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                <title>सात वार्डों की ऑडिट में छलका लोगों का दर्द: अरमान था हमकों जिसका, वह गुल खिला नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[ ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव, महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने हादसों का खतरा; सुविधाओं के अभाव पर वार्डवासियों का फूटा गुस्सा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/residents--anguish-surfaces-during-audit-of-seven-wards--%22the-dream-we-cherished-never-came-to-fruition-%22/article-163980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। शहर के छह वार्डों की दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। चुनाव के समय बेहतर सड़क, पर्याप्त पानी, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं के जो सपने क्षेत्रवासियों को दिखाए गए थे, वे आज भी कई इलाकों में अधूरे नजर आ रहे हैं। लोगों का दर्द साफ शब्दों में सामने आया—“अरमान था जिसका, वह गुल खिला नहीं।” करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के दावों के बावजूद वार्डों में लोग आज भी नल, पानी, सफाई और अन्य छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।</p>
<p>दैनिक नवज्योति की सात वार्डों में की गई जमीनी पड़ताल में सामने आया कि कई क्षेत्रों में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कहीं नलों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा तो कहीं जलापूर्ति की व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी है। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था भी वार्डवासियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी फैली रहती है और लोगों को दुर्गंध व मच्छरों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ट्रांसपोर्ट नगर में नालियों के अभाव से जलभराव</strong><br />ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में नालियों का समुचित निर्माण नहीं होने से बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं। पानी निकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई जगह पानी भर जाता है। लोगों का कहना है कि नालियों के निर्माण और रखरखाव पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कई नालियां जाम होने के कारण बारिश के दौरान गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में फैल जाता है। इससे आवागमन प्रभावित होता है और क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p><strong>महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने दुर्घटना का खतरा</strong><br />महावीर नगर क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य में भी खामियां सामने आई हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार सीवरेज चेंबरों के ढक्कन सड़क की सतह के अनुरूप नहीं हैं। कहीं ढक्कन ऊपर हैं तो कहीं नीचे, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में केवल निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। खराब तरीके से किए गए कार्य लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन रहे हैं।</p>
<p><strong>अनंतपुर थाने के पीछे नाले पर अतिक्रमण से बढ़ी परेशानी</strong><br />अनंतपुर थाने के पीछे स्थित नाले में लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी प्रभावित होने की बात भी सामने आई। नाले की चौड़ाई और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने से क्षेत्र में जलभराव की समस्या बनी रहती है। बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते अतिक्रमण हटाकर नाले की सफाई और उचित व्यवस्था की जाए तो जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</p>
<p>वार्ड में सुविधाओं की कमी को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कई क्षेत्रों में न तो सामुदायिक भवन है, न लोगों की जरूरत के अनुसार डिस्पेंसरी की व्यवस्था और न ही बच्चों व बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क। वार्डवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल बड़े विकास कार्यों के आंकड़े बताने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को समझना चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि पांच साल में वार्डों में पानी, सफाई, सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं तो आखिर विकास किसका हुआ?</p>
<p><strong>करोड़ों के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की तलाश</strong><br />जनप्रतिनिधि अक्सर करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाने के दावे करते हैं, लेकिन दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में कई जगहों पर अलग तस्वीर दिखाई दी। क्षेत्रवासी आज भी छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें आंकड़ों और घोषणाओं से ज्यादा जरूरत धरातल पर काम दिखने की है। साफ सड़क, बेहतर सफाई, सुचारू जलापूर्ति, मजबूत नालियां और सुरक्षित सीवरेज व्यवस्था उनकी प्राथमिक मांग है।<br />छह वार्डों की इस ऑडिट ने साफ कर दिया है कि विकास की तस्वीर केवल दावों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले बदलाव से तय होती है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जरीना</strong><br />कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई और करीब 9 करोड़ रुपए के कार्य करवाए गए। वार्ड में सड़कों का निर्माण कराया गया, जिससे आवागमन की सुविधा बेहतर हुई है। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी अच्छी बनी रहती है। हालांकि, अनंतपुर थाने के पीछे नाले की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कमल मीणा</strong><br />वार्ड की सबसे बड़ी समस्या जगपूरा नाले की है। नाले का आधा काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अभी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि कार्यकाल में खेल मैदान का निर्माण, पानी की पाइपलाइन सहित कई विकास कार्य करवाए गए। सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी के कारण परेशानी आती है, जिसे दूर करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद विनय कुमार</strong><br />पांच वर्षों के कार्यकाल में वार्ड में कई विकास कार्य करवाए गए और लोगों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि, वार्ड के कुछ क्षेत्रों में धीमी गति से पानी आने की समस्या आज भी बनी हुई है। ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव और अन्य परेशानियों को देखते हुए जल्द ही नालियों के निर्माण का कार्य करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुनील गौतम</strong></p>
<p>वार्ड की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज लाइन को गलत तरीके से डालने के कारण बनी हुई है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नालों की समस्या भी क्षेत्र में बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वार्ड के पांच कचरा पॉइंट में से चार को कचरा मुक्त कराया गया है और एक पर काम शेष है। साथ ही पार्क का निर्माण भी कराया गया।</p>
<p><strong>वार्डवासी मनीष नागर</strong><br />क्षेत्र में आज भी कई मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पांच साल पहले लोगों से जो वादे किए गए थे, उनमें से कई आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। वार्ड में पानी और सफाई की समस्या लगातार बनी हुई है। कई अन्य समस्याओं का भी समाधान नहीं हुआ है, जिससे वार्डवासियों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 22 से 28 तक के क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 22: टैगोर नगर, चाणक्य नगर, रानी लक्ष्मीबाई नगर, बोम्बे योजना, स्वामी विवेकानंद नगर, दीप श्री, शुभ अटलांटिस अपार्टमेंट्स, विवेकानंद नगर सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 23: विधायक कॉलोनी, विश्व नगर से नाले तक का क्षेत्र, रंगबाड़ी योजना सेक्टर-1 व 2, बालाजी नगर, कृष्णा नगर, नारकोटिक्स कार्यालय एवं पावर हाउस क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 24: गणपति ट्रेडर्स, रंगबाड़ी का संपूर्ण क्षेत्र, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर, विनोबा भावे नगर, अजय आहूजा नगर, मुंबई योजना एवं उड़िया बस्ती शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 25: संपूर्ण बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती, ट्रक यूनियन के पीछे का क्षेत्र, मल्टीस्टोरी क्षेत्र, ट्रक यूनियन के सामने का क्षेत्र, बॉम्बे योजना, सुभाष नगर एवं श्मशान क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 26: संपूर्ण तालाब गांव, घोसी मोहल्ला, अनंतपुरा कच्ची बस्ती, अमीन भाई फार्म हाउस, संपूर्ण सुभाष विहार, पुराना अनंतपुरा थाना, आमिर कॉलोनी, देव कॉलोनी एवं राजपूत कॉलोनी शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 27: दीनदयाल नगर, सुभाष नगर प्रथम व द्वितीय, ट्रांसपोर्ट नगर तथा गोबरिया बावड़ी कच्ची बस्ती का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 28: कॉमर्स कॉलेज चौराहा, झालावाड़ रोड, गोबरिया बावड़ी, रेलवे लाइन क्षेत्र, रेलवे लाइन अंडरपास, कोलीपाड़ा, ओम एनक्लेव, विज्ञान नगर, श्मशान नगर, इंदिरा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी एवं राजीव गांधी स्पेशल क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:08:10 +0530</pubDate>
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                <title>विकास के दावों की हकीकत : शहर के बीच बसे गांव जैसे हालात, मूलभूत सुविधाओं को तरसे वार्डवासी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने पूछा—मूलभूत सुविधाएं नहीं तो वोट का क्या मतलब?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-reality-behind-development-claims--village-like-conditions-in-the-heart-of-the-city--residents-deprived-of-basic-amenities/article-163826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच रविवार को छह वार्डों के किए गए ग्राउंड ऑडिट में कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। शहर का हिस्सा होने के बावजूद कुछ इलाके ऐसे नजर आए, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। कहीं टूटी सड़कें हैं तो कहीं बदहाल नालियां, कहीं टूटे स्पीड ब्रेकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों के खेलने के लिए पार्क तक उपलब्ध नहीं हैं। कई इलाकों में सामुदायिक भवन जैसी सुविधा भी नहीं है, जहां स्थानीय लोग छोटे-मोटे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन कर सकें। छह वार्डों के इस ऑडिट में सामने आया कि विकास की रफ्तार हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाई है। उद्योग नगर, डीसीएम और हनुमत खेड़ाख, रायपुरा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों की मांग एक ही है—सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं हर वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में रहते हुए भी ग्रामीण जैसी सुविधाओं का अभाव</strong><br />वार्डवासियों का कहना है कि शहर के बीच रहने के बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो एक विकसित वार्ड की पहचान मानी जाती हैं। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हैं और लंबे समय से मरम्मत की मांग की जा रही है। बरसात और समय के साथ सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। रायपुरा के लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>ग्राउंड ऑडिट के दौरान कुछ क्षेत्रों में ऐसा माहौल दिखाई दिया, जहां विकास की रफ्तार बेहद धीमी नजर आई। वार्डवासियों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायतें करने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कई क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>उद्योग नगर की सड़कें बनीं परेशानी, टूटे ब्रेकर बढ़ा रहे खतरा</strong><br />उद्योग नगर क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों को लेकर सामने आई। सड़कों की बदहाली लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि सड़क और ब्रेकरों की समय पर मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। उद्योग नगर और डीसीएम क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां समय-समय पर परेशानी का कारण बनती हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वार्डवासियों का कहना है कि सुरक्षित वातावरण भी किसी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सड़क और भवन निर्माण से ही आदर्श वार्ड नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>हनुमत खेड़ा में सुविधाओं की कमी से मायूसी</strong><br />हनुमत खेड़ा क्षेत्र की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नजर नहीं आई। यहां कई लोगों ने स्थानीय सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त पार्क की सुविधा नहीं होना लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा।</p>
<p><strong>छोटे आयोजनों के लिए भी नहीं मिलती जगह</strong><br />ऑडिट में एक बड़ी समस्या सामुदायिक भवन के अभाव की भी सामने आई। कई वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में ऐसा कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है, जहां लोग छोटे सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक आयोजन करवा सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी बोले—पहले मूलभूत सुविधाएं तो मिलें</strong><br />हम शहर में रहते हैं, लेकिन कई बार सुविधाओं की स्थिति देखकर लगता है जैसे गांव के पिछड़े इलाके में रह रहे हों। सड़कें ठीक नहीं हैं, बच्चों के लिए पार्क नहीं है और कई जगह सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं मिलता। हमारी मांग कोई बड़ी नहीं है, सिर्फ इतनी है कि हर वार्ड में सड़क, बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों।<br /><strong>- जितेन्द्र चौधरी, वार्डवासी</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लोगों को उम्मीद होती है कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करेंगे। उद्योग नगर और डीसीएम जैसे क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता है। यदि आम आदमी को रोजाना टूटी सड़क, खराब सुविधाओं और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़े तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।<br /><strong>- दिपू सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p>कार्यकाल में वार्डवासियों की हर समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर कराने का प्रयास किया गया। वार्ड में पार्क जैसी सुविधाओं का अभाव जरूर है, लेकिन जब भी कोई वार्डवासी अपनी समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान कराना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। जनसमस्याओं के समाधान के लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हू।<br /><strong>- दीपक कुमार, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड के कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाती है, लेकिन कई बार लोग स्वयं कचरा फैला देते हैं। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नालियों के ड्रेनेज व्यवस्था की है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।<br /><strong>-सुशील त्रिपाठी, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 29 में वैष्णो कॉलोनी, डालाबाई माताजी , प्रेम नगर द्वितीय आंशिक, मदरसा, सरकारी स्कूल क्षेत्र, राजेंद्र कुशवाहा जागा बस्ती, अफॉर्डेबल आवास योजना के ए, बी, सी, डी और ई, प्रेम नगर तृतीय का आंशिक क्षेत्र तथा गोविंद नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 30 : इंदिरा गांधी नगर का आंशिक क्षेत्र, पावर हाउस क्षेत्र, रामदेव मंदिर तथा प्रेम नगर तृतीय क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 31 : जलेबी चौक, झिरी के हनुमान जी, विजयलक्ष्मी स्कूल क्षेत्र, तिलक स्कूल, फकीरों का मोहल्ला, भेरूजी का चबूतरा, मस्जिद क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, गुर्जरों का मोहल्ला, नाईस स्कूल के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के पीछे का क्षेत्र, पुलिस चौकी के सामने का क्षेत्र, जागा मोहल्ला और सुभाष स्कूल के पीछे का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 32 : बापू कॉलोनी, कर बाजार, डीसीएम श्मशान, इंदिरा गांधी नगर, तारवाड़ा, पावर हाउस और डीसीएम सेक्टर कार्यालय सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 33 : जय श्री विहार, रायपुर नाका, गुलाबबाड़ी, मालीपुरा, लक्ष्मी आवास, थेकड़ा, मॉडल टाउन, रॉयल सनसिटी, कैरियर पॉइंट टाउनशिप, शिवधाम कॉलोनी, कबीरधाम और शिवसागर का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 34 : देवली अरब ग्राम, नया नोहर, राजनगर का आंशिक भाग, महालक्ष्मीपुरम, बक्शी स्कूल, अरिहंत विद्यालय, मित्तल इंटरनेशनल स्कूल, श्याम नगर, हाथीखेड़ा ग्राम, हनुमतखेड़ा ग्राम, श्रीराम कॉलोनी, जगन विहार, गुरु नानक विहार, अरावली विहार, टैगोर नगर, होली फैमिली क्षेत्र, कृष्णा नगर, मोती नगर, गणेश नगर, बृज विहार, देवली अरब रोड, कौटिल्य नगर और प्रताप नगर द्वितीय सहित कई शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:48:39 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांचना बांध की नहरों में जल्द दौड़ेगा पानी, गेटों की टेस्टिंग के बाद होगी आपूर्ति शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[पांचना बांध से जुड़ी नहरों में पानी छोड़ने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई। जल संसाधन विभाग ने नहरों के गेटों की मरम्मत और तकनीकी कार्यों में तेजी लाते हुए अभियंताओं को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश। विभाग के अनुसार डाउनस्ट्रीम के दोनों गेटों का सुधार कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अपस्ट्रीम के दोनों गेटों की मरम्मत का कार्य तेजी से जारी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-will-soon-run-in-the-canals-of-panchna-dam/article-159515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/522.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पांचना बांध से जुड़ी नहरों में पानी छोड़ने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। जल संसाधन विभाग ने नहरों के गेटों की मरम्मत और तकनीकी कार्यों में तेजी लाते हुए अभियंताओं को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार डाउनस्ट्रीम के दोनों गेटों का सुधार कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अपस्ट्रीम के दोनों गेटों की मरम्मत का कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के द्वारा पानी छोड़ने की शुरुआत की जा सकती है।</p>
<p>विभाग का लक्ष्य 17 से 18 जुलाई तक नहरों से जुड़े चारों गेट पूरी तरह तैयार करना है। इससे पहले 15 और 16 जुलाई को चारों गेट खोलकर पानी निकासी की टेस्टिंग की जाएगी, ताकि किसी भी तकनीकी खामी का समय रहते समाधान किया जा सके। टेस्टिंग सफल रहने के बाद पांचना बांध से कई किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए राहत मिलेगी। गौरतलब है कि नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर संघर्ष समिति लंबे समय से आंदोलनरत थी और इस मांग को लेकर धरना भी दिया गया था। अब गेटों के सुधार कार्य में तेजी आने से किसानों और क्षेत्रवासियों को जल्द ही नहरों में पानी मिलने की उम्मीद जगी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 12:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक महीने से हरनावदा फंटा में जलापूर्ति ठप, लीकेज से हजारों लीटर पानी बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से ग्रामीण परेशान, आंदोलन की चेतावनी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/water-supply-stalled-at-harnavda-fanta-for-a-month--thousands-of-liters-wasted-due-to-leakage/article-158761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>करावन । करावन हरनावदा फंटा में पेयजल संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। पिछले करीब 25 दिनों से क्षेत्र के कई घरों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद है। भीषण गर्मी और उमस के बीच ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर मेगा हाईवे पर पाइपलाइन लीकेज के कारण हजारों लीटर पेयजल लगातार सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार डंग मेगा हाईवे के दोनों ओर बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन लंबे समय से बंद पड़ी है। विभाग ने पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़क किनारे खुदाई तो करवाई, लेकिन कई स्थानों पर पाइपों को सुरक्षित तरीके से जमीन में दबाने के बजाय खुले में छोड़ दिया। इससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और कई जगहों पर बड़ा लीकेज हो गया। परिणामस्वरूप सड़क पर पानी बह रहा है, जबकि लोगों के घरों तक एक बूंद पानी भी नहीं पहुंच रहा। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि 19 जून को आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पेयजल, बिजली और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हरनावदा फंटा में लगातार बनी पेयजल समस्या सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मेगा हाईवे के दोनों ओर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कर नियमित जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो चक्का जाम कर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।</p>
<p>ठेकेदार की टीम भेजकर लीकेज वाली पाइपलाइन की मरम्मत कराई जाएगी। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- नवीन शर्मा, ठेकेदार, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:21:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार दिन से जलापूर्ति ठप, गहराया पेयजल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-supply-halted-for-four-days/article-155647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/char-din-se-jalapurti-thap.-gahraya-peyjal-sankat.-ramganjmandi.-dist.-kota.--01may2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। क्षेत्र के सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने शीघ्र समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।सातलखेड़ी कस्बे में पिछले चार दिनों से नलों में पानी नहीं आने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। घरों की टंकियां और मटके खाली हो चुके हैं तथा लोगों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य सड़क के आसपास रहने वाले कुछ लोग निजी टैंकरों से पानी की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन कस्बे के अंदरूनी मोहल्लों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। कई परिवारों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>समस्या का नहीं हो रहा स्थायी समाधान</strong><br />पानी की कमी के कारण घरेलू कार्य, साफ-सफाई और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई घरों में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>चार दिनों से जलापूर्ति बंद होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।<br /><strong>- ललित सिसोदिया, ग्रामीण</strong></p>
<p> तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे पानी की टंकी नहीं भर सकी और जलापूर्ति बाधित रही। समस्या के समाधान के लिए सभी वार्डों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है तथा जलापूर्ति को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, कनिष्ठ अभियंता, पीएचईडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:38:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर में बढ़ रहे दूषित पानी आपूर्ति के मामले : सोडाला में दूषित पानी सप्लाई, लोग बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों की शुरुआत के साथ ही नलों में दूषित पानी की सप्लाई के मामले बढ़ रहे। ऐसा ही एक मामला सोडाला क्षेत्र के सुशीलपुरा कॉलोनी में सामने आया। यहां करीब एक हजार से ज्यादा लोगों को बदबूदार पानी की सप्लाई से परेशान होना पड़ रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cases-of-contaminated-water-supply-are-increasing-in-the-city/article-148643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/12200-x-60-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में गर्मियों की शुरुआत के साथ ही नलों में दूषित पानी की सप्लाई के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सोडाला क्षेत्र के सुशीलपुरा कॉलोनी में सामने आया है। यहां करीब एक हजार से ज्यादा लोगों को बदबूदार पानी की सप्लाई से परेशान होना पड़ रहा है। हालत इतने खराब हैं कि पानी से सीवर जैसी बदबू आ रही है। पानी इतना खराब है कि लोग पीना तो दूर, नहाने में भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। नल शुरू करते ही इतनी तेज बदबू आती है कि पूरे घर में फैल जाती है। कई परिवार टैंकर मंगवा रहे हैं। कैंपर और बाल्टियों में पानी भरकर ला रहे हैं। लोगों ने इसकी शिकायत जलदाय विभाग को दी है। सूचना पर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दूषित पानी के कारणों का समाधान करने का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>इधर ठीक हुई दूषित पानी की समस्या</strong><br />झोटवाड़ा क्षेत्र के शिल्प कॉलोनी सहकार नगर में भी दूषित पानी की शिकायत सामने आई। इस पर विद्याधर नगर अधिशासी अभियंता सुरेश कुमार शर्मा के निर्देश पर सहायक अभियंता योगेश जांगिड़, कनिष्ठ अभियंता राजेश त्यागी मय टीम के मौके पर पहुंचे। दो दिन तक लगातार जांच के बाद दूषित पानी की समस्या पकड़ में आई। जेसीबी से खड्डा खोदने के बाद पता चला कि पास ही मेन सीवर लाइन के पास लाइन टूटी हुई पाई गई। जिसे दुरुस्त करवा दिया गया। सप्लाई चैक की गई। क्लोरीन भी सही मात्रा में पाई गई और पानी बिल्कुल सही पाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 10:41:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोगों को फिर होगी पेयजल किल्लत : शहर में 2 दिन पानी की सप्लाई रहेगी बाधित, बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना के अंतर्गत होगा मेंटिनेंस का काम</title>
                                    <description><![CDATA[राजधानी में 29-30 मार्च को बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना के मेंटिनेंस के चलते शहरभर में पानी की सप्लाई ठप रहेगी। जलदाय विभाग ने इसे ग्रीष्मकाल से पहले जरूरी मरम्मत बताया है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय सिंह राठौड़ के अनुसार 31 मार्च से सप्लाई फिर सामान्य हो जाएगी, इसलिए लोग पहले से पानी का पर्याप्त भंडारण कर लें।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/people-will-face-shortage-of-drinking-water-again-water-supply/article-148270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/nal.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जयपुर। राजधानी</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जयपुर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">के</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">लोगों</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">को</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">एक</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">बार</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">फिर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मेंटिनेंस</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">के</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">नाम</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पेयजल</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">किल्लत</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">का</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">सामना</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">करना</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पड़ेगा।</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> 29 </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">और</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> 30 </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मार्च</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">को</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जलदाय</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">विभाग</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">बीसलपुर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">-</span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जयपुर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पेयजल</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">परियोजना</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">के</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अंतर्गत</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">आवश्यक</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">नियमित</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मेंटिनेंस</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">का</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">काम</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">होगा।</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">इसके</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">कारण</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">सम्पूर्ण</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जयपुर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">शहर</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">की</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पेयजल</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">आपूर्ति</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">बाधित</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">रहेगी।</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अतिरिक्त</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मुख्य</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अभियंता</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अजय</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">सिंह</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">राठौड़</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">ने</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">बताया</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">कि</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">आगामी</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">ग्रीष्मकालीन</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मौसम</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">को</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">ध्यान</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">में</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">रखते</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">हुए</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">यह</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मरम्मत</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">कार्य</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अत्यंत</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">आवश्यक</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">है।</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">राठौड़</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">ने</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">बताया</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">कि</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> 31 </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">मार्च</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">से</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">पेयजल</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">सप्लाई</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">सुचारू</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">हो</span><span style="font-family:Arial, 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">जाएगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 17:53:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>लापरवाही: पानी की टंकी जर्जर, व्यर्थ बह रहा अमृत</title>
                                    <description><![CDATA[पानी की टोंटी नहीं होने से व्यर्थ बह रहा पानी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--water-tank-dilapidated--amrit-flowing-wastefully/article-125465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(10)2.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर।  खानपुर देवपुरा गांव में कई दिनों से पानी की टंकी जर्जर अवस्था में है। जिसमें से पानी का रिसाव हो रहा है, यहां से सभी गांव के ग्रामीण को पानी की आपूर्ति इस टंकी से ही होती है। जिसका उपयोग पीने खाने ,स्नान आदि में किया जाता है, लेकिन समस्या यह है इनका निर्माण हुए कई समय हो गया है, जिस कारण इनकी समय पर मरम्मत नहीं होने से इनमें पानी का रिसाव होने समय पर पानी की आपूर्ति नहीं होने ग्रामीणों कई बार पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ता हैं। लगभग 70 घरों से इसी टंकी से पानी की पूर्ति होती है, लेकिन टंकी की मरम्मत नहीं होने से इनमें कई जगह से पानी रिसाव हो रहा है और पाइप व नल खराब स्थिति में होने से व्यर्थ में जल बह रहा है। पानी की टंकी के आसपास पानी इकठ्ठा होने से कीचड़ जमा हो गया है। दिन रात पानी टंकी में से बहने के कारण समय पर पानी नहीं मिल पाता । जिस कारण ग्रामीणों को दूर दराज से पानी लाना पड़ रहा है।   यहां पर ट्यूबवेल भी है लेकिन पानी सही नहीं होने के कारण ग्रामीण इसे काम में नहीं लेते है। पानी की टंकी पर सफाई करने की तारीख तो लिख गए हैं, लेकिन टंकी की सफाई 2 साल से नहीं होने के कारण इसके अंदर मलवा जम गया है, जिसे मौसमी बीमारियां का खतरा बना रहता हैं। टंकी पर जाने के लिए अंदर की सीढ़ियां टूटी हुई है, जिस कारण ग्रामीण लोग अंदर जाकर इनकी सफाई भी नहीं कर सक ते। अभी मौसमी बीमारियों को दौर चल रहा है ऐसे यदि स्वच्छ पीने का पानी अगर ग्रामीणों को नहीं मिल पानी है तो ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों के परिणाम भुगतने पड़ सकते है।  </p>
<p>तुरंत पानी की टंकी को चेक करवाकर मरम्मत व सफाई करवा दी जाएगी। समस्या का जल्द से जल्द समाधान कर दिया जाएगा।  <br /><strong>- मुस्ताक पठान खानपुर,पीएचईडी जेईएन </strong></p>
<p><strong>खस्ताहाल टंकी : रिस रहा अृमत जल</strong><br />टंकी से लगातार टोटी नहीं होने के कारण पानी व्यर्थ बह रहा है, समस्या का समाधान होना चाहिए। <br /><strong>- कन्हैयालाल, ग्रामीण  </strong></p>
<p>पानी के बिना आदमी का जीवन व्यर्थ है और यहां पर इतना गंदा पानी आ रहा है जिसको पीने से बीमारी बढ़ने की समस्या है इसका तुरंत समाधान किया जाए। <br /><strong>- चंद्रकला बाई, ग्रामीण  </strong></p>
<p>यहां पर पानी की टंकी कम से कम 2 साल से साफ नहीं हुई है, जिस पर जाने कितने कीड़े मकोड़े जमा हो गए हैं, जिनसे मलेरिया और डेंगू फैलने की संभावना है। <br /><strong>- आशिक वर्मा, ग्रामीण  </strong></p>
<p>लगभग 2 साल से टंकी की सफाई नहीं हो रही है और सफाई की तारीख डाल चुके लेकिन सफाई करने नहीं आए । <br /><strong>- रामपाल, समाजसेवी  </strong></p>
<p>इस गांव में लगभग 151 आदमी जुड़े हुए हैं, जो पानी की आपूर्ति इसी टंकी से करते हैं, और यदि टंकी साफ नहीं है तो बीमारियों का परिणाम ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है। <br /><strong>- राजाराम, ग्रामीण  </strong></p>
<p>हमने बहुत सी बार टंकी की समस्या को लेकर अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- रमेशचंद, ग्रामीण  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 16:53:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलदाय में केंद्रीयकृत वस्तुओं पर 57.97 करोड़ का बकाया भुगतान, जयपुर व जोधपुर शीर्ष पर</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के विभिन्न एसीई क्षेत्रों पर केंद्रीयकृत वस्तुओं के लिए कुल 57.97 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5797-crore-dues-on-centralized-goods-in-water-supply-jaipur/article-122296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जलदाय विभाग के विभिन्न एसीई क्षेत्रों पर केंद्रीयकृत वस्तुओं के लिए कुल 57.97 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है। वित्तीय वर्ष की समीक्षा में सामने आया कि जयपुर द्वितीय क्षेत्र पर सबसे अधिक 6.49 करोड़, इसके बाद जोधपुर द्वितीय पर 6.30 करोड़ का बकाया है।</p>
<p>सूची के अनुसार, अजमेर क्षेत्र पर 4.94 करोड़, भरतपुर पर 4.63 करोड़, और कोटा पर 4.14 करोड़ की राशि लंबित है। वहीं, अलवर और उदयपुर क्षेत्र पर क्रमशः 1.10 करोड़ और 2.44 करोड़ का बकाया दर्शाया गया है। सबसे कम भुगतान बीकानेर क्षेत्र से है, जो 3.39 लाख है। इसके अतिरिक्त, सीई एसपी प्रोजेक्ट के अंतर्गत 3.45 करोड़ का भुगतान बाकी है। यह आंकड़े विभागीय प्रशासन की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं और इनसे सरकारी योजनाओं की वित्तीय स्थिति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते भुगतान नहीं किया गया, तो योजनाओं की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विभागीय अधिकारियों से शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 15:44:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करीब छह घंटे तक कार्यालय के बाहर दिया धरना, रामधुनी गाई, पुलिस भी पहुंची मौके पर</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल संकट से जूझ रही महिलाएं, अतिरिक्त मुख्य अभियंता का किया घेराव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ramdhuni-sang-police-held-outside-office-for-about-six-hours/article-121354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/855842roer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पिछले तीन सालों से पेयजल संकट से जूझ रहे झालाना डूंगरी स्थित बाईजी की कोठी सहित आस-पास की कॉलोनियों की सैकड़ों महिलाओं ने स्थानीय पार्षद लक्ष्मण नूनीवाल के नेतृत्व में मंगलवार को गांधी नगर स्थित जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने सुबह करीब 10.30 बजे से लेकर शाम साढ़े चार बजे तक कार्यालय के बाहर धरना दिया और अतिरिकत मुख्य अभियंता से समस्या का समाधान कराने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शकारियों ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता सहित अन्य इंजीनियरों को कमरे से बाहर तक नहीं निकलने दिया और समस्या का मौके पर ही समाधान करने और मुख्य अभियंता को भी मौके पर बुलाने की बात पर अड़ गए। </p>
<p><strong>लिखित दिया आश्वासन</strong><br />अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांषु दीक्षित की ओर से पांच दिन में समस्या का समाधान किए जाने का लिखित में आश्वासन मिलने और मुख्य अभियंता से फोन पर बात कराने के बाद धरना समाप्त किया गया। पार्षद नूनीवाल ने बताया कि पिछले करीब तीन सालों से झालाना बाईजी की कोठी, दयानंद नगर, फेज थ्री, जेडीए कॉलोनी, सोमेश्वरी कॉलोनी सहित करीब 17 कॉलोनियों में पेयजल संकट बना हुआ है। सुबह पांच बजे यहां पानी की सप्लाई होती है, लेकिन केवल 10 से 15 मिनट। ऐसे में मजबूरन महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>कई बार लगा चुके गुहार</strong><br />इस समस्या से कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है फिर भी समस्या का कोई समाधान आज तक नहीं हुआ है। बाईजी की कोठी पेयजल परियोजना से इन कॉलोनियों को इसी साल फरवरी में पानी सप्लाई करने का भी दावा किया गया था, लेकिन आज पांच महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब अतिरिक्त मुख्य अभियंता की ओर से पांच दिन में समस्या का समाधान करने का लिखित में आश्वासन मिला है। अगर इस अवधि में समाधान नहीं हुआ तो चीफ इंजीनियर का घेराव किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jul 2025 10:12:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 साल में पहली बार 612 एनटीयू लेवल पर पहुंची टर्बिडिटी</title>
                                    <description><![CDATA[घरों में पहुंचा मटमेला पानी लेकिन बैक्टीरिया मुक्त। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/turbidity-reached-612-ntu-level-for-the-first-time-in-5-years/article-119425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राणा सागर व जवाहर सागर डेम के गेट खोले जाने से चंबल में टर्बिडिटी (गंदलापन) का लेवल 612 एनटीयू लेवल तक पहुंच गया। जिससे शहर की जलापूर्ति गड़बड़ा गई। अत्यधिक मात्रा में पानी में मिट्टी आने से अकेलगढ़, मिनी अकेलगढ़-सकतपुरा और श्रीनाथपुरम फिल्टर प्लांट से जल शोधन उत्पादन 50%  कम हो गया। ऐसे में शहर में प्रतिदिन होने वाली 51.50 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई घटकर 26 करोड़ लीटर ही रह गई। हालांकि, जलदाय विभाग के अधिकारी गुरुवार को दिनभर स्थिति नियंत्रित करने में जुटे रहे। शाम 4.30 बजे के बाद से टर्बिडिटी घटकर 3.50 से 400 एनटीयू पहुंच गया था। ऐसे में शुक्रवार सुबह तक जलापूर्ति समान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। इधर, राणा सागर के गेट खुलने पर टर्बिडिटी 612 एनटीयू आंकड़ा पिछले 5 साल में पहली बार बढ़ा है।</p>
<p><strong>तड़के 453 तो दोपहर को 612 एनटीयू पहुंची टर्बिडिटी </strong><br />अधिशाषी अभियंता नगर खंड प्रथम प्रकाशवीर नथानी ने बताया कि बुधवार तक स्थिति समान्य थी लेकिन गुरुवार को राणा सागर व जवाहर सागर बांध के गेट खोले जाने पर तड़के पांच बजे चंबल में टर्बिडिटी का लेवल अत्यधिक मात्रा में बढ़ गया। इस वक्त टर्बिडिटी का लेवल 453 एनटीयू था। जिसका असर शहर के मुख्य जल शोधन केंद्र अकलेगढ़ पर पड़ा। इससे शुद्ध पेयजल उत्पादन क्षमता लगभग 50% कम हो गई है। हालांकि, लोगों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए लगातार 24 घंटे प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>घरों में आया पीला-चिकना पानी</strong><br />चंबल में अचानक टर्बिडिटी का लेवल बढ़ने से जल उत्पादन केंद्रों की जलशोधन प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई। जिसके कारण घरों में मटमेला पानी आया। बजरंग नगर निवासी सत्येंद्र राजावत, आकाशवाणी के फिरोज अहमद, सरस्वती कॉलोनी के फयाज खान व लोकेश मेहरा ने बताया कि सुबह नलों में गंदा पानी आया। पानी में चिकनापन था। पीने के पानी के लिए भी परेशान हो गए। </p>
<p><strong>प्लांट के फिल्टर बेड हो रहे चौक</strong><br />चंबल में अत्यधिक मिट्टी आने से जल शोधन केंद्रों के फिल्टर बेड चौक हो रहे हैं। जिन्हें बार-बार साफ करने के लिए प्लांट बंद करना पड़ रहा। ऐसे में दो से तीन घंटे के अंतराल में एक-एक फीडर पर जलापूर्ति करनी पड़ी। विज्ञान नगर, तलवंडी व महावीर नगर फीडर पर गुरुवार सुबह 10.30 बजे सप्लाई की गई। इसके बाद दोपहर 1 बजे से दादाबाड़ी फीडर पर सप्लाई की गई। </p>
<p><strong>42 फिल्टर बेड, साफ करने में खर्च हुआ 6.30 लाख  लीटर पानी</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, जल शोधन केंद्र पर कुल 42 फिल्टर बेड हैं। जिनमें रॉ वाटर को ट्रीटमेंट डोज देकर फिल्टर किया जाता है। लेकिन, गुरुवार को पानी में अधिक मात्रा में मिट्टी आने से फिल्टर बेड चौक हो गए। पानी छन भी नहीं पा रहा था।  जिन्हें साफ करने के लिए 3 से 4 बार फिल्टर बेड साफ करने पड़े। इसकी सफाई के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक बेड की सफाई के लिए औसतन 10 से 15 हजार लीटर पानी खर्च होता है। ऐसे में 42 बेड की एक बार सफाई करने पर ही 6.30 लाख लीटर पानी खर्च हो रहा है। टर्बिडिटी का लेवल देखते हुए इस पानी को दोबारा रिसाइकिलिंग भी करना संभव नहीं होता। ऐसे में लाखों लीटर पानी को फिर से चंबल में बहाना पड़ता है। </p>
<p><strong>दिनभर यूं घटा-बड़ा टर्बिडिटी का लेवल</strong><br />एक्सईएन नथानी बताते हैं, राणा सागर व जवाहर सागर का गेट खुलने से चंबल के कैचमेंट एरिया की मिट्टी भी बहकर नदी में आ गई। बुधवार सुबह तक 53 एनटीयू टर्बिडिटी थी, जो बांधों के गेट खुलने के साथ-साथ बढ़ती गई लेकिन स्थिति काबू में थी। गुरुवार तड़के 5 बजे अचानक 450 एनटीयू (पानी में मिट्टी की मात्रा) टर्बिडिटी बढ़ गई। ऐसे में सुबह 9.30 बजे तक फिल्टर प्लांट बंद करना पड़ा। बेड की सफाई व पम्पों का मेंटिनेंस कर साढ़े 10 बजे नए कोटा के तीन इलाकों का एक फीडर पर सप्लाई शुरू की। इसके बाद दोपहर 1 बजे टर्बिडिटी का लेवल 612 एनटीयू पर पहुंच गया। ऐसे में मुसीबत बढ़ती रही। लेकिन दोपहर बाद जैसे-जैसे बांधों के गेट बंद होते गए वैसे वैसे टर्बिडिटी का लेवल डाउन होता गया। शाम  4.30 बजे के बाद से पानी में मिट्टी की मात्रा कम होती गई। रात 9.30 बजे तक टर्बिडिटी का लेवल 3.50 से 400 के बीच रहा। </p>
<p><strong>कहीं सुबह तो कहीं दोपहर को सुचारू हुई जलापूर्ति</strong><br />मंगलवार देर रात हुई बारशि व कोटा बैराज के आठ गेट खोलकर की गई पानी की निकासी से शहर के कुछ हिस्सों में गुरुवार को पानी की सप्लाई करीब 8 घंटे तक बाधित रही।  एक्सईएन नथानी ने बताया कि सुबह जो सप्लाई 5.30 पर शुरू होनी थी पर डर्बिटिडी के कारण कुछ फीडर पर 10.30 बजे तो कुछ फीडर पर दोपहर 1 से 2 के बीच सप्लाई शुरू हुई,जो रात तक जारी रही। </p>
<p><strong>5 साल में पहली बार 612 एनटीयू पहुंचा टर्बिडिटी लेवल</strong><br />उन्होंने बताया कि राणा प्रताप सागर बांध के गेट खुलने पर गुरुवार को टर्बिडिटी का जो लेवल बढ़ा है, वह पिछले पांच साल में पहली बार देखने को मिला है। इससे पहले राणा सागर बांध के गेट खुलने पर टर्बिडिटी 600 के पार नहीं पहुंची। लेकिन, गांधी सागर के गेट खुलने पर टर्बिडिटी  का लेवल 700 से 1000 एनटीयू तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में जल शोधन करना बहुत मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>पानी शुद्ध छोड़ा, फिर घरों में मटमेला पानी, यह है कारण</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, जल शोधन केंद्रों से प्रत्येक चरण में शुद्ध पानी ही सप्लाई किया गया है। इसके बावजूद घरों में मटमेला पानी आया तो उसका कारण  यह है कि केंद्रों से जुड़ी सप्लाई पाइप लाइनों में मिट्टी की परत जमी रहती है। ऐसे में जल शुद्ध पानी प्रेशर से छोड़ा जाता है तो पाइपों में जमी मिट्टी भी बहकर चली जाती है। जब घरों के नलों को पहली बार खोला जाता है तो थोड़ी देर मटमेला पानी आता है लेकिन कुछ देर बाद ही साफ पानी की आपूर्ति हो जाती है।  </p>
<p><strong>इन इलाकों में आई परेशानी</strong><br />अधिशाषी अभियंता नगर खंड द्वितीय श्याम माहेश्वरी ने बताया कि 130 एमएलडी जल शोधन संयत्र सकतपुरा से जलापूर्ति किए जाने वाले क्षेत्र नदी पार सम्पूर्ण सकतपुरा, नान्ता, बालिता, सम्पूर्ण कुन्हाडी, बड़गांव जोन, सम्पूर्ण बून्दी रोड़ क्षेत्र, शम्भूपुरा जोन, नयाखेड़ा, नयापुरा, सिविल लाइन्स, लाडपुरा, खाईरोड़, खण्ड गांवड़ी, दोस्तपुरा, आर्मी क्षेत्र, खेड़लीफाटक, नालारोड़, जनकपुरी, गुरूद्वारा रोड़, भीमगंजमण्डी, डडवाड़ा, सम्पूर्ण स्टेशन क्षेत्र, कैलाशपुरी जोन, भदाना जोन, काला तालाब जोन, सोगरिया जोन, आकाशवाणी कॉलोनी, सरस्वती कॉलोनी, पुलिस लाइन रोड की समस्त कॉलोनियां, आरके नगर, शिव नगर, बोरखेड़ा जोन, बारां रोड, नया नोहरा जोन, चन्द्रेसल जोन, रोटेदा, रायपुरा जोन के उपभोक्ताओं से अपील की है कि जल की गुणवत्ता में सुधार नहीं होने तक आवश्यक मात्रा में पेयजल का संग्रहण करके रखें।</p>
<p>अल सुबह से दोपहर तक टर्बिडिटी बढ़ जाने से जल शोधन गंभीर रूप से प्रभावित हुई। शाम से टर्बिडिटी  का लेवल घटा है। शुक्रवार सुबह तक जलापूर्ति समान्य होने की संभावना है। यदि, टर्बिडिटी  का लेवल नहीं घटता है तो सुबह-शाम की पारी में एक समय जलापूर्ति की जाएगी। वहीं, अकेलगढ़ प्लांट पर मॉनिटरिंग के लिए सोमवार से रविवार तक सभी जेईएन की ड्यूटी लगा दी गई है। घरों में मटमेला पानी आ सकता है लेकिन वह पानी पूरी तरह से शुद्ध होने के साथ बैक्ट्रेरिया मुक्त है। जलापूर्ति समान्य करने के हरसंभव प्रयास जारी हैं। ऐसे समय में शहरवासी जल संग्रहण करके रखें।   <br /><strong>- प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 15:23:40 +0530</pubDate>
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