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                <title>punishment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कुलदीप सिंह सेंगर को करारा झटका, शीर्ष अदालत ने उम्रकैद की सजा निलंबित करने के हाईकोर्ट के आदेश को पलटा</title>
                                    <description><![CDATA[शीर्ष अदालत ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन पर रोक लगा दी है। जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले पर दो महीने में दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। सीबीआई की अपील के बाद सेंगर की उम्रकैद बरकरार रहने की संभावना बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/dealing-a-blow-to-kuldeep-singh-sengar-the-apex-court/article-153901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kuldeep.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। साल 2017 के चर्चित उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट इस प्रकरण पर दो महीने के भीतर दोबारा विचार करे।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट नया फैसला लेते समय शीर्ष अदालत के आदेश से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं का आकलन करे। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सजा निलंबन पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 12:58:29 +0530</pubDate>
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                <title>न्याय संहिता के केंद्र में दंड की जगह न्याय, पुराने कानूनों की वजह से बंद विचारधीन कैदियों को छोड़ा : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गहन विचार-विमर्श और मंथन के बाद भारतीय न्याय संहिता अपने वर्तमान स्वरूप में सामने आयी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/justice-instead-of-punishment-is-at-the-center-of-judicial/article-96578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गहन विचार-विमर्श और मंथन के बाद भारतीय न्याय संहिता अपने वर्तमान स्वरूप में सामने आयी है। इसके लागू होने के बाद जेलों से ऐसे हजारों विचारधीन कैदियों को छोड़ा गया है, जो पुराने कानूनों की वजह से जेलों में बंद थे। प्रधानमंत्री यहां विशेष रूप से अयोजित एक कार्यक्रम 3 परिवर्तनकारी नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सफल कार्यान्वयन को राष्ट्र को समर्पित कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:left;">मोदी ने कहा कि नए कानून दंड के लिए नहीं, बल्कि न्याय के उद्देश्य से बनाए गए है और 'भारतीय न्याय संहिता इसके लागू होने के बाद जेलों से ऐसे हजारों विचारधीन कैदियों  को छोड़ा गया है, जो पुराने कानूनों की वजह से जेलों में बंद थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सात दशकों में न्याय व्यवस्था की चुनौतियों की  समीक्षा, व्यापक विचार-विमर्श के बाद भारतीय न्याय संहिता तैयार की गई है। हर कानून को व्यावहारिक दृष्टिकोण से परखा गया है। उन्होंने इन कानूनों के लिए उच्चतम न्यायालय और देश भर के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों का आभार भी प्रकट किया।</p>
<p>मोदी ने तीनों कानूनों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि 'देश के कानून उसके नागरिकों के लिए है। इसलिए कानूनी प्रक्रिया भी नागरिक-केंद्रित होनी चाहिए। हालाँकि, पुरानी व्यवस्था में,  प्रक्रिया ही सजा बन गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक स्वस्थ समाज में कानून सुरक्षा का साधन होना चाहिए, लेकिन आईपीसी केवल नियंत्रण के साधन के रूप में भय पर निर्भर थी और यह अच्छा है कि अब समय बदल गया है।</p>
<p>मोदी ने कहा कि पुराने कानूनों में दिव्यांगों के लिए ऐसे-ऐसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था, जिसे कोई भी सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। हमने ही पहले इस वर्ग को दिव्यांग कहना शुरू किया, उन्हें कमजोर महसूस कराने वाले शब्दों से छुटकारा दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने 2016 में हमने दिव्यांगजनों के अधिकार का कानून लागू करवाया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश औपनिवेशक युग की सोच से बाहर निकले और अपने सामर्थ्य का प्रयोग राष्ट्र निर्माण में लगाए। इसके लिए राष्ट्रीय चिंतन आवश्यक था। हमारी न्याय संहिता 'जनता की जनता, जनता द्वारा और जनता के लिए के उस भावना को सशक्त कर रही है, जो लोकतंत्र का आधार होती है। भारतीय न्याय संहिता का मूल मंत्र है- ''नागरिक सबसे पहले ये कानून नागरिक अधिकारों के संरक्षणकर्ता बन रहे हैं, न्याय में सरलता का आधार बन रहे हैं। </p>
<p>पहले प्राथमिकी लिखवाना कितना मुश्किल होता था, लेकिन अब 'जीरो एफआईआर को भी कानूनी रूप दे दिया गया है। सरकार का मानना है कि इन नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य भारत की न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कुशल और समकालीन समाज की आवश्यकताओं के अनुकूल बनाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 16:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चूरू में दोपहर 12 से तीन बजे के बीच मालवाहक पशुओं को धूप में ले जाने पर हो सकती है सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पशु कु्र्रता निवारण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-churu-there-can-be-punishment-for-taking-cargo-animals/article-77026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आग उगलती सूर्य की किरणों के बीच दोपहर 12 से तीन बजे के बीच चूरू में भारवाहक पशु ऊंट, घोड़ा, खच्चर, बैल, पाड़ा पर माल रखकर ले जाते पाए जाने पर  25 हजार रुपए जुर्माना और तीन माह की सजा हो सकती है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इण्डिया के आदेशों को लागू करने की पहल करते हुए चूरू जिला कलेक्टर पुष्पा सत्यानी ने आदेश जारी किए  हैं। इसके तहत उनके मालिकों के खिलाफ पशु क्रुरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आदेश में कहा है कि भारवाहक पशु ऊंट, घोड़ा, खच्चर, बैल, पाड़ा और घोड़ा सहित अन्य जानवरों को दोपहर 12 से तीन बजे के बीच तेज धूप में सड़क पर चलाकर ले जाने पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम- 1960 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस सन्दर्भ में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. भवानी सिंह से अनेक बार सम्पर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। <br /><strong>पशु क्रूरता अधिनियम के तहत क्या है सजा का प्रावधान</strong><br />25 हजार रुपए का जुर्माना और तीन माह की सजा का प्रावधान है। </p>
<p><strong>एनिमल वेलफेयर बोर्ड के निर्देशों की हुई पालना</strong><br />एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इण्डिया गर्मी में मालवाहक जानवरों को धूप से बचाने के लिए प्रतिवर्ष सभी राज्य सरकारों को गाइड लाइन जारी करता है, जिसके तहत चूरू जिला प्रशासन ने आदेश जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार अभी तक सिर्फ चूरू जिला प्रशासन ने ही आदेश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 10:28:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आदर्श आचार संहिता: सरकारी कर्मचारी राजनीतिक पार्टी की गतिविधियों में शामिल हुए तो मिलेगी ये सजा</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा आम चुनाव में सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर चुनाव आयोग ने प्रतिबन्ध लगा दिया है। अगर शामिल हुए तो 6 माह तक की जेल या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/model-code-of-conduct-assembly-elections-2023-government-employees-will-get-this-punishment-if-they-participate-in-political-party-activities/article-59106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/hammer-1707735__340.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा आम चुनाव में सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर चुनाव आयोग ने प्रतिबन्ध लगा दिया है। अगर शामिल हुए तो 6 माह तक की जेल या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जाएगा।</p>
<p>भारत निर्वाचन आयोग के परिपत्र क्रमांक 62/84 दिनांक 6 11.1984 की ओर ध्यानाकर्षित किया जाकर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के कर्मचारियों से यह अपेक्षा की गई है कि वे चुनाव के समय निष्पक्ष रहें एवं किसी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेंवे चुनाव की घोषणा के बाद आयोजित होने वाली राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों की आम सभाओं में सरकारी कर्मचारियों को भाग लेने पर भी प्रतिबन्ध है। इस संबंध में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 129 तथा धारा 134 क के प्रावधान भी अवलोकनीय हैं। धारा 129 के अनुसार कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे निर्वाचनों के संचालन या प्रबन्धन से संबंधित किसी कर्तव्य पर नियुक्त किया जाता है तो वह व्यक्ति/कार्मिक अपना मत देने के अलावा ऐसा कोई काम नहीं करेगा जो किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन की संभाव्यताओं को अग्रसर करता हो। इसका उल्लंघन निर्वाचन अपराध माना गया है जिसमें 6 माह तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।</p>
<p>इसी प्रकार धारा 134 क के प्रावधानों के अनुसार अगर सरकार की सेवा में रहते हुए कोई व्यक्ति निर्वाचन में किसी अभ्यर्थी के निर्वाचन अभिकर्ता या मतदान अभिकर्ता या गणन अभिकर्ता के रूप में काम करता है तो उसे 3 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।</p>
<p>उपरोक्त प्रावधानों के अतिरिक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाये गये आचरण नियमों में भी उनके किसी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबन्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 19:45:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाप और पुण्य के फेर में जेल में अटके चार करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[अब डीजी दिखा रहे हैं संवेदशीलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/four-crores-stuck-in-jail-due-to-sin-and-virtue/article-16182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/kota-jail.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की जेलों में पाप और पुण्य के फेर में करीब चार करोड़ अटके पड़े हैं।  इसका कारण जेलों में बंद कैदियों की पाप की कमाई का पीड़ित हिस्सा बनने को तैयार नहीं होना है। इस क्लेम राशि को पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए अब डीजी जेल प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p><br /> जेलों में कैदियों को जो मजदूरी मिलती है उसका 25 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित या वारिस को दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार इस हिस्से को लेने नहीं पहुंच रहे हैं। जेल प्रशासन के पास करीब चार करोड़ जमा हो गए है। जेल प्रशासन को इन पैसों को बांटने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अपराध के बाद कोर्ट सश्रम कारावास की सजा सुनाते हैं। सजा के दौरान जेल में श्रम करने पर कैदी को सरकार पारिश्रमिक का भुगतान करती है। कैदी की मेहनत की कमाई में 25 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित के परिजन को देने का प्रावधान है। जेल में अकुशल श्रमिकों को 156 रुपए तथा कुशल श्रमिकों को 180 रुपए प्रतिदिन मजदूरी दी रही है। इस हिसाब से एक कैदी से 1170 से लेकर 1350 रुपए महीने जमा हो रहे हैं। जेल प्रशासन की मुसीबत है कि इतनी बड़ी राशि को कोई क्लेम करने नहीं आ रहा है।</p>
<p><br /><strong>ये हैं वारिस, जिनकी तलाश:</strong><br /> जेल में जमा इस राशि पर पीड़ित के पति या पत्नी और बच्चें दावा कर सकते हैं या फिर मां-बाप नहीं होने पर बच्चों को पाल रहा दादा हकदार होता है। अभी तक इन हकदारों की पहचान के लिए जेल प्रशासन सम्बंधित थानों को वारिसों की पहचान करने के लिए लिख देता था। ऐसे में कुछ वारिस राशि क्लेम करने पहुंचे भी हैं।</p>
<p><br /><strong>अब डीजी दिखा रहे हैं संवेदनशीलता:</strong><br /> अब इस मामले में जेल के महानिदेशक भूपेन्द्र दक संवदेशीलता दिखा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए है कि सजा के समय वारंट जारी होने पर जेल अधिकारी कोर्ट से ही आग्रह करेंगे कि पीड़ित के वारिस का नाम तय कर दें, जिससे पारिश्रमिक देने में आसानी हो सके। दक ने वारिसों की पहचान के लिए पुलिस थानों के अलावा सम्बंधित कैदी और पीड़ित की सूची जेलों की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें कैदी के नाम, पुलिस थाना एफआईआर नम्बर और दी जाने वाली कुल राशि की जानकारी अपलोड की जाएगी। ऐसे में पीड़ित पक्ष या उसके वारिस जेल विभाग की साइट खोलकर सर्च कर सकेंगे।</p>
<p><br /><strong>इनका कहना है:-</strong><br />पीड़ितों को क्लेम राशि का भुगतान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनसे संपर्क साधा जा रहा है। इसमें थानों की मदद भी ली जा रही है। बैंक खातों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है, ताकि उनमें राशि जमा कराई जा सके। - <strong>भूपेन्द्र डक, पुलिस महानिदेशक (जेल) राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 19:03:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिना योग्यता थर्ड ग्रेड टीचर पद  नियुक्ति मामला-  तत्कालीन शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक ,वरिष्ठ लिपिक और लाभार्थी को चार चार साल की कठोर सजा </title>
                                    <description><![CDATA[बिना योग्यता के  थर्ड ग्रेड टीचर  के पद पर  2 अपात्र  लाभार्थियों को  लाभ पहुंचाने के  मामले में  एसीबी कोर्ट ने गुरुवार को  तत्कालीन  जिला शिक्षा अधिकारी एवं  वरिष्ठ लिपिक  और एक लाभार्थी को  दोषी मानते हुए  चार चार साल की  कठोर सजा सुनाई है ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-then-education-officer--elementary--senior-clerk-and-beneficiary-were-sentenced-to-four-years-of-harsh-punishment/article-8314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/education-officer,-elementary,-punishment-kota-21.4.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । बिना योग्यता के  थर्ड ग्रेड टीचर  के पद पर  2 अपात्र  लाभार्थियों को  लाभ पहुंचाने के  मामले में  एसीबी कोर्ट ने गुरुवार को  तत्कालीन  जिला शिक्षा अधिकारी एवं  वरिष्ठ लिपिक  और एक लाभार्थी को  दोषी मानते हुए  चार चार साल की  कठोर सजा सुनाई है । न्यायाधीश ने आरोपियों को 50-50 हजार का अर्थदंड भी दिया है । इस मामले में  प्रारंभिक शिक्षा विभाग बारां द्वारा थर्ड ग्रेड टीचर के पद पर 2 अपात्र लाभार्थियों को बिना योग्यता के नियुक्ति देना और राज्य सरकार को राज्य कोष में हानि पहुंचाना सामने आया है ।इस पर न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक रमेश चंद शर्मा, वरिष्ठ लिपिक ओम प्रकाश गौतम व  लाभार्थी रविकांत मेहता को 4-4 साल का कठोर कारावास व 50 50 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। एक लाभार्थी विनोद कुमार भार्गव की मौत हो जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई ड्राप कर दी।<br /><br />सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने बताया  कि साल 1998 में शिक्षा विभाग प्रारंभिक शिक्षा में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर विज्ञप्ति जारी हुई थी। विज्ञप्ति में शैक्षणिक योग्यताओं के साथ-साथ एसटीसी भी योग्यता निर्धारित थी।  दो अभ्यर्थी रविकांत मेहता, विनोद कुमार भार्गव के द्वारा 2 वर्षीय पाठ्यक्रम डिप्लोमा इन एजुकेशन का प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान शिवपुरी (मध्यप्रदेश) से साल 1996 में पास किया गया था। जबकि इस संस्थान को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम 1993 के अनुसार मान्यता नहीं थी। अंतिम वरीयता में शामिल नहीं करने पर दोनों अभ्यर्थियों ने बारां कोर्ट व  राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट में  याचिका खारिज होने के बाद भी आरोपी रमेश चंद शर्मा (जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक),  वरिष्ठ लिपिक ओम प्रकाश गौतम ने  बिना मुख्यालय की अनुमति लिए, न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर, तथ्य छिपाकर, मिलीभगत कर रविकांत मेहता, विनोद कुमार भार्गव को अनुचित अनुचित लाभ प्रदान करने के लिए 10 साल बाद 30 जून 2009 को दोबारा नियुक्ति दी थी। जिससे राज्य सरकार को 4 लाख 37 हजार 396 का सदोष हानि की थी।<br /><br />इस मामले को लेकर साल 2010 में परिवादी दुगार्शंकर पंचोली नामक व्यक्ति ने एसीबी चौकी बारां  में परिवाद पेश किया था। जिसकी जांच में आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित पाया गया। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान  अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाहों के बयान कराए गए थे<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 17:09:46 +0530</pubDate>
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                <title>आबादी क्षेत्र में आने की मिली सजा, ‘लेपर्ड सुल्तान’ का तबादला</title>
                                    <description><![CDATA[लेपर्ड को देर रात झालाना वन क्षेत्र से दूर करते हुए जमवारागढ़ सेंचुरी में छोड़ दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%86%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE--%E2%80%98%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-3363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/23.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मालवीय नगर के आबादी क्षेत्र में आए लेपर्ड को रेस्क्यू कर देर रात जमवारागढ़ सेंचुरी एरिया में छोड़े जाने की बात सामने आ रही है। झालाना लेपर्ड रिजर्व में सबसे अच्छी और शानदार साइटिंग देने वाले लेपर्ड सुल्तान को तबादले के रूप में सजा मिली है। विभाग की इस कार्यप्रणाली पर कई वन्यजीव प्रेमियों में रोष है। उनका कहना है कि एक ओर तो विभाग लेपर्ड प्रोजेक्ट और कंजर्वेशन की बात करता है, वहीं दूसरी ओर लेपर्ड रिजर्व के एनिमल को दूसरे वन क्षेत्र में छोड़ रहे हैं।</p>
<p><br /> वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लेपर्ड को देर रात झालाना वन क्षेत्र से दूर करते हुए जमवारागढ़ सेंचुरी में छोड़ दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि लेपर्ड को आबादी क्षेत्र में घुसने की सजा के तौर पर वहां छोड़ा है। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। <br /> <strong><br /> एक मकान से दूसरे मकान की छत पर लगाता रहा छलांग</strong><br /> मालवीय नगर के सेक्टर 5 और 7 में लेपर्ड की दहशत का ऐसा माहौल देखने को मिला। वहीं लेपर्ड भी एक मकान की छत से दूसरे मकान की छत पर छलांग लगाता रहा। जब तक लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज नहीं किया, तब लोगों में घबराहट बनी रही। वन विभाग ने ट्रेंकुलाइज कर एक मकान की खिड़की तोड़कर बेहोश लेपर्ड को बाहर निकाला। <br /> <br /> <strong>पेंटर दौड़ता हुआ आया, सदस्य कमरे में हुए कैद</strong><br /> मकान नम्बर 7/225 के निवासी हन्नी कपूर ने बताया कि घर में पेंटर काम कर रहा था, उसे खिड़की के बाहर किसी के गुरराने की आवाज आई। उसने देखा तो बघेरा बैठा था तो वह चिल्लाकर बाहर की ओर भागा। घर के सभी सदस्य भी कमरों में कैद हो गए। इसके बाद वन विभाग की टीम ने आकर लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज किया, तब सभी ने राहत की सांस ली। <br /> <br /> <strong>मैंने सोचा डॉगी आया है... </strong><br /> 7/225 की निवासी सरोज कपूर ने सुबह 8.45 बजे सबसे पहले लेपर्ड को छत पर छलांग लगाते हुए देखा था, लेकिन मैं उसे डॉगी समझ बैठी। आसपास के लोग चिल्लाये की कॉलोनी में लेपर्ड आया है। ये सुनने के बाद मेरे हाथ-पांव फूल गए और घबराकर घर के अंदर भाग गई।</p>
<p><br /> <strong>पता चला तो घर के अंदर भागे</strong><br /> 7/224 के निवासी डीपी. मिश्रा ने बताया कि सुबह नौ बजे लेपर्ड-लेपर्ड चिल्लाने की आवाज सुनी। सामने के घरों में लोगों ने लेपर्ड की सूचना दी। घर के सभी सदस्य मकान के अंदर की ओर भागे। लेपर्ड छिपने के लिए दो मकानों के बीच गेप में घुस गया, जहां से उसे बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे वहीं ट्रेंकुलाइज किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Dec 2021 12:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>दरिन्दगी : वृद्धा की हत्या, शव के साथ दुष्कर्म करने वाले को फांसी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने सात दिन में किया चालान पेश, 74 दिन में मिली सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80---%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%B6%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-2838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/justice1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। हनुमानगढ़ के पीलाबंगा थाना इलाके में गत 16 नवम्बर की रात को 60 वर्षीय वृद्ध महिला की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसके शव के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सुरेन्द्र कुमार माण्डिया को फांसी की सजा सुनाई गई है।</p>
<p><br /> हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक प्रीती जैन ने बताया कि पीलीबंगा इलाके में एक 19 वर्षीय युवक ने 60 वर्षीय विधवा महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया, जिसमें वह सफल नहीं हुआ तो उसने वृद्धा की गला घोंटकर हत्या कर दी। उसके बाद दुष्कर्म किया। इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस ने तुरंत जब्त पदार्थों का परीक्षण एफएसएल से करवाकर मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त सुरेन्द्र उर्फ मांडिया (19) निवासी दुलमाना को गिरफ्तार कर केवल सात दिन में उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया। प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर पैरवी कराई गई और सोमवार को मात्र 74 दिन में आरोपी को फांसी की सजा सुना दी गई। <br /> <br /> <strong>सैंपलों की जांच कर 7 दिन में सौंपी रिपोर्ट </strong><br /> हनुमानगढ़ में वृद्धा की हत्या कर दुष्कर्म के मामले में एसपी की ओर से तुंरत रिपोर्ट मांगी गई थी। हमारी क्यूआरटी टीम ने तुरंत सभी सैम्पलों की जांच की और सात दिन में रिपोर्ट सौंप दी। -<strong>डॉ. अजय कुमार शर्मा, एफएसएल निदेशक राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 12:23:18 +0530</pubDate>
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