अनुचित आचरण

विपक्षी दलों को समझना जरूरी है

अनुचित आचरण

सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में भीषण और राष्ट्र विरोधी अराजकता हो रही है, वह न केवल चिंतनीय है, बल्कि निंदनीय भी है।

सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में भीषण और राष्ट्र विरोधी अराजकता हो रही है, वह न केवल चिंतनीय है, बल्कि निंदनीय भी है। सेना में भर्ती की आकांक्षा रखने वाले युवक ही सेना में भर्ती की नई योजना के खिलाफ अपने विरोध की आड़ में ट्रेनों एवं बसों को आग लगा रहे हैं, सामान से भरे ट्रकों को फूंक रहे हैं, पुलिस व पुलिस चौकियों पर हमले कर रहे हैं और अन्य सरकारी व गैर सरकारी सम्पत्ति को ऐसे नष्ट कर रहे हैं, जैसे राष्ट्र विरोधी तत्व करते हैं। आखिर ऐसे युवक सेना में भर्ती होने के पात्र कैसे हो सकते हैं। इन युवाओं के साथ देश की आम जनता व विपक्षी दलों को यह समझना जरूरी है कि सेना का आधुनिकीकरण अति आवश्यक हो चुका है, क्योंकि युद्ध के तौर-तरीके बदल चुके हैं। अब सैनिकों का तकनीकी रूप से दक्ष होना और उन्हें हर तरह के कौशल से लैस होना अनिवार्य हो गया है। भविष्य के युद्धों में सेनाएं आमने-सामने नहीं होंगी। युद्ध तकनीक के जरिए लड़े जाएंगे, जिनमें मिसाइलों, ड्रोन आदि की भूमिका अधिक होगी। भारतीय सेना को युद्ध की नवीनतम तकनीक से तभी सुसज्जित किया जा सकता है जब सैनिकों की संख्या में कटौती करने और उनके वेतन एवं पेंशन खर्च कम किए जाएंगे। ऐसा करके ही सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक धनराशि का प्रबंध किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अग्निपथ जैसी योजना तैयार की गई है। अभी हमारे देश में कुल बजट का 56 फीसदी तक सेना पर खर्च हो रहा है, इतने खर्च के बाद भी सेना का आधुनिकीकरण रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। सेना को जारी बजट का बड़ा हिस्सा वेतन व पेंशन पर खर्च हो जाता है। इस लिहाज से देखें तो अग्निपथ योजना समय की मांग है, लेकिन विरोध कर रहे युवाओं की भी कुछ चिंताएं सही लगती है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार देश में करीब डेढ़ लाख युवक सेना में भर्ती की लिखित परीक्षा की प्रतिक्षा कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने फिजीकल व स्वास्थ्य संबंधी टेस्ट पूरे कर लिए हैं। इन युवकों ने सेना में भर्ती की पूर्णकाल्कि 19 साल की सेवा की उम्मीद लगा रखी है और वे चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन मिलती रहे। अग्निपथ योजना में उनको भविष्य असुरक्षित लग रहा है। हालांकि सरकार ने अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ घोषणाएं की हैं, लेकिन आक्रोशित युवक संतुष्ट नहीं हैं। आक्रोश को खत्म करना जरूरी है और अब सरकार को देखना है कि वह क्या नया फैसला लेती है? फिर भी युवकों के राष्ट्र विरोधी आचरण को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

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