जी-7 में भारत

जी-7 में भारत

इस साल के जून माह में ब्रिटेन में आयोजित जी-7 सम्मेलन में भारत को आमंत्रित सदस्य के बतौर आमंत्रित करना काफी महत्वपूर्ण है। भारत का महत्व इसलिए है कि भारत में एक सफल लोकतांत्रिक व्यवस्था है और इस व्यवस्था के चलते हमने प्रगति व विकास किया है। जी-7 ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, कनाडा, फ्रांस, इटली व जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक विकसित देशों का समूह है।

इस साल के जून माह में ब्रिटेन में आयोजित जी-7 सम्मेलन में भारत को आमंत्रित सदस्य के बतौर आमंत्रित करना काफी महत्वपूर्ण है। भारत का महत्व इसलिए है कि भारत में एक सफल लोकतांत्रिक व्यवस्था है और इस व्यवस्था के चलते हमने प्रगति व विकास किया है। जी-7 ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, कनाडा, फ्रांस, इटली व जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक विकसित देशों का समूह है। पहले कभी रूस भी इस समूह में शामिल था, लेकिन फिर वह इससे अलग हो गया। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया व ऑस्ट्रेलिया भी इस सम्मेलन में विशेष आमंत्रित हैं। संभवत: आने वाले समय में कभी ये तीनों विशेष आमंत्रित देश जी-7 समूह को जी-10 का स्वरूप दे सकते हैं। वैसे भारत पहले से ही जी-20 देशों का सम्मानित सदस्य है, मगर जी-7 में बुलाया जाने का मतलब है भारत को आज इसे बढ़ती आर्थिक व्यवस्था माना जाता है।

दुनिया में कोरोना महामारी के फैलने के बाद यह पहला सम्मेलन होगा, जिसमें सभी देशों के शासनाध्यक्ष आमने-सामने होंगे और सभी को आपस में मिलने का अवसर मिलेगा। कोरोना की वजह से 2020 का अमेरिका में होने वाले जी-7 सम्मेलन को रद्द कर दिया गया था। इस सम्मेलन में वैसे तो कई मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन इस बार कोरोना के बाद विश्व की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के मुद्दे पर विशेष मंथन होगा। कोरोना ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को हिलाया है, बल्कि अमेरिका, फ्रांस व जर्मनी जैसे देशों को भी हिला कर रख दिया है। जाहिर है इससे निजात पाने के लिए किसी ने किसी संबंधित नीति के तहत उपाय खोजे जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन के दौरान राष्ट्राध्यक्षों से अलग-अलग मुलाकात कर सकते हैं और भारत संबंधी मसलों पर चर्चा कर सकते हैं। भारत को यह ध्यान रखना होगा कि इस सम्मेलन में कश्मीर के मामले में कुछ नेता मुखर हो सकते हैं क्योंकि अमेरिका व ब्रिटेन की संसद के कुछ सदस्यों ने तीखापन दिखाया था।

भारत को इसके प्रतिकार की पूरी तैयारी रखनी होगी और कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूती देने तथा वहां हो रहे विकास के बारे में बताना चाहिए। ऐसे सम्मेलनों का महत्व काफी होता है तो भारत को ऐसे सम्मेलनों का विशेष लाभ लेने की कोशिश करनी चाहिए और अपनी आंतरिक व आर्थिक ताकत को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। आगामी फरवरी माह में ब्रिटेन राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष का पद ग्रहण करेगा। ऐसे में भारत को ब्रिटेन के साथ अपने संबंधों को बढ़ाए रखना होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इस साल 26 जनवरी के समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, लेकिन कोरोना के बदले रूप की वजह से उनका दौरा रद्द हो गया, फिर भी बोरिस ने जून से पहले भारत आने की बात कही है, जो महत्वपूर्ण है।

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