सुरक्षा से जुड़े बड़े अहम फैसले

तुर्की को यह विमान बेचेगा

सुरक्षा से जुड़े बड़े अहम फैसले

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन युद्ध ने साफ कर दिया कि रूस की आक्रामकता को देखते हुए सुरक्षा से जुड़े यह बड़े अहम फैसले लिए गए। अमेरिका अब एफ 35 लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन ब्रिटेन में तैनात करेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन युद्ध ने साफ कर दिया कि रूस की आक्रामकता को देखते हुए सुरक्षा से जुड़े यह बड़े अहम फैसले लिए गए। अमेरिका अब एफ 35 लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन ब्रिटेन में तैनात करेगा। तुर्की को यह विमान बेचेगा। जर्मनी और इटली में अत्याधुनिक हथियारों की तैनाती, रोमानिया और बाल्टिक देशों अतिरिक्त बलों की तैनाती होगी। स्पेन स्थित अपने नौसेनिक अड्डे में दो अतिरिक्त विध्वंसक पोत भी तैनात करेगा।  बीते सप्ताह वैश्विक कूटनीति के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जर्मनी के बैवेरियन अल्पास में जी-7 देशों का वार्षिक सम्मेलन हुआ, तो दूसरी ओर स्पेन की राजधानी मैड्रिड में अमेरिकानीत उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की वार्षिक बैठक संपन्न हुई। इन दोनों बैठकों के केंद्र बिंदु में यूक्रेन पर रूसी हमला प्रमुख रहा।  रूस को भौगोलिक राजनीतिक, आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए घेरने की रणनीति से जुड़े फैसले लिए गए। इससे साफ व्यक्त हो रहा है कि यूरोप में बजाए युद्ध के बादल छंटने के बल्कि इसके लंबा खिंचने के आसार बने हुए हैं। आशंकाएं व्यक्त की जा रही है कि यदि इस युद्ध ने आगे विस्तार ले लिया, तो पूरे विश्व की शांति और आर्थिक हालात खतरे से घिर जाएंगे। मामला तो उस समय और भी तनाव पूर्ण हो गया, जब जी-7 सम्मेलन दौरान ही रूसी सेना की ओर से यूक्रेन के प्रमुख शहर क्रेमेंनचुक के शॉपिंग माल पर एक बड़ा मिसाइली हमला हुआ। इसमें अठारह लोग मारे गए और 58 घायल हुए।

यही नहीं लिसिचांस्क पर हमले तेज कर दिए। इसे अमेरिका सहित विकसित और समृद्ध देशों ने युद्ध समाप्ति की बजाय रूसी आक्रामकता के संदेश के रूप में लिया। जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति सहित सभी नेताओं ने सर्वसम्मति से तय किया कि हम युद्ध प्रभावित यूक्रेन को वित्तीय, मानवीय, सैन्य और राजनयिक समर्थन जारी रखेंगे, जब तक कि रूस उस पर हमले जारी रखेगा। इस बैठक में रूसी सोने के आयात को प्रतिबंधित करने और रूसी तेल के लिए उनके और अन्य देशों द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमत पर अंकुश लगाने के फैसले लिए गए। मैड्रिड में आयोजित नाटो समिट में रूसी आक्रामकता को देखते हुए यूरोप में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने और अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित करने का ऐलान किया गया। दो नॉर्डिक देशों-स्वीडन और फिनलैंड को इस संगठन में शामिल करने की औपचारिक घोषणा की गई। अब इस संगठन के सदस्य देशों की संख्या बढ़कर बत्तीस होने जा रही है।

बैठक में लिए गए इन दो महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर अमेरिका में राष्ट्रपति की वैश्विक नेता के रूप में उभरती छवि की तारीफ हो रही है, तो वहीं यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि बाइडन के बाद उनके उत्तराधिकारी भी यह क्रम जारी रखेंगे। उनके नेतृत्व में नाटो के विस्तार और मजबूती देने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में लिया जा रहा है। तो दूसरी ओर रूस के लिए यह एक बड़ा झटका बताया जा रहा है। नाटो गठबंधन अब रूस के दरवाजे तक जा पहुंचा है। वहीं, इस संगठन के जरिए रूस को यह भी संदेश देने की कोशिश की गई है, यदि वह यूक्रेन पर हमला जारी रखेगा तो नाटो न सिर्फ  यूरोप में अपनी सैन्य मजबूती करेगा बल्कि अपने विस्तार के क्रम को जारी रखेगा। दोनों नॉर्डिक देशों को नाटो की सदस्यता को लेकर तुर्किये को यह आपत्ति थी कि उसके यहां सक्रिय विद्रोही कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) को यह पनाह देते हैं। यह संगठन तुर्किए की सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र कुर्द राज्य की मांग करता रहा है। बाद में अमेरिकी दबाव पर दोनों नॉर्डिक देशों में यह सहमति बनी कि वे अपने देश के घरेलू कानूनों में संशोधन कर इस संगठन को समर्थन नहीं देंगे। तब जाकर तुर्किए ने सदस्यता को लेकर अपने पूर्व फैसले पर यूटर्न लिया। जिसकी नाटो के महासचिव जेंस स्टोलटेनबर्ग ने पुष्टि की।  

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अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन युद्ध ने साफ कर दिया कि रूस के आक्रामकता को देखते हुुए सुरक्षा से जुड़े यह बड़े अहम फैसले लिए गए। अमेरिका अब एफ 35 लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन ब्रिटेन में तैनात करेगा। तुर्किए को यह विमान बेचेगा भी। जर्मनी और इटली में अत्याधुनिक हथियारों की तैनाती, रोमानिया और बाल्टिक देशों अतिरिक्त बलों की तैनाती होगी। स्पेन स्थित अपने नौसेनिक अड्डे में दो अतिरिक्त विध्वंसक पोत भी तैनात करेगा। 1949 में शीत युद्ध की शुरुआत में इस संगठन में केवल बारह सदस्य थे। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद 11 पूर्वी यूरोपीय राष्ट्र, जो मास्को के सैटेलाइट स्टेट हुआ करते थे और तीन सोवियत देश इस गठबंधन में शामिल हुए। ऐसे में सदस्य संख्या 26 हो गई थी। इसके बाद में एक-एक कर के यह संख्या 30 हो गई। अब यह आंकड़ा 32 हो जाएगा। नाटो के विस्तार को रूस अपने अस्तित्व के खतरे के रूप में देखता है। यूक्रेन युद्ध से पूर्व वर्ष 2008 में रूस तथा 2014 में क्रीमिया पर हमला कर चुका है। पुतिन ने इसी कारण यूक्रेन में ऑपरेशन की घोषणा की थी।

(ये लेखक के अपने विचार है)

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