मुर्मू का संबोधन

मुर्मू का संबोधनराष्ट्रपति भवन तक की अपनी यात्रा के बारे में बताया

मुर्मू का संबोधन

संयोग से हम जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभाल रही हैं।

द्रो पदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति पद की शपथ ग्र्रहण करने के बाद राष्ट्रपति के रूप में संसद भवन से अपने पहले संबोधन में जिस सहजता से अपनी बेहद मामूली पृष्ठभूमि और ओडिशा के एक छोटे से गांव से राष्ट्रपति भवन तक की अपनी यात्रा के बारे में जो बताया, उसके गहरे निहितार्थ हैं। गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू ने 1997 में तब राजनीति में कदम रखा था, जब देश ने आजादी की स्वर्ण जयंती मनाई थी और संयोग से हम जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभाल रही हैं। अपने संबोधन में उनका यह कहना बेहद महत्वपूर्ण है कि यह हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि गरीब घर, सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है। राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, भारत के हर गरीब की उपलब्धि है। मेरा चुना जाना सबूत है कि भारत में हर गरीब सपने भी देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। निश्चित ही उनके इतना कहने से ऐसे करोड़ों लोग अपना जुड़ाव महसूस करेंगे, जिन्हें आज भी दो वक्त की रोटी के लिए जूझना पड़ता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में जनजाति समुदायों के साथ ही दलितों, वंचितों और महिलाओं का भी जिक्र किया, जिससे समझा जा सकता है कि उनके भीतर इन वर्गो के प्रति गहरी संवेदना है। द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, जो आज भी बेहद उपेक्षित होकर जीवन जीने को मजबूर है।

आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी आदिवासी समाज जंगलों में प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जी रहा है। यहां विशेष रूप से गौरतलब है कि मुर्मू ने झारखण्ड की राज्यपाल के रूप में आदिवासियों की भूमि का उल्लंघन करने वाले विधेयक को लौटा दिया था। इस तरह से देखें, तो सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और जेंडर के उन सभी स्तरों का उनके पास निजी अनुभव है, जहां बड़े प्रयासों की जरूरत है। राष्ट्रपति के तौर पर यह अनुभव उनके काफी काम आएगा। इसके साथ ही उनका यह अनुभव देश के लोगों के लिए भी एक आश्वासन है कि सर्वोच्च पद पर एक ऐसी हस्ती आसीन है, जो उनके दुख-दर्द को अच्छी तरह जानती समझती है। पिछले कुछ दशकों में हमारा लोकतंत्र उन सभी लोगों को, तमाम समुदायों को मुख्यधारा में, बल्कि केन्द्र में ले आया है, जो कभी सत्ता संरचना के हाशिये पर हुआ करते थे।

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