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                <title>greenery - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में विकसित होंगे चंदन वन, अधिकारियों को निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उच्च गुणवत्ता वाले पौधारोपण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के वन क्षेत्र का विस्तार करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-decision-of-bhajanlal-government-instructions-issued-to-sandalwood-forest/article-152555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में वन क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में चंदन के पौधों का चयन उच्च गुणवत्ता का हो और उनकी सुरक्षा व उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पौधारोपण अभियान की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से अभियान संचालित किया जा सके।</p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण और वन विकास अत्यंत आवश्यक है। बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरियाली को बढ़ावा देने जल संसाधन विभाग करेगा पौधारोपण, 22 करोड़ की लागत से लगेंगे 4 लाख पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[जल संसाधन विभाग ने अगले माह से प्रदेशभर में व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने की योजना तैयार की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-promote-greenery-water-resources-department-will-plant-4-lakh/article-121698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन विभाग ने अगले माह से प्रदेशभर में व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने की योजना तैयार की है। 'मिशन हरियाली राजस्थान' के तहत 17 जिलों में करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से 4 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों को खासतौर से 200 से अधिक बांधों के आसपास और केनाल किनारे लगाया जाएगा।</p>
<p>इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाना और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। अकेले बीसलपुर डिवीजन में ही 64 लाख रुपए की लागत से फलदार और फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। जल संसाधन विभाग नर्सरियों में तैयार किए गए पौधों को उपयुक्त स्थानों पर रोपित कर उनकी नियमित देखरेख की भी व्यवस्था की जा रही है। यह पहल पर्यावरण सुधार, जल स्रोतों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि यह अभियान हरित राजस्थान की ओर सार्थक पहल साबित हो और प्रदेश को हराभरा बनाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 15:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>6 महीने बाद भी नहीं लगे डिवाइडर पर पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[वन महोत्सव के दौरान जिलेभर में सघन पौधारोपण किया जाता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/even-after-6-months--no-treatment-has-been-brought-on-the-divider/article-99104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ के सिटी फोरलेन के मध्य बनाया गया डिवाइडर जो कुछ समय पहले तक हरियाली और फूलों से गुलजार हुआ करता था, इन दिनों उजड़ा हुआ पड़ा है, लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस डिवाइडर को उजाड़ तो दिया गया, लेकिन उजाड़ते समय इसको वापस आबाद करने के जो वादे हुए थे उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं हो पाया है। 23 जुलाई 2024 को इस डिवाइडर पर लगे हुए पौधों को हटाकर नए फूलदार पौधे लगाए जाने की बात कही गई थी और प्रशासन की तरफ से इस कार्यवाही को शुरू किया गया था, लेकिन अब लगभग 6 महीने का समय बीत जाने के बाद भी यह डिवाइडर उजड़े हुए वीरान पड़े हैं। झालावाड़ सिटी फोर लेन के निर्माण के साथ ही इस डिवाइडर का निर्माण भी हुआ था तथा इस वक्त इस पर फूलदार पौधे लगा दिए गए थे। धीरे-धीरे यह पौधे बड़े होने लगे और फूल भी देने लगे। समय के साथ-साथ पौधों ने अच्छा आकर ले लिया जिससे एक लाइन में चलने वाली गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी दूसरी लाइन में जाना भी बंद हो गई। डिवाइडर पर पौधे लगाए जाने का मुख्य कारण यही होता है कि आमने-सामने चलने वाली गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी एक दूसरे पर ना पड़े, क्योंकि इसके कारण काफी दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं झालावाड़ के सिटी फोरलेन पर लगे हुए पौधों को हटाने का विचार जिला प्रशासन के मन में उस वक्त आया, जब वन महोत्सव की शुरूआत की गई। वन महोत्सव के दौरान जिलेभर में सघन पौधारोपण किया जाता है। इसी के चलते इस डिवाइडर पर रंगीन फूलों वाले खूबसूरत पौधे लगाने का मन बनाया गया और जिला प्रशासन की तरफ से आदेश जारी कर दिए गए। अभियान की शुरूआत विधिवत्त झालावाड़ मिनी सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने डिवाइडर पर लगे पुराने पौधों को हटाकर नए पौधे लगाकर की गई और एक बड़ा आयोजन हुआ, जिसमें कई संस्थाएं, एनजीओ और निजी विद्यालयों ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी संस्थाओं ने अपने-अपने हिसाब से डिवाइडर को गोद लेकर पौधे लगाने और सार संभाल करने की बात कही और अनेक वादे किए गए, लेकिन नतीजा हमेशा की तरह वही "ढ़ाक के तीन पात" रहा। आज डिवाइडर की हालत किसी से छुपी नहीं है ऐसे में सवाल पैदा होता है कि आखिर वह सभी संस्थाएं जिन्होंने पौधे लगाने और संभालने के वादे किए थे वह अब कहां है।<br />  <br /> पुराने पौधे हटाकर नए पौधे लगाए जाने के अभियान की शुरूआत झालावाड़ जिला कलेक्टर के सानिध्य में हुई थी। ऐसे में जब हमने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौर से इस पूरे मामले को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी हिस्से जहां पर पौधे नहीं है या सूख गए हैं, वहां पर पौधे लगवाएंगे। जिला कलेक्टर ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश भी दिए कि तुरंत प्रभाव से उन सभी संस्थाओं और लोगों से संपर्क करें जिन्होंने पौधे लगाने की जिम्मेदारी ली थी और जहां से भी पौधे उजड़ गए हैं उनको वापस लगवाया जाए।  जिला प्रशासन ने पूरे अभियान की शुरूआत मिनी सचिवालय के सामने वाले हिस्से से की थी तथा यह अभियान मिनी सचिवालय के सामने से लेकर झालावाड़ अस्पताल के सामने मौजूद डिवाइडर तक चला। जहां पौधे उजाड़ तो दिए गए लेकिन लगाए नहीं गए। झालावाड़ पशु चिकित्सालय के सामने और झालरापाटन रोड पर आज भी पुराने पौधे बरकरार हैं, उन्हें देखकर एहसास होता है कि इन पौधों में भी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी तथा इनको सड़क बनाने वाले विशेषज्ञों द्वारा सोच समझकर उस वक्त लगवाया गया था। ऐसे में एक बड़ा सवाल पैदा हो जाता है कि क्या जरूरत पड़ी थी कि हरे भरे पौधों को उखाड़ कर फेंक दिया गया और हद तो तब हो गई जब उनके स्थान पर नए पौधे भी नहीं लग पाए। </p>
<p>डिवाइडर पर पौधे लगाने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं ने ली थी, उनसे बात करके पौधों को वापस लगाया जाएगा। ताकि डिवाइडर फिर से हरे भरे हो सके। <br /><strong>-  अजय सिंह राठौड, जिला कलेक्टर झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 17:25:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जमीन से अफसरों की जेब में पहुंची 21.42 लाख की हरियाली, पौधों के पानी का पैसा भी डकार गए</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में पौधों की औसत ऊंचाई  8 से 10 इंच, कागजों में 6 से 8 फीट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/greenery-worth-21-42-lakhs-reached-the-pockets-of-the-officers-from-the-ground--they-also-swallowed-the-money-for-the-water-of-the-plants/article-98541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चट्टानों से घिरा 50 हैक्टेयर का लखावा प्लांटेशन-8 चारों तरफ से खाली है। कंक्रीट व चट्टानों के ढेर लगे हैं, लेकिन कोटा वन मंडल के अधिकारियों ने यहां कागजों में जंगल खड़ा कर दिया है। जहां 6 से 7 फीट ऊंचे 8000 से 6300 पौधे लगे हैं। जबकि, हकीकत में यहां 150 पौधे भी नहीं मिले। इसके बावजूद वन अधिकारी वर्ष 2022 से जून 2024 तक प्लांटेशन संधारण के नाम पर फर्जी बिल बनाकर 21.42 लाख रुपए का भुगतान उठाते रहे।  भ्रष्टाचार का खुलासा अतिरिक्त मुख्य प्रधान वन संरक्षक केसी मीना व पीएंडएम गणना दल की जांच रिपोर्ट से हो चुका है।  असल में, 21.42 लाख की हरियाली प्लांटेशन के बजाय अफसरों की जेब में पहुंच गई। नतीजन, लखावा प्लांटेशन-8 तो हरा नहीं हो सका लेकिन पिछले 3 सालों में वन अधिकारियों की जेबें हरी हो गई। हालांकि, जब जांच में भ्रष्टाचार की पोल खुली तो अधिकारियों ने गत जुलाई में 2500 नए पौधे लगा दिए। जिसकी 30 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक पीएंडएम गणना दल द्वारा जांच की गई तो मौके पर 2300 पौधे ही मिले। जिनकी ऊंचाई बमुश्किल से 8 से 10 इंच थी। </p>
<p><strong>1 से 8 सभी प्लांटेशनों के बूरे हाल</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि निरीक्षण के दौरान लखावा प्लांटेशन-8 में न के बराबर पौधे थे, जबकि अनेकों बार 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई व सुरक्षा के नाम पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाया गया। यदि, हकीकत में यह कार्य हुए होते तो यहां जंगल खड़ा हो चुका होता। </p>
<p><strong>8 हजार से 6300 पौधों को कागजों में पिलाया पानी</strong><br />कोटा वन मंडल के अधिकारियों ने लखावा प्लांटेशन में पिछले तीन सालों से 8000 से 6300 तक पौधों को कागजों में पानी पिलाते रहे और जमकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते है। जबकि, मौके पर 150 पौधे भी नहीं थे। डीएफओ-रेंजर से नाका प्रभारियों तक ने मिलीभगत कर फजीर्वाड़े को अंजाम दिया। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना ने 27 मई को जयपुर से कोटा आकर लखावा प्लांटेशन-8 का निरीक्षण किया तो उन्हें यहां 150 पौधे भी जीवित नहीं मिले थे। ऐसे में वन अधिकारी इतने सालों तक किन्हें पानी पिलाया और किसकी चौकीदारी करते रहे।</p>
<p><strong>5500 खडढ़े खुदे नहीं और उठा लिए 3.2 लाख </strong><br />पी एंड एम गणना दल की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 16 अगस्त से 31 अक्टूबर 2022 तक  वन अधिकारियों ने कागजों में 5500 खडढ़े खोद दिए। बिल में प्रति खड्ढ़े 54 रुपए चार्ज किए। जबकि, हकीकत में 5500 खडढ़े यहां खुदे ही नहीं। क्योंकि, यह चट्टानी क्षेत्र है, ऐसे में यहां जेसीबी से भी एक फीट गहरा खड्ढ़ा नहीं खोदा जा सकता। इसके बावजूद श्रमिकों द्वारा हाथों से खड्ढ़े खोदना बताकर 3 लाख 2 हजार 60 रुपए का भुगतान उठा लिया गया। इसके अलावा यहां किसी भी पौधे के थांवले नहीं बनाए गए। जबकि, बिल में 5500 पौधों के जल संरक्षण के लिए प्रति थांवला 7 रुपए की दर से चार्ज किया गया। जिसका 42 हजार 900 रुपए का बिल उठा लिया गया। </p>
<p><strong>नवज्योति खबर नहीं छापता तो उजागरनहीं होता घोटाला</strong><br />जांच अधिकारी केसी मीना ने गत 10 जुलाई को प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (हॉफ) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि दैनिक नवज्योति खबर प्रकाशित नहीं करता तो संभव था कि लखावा प्लांटेशन-8 में वृक्षारोपण में हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी शायद कभी उजागर ही नहीं होती। जबकि, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक कोटा में ही बैठते हैं, लेकिन उनके द्वारा भी साइड का निरीक्षण नहीं किया गया। ऐसे में उक्त रिपोर्ट के विशलेषण के मध्यनजर उचित एवं सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लखावा-8 से सटे अन्य प्लांटेशनों के भी यही हालात है। इनकी विशेष टीम गठित कर जांच करवानी चाहिए।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />मामले की जांच करवाकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज चुके हैं, जिसमें मामले से संबंधित जांच के सभी प्वाइंट कवर किए हैं। वहां से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग </strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने कोटा डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव को फोन कर पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया गया, जिसका भी जवाब नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2024 14:36:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पौधे झुलसे, डिवाइडर मटियामेट</title>
                                    <description><![CDATA[डिवाइडर में पौधों को पनपाने के लिए डाली गई मिट्टी में पानी नहीं मिलने से अब बड़े-बड़े ढेले बन गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plants-scorched--dividers-ruined/article-80006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/podhe-jhulse,-divider-matiyamot...kota-news-31-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर करीब डेढ़ साल पहले डिवाइडरों में पौध लगाए गए थे। जिनमें पानी देने के साथ ही उनके रखरखाव और सार संभाल की जिम्मेदारी यूआईटी ने अलग-अलग ठेकेदारों को सौंपी थी। इसके लिए लाखों के टेंडर निकाले गए और ठेकेदारों के काम तय किए गए। मगर समय पर पौधों में पानी नहीं देने के कारण अब वे झुलसने लगे हैं। डिवाइडर में पौधों को उगाने के लिए डाली गई मिट्टी सूख गई है। जो धूल बनकर उड़ रही है। वहीं डिवाइडर भी जगह-जगह से टूट गए हैं। लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए पौधे अब तो मृतप्राय: हो गए हैं। ऐसे में शहर में हरियाली बढ़ाने का काम फिर से अधूरा ही रही गया है। जबकि यूआइटी अधिकारियों की ओर से समय-समय पर ठेकेदारों को उनके कर्तव्य याद दिलाए गए, फिर भी उनकी मनमानी के चलते पौधे नष्ट हो गए हैं। भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र से लेकर मयूर टॉकीज तक सड़क के बीच बने डिवाइडर पर पौधों की रखरखाव का ठेका यूआईटी ने एलएनए इंफ्रा प्राइवेट प्रोजेक्ट लिमिटेड को दे रखा है। जानकारी के अनुसार शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले सरकारी टेंडर पर डिवाइडरों में पेड़-पौधे लगाए गए थे। इनमें पानी देने के अलावा इनकी सारसंभाल के लिए यूआईटी ने अलग-अलग ठेकेदारों को कार्य का जिम्मा सौंपा था, ताकि किसी एक के जिम्मे पूरा शहर न रहे और पौधे फलने-फूलने से पहले ही मुरझा जाए। ठेकेदारों को पौधे में पानी देने से लेकर उनके रखरखाव तक का भुगतान कर रही है। इसके बाद भी भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र के सामने से लेकर मयूर टॉकिज और एसबीआई बैंके सामने से जा रहे डिवाइडर में लगे पौधे बिल्कुल सूख चुके हैं। ऐसा लगता है जैसे कई माह से उनमें पानी नहीं दिया गया हो। डिवाइडर में पौधों को पनपाने के लिए डाली गई मिट्टी भी पूरी तरह से सूख चुकी है, उसमें नमी तो कोसो दूर की बात है यहां तक की गीली भी नहीं है। जिसके चलते पौधे झुलस गए हैं। हालांकि कुछ पौधे अभी हरे दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>दिखने लगे हैं डिवाइडर में डाले गए पाइप</strong><br />यहां डिवाइडर में लाइटों की फीटिंग को लेकर डाली गई पाइप भी मिट्टी उड़ने के कारण अब दिखने लगी है। पानी नहीं मिलने के कारण मिट्टी सूखकर उड़ रही है। ऐसे में उसके नीचे दबी पाइप अब दिखने लगी है।</p>
<p><strong>मिट्टी के बन चुके हैं ढेले</strong><br />डिवाइडर में पौधों को पनपाने के लिए डाली गई मिट्टी में पानी नहीं मिलने से अब बड़े-बड़े ढेले बन गए हैं। जिनको देखकर ऐसा लगता है कि इनमें कई माह से पानी नहीं डाला गया है। डिवाइडर की सूखी मिट्टी हवा के साथ उड़कर यहां आसपास की दुकानों में तो जाती ही है, वाहनों चालकों की आंखों में भी जा रही है। जिससे उनके गिरने की संभावना बनी हुई है। सूखी मिट्टी के कारण कुछ पौधे मर चुके हैं और कुछ झुलस गए हैं।</p>
<p><strong>गर्मी से मिल सकती थी राहत</strong><br />वैसे तो स्टेशन क्षेत्र में तापमान .2 डिग्री के आसपास शहर के अन्य स्थानों की अपेक्षा कम रहता है। मगर हरियाली बढ़ने से इसमें और कमी आ सकती है। डिवाइडर पर लगे पौधे पनपते हैं तो यहां अब आॅक्सीजन की मात्रा में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा भीषण गर्मी के दिनों में तापमान में कमी के चलते लोगों को राहत मिलेगी। मगर ठेकेदार की मनमानी के चलते इनकी समय-समय पर देखभाल नहीं हो रही है। जिसके कारण अब ये पौधे मरने लगे हैं।</p>
<p><strong>अब तक चार नोटिस दे चुके हैं</strong><br />स्टेशन क्षेत्र में डिवाइडर पर लगे पौधों में पानी देने और उनकी देखभाल का ठेका हुआ था। मगर ठेकेदार की मनमानी के चलते अब ये पौधे झुलसने लगे हैं। इनमें कई माह से पानी नहीं दिया गया है। इस क्षेत्र के ठेकेदार को अब तक चार नोटिस दे चुके हैं।  <br /><strong>- सीपी मीणा, एक्सईएन, यूआईटी</strong></p>
<p><strong>ठेकेदार ने नहीं रिसीव किया फोन</strong><br />इस मामले में ठेकेदार कप्तान सिंह से बात करने के लिए उनके नंबर पर फोन किया गया। लेकिन उनका फोन व्यस्त आ रहा था। दुबारा भी कॉल किया, लेकिन रिसीव नहीं किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 16:01:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हॉस्टल बने पत्थर की अट्टालिकाएं, हरितिमा की कर रहे अनदेखी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में तीन मंजिल से ज्यादा मकान व बेसमेंट निर्माण की अनुमति नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hostels-have-become-stone-skyscrapers--ignoring-greenery/article-78345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/hostel-bne-patthar-ki-atalikaye,-haritima-ki-kr-rhe-andekhi...kota-news-17-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सभी रहवासी इलाकों में ऊंची-ऊंची इमारतों का जंजाल बिछा हुआ है। शहर में बहुमंजिला हॉस्टल की बिल्ंिडगों का तो निर्माण कराया जा रहा है। मगर इनके मालिक हॉस्टल के सामने तथा आसपास हरितमा के लिए जमीन नहीं छोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं पौधे लगाने तक की जगह इनके आसपास या बाहर नहीं है। जबकि नियम है कि हॉस्टल के आसपास और आगे की तरफ हरियाली के लिए पौधे लगे होने चाहिए। ताकि वातावरण में शुद्धता बनी रहे। इतना ही नहीं प्राइवेट हॉस्टल की 10-10 मंजिल की इमारतों के गिरने का डर  हर समय रहता ही है। हादसा कितना भयानक होगा इसे सोचकर ही मन घबरा जाता है। इन सबके बाद भी इनका निर्माण नहीं रूक रहा है। नया कोटा में हर दूसरे मोहल्ले में हॉस्टल है और उसकी बिल्डिंग कम से कम सात-आठ मंजिल की तो है ही। इन ऊंची इमारतों में बाहर से आए विद्यार्थी रहते हैं। जिनके जीवन पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। गत दिनों ही एक हॉस्टल में आग लगने से भगदड़ मच गई थी, वो तो गनीमत रही कि किसी बच्चे की जान नहीं गई।</p>
<p><strong>ये है नियम</strong><br />शहर में तीन मंजिल से ज्यादा मकान व बेसमेंट निर्माण की अनुमति नहीं है। इसमें दस फीट की रोड पर तीन मंजिल (अधिकतम 30 फीट) से ज्यादा मकान बनाने की इजाजत नहीं है। 20 फीट तक की रोड पर चार मंजिला मकान का निर्माण करवाया जा सकता है। </p>
<p><strong>500 व.मी. के प्लाट पर परमिशन की नहीं जरूरत</strong><br />भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार की ओर से लागू नए अधिनियम के तहत 500 वर्गमीटर यानी 5381 वर्गफीट तक के प्लॉट पर मकान बनाने के लिए यूआईटी व नगर निगम से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सीधे अथराइज्ड नक्शा नवीस या आर्किटेक्ट से नक्शा बनाकर प्रमाणित दस्तावेज के साथ नगर निगम अथवा यूआईटी में जमा करवाना होगा। साथ ही उसकी फीस जमा करवानी होगी। उसके बाद प्लॉट मालिक को इंतजार करने की जरूरत नहीं है, वो उसी नक्शे के अनुरूप निर्माण शुरू कर सकता है। इसके साथ ही उसके पट्टे की स्वीकृति भी जारी हो सकेगी। यह नियम इको सेंसेटिव जोन, रिर्जव या विशेष प्रयोजन के लिए छोड़ी गई सड़कों पर लागू नहीं होगा।</p>
<p><strong>यहां तो हो रहा है निर्माण </strong><br />शहर के व्यवस्ततम इलाके जवाहर नगर में तो वर्तमान में एक 11 मंजिला बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल ही रहा है। यह बिल्डिंग पूर्णतया हॉस्टल के लिए ही निर्मित की जा रही है। 11 मंजिल से भी ऊंची इस बिल्डिंग का निर्माण कार्य धडल्ले से और बेरोकटोक चल रहा है। जिसे कोई रोकने वाले नहीं है। </p>
<p><strong>शहर में 4 हजार से ज्यादा हॉस्टल</strong><br />शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 4 हजार हॉस्टल, 1500 से अधिक मैस है। इसके अलावा 25 हजार से अधिक पीजी कमरों की व्यवस्था है। यहां आने वाले सभी स्टूडेंट्स की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती है। ऐसे में स्टूडेंट्स के रहने के इंतजाम के लिए हर रेंज में कमरे, हॉस्टल और पीजी उपलब्ध है। ताकि वह इनमें रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। </p>
<p><strong>इन इलाकों में है हॉस्टल</strong><br />शहर के कोरल पार्क, राजीव गांधी स्पेशल, ऑक्सीजोन, लैंडमार्क, ओल्ड राजीव बी नगर, जवाहर नगर, इंडस्ट्रियल एरिया, इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स, पारिजात कॉलोनी, कुन्हाड़ी सहित अन्य इलाकों में बने हुए हैं हॉस्टल। शहर में बने ज्यादा हॉस्टल की इमारतें बहुमंजिला है। भीड़भाड़ और रहवासी इलाकों में बनी ये इमारतें आठ से दस मंजिल तक की है। </p>
<p><strong>यूआईटी की जमीन पर बने हैं</strong><br />शहर में यूआईटी की जमीन पर ही बहुमंजिला हॉस्टल बने हुए हैं। इसके लिए यूआईटी ही इन पर कार्रवाई कर सकती है।<br /><strong>- राजीव अग्रवाल, मेयर, नगर निगम, कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>जल्द करेंगे कार्रवाई</strong><br />शहर में हॉस्टल की बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं। इनको पहले नोटिस दिए जा चुके हैं। अब चुनाव ड्यूटी से निपटे हैं। संबंधित अधिकारियों को इन पर कार्रवाई के लिए जल्द ही निर्देश दिए जाएंगे।<br /><strong>- कुशाल कोठारी, सचिव, यूआईटी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 15:34:28 +0530</pubDate>
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                <title>कोटपूतली में होगी हरियाली, वन विभाग ने तैयार किए 85 हजार पौधे, एक जुलाई से होगा वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने पौधारोपण के लिए इन दिनों अभियान चला रखा है। हर वर्ष की तुलना में इस बार सबसे अधिक 85 हजार पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी के तहत स्थानीय वन विभाग की नर्सरी से पहली बार सबसे अधिक 85 हजार पौधे वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-there-will-be-greenery-in-kotputli--the-forest-department-has-prepared-85-thousand-plants--will-be-distributed-from-july-1/article-13230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qqqq2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटपूतली।</strong> पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने पौधारोपण के लिए इन दिनों अभियान चला रखा है। हर वर्ष की तुलना में इस बार सबसे अधिक 85 हजार पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी के तहत स्थानीय वन विभाग की नर्सरी से पहली बार सबसे अधिक 85 हजार पौधे वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि यह आंकड़ा हर वर्ष 55 से 60 हजार के आसपास ही रहता था। इस साल खास बात यह रहेगी कि विभाग की ओर से आॅक्जीजन की अधिकता वाले पीपल-बड़ के 5 हजार से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। इसको लेकर विभाग की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई है। विभाग की ओर से आगामी 1 जुलाई से अभियान के तहत पौधरोपण और पौध वितरण कार्यक्रम का आगाज किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो योजनाओं के 35 हजार पौधे:</strong> क्षेत्रीय वन अधिकारी सीताराम यादव ने बताया कि इस बार राजस्थान जैव विविधता परियोजना के तहत 20 हजार व कृषि वानिकी के तहत विभिन्न प्रजातियों के 15 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें गुलाब, अशोक, करंस, गुलमोहर, नीम, मीठी नीम, चंपा, सैतूत, आंवला, नींबू, केसिया  श्यामा, गूलर जैसे पौधे शामिल हैं। इसके लिए इस बार आक्सीजन वाले पौधे पीपल व बड़ पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनके लगभग 5 हजार पौधे तैयार किए गए हैं।</p>
<p><strong>घर-घर बटेंगे औषधीय पौधे :</strong> वन विभाग ने घर-घर औषधीय पौधे बांटने के लिए योजना के तहत कुल 50 हजार पौधे तैयार किए हैं। अश्वगंधा, नीम गिलोय, कालमेघ व तुलसी के दो-दो पौधे नि:शुल्क बांटे जाएंगे। क्षेत्र में पेड़-पौधों की कई प्रजातिया लुप्त होने के कगार पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार कई किस्मों के पौधों को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इसके चलते नीम, करंज, गुलमोहर, गूलर आदि के पौधों का ज्यादा वितरण किया जाएगा। वहीं विद्यालयों व मनरेगा में सबसे ज्यादा नीम के पौधों का रोपण किया जाएगा।</p>
<p><strong>5 व 8 रुपए होगी दर </strong>वन विभाग ने पौधों की दर भी निर्धारित कर दी है। कोई भी व्यक्ति वन विभाग की नर्सरी से पौधे प्राप्त कर सकता है। विभाग ने कुछ पौधों की दर 5 रुपए तो कुछ प्रजातियों के पौधों की दर 8 रुपए निर्धारित की है। इसके अलावा सरकारी विभागों सहित ट्रस्टों व सामाजिक संस्थाओं को एक हजार पौधे तक 1 रुपया प्रति पौधा तथा उससे अधिक पौधे लेने पर 5 रुपए प्रति पौधा की दर से भुगतान करना होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong> <br />कुल 85 हजार पौधे विभिन्न प्रजातियों के तैयार किए गए है। ज्यादा पौधों का रोपण होने से हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। एक जुलाई से वितरण प्रारंभ कर दिया जाएगा। <br /><strong>-सीताराम यादव, क्षेत्रीय वन अधिकारी, कोटपूतली।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 15:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हजारों पौधे प्यासे मर गए, हरियाली हो गई बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ नगर परिषद तथा नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया की खींचतान के चलते झालावाड़ शहर से गुजरने वाले सिटी फोरलेन को आकर्षक बनाने वाली हरियाली बर्बाद हो गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/thousands-of-plants-died-of-thirst--greenery-ruined/article-10038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/hazaro-paudhe..jhalawar-news-19.5.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ नगर परिषद तथा नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया की खींचतान के चलते झालावाड़ शहर से गुजरने वाले सिटी फोरलेन को आकर्षक बनाने वाली हरियाली बर्बाद हो गई है। दोनों विभाग अपनी-अपनी बातें कह रहे हैं, लेकिन सिटी फोरलेन को संभाल कोई भी नहीं रहा है, जिसके चलते डिवाइडर के ऊपर लगाए पौधे पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जिन को लेकर प्रशासन भी कोई सजगता नहीं दिखा रहा है। <br /><br />जानकारी के लिए आपको बता दें कि झालावाड़ शहर के वृंदावन से गिंदौर गांव तक सिटी फोरलेन का निर्माण किया गया था, जिस के मध्य डिवाइडरों पर स्ट्रीट लाइटों के अतिरिक्त फूल वाले पौधे भी लगाए जाने थे। ठेकेदार द्वारा सड़क का निर्माण करने के साथ ही डिवाइडर पर फूलदार पौधे भी रोपे गए, जिनके कारण कुछ ही समय में सिटी फोरलेन पर काफी हरियाली नजर आने लगी और सड़क काफी आकर्षक दिखने लगी थी।  ठेकेदार द्वारा काम पूरा कर दिए जाने के पश्चात इन पौधों की देखभाल किस विभाग द्वारा किया जाना है, प्रशासनिक तौर पर निर्धारित होना था जो आज तक नहीं हो पाया है । इस बीच पूरी हरियाली बर्बाद हो गई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद एनएचएआई द्वारा इस सड़क के रखरखाव और पेड़ पौधों की जिम्मेदारी नगर परिषद झालावाड़ को संभलानी थी, किंतु अब तक हैंड ओवर टेकन ओवर की कार्यवाही पूरी नहीं हुई है, जिसके चलते दोनों ही विभाग पौधों को पानी पिलाने का काम नहीं कर रहे हैं और पौधे पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। <br /><br />नगर परिषद आयुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व तक नगर परिषद द्वारा सिटी फोरलेन के डिवाइडर पर लगे पौधों को पानी पिलाने के लिए आदमी तैनात किया गया था तथा पौधों को लगातार पानी पिलाया जा रहा था, किंतु एनएचएआई द्वारा अब तक सड़क परिषद को नहीं संभलाने के चलते अब परिषद द्वारा मामले में फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि उनके द्वारा नगर परिषद को कई बार पत्रों के माध्यम से सूचना दे दी गई है फिर भी नगर परिषद द्वारा सड़क को संभालने की कार्यवाही नहीं की जा रही है, ऐसे में दोनों ही विभाग अपना अपना पक्ष रख रहे हैं, किंतु यहां पर सबसे महत्वपूर्ण है प्रशासनिक की चुप्पी, जो करोड़ों की लागत से बने सिटी फोरलेन की हरियाली को बर्बाद होते हुए प्रशासनिक अधिकारी चुपचाप देख रहे हैं, और दोनों ही विभागों पर जिम्मेदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है।<br /><br /> हमने झालावाड़ नगर परिषद को कई बार पत्र लिखे हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।<br /><strong>-जेपी गुप्ता, पीडी, एनएचएआई, झालावाड़</strong><br /><br /> एनएचएआई द्वारा सिटी फोरलेन बनाया गया है, लेकिन अभी तक उनके द्वारा सड़क नगर परिषद को नहीं संभलाई गई है। पौधों के पानी के लिए व्यवस्था कर रखी थी किंतु अब हमारी तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। <br /><strong>-दयावती सैनी, आयुक्त, नगर परिषद झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 12:54:30 +0530</pubDate>
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                <title>शहर के प्रमुख रास्तों से हरियाली गायब </title>
                                    <description><![CDATA[बारां शहर की सड़कों से हरियाली गायब सी हो गई है। जिम्मेदार नगर परिषद और अन्य विभागों की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/greenery-missing-from-the-main-roads-of-the-city/article-8663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sadak-hariyali-gayab-baran.jpg" alt=""></a><br /><p>बारां। बारां शहर की सड़कों से हरियाली गायब सी हो गई है। जिम्मेदार नगर परिषद और अन्य विभागों की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुछ साल पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग ने शहर के विभिन्न मार्गों पर सड़क निर्माण के लिए पेड़ काटे थे, लेकिन नए पेड़ लगाने में सुस्ती बरती। प्रावधानों के तहत काटे गए पेड़ों के स्थान पर पौधरोपण कर उनकी रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में शहर के प्रमुख सड़कों व एंट्री मार्गों पर अब हरियाली गायब सी हो गई है।<br /><br />शहर के प्रमुख मार्गों के डिवाइडर के बीच लगाए गए पौधे भी देखरेख के अभाव में सूख रहे हैं। कोटा रोड सिटी फोरलेन से रेलवे आरओबी तक सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई थी। गजनपुरा, बमूलिया व बटावदा गांव के पास लगे सालों पुराने पेड़ों को बाधक मानते हुए हटाया गया था। इसके अलावा झालावाड़ रोड पर सड़क चौड़ाईकरण कार्य के तहत तेल फैक्ट्री क्षेत्र, आमापुरा व जिला कारागार तक और मांगरोल रोड पर लगे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली थी।<br /> <br /><strong>जिम्मेदार महकमे नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />देखरेख के अभाव में सूख रहे पौधे कुछ साल पहले तक चारों प्रमुख मार्गों पर रहने वाली हरियाली काफी सुकून देती थी, लेकिन हरियाली गायब होने से अब गर्मी के दिनों में तपन रहने लगी है। शहर में प्रवेश के साथ ही प्रमुख मार्ग खाली नजर आते हैं और दूर-दूर तक हरियाली के नाम पर कुछ नहीं दिखता। शहर के प्रमुख मार्गों के डिवाइडर के बीच लगाए गए पौधे भी देखरेख के अभाव में सूख रहे हैं। शहर में सौंदर्य विकास को लेकर जिम्मेदार महकमे ध्यान नहीं दे रहे हैं ।<br /><br />शहर में डिवाइडर पर पौधे लगे हुए हैं। जिनकी देखभाल की जाती है। अगर ऐसी समस्या है तो जानकारी जुटाई जाएगी। प्रभारी को भी प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए है।<br /><strong>- कमलेश कुमार, आयुक्त, नगर परिषद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 15:51:21 +0530</pubDate>
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                <title>धरती पर हरियाली लाने के लिए प्रयासरत रहें रेंज ऑफिसर्स</title>
                                    <description><![CDATA[
आरएफओ बैच इंटरेक्शन प्रोग्राम में बोले प्रधान मुख्य वन संरक्षक ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9C-%E0%A4%91%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8/article-2828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-29-at-15.41.47.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल प्रमुख) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा है कि रेंज ऑफिसर्स धरती के चेहरे पर हरियाली की मुस्कान लाने के लिए प्रयास करें। पर्यावरण के साथ-साथ उससे जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। वे सोमवार को अरण्य भवन में नॉर्थ इंडिया टूअर ऑफ आरएफओ बैच-2021-22 में शामिल प्रतिभागियों से बातचीत कर रहे थे।<br /><br />इस दौरान डॉ. पाण्डेय ने कहा कि नवनियुक्त रेंज ऑफिसर्स सभी तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। अपने आइडियाज अधिकारियों के साथ शेयर करें और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करते रहें। उन्होंने प्रकृति को पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके बिना कहीं भी जीवन संभव नहीं है। पशु-पक्षियों के साथ-साथ मनुष्य भी प्रकृति के बिना अधूरा है, इसलिए हर हाल में पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।<br /><br />एक प्रतिभागी के सवाल के जवाब में डॉ. पाण्डेय ने इको सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए इसे भी पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। मनुष्य और प्रकृति के संबंधों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब दोनों के बीच पॉजिटिव इंटरेक्शन होगा, तब-तब इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने चुनौतियों से बिना घबराए सभी प्रतिभागियों से सही नॉलेज को प्राप्त करने, उस में लगातार वृद्धि करने और उसका इस्तेमाल अपने कार्यक्षेत्र में करने का आह्वान किया। <br /><br />इस अवसर पर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (आईटी) अरिजीत बनर्जी ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक गोविंद सागर भारद्वाज, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा)  उदय शंकर, केसीए अरुण प्रसाद,  पी. कथिरवेल, श्री एन. विजय सहित अन्य अधिकारी और प्रतिभागी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 16:42:55 +0530</pubDate>
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