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जंगलों की कीमत पर भविष्य के सपने

जंगलों की कीमत पर भविष्य के सपने भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास की तेज रफ्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन साधने की कोशिश

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन साधने की कोशिश पिछले सप्ताह ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन, आठ बहुपक्षीय समझौतों के साथ संपन्न हुआ।
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राज काज में क्या है खास, जानें

राज काज में क्या है खास, जानें सूबे में इन दिनों कुछ बड़े साहब लोगों पर भी छपास रोग चढ़ा हुआ है।
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जानलेवा बनता जा रहा बढ़ता तापमान

जानलेवा बनता जा रहा बढ़ता तापमान बढ़ता तापमान अब जानलेवा बनता जा रहा है। देखा जाए तो मौजूदा दौर में देश हीटवेव की भीषण चपेट में है।
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राज काज में क्या है खास, जानें

राज काज में क्या है खास, जानें सूबे की राजनीति इन दिनों पूरी तरह भक्तिकाल में प्रवेश कर चुकी है।
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प्राकृतिक खेती से बेहतर होगी धरती की सेहत

प्राकृतिक खेती से बेहतर होगी धरती की सेहत भारत की आत्मा गांवों में और गांवों की आत्मा किसान में बसती है।
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ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ती महंगाई

ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ती महंगाई विश्व राजनीति में जब भी युद्ध या तनाव बढ़ता है, उसका असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।
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कैसे बचेगा हमारा राष्ट्रीय पशु बाघ ?

कैसे बचेगा हमारा राष्ट्रीय पशु बाघ ? देश में आज बाघ संकट के दौर से गुजर रहा है। कारण इस साल जनवरी से अब तक देश में 58 बाघों की मौत हो चुकी है।
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चुनावी सर्वेक्षणों के अनुरुप रहे नतीजे

चुनावी सर्वेक्षणों के अनुरुप रहे नतीजे हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान देशभर की राजनीतिक निगाहें मुख्यतः पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई थीं।
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विजय, बालेन और केजरीवाल : दक्षिण एशिया में आउटसाइडर राजनीति का नया चेहरा

विजय, बालेन और केजरीवाल : दक्षिण एशिया में आउटसाइडर राजनीति का नया चेहरा सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर दक्षिण एशिया में आउटसाइडर राजनीति की बहस तेज की। पार्टी ने पहली बार में सत्ता हासिल की। विजय की तुलना अरविंद केजरीवाल और बालेंद्र शाह से हो रही।
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राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है साहित्य

राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है साहित्य आतंकवाद, राष्ट्रवाद और उपभोक्तावाद के शोर में आजकल साहित्य का उद्देश्य एक गहरे संकट में है।
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राज काज में क्या है खास, जानें

राज काज में क्या है खास, जानें हमारे सूबे के ब्यूरोक्रेट्स भी कमाल के हैं और राज के खास हों, तो फिर कहना ही क्या, उनके पैर जमीन पर कम ही टिकते हैं।
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