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                <title>forests - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बाघ बचे तो जंगलों की सांस बचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले जीवों में बाघ एक ऐसा जीव है, जो न सिर्फ शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि पारिस्थितिकीय तंत्र में एक निर्णायक भूमिका भी निभाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/if-the-tiger-survives-the-breath-of-the-forests-will/article-121970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/ne1ws.png" alt=""></a><br /><p>प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले जीवों में बाघ एक ऐसा जीव है, जो न सिर्फ शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि पारिस्थितिकीय तंत्र में एक निर्णायक भूमिका भी निभाता है। हर वर्ष 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाकर हम इस विलुप्त होते वनराज की चिंता को वैश्विक मंच पर उठाते हैं। बाघ, जिसे अंग्रेजी में टाइगर कहा जाता है, अपनी चाल-ढ़ाल, दहाड़ और शिकार करने की कुशलता के लिए जाना जाता है। उसकी उपस्थिति जंगल को जीवंत बनाती है। हालांकि, जंगल का राजा शेर कहलाता है, परंतु व्यवहारिक रूप से बाघ की ताकत, चपलता और शिकार पर पकड़ कहीं अधिक प्रभावशाली है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और वैज्ञानिकों की चिंता इस बात को लेकर है कि बाघ लगातार विलुप्ति की ओर बढ़ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़े कारण हैं,जंगलों की अंधाधुंध कटाई, प्राकृतिक आवास का नष्ट होना, अवैध शिकार, वन्यजीवों का व्यापार और बाघों का मानव से टकराव।</p>
<p><strong>जैव विविधता :</strong></p>
<p>बाघ न केवल एक प्रजाति है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र का शीर्ष शिकारी है। यदि यह कड़ी टूटती है, तो जैव विविधता की पूरी शृंखला प्रभावित होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक टाइगर समिट आयोजित किया गया, जिसमें 13 बाघ रेंज वाले देशों ने बाघों की संख्या 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया था। भारत के लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि दुनिया के कुल बाघों में से लगभग 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं।</p>
<p>रणथंभौर में पहले ही कुछ बाघों द्वारा मानव पर हमले हो चुके हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भय का माहौल बना है। ऐसे में वन विभाग द्वारा कुछ बाघों को अन्य टाइगर रिजर्व जैसे रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा हिल्स, करौली-धौलपुर और रणथंभौर बाघ परियोजना द्वितीय में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। लेकिन इन स्थानों को पहले प्राकृतिक वास के रूप में सक्षम बनाना आवश्यक है। इसके लिए केवलादेव नेशनल पार्क से चीतलों को लाकर इन क्षेत्रों में शिकार आधार बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p><strong>बाघ संरक्षण :</strong></p>
<p>राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर , जो बाघ संरक्षण की दुनिया में पुनर्जन्म का प्रतीक है। 2004 में यहां सभी बाघ समाप्त हो चुके थे। लेकिन 2008 में बाघों को पुन: बसाने का सफल प्रयोग किया गया। वैश्विक स्तर पर, जहां भारत, नेपाल और थाईलैंड में बाघों की संख्या में उत्साहजनक बढ़ोतरी हुई है, वहीं कंबोडिया, लाओस और वियतनाम जैसे देशों में बाघ लगभग विलुप्त हो चुके हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में अवैध शिकार, वन्यजीव व्यापार और प्राकृतिक आवास की कमी बाघों के अस्तित्व पर भारी पड़ रही है। बाघों को बचाने का काम केवल सरकार या वन विभाग का नहीं है। इसमें आम नागरिकों, स्थानीय समुदायों, किसानों, युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। स्कूलों, सोशल मीडिया और संस्थानों में जागरूकता फैलाकर हम बाघों के प्रति एक संवेदनशील सोच विकसित कर सकते हैं।</p>
<p><strong>चिंता का विषय :</strong></p>
<p>सवाई माधोपुर की रणथम्भौर बाघ परियोजना में बढ़ती बाघों की संख्या न वन्य जीव प्रेमियों व पर्यावरणविदों के लिए, बल्कि खुद वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। यदि वयस्क बाघों में कुछ को जल्द ही अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित नहीं किया गया, तो अधिकार क्षेत्र को लेकर बाघों में खूनी टकराव हो सकता है। इसके अलावा इस बात की भी गहरी आशंका है कि बढ़ती संख्या से पैदा होने वाली अकुलाहट के चलते कुछ बाघ रणथम्भौर अभयारण्य की सीमा को लांघकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर उन्मुख हो जाएं। पर्यावरणविदों और वन्य जीव प्रेमियों के लिए ये दोनों ही आशंकाएं घोर चिंताजनक हैं।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण उपलब्धि :</strong></p>
<p>रणथम्भौर बाघ परियोजना में वयस्क बाघों की संख्या अब 90 से ऊपर पहुंच चुकी है, जो कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है। वर्तमान में इस बाघ परियोजना में बाघ शावकों की संख्या लगभग पंद्रह तक पहुंच जाना जाहिर करता है कि बाघ परियोजना में वन विभाग द्वारा पिछले कई वर्षो में हैबिटैट एवं वन्यजीव सम्बन्धी कार्यों के परिणाम अनुमान से भी अधिक सफल रहे हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि रणथम्भौर बाघ परियोजना द्वितीय, करौली में भी ऐसे कार्य कराए जाएं, जिससे रणथम्भौर बाघ परियोजना से बहार जाने वाले बाघों को एक निरंतर प्राकृतिक वास मिल सके। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या तथा परधि क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा एक साथ हल हो सकती हैं। बाघ सिर्फ एक जानवर नहीं, वह प्रकृति का प्रहरी है। अगर बाघ बचेंगे, तो जंगल बचेंगे, जंगल बचेंगे, तो पानी, हवा और जीवन बचेगा। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस हमें हर वर्ष यह याद दिलाता है कि जंगलों की यह दहाड़ एक दिन खामोश न हो जाए। हम सबका साझा दायित्व है, हर जंगल में गूंजती रहे बाघ की दहाड़, हर पीढ़ी देखे प्रकृति का यह अद्भुत उपहार।</p>
<p><strong>-प्रकाश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 12:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बूंदी में टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में पैंथर का मुवमेंट बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[बूंदी के जंगलों की आबोहवा वन्यजीवों को रास आ रही हैं, जिसका प्रमाण वन्यजीवों की बढ़ती संख्या हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/panther-movement-increased-in-the-areas-adjacent-to-the-tiger-reserve-in-bundi/article-64728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/bundi-k-tiger-reserve-s-sate-ilako-me-pather-ka-movement-bdha...bundi-news-21-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>बूंदी। एक ओर जहां बूंदी के जंगल बाघ बघेरों की दहाड से गुंजायमान हैं, वहीं दूसरी ओर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे बूंदी में पैंथर की मुवमेंट बढ़ गई है।  तीन दिन पहले रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे बूंदी टनल के बाहर हाइवे पर एक पैंथर बीच ओवरब्रीज के लिंक रोड पर बैठा हुआ दिखाई दिया। जो कि जोर-जोर से दहाड़ की गूंज रही थी। जिसे देख कर वाहन चालक अचंभित होकर वहीं ठहर गए। इनमें से कुछ ने जिस पैंथर की वीडियो भी अपने मोबाइल में कैद कर ली। एक वाहन चालक द्वारा बनाई गई वीडियों में पैंथर बीच सड़क पर बैठे दहाड़ता हुआ दिखाई दे रहा हैं। साइड से एक कार और एक यात्री बस निकलती हुई और सामने से बाइक चालक भी आता नजर आ रहा हैं। जो पैंथर को देख कर कुछ देर रूकता हैं और वापस गाड़ी को घुमाता हुआ दिख रहा हैं। हालांकि जिले में पैंथर के द्वारा किसी प्रकार की जन हानि नहीं हुई हैं, लेकिन जंगलों के समीप के गांवों और क्षेत्रों में भेड़ बकरियों के शिकार की घटनाएं अमूमन होती रही है। </p>
<p><strong>बकरियों का किया था शिकार</strong><br />पिछलें दिनों भी कालदां के जंगलों में चरवाहों के डेरे में बकरी और गधे का शिकार पैंथर के द्वारा किया गया। वहीं दबलाना के पास बडगांव में पैंथर ने बकरियों का शिकार किया था। वन्य जीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि रामगढ़ टाइगर रिजर्व बफर जोन में सुरक्षा दीवार का कार्य पूर्ण नहीं होने और अवैध गतिविधियों के चलते भी वन्यजीव बाहर आ जाते हैं। सनाढ्य ने टनल क्षेत्र में हाइवे किनारे मृत मवेशियों के डालने पर रोष जताते हुए कहा कि मृत मवेशियों की गंध भी वन्यजीवों को आकर्षित करती हैं। हमारी मांग हैं कि सुरक्षा दीवार का कार्य जल्द पूर्ण हो, ताकि वन्य जीवों को सुरक्षा मिल सके और वन विभाग को प्रशासन के साथ मिल कर हाइवे किनारे और रिजर्व क्षेत्र में मृत मवेशियों के डालने पर रोक लगवाने के प्रयास करने चाहिए।</p>
<p><strong>शुरू हुए ग्रासलैंड विकसित करने के काम</strong><br />वन्य जीवों के अनुकूल बनाने के लिए वन विभाग ने जंगल से विलायती बम्बूलों को हटाकर ग्रासलैंड विकसित करने के काम शुरू कर दिया है। विभाग ने कालदां माताजी के पास 300 बीघा में शाकाहारी वन्यजीवों के लिए ग्रासलैंड तैयार करवा रहा है। जिससमें हरिण प्रजाति के संवर्धन के लिए ग्रासलैंड विकसित होगा, साथ ही शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन में काम आने वाली फल व पत्तियों वाले 5 हजार ऐसे पेड़ पौधे भी लगाएं जाएंगे। वहीं विभाग यहां गश्त को प्रभावी बनाने के लिए रास्ते का काम भी कर रहा है, ताकि अवैध गतिविधिये ंपर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।</p>
<p><strong>अव्वल दर्जे का शिकारी हैं पैंथर</strong><br />पैंथर, पैन्थरा जीनस का जाति की बड़ी बिल्ली है जो अफ्रीका और एशिया में पाया जाता है। यह बिल्ली प्रजातियों जैसे शेर, बाघ और जैगुआर की तुलना में सबसे छोटा होता है। लेकिन इनमें बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव पैंथर की एकाग्रता तो लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली पैंथर को एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। आमतौर पर ये निशाचरी होते हैं। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>जंगल में बढ़ी पैंथर की संख्या</strong><br />बूंदी के जंगलों की आबोहवा वन्यजीवों को रास आ रही हैं, जिसका प्रमाण वन्यजीवों की बढ़ती संख्या हैं। जिले की समृद्ध जैवविविधता व 27 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र होने से यहां बाघ बघेरों सहित सभी वन्यजीव मौजूद है। अभी रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में 1 बाघ, 2 बाघिन व 3 शावकों सहित 6 बाघ मौजूद हैं, वहीं आरवीटीआर में 25-30 पैंथर व पैराफेरी क्षेत्र में 6 पैंथर मौजूद हैं। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के सघन एवं दुर्गम जंगलों में बघेरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सदाबहार जलस्रोतों वाले इस जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय व सांभर हरिणों की संख्या में भी वृद्धि हुई है लेकिन चिंकारा गायब हो गए हैं। जंगल में चिंकारा की कमी आने व पैंथर के लिए अन्य पर्याप्त प्रेबेस नहीं होने से भी वन्यजीव आए दिन भेड़ बकरियों को शिकार बनाने लगे है।</p>
<p><strong>शिकार की तलाश में आ जाते हैं जंगल से बाहर</strong><br />आरवीटीआर के उपवन संरक्षक कोर संजीव शर्मा ने बताया कि बून्दी में फैली अरावली की पहाड़ियां पैंथर के प्राकृत आवास हैं। यहां पैंथर के प्राकृतिक भोजन खुर वाले जानवर सांभर, नील गाय, कुत्ते, बिल्लियां आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वहीं भेड़ बकरियां भी इसका पसंदीदा भोजन हैं। कहीं बार पैंथर या अन्य जीव इनके चलते भी जंगल के समीपस्थ क्षेत्रों में आ जाते हैं।</p>
<p><strong>7 पैंथर हो चुके हैं दुर्घटना के शिकार</strong><br />चालू वर्ष में अलग अलग दुर्घटनाओं में 7 पैंथर काल कलवित हो चुके हैं। जिनमें से 4 पैंथर हाल ही में बरड़ क्षेत्र में 11 केवी विद्युत लाईन की चपेट में आकर मौत के शिकर हुए। वहीं डाटून्दा के पास दो नाहर घाटी में 1 पैंथर अज्ञात वाहन की चपेट में आकर मरा हुआ पाया गया। इसी प्रकार 2 पैंथर रेल्वे लाइन पर रेल की चपेट में आ चुके हैं।</p>
<p>टनल के बाहर हाईवे के किनारे शहर के मृत मवेशियों को डाला जा रहा हैं, जिनकी गंध वन्य जीवों को आकर्षित करती हैं। यह मृत मवेशी वन्यजीवों के लिए घातक हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि इन मृत मवेशियों को हाइवे किनारे और रिजर्व क्षेत्र के समीप डाले जाने पर प्रतिबंध लगाए।<br /><strong>- विठ्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>बून्दी के जंगलों मे प्रे-बेस और ग्रासलैंड की की समस्या हैं, वहीं दूसरी समस्या अवैध चराई की हैं। विभाग को अवैध चराई पर प्रतिबंध लगाने के साथ प्रेबेस और ग्रासलैंड विकसित करवाने के प्रयास किए जाने चाहिए।<br /><strong>- पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व वन्यजीव प्रतिपालक</strong></p>
<p>आमजन को वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण से जोड़ने, जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि उन्हें भी का वातावरण नहीं बने। आमतौर पर पैंथर जैसे वन्यजीव शिकार का पीछा करते हुए या शिकार के लालच में जंगल के बाहर आ जाते हैं। वैस भी पैंथर को जब तक नहीं छेड़ेंगे, वह हमला नहीं करता।<br /><strong>- संजीव शर्मा, उपवन संरक्षक (कोर), आरवीटीआर बून्दी</strong></p>
<p>वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध करवाने हेतु सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगलों में वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। वन्यजीवों के लिए प्रेबेस और ग्रासलैंड विकसित की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम भी जल्दी ही मिलेंगे। वन्यजीवों को भोजन, पानी व रहवास की पर्याप्त सुविधा मिलेगी तो यह जंगल से बाहर भी नहीं आएंगे।<br /><strong>- ओपी जांगीड़, उपवन संरक्षक, बून्दी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Dec 2023 16:44:03 +0530</pubDate>
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                <title>वन्यजीव और जंगल की सुरक्षा के लिए हो पर्याप्त इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[वन्य जीव सुरक्षा को लेकर टीम गठित कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/-adequate-arrangements-should-be-made-for-the-protection-of-wildlife-and-forests/article-54953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/vanjeev-or-jungle-ki-suraksha-k-liye-ho-paryapt-intezaam...shahbad,-baran-news-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। शाहाबाद घाटी क्षेत्र में लगातार 15 दिनों से पैंथर दिखाई दे रहा है। जिसकी वीडियो फोटो खूब वायरल हो रहे हैं। साथ ही वन विभाग के क्षेत्रीय वन मंडल अधिकारी हफीज मोहम्मद ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि शाम होने के बाद घाटी क्षेत्र जंगल की तरफ ने जाएं तथा शाम होने के बाद आने वाले लोग सीधे फोर लाइन से कस्बे के अंदर आए घाटी क्षेत्र से अभी रात्रि में नहीं आए। पैंथर का मूवमेंट लगातार बना हुआ है तथा शाहाबाद क्षेत्र के जंगलों में पैंथर की संख्या में वृद्धि भी हुई है इसलिए सजग रहे, चौकन्ने रहे। वन्य जीव सुरक्षा को लेकर टीम गठित कर दी गई है, शाहाबाद क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में वन्य जीव मौजूद है परंतु धीरे धीरे वन कटान होने के कारण वन क्षेत्र कम होता चला गया। वर्तमान में शाहाबाद क्षेत्र में जंगल लगभग 50  हजार  हेक्टर वन भूमि पर फैला हुआ है। जिसमें अभी भी वन्यजीवों की मौजूदगी है तथा दुर्लभ प्रजाति के जंगली जानवर भी देखने को मिले हैं। </p>
<p><strong>शाहाबाद घाटी में कैमरे लगाने की मांग</strong><br />वहीं कस्बे के लोगों ने मांग की है कि शाहाबाद घाटी में लगातार पैंथर का मूवमेंट लगातार बना हुआ है, इसलिए वन जीवो की सुरक्षा के अनुसार शाहाबाद घाटी में वन विभाग द्वारा कैमरे लगाया जाना चाहिए। कस्बेवासी रामचरण माली, मनोज सोनी, सुरेश सोनी, मुबारक अली, जितेंद्र राठौर राकेश जैन आदि ने सरकार से मांग की है कि शाहाबाद कस्बे में वन्य जीव मौजूद हैं। जब तक जंगल में कैमरे नहीं लगेंगे जब तक वन्यजीवों सुरक्षा नहीं हो पाएगी कैमरे लगने से वन्यजीवों की गणना एवं वन्यजीवों की मौजूदगी का भी पता लगेगा। </p>
<p><strong>अधूरे वन स्टॉफ से आ रही परेशानी</strong><br />शाहाबाद रेंज के अंतर्गत लगभग 7 नाके आते हैं। जिन पर भी पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से वन कर्मियों को नाका प्रभारी को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक वन नाके  पर 1 का 4 स्टाफ होना चाहिए परंतु अभी एक नाके पर एक कर्मचारी के भरोसे जंगल की सुरक्षा एवं नाके वन क्षेत्र की सुरक्षा टिकी हुई है। ऐसे में एक वन कर्मी द्वारा पूरे क्षेत्र में जंगल की सुरक्षा करना संभव नहीं हो पाता। जहां सरकार द्वारा जंगलों को संरक्षित करने के लिए कई योजनाएं लाई जाती हैं परंतु जब तक स्टाफ नहीं होगा। जंगल में सुरक्षित रहना मुश्किल है। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि शाहाबाद क्षेत्र एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संपूर्ण स्टाफ नाकों पर लगाया जाए। </p>
<p><strong>हाईवे जंगल क्षेत्र में बाउंड्रीवॉल कराने की मांग</strong><br />शाहाबाद कस्बे में हाईवे को निकले दशक गुजर चुके हैं परंतु अभी भी शाहाबाद जो जंगली क्षेत्र आता है। उसके दोनों तरफ दीवार नहीं होने से जंगली जानवरों को हाईवे की तरफ आ जाते हैं। ऐसे में पूर्व में कई जानवरों की दुर्घटना के कारण मौत भी हुई है परंतु अभी तक हाईवे के दोनों तरफ जहां जंगल शाहाबाद घाटी में प्रारंभ होता है और जहां खत्म होता है वहां तक कोई भी सुरक्षा के लिए वन  जीवो के लिए इंतजाम नहीं किए हैं। सरकार से क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाए।  हाईवे के दोनों तरफ तार फेंसिंग भी की जाए।    </p>
<p>शाहाबाद घाटी क्षेत्र में लगातार पैंथर कमेंट देखने को मिल रहा है। लोगों द्वारा वीडियो भी वायरल किए गए हैं। ऐसे में शाम के समय घाटी क्षेत्र में ना जाएं वीडियो आदि बनाने का प्रयास ना करें कभी-कभी ऐसी स्थिति में जानवर हमला भी कर सकता है। सरकार द्वारा वन क्षेत्र में बाउंड्री वॉल कराने के लिए बजट जारी किया गया है। जिसके तहत दीवार कराई जा रही है। वन स्टॉप अधूरा है एवं आधुनिक सुविधाएं भी वन कर्मियों को मिलनी चाहिए। जिससे जंगल की देखरेख और अच्छी तरह से हो सके। <br /><strong>- हफीज मोहम्मद, क्षेत्रीय वन मंडल अधिकारी।    </strong></p>
<p>वन क्षेत्र में अभी भी जंगली जानवर मौजूद है। वन क्षेत्र को संरक्षित करने की आवश्यकता है तथा वन क्षेत्र से आदिवासी लोगों को कई प्रकार से रोजगार मिलता है।  कोई ऐसी सरकार योजना चलाई जिससे अधिक से अधिक लोग जुड़कर वन की रक्षा के साथ-साथ वनोपज से धन भी कमा सकें। <br /><strong>- भोलाराम यादव, सरपंच मुंडियर।</strong></p>
<p>शाहाबाद वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है। इसमें दुर्लभ प्रचार की जड़ी बूटियां मौजूद हैं जो वीडियो वायरल हो रहा है। वह पैंथर का वीडियो है और वह शाहाबाद  घाटी में कई बार लोगों को पैंथर का मूवमेंट देखा गया है। मैं सरकार से मांग करता हूं की शाहाबाद घाटी में कैमरे लगाए जाए। <br /><strong>-  रामचरण माली, वरिष्ठ नागरिक, शाहाबाद। </strong></p>
<p>शाहबाद वन क्षेत्र में वन्यजीव मौजूद हैं। इनकी सुरक्षा के इंतजाम हो एवं सरकार को चाहिए वन  को सुरक्षित रखने के लिए जो स्टाफ कम है, उसे लगाया जाए। <br /><strong>- मनोज सोनी, निवासी, शाहाबाद। </strong></p>
<p>शाहाबाद के जंगलों में पैंथर का देखना बहुत ही सुखद समाचार है। वन्यजीवों के होने से ही जंगल की शोभा होती है, इसलिए हम सबको मिलकर वन को सुरक्षित रखने के प्रयास करने चाहिए और वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। <br /><strong>- राकेश शर्मा होड़ी, वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमी।</strong><br />    <br />शाहाबाद घाटी में पैंथर का मुवमेंट अक्सर देखा जाता है। कई लोगों को रात्रि के समय दिखाई भी देता है शाहाबाद वन क्षेत्र में अभी भी वन्य जीव मौजूद हैं। सरकार को चाहिए कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए। <br /><strong>- हुकमदत्त भार्गव, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:39:19 +0530</pubDate>
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                <title>मुकुंदरा का सीना चीर पत्थर निकाल रहा माफिया</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों को अवैध गतिविधियों की लॉकेशन होने के बावजूद लाचार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundara-s-chest-is-being-ripped-open-by-the-mafia/article-47436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/mukundara-ka-seena-cheer-pathan-niakl-rhe-mafiya...kota-news-01-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका है। दिनदहाड़े मुकुंदरा का सीना छलनी किया जा रहा और जिम्मेदार आंखें मूंदे पड़े हैं। माफिया की दबंगई के आगे स्थानीय अधिकारी नतमस्तक हो गए। बेधड़क टाइगर रिजर्व का सीना चीरकर बेशुमार पत्थर निकाले जा रहे और वन्यजीवों का आशियाना उजाड़ा जा रहा। हालात यह है, रात के अंधेर और दिन के उजाले में बेखौफ अवैध माइनिंग का काला खेल चल रहा है। इसके बावजूद माफियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। दरअसल, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की बोराबांस रैंज अवैध माइनिंग का गढ़ और माफियाओं का अडडा बन चुका है। यहां नयागांव, दौलतगंज और बोराबांस के जंगलों में हथौड़ों से चटटानें तोड़ी जा रही तो जेसीबी से जमीन खोद पत्थर निकाले जा रहे हैं। प्रतिदिन 15 से 20 ट्रॉली पत्थर बेचे जा रहे हैं। बे-रोकटोक अवैध खनन मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। </p>
<p><strong>यहां हो रहा अवैध खनन</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुकुंदरा की बोराबांस रैंज करीब इतने स्क्वायर मीटर में फैली हुई है। नयागांव से लेकर बोराबांस गांव तक कई जगहों पर अवैध खनन हो रहा है। इनमें नयागांव में पटवार घर के पीछे, दौलतगंज में बालाजी मंदिर के पीछे, मोदी लॉ कॉलेज के सामने वाला क्षेत्र, डायवर्जन चैनल से सटा इलाका, भंवरकुंज के आसपास का क्षेत्र तथा बोराबांस में नृहसिंह माता मंदिर सहित कई इलाके शामिल हैं। इस रैंज में कई जगहों पर खनन कर पत्थर निकाले जा रहे तो चटटानों के टुकड़ों को हथौड़ों से तोड़ा जा रहा। वहीं, जेसीबी लगाकर मिटटी, ग्रेवल निकाली जा रही है। माइनिंग रात 11 बजे से अलसुबह 5 बजे तक जारी रहती है। दोपहर को पत्थरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकाली जाती है। अधिकारियों को अवैध गतिविधियों की लॉकेशन होने के बावजूद लाचार है। </p>
<p><strong>डीएफओ से शासन सचिव तक ने नहीं दिया जवाब</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अवैध खनन के मामले में नवज्योति ने डीएफओ बीजो रॉय, सीसीएफ शारदा प्रताप सिंह, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरविंदम तोमर, शासन सचिव शिखर अग्रवाल को फोन व मैसेज किए। इनमें से कुछ ने 10 मिनट बाद बात करने को कहा लेकिन बाद में इनका फोन बंद हो गया। हालांकि, इन्होंने वाट्सएप पर मैसेज रीड कर लिए थे। इसके बावजूद जवाब नहीं दिया। </p>
<p><strong>सफारी रूट पर दौड़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों ने बताया कि डायवर्जन से गैपरनाथ और गैपरनाथ से जवाहर सागर तक वन विभाग ने मुकुंदरा सफारी के लिए रूट बनाया था। हालांकि, सफारी तो शुरू नहीं हुई लेकिन माफियाओं ने अपनी ही सफारी शुरू कर दी। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि इस रूट पर न तो नाका बनाया और न ही स्टाफ तैनात किया। नतीजन, खननकर्ता इस रास्ते का जमकर उपयोग कर रहे हैं। करीब तीन से चार ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रति घंटा यहां से गुजर रही है। वहीं मछुआरे भी इसी रूट से आते जाते हैं। लेकिन, अधिकारियों को दिखाई नहीं देते। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 15 से 20 ट्रॉली पत्थरों की चोरी</strong><br />स्थानीय निवासियों ने बताया कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की बोराबांस रैंज माफियाओं के लिए सोने की खदान बन चुकी है। यहां से प्रतिदिन 15 से 20 ट्रॉली पत्थर निकाले जा रहे हैं और प्रति ट्रॉली 1 हजार रुपए में बेची जा रही है। हालांकि, यह कीमत दूरी के हिसाब से घटती-बढ़ती है। नयागांव से रावतभाटा तक पत्थरों की सप्लाई की जाती है। मुकुंदरा की जमीन से लाल पत्थर निकलता है, जो मकानों की नींव, दीवार बनाने व भर्ती भरने के काम में आता है। वहीं, गिटटी बनाने के लिए क्रेशर को भी बड़ी मात्रा में पत्थर बेचा जाता है। इसके अलावा कई ट्रॉली मिटटी व ग्रेवल की भी निकाली जाती है। ग्रामीणों के अनुसार पत्थर, ग्रेवल मिटटी को मिलाकर माफिया प्रतिमाह सरकार को एक लाख रूपए से अधिक राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। </p>
<p><strong>दिन में हथौड़े, रात को चलती जेसीबी</strong><br />नयागांव, दौलतगंज व बोराबांस के ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। माफियाओं ने बड़ी संख्या में मजदूर लगा रखे हैं, जो दिनभर हथौड़ों से पत्थर तोड़ते हैं, दो-तीन खननकर्ता इनकी मॉनिटरिंग करते हैं और रात 11 बजे से जेसीबी से जंगल का सीना छलनी कर चट्टाने तोड़ी जाती है। रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां व मशीनों की आवाजों से स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल हो गया और नींद हराम हो गई। </p>
<p><strong>माइनिंग के लिए डीएफओ व सीसीएफ जिम्मेदार</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अवैध खनन या किसी भी तरह की अवैध गतिविधियां  होना वाइल्ड लाइफ एक्ट का सीधा उल्लंघन है। यदि, प्रोटेक्टेड एरिया में माइनिंग हो रही है तो इसके लिए डीएफओ व सीसीएफ जिम्मेदार होंगे। इनके खिलाफ एक्ट के तहत जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में डालने के लिए केस दर्ज होना चाहिए। अवैध गतिविधियों से जंगल की पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ेगी और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा। माइनिंग करने वाले वन्यजीवों का शिकार भी कर सकते हैं। जैव विविधता खत्म होगी और प्रदूर्षण बढ़ेगा। अधिकारियों के खिलाफ करप्शन व वाइल्ड लाइफ एक्ट का उल्लंघन करने का केस दर्ज होना चाहिए। <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट भोपाल</strong></p>
<p><strong>मिलीभगत के बगैर खनन संभव नहीं</strong><br />मुकुंदरा की बोराबांस रेंज में अवैध खनन आज से नहीं बल्कि लंबे समय से जारी है, जो मिलीभगत  के बगैर संभव नहीं है। यह केवल वाइल्ड लाइफ एक्ट का उल्लंघन नहीं है बल्कि करप्शन का मामला भी है। ऐसे में वन्यजीव प्रतिपालक को प्रसंज्ञान लेकर स्थानीय अधिकारियों की भूमिका की जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अवैध खनन की जानकारी होते हुए भी अधिकारियों द्वारा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही। अवैध गतिविधियों से वन्यजीवों का जीवन प्रभावित हो रहा है। एनिमल यह इलाका छोड़ अन्य इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। वन विभाग को मामले में अधिकारियों व कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका की जांच करनी चाहिए। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p><strong>अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध, निष्पक्ष हो जांच  </strong><br />मुकुंदरा हिल्स में अवैध खनन भ्रष्टाचार का शुद्ध नतीजा है। जंगल में अधिकारियों की मर्जी के बिना कुछ भी नहीं हो सकता। ऐसे में संदिग्ध लोगों की घुसपैठ, पत्थर, मिट्टी, ग्रेवल चोरी होना डीएफओ व सीसीएफ की भूमिका सवालों के कठघरे में आती है। माफिया सरकार को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा रहे हैं और जिम्मेदारों का खामोश होना भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। सरकार ऐसे अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर माफियाओं के साथ संदिग्ध गठजोड़ की जांच करनी चाहिए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- बाबूलाल जाजू, पर्यावरणविद् तथा प्रदेशाध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 14:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>धरती पर हरियाली लाने के लिए प्रयासरत रहें रेंज ऑफिसर्स</title>
                                    <description><![CDATA[
आरएफओ बैच इंटरेक्शन प्रोग्राम में बोले प्रधान मुख्य वन संरक्षक ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9C-%E0%A4%91%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8/article-2828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-29-at-15.41.47.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल प्रमुख) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा है कि रेंज ऑफिसर्स धरती के चेहरे पर हरियाली की मुस्कान लाने के लिए प्रयास करें। पर्यावरण के साथ-साथ उससे जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। वे सोमवार को अरण्य भवन में नॉर्थ इंडिया टूअर ऑफ आरएफओ बैच-2021-22 में शामिल प्रतिभागियों से बातचीत कर रहे थे।<br /><br />इस दौरान डॉ. पाण्डेय ने कहा कि नवनियुक्त रेंज ऑफिसर्स सभी तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। अपने आइडियाज अधिकारियों के साथ शेयर करें और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करते रहें। उन्होंने प्रकृति को पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके बिना कहीं भी जीवन संभव नहीं है। पशु-पक्षियों के साथ-साथ मनुष्य भी प्रकृति के बिना अधूरा है, इसलिए हर हाल में पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।<br /><br />एक प्रतिभागी के सवाल के जवाब में डॉ. पाण्डेय ने इको सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए इसे भी पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। मनुष्य और प्रकृति के संबंधों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब दोनों के बीच पॉजिटिव इंटरेक्शन होगा, तब-तब इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने चुनौतियों से बिना घबराए सभी प्रतिभागियों से सही नॉलेज को प्राप्त करने, उस में लगातार वृद्धि करने और उसका इस्तेमाल अपने कार्यक्षेत्र में करने का आह्वान किया। <br /><br />इस अवसर पर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (आईटी) अरिजीत बनर्जी ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक गोविंद सागर भारद्वाज, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा)  उदय शंकर, केसीए अरुण प्रसाद,  पी. कथिरवेल, श्री एन. विजय सहित अन्य अधिकारी और प्रतिभागी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 16:42:55 +0530</pubDate>
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