प्रोग्राम के तहत डेवलप किया गया है। हालांकि पनडुब्बी चीन की तरफ से होने वाले हमले को रोक नहीं सकती है लेकिन ये एक मजबूत बल को तैयार कर पाएगी। पनडुब्बियां ताइवान स्ट्रैट के गहरे पानी में लगातार गश्त लगा रही हैं। इनके समुद्र के अंदर होने का पता किसी को भी नहीं चलता है क्योंकि ये समुद्र से आने वाले साउंड को कवर के तौर पर प्रयोग कर लेती है। ऐसे में ये उन चीनी सैन्य जहाजों के लिए खतरा बन सकती हैं जो ट्रांसपोर्ट के तौर पर प्रयोग हो रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Aug 2022 12:09:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस तैयार कर रहा पनडुब्बी, लगती है एयरक्राफ्ट </title>
                                    <description><![CDATA[आर्मी 2022 डिफेंस एक्सपो में यह डिजाइन सामने आया है और इसे आर्कटुरस नाम दिया गया है। इस हथियार को एक तारे के नाम पर यह नाम मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-submarine-looks-like-an-aircraft/article-19277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/article-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस में पनडुब्बी डिजाइन करने वाले ब्यूरो ने बैलेस्टिक मिसाइल पनडुब्बी का लेटेस्ट डिजाइन सार्वजनिक कर दिया है। आर्मी 2022 डिफेंस एक्सपो में यह डिजाइन सामने आया है और इसे आर्कटुरस नाम दिया गया है। इस हथियार को एक तारे के नाम पर यह नाम मिला है। इस पनडुब्बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये पहली नजर में किसी एयरक्राफ्ट लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रूस की अब तक की सबसे एडवांस्ड पनडुब्बी है। यह पनडुब्बी ऐसे समय में सभी के सामने आई है, जब यूक्रेन के साथ जंग जारी है और रूस को नुकसान उठाना पड़ा है।</p>
<p><strong>सबसे लंबी पनडुब्बी</strong><br />पिछले दिनों रूस की नेवी को दुनिया की सबसे लंबी पनडुब्बी मिली है। बेलगोरोड नामक की ये पनडुब्बी एक स्कूल बस के बराबर न्यूक्लियर टॉरपीडो से लैस है। बताया जा रहा है कि ये पनडुब्बी समुद्र में रेडियोएक्टिव सुनामी तक ला सकती है। पनडुब्बी 184 मीटर लंबी है। कहा जा रहा है कि यह पिछले 30 साल में बनने वाली अब तक की सबसे बड़ी पनडुब्बी है। 30 हजार टन वजनी इस पनडुब्बी में 80 फुट के छह पोसाइडन न्यूक्लियर टॉरपीडो ड्रोन लगे हैं, जिनमें 100 मेगाटन न्यूक्लियर पेलोड भरा है। ये हथियार इतने घातक हैं कि इनके फटने से समुद्र का पानी 500 मीटर ऊंचे तक उछल सकता है, जो एक बड़ी लहर उत्पन्न करने के लिए काफी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Aug 2022 11:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विनाश की तैयारी न्यूक्लियर सुनामी ला सकती है पुतिन की महाविनाशक सबमरीन!</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को। रूस और यूक्रेन का युद्ध लगातार जारी है। इस बीच रूस की ताकत में एक बड़ा इजाफा हुआ है। रूस की नौसेना को दुनिया की सबसे लंबी महाविनाशक पंडुब्बी बेलगोरोड मिल गई है। ये पनडुब्बी एक स्कूल बस के बराबर न्यूक्लियर टॉरपीडो से लैस है, जो एक रेडियोएक्टिव सुनामी लाने की ताकत रखती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/preparing-for-destruction-nuclear-tsunami-could-bring-putin-s-great-destroyer-submarine/article-14056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/62.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस और यूक्रेन का युद्ध लगातार जारी है। इस बीच रूस की ताकत में एक बड़ा इजाफा हुआ है। रूस की नौसेना को दुनिया की सबसे लंबी महाविनाशक पंडुब्बी बेलगोरोड मिल गई है। ये पनडुब्बी एक स्कूल बस के बराबर न्यूक्लियर टॉरपीडो से लैस है, जो एक रेडियोएक्टिव सुनामी लाने की ताकत रखती है। पनडुब्बी 184 मीटर लंबी है। ये पिछले 30 साल में बनने वाली अब तक की सबसे बड़ी पनडुब्बी है। अमेरिकी नेवल इंस्टीट्यूट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 30 हजार टन वजनी इस पनडुब्बी में 80 फुट के छह पोसाइडन न्यूक्लियर टॉरपीडो ड्रोन लगे हैं, जिनमें 100 मेगाटन न्यूक्लियर पेलोड भरा है। ये हथियार इतने घातक हैं कि इनके फटने से समुद्र का पानी 500 मीटर ऊंचे तक उछल सकता है जो एक बड़ी लहर पैदा करने के लिए काफी है। इसके साथ ही जहां-जहां भी ये पानी जाएगा वो अपने साथ न्यूक्लियर रेडिएशन लेकर चलेगा। पोसाइडन टॉरपीडो को आर्थिक गतिविधि वाले तटीय शहरों को तबाह करने के लिए बनाया गया है। क्योंकि इससे लंबे समय तक रेडिएशन रहेगा। 2015 में लीक हुए एक डॉक्यूमेंट में ये बात सामने आई थी।<br /><br /><strong>कोवर्ट मिशन के लिए होगा इस्तेमाल</strong><br />8 जुलाई को रूस के नेवी कमांडर इन चीफ निकोलाय टेवमेनोव पनडुब्बी के डिलीवरी सेरेमनी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि ये शोध और विज्ञान में इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि इससे पहले रूस ने कहा था कि ये पनडुब्बी उसे 31 जुलाई तक मिलेगी, लेकिन ये पहले ही मिल गई है। एक रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि ये पश्चिम की किसी भी पनडुब्बी से बड़ी है और इसमें पानी के ड्रोन हैं। युद्ध से ज्यादा इसका इस्तेमाल कोवर्ट मिशन में किया जाएगा, जैसे अंडर वाटर इंटरनेट की केबल को काटना जो पश्चिमी देशों को दुनिया से अलग कर सकते हैं।<br /><br /><strong>लीक किए डॉक्यूमेंट</strong><br />लीक डॉक्यूमेंट में इस हथियार की रेंज हाजारों किमी बताई गई। जिस आकार के वॉरहेड इस पनडुब्बी में है वह अमेरिकी तट को एक खतरनाक रेडियोएक्टिव सुनामी से तबाह कर सकते हैं। कहा जाता है कि 2015 में रूस ने जानबूझ कर इस पनडुब्बी की खासियत को लीक कर दिया था। ताकि अमेरिका को इसके जरिए एक वॉर्निंग सिग्नल मिल सके। मई 2020 में रूस की न्यूज एजेंसी ने बताया था कि इसका पेलोड दो मेगाटन तक हो सकता है, जो दुश्मनों के नौसेना अड्डों को तबाह कर सकता है। ये पनडुब्बी एक किमी की गहराई तक जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 14:48:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पनडुब्बी आईएनएस वेला नौसेना में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[यह पुनडुब्बी 350 मीटर की गहराई तक जा सकती है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%A1%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%88%E0%A4%8F%E0%A4%A8%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2/article-2740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/25nov85u.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह की उपस्थिति में गुरुवार को पनडुब्बी आईएनएस वेला को नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। इस अवसर पर सिंह ने कहा कि आईएनएस वेला के शामिल होने से नौसेना की ताकत बढ़ गई है। भारतीय नौसेना को कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी परियोजना-75 के तहत कुल छह पनडुब्बियों को सेवा में शामिल करना है और आईएनएस वेला सेवा में शामिल की गई। यह इस श्रेणी की चौथी पनडुब्बी हैं। स्वदेशी बैटरी और आधुनिक संचार व्यवस्था से लैस : उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को बढ़ावा देने के लिए इस पनडुब्बी में स्वदेशी बैटरी और आधुनिक संचार व्यवस्था लगायी गयी है।  <br /> <br /> <strong>एक नजर में वेला</strong><br /> 221 फीट लम्बाई<br /> 40 फीट ऊंचाई<br /> 1565 टन वजन<br /> यह पनडुब्बी विशेष स्टील से बनाई गई है<br /> यह पुनडुब्बी 350 मीटर की गहराई तक जा सकती है<br /> स्टील्थ तकनीकी के कारण रडार की पकड़ में नहीं आती <br /> हर मौसम में अपना काम कर सकती है<br /> आधुनिक हथियारों से लैस </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Nov 2021 11:28:51 +0530</pubDate>
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