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                <title>strategy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरान के साथ युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक परमाणु मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता : पीएम नेतन्याहू</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उसके परमाणु केंद्रों को नष्ट और यूरेनियम भंडार को बाहर नहीं किया जाता। उन्होंने कूटनीति विफल होने पर सैन्य विकल्प के संकेत दिए हैं। ट्रंप द्वारा ईरानी प्रस्ताव ठुकराने के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/war-with-iran-will-not-end-until-nuclear-issues-are/article-153456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/benjamin-netanyahu.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक 'खत्म नहीं होगा', जब तक कि प्रमुख रणनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता जिनमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाना, परमाणु केंद्रों को नष्ट करना और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना शामिल है। मीडिया से रूबरू होते हुए नेतन्याहू ने कहा, "यह अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि अब भी वहां परमाणु सामग्री और संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इसे ईरान से बाहर निकालना होगा। अब भी वहां संवर्धन केंद्र हैं, जिन्हें नष्ट करना बाकी है।" उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करना जारी रख रहा है और अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल के ईरान पर किये गये हमलों के बाद हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी व्यावहारिक व्यवस्था के तहत संवर्धित यूरेनियम को वहां से से हटाना होगा। उन्होंने कहा, "अगर आपके पास कोई समझौता है और आप अंदर जाकर उसे बाहर निकाल लेते हैं, तो क्यों नहीं? यही सबसे अच्छा तरीका है।"</p>
<p>पीएम नेतन्याहू इस बात से सहमत हैं कि समझौता होना चाहिए, लेकिन परमाणु मुद्दा समझौता-योग्य नहीं है । उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब अमेरिका का रुख है कि किसी भी व्यापक शांति ढांचे के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से रोकना होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में शांति प्रस्ताव पर ईरान की नवीनतम प्रतिक्रिया को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया था। वहीं ईरान ने संवर्धन को पूरी तरह से रोकने की मांगों को खारिज कर दिया है। खबरों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत कुछ सामग्री को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है।</p>
<p>पीएम नेतन्याहू ने एक संभावित दृष्टिकोण की रूपरेखा भी पेश की है। इसमें कूटनीति अगर विफल रहती है तो संवर्धित यूरेनियम को भौतिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने 'सैन्य विकल्पों' का खुलासा करने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सीमित अवधि के लिए संवर्धन स्थगित करने की इच्छा जतायी है, हालांकि यह अमेरिका के प्रस्तावित 20 साल के प्रतिबंध की तुलना में कम अवधि के लिए है। साथ ही ईरान ने अपने परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को खारिज कर दिया है। खबर है कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिये बातचीत जारी है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और सत्यापन तंत्र पर गहरे मतभेदों के बीच एक व्यापक समझौता फिलहाल दूर नजर आ रहा है।</p>
<p>ईरानी नेताओं का कहना है कि उनके प्रस्ताव जायज हैं और उनका उद्देश्य एक संतुलित समझौता सुनिश्चित करना है। पीएम नेतन्याहू की ये टिप्पणियां इस सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले आयी हैं, जहां उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उम्मीद है। युद्ध और उसके बाद ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किये जाने से वैश्विक ऊर्जा लागत में उछाल आया है और अमेरिका में गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:44:44 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pejeshkyan-claims-that-mujtaba-khamenei-has-emerged-as/article-153244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mojtaba-khamenei-iran-new-supreme-leader.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"</p>
<p>ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बड़े बदलाव की तैयारी: योगी सरकार कैबिनेट विस्तार और संगठन में जल्द होगा फेरबदल, इन दिग्गजों के नामों को लेकर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बंगाल के बाद अब भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। योगी सरकार में 10 से 15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार और बड़े संगठनात्मक बदलाव संभावित हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए पिछड़ा वर्ग, दलित और महिलाओं को विशेष प्रतिनिधित्व देकर 2027 की चुनावी बिसात बिछाई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-government-is-preparing-for-big-changes-in-up-before/article-153231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/yogi-cabinet.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश पर फोकस करने जा रहा है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। दरअसल पार्टी और सरकार स्तर पर होने वाले ये बदलाव भाजपा के लिए सामाजिक, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का अहम अवसर माने जा रहे हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, संगठन में फेरबदल, योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट विस्तार तथा विभिन्न आयोगों, निगमों और बोर्डों में खाली पदों पर नियुक्तियां जल्द हो सकती हैं।</p>
<p>पार्टी का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले यह आखिरी बड़ा मौका होगा, जब विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व दिया जा सके। भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ओर ध्यान देगा। संगठनात्मक बदलाव, कैबिनेट विस्तार और विभिन्न निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी पहले ही हो चुकी है।”</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल 10 से 15 मई के बीच कभी भी हो सकता है। करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या विभागीय बदलाव को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। भाजपा सांसद ने बताया कि भाजपा इस फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके जरिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की भी तैयारी है। लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और भाजपा के सामाजिक गठबंधन में आई चुनौतियों को देखते हुए पार्टी विभिन्न जातीय समूहों, क्षेत्रों और समुदायों के प्रतिनिधित्व का नए सिरे से आकलन कर रही है।</p>
<p>सांसद ने कहा, “ पार्टी विशेष रूप से उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है, जहां उसे समर्थन में कमी महसूस हुई है या जहां विपक्ष अपनी सामाजिक पैठ बढ़ाने में जुटा है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक-दो महिलाओं को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। साथ ही ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, कुर्मी, पासी, पाल और वाल्मीकि समुदायों को साधने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।”<br />सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा मनोज पांडेय, अशोक कटारिया, कृष्णा पासवान और पूजा पाल के नाम भी चर्चा में हैं।</p>
<p>सरकार के अलावा संगठनात्मक स्तर पर भी बड़े बदलाव संभावित हैं। पार्टी संगठन में कई पद लंबे समय से लंबित हैं, जबकि अनेक आयोगों, बोर्डों और निगमों में नियुक्तियां अभी बाकी हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों के नेताओं को समायोजित करने के साथ-साथ आंतरिक संतुलन साधने की कोशिश करेगी। भाजपा सांसद का मानना है कि भाजपा का पूरा फोकस पिछड़ा वर्ग, दलित और गैर-प्रभावशाली जातियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। साथ ही उन क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी, जहां पार्टी को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी नहीं मिल सकी है।</p>
<p>सूत्रों की मानें तो महिला प्रतिनिधित्व को भी भाजपा विशेष महत्व दे सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं और लाभार्थी राजनीति को देखते हुए पार्टी महिला वोटरों के बीच अपना संदेश और मजबूत करना चाहती है। भाजपा सूत्रों का मानना है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी को कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक संतुलन साधना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट विस्तार, संगठनात्मक बदलाव और निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को भाजपा राजनीतिक संदेश और सामाजिक संतुलन के बड़े अभियान के रूप में इस्तेमाल कर सकती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा कि जहां तक पार्टी में बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा का सवाल है तो पार्टी नेतृत्व को जो उचित लगेगा वो कदम उठाएगी । भाजपा का कार्यकर्ता 2027 चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:27:45 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल में मिली जीत के बाद यूपी में रणनीति बदलेगी भाजपा : गृह मंत्री और राष्ट्रीय महासचिव को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, पार्टी नेताओं का मानना- केवल संगठनात्मक मजबूती से यूपी की चुनौती का समाधान संभव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में जीत के बाद भाजपा अब यूपी 2027 मिशन पर फोकस बढ़ा रही है। पार्टी में चर्चा है कि अमित शाह और सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। 2024 लोकसभा में झटके और सपा की PDA रणनीति के बाद भाजपा जातीय समीकरण, संगठन और बूथ मैनेजमेंट को फिर मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-the-victory-in-bengal-bjp-will-change-its-strategy/article-153015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अगली चुनावी लड़ाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के अंदर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को प्रदेश में अधिक सक्रिय और प्रत्यक्ष भूमिका दी जा सकती है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के जातीय समीकरणों को फिर से मजबूत किया जा सके। यह अटकलें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की हालिया सफलता के बाद तेज हुई हैं, जहां बूथ स्तर की मजबूत रणनीति और संगठनात्मक समन्वय ने पार्टी को बड़ी जीत दिलाई और 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हालांकि भाजपा के भीतर यह समझ भी है कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से कहीं अधिक जटिल हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि केवल संगठनात्मक मजबूती से यूपी की चुनौती का समाधान संभव नहीं होगा, क्योंकि यहां जातीय समीकरण चुनावी राजनीति का सबसे अहम आधार बने हुए हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक मामलों की निगरानी बीएल संतोष और विनोद तावड़े कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यूपी की सामाजिक और जातीय संरचना को देखते हुए ऐसे नेताओं की जरूरत है जिन्हें राज्य की चुनावी जमीन का गहरा अनुभव हो। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा कि अमित और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने वाले सुनील बंसल को फिर से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गृहमंत्री अमित यूपी की राजनीति पर पहले से ज्यादा सीधी नजर रख सकते हैं, जबकि सुनील बंसल को राज्य का प्रभारी बनाकर चुनावी तैयारियों की कमान दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की ताकत लंबे समय तक सवर्ण, गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलितों के व्यापक सामाजिक गठजोड़ पर आधारित रही है। इसके साथ पार्टी ने मजबूत हिंदुत्व एजेंडे के जरिए अपनी पकड़ बनाई, लेकिन हालिया चुनावों में इस सामाजिक समीकरण में कमजोरी के संकेत दिखाई दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दरअसल अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए जातीय राजनीति को नए तरीके से संगठित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता तो बचाने में सफल रही, लेकिन पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया गया कि मुकाबला उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन था। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव ने भाजपा के सामने नई चुनौती को और स्पष्ट कर दिया। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटें जीतकर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाई। भाजपा का आंकड़ा 2019 की 62 सीटों से घटकर 2024 में 33 पर पहुंच गया। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि 2022 और 2024 के अनुभव अभी भी पार्टी के लिए चेतावनी की तरह हैं और संगठन किसी भी तरह की आत्मसंतुष्टि से बचना चाहता है। इसलिए अमित और सुनील बंसल का दखल उत्तर प्रदेश में बढ़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करीब एक दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने के कारण भाजपा को स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी और विभिन्न समुदायों में प्रतिनिधित्व की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पार्टी अब भी अपनी कल्याणकारी योजनाओं के विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था की छवि को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पार्टी को यह समझना होगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति कहीं अधिक जटिल है। भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी ने बताया कि हिंदी पट्टी में जातीय राजनीति बेहद पेचीदा है। भाजपा को अपना सामाजिक गठबंधन दोबारा मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर काम करने और विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने के लिए गंभीर मेहनत करनी होगी, जो 2024 में कमजोर पड़ती दिखाई दी थी। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में ऐसे नेताओं की जरूरत पड़ेगी जो यहाँ की चुनावी गणित को बेहतर तरीक़े से समझते हों।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:23:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने की ईरान युद्ध खत्म होने की घोषणा, कहा-'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने हासिल किए लक्ष्य, भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर होगा। अमेरिका अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, हालांकि जवाबी कार्रवाई के विकल्प खुले रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-announced-the-end-of-iran-war-said-operation/article-152877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया प्रमुख सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब समाप्त हो गया है। ह्वाइट हाउस में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे के आसपास प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस अभियान के अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किये गये आक्रामक सैन्य अभियान के सभी रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिये गये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने अब अपने आक्रामक चरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब ध्यान भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।</p>
<p>इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत अब सेना 'आक्रामक' रुख छोड़कर 'रक्षात्मक' मुद्रा में आ गयी है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब नयी जंग शुरू करने के बजाय अमन को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने हालांकि यह चेतावनी भी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में ताकत के इस्तेमाल का विकल्प अब भी खत्म नहीं हुआ है। यदि अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होता है तो अमेरिका अपनी पूरी शक्ति के साथ जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p>आक्रामक अभियान की समाप्ति के बाद अब अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की है। इस नये मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना और फिर से खोलना है। 'टाइम' और 'सीएनए' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेगी। रुबियो ने इसे एक 'रक्षात्मक कवच' बताते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी सेना पर गोली नहीं चलायी जायेगी, तब तक उनकी तरफ से कोई हमला नहीं होगा, लेकिन वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए मुस्तैद रहेंगे।</p>
<p>व्हाइट हाउस की इस ब्रीफिंग में यह संदेश भी दिया गया कि अब सारा ध्यान सैन्य कार्रवाई से हटकर कूटनीति पर रहेगा। अमेरिका का अगला लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अंत एक बड़े युद्ध के थमने का संकेत तो है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और कड़ी निगरानी अब भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दक्षिण कोरिया का ट्रंप को बड़ा झटका: अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल हो या नहीं, प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल होने पर विचार कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की मुक्त आवाजाही साझा वैश्विक हित में है। ऊर्जा आपूर्ति के लिए खाड़ी पर निर्भर सियोल, ईरान के बढ़ते नियंत्रण के बीच आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/south-koreas-big-blow-to-trump-the-proposal-to-join/article-152838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह अमेरिका के नेतृत्व वाले 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' में शामिल होने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी प्रतिबंध के बीच सहयोगी देशों के वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सुरक्षा और मुक्त आवाजाही सभी देशों के साझा हित में है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार संरक्षित किया जाना चाहिए।"</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि इसी सिद्धांत के आधार पर अमेरिका के प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप की सैन्य तैयारी और घरेलू कानूनों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। बयान में यह भी कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री मार्गों के सुरक्षित उपयोग को लेकर दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच करीबी समन्वय बना हुआ है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा करने के बाद दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों की समुद्री आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्योंकि सियोल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले आयात पर काफी निर्भर है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के आर्थिक प्रभाव से एशिया-प्रशांत क्षेत्र को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, वैश्विक ईंधन संकट गहरा सकता है और लाखों लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक विनिर्माण का आधे से अधिक हिस्सा एशिया में होने के कारण इस क्षेत्र में किसी भी आर्थिक झटके का व्यापक असर पूरी दुनिया की आपूर्ति शृंखला पर पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:03:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का यूटर्न : ''प्रोजेक्ट फ्रीडम'' पर लगाई रोक, बोले-होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते में बड़ी प्रगति का दावा किया है। ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के लिए शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को फिलहाल रोक दिया गया है। यह निर्णय आपसी सहमति और पाकिस्तान सहित अन्य देशों के अनुरोध पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-ban-on-u-turn-project-freedom-said-a/article-152837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी घोषणा किया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रोजेक्ट फ्रीडम को स्थगित करने का निर्णय लिया है ताकि यह आकलन किया जा सके कि शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है या नहीं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध, ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान मिली जबरदस्त सैन्य सफलता और इसके अलावा, ईरान के प्रतिनिधियों के साथ पूर्ण एवं अंतिम समझौते की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति के आधार पर, हमने पारस्परिक रूप से सहमति व्यक्त की है कि नाकाबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी लेकिन प्रोजेक्ट फ्रीडम को थोड़े समय के लिए रोक दिया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि समझौता अंतिम रूप दिया जा सकता है या नहीं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 12:31:04 +0530</pubDate>
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                <title>अमित शाह बंगाल और नड्डा असम में पर्यवेक्षक, पार्टी ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने असम और पश्चिम बंगाल के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। गृहमंत्री अमित शाह बंगाल में और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा असम में विधायक दल के नेता का चुनाव कराएंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और नायब सिंह सैनी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे, जो पार्टी की रणनीतिक मजबूती का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/observer-party-handed-over-big-responsibility-to-amit-shah-in/article-152820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jp].png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भाजपा ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बंगाल और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को  असम के लिए पर्यवेक्षक बनाया । भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में शाह पश्चिम बंगाल में पार्टी के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक होंगे। वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।  </p>
<p>सिंह ने बताया कि नड्डा असम में पार्टी के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक होंगे। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सह पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 10:58:20 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश का केंद्र पर हमला: 2027 चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर सरकार अपना रुख साफ करें, बंगाल में मिली प्रंचड़ जीत पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र से महिला आरक्षण को यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में तुरंत लागू करने की चुनौती दी है। प्रधानमंत्री मोदी के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सामाजिक न्याय से जोड़ा। सपा अब इस अधिकार की मांग को लेकर प्रदेश भर में साप्ताहिक आंदोलन करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhileshs-attack-on-the-center-government-should-clear-its-stand/article-152731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की स्पष्ट मांग है कि संसद में पारित महिला आरक्षण को उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव में लागू करने की तत्काल घोषणा की जाए। अखिलेश यादव ने कहा कि यह विधेयक समस्त विपक्ष के सहयोग से पारित हुआ है, ऐसे में अब केंद्र सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सरकार इस पर घोषणा नहीं करती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या केंद्र सरकार और उसके सहयोगी दल महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा नहीं की जाती, तब तक उनकी पार्टी इस मांग को लगातार उठाती रहेगी। पार्टी हर सप्ताह अलग-अलग स्थानों पर इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और महिला आरक्षण लागू कराने के लिए दबाव बनाएगी। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि प्रदेश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाना समय की मांग है।</p>
<p>गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली पार्टी कार्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए सपा पर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण का विरोध किया था लेकिन महिलायें उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। आने वाले समय में महिलायें समाजवादी पार्टी को सबक सिखाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:01:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सीडलिंग पब्लिक स्कूल में नई छात्र परिषद का गठन, 200 से अधिक छात्रों ने ली शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सीडलिंग पब्लिक स्कूल में सत्र 2026-27 के लिए 'इन्वेस्टिचर समारोह' का भव्य आयोजन हुआ। शतरंज की थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्रों ने नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। डॉ. संदीप बक्शी ने ईमानदारी और सेवा के साथ नेतृत्व करने का संदेश दिया, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-student-council-formed-in-seedling-public-school-more-than/article-152541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । सीडलिंग पब्लिक स्कूल में सत्र 2026-27 के लिए इन्वेस्टिचर समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें नई छात्र परिषद का औपचारिक गठन हुआ। “उद्देश्य के साथ नेतृत्व, ईमानदारी के साथ सेवा” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में 1500 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। समारोह में CEO एवं निदेशक डॉ. संदीप बक्शी तथा कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रीति बक्शी की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह आयोजन एक सप्ताह तक चले इन्वेस्टिचर एवं इंडक्शन कार्यक्रमों का समापन था, जिसमें कैम्ब्रिज विंग और जूनियर काउंसिल के लिए अलग-अलग समारोह आयोजित किए गए। कुल 200 से अधिक छात्रों को विभिन्न नेतृत्व भूमिकाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई, जो विद्यालय की सामूहिक नेतृत्व और छात्र सहभागिता में आस्था को दर्शाता है।</p>
<p>समारोह की थीम शतरंज के खेल से प्रेरित रही, जिसमें रणनीति, दूरदर्शिता और टीमवर्क के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में डॉ. संदीप बक्शी ने नेतृत्व को सेवा का माध्यम बताते हुए छात्रों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। डॉ. प्रीति बक्शी ने छात्रों से विनम्रता, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ नेतृत्व करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी वातावरण में हुआ, जिसने नई नेतृत्व पीढ़ी के उदय का संदेश दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:06:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दुश्मन देशों की खैर नहीं: सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय सेना का दल कंबोडिया रवाना, आतंकवाद-रोधी अभियानों पर होगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना का 120 सदस्यीय दल द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स-II के लिए कंबोडिया रवाना हो गया। 17 मई तक चलने वाले इस अभ्यास में आतंकवाद-रोधी अभियानों, ड्रोन संचालन और स्नाइपर रणनीतियों पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/enemy-countries-are-not-well-indian-army-team-leaves-for/article-152516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-army.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय सेना का एक दल भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय में हिस्सा लेने के लिए रविवार को कंबोडिया रवाना हो गया। यह अभ्यास सोमवार से 17 मई तक कंबोडिया के कंम्पोंग स्प्यू प्रांत स्थित तेचो सेन फ्नोम थॉम म्रियास प्रांतीय रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र (कैम्प बेसिल) में होगा। मित्र देशों के साथ भारत के सतत रक्षा सहयोग के तहत कंबोडिया के साथ यह द्विपक्षीय अभ्यास वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बदलते परिदृश्य में विशेष महत्व रखता है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अंतर्गत आयोजित इस अभ्यास में भारतीय सेना के दल में कुल 120 सैनिक शामिल हैं, जिनमें अधिकांश मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। कंबोडियाई दल में 160 सैनिक शामिल हैं, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।</p>
<p>यह संयुक्त अभ्यास संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के दौरान शांति सेना द्वारा सामना किए जाने वाले आतंकवाद-रोधी अभियानों की गतिशीलता के अनुरूप होगा। इस उद्देश्य को विभिन्न व्यावहारिक और व्यापक चर्चाओं तथा सामरिक अभ्यासों के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यापक सत्यापन अभ्यास किया जाएगा। अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार और स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता, समन्वय और कार्यात्मक तालमेल को बढ़ाना है।</p>
<p>यह अभ्यास न केवल वैश्विक शांति बनाए रखने में दोनों देशों की क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अर्ध-शहरी स्थिति में शत्रु बलों के खिलाफ विभिन्न अभियानों के दौरान प्राप्त सर्वोत्तम विधियों और संचालनात्मक अनुभवों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगा। संयुक्त सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय भारत और कंबोडिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है और यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। यह क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक समझ को भी बढ़ावा देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 16:09:07 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही, डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की दी चेतावनी : दिमित्रीव</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विशेषज्ञ किरिल दिमित्रीव ने चेतावनी दी है कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ईंधन की कमी से यूरोप में उड़ानें रद्द होने और वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kirill-dmitriev-warned-of-the-danger-of-diesel-and-jet/article-152524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vladimir.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के सीईओ और अन्य देशों के साथ निवेश एवं आर्थिक सहयोग के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रीव ने कहा कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है और उसे इसका एहसास भी नहीं है। दिमित्रीव ने एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा, "दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर नींद में चलती जा रही है और अब जाकर कुछ समझदार लोग इस पर ध्यान देना शुरू कर रहे हैं।" उन्होंने साथी निवेशक एरिक नटाल के ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तेल की कीमत जल्द ही 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी।</p>
<p>इससे पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने यूरोप में डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की चेतावनी दी थी।इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महानिदेशक विलियम वाल्श ने बाद में कहा कि जेट ईंधन की कमी के कारण मई के अंत तक यूरोप में उड़ानें रद्द होना शुरू हो सकता है जैसा कि पहले से ही कुछ एशियाई देशों में हो रहा है।</p>
<p>ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के कारण फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है और इससे तेल निर्यात और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इस अवरोध के कारण, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन एवं औद्योगिक उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:33:33 +0530</pubDate>
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