फिल्म समीक्षा : कर्म से डकैत, धर्म से आजाद है शमशेरा

क्रांति पिता ने शुरू की बेटा उसकी इबारत लिखता है

फिल्म समीक्षा : कर्म से डकैत, धर्म से आजाद है शमशेरा

कहानी शुरू होती है फ्लैश बैक के शमशेरा से। निडर शमशेरा अपने गिरोह के साथ अंग्रेजों से लोहा लेता है और अंग्रेज उससे खौफ खाते है कि खूंखार चालक लुटेरा उन्हे पता नही कब लूट लेगा।

जयपुर। कर्म से डकैत धर्म से आजाद एक देशभक्त, एक क्रांतिकारी, एक विरासत, एक शब्द में कहूं शमशेरा। पिता-पुत्र की कहानी, दोनों एक-दूसरे से अलग, लेकिन जज्बा एक। बल्ली शमशेरा का प्रतिरूप बन उसी अंदाज में जीता है। 1871 का परिवेश अंग्रेजों के जुल्म, पिताकी बगावत बेटे का जुनून बन जाती है, जो क्रांति पिता ने शुरू की बेटा उसकी इबारत लिखता है। कहानी शुरू होती है फ्लैश बैक के शमशेरा से। निडर शमशेरा अपने गिरोह के साथ अंग्रेजों से लोहा लेता है और अंग्रेज उससे खौफ खाते है कि खूंखार चालक लुटेरा उन्हे पता नही कब लूट लेगा। अंग्रेज उसे पकड़ने के लिए दारोगा शुद्ध सिंह को बुलाते है , फ्लैश बैक खत्म होता है। 25 साल बाद उसके बेटा बल्ली बड़ा हो जाता है। जैसे ही उसे उसका मकसद मिलता है पिता की तरह अमीरों को लूट गरीबों में बांट कर वो डकैत बन कर उनकी मौत का बदला लेता है। पूरी कहानी एक रिवेंज ड्रामा है, जिसे एक्शन, कॉमेडी, रोमांस, इमोशन और देशभक्ति से बुना है। यश चोपड़ा बैनर की ठग ऑफ हिंदुस्तान कुछ ऐसी ही फिल्म थी तो ये उसका प्रिक्वल लगता है ,कहानी वही पुरानी है जैसे क्रांति फिल्म देख के लिखी गई हो, लेकिन फिल्मांकन अच्छा है पटकथा को तेज बनाने की नाकाम कोशिश की है। अब बात करते है। अभिनय की रणबीर डबल रोल में हैं, जहां शमशेरा के दबंग और खुंकार मिजाज में आजाद डकैत लगे हैं।

सोना वाणी कपूर बल्ली की प्रेमिका के साथ एक डांसर है, गांव-गांव नाचती है, लेकिन अभिनय उन्हें आता ही नहीं है। इस फिल्म की सबसे खास बामें त शुद्ध सिंह संजय दत्त का वो खलनायक वाला किरदार है, जो साधु के भेष में बन के पूरी फिल्म को रोचक बना देता है। सौरभ शुक्ला , रोनित रॉय , पियूष मिश्रा सब ने अच्छा काम किया है लेकिन बल्ली की गैंग का चूहा किरदार है। संगीत मिथुन का ठीक ठाक है। बैकग्राउंड म्यूजिक शानदार है, लोकेशन, सेट, कॉस्ट्यूम बेहतरीन है, छायाकंन अनय गोस्वामी का कमाल है, लेकिन फिल्म की एडिटिंग बड़ा माइनस प्वाइंट है। निर्देशन करण मल्होत्रा का ठीक है, लेकिन कहानी में पकड़ नहीं हैं। यह कहानी अब के दौर में दर्शकों को कितना लुभाएगी दर्शक ही तय करेंगे।

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