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                <title>पैसों का खेल : लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने जमकर बहाया पैसा, 3861 करोड़ रुपए खर्च </title>
                                    <description><![CDATA[पार्टियों द्वारा लोकसभा चुनावों और आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनावों में किये गए खर्चे का खुलासा किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/money-game-in-lok-sabha-elections-political-parties-fiercely-spent/article-108570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(8)10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने जमकर पैसा बहाया। एक अनुमान के मुताबिक इस चुनाव में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। एक स्टडी में यह अनुमान लगाया है। वहीं चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े इतर जानकारी देते हैं। चुनाव आयोग ने भी पार्टियों द्वारा लोकसभा चुनावों और आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनावों में किये गए खर्चे का खुलासा किया है।</p>
<p><strong>कई पार्टियों ने नहीं दिया खर्च का हिसाब</strong><br />कुछ पार्टियों ने तो अपने खर्च का पूरा हिसाब दिया है। लेकिन कई पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने अभी तक यह नहीं बताया कि उन्होंने कितना पैसा खर्च किया। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव में कितना पैसा खर्च किया और कहां से जुटाया। यह रिपोर्ट चुनाव आयोग को दी गई जानकारी पर आधारित है।</p>
<p><strong>इन पार्टियों का नाम शामिल</strong><br />इस रिपोर्ट के अनुसार, 22 राजनीतिक पार्टियों के पास चुनाव लड़ने के लिए 18,742.31 करोड़ रुपये थे। इन पार्टियों में आम आदमी पार्टी, असम गण परिषद, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, बीजू जनता दल, भारतीय जनता पार्टी, भारत राष्ट्र समिति, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) सीपीआई(एम), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, इंडियन नेशनल कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, तेलुगु देशम पार्टी, युवाजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। इन पार्टियों ने मिलकर 3,861.57 करोड़ रुपये खर्च किए। बीजेपी ने सबसे ज्यादा 1,737.68 करोड़ रुपये खर्च किए। यह कुल खर्च का 45% से भी ज्यादा है। पार्टियों को दान के रूप में 7,416.31 करोड़ रुपये मिले। बीजेपी को इसमें से 84.5% हिस्सा मिला। यानी बीजेपी को सबसे ज्यादा दान मिला।</p>
<p><strong>चुनावों में चलता है पैसे का खेल</strong><br /> मीडिया ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। मीडिया विज्ञापनों पर 992.48 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें प्रिंट, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। सोशल मीडिया और वर्चुअल कैंपेन पर 196.23 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सिर्फ सात पार्टियों ने ही इसका खुलासा किया है। स्टार प्रचारकों के यात्रा पर 830.15 करोड़ रुपये खर्च हुए। हेलीकॉप्टर और प्राइवेट जेट का इस्तेमाल किया गया। बैनर, पोस्टर और होर्डिंग पर 398.49 करोड़ रुपए खर्च किए गए।<br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 10:49:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेड़ता में बच्चों के झगड़े के बाद दो पक्ष के लोगों में तनाव, लाठी-भाटा चले</title>
                                    <description><![CDATA[निकटवर्ती नागौर जिले के मेड़ता में बिचलावास इलाके में मामूली विवाद के बाद तनाव हो गया। दो पक्ष के लोगों में जमकर लाठी- भाटा चले।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/after-the-fight-between-children-in-merta-tension-between-the/article-80842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/photo-size-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। निकटवर्ती नागौर जिले के मेड़ता में बिचलावास इलाके में मामूली विवाद के बाद तनाव हो गया। दो पक्ष के लोगों में जमकर लाठी- भाटा चले। एक दर्जन से ज्यादा लोग चोटिल हो गए। आठ लोगों को जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में रैफर किया गया है। मामला बच्चों के बीच हुए विवाद के बाद बड़े भी इसमें शाामिल हो गए। आज दोपहर तक क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। घायलों का यहां जोधपुर में उपचार जारी है, जिनकी हालत सामान्य बताई जाती है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात को नागौर जिले के  मेड़ता स्थित बिचलावास क्षेत्र मेें बच्चों में हुए झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया। दो पक्ष के लोग आमने सामने हो गए और पथराव करने के साथ इनके बीच में लाठियां चली। एक दर्जन से ज्यादा लोग चोटिल हो गए। बताया गया कि आठ लोगों को सिर, पीठ और हाथों में चोटें लगने पर जोधपुर रैफर किया गया है। नागौर जिला पुलिस मौका स्थल पर पहुंची और आरएसी को तैनात किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jun 2024 14:12:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक लुभावन वादे पर दलों की मान्यता रद्द करने का कानून नहीं : चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव से पहले मतदाताओं से सार्वजनिक निधि की बदौलत लुभावने वादे करने वाली राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार उसके पास नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/law-not-to-cancel-recognition-of-parties--says-election-commision/article-7686"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/firing-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव से पहले मतदाताओं से सार्वजनिक निधि की बदौलत लुभावने वादे करने वाली राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार उसके पास नहीं है। कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को वकील अश्विन उपाध्याय की याचिका पर नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कहा था। चुनाव आयोग ने उसी नोटिस के जवाब में एक हलफनामे के जरिए अपना रुख स्पष्ट किया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव से पहले या बाद में मुफ्त उपहार देना या बांटना संबंधित राजनीतिक दल का नीतिगत फैसला है। इस तरह का फैसला आर्थिक रूप से व्यवहारिक है या फिर अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव  वाला, यह संबंधित राज्य के मतदाताओं द्वारा विचार किया जाता है।<br />हलफनामे में कहा गया है कि सरकार बनाने वाले राजनीतिक दल की नीतियों और निर्णयों को चुनाव आयोग विनियमित नहीं कर सकता है। सरकारी खजाने के बदौलत लुभावने वादे करने वाले दलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई उसके (चुनाव आयोग)  द्वारा किया जाना शक्तियों का दुरुपयोग होगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि वर्तमान में उसके पास तीन आधारों को छोड़कर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति नहीं है। इसके बारे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाम समाज कल्याण संस्थान और अन्य (2002) के मामले में शीर्ष अदालत द्वारा परिभाषित किया गया है। ये आधार हैं-  राजनीतिक दल द्वारा जब धोखाधड़ी और जालसाजी के आधार पर पंजीकरण प्राप्त किया गया हो, पार्टी ने संविधान और किसी अन्य आधार पर विश्वास और निष्ठा को समाप्त कर दिया हो।</p>
<p>उपाध्याय ने अपनी याचिका में राजनीतिक दलों के कथित तर्कहीन वादों को रिश्वतÞ और अनुचितÞ रूप से  प्रभावित करने वाला करार दिया है। याचिका में राजनीतिक दलों के इन कथित तर्कहीन वादों को संविधान के अनुच्छेद 14, 162, 266 (3) और 282 का उल्लंघन बताया गया है। इस वर्ष पांच राज्यों में हुए चुनावों से पूर्व दायर याचिका में उपाध्याय ने  पंजाब के संदर्भ में दावा किया था कि आम आदमी पार्टी के राजनीतिक वादों को पूरा करने के लिए पंजाब सरकार के खजाने से प्रति माह 12,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, शिरोमणि अकाली दल के सत्ता में आने पर उसके वादे पूरे करने के लिए प्रति माह 25,000 करोड़ रुपये और कांग्रेस के सत्ता में आने पर उसके वादों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी, जबकि सच्चाई यह है कि राज्य में जीएसटी संग्रह केवल 1400 करोड़ है।</p>
<p>याचिकाकर्ता का कहना था कि सच्चाई यह है कि कर्ज चुकाने के बाद पंजाब सरकार कर्मचारियों- अधिकारियों के वेतन-पेंशन भी नहीं दे पा रही है तो ऐसे में सत्ता में आने वाली पार्टी (अब आम आदमी पार्टी की सत्ता में है) मुफ्त उपहार देने के वादे कैसे पूरे करेगी ?  याचिकाकर्ता का कहना है कि कड़वा सच यह है कि पंजाब का कर्ज हर साल बढ़ता जा रहा है। राज्य का बकाया कर्ज बढ़कर 77,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्तमान (मार्च 2022) वित्त वर्ष में ही 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। गौरतलब है कि याचिका में किसी अन्य राज्य एवं भाजपा या बाकी राजनीतिक दलों के वादों का जिक्र नहीं किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में जिक्र नहीं करने पर याचिकाकर्ता से सवाल पूछे थे।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 16:39:24 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इंटेलिजेंस और प्रशासन का अलर्ट मान लिया होता तो नहीं होता उपद्रव</title>
                                    <description><![CDATA[तीन सदस्यीय कमेटी ने सीएम गहलोत को सौंपी रिपोर्ट, दोनों पक्षों की गलती और पुलिस की भी लापरवाही मानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-if-the-alerts-of-intelligence-and-administration-were-accepted--there-would-not-have-been-a-nuisance--the-three-member-committee-submitted-the-report-to-cm-gehlot--accepted-the-mistake-of-both-the-parties-and-also-the-negligence-of-the-police/article-7541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/1111.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। करौली में गुरूवार को 2 घंटे की कर्फ्यू में छूट दी गई। सुबह 9 से 11 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई। इस दौरान लोग बाजारों में जरूरी सामान लेने के लिए निकले। इस दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। लेकिन पुलिस मुख्यालय की इंटेलिजेंस और प्रशासन (कानून व्यवस्था) विंग की ओर से धार्मिक आयोजनों को लेकर जारी किए गए अलर्ट को यदि करौली जिला पुलिस ने गंभीरता से लिया होता तो वहां उपद्रव नहीं होता। इन दोनों ही ब्रांच ने मार्च के अंत में प्रदेशभर की जिला पुलिस को अलर्ट जारी किया था, फिर भी करौली में सीआई, डिप्टी एसपी, एएसपी और एसपी ने गम्भीरता नहीं दिखाई और उपद्रवी अपने मंसूबों में कामयाब हो गए। अब पुलिस मुख्यालय ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। उच्चाधिकारियों ने लापरवाह अधिकारियों की पूरी जानकारी सीएमओ को दे दी है। जल्द ही उच्च स्तर पर बड़ी कार्रवाई होगी। <br /><br /><strong>उच्चाधिकारियों ने सीएमओ में रखी बात, लापरवाह पुलिस अफसरों पर हो कार्रवाई</strong><br /><strong>बवाल को समेटने में 3 अधिकारी रातभर जागे</strong><br />करौली पुलिस की लापरवाही के कारण पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी जूझते नजर आए। उपद्रव को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीजीपी एमएल लाठर, डीजी (इंटेलिजेंस) उमेश मिश्रा और एडीजी (कानून-व्यवस्था) हवासिंह घुमरिया को रातभर जागना पड़ा और पल-पल की खबर रखकर मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस मुख्यालय से भेजे चार आईपीएस में से दो ने बेहतर कार्य किया। <br /><br /><strong>आरपीएस को नाकाबंदी में लगाया</strong> <br />करौली में तनाव शुरू हो गया, कर्फ्यू लगाने के साथ नेटबंदी लागू कर दी गई। पुलिस मुख्यालय से भेजे अधिकारियों ने फील्ड में जाकर दौरा किया तो पता चला कि कानून-व्यवस्था बनाने में लगाए गए जाब्ता भी सही नहीं है। जयपुर से भेजे गए कई आरपीएस अधिकारियों को नाकाबंदी में लगा दिया गया जबकि एएसआई और एसआई स्तर के अधिकारी गाड़ियों में घूमकर स्थिति को देख रहे थे। यह सब देखकर नए तरीके से जाब्ता लगाया गया। <br /><br /><strong>राजाराम को पकड़ने के लिए दबिश</strong><br />करौली उपद्रव की नामजद एफआईआर में शामिल जयपुर मेयर सौम्या गुर्जर के पति को पकड़ने के लिए पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। तीन अप्रैल से फरार राजाराम के लिए एक टीम यूपी भी भेजी गई है। करौली उपद्रव में पुलिस अभी तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। <br /><br />पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा ने धार्मिक आयोजनों को लेकर गत माह में ही लिखित में आदेश जारी कर दिए थे। करौली में इस आदेश को गम्भीरता से नहीं लिया गया। किसी भी लापरवाह अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। <br />-<strong>मोहन लाल लाठर, पुलिस महानिदेशक, राजस्थान</strong><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>तीन सदस्यीय कमेटी ने सीएम गहलोत को सौंपी रिपोर्ट, दोनों पक्षों की गलती और पुलिस की भी लापरवाही मानी</strong></span><br /> करौली पथराव मामले में कांग्रेस की गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने मौका स्थल का दौरा कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंप दी है। रिपोर्ट में दोनों पक्षों की गलती मानी है और पुलिस की लापरवाही भी बड़ा कारण है। <br />इस कमेटी में भरतपुर संभाग प्रभारी विधायक डॉ. जितेन्द्र सिंह, राज्य अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष विधायक रफीक खान और करौली प्रभारी ललित यादव थे।  कमेटी सदस्य ललित यादव ने बताया कि रैली निकालने वाले लोगों की गलती यह थी कि वे लगातार भड़काऊ नारेबाजी करते रहे तो वहीं छतों पर मौजूद दूसरे पक्ष की गलती यह थी कि उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रखकर पथराव किया। गहलोत को सौंपी रिपोर्ट में कमेटी ने सिफारिश की है कि सीसीटीवी फुटेज में जो नजर आ रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। घटनाक्रम में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने में किसी भी पार्टी के व्यक्ति ने कोशिश की हो, उसके खिलाफ बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। रिपोर्ट में पुलिस की भी गलती मानी है।रैली में लाउड स्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होने के बावजूद पुलिस ने नहीं रोका। प्रशासन के पास मौजूद 30 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को रैली में नहीं लगाकर रिजर्व में बिठाए रखा। रिपोर्ट में हिंसा और आगजनी घटना में हुए नुकसान का ब्यौरा भी दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 13:28:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत की सुनामी,  'आप' पड़ी बड़ी पार्टियों पर भारी </title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव परिणामों में आम आदमी पार्टी ने इतिहास बनाया है। पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/tsunami-of-aam-aadmi-party-s-victory-in-punjab--aap-heavy-on-big-parties/article-5919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/punjab.jpg03.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चंडीगढ़। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा चुनावों के परिणाम जारी हो गए है। चुनाव परिणामों में आम आदमी पार्टी ने इतिहास बनाया है। पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। आम आदमी पार्टी को</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"> 92 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत मिली है। जबकि पंजाब में कांग्रेस को महज 18 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं अकाली दल को 4 सीटों पर जीत मिली है।  भाजपा चार राज्यों में धमाल मचाने के बाद भी पंजाब में कुछ खास नहीं कर पाई और बीजेपी को यहां महज 2 सीटों पर जीत मिली।  अन्य के खाते में सिर्फ 1 सीट आईं है। <br /></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"><span lang="hi" xml:lang="hi"> उल्लेखनिय है कि यह पहली बार होगा</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> जब पंजाब में आप की सरकार बनेगी। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक<span>  </span>अरविंद केजरीवाल ने जनादेश के लिये लोगों का आभार व्यक्त किया है। इस चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेता और मंत्री चुनाव हार गए है। इनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल है। </span></span></p>
<p><strong> पंजाब में बड़े-बड़े चेहरे भी हार गए</strong><br />पंजाब में आप ने सियासी बदलाव नई परिभाषा तय कर दी। यहां आम आदमी पार्टी ने न सिर्फ  बहुमत के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया, बल्कि बड़े-बड़े चेहरों को भी करारी शिकस्त दी। सीएम चन्नी, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल जैसे लोग भी झाडू में उड़ गए। 30 साल में यह पहली बार है कि बादल परिवार विधानसभा से बाहर हो गया है।<br /><br /><strong>आप को पहली बार मिला पूर्ण राज्य</strong><br />आम आदमी पार्टी को पंजाब में पहली बार किसी पूर्ण राज्य की कमान मिली है। आप की दिल्ली में सरकार है लेकिन इसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है।<br /><br /><strong>भगत सिंह के गांव में शपथ लेंगे मान</strong><br />पंजाब में सीएम के चेहरा रहे भगवंत मान ने जीत के बाद कहा कि यह आप की नहीं बल्कि जनता की सरकार होगी। सरकार जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए उसके द्वार तक जाएगी। मान ने कहा कि वह शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़कलां में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में मुख्यमंत्री के रूप में उनकी तस्वीर नहीं लगेगी।</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव आयोग के जारी आंकड़ों के अनुसार आम आदमी पार्टी को 92</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';">,<span>  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस को</span> 18, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा को</span> 2, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिअद को</span> 4, <span lang="hi" xml:lang="hi"> अन्य को</span> 1<span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर जीत मिली है। </span></span></p>
<p> </p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 11:42:22 +0530</pubDate>
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                <title>अलवर में दिव्यांग नाबालिग मामले में गहलोत की अपील,  राजनीतिक दल नहीं करे बयानबाजी,  पुलिस के स्वतंत्र रूप से अनुसंधान शीघ्र पूर्ण करने पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अलवर दिव्यांग नाबालिग मामले में राजनीतिक दल नहीं करे अनर्गल बयानबाजी-गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%97-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%B2---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80---%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%98%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B0/article-3994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/ashok_gehlot_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अलवर में बच्ची से हुई हैवानियत पर प्रदेश में सियासी बयानबाजी को दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी सहित अन्य राजनीतिक दल मामले को लेकर गहलोत सरकार पर गम्भीर आरोप लगा रहे है। ऐसे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि अलवर में दिव्यांग नाबालिग मामले में राजनीतिक दलों द्वारा अनर्गल बयानबाजी नहीं करनी चाहिए और पुलिस को स्वतंत्र रूप से अनुसंधान शीघ्र पूर्ण करने देना चाहिए। गहलोत ने इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आने के बाद शुक्रवार देर रात यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में राजनीतिक दलों द्वारा अनर्गल बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए। पुलिस को स्वतंत्र रूप से अनुसंधान शीघ्र पूर्ण करने देना चाहिए।<br />  </p>
<p>उन्होंने कहा कि अनुंसधान के नतीजे तक पहुंचने के बाद ही टिप्पणी करना न्यायोचित होगा। अलवर में विमंदित बालिका के प्रकरण के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, एसपी अलवर व बालिका का इलाज कर रहे वरिष्ठ डॉक्टरों से संपर्क बना हुआ है। डीजी पुलिस को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अनुसंधान कर शीघ्र मामले की तह तक पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलवर एसपी की सहायता के लिए राज्य स्तर से डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में अनुंसधान के लिए अलग से टीम भेजी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jan 2022 12:03:41 +0530</pubDate>
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                <title>गहलोत बोले....कोविड के चलते राजनीतिक पार्टियों की रैलियों पर अविलंब रोक लगाए चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[रैलियों की जगह प्रचार के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87----%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%8F-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97/article-3813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/ashok_gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के कारण चुनाव टाले नहीं जा सकते, परन्तु कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग को राजनीतिक पार्टियों की रैलियों पर अविलंब रोक लगा देनी चाहिए। रैलियों की जगह प्रचार के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल होना चाहिए।<br /> <br /> गहलोत ने कहा कि आज सूचना प्रोद्योगिकी का युग है इसलिए प्रचार भी IT एवं सोशल मीडिया आधारित होना चाहिए। <br /> चुनाव आयोग टीवी, रेडियो इत्यादि कम्युनिकेशन माध्यमों पर सभी पार्टियों को टाइम स्लॉट बांट दे जिससे सभी पार्टियों को प्रचार के समान अवसर मिल सकें। बड़ी रैलियों की जगह कोविड प्रोटोकॉल के तहत घर-घर प्रचार किया जाए। हम अधिकांश देशवासी अभी तक कोविड की दूसरी लहर की भयावहता को भूले नहीं है। पिछले साल अप्रैल-मई के महीने में किस तरह अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल रहे थे एवं ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की तड़पते हुए मृत्यु हुई। अब देश के सामने कोरोना की तीसरी लहर है। विशेषज्ञों के अनुसार ओमिक्रोन आगे जाकर क्या नया रूप लेगा यह अभी किसी को मालूम नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jan 2022 14:41:37 +0530</pubDate>
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                <title>वोटर कार्ड से आधार नंबर को जोड़ने वाले बिल को लोकसभा की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने किया विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A5%9C%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-3391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/17.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद वोटर आईडी कार्ड से आधार नंबर को जोड़ने के प्रस्ताव वाले विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है। चुनाव सुधार बिल पर विपक्षी दलों ने लोकसभा में भारी हंगामा किया। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने इसकी जरूरत पर सवाल उठाए। वहीं सरकार ने दलील दी कि विधेयक के जरिए फर्जी वोटिंग पर रोक लगाई जा सकेगी।</p>
<p><br />लोकसभा में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आधार और वोटर कार्ड को लिंक करने से फर्जी मतदाताओं पर लगाम लगेगी। सदस्यों ने इसका विरोध करने को लेकर जो तर्क दिए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत तरीके से पेश करने का प्रयास है।  यह शीर्ष अदालत के फैसले के अनुरूप ही है। बता दें कि इस बिल को पेश किए जाने का तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, बसपा और ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने विरोध किया। </p>
<p><br />ओवैसी ने किया बिल का विरोध : एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि सरकार इस बिल का अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर सकती है इसलिए मैं चाहता हूं इस बिल को संसद में रखने जाने को लेकर डिविजन हो। उन्होंने बार-बार डिविजन की बात दोहराई और हंगामा जारी रहा। </p>
<p><strong><br />बांग्लादेशी-नेपाली भारत के सांसद नहीं बनेंगे </strong> : लोकसभा में विधेयक पर चर्चा करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ संस्थानों को बर्बाद करती है, चुनाव आयोग जैसी संस्था को इसने गिरवी रख दिया। उन्होंने कहा कि आपको याद होगा एमएस गिल जो चीफ इलेक्शन कमिश्नर हुआ करते थे, वह कांग्रेस के सांसद बने और कांग्रेस ने उन्हें मंत्री बनाया। इसीलिए वह चुनाव आयोग को बंधक बनाकर रखना चाहती है। हमारी सरकार जो एक बिल लेकर आई है एक सीरियस रिफॉर्म लेकर आई है, उसको यह बर्बाद करना चाहती है। कांग्रेस हमेशा दावा करती है कि आधार हम लेकर आए। अगर आज हम आधार को चुनावी सुधार से जोड़ रहे हैं कौन सा अन्याय कर रहे हैं। क्योंकि इनको बांग्लादेशियों को वोटर बनाना है।  </p>
<p><strong><br />कांग्रेस ने की स्टैंडिंग कमेटी में भेजने की मांग</strong><br />कांग्रेस ने कहा कि इस विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। लोकसभा में बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि आधार एक 12 अंकीय विशिष्ट पहचान संख्या हैं, जिसमें नागरिकों की बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय जानकारी शामिल है। आधार केवल निवास का प्रमाण होना चाहिए, यह नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आप वोटर्स से आधार मांग रहे हैं तो आपको केवल एक दस्तावेज मिलेगा, जो नागरिकता नहीं बल्कि उसका निवास बताता है। ऐसा करके आप संभावित रूप से गैर-नागरिकों को भी मतदान का अधिकार दे रहे हैं। <br /><br /><strong>रुकेगा मतदाता सूचि में दोहराव</strong><br />इस विधेयक के माध्यम से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में संशोधन किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए वोटर कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए विधेयक के मुताबिक, चुनाव संबंधी कानून को सैन्य मतदाताओं के लिए लैंगिक निरपेक्ष बनाया जाएगा। वर्तमान चुनावी कानून के प्रावधानों के तहत, किसी भी सैन्यकर्मी की पत्नी को सैन्य मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की पात्रता है, लेकिन महिला सैन्यकर्मी का पति इसका पात्र नहीं है, प्रस्तावित विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने पर स्थितियां बदल जाएंगी। निर्वाचन आयोग ने विधि मंत्रालय से जनप्रतिनिधित्व कानून में सैन्य मतदाताओं से संबंधित प्रावधानों में ‘पत्नी’ शब्द को बदलकर ‘स्पाउस’ (जीवनसाथी) करने को कहा था। बिल के तहत एक अन्य प्रावधान में युवाओं को मतदाता के रूप में प्रत्येक वर्ष चार तिथियों के हिसाब से पंजीकरण कराने की अनुमति देने की बात है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 11:55:09 +0530</pubDate>
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                <title>सभी के लिए चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए इस बार क्रिसमस की पार्टियों के आयोजन रद्द कर दिए जाएं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इसके लिए तैयार नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%80/article-3296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/corona4.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व के कई देशों में कोरोना के नए वेरियंट ओमिक्रॉन के फैल रहे संक्रमण के बीच ब्रिटेन से खबर आई है कि वहां विशेषज्ञों ने साफ  कहा है कि ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए इस बार क्रिसमस की पार्टियों के आयोजन रद्द कर दिए जाएं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इसके लिए तैयार नहीं हैं। खतरा सिर्फ  ब्रिटेन पर नहीं, उन सब पर है, जिन्होंने सावधानी बरतनी बंद कर दी है। यह चेतावनी हम सबके लिए भी है, क्योंकि ओमिक्रॉन अब भारत पहुंच चुका है। कोरोना संक्रमण की तुलना हम आमतौर पर इसके पहले आई महामारी स्पैनिश फ्लू से करते हैं। 1918 में फैली यह महामारी हर मामले में कोविड से ज्यादा खतरनाक थी। दो साल के अंदर ही इसने करोड़ों लोगों की जान ले ली और उसके बाद यह हमेशा के लिए विदा हो गई। इस महामारी के खत्म होने के 13 साल बाद यह पता लगाया जा सका कि यह किस वायरस की वजह से फैली थी। जिसे आज हम वायरस कहते हैं, उस समय तक उसे खोजा भी नहीं जा सका था। इसलिए उस दौर में उस संक्रमण का जो इलाज हुआ, वह बहुत कुछ अंधेरे में तीर चलाने जैसा ही था। फिर भी मास्क लगाने, हाथ धोने, सार्वजनिक स्थानों पर जमा होने पर पाबंदियां, क्वारंटीन और सामाजिक दूरी जैसे प्रोटोकॉल उस दौर के चिकित्सकों ने भी लागू कर दिए थे। हालांकि, यह सब किस तरह से मददगार हैं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उस समय तक मौजूद नहीं था।मिशिगन विश्वविद्यालय में औषधि इतिहास के प्रोफेसर जे एलेक्जेंडर नवारो ने पिछले दिनों जब 1918 के अमेरिकी समाज के रवैए और आज के समाज के रवैए की तुलना की, तो उन्हें बहुत दिलचस्प समानताएं दिखाई दीं। स्पैनिश फ्लू की पहली लहर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुई थी कि अमेरिका में पाबंदियों को हटाने की मांग होने लगी थीं। थियेटर और डांस बार के मालिक कारोबार फिर से शुरू करने की मांग करने लगे थे। उनका कहना था कि कारोबार का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्कूल खोलने की मांग होने लगी थी। धीरे-धीरे पाबंदियां ढीली पड़ती गईं और तभी स्पैनिश फ्लू की दूसरी लहर ने हमला बोला, जो पहली से ज्यादा घातक थी। इस लिहाज से देखें, तो पिछले सौ साल में विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। अब कम से कम हम यह ठीक से जानते हैं कि यह महामारी कैसे फैलती है, किससे फैलती है और किस तरह से हमें अपना शिकार बनाने के लिए खुद को बदलती है। अब हम यह भी जानते हैं कि भले ही इससे पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन इसे कैसे खुद से दूर रखने की कोशिश की जा सकती है। हमारे पास अभी इसका पक्का इलाज नहीं है, लेकिन इससे होने वाले नुकसान और उससे निपटने के तरीकों के बारे में हमने पिछले डेढ़ साल में एक समझ जरूर बना ली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 15:26:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>बचाव है जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[लगता है कोरोना की पहली और दूसरी लहर की त्रासदी से भारत की बड़ी आबादी सरकारों व राजनीतिक दलों ने कोई सबक नहीं लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-3258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/corona3.jpg" alt=""></a><br /><p>लगता है कोरोना की पहली और दूसरी लहर की त्रासदी से भारत की बड़ी आबादी सरकारों व राजनीतिक दलों ने कोई सबक नहीं लिया है। जब से कोरोना के नए रूप ओमिक्रॉन का मामला सामने आया था, तभी हमारे कई विशेषज्ञों व विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दे दी थी कि अगर समय रहते पर्याप्त इंतजाम नहीं किए और इस पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो यह खतरनाक रूप धारण कर सकता है। ओमिक्रॉन की जानकारी सामने आने के बाद भी देश की बड़ी आबादी सावधानी बरतना जरूरी नहीं समझ रही है। ऐसा होने से अब ओमिक्रॉन ने देश के विभिन्न भागों में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। शुरू में कर्नाटक सहित कुछ राज्यों में ओमिक्रॉन की मौजूदगी की जानकारी मिली थी लेकिन अब यह कई राज्यों में फैल गया है। अब तक इसके संक्रमितों की संख्या 39 तक के आंकड़े को पार कर गई है। कोरोना वायरस का हर रूप धीरे-धीरे ही पांव पसारत हुआ व्यापक रूप धारण कर लेता है, ऐसा हमारा पिछला अनुभव भी बताता है। ओमिक्रॉन के खतरे के संदर्भ में केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों व नागरिकों को चेताया है कि मास्क के उपयोग को अनिवार्य बनाएं। जिनके दोनों टीके लग चुके हैं उन्हें भी मास्क लगाने की सख्त जरूरत है, क्योंकि ओमिक्रॉन से बचाव के लिए टीका नाकाफी साबित होता देखा जा रहा है। केन्द्र की चेतावनी उचित है लेकिन पर्याप्त नहीं है। कई राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भीड़ में राजनीतिक रैलियों से संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ने की संभावना है। ऐसा पहले हो चुका है। केन्द्र, राज्य सरकारों व विशेषकर चुनाव आयोग को इसके लिए विशेष निर्देश व पाबंदियां लगा देने की सख्त जरूरत है। जो लोग मास्क नहीं लगाते हैं उनके खिलाफ भी सख्ती बरतने की जरूरत है। हमारे देश में 80 प्रतिशत लोग मास्क की उपेक्षा करते देखे जा रहे हैं जबकि जापान व दक्षिण कोरिया में 92 प्रतिशत लोग मास्क का उपयोग कर संक्रमण के फैलाव से अपने देशों को बचा रहे हैं। ओमिक्रॉन को हल्के में कहना खतरनाक है। इसे समय रहते नियंत्रण में रखना देश व समाज के हित में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Dec 2021 14:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>विपक्ष के 16 दलों के सांसदों की अहम बैठक, तृणमूल के नेता नहीं हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने आगे की रणनीति की तय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A5%87-16-%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95--%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2/article-2840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/vipaksh-bethak.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के 12 सदस्यों के निलंबन को लेकर विपक्ष के 16 दलों के नेताओं की मंगलवार को बैठक हुई जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया गया। बैठक राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े के संसद में स्थित कार्यालय में हुई जिसमें इन नेताओं ने कहा कि सदन में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिसके कारण से विपक्ष के सांसदों को शीतकाल के पूरे सत्र के लिए निलंबित किया जाए। बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी साथ ही कई प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी, भाकपा, माकपा, राजद, नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित 16 दलों के नेताओं ने भाग लिया। इस बैठक मै तृणमूल के नेता शामिल नहीं हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 12:50:28 +0530</pubDate>
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