<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/addiction/tag-9938" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>addiction - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/9938/rss</link>
                <description>addiction RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विश्व तंबाकू निषेध दिवस आज: विशेषज्ञों ने युवाओं में तंबाकू के बढ़ते सेवन पर जताई चिंता ; राजस्थान में तंबाकू सेवन से हर दिन 211 लोगों की मौत, ‘वेपिंग’ के कारण भी युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा गंभीर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में तंबाकू जनित रोगों से प्रतिदिन 211 और सालाना 77 हजार लोगों की मौत हो रही है। सर्वे के अनुसार, प्रदेश में 24.7% लोग तंबाकू के आदी हैं, जबकि रोज 300 से अधिक बच्चे इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ते वेपिंग और निकोटीन निर्भरता पर गंभीर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-no-tobacco-day-today-experts-expressed-concern-over-the/article-155537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tabacco-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 211 लोग तंबाकू जनित रोगों के कारण असामयिक मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, जबकि वर्षभर में यह संख्या करीब 77 हजार तक पहुंच जाती है। वैश्विक स्तर पर हर साल 70 लाख से अधिक और भारत में लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन 300 से अधिक बच्चे और देशभर में करीब 5500 बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर रहे हैं। राजस्थान में वर्तमान समय में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। इनमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं, जबकि 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।</p>
<p><strong>युवाओं में बढ़ रहा वेपिंग का चलन</strong></p>
<p>तंबाकू सेवन के साथ ही युवाओं और किशोरों में वेपिंग यानी ई-सिगरेट या वेप पेन जैसे उपकरणों के माध्यम से धूम्रपान करना काफी प्रचलन में है। एसएमएस अस्पताल जयपुर के ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि तंबाकू कंपनियां इन उत्पादों को फैशन और आधुनिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे युवा प्रभावित होकर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। ई-सिगरेट जैसे आधुनिक निकोटीन उत्पादों के खतरों के प्रति भी युवाओं को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है।  </p>
<p><strong>इसलिए खतरनाक है तंबाकू</strong></p>
<p>डॉ. सिंघल ने बताया कि तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गले और पेट के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, सीओपीडी, एम्फीसेमा और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बनता है।</p>
<p><strong>ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम पर पड़ता है गंभीर असर</strong></p>
<p>भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जयपुर की साइको-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रियसी सुरोलिया ने बताया कि निकोटिन धीरे-धीरे मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम पर प्रभाव डालता है और निर्भरता पैदा करता है। तंबाकू के सेवन पर हजारों जहरीले रसायन निकलते हैं, जिनमें टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व शामिल हैं जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी धूम्रपान छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें नियंत्रित मात्रा में फार्मास्यूटिकल-ग्रेड निकोटिन दिया जाता है, लेकिन सिगरेट या बीड़ी में मौजूद हानिकारक तत्व इसमें नहीं होते। धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-no-tobacco-day-today-experts-expressed-concern-over-the/article-155537</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-no-tobacco-day-today-experts-expressed-concern-over-the/article-155537</guid>
                <pubDate>Sun, 31 May 2026 10:22:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/tabacco-day.png"                         length="482249"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिचर्चा : नशा मुक्ति के लिए जरूरी है सामूहिक प्रयासों की चोट, नशे की हो रही होम डिलिवरी </title>
                                    <description><![CDATA[ समाज के विभिन्न मुद्दों पर आयोजित परिचर्चा की श्रंखला में शुक्रवार को ड्रग्स के समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर दैनिक नवज्योति कार्यालय में मासिक परिचर्चा का आयोजन किया गया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/discussion--collective-efforts-are-necessary-for-de-addiction/article-105137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer90.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। समाज के विभिन्न मुद्दों पर आयोजित परिचर्चा की श्रंखला में शुक्रवार को ड्रग्स के समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर दैनिक नवज्योति कार्यालय में मासिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में ड्रग्स के उत्पादन, सप्लाई, डिमांड, तस्करी, मादक पदार्थों की अवेलिबिलिटी, रोकने के इंतजाम के साथ समाज पर पड़ रहे प्रभाव पर चर्चा की गई। परिचर्चा का विषय था ड्रग्स आर लाइक टरमाइट्स विच ईट्स द बॉडी था। इस परिचर्चा में सेन्ट्र ब्यूरो आॅफ नारकोटिक्स के डिप्टी कमिश्नर, एडिश्नल एपपी, विभिन्न एनजीओ के सदस्य,साइकेटिस्ट, समाज शास्त्री, प्रोफेसर ,ब्रह्मा कुमारी की बहनें, किसान नेता सहित कुछ ऐसे लोगों को भी आमंत्रित किया गया था जो स्वयं ड्रग्स के दलदल में फंस चुके थे। परिचर्चा के दौरान सभी विषय विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी । प्रस्तुत हैं उसके अंश </p>
<p><strong>नशे की हो रही होम डिलिवरी </strong><br />कोटा शहर को यदि नशे से मुक्त कराना है तो रुट्स को पहचानना और उसे तोड़ना होगा, जो प्रतिबंधित नशा सामग्री है, वह ब्लैक से बिक रही है। ऐसे में सप्लाई चैन को खत्म करना जरूरी है। हालात यह है, नाबालिगों से न केवल नशा बिकवाया जा रहा है बल्कि होम डिलिवरी भी करवाई जा रही है। ऐसे में जनजागरण को साथ लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। <br /><strong>- कुलदीप अडसेला,सचिव परिवर्तन सेवा संस्थान नशा मुक्ति केंद्र कुन्हाड़ी</strong></p>
<p><strong>5 साल के अथक प्रयास से छूटा नशा</strong><br />सन 1984-85 में तिनका-तिनका जोड़कर मकान बनाया था।  वर्ष 1986  में बाढ़ आई तो मकान ढह गया। जिससे मैं तनाव में रहने लगा। काम-घंधे भी छूट गए। इसी दौरान साथियों के साथ पहली बार स्मैक पी तो कुछ समय के लिए अपने गम भूल गया। फिर स्मैक की लत लग गई। फिर इंजेक्शन लगाने लगा। लेकिन यह नशा महंगा होने के कारण इंजेक्शन वाला नशा करने लगा। बाद में कुछ लोगों की मदद से नशा मुक्ति केंद्र पहुंचा, जहां पांच साल इलाज चला और अथक प्रयासों से आज नशे की गिरफ्त से आजाद हो सका।<br /><strong>- सत्यनारायण, नशा पीड़ित</strong></p>
<p><strong>नशे का कारोबार जड़ से खत्म करने की जरूरत</strong><br />गांजा कॉमन हो चुका है, कोई कॉलेज ऐसा नहीं बचा, जहां गांजे का सेवन नहीं होता हो। अफीम के बाद स्मैक का नशा तेजी से बढ़ रहा है। हालात यह है कि कोई स्मैक के नशे में पड़ जाता है तो फिर उसे छोड़ नहीं पाता। इस समय सबसे ज्यादा नशे का रेशो स्मैक का आ रहा है। घर-परिवार बर्बाद हो जाता है। नशे की ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है, जिसे खासकर किशोरावस्था से युवाअवस्था तक नशे की गिरफ्त में हैं, जिन्हें बचाने के लिए नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने की जरूरत है।  <br /><strong>- रजनीश मेहरा, ड्रग्स डिएडिक्शन साइक्लोजिस्ट</strong></p>
<p><strong>नशा मुक्त  कोटा अगला लक्ष्य</strong><br />चित्तौड़ व नीमच के अलावा अब कोटा में नॉर्थ ईस्ट से भी  बड़ी मात्रा में नशा कोटा में आ रहा है। इसमें सभी अधिक घातक एमडी अर्थात सिंथेटिक नशा है। नारकोटिक्स विभाग ने आॅपरेशन युवा रक्षा नशा मुक्त नाम से अभियान शुरु किया है। इस अभियान के तहत विभाग का लक्ष्य है कि कोटा को नशा मुक्त बनाया जाए। विभाग द्वारा नशा उत्पादन से सप्लायर व उपभोग करने वालों तक की चैन को तोड़ने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। कुछ संस्थाएं नशा छुड़ाने के नाम पर अवैध रूप से दवाओं का सेवन करवा रहे हैं। जबकि वह दवा भी बिना अधिकृत डॉक्टर की सलाह से ही दी जा सकती है। सप्लाई के साथ ही नशे की डिमांड को भी कम करने की जरूरत है। <br /><strong>- नरेश बुंदेल, उप नारकोटिक्स आयुक्त केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>प्रोडक्शन व सप्लाई चैन तोड़ने की जरूरत </strong><br />नशे का कारोबार को जड़ से उखाड़ने फैंकने के लिए प्रोडक्शन, सप्लाई चैन और इनकम सोर्स को खत्म करने की जरूरत है। नशा प्रोडक्शन केंद्र  झालावाड़, चित्तौड़ व मध्यप्रदेश के कुछ जगहों पर है। गांजा हिमाचल व उड़िसा से आ रहा है। ऐसे में हमें नशे का प्रोडक्शन खत्म करना होगा। इसी तरह नशा जिन रुट्स से आता है, वहां बड़ा सिंडिकेट काम करता है। माल स्टोर करने वाला, सप्लाई करने वाला, बेचने वाला सब अलग-अलग होते हैं, यही सप्लाई चैन है, जिसे नष्ट करने की जरूरत है। साथ ही पैसे से संबंधित जो क्राइम है, यदि उसे अन इकोनोमिक बना दिया जाए तो नशे का कारोबार खत्म किया जा सकता है।  हमने पिछले साल वर्ष 2024 में 156 मुकदमें दर्ज किए हैं, जबकि वर्ष 2025 की जनवरी-फरवरी के डेढ़ माह में ही 66 केस दर्ज किए हैं। वहीं, पहले 223 लोगों को गिरफ्तार किया और अब 74 लोगों को पकड़ चुके हैं। इसके अलावा गाड़ियां भी जब्त की है।  <br /><strong>- दिलीप कुमार सैनी, एडिशन एसपी कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>नशा करना स्टेटस सिम्बल बन गया</strong><br />नशा करने के कई कारण हो सकते है। सबसे बडणा कारण अकेलापन होता है। शुरुआत में नशा अच्छा लग सकता है लेकिन यह खतरनाक होता है। नशा कराने वाले पहले इसे फ्री में देते हैं बाद में इसकी लत पड़ जाने पर व्यक्ति खुद उसे तलाशता हुआ चला जाता है। कई लोगों के लिए नशा स्टेटस सिम्बल बन गया है। जबकि नशे के कारोबार को रोकने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।  <br /><strong>- डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong> कॉलेज-विवि में बच्चों के ऊपर नियुक्त हो मेंटर</strong></p>
<p>नशे की दुनिया में प्रवेश करने वाले को उचित मार्गदर्शन एवं उनके प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार का अभाव मुख्य रूप से जिम्मेदार है। इसके लिए परिवार का खुशनुमा माहौल के साथ विद्यालयों, महाविद्यालयों  एवं विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के समूह बनाकर उनके लिए शिक्षकों को मेंटर नियुक्त किया जाए ताकि निरंतर संवाद द्वारा उचित मार्गदर्शन से उन्हें सही रास्ता दिखाया जा सके। ड्रग्स की तस्करी और अवैध व्यापार पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। नशीली दवाओं की बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए ।<br /><strong>- डॉ.मीनू माहेश्वरी, विभागाध्यक्ष कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>नशे की जरूरत क्यों, समाधान खोजने की जरूरत</strong><br />युवाओं को नशे की जरूरत क्यों पड़ रही है, वह नशे की हालत में क्यों आया है,इसके कारणों को खोज समाधान निकालने की जरूरत है। व्यक्ति जन्म से नशे में नहीं आता, उसे हालात व परिस्थितियां उसे नशे में लाते हैं। जब हमने नशे में गिरफ्त लोगों से बात की तो सामने आया कि अपने गम भुलाने को वह नशे में खुशी ढूंढ रहे हैं। ऐसे में अपने आसपास का माहौल खुशनुमा बनाए। कोई व्यक्ति नशा करे तो उसे अपने बच्चों की तरफ देखना चाहिए, उनका ख्याल आएगा तो वह नशे से दूर होगा। <br /><strong>- बीके आरती, बह्माकुमारी </strong></p>
<p><strong>घर के पुरूष सदस्यों से डरने लगी महिलाएं</strong><br />कोटा की 97 कच्ची बस्तियों में 1.68 लाख परिवार रहते हैं, जब इन बस्तियों में महिलाओं के बीच जाती हूं तो पहले तो वह अपनी बात नहीं बताती थी लेकिन अब नशे के बढ़ते प्रभाव के कारण इतना चैंजेज आया कि जिन घरों में दो या तीन बेटियां हैं, उन्हें महिलाएं अकेली छोड़कर नहीं जाती। काम पर जाती हैं तो बेटियों को साथ लेकर जाती है। हालात यह हो गए कि घर में रहने वाले पिता, भाई, पति सहित अन्य पुरूष सदस्यों से महिलाओं को डर लगने लगा है, जो बड़ा चिंता का विषय है। पहले पुरूष नशा करते थे, अब महिलाएं भी सीख गई, यह क्यों हुआ, इसकी तह में जाकर समाधान खोजने की जरूरत है।  <br /><strong>- हेमलता गांधी,सोशल डवलपमेंट मैनेजर  नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>देखादेखी से नशे की चंगुल में फंस रहे किशोर</strong><br />नशे की समस्या किशोरावस्था से शुरू होती है। किशोर जब अपने घर-परिवार में पिता या अन्य सदस्य को सिगरेट, शराब पीते देखते हैं तो उनमें जिज्ञासा जाग उठती है कि इसे पीने से क्या होता है। जब वह घर से बाहर दोस्तों के बीच पहुंचता है तो वह सिगरेट, शराब या अन्य नशा करता है और शोक पूरा करते करते कब नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, उन्हें भी पता नहीं चल पाता। शिक्षण संस्थाओं में गांजा, सिगरेट पीना आम बात हो गई। क्योंकि, यह आसानी से मिल जाता है। <br /><strong>- दीपक सिंह, सचिव, सुशीला देवी चेरिटेबल सोसायटी</strong></p>
<p><strong>बचपन में ही नशे की नुकसान बताने की जरूरत</strong><br />जन्म लेने से दस साल तक के बच्चे के दिमाग में जो बात डाली जाएगी उसका उसके पूरे जीवन पर असर पड़ता है। यदि इसी उम्र में  उसकी मां यदि समझाएगी तो बच्चा जिंदगी में कभीउस तरफ नहीं जाएगा। जबकि नशा करने वालों को सुधारना बहुत मुश्किल है। बरसों से प्रयास करने के बाद भी उतनी सफलता नहीं मिली जितनी अपेक्षा की जा रही थी। जितनों का नशा छुड़ाया जाता है उससे अधिक नए लोग नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. आर.सी. साहनी चेयरमेन संवेदना सेवा रिसर्च समिति</strong></p>
<p><strong>अफीम की अनाधिकृत सप्लाई को रोकना होगा</strong><br />अफीम की खेती सरकार द्वारा अधिकृत पट्टे जारी करने पर किसान ही करते हैं। लेकिन किसानों से ही अफीम सरकार के अलावा अनाधिकृत रूप से बाजार में बेची जा रही है। जिससे उत्पादन केन्द्रों पर उसका उपयोग नशा बनाकर बाजार में सप्लाई करने के रूप में किया जा रहा है। सबसे अधिक भवानीमंडी में अनाधिकृत उतपदन केन्द्र संचालित हो रहे है। नारकोटिक्स विभाग को किसानों से समंवय स्थापित करके किसानों को अचछे दाम दिलाने का प्रयास करना चाहिए जिससे इसे बाजार में अनाधिकृत रूप से जाने से रोका जा सके। <br /><strong>- दुलीचंद बोरदा, जिला अध्यक्ष भारतीय किसान सभा</strong></p>
<p><strong>गायत्री परिवार नशा मुक्ति  को प्रतिबद्ध</strong><br />ड्रग्स की तस्करी और अवैध व्यापार पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। नशीली दवाओं की बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए। नशे की समस्या किशोरावस्था से शुरू होती है।  किशोर जब अपने घर-परिवार में पिता या अन्य सदस्य को सिगरेट, शराब पीते देखते हैं तो उनमें जिज्ञासा जाग उठती है कि इसे पीने से क्या होता है। गायत्री परिवार नशा छुड़ाने को लगातार कायर्च करता रहता है। अधिकतर युवा इसमें ही खुशी तलाशने लगते है। डॉक्टर हमेशा नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करने को तैयार है। कई लोगों को नशा मुक्त कराया है। -हेमराज पांचाल गायत्री परिवार<br /><strong>- तनाव कम करने के लिए नशे का सेवन</strong></p>
<p>नशा कुछ पल के लिए व्यक्ति को सुकून दे सकता है। लेकिन यह बाद में जीवन बर्बाद कर देता है। विशेष रूप से युवा पढ़ाई के तनाव को कम करने के  लिए घर वालों से छिपकर नशा करने लगते है। शुरुआत में नशा करने से खुशी मिलती है तो अधिकतर युवा इसमें ही खुशी तलाशने लगते है। डॉक्टर हमेशा नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करने को तैयार है। कई लोगों को नशा मुक्त कराया है। नशा मुक्ति केन्द्रों में जो दवाईयां दी जाती है। वह बिना डॉक्टर की सलाह से और निर्धारित मात्रा में दी जाती है। जिसे बाद में कम कर दिया जाता है। <br /><strong>- डॉ. मिथलेश खींची, असि. प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>आमजन को निभानी होगी जिम्मेदारी</strong><br />नारकोटिक्स विभाग तो अपने स्तर पर नशे की सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई कर रहा है। बड़ी मात्रा में दूसरे प्रदेशों से आने वाली नशे की खैप को कोटा में भी पकड़ा है। लेकिन यदि आमजन भी अपनी जिम्मेदारी निभाए और विभाग को नशे से संबंधित सूचना दे तो उनकी सूचना को गुप्त रखकर कार्रवाई की जा सकती है। सामूहिक प्रयासों से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>- अरविंद सक्सेना, अधीक्षक केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>दृड़Þ इच्छा शक्ति से छोड़ा नशा</strong><br />प्रकाश कुमार,मोहित दाधीच व मनोज गौतम ने बताया कि वे पहले नशे की गिरफ्त में जकड़ चुके थे। लेकिन अब उन्होंने इसे छोड़ दिया है। नशा छोड़ चुके इन लोगों ने बताया कि किसी को जेल में तो किसी को दोस्तों से नशे की लत लगी थी। नशा करने से उन्हें अच्छा महसूस होता था। पहले नशे के बिना नींद नहीं आती थी। शरीर के साथ-साथ पैसे का भी नुकसान हुआ। कई बार नशा मुक्ति केन्द्र में गए वहां दवाई भी ली लेकिन फिर भी फर्क नहीं पड़ा। बाद में नशा मुक्ति केन्द्र में जाकर वहां नशा छोड़ने की दृढ़ इच्छा शक्ति की।  पहले जहां दवाई अधिक लेते थे और नीनद कम आती थी। उसके बाद धीरे-धीरे दवाई भी कम कर दी। अब बिना दवाई के नींद भी अच्छी आती है और जीवन खुशहाल है। नशा छोड़ने वालों ने बताया कि अब वे नौकरी कर खुशहाल जीवन जी रहे है। साथ ही अन्य लोगों को भी इससे दूर रहने की सलाह दे रहे है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/discussion--collective-efforts-are-necessary-for-de-addiction/article-105137</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/discussion--collective-efforts-are-necessary-for-de-addiction/article-105137</guid>
                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 16:30:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-02/257rtrer90.png"                         length="490842"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान मेंं नशा मुक्ति अभियान पर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम में युवा मंडलों से जुड़े हुए 15 से 29 वर्ष के युवाओं ने भाग लिया तथा ट्रेनर द्वारा नशा मुक्ति विषय पर ट्रेनिंग दी गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/awareness-and-education-program-on-de-addiction-campaign/article-96874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(6)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के नेहरू युवा केंद्र द्वारा माय भारत इनिशिएटिव के तहत दौसा सिटी में नशीली दबा की लत और मादक पदार्थों के सेवन पर जागरूकता शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन प्रशसवी टी टी कॉलेज में सरस्वती के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया और आए हुए अथितियों का माला पहनाकर व प्रतिचिन्ह भेंट कर स्वागत सम्मान किया गयाl कार्यक्रम में युवा मंडलों से जुड़े हुए 15 से 29 वर्ष के युवाओं ने भाग लिया तथा ट्रेनर द्वारा नशा मुक्ति विषय पर ट्रेनिंग दी गईl</p>
<p>इस अवसर पर मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश  सोनवाल ने नशे के दोषियों पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में बताया और कहा कि शहर में कही भी अवैध रूप से कोई नशे की वस्तु बेची जाती है तो उसकी जानकारी पुलिस को दे पुलिस तुरंत प्रभाव से कार्यवाही करेगी । जिला संघ चालक भगवान सहाय सैनी ने देश में युवाओं की भूमिका के बारे में बताया और कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है अगर युवा ही भटक जाएगा तो देश का निर्माण कैसे होगा। नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ हिमांशु शर्मा ने नशे से होने वाली बीमारियों की जानकारी दी और नशे की लत से किस प्रकार छुटकारा पाए इसके बारे में बताया। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी डॉ मनीषा शर्मा ने देश में युवा की महती भूमिका व नशा मुक्ति में महिलाओं की अहम भूमिका के बारे में बताया उन्होंने कहा कि एक महिला अपने परिवार को नशे दूर कर एक स्वच्छ परिवार का निर्माण करना चाहती है और प्रयास भी करती है ।</p>
<p>जिला युवा अधिकारी नेहरू युवा केंद्र हर्षित खंडेलवाल ने कहा की देश के सभी युवाओ को अपने जीवन में नशे की लत से दूर रहकर अपने सभी संपर्क के रहे लोग जो नशे में लिप्त है उन्हें इससे बचने के उपाय का प्रयोग करना चाहिए। इसी क्रम मे विशिष्ट अतिथि स्वीप अधिकारी रामवीर चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा नशा सेहत के लिए हानिकारक है युवाओं को अपने मार्गदर्शन से प्रेरित किया और जिला सलाहकार समिति सदस्य लोकेश शर्मा भांकरी  ने युवाओं के बीच अपने विचार व्यक्त किये युवाओं को नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत जागरूक कर प्रेरित किया एवं युवा नशे की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं  मानसिक व शारीरिक तनाव में रहते हैं उन्हें कैसे हम जागरूक करें जिससे ऐसे लोगों को नशे की प्रवृत्ति से दूर कर सकेl</p>
<p>रमाशंकर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया । इस अवसर ओमप्रकाश, सुमित्रा घोशी,राजकुमार शर्मा,रामधन प्रजापत,रोहित मीना, विनय महावार,अनिल,कमल मीणा,दामोदर प्रजापत,विष्णु शर्मा,प्रशांत शर्मा,नवीन,पवन शर्मा,सीमा शर्मा, सुनीता शर्मा ,शकुंतला जांगिड़, सहित  सैकड़ो युवा उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/awareness-and-education-program-on-de-addiction-campaign/article-96874</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/awareness-and-education-program-on-de-addiction-campaign/article-96874</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 12:36:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/9930400-sizee-%286%291.jpg"                         length="67969"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशे से धुआं-धुआं हो रही युवाओं की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[स्मैक खरीदने व पीने के लिये युवा चोरियां लूटपाट डकैती हत्या जैसे संगीन अपराध तक कर रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lives-of-youth-are-going-up-in-smoke-due-to-drugs/article-69974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/nashe-s-dhua-dhua-ho-rhi-yuvao-ki-zindagi...bundi-news-13-02-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>बून्दी। आशा भोंसले का एक गीत सबको याद होगा, दम मारो दम, मिट जाए गम....। इस गीत में जिस तरह युवा धुआं उ़ड़ाते नजर आते हैं, ठीक वैसे ही स्थिति बून्दी शहर में इन दिनों कच्ची बस्तियों सहित गली मोहल्लों में देखी जा सकती हैं। जहां नशे व सट्टे का कारोबार मकड़ी के जाल की तरह चारों तरफ फैल रहा है और शहर के नौजवान युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेकर उनका जीवन तबाह कर रहा है। शहर में खुलेआम हो रहे नशे व सट्टे के कारोबार के सामने पुलिस प्रशासन नतमस्तक दिखाई दे रहा है या दूसरे शब्दों में कहें तो पुलिस की मिली भगत से ही यह कारोबार शहर में फल फूल रहा है। पुलिस द्वारा दिखावे के नाम पर हरबार केवल फौरी कार्यवाही कर इतिश्री कर ली जाती है। यहां नशे के व्यापारी खुलेआम घरों, होटलों, रेस्टोरेंट गली मोहल्लों में युवाओं को नशा परोसा जा रहा हैं। वर्तमान में चल रहा कैफे कल्चर भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं, जहां धुआं उड़ाते नौजवान बड़ी तादाद में नजर आ जाते हैं। </p>
<p><strong>युवाओं में हावी हो रहा सफेद नशा</strong><br />नाम नहीं बताने की शर्त पर इस कारोबार में लिप्त व्यक्ति ने बताया कि शहर में इन दिनों स्मैक का नशा सबसे ज्यादा युवाको को अपनी जकड़ में लिए हुए हैं। जिसकी गिरफ्त में 16 से 30 वर्ष की आयु के युवा ज्यादा है और इसकी लत के चलते युवा अपना जीवन तबाह कर रहे हैं। सफेद पाउडर स्मैक का नशा युवाओं में इस कदर हावी है कि युवा सीधे इंजेक्शन से ही स्मैक ले रहे हैं। इसको पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। शहर में कहीं ऐसे स्थान है जहां खुलेआम युवाओं को स्मैक परोसी जा रही है। स्मैक खरीदने व पीने के लिये युवा चोरियां लूटपाट डकैती हत्या जैसे संगीन अपराध तक कर रहे है।</p>
<p><strong>रोज बिक रही 50 से 60 लाख रुपए की स्मैक</strong><br />एक अनुमान के अनुसार शहर में 150 ग्राम स्मैक रोज बिक रही है जिसे हम अगर रुपए में अनुमान लगाए तो 50 से 60 लाख की केवल स्मैक बाजार में बिक रही है। जानकारी के अनुसार बूंदी शहर में स्मैक की सप्लाई कोटा से हो रही है। 1 ग्राम स्मैक 4000 रुपए में आ रही है। जो 8000 रुपए तक बिक रही है। 1 ग्राम स्मैक के 16 पैकेट बनाई जाते है एक पैकेट 500 में बिकता है। यानी बेचने वाले को 1 ग्राम स्मैक पर 4000 का प्रॉफिट हो रहा है। और एक सप्लायर मिनिमम 10 ग्राम स्मैक तक बेच रहा है। यह कार्य शहर की कच्ची बस्तियों में ज्यादा हो रहा है तथा इस कार्य में महिलाएं ज्यादा जुड़ी हुई है। यही नहीं स्मैक को कोटा से बूंदी लाने के लिए व्यक्ति को 1000 रुपये प्रति ग्राम तक दिए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>चार तरह के नशे का हो रहा कारोबार</strong><br />नशे के कारोबार की बात करें तो बूंदी शहर में चार तरह के नशे का ज्यादा कारोबार हो रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा स्मैक, चरस, अफीम, गांजा का व्यापार चरम पर है। इस नशे की गिरफ्त में युवा इस कदर फंस चुके हैं कि उन्हें ना होश है ना भविष्य की चिंता। दिन-रात केवल नशे में और नशे को पाने में लगे रहते हैं। इसके लिए वह चोरियां लूटपाट डकैती हत्या तक कर रहे हैं। स्मैक का नशा सबसे खराब माना जाता है। इसकी एक बार लत लगने पर व्यक्ति का पूरा जीवन व परिवार तबाह हो जाता है। </p>
<p><strong>शहर में फल फूल रहा सट्टे का कारोबार</strong><br />इसी प्रकार सट्टे की बात करें तो बूंदी में सट्टे का कारोबार भी खूब फल फूल रहा है रोजाना करोड़ों रुपए का सट्टा बूंदी में लगाया जा रहा है। जिसमें कई नाम की व्यक्ति अपने घरों में सट्टा का कारोबार करवा रहे हैं। सट्टा व्यापार से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि गली मोहल्ले जहां पर सट्टे का ज्यादा कारोबार किया जाता है वहां कैमरे लगाए हुए हैं। पुलिस द्वारा की गई हर एक हरकत का पहले ही पता चल जाता है और पुलिस आने से पहले ही सारा मामला समेट लिया जाता है। बूंदी शहर की बात करें तो शहर के माउतीपाड़ा, लुहारों के जमातखाने नाले के पास ,ब्रह्मपुरी बड़ी मज्जिद के पास, घुलधोया की गली,मनोहर बावड़ी, कागजी देवरा,छत्रपुरा में घरों में खुलेआम सट्टा खिलाया जाता है। </p>
<p><strong>यहां चल रहा खुलेआम स्मैक का कारोबार</strong><br />बूंदी शहर की बात करें तो शहर के महावीर कॉलोनी, ब्रह्मपुरी बड़ी मज्जिद के आगे, होली का खुट,बाईपास रोड़, नायकों की गली पावर हाउस के पीछे, नगरपरिषद की गली, माउती पाड़ा, उन्दालिया की डूंगरी, छत्रपुरा, कागजी देवरा, बालचंदपाड़ा, नाहर का चोहट्टा, पुरानी धानमंडी लंगाकेट में खुलेआम स्मैक का कारोबार किया जा रहा है। सबसे भी बड़ी बात यह है कि आमजन को ही जब इस बात का पता है कि यहां खुलेआम स्मैक व अन्य नशे का कारोबार किया जा रहा है तो पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करना पुलिस की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में दीमक की तरह फैल रहे स्मैक व सट्टे के कारोबार पर प्रभावी कार्यवाही कर पूर्णतया अकुश लगाने की जरूरत है। स्मैक के नशे व सट्टे ने युवा वर्ग के साथ सैंकड़ों परिवारों को बर्बाद कर दिया हैं।<br /><strong>- संजय शर्मा, समाजसेवी व युवा नेता</strong></p>
<p>स्मैक का धंधा करने वालों पर पुलिस की ठोस कार्यवाही होनी चाहिए, जबकि पुलिस पीने वालों पर कार्यवाही कर इतिश्री कर लेती हैं। नशे की लत ने शहर की युवा पीढ़़ी को तबाह कर दिया हैं। <br /><strong>- संतोष कटारा, पूर्व उपसभापति, नगर परिषद, बून्दी</strong></p>
<p>नशा कोई सा भी हो समाज के लिए नुकसानदेह हैं। वर्तमान में समाज का युवा वर्ग इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रहा हैं। इसके चलते युवा शारीरिक व मानसिक रूप से खोखले हो रहे हैं। वहीं सट्टा कारोबार समाज को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा हैं। इसके खिलाफ ठोस पुलिस कार्यवही होनी चाहिए।<br /><strong>- रेखा शर्मा, समाजसेविका</strong></p>
<p>प्रभावी कार्यवाही के अभाव में शहर में नशे की प्रवृति लगातार बढ़ती जा रही हैं, चाहे वह स्मैक हो, गांजा हो या और कोई नशा। इसकी गिरफ्त में आकर शहर का आम युवा अपने भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। आने वाली पीढ़ी को इस से बचाने के लिए ठोस व प्रभावकारी अंकुश लगाए जाने की आवश्यकता हैं। नशाखोरी की यह प्रवृति अपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही हैं। जिस पर सक्रिय कार्यवाही होनी चाहिए।<br /><strong>- हरिमोहन शर्मा, विधायक, बून्दी</strong></p>
<p>पुलिस द्वारा निरंतर नशे व सट्टे के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अगर शहर में कही खुलेआम इस तरह से नशे व सट्टे का कारोबार हो रहा है तो जल्द पुलिस द्वारा कार्रवाई कर अंकुश लगाया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- रामकुमार कस्वां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lives-of-youth-are-going-up-in-smoke-due-to-drugs/article-69974</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lives-of-youth-are-going-up-in-smoke-due-to-drugs/article-69974</guid>
                <pubDate>Tue, 13 Feb 2024 18:03:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/nashe-s-dhua-dhua-ho-rhi-yuvao-ki-zindagi...bundi-news-13-02-2024.jpeg"                         length="540272"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय कैंसर दिवस आज : कोटा में हर साल 2500 कैंसर के नए मरीज </title>
                                    <description><![CDATA[धूम्रपान फेफड़े के कैंसर को 30 गुना ज्यादा बढ़ा देता है। एक सिगरेट से 40 से ज्यादा कैमिकल निकलते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा जैसे कि आटोमोबाइल इंडस्ट्री, कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, टैक्सटाइल इंडस्ट्री जैसी जगहों पर काम करने वाले लोगों में एसबेस्टोज केमिकल और कोयला जलने से उठे धुएं से, फेफड़ों में इंफेक्शन से, परिवार में फेफड़े के कैंसर की हिस्ट्री होने से फेंफड़े का कैंसर बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-cancer-day-today--2500-new-cancer-patients-every-year-in-kota/article-36457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/k-2.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में तेजी से युवाओं में कैंसर रोग फैल रहा है। इसका मुख्य कारण युवाओं में बढ़ती तंबाकू, गुटका की लत है। युवा तनाव में सिगरेट, गुटका तंबाकू सेवन कर अपने को कैंसर की ओर धकेला रहे हैं। इसकी भयवता इस बात से ही पता चलती है कि कोटा में हर साल 2500 से अधिक कैंसर के नए मरीज आ रहे है। हर माह लगभग 285 मरीज नए आ रहे है। खासतौर से 25 से 50 वर्ग की आयुवर्ग के लोगों कैंसर तेजी से चपेट में ले रहा है। लोगों में तंबाकू पर्दार्थो के सेवन की रोकथाम के लिए जिलेभर में 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाएगा। इसको लेकर एबीएस अस्पताल के कैंसर विभाग में रूप रेखा  तैयार की जा रही है।  सभी जिला अस्पतालों में चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस पर जन जागृति के कार्यक्रम होंगे। इस वर्ष की थीम है क्लॉज द केयर गेप (कैंसर में सुधार के लिए- सबका साथ, सबका स्वास्थ्य) है। जिला एनसीडी सलाहकार प्रियंका जांगिड़ ने बताया कि कैंसर रोग विश्व में असामयिक मौतों के मुख्य कारणों में से एक है जिसका बचाव संभव है।</p>
<p><strong>पिछले साल ओपीडी में 19 हजार मरीज</strong><br />एमीएस अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आर के तंवर ने बताया कि 2022 में ओपीडी में 19 हजार 340 मरीज आए है। वहीं भर्ती मरीजों की संख्या 3 हजार 382 थी। पिछले साल 975 लोगों को विकरण थैरेपी दी गई।  वहीं 2 हजार 700 लोगों किमो थैरपी दी गई। अस्पताल में कैंसर सर्जन डॉ. अखलाख हुसैन के आने से अब यहां कैंसर के जटिल आॅपरेशन भी होने लगे है। </p>
<p><strong>कैंसर असाध्य नहीं, इसका उपचार संभव</strong><br />कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष गोयल ने बताया कि दुनिया की सबसे जानलेवा बीमारियों में से एक कैंसर है । आने वाले 20 वर्ष में भारत में कैंसर के रोगी लगभग दुगने हो जाएंगे।भारत मे नए पुराने केस मिलाकर करीब 25 लाख रोगी कैंसर बीमारी से पीड़ित है ।</p>
<p><strong>285 नए मरीज हर माह आ रहे ऐसे होता है कैंसर</strong><br />कैंसर का सामान्य लक्षण वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना प्रमुख है। इससे बचने के लिए धूम्रपान छोड़ें, अपने आसपास धूम्रपान करने वालों से दूरी रखें। खान-पान में सब्जी और फल की मात्रा ज्यादा लें, शारीरिक व्यायाम नियमित जारी रखें। </p>
<p><strong>नाक कान गले व फैफड़े में कैंसर के मरीज ज्यादा</strong><br />कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आर के तंवर बताया कि एमबीएस अस्पताल में नाक, कान गला के साथ फैंफड़ो में कैंसर के मरीज ज्यादा आ रहे है।  कैंसर से पीड़ित मरीजों में कोरोना वायरस की आशंका ज्यादा होती है, क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।  फेफड़े का कैंसर पुरुषों में ज्यादा होता है, इसका प्रमुख कारण धूम्रपान, तंबाकू गुटखा खाना। तंबाकू से निकलने वाले केमिकल फेफड़े की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। धूम्रपान फेफड़े के कैंसर को 30 गुना ज्यादा बढ़ा देता है। एक सिगरेट से 40 से ज्यादा कैमिकल निकलते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा जैसे कि आॅटोमोबाइल इंडस्ट्री, कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, टैक्सटाइल इंडस्ट्री जैसी जगहों पर काम करने वाले लोगों में एसबेस्टोज केमिकल और कोयला जलने से उठे धुएं से, फेफड़ों में इंफेक्शन से, परिवार में फेफड़े के कैंसर की हिस्ट्री होने से फेंफड़े का कैंसर बन सकता है।</p>
<p><strong>30 से 60 साल तक के लोगों को ले रहा चपेट में </strong><br />एमबीएस अस्पतालमें प्रतिदिन 90 से 100 लोगों को रेडिएशन थैरेपी दी जा रही है। वहीं 20 से 25 लोगों को कीमोथैरेपी दी जाती है। ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज मुंह, गला, फेंफड़ा, स्तन कैंसर के मरीज इलाज के लिए आते है। शहर में 35 से 40 बीच के युवाओं में मुंह नहीं खुलने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जिला अस्पताल में 30 मरीजों के लिए  वार्ड बना हुआ है जो हमेशा ही फुल रहता है।  </p>
<p><strong>यह मिलती है सरकारी मदद</strong><br />कैंसर के उपचार के दौरान मरीज कुछ आर्थिक भार कम करने के लिए आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, राष्ट्रीय आरोग्य निधि, स्वास्थ्य मंत्री विवेकाधीन अनुदान, केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) जैसी योजनाओं का फायदा ले सकते हैं। </p>
<p>अस्पताल में प्रतिदिन कैंसर के बड़ी संख्या में मरीज आना चिंता का विषय है। विश्व कैंसर दिवस पर क्लॉज द केयर गेप  थीम पर कार्यक्रम होंगे। युवाओं को मादक पर्दाथों के सेवन से रोकने के लिए जन जागृति जरूरी है। <br /><strong>-डॉ. आर के तंवर, विभागाध्यक्ष कैंसर रोग विभाग एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-cancer-day-today--2500-new-cancer-patients-every-year-in-kota/article-36457</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-cancer-day-today--2500-new-cancer-patients-every-year-in-kota/article-36457</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Feb 2023 14:57:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-02/k-2.jpg"                         length="203048"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>...ताकि व्यसन से बची रहे युवा पीढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी नए तंबाकू टैक्स मैन्युअल से पता चला है कि यह नुकसान तंबाकू के कारण स्वास्थ्य पर किए जा रहे खर्च और उत्पादकता में आ रही गिरावट के कारण हो रहा है। ऐसे में नीतियों में सुधार एक बेहतर कल के निर्माण में मदद कर सकती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/so-that-the-young-generation-is-saved-from-addiction/article-32535"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/q-116.jpg" alt=""></a><br /><p>नशा देश और दुनिया में लोगों के लिए सबसे बड़ी लत बन गया है। खाना भले ही न मिले पर नशा करने के लिए कुछ भी मिल जाए। हालात तो यह हो गए हैं कि लोग जेब में पैसा न होने पर लूटपाट या चोरी कर नशा करने के लिए गलत राह पर आ गए हैं। इससे न सिर्फ वह अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं बल्कि अपने परिवार के लिए भी नई मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। नशा करने वालों में सबसे अधिक संख्या युवा वर्ग की है। ऐसे में न्यूजीलैंड ने ऐसा कानून पास किया है जिसके बाद युवा आजीवन सिगरेट नहीं खरीद सकेंगे। इस कानून के तहत 1 जनवरी, 2009 को या उसके बाद पैदा हुए किसी भी व्यक्ति को कभी भी तंबाकू न खरीदा और न ही बेचा जा सकता है। कानून के तहत सिगरेट खरीदने की न्यूनतम आयु भी साल दर साल बढ़ाई जाती रहेगी।</p>
<p>सिगरेट खरीदने वाले युवाओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के बाद अब से 50 साल बाद किसी भी व्यक्ति को सिगरेट का पैकेट खरीदने से पहले दुकानदार को अपना पहचान पत्र दिखाना होगा कि वह कम से कम 63 साल का है। न्यूजीलैंड सरकार का लक्ष्य 2025 तक देश में धूम्रपान करने वालों की संख्या पांच प्रतिशत कम करना है। स्वास्थ्य अधिकारियों की उम्मीद है कि इससे पहले ही धूम्रपान कम हो जाएगा। इस नए कानून के लागू होने के बाद अब तंबाकू बेचने के लिए अनुमत खुदरा विक्रेताओं की संख्या 6 हजार से घटकर 600 हो जाएगी। इसके अलावा धूम्रपान करने वाले तंबाकू में अनुमत निकोटीन की मात्रा में भी कमी होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में न्यूजीलैंड में 15 वर्ष के 11.6 प्रतिशत युवा धूम्रपान करते हैं, जो कि ये आंकड़ा युवाओं के बीच 29 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। दरअसल, तंबाकू और धूम्रपान का बढ़ता सेवन आज विश्व के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। दुनियाभर में तंबाकू के इस्तेमाल से प्रति वर्ष करीब 105,38,234 करोड़ रुपए (140,000 करोड़ डॉलर) का नुकसान हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी नए तंबाकू टैक्स मैन्युअल से पता चला है कि यह नुकसान तंबाकू के कारण स्वास्थ्य पर किए जा रहे खर्च और उत्पादकता में आ रही गिरावट के कारण हो रहा है। ऐसे में नीतियों में सुधार एक बेहतर कल के निर्माण में मदद कर सकती हैं। यह ऐसा समय है जब देशों को अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है जिसके लिए उसे अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी।</p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू हर साल औसतन 80 लाख लोगों की जान लेती है। उनमें से 70 लाख मौतें तो प्रत्यक्ष रूप से तंबाकू के उपयोग का परिणाम हैं, जबकि 12 लाख लोग ऐसे होते हैं जो इनका सेवन नहीं करते हैं बस वो उन लोगों और धूम्रपान के समय उससे होने वाले धुएं के संपर्क में आते हैं। दुनियाभर में तंबाकू का उपयोग करने वाले 130 करोड़ लोगों में से 80 फीसदी से अधिक निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। सर्वविदित है कि धूम्रपान सांस संबंधी अनेक बीमारियों के लिए मुख्य कारण है और धूम्रपान करने वाले लोगों को दिल की बीमारियां, कैंसर, सांस संबंधी बीमारियां और डायबिटीज होने का भी बहुत ज्यादा खतरा होता है। तंबाकू छोड़ने के उनके इरादे और प्रयास सामाजिक व आर्थिक दबावों के कारण और ज्यादा जटिलता में पड़ जाते हैं।</p>
<p>किसी भी रूप में किया जाए तंबाकू का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक है। यह बात लाखों बार लोगों को बताई जा चुकी है, लेकिन सेवन कम नहीं हुआ है। नशा समाज का एक ऐसा स्याह पहलू है जो आधुनिक समय में हमारी युवा पीढ़ी को खोखला करता जा रहा है। नशे की इस गिरफ्त में केवल युवा ही नहीं अपितु हर उम्र, लिंग, धर्म-जाति के लोग फंस चुके हैं। नशे जैसा मीठा जहर आज कहर बनकर देश को तबाही की ओर धकेल रहा है। नशे के कारण केवल व्यक्ति की मौत ही नहीं होती, उसका घर-परिवार बर्बाद ही नहीं होता, बल्कि देश की सभ्यता और संस्कृति भी नष्ट हो जाती है। नशे में व्यक्ति अपना विवेक खोकर मानसिक रूप से असंतुलित होकर ऐसा कुछ कर बैठता है कि उसे उसका पता ही नहीं रहता और जब होश आता है तो उसके पास पश्चाताप करने के सिवाय कुछ नहीं बचता।<br />भारत में हर साल 10.5 लाख मौतें तंबाकू पदार्थों के सेवन से होती हैं। 90 प्रतिशत फेफड़े का कैंसर, 50 प्रतिशत ब्रोंकाइटिस एवं 25 प्रतिशत घातक हृदय रोगों का कारण धूम्रपान है। अपराध ब्यूरो रिकॉर्ड के अनुसार, बड़े-छोटे अपराधों, बलात्कार, हत्या, लूट, डकैती, राहजनी आदि तमाम तरह की वारदातों में नशे के सेवन का मामला लगभग 73.5 प्रतिशत तक है और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में तो यह दर 87 प्रतिशत तक पहुंची हुई है।</p>
<p><strong>  -देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/so-that-the-young-generation-is-saved-from-addiction/article-32535</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/so-that-the-young-generation-is-saved-from-addiction/article-32535</guid>
                <pubDate>Sat, 17 Dec 2022 10:47:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-12/q-116.jpg"                         length="132735"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरनाक लत: पबजी गेम से बच्चों पर पड़ रहा है बुरा असर</title>
                                    <description><![CDATA[ अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों के हिंसक होने के कारण ऐसे केस देखने को मिलते हैं। इस केस ने हमें ये सोचने पर मजबूर किया है कि क्या वाकई बच्चों की गलती है या पेरेटिंग में ही कुछ कमी है। बच्चों के साथ आपको कुछ बातों को अवॉइड करना चाहिए।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/dangerous-addiction-pubg-game-is-having-a-bad-effect-on/article-12107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/63.jpg" alt=""></a><br /><p>आज के समय में बच्चों में फोन और गेम की लत बढ़ती जा रही है इसका खामियाजा हमें समय-समय पर देखने को मिलता है और ऐसा ही एक केस लखनऊ में सामने आया जिसमें मां के बच्चे को गेम खेलने से रोके जाने पर उसने अपनी मां को मार दिया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>एक्सपर्ट का मानना है </strong></span></p>
<p>अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों के हिंसक होने के कारण ऐसे केस देखने को मिलते हैं। इस केस ने हमें ये सोचने पर मजबूर किया है कि क्या वाकई बच्चों की गलती है या पेरेटिंग में ही कुछ कमी है। बच्चों के साथ आपको कुछ बातों को अवॉइड करना चाहिए।  </p>
<p>लखनऊ में हाल ही में एक केस सामने आया है जिसमें एक 16 साल के नाबालिग ने अपनी मां को इसलिए मार डाला क्योंकि उसकी मां ने पबजी गेम खेलने से मना किया था। बच्चे ने इस बात का बदला लेने के लिए मां को गोली मारकर हत्या कर दी। यही नहीं,इससे पहले भी मां और बेटे के बीच गेम की लत को लेकर बहस हो चुकी थी ,और मां ने बच्चे पर हाथ भी उठाया था और बच्चा लंबे अरसे से मां के हिंसक व्यवहार से परेशान था। इस केस के बाद मोबाइल खेलने की खतरनाक लत और पेरेंंटग पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।  </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अगर बच्चे को हिंसक होने से रोकना है तो आपको इन आदतों को अवॉइड करना चाहिए।</strong></span></p>
<p>आप बच्चों के सामने या उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न करें, इससे बच्चों के मन पर बुरा असर पड़ता है।</p>
<p>आप बच्चे को प्यार से समझाएं और दोबारा वही काम करने पर आप उसे बार-बार टोकने से बचें, इससे वह जिद्दी बन जाते हैं। </p>
<p>आपको हर हाल में अपने बच्चे को मारने से या तेज चिल्लाने से बचना है, बच्चे अपना अपमान नहींं पाते।  </p>
<p>बच्चों को समय दें, इतने व्यस्त न हों कि बच्चे अकेला महसूस करें।</p>
<p>आप बच्चे को अन्य बच्चों से कंपेयर न करें, बच्चों की तुलना करने पर उनमें ईर्ष्या के भाव आ जाते हैं। </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्षणों को नोटिस करें </strong></span></p>
<p>आपके बच्चे में कुछ अलग लक्षण नजर आएं तो उस पार गौर करें। </p>
<p>बच्चा पहले से ज्यादा जिद्दी हो जाए। </p>
<p>बच्चा बात करना कम कर दें। </p>
<p>-बात-बात पर बच्चे का रोना। </p>
<p>यादा खाने या सेवन या खाना कम लेना। </p>
<p>मिलना-जुलना बंद कर देना।</p>
<p>बात-बात पर मरने-मारने की बात करना।  </p>
<p>आज की भागती लाइफ का असर बच्चों पर पड़ रहा है।  माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते जिसके कारण वो अकेला महसूस करते हैं और अपना एंटरटेंमेंट खोजने के लिए  गेम की लत का शिकार हो जाते हैं ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/dangerous-addiction-pubg-game-is-having-a-bad-effect-on/article-12107</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/dangerous-addiction-pubg-game-is-having-a-bad-effect-on/article-12107</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 13:06:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/63.jpg"                         length="42439"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पढ़ाई में मशगूल हुए बालक, छूटी रही मोबाइल की लत</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा समेत प्रदेशभर में सरकारी और निजी स्कूल खुुल जाने से बालक पढ़ाई में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उनकी मोबाइल की लत छूट रही है। बालकों को तो राहत मिली है। साथ में अभिभावकों की भी चिंता कम हो गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-engaged-in-studies--left-mobile-addiction/article-6765"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/image01.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा समेत प्रदेशभर में सरकारी और निजी स्कूल खुुल जाने से बालक पढ़ाई में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उनकी मोबाइल की लत छूट रही है। बालकों को तो राहत मिली है। साथ में अभिभावकों की भी चिंता कम हो गई है। पूर्व में कोविड के चलते स्कूल बंद हो गए थे। ऐसे में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही थी। बालक घंटों तक मोबाइल में व्यस्त रहते थे। इसमें कमी हो गई है। हालांकि, कुछ बालक अभी व्यस्त रह रहे हैं। लेकिन, इनकी संख्या कम है। एक्सपर्ट का कहना है कि पहले पूरे समय बालक घर पर फ्री रहते थे। ऑनलाइन पढ़ाई का कारण बताकर मोबाइल और कंप्यूटर लेकर बैठ जाते थे। इसमें अब कमी हो गई है। क्योंकि, बालक को प्रतिदिन पांच से छह घंटे जाकर पढ़ाई करनी होती है। यहां ऑफलाइन कक्षाओं में टाइम व्यतीत करना होता है, जिसके चलते समय नहीं मिलता है। यहां तक घर पर जाने के बाद भी होम वर्क करना होता है। इसमें भी काफी समय देना होता है। इस तरह से ऑफलाइन कक्षाओं से बालकों को काफी लाभ हुआ है।<br /><br /><strong>बालकों को ये हुए फायदे</strong><br />1. ज्ञान की अभिवृद्धि: ऑनलाइन कक्षाओं से कुछ बालकों में मोबाइल की लत लग गई थी। पढ़ाई का समय नहीं दे पा रहे थे। ऑफलाइन कक्षाओं से ज्ञान की अभिवृद्धि हो गई है।<br />2. मनोस्थिति में सुधार: अधिकांश बालक घंटों तक मोबाइल पर व्यस्त रहते थे। इससे उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा था। स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया था। लोगों से अलग हो गए थे। लड़ाई झगड़ा करते थे। ऐसे में अभिभावक परेशान थे।<br />3. आंखों को फायदा: मोबाइल और कंप्यूटर की लत से आंखों पर विपरित असर पड़ रहा था। इसमें राहत मिली है। क्योंकि, इसका समय पहले से कम हो गया है। <br /><br /><strong>95 फीसदी तक उपस्थिति</strong><br />स्कूलों में हाजिरी 95 फीसदी से अधिक पहुंच गई है लेकिन कुछ बच्चों में अभी भी असुरक्षा की भावना, कुछ मानसिक तनाव से ग्रसित हैं। बच्चों के भावनात्मक व्यवहार और सोच में भी कोरोना के चलते बदलाव आया है।  कोरोना के कारण दो सालों तक घर बैठकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी अब धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढलने लगे हैं। अक्सर मोबाइल से चिपके रहने की आदत भी बच्चों से छूटने लगी है। हालांकि, विद्यार्थियों को स्कूल के नियमों और अनुशासन में ढलने में मुश्किल हो रही है लेकिन शिक्षक इसमें उनकी मदद कर रहे हैं। गौरतलब है कि फरवरी में कक्षा एक से 12वीं तक के स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं प्रारंभ हो गई थी।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी पूरी तरह लत तो नहीं छूट रही है, लेकिन ये कम हो गई है। क्योंकि, बालक स्कूलों में अधिकांश समय व्यतीत कर रहे हैं। अभिभावक और शिक्षक और भी प्रयास करें।<br /><strong>- डॉ. ज्योति सिडाना, सहायक आचार्य, समाजशास्त्र, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong><br /><br />स्कूल खुलने से बालकों को तनाव से राहत मिली है। उनकी मनोस्थिति में और भी सुधार होगा। उनकी मोबाइल और अन्य लत भी कम हो जाएगी।<br /><strong>- डॉ. मिथलेश खींची, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोचिकित्सा, मेडिकल कॉलेज</strong><br /><br />सभी कक्षाओं में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। बोर्ड कक्षाओं की तो परीक्षाएं भी हो रही है। ऑफलाइन से काफी लाभ तो मिलता ही है।<br /><strong>- प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-engaged-in-studies--left-mobile-addiction/article-6765</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-engaged-in-studies--left-mobile-addiction/article-6765</guid>
                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 15:29:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/image01.png"                         length="451355"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्री फायर की लत : मोबाइल गेम ने बना दिया चाचा को हत्यारा : 16 वर्षीय चाचा ने कर दी 12 वर्षीय भतीजे की हत्या, जमीन में गाड़ दिया शव</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने लिया हिरासत में, मोबाइल भी बरामद ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/nagaur/%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4---%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE---16-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%80-12-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AD%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%9C-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%B5/article-3135"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mritak-praveen.jpg" alt=""></a><br /><p> लाडनूं। ऑनलाइन गेम की लत ने रिश्ते में लगने वाले चाचा को अपने ही भतीजे का कातिल बना दिया। तीन पत्ती, ड्रेगन और फ्री फायर गेम की लत के चलते रिश्ते में लगने वाले चाचा ने अपने 12 साल के भतीजे की गला दबाकर हत्या कर उसकी लाश को जमीन में गाड़ दिया। इसके बाद असम में बैठे मृतक के अंकल को फेक इंस्टाग्राम आईडी से मैसेज कर 5 लाख रुपए की फिरौती की मांग करने लगा। सोमवार सुबह लाडनूं पुलिस ने आरोपी नाबालिग को डिटेन कर उसकी निशानदेही पर गांव के तालाब किनारे जमीन में गड़े हुए शव व उसका मोबाईल बरामद कर लिया है।<br /><br /><br /><strong>पांच लाख रुपए की मांगी फिरौती</strong><br />थानाधिकारी राजेन्द्र सिंह कमांडो ने बताया कि पांच दिनों पूर्व 8 दिसंबर को धुड़ीला गांव का नाबालिग अपनी मां का मोबाइल लेकर घर से गायब हो गया था। उसके चाचा ने अगले दिन पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उसको पबजी और फ्री फायर खेलने की आदत थी। असम में बैठे उसके चाचा को एक इंस्टाग्राम आईडी से मैसेज आया कि अगर बच्चे को जिंदा देखना चाहते हो तो फोन पे पर  पर 5 लाख रुपए का इंतजाम कर पेमेंट भिजवा दो। परिजनों ने इस बात की जानकारी पुलिस थाना लाडनूं को दी।<br /><br /><strong>साईबर एक्सपर्ट की मदद से खुला राज</strong><br />सीआई राजेन्द्र सिंह कमांडो ने बताया कि घटना की जांच-पड़ताल में आॅनलाइन मोबाइल की लोकेशन धुड़ीला गांव की मिली पुलिस ने सायबर तकनीक से जांच की तो जिस इंस्टाग्राम आईडी से फिरौती मांगी जा रही थी, उसका आईपी एड्रेस लोकेशन उसके गांव की ही आ रही थी। मृतक के मोबाइल में इंटरनेट दूसरे मोबाइल के हॉटस्पॉट से चलाया जा रहा था। पुलिस को मृतक के नाबालिग अंकल पर शक हुआ तो नाबालिग को पकड़कर पूछताछ की गई तो उसने पूरा राज उगल दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>नागौर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/nagaur/%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4---%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE---16-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%80-12-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AD%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%9C-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%B5/article-3135</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/nagaur/%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4---%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE---16-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%80-12-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AD%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%9C-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%B5/article-3135</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Dec 2021 11:09:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-12/mritak-praveen.jpg"                         length="148882"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोबाइल की ऐसी लत! पांच दिन से न सोया, न खाया, न पिया, भूल गया सब कुछ, अब अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[मनोचिकित्सक ने शुरू किया इलाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-2839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/mobile-adict.jpg" alt=""></a><br /><p> चूरू। जिले के साहवा कस्बे के 20 वर्षीय युवक को मोबाइल की ऐसी लत लगी कि वह अब मानसिक रोगी बन गया है। पिछले एक महीने से अपना काम धंधा छोड़कर मोबाइल में लगा युवक, पांच दिन से सो भी नहीं पाया है। जब तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो परिजन उसे चूरू के राजकीय भरतिया अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचे। जहां मनोचिकित्सक के द्वारा युवक का इलाज शुरू किया गया है। <br /> <strong><br /> मोबाइल की लत में पहले काम धंधा छोड़ा</strong><br /> युवक के परिवार में चाचा अरबाज ने बताया कि 20 वर्षीय अकरम गांव में ही बिजली की मोटर वाइडिंग का काम करता है। पिछले एक महीने से वह अधिकतर समय मोबाइल पर बिताने लगा था। मोबाइल के चलते उसने अपना काम भी छोड़ दिया था। परिजनों द्वारा बार-बार कहने पर भी वह मोबाइल को नहीं छोड़ता था। <br /> <br /> <strong>पूरी-पूरी रात खेलता गेम</strong><br /> गत कुछ दिनों से तो वह पूरी-पूरी रात मोबाइल पर चेट और गेम खेलता रहता। इस कारण उसने खाना पीना भी छोड़ दिया था। अकरम की मां ने बताया कि अब तो अकरम खाना भी नहीं खा रहा। रात को जब खाना देने कमरे में जाती हूं तो खाने को बिस्तर पर बिखेर देता है। इस संबंध में मानसिक रोग विषेशज्ञ डॉ. जितेन्द्र कुमार ने बताया कि युवक की सिटी स्केन करवाई गई है, जिसका इलाज शुरू किया गया है।<br /> <br /> मोबाइल और इंटरनेट की लत आज समाज में जहर की तरह घुल गई है। इसलिए बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। युवाओं और बड़ों को भी प्रोफेशनल काम के अलावा दो घंटे से ज्यादा मोबाइल या स्क्रीन यूज नहीं करना चाहिए। इससे ज्यादा यूज करने पर मोबाइल या इंटरनेट एडिक्शन का खतरा पैदा हो जाता है, जो कि ड्रग्स के एडिक्शन की तरह है और मानसिक रोगी बना सकता है। -<strong>डॉ. शिव गौतम, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ जयपुर</strong><br /> <br /> जरूरत से ज्यादा मोबाइल का यूज करने से कई बार मानसिक रोग का शिकार हो सकते हैं। इसके कारण कई बार व्यक्ति अवसाद और हिंसा की भावना से भी घिर जाता है। समाज में इस तरह की घटनाएं अब ज्यादा देखने को मिल रही हैं। ऐसे में मोबाइल एडिक्शन से बचें और कम से कम मोबाइल, कम्प्यूटर और इंटरनेट का प्रयोग करें। -<strong>डॉ. जीडी नाटाणी, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, जयपुर</strong><br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>चूरू</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-2839</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%A4--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-2839</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 12:34:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-11/mobile-adict.jpg"                         length="347923"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        