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                <title>poverty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>poverty RSS Feed</description>
                
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                <title>NITI आयोग रिपोर्ट: देश में हर 10 में से 1 छात्र छोड़ रहा स्कूल, माध्यमिक शिक्षा पर बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 11.5% छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। चंडीगढ़ 2% के साथ सबसे बेहतर, जबकि गुजरात और एमपी में यह दर 16% से अधिक है। आर्थिक तंगी प्रमुख कारण है। हालांकि, राजस्थान ने अपनी दर 18.8% से घटाकर 7.7% कर सराहनीय सुधार दिखाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/niti-commission-report-1-out-of-every-10-students-in/article-153283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली’ ने माध्यमिक शिक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर दस में से एक छात्र सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई बीच में छोड़ रहा है। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर अब भी सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट वाला चरण बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024-25 में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की राष्ट्रीय औसत दर 11.5 प्रतिशत रही। आर्थिक तंगी, कम उम्र में कामकाज में लग जाना और संस्थागत सहयोग की कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।</p>
<p>राज्यों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला। चंडीगढ़ में ड्रॉप आउट दर सबसे कम 2 प्रतिशत रही, जबकि झारखंड 3.5 प्रतिशत, उत्तराखंड 4.6 प्रतिशत और केरल 4.8 प्रतिशत के साथ बेहतर स्थिति में रहे। दूसरी ओर गुजरात में 16.9 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 16.8 प्रतिशत और लद्दाख में 16.2 प्रतिशत छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में ओडिशा, झारखंड, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में सुधार को भी रेखांकित किया गया है। राजस्थान में ड्रॉप आउट दर 18.8 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई है। नीति आयोग ने माना कि प्रगति के बावजूद माध्यमिक शिक्षा में छात्रों को स्कूल से जोड़े रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>समृद्धि के शिखर एवं गरीबी के गड्ढ़े वाली दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक संस्था ऑक्सफैम ने अपनी आर्थिक असमानता रिपोर्ट में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नये नजरिया, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं अमीरी गरीबी के बीच बढ़ते फासले की तथ्यपरक प्रभावी प्रस्तुति समय-समय पर देते हुए इसे संतुलित एवं समानतामय संसार-संरचना के लिए घातक बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/a-world-with-peaks-of-prosperity-and-pits-of-poverty/article-71337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/ph1.png" alt=""></a><br /><p>वैश्विक संस्था ऑक्सफैम ने अपनी आर्थिक असमानता रिपोर्ट में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नये नजरिया, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं अमीरी गरीबी के बीच बढ़ते फासले की तथ्यपरक प्रभावी प्रस्तुति समय-समय पर देते हुए इसे संतुलित एवं समानतामय संसार-संरचना के लिए घातक बताया है। संभवत: यह एक बड़ी क्रांति एवं विद्रोह का कारण भी बन सकता है। ऑक्सफैम के अनुसार आर्थिक असमानता के लिहाज से पिछले कुछ साल काफी खराब साबित हुए हैं। आज देश एवं दुनिया की समृद्धि कुछ लोगों तक केन्द्रित हो गई है, भारत में भी ऐसी तस्वीर दुनिया की तुलना में अधिक तीव्रता से देखने को मिल रही है। भारत में भी भले ही गरीबी कम हो रही हो, लेकिन अमीरी कुछ लोगों तक केन्द्रित हो गई है। बीते चार सालों की घटनाएं, इनमें चाहे कोरोना हो या युद्ध या इससे उपजी महंगाई, बेरोजगारी, अभाव इन सभी कारणों के चलते साल 2020 के बाद दुनियाभर में करीब 5 अरब लोग गरीब हुए हैं। दूसरी ओर इसी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के पांच शीर्ष धनाढ्यों की दौलत पिछले चार साल में 869 अरब डॉलर बढ़ी है। क्या यह आश्चर्य का विषय नहीं कि विकसित दुनिया की दौड़ में कुछेक लोग सबसे आगे दौड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में गरीब दहलीज पर खड़े हैं? वो लोग जो अमीरी के शीर्ष पर हैं, वे वर्चुअल दुनिया और एक ग्लोबल बाजार के मालिक हैं। ऐसे लोगों के सामने आम आदमी की गरीबी दूर करने का नहीं, बल्कि अपनी समृद्धि बढ़ाने का लक्ष्य है। यह ऐसी दौड़ है जो असंतुलन को न्यौतती हैं, दु:ख, अभाव एवं असंतोष बढ़ाती है।</p>
<p>दुनिया के सबसे अमीर शख्सों में शुमार एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने इंसान के दिमाग में कृत्रिम चिप का प्रत्यारोपण बाजारवादी नीतियों का हिस्सा एवं ईश्वर की रची मानव- संरचना में बेहूदा हस्तक्षेप है। संवेदनशील मस्तिष्क में चिप लगाने के क्रम में इंसान के रोबट बन जाने की आशंकाएं भी निर्मूल नहीं हैं। ध्यान रहे कि इस प्रत्यारोपण का लक्ष्य मानव-कल्याण कदापि नहीं है। जाहिर है मस्तिष्क में चिप लगाने का प्रयोग उनके बाजार के गणित का ही हिस्सा है। वही मस्क जिन्होंने ट्विटर खरीदने और उसे एक्स में तब्दील करने के क्रम में कर्मचारियों की निर्ममता से छंटनी की थी। वही मस्क जो विश्व के अरबपतियों को अंतरिक्ष में सैर-सपाटा कराने के अलावा दुनिया के तमाम बड़े मुनाफे के कारोबार में लगे हुए हैं। यह सवाल मानवीय बिरादरी के लिए हमेशा मंथन का विषय रहेगा कि विज्ञान की खोज एवं कुछेक लोगों तक केन्द्रित होती समृद्धि मानवता की संहारक नहीं बन रही है? जनता में आक्रोश एवं विद्रोह का बड़ा कारण नहीं बन रही है?</p>
<p>भारतीय लोग इन दिनों इस बात से बहुत खुश होते रहते हैं कि भारत शीघ्र ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। लेकिन दुनिया के इस तीसरे सबसे बड़े मालदार एवं समृद्ध देश की असली हालत क्या है? ऑक्सफॉम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ  100 भारतीय अरबपतियों की सम्पत्ति 54.12 लाख करोड़ रुपये है यानि उनके पास इतना पैसा है कि वह भारत सरकार के डेढ़ साल के बजट से भी ज्यादा है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को अपनी रोजमर्रा के जरूरी चीजों को खरीदने पर बहुत ज्यादा टैक्स भरना पड़ता है, क्योंकि वर्तमान सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि वह बताए बिना ही चुपचाप काट लिया जाता है। इसी का नतीजा है कि देश के 70 करोड़ लोगों की कुल सम्पत्ति देश के सिर्फ  21 अरबपतियों से भी कम है। प्रश्न यह है कि क्या समृद्धि लोगों की शक्ति ही समाज के विकसित होने का मापदंड होती जा रही है? क्या इधर जीवन मूल्यों पर मनुष्य या मानव समाज की पकड़ कमजोर हो रही है और बाजार की मजबूत? क्योंकि इन समृद्ध लोगों की बाजारवादी नीतियों से खरीदना, निरंतर खरीदना एक सामाजिक आदत-सी बन गई है। आम जनता से अधिक इन समृद्ध लोगों पर सरकार का भरोसा बढ़ना एक आदर्श समाज व्यवस्था की बड़ी विसंगति एवं विडम्बना है। मुश्किल यह है कि किसी के दुख को समझने के लिए जो जीवन मूल्यों की नजर चाहिए, उसे बाजार ने हाई-जैक कर लिया है। इंसानियत कमतर हो तो कोई बात नहीं, ब्रांड वैल्यू बढ़नी चाहिए? ऐसी परिस्थिति में आम आदमी क्या करे? </p>
<p>महात्मा गांधी को पूजने वाले सत्ताशीर्ष का नेतृत्व उनके ट्रस्टीशीप के सिद्धान्त एवं ऐसे ही आर्थिक समानता के सिद्धांतों को बड़ी चतुराई से किनारे कर रखा है। यही कारण है कि एक ओर अमीरों की ऊंची अट्टालिकाएं हैं तो दूसरी ओर फुटपाथों पर रेंगती गरीबी। एक ओर वैभव ने व्यक्ति को विलासिता दी और विलासिता ने व्यक्ति के भीतर क्रूरता जगाई, तो दूसरी ओर गरीबी तथा अभावों की त्रासदी ने उसके भीतर विद्रोह की आग जला दी। वह प्रतिशोध में तपने लगा, अनेक बुराइयां बिन बुलाए घर आ गईं। नई आर्थिक प्रक्रिया को आजादी के बाद दो अर्थों में और बल मिला। एक तो हमारे राष्टÑ का लक्ष्य समग्र मानवीय विकास के स्थान पर आर्थिक विकास रह गया। दूसरा सारे देश में उपभोग का एक ऊंचा स्तर प्राप्त करने की दौड़ शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया में सारा समाज ही अर्थ प्रधान हो गया है।             </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 11:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गरीबी कम करने का सरकार का आंकड़ा झूठा: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[यह गरीब के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश है। इसमें 4 बड़ी समस्याएं हैं। अगर गरीबों की संख्या कम हो गई है, तो उपभोग क्यों नहीं कम हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/third-party-not-support-of-claim--says-congress/article-67402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/3636-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार की गरीबों की संख्या कम होने के आंकड़े को झूठा आंकड़ा करार देते हुए कहा कि यदि देश में गरीबी कम हुई है, तो उपभोग करने वालों का आंकड़ा बढऩे की बजाय कम क्यों रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार का यह दावा गलत है कि देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से उबारा गया है। उनका कहना था कि यदि सच में गरीबों की संख्या कम हुई है, तो फिर उपभोग करने वालों की संख्या क्यों काम हो रही है। दावे पर कहा कि ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है। ये लाइनें मोदी सरकार के उस नए दावे पर चरितार्थ होती है, जिसमें कहा जा रहा है कि गत 9 साल में 24.82 करोड़ भारतीयों को गरीबी से उबारा गया है, लेकिन यह गरीब के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश है। इसमें 4 बड़ी समस्याएं हैं। अगर गरीबों की संख्या कम हो गई है, तो उपभोग क्यों नहीं कम हो रहा है। </p>
<p>प्रवक्ता ने कहा कि नीति आयोग के इस दावे का समर्थन किसी भी थर्ड पार्टी ने क्यों नहीं किया। वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ किसी ने तो यह बात मानी होती। नीति आयोग के गरीबी के स्थापित मानक हैं फिर ऐसे मानकों को क्यों चुना गया, जो सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर आधारित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jan 2024 18:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में विकास एवं गरीबी पर चिंतन</title>
                                    <description><![CDATA[देश में गरीबों की गरीबी दूर होनी चाहिए तभी विकास का कोई मतलब निकलता है इस दृष्टि से वर्ष 2014 के पश्चात प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुविधा, आवास योजना, उज्वला योजना, नल कनेक्शन योजना, किसानों को धनराशि का हस्तांतरण तथा किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/reflections-on-development-and-poverty-in-india/article-54131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/op1.png" alt=""></a><br /><p>भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व स्तरीय कन्वेंशन केंद्र का उद्घाटन करते हुए आह्वान किया है कि भारत आगामी 25 वर्षों में 2047 तक विश्व के विकसित राष्टÑ की श्रेणी में आना है तथा विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। वर्ष, 2014 में जब मैं ने सत्ता संभाली थी अर्थव्यवस्था के आकार की दृष्टि से भारत का स्थान दसवां था जो कि आज पांचवा हो गया है, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका चीन जर्मनी व जापान से कम है। देश में मई 2024 तक भाजपा की केंद्र में कार्यकाल के 10 वर्ष पूरे हो जाएंगे तथा आम चुनाव संभावित है जिसमें विकास एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। आम चुनाव में राष्टÑीय मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं तथा राज्य स्तरीय वह स्थानीय मुद्दे गौण होते हैं ऐसे में देश का विकास, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक व सामाजिक विषमताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।<br /><br />अंतरराष्टÑीय व देशी अनुमान सही है कि भारत निश्चित रूप से विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की प्रतिभा एवं योग्यता रखता है क्योंकि विकास दर एक ऐसा घटक है जो कि देश के नागरिकों एवं सरकारों को अवसर प्रदान करता है। जो कि देश में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं, जीवन स्तर को ऊंचाई पर ले जाते हैं। देश में 80 के दशक तक विकास दर 3 से 4 प्रतिशत थी जिसे हिंदू विकास दर के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसके पश्चात लगभग 4 दशकों से भारत की विकास दर औसतन 6 प्रतिशत रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, जो कि लगातार <br />8 प्रतिशत या अधिक रहनी चाहिए, जिसके लिए अभी लंबा रास्ता तय करने की आवश्यकता होगी।<br /><br />विकास की अवधारणा में यह निहितार्थ है कि गरीब मुक्त भारत होगा। लेकिन सवाल यह है कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर भी क्या भारत गरीबी से मुक्त हो गया है यदि गरीबी से मुक्त हो गया है तो फिर देश के लगभग 80 करोड़ जनसंख्या को मुफ्त अनाज वितरण की आवश्यकता क्यों है? इसमें कोई शक नहीं है कि भारत में गरीबी का अनुपात कम हुआ है नीति आयोग द्वारा तैयार नेशनल मल्टीडाइमेंशनल गरीबी सूचकांक 2023 के अनुसार बहुआयामी गरीबी वाली आबादी का प्रतिशत वर्ष 2015-16 में 24.85 प्रतिशत था, जो कि घटकर 2020-21 में 14.6 प्रतिशत रह गया है। एक अनुमान के अनुसार इस अवधि में 13. 5 करोड़ नागरिक बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल गए हैं।<br />बहुआयामी गरीबी संकेतकों में गरीबों के निर्धारण में केवल प्रति व्यक्ति आय को ही आधार नहीं बनाया जाता है बल्कि अनेक सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर में सुधार से जुड़े हुए हैं जिसमें पोषण, बाल एवं किशोर मृत्यु दर, खाना बनाने के ईंधन स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, माता का स्वास्थ्य, स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति आदि प्रमुख है।</p>
<p>देश में गरीबों की गरीबी दूर होनी चाहिए तभी विकास का कोई मतलब निकलता है इस दृष्टि से वर्ष 2014 के पश्चात प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुविधा, आवास योजना, उज्वला योजना, नल कनेक्शन योजना, किसानों को धनराशि का हस्तांतरण तथा किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन सवाल ये है कि देश में अभी भी 23 करोड़ लोग गरीब हैं, जो कि दो वक्त का भोजन भी नहीं कर सकते हैं। विकास की अवधारणा को बेरोजगारी से जोड़ने की आवश्यकता है यदि बेरोजगारी रहेगी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होगी। बेरोजगारी को कैसे दूर किया जाए यह सवाल है। एक तरीका है कि कौशल विकास एवं शिक्षा पर ध्यान दिया जाए, स्वरोजगार की अवधारणा को विकसित किया जाए तथा सरकार की भूमिका प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदाता की न होकर सहायक व सहकारी होनी होनी चाहिए।<br />लेकिन यह अवधारणा फैल नहीं रही है तथा रोजगार सृजन का संबंध सरकार द्वारा दी जाने वाली नौकरियों से ही जोड़ा जाता है। सरकारें भी अपनी उपलब्धियों में सरकारी भर्ती के आंकड़े प्रस्तुत करती है तथा चुनाव में जनता को ढोल पीटकर कहती है कि हमने इतने लोगों को नौकरी दे दी है लेकिन उनका यह बयान एवं दावा खोखला हो जाता है जब इसकी तुलना कुल बेरोजगारों के प्रतिशत से होती है जो कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। रोजगार के अवसरों के नाम पर सबसे बड़ा छलावा है भर्ती प्रक्रिया जो कि भ्रष्टाचार, पेपर लीक, कानूनी जटिलताओं, बाधाओं एवं अवरोधों की शिकार है आज जरूरत है कि हमें पश्चिमी विकास मॉडल के स्थान पर स्थानीय विकास मॉडल बनानी चाहिए तथा स्वदेशी अवधारणा को ज्यादा महत्व देना चाहिए क्योंकि सामुदायिक स्तर पर परस्पर सहयोग एवं रोजगार सृजन से विकसित करें। दुनिया में भारत नाम कमाता है लेकिन अधिकांश जनसंख्या गरीब है तो यह एक विरोधाभास है।</p>
<p>-डॉ. सुभाष गंगवाल<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 13:31:22 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक : पांच वर्ष में 13.5 करोड़ भारतीय गरीबी से मुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले पांच वर्ष में 13.5 करोड़ भारतीय गरीबी से मुक्त हुए है और वर्ष 2015-16 तथा  और 2019-21 के बीच गरीब व्यक्तियों की संख्या 24.85 प्रतिशत से गिरकर 14.96 प्रतिशत हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/national-multidimensional-poverty-index-135-crore-indians-freed-from-poverty/article-52041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/1-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले पांच वर्ष में 13.5 करोड़ भारतीय गरीबी से मुक्त हुए है और वर्ष 2015-16 तथा  और 2019-21 के बीच गरीब व्यक्तियों की संख्या 24.85 प्रतिशत से गिरकर 14.96 प्रतिशत हो गई है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति संबंधी समीक्षा 2023 जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2015-16 से 2019-21 की अवधि के दौरान रिकॉर्ड 13.5 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हुए। इस अवसर पर नीति आयोग ने नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, डॉ. अरविंद विरमानी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रमण्यम भी उपस्थिति रहे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी तीव्रतम गति से 32.59 प्रतिशत से गिरकर 19.28 प्रतिशत रह गयी है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/NITIAayog?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NITIAayog</a> released “National <a href="https://twitter.com/hashtag/MultidimensionalPovertyIndex?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MultidimensionalPovertyIndex</a>: A Progress Review 2023” based on NFHS-5. The report states India’s headcount ratio of multidimensional poverty has ⬇️ from 24.85% in 2015-16 to 14.96% in 2019-21.<a href="https://twitter.com/hashtag/MPI?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MPI</a> # PovertyReduction <a href="https://t.co/8IoD8wppg1">pic.twitter.com/8IoD8wppg1</a></p>
— NITI Aayog (@NITIAayog) <a href="https://twitter.com/NITIAayog/status/1680880342457274374?ref_src=twsrc%5Etfw">July 17, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>यह रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण एनएफएचएस- चार और पांच (2015-16 और 2019-21) पर आधारित है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, रसोई गैस, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, परिसंपत्ति और बैंक खाते को शामिल किया गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबों की संख्या वर्ष 2015-16 में 24.85 प्रतिशत थी और यह वर्ष 2019-2021 में 14.96 प्रतिशत हो गई जिसमें 9.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। इस अवधि के दौरान शहरी क्षेत्रों में गरीबी 8.65 प्रतिशत से गिरकर 5.27 प्रतिशत हो गई। इसके मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों की गरीबी तीव्रतम गति से 32.59 प्रतिशत से घटकर 19.28 प्रतिशत हो गई है । उत्तर प्रदेश में 3.43 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हुए जो कि गरीबों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट है । </p>
<p>इसके अलावा 36 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों तथा 707 प्रशासनिक जिलों के लिए गरीबी संबंधी अनुमान प्रदान करने वाली रिपोर्ट से पता चलता है कि गरीबों के अनुपात में सबसे तीव्र कमी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में हुई है।</p>
<p>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत वर्ष 2030 की निर्धारित समय सीमा से काफी पहले सहस्राब्दी विकास लक्ष्य एसडीजी को हासिल करने के पथ पर अग्रसर है। स्वच्छता, पोषण, रसोई गैस, वित्तीय समावेशन, पेयजल और बिजली तक पहुंच में सुधार पर सरकार के प्रयासों से प्रगति हुई है।  पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसे प्रमुख कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य में अभावों को कम करने में योगदान प्रदान किया है। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) और जल जीवन मिशन (जेजेएम) जैसी पहलों ने देशभर में स्वच्छता संबंधी सुधार किया है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (पीएमयूवाई) के माध्यम से सब्सिडी वाले रसोई गैस के प्रावधान ने जीवन को सकारात्मक रूप से बदल दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) और समग्र शिक्षा जैसी पहलों ने भी गरीबी को कम करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 15:57:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>गरीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[इस रिपोर्ट का तार्किक विश्लेषण करने के बाद कुछ निराशाजनक बातें भी सामने आई है खाद्य पदार्थों में सम्मिलित पोषक तत्व, खाना बनाने के लिए ईंधन, साफ-सफाई तथा घर की सुविधा के संबंध में पूरे विश्व में प्रभावित तकरीबन 4.55 करोड़ लोगों में से 3.44 करोड़ लोग भारत में रहते हैं। वही बांग्लादेश में यह मात्र 21 लाख ही है और पाकिस्तान में तो 19 लाख है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/significant-progress-towards-poverty-alleviation/article-29254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-55.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों भारतीय अर्थव्यवस्था के संबंध में बहुत कुछ सकारात्मक देखने को मिल रहा है। पहले जीडीपी की विकास की दर के आधार पर हमारी अर्थव्यवस्था ने इंग्लैंड को पीछे छोड़कर विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया। अब वैश्विक बहु आयामी गरीबी सूचकांक की नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने गरीबी उन्मूलन पर काफी अच्छा कार्य किया है। इस रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान समय में भारत में गरीबी की दर 16.4 प्रतिशत है। काफी सकारात्मक बात इस रिपोर्ट में यह देखने को आई है कि बीते 15 सालों में यानी कि 2005-6 से 2021-22 तक भारत में 42 करोड़ लोगों को गरीबी के जीवन स्तर से ऊपर उठाया है। निश्चित रूप से यह आंकड़ा भारत के आर्थिक विकास के लिए आदर्श स्थिति को व्यक्त करता है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट करना भी अत्यंत आवश्यक है कि इस रिपोर्ट के अंतर्गत कोरोना महामारी के आर्थिक दुष्प्रभावों को बहुत बड़े हद तक सम्मिलित नहीं किया गया।</p>
<p>भारत के संदर्भ में किए गए सर्वे का 71 प्रतिशत भाग 2019 से पूर्व का है। 2022 की इस वैश्विक आयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के अंतर्गत भारत का इंडेक्स 0.069 दर्ज किया गया है। ज्ञात रहे 2006 के अंतर्गत इसी रिपोर्ट के द्वारा दिया गया इंडेक्स 0.283 था तो 2015-16 में यह 0.122 हुआ करता था। आंकड़े यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि तकरीबन 15 वर्ष पूर्व भारत में गरीबी की दर 55.1 प्रतिशत थी। 2015-16 में ये 27.7 प्रतिशत थी। यह कमी इस बात को स्पष्ट कर रही है कि भारत में आर्थिक विकास का सामूहिक प्रभाव बड़ी तेजी से देखा जा रहा है। संयुक्त राष्टÑ विकास कार्यक्रम तथा ऑक्सफोर्ड गरीबी व मानव विकास पहल के द्वारा तैयार की गई इस वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अंतर्गत 111 देशों को इस दफा सम्मिलित किया गया था। इस रिपोर्ट के अंतर्गत मुख्यतया 3 भागों पर फोकस किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन स्तर सम्मिलित हैं। स्वास्थ्य के अंतर्गत खाद्य पदार्थों में पोषक पदार्थों का संग्रहण तथा बाल मृत्यु दर की मात्रा को आधार बनाया गया है। शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों की स्कूली शिक्षा की अवधि तथा स्कूली शिक्षा के दौरान उनकी उपस्थिति सम्मिलित है। जीवन स्तर के अंतर्गत खाना पकाने का ईंधन, साफ-सफाई, पीने का पानी, विद्युत की सुविधा, घर की सुविधा तथा अन्य सम्पत्तियां सम्मिलित की गई है। यानी कि यह स्पष्ट है इस रिपोर्ट के अंतर्गत विभिन्न आयामों पर गरीबी दर को अनुमानित किया गया है।</p>
<p>इस रिपोर्ट का तार्किक विश्लेषण करने के बाद कुछ निराशाजनक बातें भी सामने आई है खाद्य पदार्थों में सम्मिलित पोषक तत्व, खाना बनाने के लिए ईंधन, साफ-सफाई तथा घर की सुविधा के संबंध में पूरे विश्व में प्रभावित तकरीबन 4.55 करोड़ लोगों में से 3.44 करोड़ लोग भारत में रहते हैं। वही बांग्लादेश में यह मात्र 21 लाख ही है और पाकिस्तान में तो 19 लाख है। अर्थात पोषक तत्व, खाना बनाने का ईंधन, साफ-सफाई तथा घर की सुविधा के आधार पर अगर गरीबी रेखा को ही आधार बनाकर चला जाए तो विश्व के 75 गरीबी प्रतिशत भारत से जुड़ी हुई है। इस रिपोर्ट के द्वारा प्रस्तुत किए गए एक आंकड़े के अनुसार कुल गरीबी का 90 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या का भाग है शेष 10 प्रतिशत शहरों से हैं। एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि दक्षिण एशिया महाद्वीप के अंतर्गत भारत मात्र एक ऐसा मुल्क है, जहां पर उन परिवारों में बहुतायत में गरीबी पाई गई है, जहां महिला मुखिया के रूप में है। रिपोर्ट में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल 3.9 करोड़ गरीबों के घरों को महिलाओं के द्वारा ही संचालित किया जा रहा है। यह तथ्य अपने आप में इस बात को इंगित करता है कि हमारे मुल्क में महिलाओं की आर्थिक विकास में कम भागीदारी या कम आर्थिक स्वावलंबन देश के आर्थिक विकास में एक बाधा है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में यह बात भी स्पष्ट की गई है कि भारत में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत सबसे अधिक गरीबी का उन्मूलन गोवा के अंतर्गत हुआ है। वहीं दूसरी तरफ 2015-16 से लेकर अब तक गरीबी दर के आधार पर घोषित बीमारू राज्यों में अब पश्चिम बंगाल सम्मिलित नहीं है। बाकी बचे राज्य जिनमें बिहार, झारखंड, मेघालय, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, आसाम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ व राजस्थान आज भी उसी श्रेणी में सम्मिलित हैं। अगर इस बात पर गौर किया जाए कि पिछले 15 सालों में किस तरह से इस मुल्क में करीब 42 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर निकाला तो यकीनन इसका पहला श्रेय ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए बनाई गई योजना मनरेगा को जाता है। पिछले 15 वर्षों से सरकारों ने प्रत्येक वर्ष के वित्तीय बजट के अंतर्गत इस योजना पर अपने खर्च को निरंतर बढ़ाया है जिसका लाभ जमीनी स्तर पर भारत के गरीब तबके के व्यक्ति को हुआ है।        </p>
<p><strong>-डॉ. पी.एस. वोहरा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2022 10:50:25 +0530</pubDate>
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                <title>अलवर में एक और निर्भया  ये काम इंसानों का नहीं हैवानों का है, दरिंदगी की हदें पार, 15 साल की मूक-बधिर बालिका से गैंगरेप कर फेंका, सड़क पर खून से लथपथ कराहती रही</title>
                                    <description><![CDATA[महिला कांग्रेस - भाजपा ने भी बनाई जांच समिति ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88--%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0--15-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE--%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%A5%E0%A4%AA%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80/article-3967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/gangrape.jpg" alt=""></a><br /><p> अलवर। शहर में तिजारा फाटक पुलिया पर मंगलवार रात लहूलुहान हालत में मिली एक मूक-बधिर बालिका के साथ हुई दरिंदगी ने एक बार फिर दिल्ली के निर्भया कांड की तरह झकझोर कर रख दिया। अज्ञात दरिंदों ने मंगलवार की रात करीब 8 बजे बालिका के साथ हैवानियत के बाद उसे शहर की तिजारा फाटक पुलिया पर पटक दिया था। बालिका खून से लथपथ अर्द्ध बेहोशी की हालत में काफी देर सड़क पर पड़ी कराहती रही। </p>
<p><br />पुलिस ने बालिका को सरकारी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। पहचान के बाद बालिका के माता-पिता सामान्य अस्पताल पहुंचे। खून अधिक बह जाने के कारण चिकित्सकों ने बालिका को दो यूनिट ब्लड चढ़ाया। इसके बाद बालिका की गंभीर अवस्था को देखते हुए एक यूनिट एक्स्ट्रा ब्लड के साथ रात को ही जयपुर के लिए रैफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार दरिंदों द्वारा पीड़िता से रेप के बाद किसी नुकीली चीज से उसके प्राइवेट पार्ट पर बेरहमी से चोट पहुंचाई गई थी। इस कारण लगातार खून बह रहा था। अब बालिका का जयपुर के जेके लोन अस्पताल के आईसीयू सर्जिकल वार्ड में इलाज चल रहा है। पुलिस अब दरिंदों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हुई है। <br /><br /><strong>दोपहर से गायब थी बच्ची</strong><br />घटना के बाद पीड़िता की पहचान नहीं हुई थी। देर रात पीड़िता की पहचान हो पाई। जब परिजन अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर रात को ही प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। बच्ची दोपहर से घर से गायब थी। शाम तक घर नही पहुंचने पर परिजनों ने आसपास बच्ची को तलाश किया। लेकिन बच्ची नहीं मिली। जिसके बाद कंट्रोल रूम की सूचना से परिजनों को जानकारी मिल पाई।<br /><br /><strong>न चीख पाई और न ही कुछ बता पा रही</strong><br />जब बालिका से दरिंदगी हुई तो वह चीख भी नहीं पाई क्योंकि वह बोल नहीं पाती। अब भी कुछ कह नहीं पा रही है ना इशारे से कुछ समझा पा रही है।<br /><br /><strong>जयपुर से आईजी श्रोत्रीय पहुंचे, एसआईटी गठित </strong><br />मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर के आईजी संजय श्रोत्रीय अलवर पहुंचे। इसके अलावा जयपुर से स्पेशल  एफएसएल टीम भी अलवर पहुंची है। इधर अलवर पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम( एसआईटी) गठित की है। जयपुर रेंज के आईजी संजय श्रोत्रीय ने बताया कि मामला गंभीर है और गंभीरता को देखते हुए इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है।  सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही पुलिस : इसके अलावा शहर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला जा रहा है। यह भी जांच का विषय है कि बालिका अपने गांव से यहां तक कैसे पहुंची। सभी कड़ियों को जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश है कि इस मामले में ऐसा संज्ञान लिया जाए कि अपराधियों में टेरर पैदा हो।<br /><strong><br />पुलिस की आमजन से अपील</strong><br />एसपी ने बताया कि पुलिस की आमजन से अपील है कि यदि किसी व्यक्ति ने पीड़िता को कही आता-जाता देखा हो या पुलिया पर कौन लोग फेंककर गए थे। इस तरह की कोई भी जानकारी हो तो कृपया वह तुरन्त पुलिस को सूचित करें ताकि पुलिस द्वारा दरिंदों को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।<br /><br /><strong>आधा दर्जन मंत्री पहुंचे अस्पताल</strong><br />पीड़िता का हाल जानने के लिए प्रदेश के कई मंत्री जेकेलोन अस्पताल पहुंचे। चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा, महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश, मंत्री टीकाराम जूली, मंत्री शकुंतला रावत और बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने पीड़िता की स्थिति का जायजा लिया। वहीं पीड़िता से मिलने के लिए एडीजी सिविल राइट्स स्मिता श्रीवास्तव, डीसीपी ईस्ट प्रहलाद कृष्णिया, जयपुर रेंज आईजी संजय श्रोत्रिय सहित कई पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और परिजनों को आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। <br /><br /><strong>तत्काल साढ़े तीन लाख की मदद</strong><br />मूकबधिर नाबालिग पीड़िता को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री टीकाराम जूली ने सरकार की दो योजनाओं के माध्यम से तत्काल साढ़े तीन लाख रुपए की मदद देने के आदेश जारी किए है। पीड़ित प्रतिकर योजना के अंतर्गत पांच लाख की राशि जिसमें 2.50 लाख तुरन्त मिलेंगे और एक लाख रुपए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत मिलेंगे। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने कहा कि आयोग एक टीचर को नियुक्त करेगा जो बालिका के ठीक होने पर उससे संवाद कर उसकी बात समझेगा। उल्लेखनीय है कि अलवर के शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र में मंगलवार रात एक पुलिया पर यह बालिका गंभीर अवस्था में मिली थी। अज्ञात आरोपी दुष्कर्म के बाद इसे पुलिया पर फेंक गए। <br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />प्रदेश में तीन साल में दुष्कर्म</strong></span></span><br />प्रदेश में यदि दुष्कर्म के मामले की बात की जाए तो वर्ष 2019 में 5997, वर्ष 2020 में 5310 और 2021 में 6337 मामले दुष्कर्म के दर्ज हुए। <br /><br /><strong>चिकित्सा मंत्री ने दिए निर्देश : बालिका का पूरा इलाज होगा नि:शुल्क <br />आठ डॉक्टर्स ने ढाई घंटे तक की जटिल सर्जरी<br />ब्लीडिंग रोकने के बाद बनाया पेट के रास्ते से मल निकालने का रास्ता<br />मलद्वार में था काफी बड़ा और गहरा घाव, काफी मात्रा में बह गया खून, तीन यूनिट ब्लड चढ़ाया</strong><br /> जयपुर। अलवर में दुष्कर्म के बाद सड़क पर गंभीर हालत में मिली मूकबधिर नाबालिग 15 वर्षीय पीड़िता की बुधवार को जयपुर के जेके लोन अस्पताल में करीब ढाई घंटे तक आठ डॉक्टर्स की टीम ने जटिल सर्जरी की। इनमें पिडियाट्रिक सर्जन, गायनिक, प्लास्टिक, गेस्ट्रो सर्जन, एनेस्थिसिया सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर्स शामिल रहे। आॅपरेशन सफल रहा है और फिलहाल बालिका की हालत स्थिर बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि पीड़िता के साथ हद से ज्यादा दरिंदगी की गई है। अंदरूनी हिस्सों में और खासकर मलद्वार की जगह काफी बड़ा और गहरा घाव था, जिसमें से खून काफी मात्रा में बह रहा था। इसे देखकर प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता कि कोई रॉड या नुकीली वस्तु काम में ली गई है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती बालिका के अस्पताल में आते ही उसकी ब्लीडिंग को रोकना था और उसके बाद सर्जरी कर पेट से एक रास्ता बनाया गया, जिससे मल निकल सके और इंफेक्शन ना हो। इसके बाद घाव को रिपेयर किया गया। इस दौरान बालिका को तीन यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया। सर्जरी सफल रही है और फिलहाल उसको चिकित्सकों की गहन निगरानी में सर्जिकल आईसीयू में रखा गया है। पीड़िता को पूरी तरह से ठीक होने में अभी कई महीनों का समय लगेगा और भविष्य में उसके कुछ और ऑपरेशंस भी करने पड़ सकते हैं। </p>
<p>अस्पताल प्रशासन पीड़िता की पूरी देखरेख कर रहा है और बालिका खतरे से बाहर है। बालिका का संपूर्ण उपचार नि:शुल्क करने और परिजनों के रहने व खाने पीने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। -<strong>परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री</strong><br /><br /><strong>महिला कांग्रेस ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई</strong><br />मूक बधिर नाबालिग से बलात्कार मामले में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेहाना रियाज ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह कमेटी जेके लोन अस्पताल जाकर पीड़िता और परिजनों की हरसंभव मदद करेगी। कमेटी में अधिवक्ता और महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सारिका सिंह, अधिवक्ता और महिला कांग्रेस प्रदेश महामंत्री दीप्ति शर्मा, महामंत्री रूबी खान और जयपुर हेरिटेज महिला कांग्रेस अध्यक्ष रानी लुबना को शामिल किया गया है।     <br /><br /><strong>भाजपा ने भी बनाई जांच समिति </strong><br />भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर, सांसद जसकौर मीणा, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष अलका मूंदड़ा, विधायक रामलाल शर्मा की चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। सभी अलवर जाकर मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करेंगे। साथ ही पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करेंगे। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />एक साल में मासूमों के साथ दरिंदगी</strong></span></span><br />जयपुर के कोटखावदा में नौ वर्षीय<br />झुंझुनूं के पिलानी में पांच साल<br />नागौर के पांदुकलां में सात साल<br />सवाई माधोपुर में 16 साल<br />अजमेर के पुष्कर में 11 माह <br />झुंझुनूं के नवलगढ़ में ढाई साल की बच्ची से दुष्कर्म </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jan 2022 11:04:25 +0530</pubDate>
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                <title>दरिन्दगी : वृद्धा की हत्या, शव के साथ दुष्कर्म करने वाले को फांसी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने सात दिन में किया चालान पेश, 74 दिन में मिली सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80---%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%B6%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-2838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/justice1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। हनुमानगढ़ के पीलाबंगा थाना इलाके में गत 16 नवम्बर की रात को 60 वर्षीय वृद्ध महिला की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसके शव के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सुरेन्द्र कुमार माण्डिया को फांसी की सजा सुनाई गई है।</p>
<p><br /> हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक प्रीती जैन ने बताया कि पीलीबंगा इलाके में एक 19 वर्षीय युवक ने 60 वर्षीय विधवा महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया, जिसमें वह सफल नहीं हुआ तो उसने वृद्धा की गला घोंटकर हत्या कर दी। उसके बाद दुष्कर्म किया। इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस ने तुरंत जब्त पदार्थों का परीक्षण एफएसएल से करवाकर मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त सुरेन्द्र उर्फ मांडिया (19) निवासी दुलमाना को गिरफ्तार कर केवल सात दिन में उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया। प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर पैरवी कराई गई और सोमवार को मात्र 74 दिन में आरोपी को फांसी की सजा सुना दी गई। <br /> <br /> <strong>सैंपलों की जांच कर 7 दिन में सौंपी रिपोर्ट </strong><br /> हनुमानगढ़ में वृद्धा की हत्या कर दुष्कर्म के मामले में एसपी की ओर से तुंरत रिपोर्ट मांगी गई थी। हमारी क्यूआरटी टीम ने तुरंत सभी सैम्पलों की जांच की और सात दिन में रिपोर्ट सौंप दी। -<strong>डॉ. अजय कुमार शर्मा, एफएसएल निदेशक राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 12:23:18 +0530</pubDate>
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