कम नहीं हैं विमानन क्षेत्र की चुनौतियां  

सवाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उठाया गया 

कम नहीं हैं विमानन क्षेत्र की चुनौतियां  

हाल ही में एयर इंडिया की सर्विस को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया।

हाल ही में एयर इंडिया की सर्विस को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। इस विवाद के पीछे वजह यह है कि अबकी बार सवाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा उठाया गया है। यह पहली बार नहीं है, जब विमान सेवाओं पर सवाल उठाया गया हो। इससे पहले भी अनेकों बार देश में खराब होती विमान सेवाओं के यात्री लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं और विमानन सर्विस पर सवाल उठाते रहें हैं। ताजा मामला मौजूदा सरकार के वरिष्ठ मंत्री का है, इसलिए शायद यह मामला ज्यादा चर्चा में आ गया है। आज देखने में आता है कि विमानों में भी हालत कमोबेश किसी बस जैसे हैं। शिवराज सिंह चौहान के बाद अब पंजाब बीजेपी के प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी चंडीगढ़-दिल्ली उड़ान की टूटी सीटों की तस्वीरें साझा की हैं। पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी हाल ही में फ्लाइट की टूटी हुई सीटों की तस्वीरें शेयर कीं। यह फ्लाइट उन्होंने जनवरी में ली थी। जाखड़ ने बताया कि 27 जनवरी की फ्लाइट में उन्होंने टूटी सीटों के बारे में केबिन क्रू को बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एयरलाइन ने जवाब दिया था कि उनकी फ्लाइट्स की सीटों में निकलने वाले कुशन होते हैं। हमारे लिए यात्रियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है।

 जाखड़ ने इंडिगो और एयर इंडिया पर चलता है रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपील की कि दोनों एयरलाइन्स उड़ानों के सुचारू संचालन के साथ-साथ सुरक्षा मानकों से समझौता न करें। पाठकों को यह भी बताता चलूं कि जाखड़ का यह बयान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एयर इंडिया की शिकायत के एक दिन बाद आया है। चौहान को भोपाल से दिल्ली की हालिया उड़ान में टूटी हुई सीट मिली थी। दरअसल केंद्रीय मंत्री को भोपाल से दिल्ली जाते समय एयर इंडिया की फ्लाइट में टूटी सीट मिली तो इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा था कि क्या यह यात्रियों से चीटिंग नहीं है, इसके बाद एयर इंडिया ने भी सोशल मीडिया पर चौहान से खेद प्रकट किया और यह वादा किया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। कृषि मंत्री ने एक्स पर लिखा मैंने विमान कर्मियों से पूछा कि खराब सीट थी तो आवंटित क्यों की, उन्होंने बताया कि प्रबंधन को पहले सूचित कर दिया था कि ये सीट ठीक नहीं है, इसका टिकट नहीं बेचना चाहिए। ऐसी और भी सीटें हैं।

केंद्रीय मंत्री की एक्स पर पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई और लोगों ने रेल और बस सेवाओं में महसूस की जाने वाली अनेक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। यहां तक कि अनेक लोगों ने एयर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने से सरकार के फैसले पर भी सवाल खड़े कर दिए। पूरा पैसा वसूलने के बाद यात्रियों को अच्छी सीट मिलनी चाहिए, क्यों कि यदि ऐसा नहीं होता है तो यात्रियों को यात्रा के दौरान अनेक प्रकार की समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। विशेषकर जब कोई यात्री लंबी यात्रा करता है तो उसे बहुत परेशान होना पड़ता है। इस संदर्भ में स्वयं कृषि मंत्री ने यह बात लिखी है कि यात्रा के दौरान मुझे बैठने में कष्ट की चिंता नहीं है, लेकिन यात्रियों से पूरा पैसा वसूलने के बाद उन्हें खराब और कष्टदायक सीट पर बैठाना अनैतिक है। यहां प्रश्न यह उठता है कि जब विमान में यात्रियों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ रही है तो यातायात के अन्य साधनों की परिकल्पना बखूबी की जा सकती है। विदित हो कि प्रयोगकर्ता विमान में यात्रा के समय यातायात के किसी भी अन्य साधनों की तुलना में कहीं अधिक या एक बड़ी धनराशि चुकाता है, ऐसे में क्या उसे सुविधाएं प्राप्त करने का हक या अधिकार नहीं है, यह प्रश्न यहां एक यक्ष प्रश्न है।  एविएशन की नियामक संस्था डीजीसीए ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल एयर इंडिया को नोटिस भेज दिया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में नियामक निकाय है, जो मुख्य रूप से सुरक्षा मुद्दों से निपटता है। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि डीजीसीए की ओर से वर्ष 2022 में जारी डायरेक्टिव में यह स्पष्ट तौर पर कहा जा चुका है कि एयरलाइन कोई ऐसी सीट नहीं बेचेगा जो सर्विस के लायक न हो। जानकारी के अनुसार क्रू मेंबर्स ने मैनेजमेंट को खराब सीटों के बारे में जानकारी भी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद उन सीटों के लिए टिकट बुक की गई। वास्तव में प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए था। बहरहाल यह भी एक आम सोच रही है कि पब्लिक सेक्टर की इस कंपनी को प्राइवेट हाथों में देने से सबकुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन सिर्फ पब्लिक से प्राइवेट में आ जाने भर से किसी कंपनी की बेहतरी सुनिश्चित नहीं हो जाती। आज विमानन क्षेत्र में अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। 

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-सुनील कुमार महला
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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